फाइनेंस

एलन मस्क की संपत्ति और दुनिया के सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोगों की बढ़ती दौलत
मस्क की संपत्ति में बेतहाशा इजाफा, 1% अमीरों की दौलत 34 लाख करोड़ डॉलर बढ़ी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। ऑक्सफैम के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच दुनिया के सबसे अमीर 1% लोगों की संपत्ति 34 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा बढ़ी, जबकि अत्यधिक गरीबी में कमी उस रफ्तार से नहीं आई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।   मस्क की संपत्ति में जबरदस्त उछाल     रिपोर्ट में दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल एलन मस्क की संपत्ति में हुई तेज बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है। फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 में मस्क की संपत्ति करीब 28 अरब डॉलर थी और वह दुनिया के 35वें सबसे अमीर व्यक्ति थे। इसके बाद उनकी संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ और यह 1.11 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गई।   ऑक्सफैम के अनुसार, मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति दुनिया की सबसे गरीब 46 प्रतिशत आबादी यानी करीब 3.8 अरब लोगों की कुल संपत्ति से भी अधिक है।   अरबपतियों की संख्या 3,000 के पार     रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया में अरबपतियों की संख्या 3,000 के पार पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति के लगातार कुछ हाथों में केंद्रित होने से वैश्विक आर्थिक असमानता और गहरी हो रही है।   ऑक्सफैम ने अमीरों की बढ़ती संपत्ति और दुनिया के गरीब तबके की स्थिति के बीच बढ़ते अंतर को मौजूदा आर्थिक विकास मॉडल की बड़ी चुनौती बताया है।   गरीबी खत्म करने के लिए नए मॉडल की जरूरत     आर्थिक असमानता को लेकर अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने ‘द रोडमैप फॉर इरैडिकेटिंग पॉवर्टी बियॉन्ड ग्रोथ’ तैयार किया है। इसमें केवल आर्थिक विकास को गरीबी दूर करने का पर्याप्त माध्यम मानने के बजाय संसाधनों के अधिक समान वितरण और सामाजिक कल्याण पर जोर देने की जरूरत बताई गई है।   रिपोर्ट में उठाए गए आंकड़े इस सवाल को भी सामने रखते हैं कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, तो उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं पहुंच रहा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में हल्की तेजी, सेंसेक्स 178 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,600 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बेहतर पहली तिमाही के नतीजों, मजबूत घरेलू मांग और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।   सेंसेक्स 78,676 के स्तर तक पहुंचा   शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 177.81 अंक यानी 0.22 फीसदी चढ़कर 78,676 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी करीब 50 अंक यानी 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 24,620 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।   फार्मा और आईटी शेयरों में खरीदारी   सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी फार्मा 0.72 फीसदी की बढ़त के साथ मजबूत प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सूचकांक रहा। हेल्थकेयर इंडेक्स में भी तेजी रही। वहीं, निफ्टी आईटी 0.53 फीसदी और मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स 0.58 फीसदी चढ़ा।   इसके अलावा निजी बैंक, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.27 फीसदी और पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.21 फीसदी नीचे रहा।   बेहतर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत   बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों के पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों और मजबूत घरेलू मांग ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा है। कमाई के सीजन में कई कंपनियों ने अनुमान से बेहतर आय वृद्धि दर्ज की है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।   FII की खरीदारी से भी बाजार को सहारा   विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और अगस्त में भी खरीदारी का रुख देखने को मिला है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता   हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 1 फीसदी से अधिक बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.59 फीसदी चढ़कर 79.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Air India
Air India की उड़ानों में सितंबर से बड़ा विस्तार, 1 सितंबर से अधिकांश सेवाएं बहाल करने की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। Air India सितंबर से अपनी उड़ान सेवाओं को बड़े स्तर पर बहाल करने की तैयारी में है। एयरलाइन 1 सितंबर 2026 से जुलाई और अगस्त में कम की गई अधिकांश उड़ानों को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी है।   जुलाई-अगस्त में क्यों कम हुई थीं उड़ानें?   Air India ने गर्मियों के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की थी। इसके पीछे जेट ईंधन की ऊंची कीमत, एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियां और परिचालन संबंधी चुनौतियां प्रमुख कारण रहे। एयरलाइन ने मई में भी बताया था कि जून से अगस्त के बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को अस्थायी रूप से कम या स्थगित किया जाएगा।   न्यूयॉर्क, टोक्यो और मिलान के लिए बढ़ सकती हैं उड़ानें   सितंबर से केवल बंद या कम की गई उड़ानों को बहाल करने की योजना नहीं है, बल्कि कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फ्लाइट फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की भी तैयारी है। रिपोर्टों के अनुसार न्यूयॉर्क, टोक्यो और मिलान जैसे प्रमुख शहरों के लिए सेवाओं में बढ़ोतरी की योजना है।   यात्रियों को मिलेगी राहत   उड़ानों की संख्या बढ़ने से भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को सितंबर से ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है। Air India का यह कदम अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को फिर से सामान्य स्तर पर लाने और आगामी विंटर ट्रैवल सीजन के लिए क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   Air India ने इससे पहले भी कहा था कि वह परिचालन परिस्थितियां बेहतर होने पर अपनी अंतरराष्ट्रीय क्षमता को पूरी तरह बहाल करने के लिए काम कर रही है।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
SEBI
SEBI ने कहा- भारतीय बाजार की घरेलू बुनियाद मजबूत, वैश्विक जोखिमों से चुनौती बरकरार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आकलन के मुताबिक 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू बुनियाद मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों के लगातार निकासी जैसे जोखिम बाजार की स्थिरता के लिए चुनौती बने हुए हैं।   घरेलू अर्थव्यवस्था बनी मजबूत सुरक्षा-कवच   SEBI के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक स्थिति वैश्विक जोखिमों के बीच बाजार को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा-कवच प्रदान कर रही है। घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती से भारत बाहरी झटकों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है।   FPI निकासी से बाजार पर दबाव   विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार और रिकॉर्ड स्तर की निकासी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने पर भारत से पूंजी निकासी का दबाव और बढ़ सकता है।   कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव बड़ा जोखिम   SEBI ने मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख बाहरी जोखिमों में शामिल किया है। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत की आयात लागत, महंगाई और बाजार धारणा पर असर डाल सकती है।   बाजार की मजबूती पर SEBI का भरोसा   SEBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-26 के दौरान वैश्विक अनिश्चितताओं, FPI निकासी और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के बावजूद भारतीय प्रतिभूति बाजार ने लचीलापन दिखाया। ऐसे में घरेलू आर्थिक मजबूती भारत के बाजार के लिए आगे भी महत्वपूर्ण सहारा बनी रह सकती है।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
Hero MotoCorp
Hero MotoCorp के कंसोलिडेटेड मुनाफे में 17% की गिरावट, PAT घटकर ₹1,418 करोड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 17% घटकर ₹1,418 करोड़ रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड PAT ₹1,706 करोड़ था।   राजस्व में करीब 35% की बढ़ोतरी   मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी के राजस्व में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही में Hero MotoCorp का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹13,126 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 35% अधिक है। कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बिक्री और औसत बिक्री मूल्य में वृद्धि से भी समर्थन मिला। हालांकि, मुनाफे पर लागत और पिछले साल के ऊंचे आधार का असर पड़ा।   स्टैंडअलोन मुनाफा बढ़ा   कंसोलिडेटेड नतीजों से अलग कंपनी के स्टैंडअलोन PAT में करीब 29% की बढ़ोतरी हुई और यह लगभग ₹1,454 करोड़ पहुंच गया। इसी अवधि में स्टैंडअलोन आधार पर राजस्व में भी करीब 36% की वृद्धि दर्ज की गई। यानी कंपनी के मुख्य भारतीय कारोबार का प्रदर्शन मजबूत रहा, जबकि कंसोलिडेटेड आंकड़ों में शामिल अन्य कारोबारों के प्रभाव के कारण कुल PAT में गिरावट दिखाई दी।   लागत दबाव के बीच कंपनी का फोकस   कंपनी के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कच्चे माल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों से ऑटो कंपनियों की लागत पर दबाव बना हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक Hero MotoCorp लागत नियंत्रण और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के जरिए मार्जिन दबाव को संभालने पर जोर दे रही है।   कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार VIDA और प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग, त्योहारी सीजन की बिक्री और कच्चे माल की कीमतें कंपनी के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
UPI Payment
UPI भुगतान पर यूजर्स से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क, सरकार ने साफ किया रुख; बड़े मर्चेंट पर MDR की संभावना

नई दिल्ली, एजेंसियां। डिजिटल भुगतान को लेकर चल रही शुल्क की चर्चाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक छोटे कारोबारियों को भी राहत जारी रहेगी और UPI का बड़ा हिस्सा मुफ्त बना रहेगा।   ग्राहकों के लिए UPI रहेगा मुफ्त   वित्त मंत्रालय के ताजा स्पष्टीकरण के अनुसार, आम यूजर्स को UPI भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। यानी Google Pay, PhonePe, Paytm या अन्य UPI ऐप से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे कोई नया चार्ज नहीं लगाया जाएगा।   बड़े मर्चेंट पर लग सकता है MDR   सरकार ने हालांकि यह रास्ता खुला रखा है कि कुछ चुनिंदा और अधिक मूल्य वाले मर्चेंट लेनदेन पर मामूली Merchant Discount Rate (MDR) लगाया जा सकता है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे लेने के बजाय मर्चेंट पक्ष से जुड़ा होगा। छोटे व्यापारियों और कम मूल्य वाले अधिकांश लेनदेन को इससे बाहर रखने की बात कही गई है।   UPI व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने पर जोर   यह बदलाव UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने की चर्चा का हिस्सा है। सरकार का जोर है कि शुल्क की संभावित व्यवस्था से आम उपभोक्ता और छोटे दुकानदार प्रभावित न हों, जबकि बड़े वाणिज्यिक लेनदेन से जुड़े भुगतान तंत्र की लागत को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
अमित शाह ने मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन किया
NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन, अमित शाह ने मुंबई में किया शुभारंभ

मुंबई, एजेंसियां। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 8 अगस्त को मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। यह पहल देश के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।   शहरी सहकारी बैंकों के लिए नई सुविधाएं     नए कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही शहरी सहकारी बैंकों के लिए कई डिजिटल और तकनीकी सुविधाओं की शुरुआत की गई। इनमें सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC) और देशभर के शहरी सहकारी बैंकों के लिए साझा कोर बैंकिंग सेवा (Sahakar CBS) प्रमुख हैं।   सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को साइबर खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि साझा कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।   NFSU के साथ होगा तकनीकी सहयोग     कार्यक्रम के दौरान NUCFDC और नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया। इसका उद्देश्य सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और संस्थागत दक्षता को मजबूत करना है। कार्यक्रम में Sahakar CBS से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले शुरुआती छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।     शहरी सहकारी बैंकिंग को आधुनिक बनाने पर जोर     सरकार के अनुसार, NUCFDC को शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खासकर छोटे और मध्यम आकार के सहकारी बैंकों को साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण और अन्य परिचालन सहायता उपलब्ध कराना है।   यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के तहत शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ाई जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
IPO
SEBI ने 9 कंपनियों के IPO को दी मंजूरी, प्राइमरी मार्केट में बढ़ी हलचल

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 9 कंपनियों के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मंजूरी दे दी है। अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करने वाली इन कंपनियों के IPO को मंजूरी मिलने से भारतीय प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। मंजूरी पाने वाली कंपनियों में इंजीनियरिंग, ट्रैवल टेक्नोलॉजी, गेमिंग, ड्रोन, पेपर, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।   इन 9 कंपनियों को मिली मंजूरी   SEBI से IPO की मंजूरी पाने वाली कंपनियों में PlaySimple Games, Garuda Aerospace, Rediff.com India, Jakson Green, Laxyo, Expression 360 Services India, SNVA Traveltech, Adroit Industries India और Naini Papers शामिल हैं।   इन कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम से निवेशकों को अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश का विकल्प मिल सकता है। हालांकि IPO की अंतिम तारीख, इश्यू प्राइस और लॉट साइज जैसी जानकारी संबंधित कंपनियों के आगे के दस्तावेजों और घोषणाओं में स्पष्ट होगी।   प्राइमरी मार्केट में बढ़ी गतिविधि   एक साथ नौ कंपनियों को IPO की मंजूरी मिलना भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। बाजार में IPO गतिविधियों में तेजी आने के बीच SEBI की मंजूरी से कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हुआ है।   इन कंपनियों का लक्ष्य IPO के जरिए जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, नई परियोजनाओं, कर्ज कम करने और अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जा सकता है। वास्तविक उपयोग कंपनी-दर-कंपनी अलग होगा।   निवेशकों की बढ़ेगी नजर   IPO की मंजूरी मिलने के बाद अब निवेशकों की नजर इन कंपनियों के DRHP/RHP, इश्यू साइज, वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और IPO की कीमत पर रहेगी। SEBI की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि IPO में निवेश करना निश्चित रूप से लाभदायक होगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार से जुड़े जोखिम और IPO का मूल्यांकन समझना जरूरी होगा।   कब आएंगे IPO?   SEBI की मंजूरी के बाद कंपनियां बाजार की परिस्थितियों और अपनी तैयारी के अनुसार IPO की लॉन्चिंग की तारीख तय कर सकती हैं। इसलिए अभी सभी नौ IPO की सदस्यता तारीख घोषित होना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कंपनियों की ओर से IPO का आकार, प्राइस बैंड, लॉट साइज और सब्सक्रिप्शन की तारीखों से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
Bajaj Finserv
RBI के ड्राफ्ट प्रस्ताव से Bajaj Finance और Bajaj Finserv में बड़ी गिरावट, ₹55 हजार करोड़ का बाजार मूल्य घटा

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए ड्राफ्ट प्रस्ताव से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के शेयरों पर दबाव बढ़ गया। खास तौर पर Bajaj Finance और Bajaj Finserv के शेयरों में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Bajaj Finance का शेयर करीब 5.9% और Bajaj Finserv का शेयर करीब 4.2% तक गिरा। दोनों कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में करीब ₹55,000 करोड़ की कमी आई।   RBI के प्रस्ताव में क्या है?   RBI ने NBFC के लिए जारी किए गए ड्राफ्ट नियमों में revolving credit facilities को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत सामान्य NBFC को मुख्य रूप से term loan देने तक सीमित किया जा सकता है। हालांकि, RBI से क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति प्राप्त NBFC इस प्रस्तावित प्रतिबंध से बाहर रह सकती हैं।   Revolving credit में ग्राहक को एक तय क्रेडिट सीमा उपलब्ध रहती है, जिसमें वह जरूरत के अनुसार राशि का इस्तेमाल, भुगतान और फिर उपलब्ध सीमा के भीतर दोबारा उधार ले सकता है। ऐसे उत्पादों पर निर्भर NBFC के कारोबार मॉडल पर नए नियमों का असर पड़ सकता है।   Bajaj Finance पर क्यों पड़ा ज्यादा असर?   Bajaj Finance के कारोबार में फ्लेक्सी लोन और अन्य दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली क्रेडिट सुविधाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में कंपनी को अपने कुछ मौजूदा उत्पादों और क्रेडिट मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है।   इसी संभावित असर को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ी और Bajaj Finance के शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली। बाजार विश्लेषकों ने भी कंपनी के कुछ क्रेडिट उत्पादों और भविष्य की वृद्धि पर संभावित प्रभाव को लेकर सावधानी बरती है।   Bajaj Finserv भी बिकवाली की चपेट में   Bajaj Finance में गिरावट का असर उसकी पैरेंट कंपनी Bajaj Finserv के शेयर पर भी दिखाई दिया। शुक्रवार को Bajaj Finserv करीब 4.18% गिरकर ₹2,001.90 पर बंद हुआ।बाजार में चिंता सिर्फ इन दो कंपनियों तक सीमित नहीं रही। RBI के प्रस्ताव से उन NBFC पर भी दबाव की आशंका जताई जा रही है जिनके कारोबार में फ्लेक्सी लोन, क्रेडिट लाइन और इसी तरह के उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है।   अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ   यह ध्यान रखना जरूरी है कि RBI का यह अभी ड्राफ्ट प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। केंद्रीय बैंक ने प्रस्तावित बदलावों पर संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी है। इसलिए आगे नियमों में बदलाव, छूट या अन्य प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।   फिलहाल निवेशकों की नजर RBI की अंतिम अधिसूचना और प्रस्ताव पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं पर है। अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि Bajaj Finance और अन्य NBFC के कारोबार पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ेगा।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
NBFC का क्रेडिट पोर्टफोलियो जून 2026 में बढ़कर ₹57.8 लाख करोड़ हुआ
NBFC का कर्ज जून में 14.4% बढ़ा, ₹57.8 लाख करोड़ पहुंचा क्रेडिट पोर्टफोलियो

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) द्वारा दिए गए कर्ज में जून 2026 में सालाना आधार पर 14.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। NBFC का कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो जून के अंत तक बढ़कर करीब ₹57.8 लाख करोड़ हो गया। एक साल पहले जून 2025 में NBFC क्रेडिट की वृद्धि दर 11.1% थी।   खुदरा कर्ज से मिली मजबूती     RBI के आंकड़ों के अनुसार जून में NBFC क्षेत्र की क्रेडिट ग्रोथ में रिटेल लोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। व्यक्तिगत ऋण और अन्य खुदरा कर्ज की मांग बढ़ने से NBFC के कुल ऋण कारोबार को मजबूती मिली। इससे संकेत मिलता है कि बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ NBFC भी घरेलू कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।     एक साल में बढ़ी क्रेडिट ग्रोथ     जून 2025 में NBFC क्रेडिट ग्रोथ 11.1% थी, जो जून 2026 में बढ़कर 14.4% हो गई। यानी एक साल के दौरान NBFC के कर्ज कारोबार की वृद्धि दर में 3.3 प्रतिशत अंक की तेजी आई।     NBFC सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत     NBFC के कर्ज में तेज वृद्धि को वित्तीय क्षेत्र में ऋण मांग की मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर खुदरा ऋण में लगातार मांग से कंपनियों के कारोबार को समर्थन मिल रहा है।   हालांकि, तेज क्रेडिट वृद्धि के साथ कर्ज की गुणवत्ता, डिफॉल्ट जोखिम और उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता पर नजर रखना भी जरूरी है। आने वाले महीनों में NBFC क्षेत्र की वृद्धि कितनी टिकाऊ रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
RBI ने Priority Sector Lending नियमों में NRI जमा आधारित कर्ज को लेकर बदलाव किया
RBI ने Priority Sector Lending नियमों में दी राहत, NRI जमा से जुड़े कर्ज को लेकर बड़ा बदलाव

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के Priority Sector Lending (PSL) नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए फैसले के तहत 8 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच जुटाई गई पात्र FCNR(B) और NRE जमा के आधार पर दिए गए कुछ कर्ज को बैंकों के Adjusted Net Bank Credit (ANBC) की गणना से बाहर रखा जाएगा। इसका मतलब है कि इन कर्जों को अनिवार्य प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।   NRI जमा बढ़ाने पर RBI का जोर     RBI के इस कदम का प्रमुख उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा में आने वाली NRI जमा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना माना जा रहा है। FCNR(B) और NRE खाते अनिवासी भारतीयों के लिए भारत में धन रखने के प्रमुख माध्यम हैं।   नए प्रावधान से बैंकों को इन जमा के आधार पर कर्ज देने में अधिक लचीलापन मिलेगा। ऐसे कर्ज PSL लक्ष्य की गणना में शामिल नहीं होने के कारण बैंकों पर प्राथमिकता क्षेत्र में अतिरिक्त कर्ज देने का दबाव भी कम होगा।   बैंकिंग क्षेत्र को क्या फायदा?     RBI के इस बदलाव से बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जमा जुटाने और उसके आधार पर ऋण देने की प्रक्रिया अधिक आकर्षक हो सकती है। इससे बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह राहत सभी प्रकार के NRI जमा या सभी कर्जों पर लागू नहीं है। RBI ने इसके लिए पात्र जमा और निर्धारित अवधि जैसी शर्तें रखी हैं।     PSL नियमों में बदलाव का असर     Priority Sector Lending के तहत बैंकों को कृषि, MSME, कमजोर वर्ग और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निर्धारित मात्रा में कर्ज देना होता है। RBI का नया प्रावधान कुछ विशेष NRI जमा-आधारित कर्ज को इस गणना से अलग करता है। इस फैसले से बैंकों को अपनी बैलेंस शीट और ऋण वितरण रणनीति को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Gold Price Today
सोने-चांदी के आज के ताजा भाव: 24 कैरेट सोना ₹1.50 लाख के करीब, चांदी ₹2.40 लाख किलो

मुंबई, एजेंसियां। सोने और चांदी की कीमतों को लेकर आज 8 अगस्त 2026 को बाजार में हलचल बनी हुई है। उपलब्ध ताजा भारतीय बाजार रेट के अनुसार 24 कैरेट सोना करीब ₹1,49,900 प्रति 10 ग्राम, जबकि 22 कैरेट सोना करीब ₹1,37,400 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। वहीं चांदी का भाव करीब ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है।   आज का सोना-चांदी भाव   आज के उपलब्ध रेट के अनुसार: 24 कैरेट सोना: करीब ₹1,49,900 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: करीब ₹1,37,400 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: करीब ₹1,12,400 प्रति 10 ग्राम चांदी: करीब ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम   चांदी का भाव भी ऊंचे स्तर पर   चांदी की कीमत करीब ₹240 प्रति ग्राम यानी ₹2.40 लाख प्रति किलो के स्तर पर है। चांदी में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। औद्योगिक मांग, वैश्विक बाजार और डॉलर की चाल इसके भाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।   शहर के हिसाब से बदल सकता है भाव   सोने और चांदी का वास्तविक खुदरा भाव शहर, स्थानीय मांग, ज्वेलर के मार्जिन और अन्य शुल्कों के कारण अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, चेन्नई में आज 24 कैरेट सोने का स्थानीय भाव करीब ₹15,164 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹13,900 प्रति ग्राम बताया गया है। इसलिए आभूषण खरीदने से पहले अपने शहर के ज्वेलर से उस समय का अंतिम भाव जरूर जांचें।   खरीदारी से पहले इन शुल्कों का रखें ध्यान   ऊपर बताए गए भाव मुख्य रूप से बाजार के संकेतक रेट हैं। आभूषण खरीदते समय 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर के अन्य शुल्क जुड़ने के कारण अंतिम कीमत अधिक हो सकती है। सोने के निवेश या खरीदारी का फैसला करने से पहले 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट की शुद्धता के साथ-साथ हॉलमार्क की भी जांच करना जरूरी है।

anjali kumari अगस्त 8, 2026 0
SBI
SBI का पहली तिमाही का मुनाफा 10.2% बढ़कर ₹21,121 करोड़ पहुंचा

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 10.2% बढ़कर ₹21,121 करोड़ पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में SBI का शुद्ध लाभ ₹19,160 करोड़ रहा था। बैंक के बेहतर नतीजों से निवेशकों की नजर SBI के शेयर पर भी बनी हुई है।   मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी   SBI के तिमाही नतीजों में बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। शुद्ध लाभ में करीब 10% की बढ़ोतरी बैंक की आय और परिचालन प्रदर्शन में मजबूती को दर्शाती है। बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ब्याज दरों में बदलाव के बीच SBI का यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंक की मजबूत बैलेंस शीट और बड़े ग्राहक आधार का भी इसके प्रदर्शन में योगदान रहा।   बैंक की आय में भी सुधार   पहली तिमाही के दौरान SBI की कुल आय में भी वृद्धि दर्ज की गई। बैंक के परिचालन प्रदर्शन और अन्य आय के मोर्चे पर भी बाजार की नजर रही। बैंक के नतीजों में परिसंपत्ति गुणवत्ता और ऋण वृद्धि भी महत्वपूर्ण कारक रहे। SBI लगातार अपने डिजिटल बैंकिंग नेटवर्क और खुदरा ऋण कारोबार को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।   शेयर बाजार की नजर SBI पर   तिमाही नतीजे जारी होने के बाद निवेशकों की नजर SBI के शेयर के प्रदर्शन पर रही। मजबूत मुनाफे को बैंक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी बैंक के शेयर की चाल केवल तिमाही मुनाफे पर निर्भर नहीं करती। ब्याज दरें, जमा वृद्धि, ऋण मांग, सकल एनपीए और वैश्विक बाजार के रुझान भी SBI के शेयर को प्रभावित कर सकते हैं।   आगे बैंक की रणनीति पर नजर   SBI की पहली तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद अब निवेशकों का ध्यान बैंक की आगे की ऋण वृद्धि, परिसंपत्ति गुणवत्ता और मुनाफे की स्थिरता पर रहेगा। बैंकिंग क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और ऋण मांग में सुधार जारी रहने पर SBI को आने वाली तिमाहियों में भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार में गिरावट के साथ क्लोजिंग, सेंसेक्स 455 अंक टूटा; निफ्टी 24,600 के नीचे बंद

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को दबाव देखने को मिला। BSE सेंसेक्स 455 अंक गिरकर 78,499.17 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 में 65 अंक की गिरावट रही और यह 24,570.65 पर बंद हुआ। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी तथा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की धारणा पर असर डाला।   सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट   शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स करीब 0.58% नीचे रहा। निफ्टी 50 भी 0.27% की गिरावट के साथ 24,600 के स्तर से नीचे बंद हुआ। सप्ताह के स्तर पर हालांकि दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.8%, जबकि सेंसेक्स में करीब 0.5% की बढ़त रही।   बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव   आज बाजार में वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। बजाज फाइनेंस करीब 5.8% टूटकर प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहा। दूसरी ओर, SBI में करीब 1.1% की तेजी देखी गई, क्योंकि बैंक के तिमाही मुनाफे ने बाजार की उम्मीदों को पीछे छोड़ा।   कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता   बाजार पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का भी असर रहा। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों और आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर भी रही।   निवेशकों की नजर अगले सप्ताह पर   शुक्रवार की गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह का अंत कुल मिलाकर बढ़त के साथ किया। अब निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार में आने वाले कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। 

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
KKR द्वारा Medicover India अस्पताल कारोबार का अधिग्रहण
KKR का भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा दांव, Medicover का अस्पताल कारोबार €1.2 अरब में खरीदेगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक निवेश कंपनी KKR ने स्वीडन की हेल्थकेयर कंपनी Medicover के भारत स्थित अस्पताल कारोबार को खरीदने के लिए समझौता किया है। सौदे की एंटरप्राइज वैल्यू €1.2 अरब (करीब $1.39 अरब) बताई गई है। यह सौदा भारत के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में KKR के बढ़ते निवेश को दर्शाता है।   Medicover का भारत कारोबार KKR के पास जाएगा   Medicover ने अपने भारतीय अस्पताल कारोबार को KKR द्वारा प्रबंधित निवेश फंडों को बेचने पर सहमति जताई है। कंपनी के अनुसार यह सौदा उसके भारत से जुड़े अस्पताल कारोबार के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। Medicover अब अपने कारोबार का मुख्य फोकस पोलैंड, जर्मनी और रोमानिया जैसे यूरोपीय बाजारों पर केंद्रित करना चाहती है।   करीब $1.39 अरब का है सौदा   इस सौदे की एंटरप्राइज वैल्यू €1.2 अरब, यानी करीब $1.39 अरब है। इसलिए इसे $1.5 अरब का सौदा कहना थोड़ा अधिक आंकड़ा होगा। भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य विनिमय दर के आधार पर करीब ₹12,000 करोड़ के आसपास बैठता है। सौदे के पूरा होने के बाद KKR की भारतीय अस्पताल क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी।   भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में KKR की बढ़ती दिलचस्पी   यह KKR का भारत के अस्पताल क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण विस्तार है। कंपनी पहले भी भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े निवेश कर चुकी है। Medicover India का अधिग्रहण देश में अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते बाजार में वैश्विक निजी निवेशकों की दिलचस्पी को भी दिखाता है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ने और अस्पताल नेटवर्क के विस्तार के बीच बड़े निवेश फंड इस क्षेत्र में विस्तार के अवसर तलाश रहे हैं। Medicover के भारत कारोबार का अधिग्रहण इसी व्यापक निवेश रुझान का हिस्सा माना जा रहा है।   Medicover का फोकस अब यूरोप पर   इस सौदे के जरिए Medicover अपने कारोबार को चुनिंदा यूरोपीय बाजारों में केंद्रित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत के अस्पताल कारोबार से बाहर निकलकर अपने प्रमुख यूरोपीय बाजारों में संसाधनों और निवेश को अधिक केंद्रित करना है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
MCX पर चांदी की कीमतों में तेजी
चांदी की कीमत में जोरदार तेजी, MCX पर ₹2,144 बढ़ा भाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। MCX पर चांदी का भाव ₹2,27,980 प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव ₹2,25,836 के मुकाबले ₹2,144 यानी 0.95 फीसदी की बढ़त है। यह आंकड़ा सुबह करीब 9:25 बजे का है।   अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1.50% की तेजी   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी मजबूत रही। सुबह के कारोबार में स्पॉट सिल्वर करीब 1.50 फीसदी उछलकर $62.53 प्रति औंस पहुंच गई। सोने में भी करीब 0.41 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। कीमती धातुओं को कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदों से सहारा मिला है। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।   MCX पर चांदी का ताजा भाव   MCX के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,25,836 प्रति किलोग्राम था। शुक्रवार को बाजार खुलने के बाद भाव ₹2,27,993 तक गया और शुरुआती कारोबार में ₹2,28,290 का उच्च स्तर भी देखा गया। इस हिसाब से चांदी ने पिछले बंद स्तर से करीब ₹2,454 प्रति किलोग्राम तक की इंट्राडे बढ़त भी दिखाई।   अमेरिकी आंकड़ों और ईरान वार्ता पर नजर   बाजार की नजर अब अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव आ सकता है, जिसका असर सोने और चांदी दोनों पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान बातचीत और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम भी कीमती धातुओं की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Brent Crude और WTI कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चा तेल फिर महंगा, Brent Crude $83 के पार; होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को फिर तेजी देखने को मिली। Brent Crude करीब 83.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 77.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता को तेल कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।   दूसरे दिन भी तेल की कीमतों में तेजी     Brent Crude शुक्रवार को करीब 1 फीसदी से ज्यादा बढ़कर $83.29 प्रति बैरल पहुंचा। WTI भी बढ़कर करीब $77.93 प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी तेल कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी।     होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा कारण     तेल बाजार की नजर इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है। ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद जहाजों की आवाजाही की शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।   ईरान की ओर से कुछ जहाजों को लेकर प्रस्तावित प्रतिबंधों और संभावित जुर्माने की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी लंबे व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   भारत पर भी पड़ सकता है असर     कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहने पर आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल तेल बाजार की दिशा होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति से तय होने की संभावना है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
सोने की कीमतों में तेजी
सोने की कीमतों में फिर तेजी, 24 कैरेट गोल्ड ₹14,955 प्रति ग्राम के करीब

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोने की कीमतों में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। भारत में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹14,955 प्रति ग्राम, जबकि 22 कैरेट सोना करीब ₹13,698 प्रति ग्राम पहुंच गया है। सोने की कीमतों में यह तेजी वैश्विक बाजार में मजबूत मांग और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम के बीच देखने को मिल रही है।   24 और 22 कैरेट सोने का भाव बढ़ा   आज के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,49,550 और 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,36,987 है। हालांकि, स्थानीय बाजार, टैक्स और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज के कारण ग्राहकों को मिलने वाला अंतिम भाव अलग हो सकता है।   वैश्विक घटनाक्रम से मिल रहा सहारा   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम के कारण सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की संभावनाओं ने भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है।   आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना   विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम पर है। इन कारकों में बदलाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
SBI Mutual Fund का नया NFO
SBI म्यूचुअल फंड का नया NFO लॉन्च, टॉप-100 से बाहर की कंपनियों पर रहेगा फोकस

मुंबई, एजेंसियां। SBI Mutual Fund ने निवेशकों के लिए अपनी नई निवेश रणनीति Magnum Equity Ex-Top 100 Long Short Fund लॉन्च की है। यह SBI Mutual Fund की Specialized Investment Fund (SIF) श्रेणी के तहत दूसरी रणनीति है। नए फंड का NFO 7 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।   टॉप-100 शेयरों से अलग होगा फोकस   नई रणनीति का मुख्य फोकस बाजार पूंजीकरण के आधार पर टॉप-100 कंपनियों से बाहर के इक्विटी और इक्विटी से जुड़े शेयरों पर रहेगा। यानी फंड मुख्य रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाशेगा। SBI Mutual Fund का यह कदम ऐसे समय आया है जब निवेशकों की दिलचस्पी बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बनी हुई है।   Long-Short रणनीति की खासियत   यह फंड सामान्य इक्विटी फंड से अलग है क्योंकि इसमें सीमित मात्रा में इक्विटी डेरिवेटिव के जरिए शॉर्ट पोजीशन लेने की सुविधा भी होगी। इससे फंड मैनेजर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों तरह की परिस्थितियों में अवसर तलाश सकता है। हालांकि, इस तरह की रणनीति में सामान्य इक्विटी म्यूचुअल फंड की तुलना में जोखिम और जटिलता अधिक हो सकती है। निवेशकों को निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज और जोखिम कारकों को ध्यान से देखना चाहिए।   SBI का दूसरा SIF   Magnum Equity Ex-Top 100 Long Short Fund, SBI Mutual Fund की SIF के तहत दूसरी निवेश रणनीति है। SIF ढांचे के तहत फंड हाउस को पारंपरिक म्यूचुअल फंड योजनाओं की तुलना में अधिक विशेष और लचीली निवेश रणनीतियां अपनाने की अनुमति मिलती है। नए NFO की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि SBI की यह रणनीति मिडकैप और स्मॉलकैप क्षेत्र में किस तरह के अवसर तलाशती है और आगे इसका प्रदर्शन कैसा रहता है। निवेशकों के लिए जरूरी बात: NFO में निवेश करना केवल इसलिए बेहतर नहीं माना जाता कि यूनिट की शुरुआती कीमत कम है। निवेश से पहले योजना का जोखिम, रणनीति, लागत और निवेश उद्देश्य समझना जरूरी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Groww और Fisdom एकीकरण
Groww से बाहर होंगे Fisdom के सह-संस्थापक, एक साल बाद पूरा हुआ एकीकरण

मुंबई, एजेंसियां। ऑनलाइन निवेश मंच Groww और वेल्थटेक कंपनी Fisdom से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। Fisdom के सह-संस्थापक सुब्रमण्या एस.वी. और आनंद डालमिया Groww से बाहर होने वाले हैं। दोनों ने Groww के साथ करीब एक साल का संक्रमण और एकीकरण चरण पूरा कर लिया है।   Groww ने किया था Fisdom का अधिग्रहण   Groww ने अक्टूबर 2025 में Fisdom की मूल कंपनी Finwizard Technology Private Limited का 100 प्रतिशत अधिग्रहण पूरा किया था। इस सौदे के बाद Groww ने वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। Groww के अनुसार Fisdom का परिचालन अब उसके कारोबार में एकीकृत हो चुका है।   सह-संस्थापकों की होगी विदाई   Fisdom के सह-संस्थापकों ने अधिग्रहण के बाद Groww के साथ एक साल तक एकीकरण प्रक्रिया में भूमिका निभाई। अब इस चरण के पूरा होने के बाद दोनों के Groww से बाहर होने की योजना है। Groww ने संकेत दिया है कि वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार के लिए किसी बाहरी नेतृत्व की नियुक्ति नहीं की जाएगी। इसके बजाय कंपनी के मौजूदा वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी।   Groww का वेल्थ मैनेजमेंट पर फोकस   Fisdom के अधिग्रहण से Groww को अमीर और उच्च-निवल-मूल्य वाले ग्राहकों के लिए वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिली है। कंपनी ने Fisdom के साथ अपने वेल्थ कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए W जैसे उत्पाद भी विकसित किए हैं। Groww के लिए अब अगली चुनौती इस कारोबार को बड़े पैमाने पर बढ़ाने और इसे लाभदायक बनाने की है। कंपनी ने अपने हालिया शेयरधारक अपडेट में भी Fisdom के एकीकरण और वेल्थ कारोबार को विस्तार देने को प्राथमिकता बताया था।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
UPI शुल्क पर वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण
UPI शुल्क पर निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण, बोलीं- यूजर्स से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

नई दिल्ली, एजेंसियां। UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबरों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि UPI पर Merchant Discount Rate (MDR) से जुड़ी व्यवस्था का मतलब आम यूजर्स से सीधे शुल्क वसूलना नहीं है। अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो इसका भार अंतिम उपयोगकर्ता पर नहीं डाला जाएगा।   UPI शुल्क को लेकर क्यों मचा विवाद?   संसद में पारित Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 में डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाया जा सकता है। वित्त मंत्री ने इस तरह की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था को UPI यूजर्स पर सीधे शुल्क लगाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।   MDR क्या है और किस पर लागू होगा?   MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या कारोबारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है। वित्त मंत्री के स्पष्टीकरण के मुताबिक, यदि सरकार भविष्य में MDR को अधिसूचित करती है तो इसे अंतिम ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं होगी। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक के लिए UPI से पैसे भेजने या भुगतान करने पर अलग से UPI शुल्क लगाए जाने की बात फिलहाल नहीं है।   सरकार ने क्या साफ किया?   निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI के संबंध में फैलाई जा रही यह धारणा गलत है कि नए प्रावधान के बाद आम लोगों को हर भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा। सरकार का स्पष्टीकरण है कि अंतिम उपयोगकर्ता को UPI भुगतान के लिए शुल्क नहीं देना होगा. इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए UPI भुगतान की मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल शुल्क लागू नहीं हुआ है। हालांकि, भविष्य में MDR से जुड़े नियम सरकार की अधिसूचना के जरिए तय किए जा सकते हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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