वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ विवाद में फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर प्रस्तावित 50% अतिरिक्त टैरिफ को तीन दिनों के लिए टाल दिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच अंतिम समय में हुई बातचीत और संभावित समझौते के बाद लिया गया है। 50% टैरिफ पर तीन दिन की रोक अमेरिका का प्रस्तावित 50% शुल्क बुधवार से लागू होना था। इसके दायरे में कनाडा से आने वाले कई उत्पाद शामिल थे। ट्रंप ने अब इसके क्रियान्वयन को तीन दिनों के लिए रोक दिया है, ताकि दोनों देश समझौते की शर्तों को अंतिम रूप दे सकें। किन उत्पादों पर पड़ सकता था असर प्रस्तावित शुल्क से शराब, डेयरी उत्पाद, फर्नीचर, कपड़े, सीमेंट, हॉकी उपकरण और कई अन्य कनाडाई उत्पाद प्रभावित हो सकते थे। कनाडाई कारोबारी संगठनों ने चेतावनी दी थी कि इतने ऊंचे शुल्क से कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। ट्रंप और मार्क कार्नी के बीच बातचीत टैरिफ लागू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बातचीत हुई। कनाडा ने अमेरिकी बाजार के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य रखने के लिए कई मुद्दों पर रियायतों पर चर्चा की है। दोनों पक्ष व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। कीस्टोन XL पाइपलाइन भी बनी अहम कड़ी ट्रंप ने संभावित समझौते के बीच कीस्टोन XL तेल पाइपलाइन परियोजना को फिर से शुरू करने का संकेत भी दिया है। यह परियोजना पहले रद्द हो चुकी थी। यदि दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे ऊर्जा और व्यापार संबंधों में भी नई दिशा देखने को मिल सकती है। फिलहाल तीन दिन की रोक को अस्थायी राहत माना जा रहा है। अंतिम समझौता नहीं होने की स्थिति में 50% टैरिफ का मुद्दा फिर से सामने आ सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों और निवेशकों से भारत में निवेश और कारोबारी साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने भारत को जापानी तकनीक, विशेषज्ञता और पूंजी के लिए एक बड़े अवसर वाला बाजार बताते हुए विनिर्माण, तकनीक, बुनियादी ढांचे और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। भारत-जापान व्यापार में बड़ी संभावनाएं पीयूष गोयल ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.5 अरब डॉलर रहा, लेकिन दोनों देशों की आर्थिक क्षमता को देखते हुए यह आंकड़ा अभी भी संभावनाओं का छोटा हिस्सा है। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से भारत के विकास में भागीदार बनने की अपील की। 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य भारत-जापान आर्थिक साझेदारी के तहत अगले दशक में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। गोयल ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जापानी कंपनियों से भारत में दीर्घकालिक निवेश और साझेदारी बढ़ाने का आग्रह किया। सेमीकंडक्टर से हरित ऊर्जा तक सहयोग केंद्रीय मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा, नई पीढ़ी की मोबिलिटी और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की बड़ी संभावनाएं बताईं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को भी जापानी निवेश के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में पेश किया। 24 अगस्त से जापान जाएंगे पीयूष गोयल पीयूष गोयल ने बताया कि वह 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए उच्चस्तरीय बैठकों में चर्चा होगी। यह दौरा भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को लगातार गिरावट जारी रही। सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63% गिरकर 77,235.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55% फिसलकर 24,154.90 पर आ गया। निफ्टी की यह लगातार छठी गिरावट रही। IT और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव आज बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव IT और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से रहा। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.9% गिरा, जबकि मिडकैप इंडेक्स में 0.4% की कमजोरी रही। स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता बाजार में गिरावट की बड़ी वजह मध्य-पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रहीं। ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच शांति समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। ऊंची यील्ड के कारण विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार की आकर्षकता प्रभावित हो सकती है। रुपये और विदेशी निवेशकों पर भी नजर भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोर होकर 95.68 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। वहीं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि, बाजार में कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। Milky Mist की शेयर बाजार में लिस्टिंग के दिन करीब 29.6% की तेजी दर्ज हुई।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए ₹1.5 लाख करोड़ तक की overnight Variable Rate Reverse Repo (VRRR) नीलामी का ऐलान किया है। यह नीलामी 18 अगस्त 2026 को आयोजित की जा रही है। RBI ने मौजूदा और आगे की तरलता परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। 9:30 से 10 बजे तक होगी नीलामी RBI के मुताबिक नीलामी 18 अगस्त को सुबह 9:30 बजे से 10 बजे के बीच होगी। यह एक दिन की अवधि वाली overnight VRRR सुविधा है, यानी बैंकों द्वारा RBI के पास रखी गई राशि अगले दिन बैंकिंग प्रणाली में वापस आ जाएगी। VRRR से क्या करता है RBI? VRRR का इस्तेमाल RBI बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से सोखने के लिए करता है। इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त धनराशि RBI के पास रखते हैं और बदले में उन्हें ब्याज मिलता है। इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त तरलता घटती है और अल्पकालिक ब्याज दरों को नियंत्रित करने में RBI को मदद मिलती है। इसे रेपो नीलामी का उल्टा समझ सकते हैं—रेपो के जरिए RBI बैंकों को पैसा देता है, जबकि VRRR में बैंक अपना अतिरिक्त पैसा RBI के पास रखते हैं। ₹1.5 लाख करोड़ की पूरी रकम लेना जरूरी नहीं यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1.5 लाख करोड़ अधिकतम अधिसूचित राशि है, इसका मतलब यह नहीं है कि RBI अनिवार्य रूप से पूरी ₹1.5 लाख करोड़ राशि सोखेगा। वास्तविक रकम बैंकों की बोलियों और उस समय की तरलता स्थिति पर निर्भर करेगी। इससे पहले 11 अगस्त को RBI ने ₹1 लाख करोड़ की overnight VRRR नीलामी की थी, जिसमें एक दिन के लिए अतिरिक्त बैंकिंग तरलता को सोखने की व्यवस्था की गई थी। बाजार पर क्या असर पड़ेगा? VRRR से बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी कुछ समय के लिए RBI के पास चली जाती है। इसका उद्देश्य मनी मार्केट में ब्याज दरों को व्यवस्थित रखना और अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना है। हालांकि, यह कदम अपने आप में मौद्रिक नीति को सख्त करने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए; VRRR मुख्य रूप से RBI का liquidity management tool है।
न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिकी शेयर बाजार में ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। Nasdaq ने अमेरिकी शेयरों में सप्ताह के पांच दिनों के दौरान करीब 23 घंटे प्रतिदिन ट्रेडिंग की योजना तैयार की है। Nasdaq के अनुसार नई व्यवस्था में रात 9 बजे से सुबह 4 बजे ET तक एक अतिरिक्त ट्रेडिंग सत्र होगा, जिससे बाजार लगभग पूरे दिन खुला रहेगा। दिसंबर से शुरू हो सकता है नया सत्र Nasdaq की प्रस्तावित व्यवस्था का लक्ष्य दिसंबर 2026 के आसपास 23 घंटे की ट्रेडिंग शुरू करना है। हालांकि, इसके लिए नियामकीय मंजूरी और बाजार के बुनियादी ढांचे से जुड़ी तैयारियां जरूरी हैं। Nasdaq ने इस विस्तार के लिए अमेरिकी नियामकों के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। नई व्यवस्था में प्रत्येक कारोबारी दिन करीब एक घंटे का ब्रेक रहेगा। यानी यह पूरी तरह 24 घंटे लगातार चलने वाला बाजार नहीं होगा, बल्कि 23 घंटे प्रतिदिन और सप्ताह में पांच दिन कारोबार होगा। दुनिया भर के निवेशकों को मिलेगा फायदा Nasdaq का कहना है कि अमेरिकी शेयरों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। एशिया और यूरोप के निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार के सामान्य कारोबारी घंटे उनके स्थानीय समय के हिसाब से सुविधाजनक नहीं होते। लंबी ट्रेडिंग से विदेशी निवेशकों को अपने समय क्षेत्र के अनुसार अमेरिकी शेयरों में कारोबार करने का बेहतर अवसर मिलेगा। इसका फायदा खास तौर पर Nvidia, Apple और Amazon जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में वैश्विक निवेशकों को मिल सकता है। 24 घंटे के कारोबार की ओर बढ़ रहा अमेरिकी बाजार Nasdaq अकेला एक्सचेंज नहीं है जो ट्रेडिंग घंटे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। Cboe ने भी दिसंबर 2026 में अपने अमेरिकी इक्विटी एक्सचेंज पर लगभग 24x5 ट्रेडिंग शुरू करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत रविवार रात से शुक्रवार शाम तक लगभग लगातार कारोबार की योजना है। भारत के निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा? भारत के लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है। अमेरिकी शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को रात के समय अधिक लंबी ट्रेडिंग विंडो मिल सकती है। हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए वास्तविक सुविधा इस बात पर निर्भर करेगी कि उनके ब्रोकर और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म इस नए सत्र में ऑर्डर की सुविधा कब उपलब्ध कराते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Paytm के संस्थापक और CEO विजय शेखर शर्मा ने कंपनी के लिए 1 अरब डॉलर यानी करीब ₹8,700 करोड़ के फ्री कैश फ्लो का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य हासिल करने में 3 या 4 साल लग सकते हैं, लेकिन यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है। यह बयान उन्होंने मुंबई में आयोजित 22वें Motilal Oswal Annual Global Investor Conference में दिया। मुनाफे से ज्यादा कैश बनाने पर जोर शर्मा के मुताबिक Paytm की अगली रणनीति केवल अकाउंटिंग प्रॉफिट बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वास्तविक फ्री कैश फ्लो पैदा करने पर केंद्रित होगी। उन्होंने फ्री कैश को कंपनी के मुनाफे और पूंजीगत खर्च के बाद बचने वाली नकदी के रूप में बताया। उनका कहना है कि 1 अरब डॉलर का फ्री कैश फ्लो हासिल करना Paytm के विकास के अगले चरण का महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा। फिनटेक कंपनियों की लेंडिंग में बढ़ेगी हिस्सेदारी विजय शेखर शर्मा ने भारत के तेजी से बढ़ते लेंडिंग बाजार में फिनटेक कंपनियों की भूमिका बढ़ने का भी अनुमान जताया। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी दोगुने से भी ज्यादा हो सकती है। Paytm इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए क्रेडिट आधारित सेवाओं और ऐसे कारोबार पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है जहां स्पष्ट रिटर्न और टिकाऊ मुनाफे की संभावना हो। हर कारोबार में विस्तार की रणनीति नहीं शर्मा ने संकेत दिया कि Paytm अब ऐसे क्षेत्रों में संसाधन लगाने से बचेगा जहां पर्याप्त रिटर्न नहीं मिल रहा है। कंपनी का फोकस लाभप्रदता, नियामकीय अनुपालन और कैश जेनरेशन पर ज्यादा रहेगा। यह रणनीति Paytm के उस बदलाव को दिखाती है जिसमें कंपनी तेजी से विस्तार करने के बजाय अब टिकाऊ और लाभदायक विकास को प्राथमिकता दे रही है। Paytm के लिए चुनौती भी बड़ी 1 अरब डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसे हासिल करने में कई साल लग सकते हैं। खासतौर पर डिजिटल पेमेंट और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में नियामकीय बदलाव, प्रतिस्पर्धा और क्रेडिट जोखिम कंपनी के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां रहेंगे। इसी बीच Paytm के प्रमोटर से जुड़ी Resilient Asset Management ने Paytm में करीब 4.98% हिस्सेदारी बेचने की योजना भी बनाई है। इस हिस्सेदारी की कीमत लगभग ₹5,040 करोड़ आंकी गई थी। हालांकि, यह हिस्सेदारी बिक्री और कंपनी के फ्री कैश फ्लो लक्ष्य को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में देखना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-निवासी भारतीयों (NRI) से विदेशी मुद्रा जुटाने में बैंकों की मदद करने वाली FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़ी विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को तय समय से एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया है। यह सुविधा अब 30 सितंबर 2026 के बजाय 31 अगस्त 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी। RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस योजना के जरिए उम्मीद से कहीं ज्यादा विदेशी मुद्रा भारत में आ चुकी है। 52.3 अरब डॉलर की FCNR(B) राशि जुटी RBI की इस विशेष व्यवस्था के तहत बैंकों ने अब तक करीब 52.3 अरब डॉलर यानी लगभग ₹4.9 लाख करोड़ की FCNR(B) जमा जुटाई है। इसके अलावा बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और अन्य विदेशी मुद्रा उधारी से भी करीब 4.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह आया है। कुल मिलाकर इस पैकेज से 50 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भारत में आई है। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिली। RBI की पहल के बाद देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। आखिर एक महीने पहले क्यों बंद की गई सुविधा? इस सुविधा को मूल रूप से 30 सितंबर तक चलाने की योजना थी। लेकिन RBI को उम्मीद से काफी ज्यादा विदेशी मुद्रा प्राप्त हो गई। Reuters के अनुसार, केंद्रीय बैंक को अब इस सुविधा को आगे जारी रखने से सीमित अतिरिक्त लाभ दिखाई दे रहा है। साथ ही बहुत ज्यादा विदेशी मुद्रा प्रवाह से घरेलू बाजार में अतिरिक्त तरलता, बाहरी देनदारियों और भविष्य में जमा राशि की परिपक्वता से जुड़े जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। बैंकों को अब जल्दी जुटानी होगी डॉलर फंडिंग RBI के फैसले का सीधा असर उन बैंकों पर पड़ा है जो FCNR(B) जमा के जरिए डॉलर जुटा रहे थे। कई भारतीय बैंक अब इस विंडो के बंद होने से पहले तेजी से विदेशी मुद्रा जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। Reuters के मुताबिक ICICI Bank और HDFC Bank करीब 1.5-1.5 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रहे हैं। Axis Bank, YES Bank, RBL Bank और Kotak Mahindra Bank भी विदेशी बाजार से फंड जुटाने की तैयारी में हैं। रुपये पर क्या होगा असर? RBI का यह कदम ऐसे समय आया है जब कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण रुपये पर पहले से दबाव है। 18 अगस्त को रुपये के 95.68-95.72 प्रति डॉलर के आसपास कमजोर खुलने का अनुमान लगाया गया था। विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को जल्दी बंद करने के फैसले ने भी बाजार में रुपये को लेकर चिंता बढ़ाई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने अडानी पावर को बड़ी राहत देते हुए कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी द्वारा दाखिल करीब ₹1,005 करोड़ के बिजली बिलों की वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत के इस फैसले से कर्नाटक की डिस्कॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। ₹1,005 करोड़ के बिल को लेकर था विवाद कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि अडानी पावर ने सरकारी पोर्टल पर करीब ₹1,005 करोड़ के गलत बिल अपलोड किए हैं। डिस्कॉम कंपनियां इन बिलों के भुगतान पर रोक चाहती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया। अडानी पावर को क्या फायदा होगा? फैसले के बाद अडानी पावर के लिए इन बिजली खरीद लेनदेन से जुड़े दावों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी को तुरंत ₹1,005 करोड़ की पूरी रकम मिल गई है; बिलों की वैधता और भुगतान से जुड़े आगे के कानूनी/नियामकीय पहलू अलग-अलग स्तर पर रह सकते हैं। शेयर बाजार की नजर भी फैसले पर अडानी पावर के लिए यह फैसला ऐसे समय आया है जब अडानी समूह की कंपनियां निवेशकों के फोकस में हैं। बाजार में इस तरह के कानूनी फैसलों को कंपनी की देनदारियों, संभावित प्राप्तियों और भविष्य के नकदी प्रवाह के संदर्भ में देखा जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार जल्द ही ‘Banking for Viksit Bharat’ के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन करेगी। यह समिति भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और विकसित भारत की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था को तैयार करने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी। बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधारों की तैयारी वित्त मंत्री ने PSB Confluence 2026 में कहा कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र फिलहाल मजबूत स्थिति में है और यह बड़े सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल समय है। उन्होंने खास तौर पर बैंकों की बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और कम एनपीए का उल्लेख किया। युवाओं और निवेश पर रहेगा फोकस प्रस्तावित समिति के सामने बैंकिंग व्यवस्था को देश की अगली विकास यात्रा से जोड़ने की चुनौती होगी। मौजूदा चर्चा में डिपॉजिट जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाएं, निवेश चक्र को समर्थन और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) जैसे विषय प्रमुख हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग का भविष्य देश के युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। बजट में पहले ही हो चुका है ऐलान वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने ‘High Level Committee on Banking for Viksit Bharat’ बनाने का प्रस्ताव रखा था। समिति का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करना और वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन तथा उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए इसे भारत की अगली विकास अवस्था के अनुरूप बनाना है। इस महीने हो सकता है समिति का गठन वित्त मंत्री के ताजा बयान के मुताबिक समिति की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी संकेत दिया है कि पैनल के गठन की प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो सकती है। PSB Confluence में हुई चर्चा और तैयार दस्तावेज समिति के लिए शुरुआती इनपुट का काम करेंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की उम्मीद कमजोर पड़ने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड 91.14 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI करीब 85.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। दोनों कीमतें जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर के आसपास हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार को झटका तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में बढ़ता गतिरोध है। ईरान ने बातचीत विफल होने के बाद अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपनाने की बात कही है, जबकि अमेरिका ने मौजूदा युद्धविराम को आगे बढ़ाने से इनकार किया है। इससे निवेशकों को आशंका है कि मध्य पूर्व में संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। हॉर्मुज में टैंकरों की आवाजाही घटी तेल बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। Reuters के अनुसार, हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या में भारी गिरावट आई है—शनिवार को केवल पांच टैंकर गुजरे, जबकि रविवार को कोई टैंकर नहीं निकला। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो मध्य पूर्व से एशिया और अन्य बाजारों तक तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों में भूराजनीतिक जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है। भारत पर भी पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर से ऊपर रहने का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। Reuters के मुताबिक मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.68-95.72 के आसपास कमजोर खुलने की आशंका जताई गई थी, जिसमें महंगे तेल को एक प्रमुख दबाव माना गया। आगे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सैन्य घटनाक्रम पर है। यदि कूटनीतिक समाधान की उम्मीद और कमजोर होती है या हॉर्मुज में तेल परिवहन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो ब्रेंट में और तेजी का जोखिम बना रहेगा। वहीं, बातचीत में प्रगति होने पर कीमतों में राहत भी देखने को मिल सकती है।
दोहा, एजेंसियां। कतर में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत पैसे भेजना अब और आसान हो गया है। Qatar Post ने India Post, Universal Postal Union (UPU) और NPCI International Payments Limited (NIPL) के सहयोग से UPI आधारित PosTransfer सेवा शुरू की है। इसके जरिए कतर से भारत में UPI-सक्षम बैंक खाते में सीधे पैसे भेजे जा सकेंगे। यह सेवा 15 अगस्त 2026 से उपलब्ध हुई है। Qatar Post के जरिए भेज सकेंगे पैसे नई व्यवस्था के तहत कतर में ग्राहक भाग लेने वाले Qatar Post आउटलेट पर जाकर भारत में पैसा भेज सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का UPI ID और जरूरी पहचान संबंधी जानकारी देनी होगी। भारत में प्राप्तकर्ता को अपने UPI ऐप के जरिए विदेशी रकम प्राप्त करने की सुविधा सक्रिय करनी होगी। इसके बाद राशि सीधे संबंधित UPI-सक्षम बैंक खाते में जमा हो जाएगी। कितनी रकम भेज सकेंगे? उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस सेवा में एक लेनदेन के लिए 10 से 4,000 कतर रियाल तक भेजे जा सकते हैं। भारतीय मुद्रा में अधिकतम सीमा ₹1 लाख प्रति लेनदेन है। प्रति लेनदेन 15 कतर रियाल का फ्लैट सेवा शुल्क निर्धारित किया गया है। कतर में रहने वाले भारतीयों को होगा फायदा कतर में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और नियमित रूप से अपने परिवारों को भारत पैसे भेजते हैं। नई सेवा से उन्हें पारंपरिक बैंकिंग या अन्य माध्यमों के अलावा डाक नेटवर्क और UPI का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सीमा-पार धन हस्तांतरण को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और सुलभ बनाना है। भारत के UPI नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय विस्तार यह सेवा UPU के इंटरकनेक्शन प्लेटफॉर्म को भारत के UPI इकोसिस्टम से जोड़ती है। इससे अंतरराष्ट्रीय डाक नेटवर्क के जरिए UPI-सक्षम खातों में धन भेजना संभव हुआ है। भारत सरकार के मुताबिक India Post अन्य देशों के डाक ऑपरेटरों के साथ भी ऐसे PosTransfer-UPI कॉरिडोर शुरू करने पर काम कर रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया। कारोबार खुलते ही सेंसेक्स करीब 250 अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे आ गया निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट सुबह 9:15 बजे निफ्टी 50 करीब 0.26% गिरकर 24,223.85 पर था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 0.40% टूटकर 77,418.97 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टरों में से 11 में गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 0.1% नीचे रहे। IT शेयरों पर ज्यादा दबाव शुरुआती कारोबार में IT शेयरों में बिकवाली ज्यादा देखने को मिली। Infosys और HCL Technologies समेत प्रमुख IT शेयरों पर दबाव रहा। बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क है और ऊंचे कच्चे तेल के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है। कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता अमेरिका-ईरान युद्धविराम की अवधि समाप्त होने और नए समझौते की संभावना कमजोर पड़ने से ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार पहुंच गया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता है। आज बाजार के लिए अहम स्तर तकनीकी तौर पर 24,200 के आसपास निफ्टी का अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे लगातार कारोबार होने पर 24,050 के आसपास अगला सपोर्ट देखा जा सकता है, जबकि ऊपर की तरफ 24,360-24,400 क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध बन सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, आकलन वर्ष 2026 में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 39 फीसदी बढ़कर 576 हो गई। आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 415 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह वृद्धि देश में बढ़ती आय, कारोबारी विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है। एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाता भी बढ़े रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ अति-उच्च आय वर्ग में ही वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि एक करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। आकलन वर्ष 2026 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 5,35,672 हो गई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 4,71,419 था। यानी एक साल में इस वर्ग में करीब 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। चार साल में चार गुना बढ़े 100 करोड़ से अधिक आय वाले करदाता 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आकलन वर्ष 2022 में इस वर्ग में सिर्फ 142 करदाता थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 301 हो गई, यानी 112 फीसदी की वृद्धि हुई। हालांकि, आकलन वर्ष 2024 में संख्या घटकर 284 रह गई। इसके बाद फिर तेजी आई और 2025 में यह आंकड़ा 415 तथा 2026 में बढ़कर 576 हो गया। इस तरह आकलन वर्ष 2022 के मुकाबले 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या करीब चार गुना हो चुकी है। एक करोड़ से अधिक आय वालों की संख्या दोगुने से ज्यादा एसबीआई रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या भी लगातार बढ़ी है। आकलन वर्ष 2022 में यह संख्या 1,93,800 थी, जो 2023 में 2,69,184 और 2024 में 3,49,974 हो गई। 2025 में यह आंकड़ा 4,71,419 और 2026 में 5,35,672 पहुंच गया। यानी आकलन वर्ष 2022 की तुलना में अब एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। पहली तिमाही में 8 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान एसबीआई रिसर्च ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, ऋण वृद्धि 19.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि एफसीएनआर(बी) जमा योजना के जरिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है और यह बढ़कर करीब 707 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सभी क्षेत्रों में समान नहीं है आर्थिक मजबूती हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में एक जैसी वृद्धि नहीं दिख रही है। जून तिमाही में स्वास्थ्य सेवा, सीमेंट और मनोरंजन जैसे कुछ क्षेत्रों के मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि जहां उच्च आय वर्ग और कुछ कारोबारों की कमाई में तेज वृद्धि हुई है, वहीं कॉरपोरेट क्षेत्र के कुछ हिस्से अब भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकिंग क्षेत्र को लेकर बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग’ विषय पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगी। यह समिति देश के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुधारों को लेकर सरकार को सुझाव देगी। पीएसबी कॉन्फ्लुएंस में वित्त मंत्री ने दी जानकारी निर्मला सीतारमण ने यह घोषणा पीएसबी कॉन्फ्लुएंस को संबोधित करते हुए की। उन्होंने बताया कि समिति के गठन की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। समिति बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार के सामने रखेगी। वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण पर जोर प्रस्तावित समिति का प्रमुख उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को भारत की अगली विकास यात्रा के अनुरूप तैयार करना है। समिति वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान देगी। सरकार का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बैंकिंग प्रणाली जरूरी है। ऐसे में समिति बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर सुधारों का सुझाव देगी। बजट 2026 में किया गया था समिति का प्रस्ताव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट में इस उच्च-स्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था। बजट में बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के साथ इसे भारत की अगली आर्थिक वृद्धि के चरण के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया था। अब सरकार समिति के गठन की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके सुझावों से बैंकिंग क्षेत्र में नीतिगत सुधारों और वित्तीय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की राह तैयार हो सकती है।
नई दिल्ली। घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अनिवार्य आधार बायोमेट्रिक e-KYC कराने की अंतिम तारीख 16 अगस्त से बढ़ाकर 23 अगस्त 2026 कर दी गई है। तेल विपणन कंपनियों ने यह फैसला गैस एजेंसियों पर बढ़ती भीड़ और उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए लिया है। सर्वर और ऐप की तकनीकी दिक्कत बनी आफत डेडलाइन बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं की परेशानी कम नहीं हुई है। कई जगह गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं। आधिकारिक ऐप में तकनीकी समस्या और सर्वर डाउन रहने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं को एजेंसी पहुंचने के बाद भी e-KYC पूरी नहीं हो पा रही है। 23 अगस्त तक e-KYC नहीं कराई तो क्या होगा? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक e-KYC नहीं कराने पर LPG कनेक्शन तुरंत ब्लॉक या रद्द नहीं होगा, लेकिन सरकारी सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाएगा। गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं उपभोक्ता सिलेंडर की डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मचारी के पास उपलब्ध डिवाइस से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराने की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे एजेंसी पर लगने वाली लंबी कतार से बचा जा सकता है। मोबाइल से ऐसे करें e-KYC गैस कंपनी के आधिकारिक ऐप के जरिए भी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा सकती है। आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन के लिए UIDAI का Aadhaar FaceRD ऐप इस्तेमाल किया जा सकता है। सर्वर पर ज्यादा लोड होने की स्थिति में सुबह जल्दी या देर रात प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को मिलने वाली 24वीं किस्त का इंतजार अब बढ़ता जा रहा है। सरकार अब तक योजना की 23 किस्तें जारी कर चुकी है। पिछली किस्त जून 2026 में जारी हुई थी और इसका लाभ करीब 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिला था। अक्टूबर में जारी हो सकती है 24वीं किस्त पीएम किसान योजना की किस्त आमतौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती है। जून में 23वीं किस्त जारी होने के बाद चार महीने का अंतराल अक्टूबर 2026 में पूरा हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी कर सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी 24वीं किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। इसलिए किसानों को अंतिम तारीख के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। किसानों के खाते में सीधे पहुंचते हैं पैसे पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को किस्त की राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचती है और बीच में किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती। किस्त से पहले किसान क्या करें? 24वीं किस्त का लाभ पाने के लिए किसानों को अपनी ई-केवाईसी, बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी सही रखने पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी जानकारी में गड़बड़ी होने पर किस्त अटक सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा नीचे खुला, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में रहा। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा गिरा सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 100 से अधिक अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,892.92 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 करीब 22.55 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 24,343.45 पर पहुंच गया। बड़े बैंकिंग शेयरों और आईटी कंपनियों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए कारोबार में सतर्क रुख अपनाया। इन सेक्टर्स में दिखी ज्यादा कमजोरी शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 0.98 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक और एफएमसीजी इंडेक्स में भी करीब 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। रियल्टी, सीमेंट, आईटी, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी रही। हालांकि, निफ्टी केमिकल्स में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 0.45 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। क्रूड ऑयल 89 डॉलर के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भारतीय बाजार में तेजी की राह में बड़ी बाधा बन सकती है। 24,000-24,600 के दायरे में रह सकता है निफ्टी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति में बड़ा सुधार नहीं होने तक निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे में कारोबार कर सकता है। तकनीकी स्तर पर 24,329 से 24,240 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 24,540 से 24,666 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी 24,170 के नीचे फिसलता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह 23,575 के स्तर तक जा सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार के वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत तिमाही नतीजों वाले चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशे जा सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में एक बार फिर बदलाव किया है। 15 अगस्त 2026 से लागू नई दरों में पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। वहीं डीजल और विमानन ईंधन ATF पर भी शुल्क घटाया गया है। यह बदलाव फिलहाल 15 से 31 अगस्त 2026 के पखवाड़े के लिए लागू है। पेट्रोल पर टैक्स पूरी तरह खत्म, डीजल और ATF भी सस्ते वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर पहले ₹3.50 प्रति लीटर SAED लगाया जा रहा था, जिसे अब घटाकर ₹0 कर दिया गया है। डीजल पर शुल्क ₹25.50 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर और ATF पर ₹22 से घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह डीजल पर ₹1.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹2.50 प्रति लीटर की कमी की गई है। पेट्रोल पर ₹3.50 प्रति लीटर का पूरा निर्यात शुल्क हटा दिया गया है। सरकार हर दो सप्ताह में करती है समीक्षा भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये शुल्क स्थायी दर नहीं हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों तथा घरेलू आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए इनकी हर पखवाड़े समीक्षा करती है। मौजूदा बदलाव भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे समय में पेट्रोलियम कंपनियों के असाधारण निर्यात लाभ पर अतिरिक्त कर लगाना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। यह व्यवस्था 2022 में शुरू हुई थी और 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ी ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच इसे दोबारा लागू किया गया। घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमत पर सीधा असर नहीं यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात शुल्क में कटौती का मतलब पेट्रोल या डीजल के घरेलू पंप मूल्य में तत्काल कमी नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस बदलाव का संबंध मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले शुल्क से है। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में इस अधिसूचना से बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों को निर्यात में मिल सकती है राहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क खत्म होने और डीजल तथा ATF पर शुल्क घटने से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कुछ अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है। इसका असर कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर पड़ सकता है, खासकर तब जब वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी हो।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने विदेश में मौजूद ऐसी संपत्तियों और आय को घोषित करने के लिए Foreign Assets of Small Taxpayers–Disclosure Scheme (FAST-DS), 2026 शुरू की है, जिन्हें पात्र करदाताओं ने पहले आयकर रिटर्न में घोषित नहीं किया था। यह एकमुश्त स्वैच्छिक घोषणा योजना 16 अगस्त 2026 से लागू हो गई है और इसके तहत 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। किन संपत्तियों की हो सकेगी घोषणा योजना के तहत विदेश में मौजूद बैंक खाते, शेयर और अन्य वित्तीय निवेश, विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी, संपत्ति तथा अन्य विदेशी परिसंपत्तियों से संबंधित अघोषित जानकारी घोषित की जा सकती है। कुछ मामलों में विदेश में अर्जित लेकिन भारत में घोषित नहीं की गई आय भी इसके दायरे में आती है। दो अलग श्रेणियों में मिलेगा लाभ पहली श्रेणी में अघोषित विदेशी संपत्ति या आय का कुल मूल्य ₹1 करोड़ तक होने पर 30% कर के साथ कर के बराबर अतिरिक्त राशि देनी होगी, यानी कुल भुगतान 60% तक हो सकता है। दूसरी श्रेणी में कुछ ऐसी विदेशी संपत्तियां शामिल हैं जो पहले से कर चुकाई गई आय से खरीदी गई थीं या गैर-निवासी अवधि में हासिल हुई थीं, लेकिन रिटर्न में रिपोर्ट नहीं की गईं। इस श्रेणी में ₹5 करोड़ तक की संपत्ति के लिए ₹1 लाख का शुल्क निर्धारित है। घोषणा के बाद क्या फायदा मिलेगा सरकार के अनुसार, पात्र करदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत घोषणा और भुगतान पूरा करने पर संबंधित मामलों में अतिरिक्त कर, जुर्माने और अभियोजन से निर्धारित सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य छोटे करदाताओं को अपनी अघोषित विदेशी संपत्तियों को नियमित करने का एक सीमित अवसर देना है। हालांकि, पात्रता और छूट की शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के रासायनिक उद्योग में तेज विस्तार की संभावनाओं के बीच 2030 तक देश का रासायनिक निर्यात करीब 81 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। रासायनिक क्षेत्र को भारत के औद्योगिक विकास और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बड़ी भूमिका निभाने वाला क्षेत्र माना जा रहा है। रासायनिक क्षेत्र में बढ़ रहा भारत का दबदबा भारत इस समय दुनिया के प्रमुख रासायनिक उत्पादकों में शामिल है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से करीब 45 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग 10.6% था। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि जरूरी नीतिगत कदम उठाए जाते हैं तो 2030 तक भारत के रासायनिक उत्पादन और वैश्विक मूल्य शृंखला में हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में 2030 तक 35-40 अरब डॉलर के अतिरिक्त निर्यात की संभावना भी बताई गई है। विशेष रसायनों और उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर जोर भारत के लिए भविष्य में स्पेशलिटी केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और उच्च मूल्य वाले रासायनिक उत्पाद निर्यात वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं। वैश्विक कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति केंद्र तलाश रही हैं, जिससे भारत को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। भारत का रासायनिक उद्योग 175 से अधिक देशों को उत्पादों का निर्यात करता है। अमेरिका, चीन और कई नए बाजार इसके प्रमुख निर्यात गंतव्यों में शामिल हैं। तीन मेगा केमिकल पार्कों से मिलेगी मदद केंद्र सरकार ने रासायनिक विनिर्माण को मजबूत करने के लिए तीन समर्पित केमिकल पार्क विकसित करने की योजना शुरू की है। बजट 2026-27 में इसके लिए ₹600 करोड़ का प्रावधान किया गया था और हाल में ₹3,030 करोड़ की BHAVYA Rasayan योजना को अधिसूचित किया गया है। इन पार्कों का उद्देश्य साझा बुनियादी ढांचे के जरिए उत्पादन लागत घटाना, आयात पर निर्भरता कम करना और निवेश आकर्षित करना है। अगर भारत उत्पादन क्षमता, बंदरगाह सुविधाओं, तकनीक, कौशल विकास और मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से काम करता है, तो 2030 तक रासायनिक निर्यात में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 70.71 अंक यानी 0.09% फिसलकर 78,009.25 पर, जबकि Nifty 50 29.85 अंक यानी 0.12% गिरकर 24,366 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा। किन वजहों से दबाव में रहा बाजार निवेशकों का ध्यान वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर बना रहा। Brent क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों को लेकर भी बाजार सतर्क नजर आया। सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन कारोबार में ऑटो, एनर्जी, FMCG, मेटल, फार्मा और रियल्टी जैसे कई सेक्टर दबाव में रहे, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया शेयरों में करीब 1% की मजबूती देखने को मिली। बाजार में 1,855 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,244 शेयरों में गिरावट रही।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।