पटना/नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद Nitish Kumar के संभावित दिल्ली दौरे को लेकर राजधानी में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उनके लिए नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है और साथ ही उच्च स्तरीय Z+ सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस कदम को उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। सुनहरी बाग में मिला हाई-प्रोफाइल आवास दिल्ली के प्रतिष्ठित सुनहरी बाग इलाके में उन्हें बंगला नंबर 9 आवंटित किया गया है। यह ‘टाइप-8’ श्रेणी का आलीशान सरकारी आवास है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। आमतौर पर ऐसे आवास वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को ही दिए जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि उनकी स्थिति राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत बनी हुई है। संसद सत्र में भागीदारी की संभावना नीतीश कुमार का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे संसद के विशेष सत्र में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे में उनके लिए पहले से किए गए ये इंतजाम कई राजनीतिक संकेत भी दे रहे हैं। Z+ सुरक्षा का कड़ा घेरा दिल्ली में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF को सौंपी गई है। Z+ सुरक्षा के तहत करीब 58 सुरक्षाकर्मी उनके चारों ओर तैनात रहेंगे। • 10 सशस्त्र गार्ड आवास पर • 6 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) हर समय साथ • 24 जवान एस्कॉर्ट वाहनों में इसके अलावा एक वरिष्ठ अधिकारी पूरी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेगा। हर गतिविधि पर कड़ी नजर आवास पर आने-जाने वालों की जांच के लिए विशेष टीम तैनात की गई है। निगरानी के लिए वॉचर्स और वाहनों के लिए प्रशिक्षित ड्राइवर भी मौजूद रहेंगे। कुल मिलाकर उनके दिल्ली प्रवास को लेकर हर स्तर पर सुरक्षा और सुविधाओं की पुख्ता तैयारी की गई है।
Bihar में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और राज्य इस समय दो अलग-अलग मौसमीय परिस्थितियों का सामना कर रहा है। अगले 48 घंटे लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आएंगे, जबकि 19 अप्रैल से भीषण गर्मी का दौर शुरू होने की चेतावनी दी गई है। सीमांचल में बारिश और आंधी से राहत मौसम विभाग के अनुसार सीमांचल क्षेत्र–अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया–में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में बादल और बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। दक्षिण बिहार में बढ़ता तापमान दूसरी ओर दक्षिणी जिलों–रोहतास, भभुआ (कैमूर) और औरंगाबाद–में पछुआ हवाओं के कारण तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। शुष्क हवाओं ने गर्मी को और तीखा बना दिया है, जिससे दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। 19 अप्रैल से लू का कहर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 18 अप्रैल से ही कई जिलों में लू की शुरुआत हो सकती है, जो 19 अप्रैल से और तेज हो जाएगी। रेड अलर्ट वाले प्रमुख जिले: बक्सर रोहतास कैमूर भोजपुर औरंगाबाद गया पटना इन क्षेत्रों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है। पूरवा बनाम पछुआ हवा का असर इस समय बिहार में पूरवा (पूर्वी) और पछुआ (पश्चिमी) हवाओं के बीच खींचतान जारी है। जहां पूरवा हवा चल रही है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम है, जबकि पछुआ हवा वाले इलाकों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मौसम देखने को मिल रहा है। क्या रखें सावधानियां आने वाले दिनों में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है– दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें धूप में निकलते समय सिर और शरीर को ढककर रखें
पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। इससे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार, अभी भाजपा के कई बड़े नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी, बिहार में कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है। फिलहाल सरकार का कामकाज मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav संभाल रहे हैं। 36 मंत्रियों की सीमा संवैधानिक नियमों के तहत बिहार में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में: जातीय संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व राजनीतिक समीकरण इन सभी को साधना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है नए चेहरों को मौका देकर सरकार संदेश देना चाहती है जवाबदेही और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा का बढ़ सकता है दबदबा इस बार कैबिनेट में एक बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि भाजपा की हिस्सेदारी बढ़े। कई अहम विभाग अभी मुख्यमंत्री के पास हैं विस्तार के बाद इनका बंटवारा सहयोगी दलों में होगा इससे सत्ता संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। सहयोगी दलों की भी अहम भूमिका मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले कुछ नाम सहयोगी दलों पर निर्भर करेंगे: Upendra Kushwaha अपने खेमे से नाम तय करेंगे Chirag Paswan के पास LJP (रामविलास) कोटे का फैसला रहेगा बिहार कैबिनेट विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा। इससे यह तय होगा कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी और किन चेहरों पर सरकार भरोसा जताती है।
पटना: 17 अप्रैल 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने आज के रेट अपडेट किए हैं। इस बार कीमतों में मिला-जुला असर देखने को मिला है, लेकिन बिहार के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतों ने बढ़त दर्ज की है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। बिहार में बढ़ी कीमतें, आम आदमी पर असर राज्य के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल के दाम बढ़े हुए नजर आए: Patna: ₹105.54 (+0.31) Bhagalpur: ₹106.66 (+0.64) Muzaffarpur: ₹106.10 (+0.32) हालांकि, Gaya में हल्की राहत मिली है, जहां कीमत ₹106.25 (-0.03) रही। देश के बड़े शहरों में क्या है हाल? देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतों पर नजर डालें: Mumbai: ₹103.54 (+0.04) Delhi: ₹94.77 (कोई बदलाव नहीं) Kolkata: ₹105.41 (स्थिर) Chennai: ₹100.80 (-0.10) Bengaluru: ₹102.92 (-0.07) डीजल की कीमतों में मिली राहत डीजल के मोर्चे पर आज थोड़ी राहत देखने को मिली है: Mumbai: ₹90.03 (स्थिर) Delhi: ₹87.67 (स्थिर) Patna: ₹91.78 (+0.29) Bhagalpur: ₹92.81 (+0.60) Chennai: ₹92.39 (-0.09) क्यों बदलते रहते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? भारत में ईंधन की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाए गए वैट (VAT) का भी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। घर बैठे ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट आप SMS के जरिए भी अपने शहर का ताजा फ्यूल रेट जान सकते हैं: Indian Oil: “RSP” लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें
पटना, एजेंसियां। पटना में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक्शन मोड में नजर आए। शपथ लेने के अगले ही दिन गुरुवार सुबह वे सचिवालय पहुंचे और सभी विभागों के प्रधान सचिवों के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक को सरकार की प्राथमिकताओं और कार्यशैली तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक तेजी और तालमेल पर जोर सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने, विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और प्राथमिकता वाले मुद्दों पर फोकस करने को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब फैसले केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका असर जमीन पर भी दिखना चाहिए। नई सरकार का पहला बड़ा संदेश बुधवार को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से ही इस बात पर नजर थी कि नई सरकार किस दिशा में काम करेगी। सचिवालय में हुई यह बैठक उसी का पहला बड़ा संकेत मानी जा रही है। इससे साफ हो गया है कि सरकार शुरुआत से ही प्रशासनिक मोर्चे पर सक्रिय रहना चाहती है। सीमित मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी फिलहाल राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है, जिससे सरकार का पूरा कामकाज सीमित नेताओं के हाथ में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह समेत 29 विभागों की जिम्मेदारी है। वहीं जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary को 10 और Bijendra Yadav को 8 विभाग सौंपे गए हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद होगा बदलाव सरकार ने संकेत दिया है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का पुनर्वितरण किया जाएगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री ही सभी विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे। शुरुआती दिनों में बढ़ी गतिविधि नई सरकार के शुरुआती दिन प्रशासनिक बैठकों, विभागीय समीक्षा और जिम्मेदारियों के बंटवारे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट है कि सरकार कामकाज में तेजी लाने और नतीजे दिखाने के लिए दबाव में है।
बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के साथ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल ली है। एनडीए विधायक दल की बैठक में Nitish Kumar ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी। हालांकि सत्ता तक पहुंचने का यह सफर जितना ऐतिहासिक है, आगे का रास्ता उतना ही कठिन नजर आता है। सवाल यह है कि क्या सम्राट चौधरी इस “कांटों के ताज” को संभालकर इसे “सुनहरे मौके” में बदल पाएंगे? भ्रष्टाचार: सबसे बड़ी चुनौती बिहार में भ्रष्टाचार लंबे समय से एक जड़ जमाई समस्या रही है। सरकारें बदलीं, लेकिन सिस्टम में पारदर्शिता पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी। Samrat Choudhary के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे “जीरो टॉलरेंस” नीति को जमीन पर उतारें। सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी रोकना CSR फंड और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक सिस्टम तैयार करना अगर इसमें सफलता मिलती है, तो उनकी सरकार की साख मजबूत होगी, वरना यह मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बनेगा। कानून-व्यवस्था: ‘सुशासन’ की असली परीक्षा Nitish Kumar के शासन की सबसे बड़ी पहचान कानून-व्यवस्था में सुधार रही थी, लेकिन हाल के वर्षों में अपराध के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी। हत्या, लूट और महिला अपराध पुलिस व्यवस्था पर सवाल निवेश और विकास पर असर सम्राट चौधरी पहले गृह विभाग संभाल चुके हैं, ऐसे में अब उनसे ठोस सुधार की उम्मीद और भी बढ़ गई है। अगर कानून-व्यवस्था सुधरती है तो बिहार में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन विफलता NDA की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य: ढांचा बनाम गुणवत्ता बिहार में स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का ढांचा तो बढ़ा है, लेकिन गुणवत्ता अब भी बड़ी चुनौती है। शिक्षकों और डॉक्टरों की भारी कमी विश्वविद्यालयों की गिरती साख सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव Samrat Choudhary के सामने यह अवसर है कि वे सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें। अगर इसमें सुधार होता है, तो राज्य का “ह्यूमन कैपिटल” मजबूत होगा और पलायन कम हो सकता है। विवादों की छाया और विपक्ष का हमला मुख्यमंत्री बनते ही सम्राट चौधरी के पुराने विवाद भी सुर्खियों में आ गए हैं। कम उम्र में मंत्री बनने का मामला शैक्षणिक डिग्री पर सवाल विपक्ष, खासकर Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली आरजेडी, इन मुद्दों को लगातार उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। ऐसे में सम्राट के लिए सबसे बड़ा जवाब “काम” ही होगा, जिससे जनता का ध्यान विवादों से हट सके। नीतीश की विरासत: सबसे बड़ी कसौटी 20 साल तक बिहार की राजनीति में Nitish Kumar ने “सुशासन” की जो छवि बनाई, वह किसी भी नए मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है। भ्रष्टाचार पर व्यक्तिगत आरोपों का अभाव प्रशासनिक नियंत्रण विकास और कानून-व्यवस्था का संतुलन सम्राट चौधरी को न सिर्फ इस विरासत को बनाए रखना होगा, बल्कि उससे आगे भी बढ़ना होगा। मौका भी, जोखिम भी Samrat Choudhary के सामने यह एक “डबल एज्ड स्वॉर्ड” की तरह है– मौका: नई छवि गढ़ने का अवसर केंद्र और राज्य के तालमेल से विकास युवा नेतृत्व के रूप में पहचान जोखिम: अपेक्षाओं पर खरा न उतरना विपक्ष के हमलों में घिरना NDA की छवि पर असर बिहार की सत्ता संभालना जितना बड़ा अवसर है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। अगर Samrat Choudhary भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं में सुधार कर पाते हैं, तो वे राज्य के राजनीतिक इतिहास में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। लेकिन अगर वे इन चुनौतियों से पार नहीं पा सके, तो यह “सुनहरा मौका” राजनीतिक जोखिम में भी बदल सकता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में सरकार बदल गई है। यहां भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने सत्ता संभाल ली है। उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव वाला रहा है। उन्हें बिहार में सबसे कम उम्र का मंत्री बनने का भी गौरव प्राप्त है। वह राबड़ी देवी की सरकार थी, जिसमें वह सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। समाजवादी नेता के पुत्र है वरिष्ठ समाजवादी नेता शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट ने शुरुआती दौर से ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कम समय में अपनी मजबूत पहचान बनाई। सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद से की। इसके बाद वे जदयू और हम (से) होते हुए 2018 में भाजपा में शामिल हुए। उन्हें भाजपा में लाने का श्रेय सुशील मोदी को जाता है। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। एनडीए सरकार में भी मंत्री बने साल 2020 में एनडीए सरकार बनने पर सम्राट चौधरी को पंचायती राज मंत्री बनाया गया। 2022 में गठबंधन टूटने के बाद उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली, जहां उन्होंने अपने आक्रामक तेवर से सरकार को कई बार घेरा। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने उनके प्रदर्शन को देखते हुए मार्च 2023 में उन्हें संजय जायसवाल की जगह बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत और धारदार बनाया। खासकर राजद और उसके नेतृत्व पर उनके हमलावर रुख ने उन्हें एक प्रभावी नेता के रूप में स्थापित किया। जनवरी 2024 में एनडीए की सरकार बनने पर उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया और वित्त एवं वाणिज्यकर विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने बजट में कई अहम घोषणाएं कीं। लोकसभा चुनाव में सक्रिय रहे पिछले लोकसभा चुनाव में भी वह काफी सक्रिय रहे। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की। आक्रामक तेवर के लिए मशहूर नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उनके नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 89 सीटें जीतीं। उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाया गया। साथ ही, एनडीए के इतिहास में पहली बार गृह विभाग मुख्यमंत्री से हटाकर उन्हें सौंपा गया। सम्राट चौधरी अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। नीतीश कुमार के विरोध में उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से मुरेठा बांधा था, जो काफी चर्चा में रहा। हालांकि, जनवरी 2024 में एनडीए सरकार बनने के बाद उन्होंने अयोध्या में मुंडन कर मुरेठा उतार दिया। महज आठ साल में ही उन्होंने बीजेपी के सभी बड़े नेताओं का भरोसा जीत लिया, जिसका परिणाम आज सामने है। वह बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गये हैं।
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। इसके साथ ही वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। समारोह में Nitish Kumar, J. P. Nadda, Chirag Paswan समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिसने इस बदलाव के राजनीतिक महत्व को और भी बढ़ा दिया। शपथ से पहले आस्था, फिर सत्ता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले Samrat Choudhary पटना के राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दो डिप्टी CM के साथ बना संतुलन नई सरकार में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है– Bijendra Prasad Yadav Vijay Kumar Chaudhary दोनों नेताओं ने राज्यपाल के समक्ष शपथ लेकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। यह फैसला एनडीए के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। “नीतीश से सीखा, अब आगे बढ़ाएंगे बिहार” शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Samrat Choudhary ने कहा कि: उन्हें पार्टी ने राज्य की सेवा का अवसर दिया है वे लगभग 30 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं उन्होंने Nitish Kumar के साथ काम करते हुए प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया उन्होंने यह भी कहा कि “समृद्ध बिहार” का जो सपना देखा गया है, उसे नई सरकार और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। बीजेंद्र यादव: अनुभव और निरंतरता का चेहरा डिप्टी सीएम बने Bijendra Prasad Yadav बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। सुपौल से लगातार नौवीं बार विधायक 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचे जेपी आंदोलन से जुड़ाव संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ उनकी नियुक्ति से सरकार को स्थिरता और अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। विजय चौधरी: ‘संकटमोचक’ की नई जिम्मेदारी दूसरे डिप्टी सीएम Vijay Kumar Chaudhary को Nitish Kumar का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कई अहम विभागों का अनुभव प्रशासनिक मामलों में दक्ष राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे सरकार के भीतर तालमेल और संकट प्रबंधन की अहम कड़ी साबित होंगे। नई सरकार के सामने चुनौतियां और उम्मीदें नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देना शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार बुनियादी ढांचे का विस्तार कानून-व्यवस्था को मजबूत रखना वहीं, जनता को उम्मीद है कि नई टीम “डबल इंजन” सरकार के जरिए विकास की रफ्तार तेज करेगी। एनडीए का नया राजनीतिक संदेश इस शपथ ग्रहण के साथ यह साफ संदेश गया है कि: भाजपा अब बिहार में नेतृत्व की भूमिका में है जेडीयू के अनुभवी नेताओं को सरकार में मजबूत स्थान दिया गया है गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान दिया गया है बिहार में सत्ता का यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, अनुभव और संतुलन का नया अध्याय है। Samrat Choudhary के नेतृत्व में और Bijendra Prasad Yadav व Vijay Kumar Chaudhary के अनुभव के साथ अब नजर इस बात पर होगी कि यह नई सरकार राज्य को विकास और स्थिरता के नए रास्ते पर कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।
पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब वरिष्ठ जेडीयू नेता Vijay Kumar Chaudhary ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहीं। इस नई सियासी तस्वीर में एक तरफ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर Nitish Kumar के करीबी और भरोसेमंद सहयोगी विजय चौधरी को डिप्टी सीएम की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश के भरोसेमंद को मिली कमान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि Nitish Kumar ने सरकार के संतुलन और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अपने सबसे अनुभवी नेता को आगे किया है। शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Vijay Kumar Chaudhary भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी राजनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व में रही है और यह जिम्मेदारी उनके विश्वास का परिणाम है। अनुभव और प्रशासनिक पकड़ विजय चौधरी: बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं जटिल प्रशासनिक मामलों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं इसी कारण उन्हें सरकार का “क्राइसिस मैनेजर” भी कहा जाता है। नई सरकार में क्या होगी भूमिका? नई सरकार में Vijay Kumar Chaudhary की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बीजेपी नेतृत्व और जेडीयू के बीच तालमेल बैठाना प्रशासनिक फैसलों में स्थिरता बनाए रखना विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करना विश्लेषकों का मानना है कि जहां Samrat Choudhary के पास ऊर्जा है, वहीं विजय चौधरी के पास अनुभव का मजबूत आधार है। विकास पर रहेगा फोकस डिप्टी सीएम बनने के बाद विजय चौधरी ने संकेत दिए कि सरकार: शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान देगी “न्याय के साथ विकास” की नीति को आगे बढ़ाएगी एनडीए सरकार का नया संतुलन इस शपथ के साथ बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। Vijay Kumar Chaudhary की नियुक्ति से यह संदेश गया है कि जेडीयू अब भी सरकार में मजबूत भूमिका निभा रही है। बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि रणनीति और संतुलन का नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय चौधरी अपने अनुभव के दम पर सरकार को कितनी मजबूती देते हैं और राज्य के विकास को नई दिशा कैसे देते हैं।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। पटना स्थित लोक भवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दो डिप्टी सीएम ने भी ली शपथ सम्राट चौधरी के साथ जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बीजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य में नई एनडीए सरकार का औपचारिक गठन हो गया है। शपथ से पहले मंदिर में पूजा-अर्चना शपथ लेने से पहले सम्राट चौधरी पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही उनकी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। समारोह में दिग्गज नेताओं की मौजूदगी शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में मौजूद रहे। राजनीतिक बदलाव का नया अध्याय सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। यह राज्य में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का महत्वपूर्ण चरण है, जिससे विकास और प्रशासनिक दिशा में बदलाव की उम्मीदें जताई जा रही हैं।
पटना, एजेंसियां। आज सम्राट चौधरी सुबह 11 बजे बिहार के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह लोकभवन में आयोजित किया गया है, जहां उनके साथ जदयू के विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे।शपथ से पहले सम्राट चौधरी पंचमुखी हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे, जिसके बाद वे राजभवन जाएंगे। उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है और उन्हें मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है। सम्राट चौधरी के शपथ लेते ही वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन जाएंगे। यह राज्य में भाजपा नेतृत्व वाली पहली सरकार होगी। इससे पहले नीतीश कुमार ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। करीब 20 वर्षों तक राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने के बाद अब उनके राज्यसभा जाने की चर्चा है।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी बिहार के नए CM होंगे। उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है। NDA की बैठक के बाद इसकी औपचारिक घोषणा हो जाएगी। कल 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथग्रहण समारोह होगा। इसके साथ ही बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री होगा। नीतीश युग का अंतः इससे पहले आज नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। वे सम्राट चौधरी और विजय चौधरी के साथ एक ही गाड़ी से राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे के बाद उन्होंने X पर लिखा- ‘अब नई सरकार यहां का काम देखेगी। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग रहेगा। आगे भी बहुत अच्छा काम होगा, बिहार बहुत आगे बढ़ेगा।’
पटना: Bihar में नई सरकार के गठन से पहले ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के करीबी माने जाने वाले कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है। क्या है पूरा मामला: केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर बिहार कैडर के कई IAS और IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाया पहली सूची में मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों के नाम शामिल दूसरी सूची भी जल्द जारी होने की संभावना किन अधिकारियों को मिली केंद्रीय जिम्मेदारी: 2003 बैच के IAS Anupam Kumar को ऊर्जा मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी बनाया गया उनकी पत्नी IAS Pratima S Verma को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मिली IAS Vandana Preyasi को उर्वरक विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया IPS राकेश राठी और IAS श्रवनन एम को भी केंद्र भेजा गया इस्तीफे से पहले बड़ा कदम Nitish Kumar 14 अप्रैल को दोपहर 3 बजे इस्तीफा देने वाले हैं 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन की संभावना इससे पहले ही करीबी अफसरों का केंद्र जाना सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय क्यों अहम है यह फेरबदल: नई सरकार के गठन से पहले प्रशासनिक ढांचे में बदलाव नीतीश कुमार के भरोसेमंद अधिकारियों का राज्य से बाहर जाना भविष्य की प्रशासनिक कार्यशैली पर असर की संभावना केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को लेकर नई दिशा आगे क्या: अधिकारियों की दूसरी सूची जल्द जारी हो सकती है नई सरकार बनने के बाद और भी प्रशासनिक बदलाव संभव नौकरशाही में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की उम्मीद बिहार में राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। नीतीश कुमार के इस्तीफे से पहले उनके करीबी अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य की प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पटना: Bihar की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar आज अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद एनडीए गठबंधन नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला करेगा। सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। Sanjay Jha, Lalan Singh और Vijay Kumar Chaudhary मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। वहीं उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary भी सीएम हाउस पहुंचे। इसके बाद नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी एक ही गाड़ी से बाहर निकलते देखे गए, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। दिनभर का पूरा कार्यक्रम: सुबह 11 बजे: नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की अंतिम बैठक दोपहर 2 बजे: एक अणे मार्ग स्थित आवास पर JDU विधायक दल की बैठक दोपहर 3 बजे: राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे शाम 4 बजे: एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला बुधवार सुबह 11 बजे: नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण कैबिनेट की आखिरी बैठक सुबह 11 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक मौजूदा सरकार के कार्यकाल की अंतिम औपचारिक बैठक रही। इसके बाद एनडीए के सभी घटक दल–JDU, BJP, HAM, RLJP और RLM–अपने-अपने विधायकों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। 145 दिन का कार्यकाल Nitish Kumar ने 20 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी 14 अप्रैल 2026 को इस्तीफा देने पर कार्यकाल 145 दिन का रहेगा यह उनका दूसरा सबसे छोटा कार्यकाल होगा इससे पहले 2000 में मात्र 7 दिन में इस्तीफा देना पड़ा था NDA बैठक में तय होगा नया चेहरा शाम 4 बजे होने वाली एनडीए की संयुक्त बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इस बैठक में भाजपा की ओर से Shivraj Singh Chouhan पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे और उनकी निगरानी में फैसला लिया जाएगा। आगे क्या नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण बुधवार सुबह 11 बजे राजभवन में होगा। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार का औपचारिक गठन पूरा हो जाएगा। राजनीतिक मायने मुख्यमंत्री आवास पर लगातार बैठकों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है नीतीश और सम्राट का एक साथ दिखना कई संकेत दे रहा है अब सबकी नजरें एनडीए बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के अगले मुख्यमंत्री का नाम तय होगा बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की कमान अगले दौर में किसके हाथ में होगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अपने 20 साल लंबे कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। आज उनकी अध्यक्षता में अंतिम कैबिनेट बैठक होगी, जिसके बाद वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। NDA की बैठकों में तय होगा नया मुख्यमंत्री दोपहर 3 बजे भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे NDA विधायक दल की बैठक में औपचारिक मुहर लगेगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है। सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे नए मुख्यमंत्री की रेस में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जातीय समीकरण और पार्टी नेतृत्व के भरोसे के कारण उनका दावा मजबूत माना जा रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज नई सरकार में मंत्रियों के चयन को लेकर भी चर्चा तेज है। मौजूदा सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों को दोबारा मौका मिल सकता है, जबकि कुछ “नॉन-परफॉर्मिंग” चेहरों को हटाए जाने की संभावना है। वहीं बीजेपी अपने कोटे से नए चेहरों को शामिल कर सकती है। निशांत कुमार को लेकर चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पटना में बढ़ी राजनीतिक हलचल आज सुबह से ही पटना में नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए 15 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। नई सरकार का शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे होने की संभावना है, जिसमें पहले चरण में मुख्यमंत्री और कुछ वरिष्ठ मंत्री शपथ ले सकते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामले में बड़ा झटका लगा है। Supreme Court of India ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ किया कि इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। हालांकि कोर्ट ने लालू यादव को राहत देते हुए कहा कि वे ट्रायल के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A से जुड़े कानूनी मुद्दे उठा सकते हैं। साथ ही निचली अदालत को मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर करने का निर्देश दिया गया है। धारा 17A पर विवाद यह मामला मुख्य रूप से Prevention of Corruption Act की धारा 17A से जुड़ा है। इस प्रावधान के तहत किसी सरकारी अधिकारी के फैसलों की जांच से पहले पूर्व स्वीकृति जरूरी होती है। लालू यादव के वकील Kapil Sibal ने दलील दी कि बिना मंजूरी के जांच अवैध है, लेकिन कोर्ट ने इस पर फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं दिया। CBI का पक्ष CBI की ओर से दलील दी गई कि इस मामले में पूर्व स्वीकृति जरूरी नहीं थी, क्योंकि आरोपित गतिविधियां आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे में नहीं आतीं। कोर्ट ने माना कि इन पहलुओं की जांच ट्रायल कोर्ट में बेहतर तरीके से हो सकती है। क्या है ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामला? यह मामला 2004-2009 के दौरान रेलवे में भर्ती घोटाले से जुड़ा है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि नौकरी देने के बदले जमीन ली गई। इस केस में Rabri Devi, Tejashwi Yadav और Misa Bharti समेत कई लोगों पर आरोप तय हो चुके हैं।
पटना: बिहार में लंबे समय से चर्चा में रहा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। कागजों और योजनाओं तक सीमित यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है। रेलवे ने इसके लिए सर्वे टीम का गठन कर दिया है और जुलाई-अगस्त से ग्राउंड सर्वे शुरू होने की संभावना है। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी होते हुए पटना और आगे सिलीगुड़ी तक जाएगा, जो देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों को नई गति और कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। दिल्ली से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड कॉरिडोर इस परियोजना के तहत दिल्ली से वाराणसी तक करीब 756 किलोमीटर और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक लगभग 744 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में से एक होगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट केवल यात्रा समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगा। बिहार के कई शहरों को मिलेगा सीधा लाभ बुलेट ट्रेन का रूट बिहार के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा, जिनमें बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं। इन शहरों के जुड़ने से न केवल यात्रियों को तेज और आसान यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खासकर पटना को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ना राज्य के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 650 KM एलिवेटेड ट्रैक, जमीन अधिग्रहण बड़ी चुनौती इस परियोजना के तहत बिहार में लगभग 650 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा, जिससे ट्रेन बिना किसी रुकावट के तेज गति से दौड़ सके। इसके लिए करीब 1900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत होगी, जो इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना सरकार के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है। यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी देखने को मिलेगी। वाराणसी से सिलीगुड़ी की दूरी करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरी हो सकेगी, जबकि दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग 3 घंटे 50 मिनट में तय होगा। वर्तमान में यही यात्राएं कई घंटों तक चलती हैं, ऐसे में यह परियोजना यात्रियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। सर्वे के बाद बनेगी विस्तृत योजना (DPR) रेलवे का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में सर्वे कार्य पूरा करना है। इसके बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसमें परियोजना की लागत, समयसीमा और निर्माण की पूरी रणनीति तय होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। कौन करेगा प्रोजेक्ट का संचालन इस पूरी परियोजना की जिम्मेदारी National High Speed Rail Corporation Limited के पास है, जो पहले से मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस संस्था के अनुभव को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार में भी यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा। पूर्वी भारत के विकास को मिलेगी रफ्तार यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए विकास का इंजन बन सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को गति मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह महत्वाकांक्षी योजना कब तक हकीकत का रूप लेती है।
पटना/नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। शुक्रवार को दोपहर करीब 12:12 बजे उन्होंने संसद के उच्च सदन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इससे पहले वे 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और 30 मार्च को उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। एनडीए नेताओं की मौजूदगी में शपथ शपथ ग्रहण के मौके पर जेडीयू और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और डिप्टी सीएम Samrat Choudhary उनके साथ राज्यसभा पहुंचे। यह कार्यक्रम पहले से तय था और इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। दिल्ली में सक्रिय भूमिका के संकेत दिल्ली पहुंचने के बाद नीतीश कुमार ने संकेत दिया कि अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बिहार में काम करने के बाद अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए और वे खुद दिल्ली में रहकर काम करेंगे। पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार की मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah से होने की संभावना है। इस दौरान बिहार में नई एनडीए सरकार के स्वरूप, मंत्रिमंडल विस्तार और नए चेहरों को लेकर चर्चा हो सकती है। इस्तीफे की तैयारी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार पटना में जेडीयू नेताओं के साथ बैठक करेंगे और जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 13 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक होने की संभावना है, जिसके बाद वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इससे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
Bihar Politics Update: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब राज्य में नए सीएम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने दिल्ली पहुंचे जदयू नेताओं ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत कहा: “मैं यहां शपथ लेने आया हूं” कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री? मंत्री विजय कुमार चौधरी का बड़ा बयान: “CM वही बनेगा, जिसे NDA विधायक दल का नेता चुनेगा” “अब बस कुछ दिन की बात है” 5 दल मिलकर करेंगे फैसला यह सिर्फ एक पार्टी का निर्णय नहीं होगा NDA के 5 सहयोगी दल मिलकर बैठेंगे सभी दल अपने-अपने प्रस्ताव रखेंगे फिर सर्वसम्मति या बहुमत से नेता का चुनाव होगा वही नेता बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री इसका मतलब क्या है? CM फेस पर अभी कोई फाइनल नाम तय नहीं गठबंधन की राजनीति में सहमति जरूरी कई नामों पर चर्चा संभव JDU की प्रतिक्रिया नेता संतोष निराला ने कहा: नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना गर्व की बात है, उनकी राजनीति से बिहार को आगे बढ़ने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चा तेज हो गई है और राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। सम्राट चौधरी की मुलाकात से बढ़ी अटकलें शपथ से पहले डिप्टी सीएम Samrat Choudhary नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। पार्टी नेताओं के लगातार आवास पर पहुंचने से यह संकेत मिल रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन पर मंथन जारी है। JDU नेताओं के बयान से बढ़ी चर्चा Janata Dal (United) नेताओं ने नीतीश कुमार के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि बिहार की राजनीति में उनका बड़ा प्रभाव है और “उनके बिना पत्ता नहीं हिल सकता।” वहीं कुछ नेताओं ने अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी संकेत दिए हैं कि फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा। नई सरकार को लेकर जल्द फैसला संभव सूत्रों के मुताबिक बिहार में नई सरकार का गठन 14 से 15 अप्रैल के बीच हो सकता है। केंद्रीय और राज्य स्तर पर बैठकों का दौर जारी है, जिसमें कैबिनेट गठन और नेतृत्व को लेकर चर्चा हो रही है। निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा तेज इस बीच JDU कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए पोस्टरों में Nishant Kumar को “भविष्य का मुख्यमंत्री” बताया गया है, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है। JDU का दावा: नीतीश मॉडल जारी रहेगा पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार आगे भी नीतीश कुमार के विकास मॉडल पर ही चलेगा और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं नई सरकार के स्वरूप को लेकर अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
Bihar Politics: बिहार विधान परिषद की भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार इस सीट पर 12 मई को मतदान और 14 मई को मतगणना होगी। क्यों खाली हुई सीट? यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। पहले इस पर जदयू नेता राधा चरण साह का कब्जा था विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक था चुनाव का पूरा शेड्यूल 16 अप्रैल: अधिसूचना जारी 23 अप्रैल: नामांकन की अंतिम तिथि 24 अप्रैल: नामांकन पत्रों की जांच 27 अप्रैल: नाम वापसी की आखिरी तारीख 12 मई: मतदान 14 मई: मतगणना आचार संहिता लागू, बढ़ी सियासी हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। NDA बनाम विपक्ष, मुकाबला रोचक यह सीट पहले जदयू (NDA) के पास थी NDA फिर से जीत का दावा कर रहा है वहीं विपक्ष इस मौके को भुनाने की तैयारी में है 27 वोट से जीते थे राधा चरण साह 2025 के विधानसभा चुनाव में राधा चरण साह ने: संदेश सीट से जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की राजद के दीपू सिंह को सिर्फ 27 वोटों से हराया उन्हें कुल 80,598 वोट मिले यह मुकाबला काफी चर्चित रहा था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।