फाइनेंस

Stock market graph falling amid geopolitical tensions with investors analyzing data on screens
पश्चिम एशिया तनाव के बीच बाजार में गिरावट, लेकिन एक्सपर्ट्स को दिख रहे ‘जेम’ स्टॉक्स-क्या यही सही निवेश का समय है?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है, जहां हालिया हफ्तों में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस गिरावट के बीच कई ब्रोकरेज फर्म्स इसे एक बड़ा निवेश अवसर मान रही हैं और करीब 80 ऐसे शेयरों की पहचान की गई है जिन्हें ‘वैल्यू बाय’ माना जा रहा है। क्यों गिरा बाजार? बाजार में गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भू-राजनीतिक तनाव कंपनियों की कमाई पर दबाव निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता Kotak Equities के मुताबिक, बाजार फिलहाल इस बात को लेकर चिंतित है कि युद्ध लंबा खिंचेगा या यह सिर्फ अल्पकालिक झटका है। इन सेक्टर्स में दिख रहा है मौका ब्रोकरेज हाउसों ने जिन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा संभावनाओं वाला बताया है, उनमें शामिल हैं: कंजम्प्शन डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग इन सेक्टर्स के कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। टॉप ब्रोकरेज की पसंदीदा कंपनियां विभिन्न ब्रोकरेज फर्म्स ने जिन प्रमुख शेयरों को चुना है, उनमें शामिल हैं: Kotak Equities की पसंद DLF Godrej Consumer Products Info Edge Coforge Dixon Technologies Motilal Oswal की पसंद Bharti Airtel State Bank of India ICICI Bank Infosys Limited Tata Steel Elara Securities की पसंद HDFC Bank Larsen & Toubro Maruti Suzuki Apollo Hospitals Axis Securities की पसंद Bajaj Finance Kotak Mahindra Bank Avenue Supermarts Nestlé India UBS (Global) की पसंद Reliance Industries NTPC Limited Sun Pharmaceutical Industries Adani Ports क्यों बन रहा है निवेश का मौका? ब्रोकरेज फर्म्स के अनुसार, मौजूदा गिरावट ने बाजार में आकर्षक एंट्री पॉइंट बना दिया है: Nifty 50 लगभग 17.7x फॉरवर्ड P/E पर ट्रेड कर रहा है वैल्यूएशन लंबे समय के औसत से नीचे आ गया है उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम कम हुआ है एक्सपर्ट की राय Emkay Global ने दिसंबर 2026 तक निफ्टी का लक्ष्य 29,000 रखा है और FY27 में करीब 15% अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जताया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। अगर युद्ध लंबा चलता है, तो महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Stock market screen showing Sensex Nifty fall with Indian rupee strengthening against dollar
छठे हफ्ते भी गिरावट में शेयर बाजार, लेकिन रुपये की दमदार वापसी ने संभाला माहौल

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार छठे सप्ताह भी जारी रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार दबाव में रहा। हालांकि, हफ्ते के अंत में रुपये की मजबूती और कुछ सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन ने नुकसान को सीमित करने में मदद की। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट इस सप्ताह BSE Sensex 263.67 अंक यानी 0.35% गिरकर 73,319.55 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 106.5 अंक यानी 0.46% की कमजोरी के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा और निवेशकों में सतर्कता बनी रही। किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी? सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे: Nifty Healthcare और Nifty Pharma में 3% से ज्यादा की गिरावट Nifty Auto, PSU Bank, Private Bank और Consumer Durables में करीब 1% की कमजोरी वहीं, कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा दिया: Nifty IT, Metal और Defence इंडेक्स में 2–3% की बढ़त किन कंपनियों को हुआ फायदा-नुकसान? इस सप्ताह Bharti Airtel में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट Sun Pharmaceutical Industries, NTPC Limited और ICICI Bank में भी गिरावट वहीं दूसरी ओर: Tata Consultancy Services Infosys Limited Bharat Electronics Limited इन कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल BSE Smallcap इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त कुछ शेयरों में 10–20% तक की तेजी देखी गई BSE Midcap इंडेक्स 0.5% गिरा, जिसमें कई फाइनेंशियल और ऑटो स्टॉक्स दबाव में रहे रुपये की ऐतिहासिक वापसी इस हफ्ते भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की। सोमवार को यह पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था लेकिन हफ्ते के अंत तक 171 पैसे मजबूत होकर 93.10 पर बंद हुआ यह पिछले 12 वर्षों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली Foreign Institutional Investors ने सातवें हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी इस दौरान ₹29,425 करोड़ के शेयर बेचे वहीं Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹29,274 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Fuel station displaying petrol and diesel prices board with vehicles refueling at pump
पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी: 4 अप्रैल 2026 को जानें आपके शहर में क्या है ताजा रेट

देशभर में हर सुबह की तरह आज 4 अप्रैल 2026 को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं। आज ज्यादातर महानगरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। हालांकि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम स्थिर देश के प्रमुख महानगरों में आज पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर है मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर कोलकाता में ₹105.41 प्रति लीटर चेन्नई में ₹101.06 प्रति लीटर बेंगलुरु में ₹102.92 प्रति लीटर वहीं, नोएडा में पेट्रोल 13 पैसे महंगा होकर ₹94.90 पर पहुंच गया है, जबकि बिहार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है। बिहार और झारखंड में हलचल पटना में पेट्रोल ₹105.23 पर स्थिर मुजफ्फरपुर में ₹106.45 (+0.67) भागलपुर में ₹106.66 (+0.45) रांची में ₹98.70 (+0.26) जमशेदपुर में ₹97.80 (-0.18) यह उतार-चढ़ाव स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण देखा जा रहा है। डीजल के दाम: बाजार के लिए राहत डीजल की कीमतें भी आज अधिकतर शहरों में स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता में ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई में ₹92.61 प्रति लीटर झारखंड के रांची में डीजल 25 पैसे महंगा हुआ है, जबकि जमशेदपुर में 18 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है। क्यों बदलती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? फ्यूल की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करती हैं: कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी राज्य सरकारों का VAT इन्हीं वजहों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं। घर बैठे ऐसे जानें ताजा रेट आप SMS के जरिए भी अपने शहर का फ्यूल रेट आसानी से चेक कर सकते हैं: Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Oil barrels, rising inflation graph, RBI building silhouette and stock market indicators showing economic impact of West Asia conflict on India
Iran War Impact: FY27 में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें, कंपनियों के Capex फैसले टलने के आसार

  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों के निवेश फैसलों पर पड़ेगा। RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर हिमांशु कोहली के मुताबिक: फिलहाल RBI दरों को स्थिर रख सकता है लेकिन अगर एनर्जी प्राइस बढ़ते रहे, तो FY27 में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी संभव है महंगाई और तेल कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधा का खतरा डॉलर की मजबूती ये सभी फैक्टर्स महंगाई को बढ़ा सकते हैं, जिससे RBI पर दबाव बढ़ेगा। Capex (पूंजीगत खर्च) फैसले टल सकते हैं अनिश्चित माहौल को देखते हुए: कंपनियां निवेश (Capex) फैसलों को टाल सकती हैं मैनेजमेंट Q4FY26 के नतीजों में सतर्क रुख अपना सकता है किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर? अगर युद्ध लंबा चला, तो इन सेक्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है: केमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर्स सीमेंट और मेटल्स ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लॉजिस्टिक्स और एयरलाइंस कंज्यूमर स्टेपल्स इन सेक्टर्स के मार्जिन में गिरावट आ सकती है असर कब दिखेगा? Q4FY26: असर सीमित रहने की संभावना Q1FY27 – Q2FY27: मार्जिन पर दबाव साफ दिख सकता है डिमांड में भी कमी आ सकती है RBI की रणनीति क्या हो सकती है? रेपो रेट फिलहाल स्थिर फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप OMOs के जरिए लिक्विडिटी सपोर्ट 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले ही 7% के पार जा चुकी है

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Gold and silver jewellery with falling price chart on screen, symbolizing drop in precious metal rates on Good Friday
Gold Price Today: गुड फ्राइडे पर सस्ता हुआ सोना, चांदी में भी गिरावट; जानें नए रेट

  गुड फ्राइडे के मौके पर सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। देश में सोने के ताजा भाव (3 अप्रैल) दिल्ली: ₹1,49,110 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) मुंबई: ₹1,48,960 प्रति 10 ग्राम एक दिन पहले दिल्ली में सोना ₹1,51,500 प्रति 10 ग्राम था, यानी करीब ₹3,500 की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल हाजिर सोना: $4,591.52 प्रति औंस वैश्विक स्तर पर भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। क्यों सस्ता हुआ सोना? एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कई बड़े कारण हैं: 🇺🇸 डॉलर मजबूत हुआ (0.5% बढ़कर 99–100 स्तर) कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इजरायल-अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की आशंका होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने का खतरा इन सभी कारणों से निवेशकों का रुख बदला, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा। चांदी का भी गिरा भाव सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली, हालांकि विस्तृत रेट अलग-अलग शहरों में अलग हो सकते हैं। क्या आगे और गिरेंगे दाम? विशेषज्ञों का मानना है कि: अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो सोना और सस्ता हो सकता है लेकिन भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कीमतें फिर उछल सकती हैं

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Employee receiving gratuity benefits after new rule change in India
Gratuity Rules में बड़ा बदलाव: अब 1 साल की नौकरी में भी मिलेगा लाभ, 2 दिन में होगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट

नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। New Labour Codes के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले कई महत्वपूर्ण अधिकारों को आसान और तेज बनाया गया है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर ग्रेच्युटी (Gratuity) और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) पर पड़ा है। 1 साल में ही मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ अब तक किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक लगातार नौकरी करना जरूरी होता था। लेकिन नए नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। इस बदलाव से खासतौर पर उन कर्मचारियों को फायदा होगा जो कम अवधि के लिए नौकरी करते हैं या बार-बार जॉब बदलते हैं। 2 दिन में करना होगा F&F सेटलमेंट Code on Wages, 2019 के तहत अब कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने के बाद सिर्फ 2 कार्यदिवस के भीतर उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। इसमें शामिल होंगे: बकाया वेतन लीव इनकैशमेंट अन्य सभी भुगतान पहले कंपनियों को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 45 से 90 दिन तक का समय मिल जाता था। सभी परिस्थितियों में लागू होगा नियम यह नया नियम हर स्थिति में लागू होगा: कर्मचारी का इस्तीफा रिटायरमेंट छंटनी (Layoff) अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती, तो यह कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। कर्मचारी इसके खिलाफ श्रम विभाग में शिकायत कर सकता है और देरी से भुगतान पर ब्याज का दावा भी कर सकता है। 30 दिनों में मिलेगा ग्रेच्युटी भुगतान ग्रेच्युटी के लिए पात्र बनने के बाद कंपनी को 30 दिनों के भीतर इसका भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक राहत जल्दी मिलेगी। कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं ये बदलाव? इन नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रेच्युटी अब ज्यादा लोगों के लिए सुलभ होगी नौकरी छोड़ने के बाद पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Stock market screen showing sharp decline after Donald Trump statement on Iran tensions and rising oil prices.
ट्रम्प के बयान से बाजार में घबराहट, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद वैश्विक तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है। सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की गिरावट कारोबार के दौरान: Nifty 50 1.95% गिरकर 22,236.80 पर पहुंच गया BSE Sensex 1.95% टूटकर 71,710.72 पर आ गया एशियाई बाजारों में भी लगभग 2% की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर Strait of Hormuz में संभावित बाधा को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने घटाया भरोसा ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दी है। कारण: ऊंची क्रूड कीमतों से कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में बिकवाली का असर हर सेक्टर पर दिखा: बैंक और फाइनेंशियल शेयर करीब 2.5% गिरे PSU बैंक इंडेक्स 3.1% तक लुढ़का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब 3% की गिरावट RBI के नियमों का भी असर Reserve Bank of India (RBI) के नए फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बैंकों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है। फार्मा शेयरों पर भी दबाव फार्मा सेक्टर में करीब 3.75% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Lupin pharma logo with stock chart showing share decline after Philippines acquisition announcement.
Lupin के शेयर में 2% की गिरावट, फिलीपींस की कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान

फार्मा सेक्टर की प्रमुख कंपनी Lupin Limited के शेयरों में 2 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में करीब 2–2.5% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय आई जब कंपनी ने अपनी सहायक इकाई के जरिए फिलीपींस की कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। Multicare Pharma में 43.38% हिस्सेदारी खरीदेगी कंपनी कंपनी की नीदरलैंड्स स्थित पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Nanomi B.V. ने Multicare Pharmaceuticals Philippines Inc. (MPPI) में 43.38% हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है। कुल 1,17,94,497 शेयर खरीदे जाएंगे डील की वैल्यू लगभग 39.6 मिलियन डॉलर तक हो सकती है यह अधिग्रहण मई 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है यह कदम Lupin के इंटरनेशनल बिजनेस विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। VISUfarma का अधिग्रहण पूरा एक अन्य अपडेट में कंपनी ने बताया कि Nanomi B.V. ने VISUfarma B.V. का पूर्ण अधिग्रहण पूरा कर लिया है। 1 अप्रैल 2026 से VISUfarma और उसकी सभी सब्सिडियरी Nanomi की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयां बन गई हैं USFDA से मिली मंजूरी, पाइपलाइन मजबूत हाल ही में कंपनी को US Food and Drug Administration (USFDA) से दो दवाओं के लिए अस्थायी मंजूरी मिली- Sugammadex Injection Pitolisant Tablets Pitolisant टैबलेट्स का उत्पादन नागपुर स्थित प्लांट में किया जाएगा, जिससे कंपनी की प्रोडक्ट पाइपलाइन और मजबूत होगी। शेयर प्रदर्शन और बाजार स्थिति पिछले कारोबारी सत्र में Lupin का शेयर ₹2,273.60 पर बंद हुआ, जो ₹39.10 (1.69%) की गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹2,376 52 हफ्ते का निचला स्तर: ₹1,774 वर्तमान स्तर: हाई से 4.31% नीचे, लो से 28.16% ऊपर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.04 लाख करोड़ है। गिरावट के पीछे क्या कारण? विशेषज्ञों का मानना है कि- विदेशी अधिग्रहण पर शुरुआती लागत और अनिश्चितता निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली शॉर्ट टर्म में जोखिम की आशंका इन वजहों से शेयर में दबाव देखने को मिला है, हालांकि लॉन्ग टर्म में यह डील फायदेमंद साबित हो सकती है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Hero MotoCorp stock market graph showing share price decline despite strong sales.
मजबूत बिक्री के बावजूद फिसला Hero MotoCorp का शेयर, निवेशकों में हल्की चिंता

देश की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp के शेयरों में गुरुवार को करीब 2% की गिरावट देखने को मिली, जबकि कंपनी ने मार्च 2026 में मजबूत बिक्री आंकड़े पेश किए हैं। बेहतर सेल्स प्रदर्शन के बावजूद शेयर में आई यह गिरावट बाजार के सेंटिमेंट और मुनाफावसूली की ओर इशारा कर रही है। मार्च में बिक्री ने दिखाया दम ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। मार्च 2026 में कुल डिस्पैच 8.8% बढ़कर 5,98,198 यूनिट्स तक पहुंच गया पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5,49,604 यूनिट्स था रिटेल सेगमेंट में भी कंपनी ने शानदार ग्रोथ दर्ज की- VAHAN रजिस्ट्रेशन 24% बढ़कर 5,42,436 यूनिट्स तक पहुंच गया घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों में बढ़त घरेलू बिक्री 5,52,505 यूनिट्स रही एक्सपोर्ट 15.62% बढ़कर 45,693 यूनिट्स तक पहुंच गया खास बात यह रही कि वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सपोर्ट सेगमेंट में करीब 40% की रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की गई, जो कंपनी के ग्लोबल विस्तार की ओर मजबूत संकेत देती है। शेयर में गिरावट क्यों? मजबूत आंकड़ों के बावजूद शेयर में गिरावट के पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं- निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) पहले से ही अच्छे नतीजों की उम्मीद बाजार में शामिल होना व्यापक बाजार में उतार-चढ़ाव शेयर का प्रदर्शन पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर ₹5,124.15 पर बंद हुआ, जो ₹63.80 या 1.26% की बढ़त के साथ था। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹6,390 52 हफ्ते का निचला स्तर: ₹3,322.60 वर्तमान स्तर: हाई से करीब 19.81% नीचे, लो से 54.22% ऊपर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.03 लाख करोड़ है, जो इसे ऑटो सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल करता है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शानदार उछाल के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 1187 अंक चढ़ा

मुंबई,एजेंसियां। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद शानदार रही। बुधवार को घरेलू बाजार जोरदार बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 1,186.77 अंक यानी 1.65 प्रतिशत उछलकर 73,134.32 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 348.00 अंक की मजबूती के साथ 22,679.40 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर कारोबार के दौरान बाजार में मजबूत खरीदारी का माहौल बना रहा।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों में आई तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे भारतीय बाजारों में भी राहत की लहर देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 73,964.58 तक पहुंच गया था, जो दिन की बड़ी तेजी को दर्शाता है।   सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इटरनल जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। वहीं एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और भारती एयरटेल के शेयरों में कुछ कमजोरी देखी गई। वैश्विक बाजारों का भी भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई कंपोजिट और हैंग सेंग मजबूती के साथ बंद हुए। वहीं, यूरोपीय बाजारों और अमेरिकी वॉल स्ट्रीट में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता बढ़ी है और अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव में और कमी आती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
GST टैक्स कलेक्शन और वित्तीय आंकड़ों का प्रतीकात्मक चित्र
मार्च में जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है।   वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत ट्रेंड पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। मार्च में दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत माना जा रहा है।   घरेलू और आयात जीएसटी में वृद्धि आंकड़ों के अनुसार, घरेलू जीएसटी राजस्व मार्च में 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो देश में स्थिर खपत और घरेलू कारोबार की मजबूती को दर्शाता है। वहीं, आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती आयात गतिविधियों और बेहतर कस्टम्स कलेक्शन को इंगित करता है।   विशेषज्ञों का विश्लेषण विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में उच्च जीएसटी संग्रह का मुख्य कारण साल के अंत में व्यवसायों द्वारा करों का समय पर जमा करना और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि है। इससे सरकार की तिजोरी में अतिरिक्त राजस्व जमा हुआ, जो विकास और सार्वजनिक खर्चों के लिए उपयोगी होगा।   नतीजा मौजूदा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत में जीएसटी प्रणाली अब स्थिर और प्रभावी रूप से काम कर रही है। वित्त वर्ष के अंत में उच्च संग्रह यह भी संकेत देता है कि कर अनुपालन में सुधार हुआ है और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां सामान्य से अधिक गति से चल रही हैं।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Gold Silver Price Today
Gold Silver Price Today: सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव, जानें आज का ताजा भाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। 1 अप्रैल को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहां सोना 750 रुपये की तेजी के साथ ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, वहीं चांदी 1380 रुपये गिरकर ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नरमी की उम्मीदों और वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आया।   सोना मजबूत, चांदी में गिरावट आज के कारोबार में सोने की कीमतों में मजबूती बनी रही, जबकि चांदी दबाव में दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर बढ़ा है। दूसरी ओर, चांदी में मुनाफावसूली और औद्योगिक मांग को लेकर अनिश्चितता के कारण गिरावट दर्ज की गई।   अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला सपोर्ट वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी में हलचल बनी रही। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 1.25% बढ़कर 4,737 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। पिछले सत्र में इसमें 3.5% की तेजी देखी गई थी। वहीं, चांदी 0.42% चढ़कर 75.23 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बना हुआ है।   तेजी की वजह क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि युद्ध अगले दो से तीन हफ्तों में समाप्त हो सकता है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी संघर्ष खत्म करने की इच्छा जताई है। इन संकेतों ने बाजार में उम्मीद जगाई है।   निवेशकों की नजर फेड और महंगाई पर हालांकि वैश्विक तनाव अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तेल सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व और जेरोम पॉवेल के आगामी बयानों पर टिकी है, जो सोना-चांदी की अगली चाल तय कर सकते हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty surge with green upward trend and investor optimism
शेयर बाजार में जोरदार तेजी: निफ्टी 22,900 के पार, सेंसेक्स 2000 अंक उछला, वैश्विक संकेतों से बढ़ा भरोसा

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित कमी की उम्मीदों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में ही निफ्टी 50 ने 22,900 का अहम स्तर पार कर लिया, जबकि बीएसई सेंसेक्स करीब 2000 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। सुबह 10:03 बजे के आसपास निफ्टी 50 599 अंकों यानी 2.69% की बढ़त के साथ 22,930.50 पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स 1,988 अंकों की तेजी के साथ 73,935.73 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक संकेतों का बड़ा असर बाजार में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से युद्ध समाप्त करने की इच्छा जताने और दोनों देशों के बीच बातचीत के संकेतों ने निवेशकों के मन से अनिश्चितता कम की है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के रूप में भी दिख रहा है। एक्सपर्ट की राय Geojit Investments Limited के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति की ‘युद्ध समाप्त करने की तत्परता’ और विदेश मंत्री द्वारा अमेरिका के साथ संदेशों के आदान-प्रदान की पुष्टि इस ओर इशारा करती है कि तनाव जल्द कम हो सकता है। बाजार इस संभावित राहत को पहले ही आंकने लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च सीरीज में बैंक निफ्टी में करीब 17% की भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब इस सेक्टर में तेज रिकवरी की संभावना है। खासकर प्राइवेट बैंकिंग शेयर, जो गैर-आधारभूत कारणों से दबाव में थे, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं। टैक्स हार्वेस्टिंग और रिकवरी की उम्मीद 30 मार्च को टैक्स हार्वेस्टिंग के चलते कई सेक्टरों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई थी। अब इन्हीं शेयरों में रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे बाजार को और मजबूती मिल सकती है। ग्लोबल मार्केट्स का सपोर्ट मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। वॉल स्ट्रीट की तेजी और मध्य-पूर्व तनाव में कमी की उम्मीदों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत किया है। सोने की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला और यह लगभग दो हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। डॉलर में कमजोरी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ तनाव जल्द कम हो सकता है, ने गोल्ड को सपोर्ट दिया। एफपीआई बनाम डीआईआई संस्थागत निवेशकों की बात करें तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सोमवार को 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 14,895 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
शेयर बाजार की तेजी दर्शाता बुल स्टैच्यू
शेयर बजार में तेजी: सेंसेक्स 1900 अंक उछला, निफ्टी 22,900 के पार

मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। महावीर जयंती के कारण मंगलवार को बाजार बंद रहने के बाद आज निवेशकों ने मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,899.53 अंक चढ़कर 73,847.08 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 572.55 अंक की उछाल के साथ 22,903.95 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 94.70 पर पहुंच गया।   बाजार में तेजी की बड़ी वजह बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के जल्द खत्म होने की उम्मीद रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से संकट खत्म करने के संकेतों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों में साफ दिखाई दिया।   सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों में तेजी आज की तेजी की खास बात यह रही कि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर हरे निशान में रहे। इनमें ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला।   एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिला सपोर्ट वैश्विक बाजारों में भी तेजी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7%, जापान का निक्केई 225 चार फीसदी से अधिक, जबकि हैंग सेंग और शंघाई सूचकांक भी मजबूती में रहे। अमेरिकी बाजार में भी मंगलवार को नैस्डैक 3.83%, एसएंडपी 500 2.91% और डाउ जोन्स 2.49% चढ़ा था।   तेल की कीमतें और निवेशकों की सतर्कता हालांकि बाजार में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जो चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव से सप्लाई बाधित होने का खतरा है। उधर, सोमवार को एफआईआई ने 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 14,894 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Indian rupee falling against US dollar chart with RBI and SBI economic report concept
गिरते रुपये पर अलर्ट: SBI की रिपोर्ट में RBI से ‘तिजोरी खोलने’ की अपील, 5 बड़े कदम सुझाए

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया ऐतिहासिक दबाव में है। डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को छूने के बाद बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में देश के सबसे बड़े बैंक State Bank of India (SBI) ने एक अहम रिपोर्ट जारी कर Reserve Bank of India (RBI) को तुरंत हस्तक्षेप करने की सलाह दी है। रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है-अब इंतजार नहीं, एक्शन का समय है। क्यों दबाव में है रुपया? रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं: मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की निकासी (FPI outflow) डॉलर की वैश्विक मजबूती वित्त वर्ष 2025-26 में रुपया करीब 9.8% तक गिर चुका है-जो पिछले 14 सालों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। SBI ने RBI को सुझाए ये 5 बड़े कदम 1. फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। SBI का मानना है कि Reserve Bank of India को बाजार में डॉलर बेचकर सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगे। 2. तेल कंपनियों के लिए ‘स्पेशल डॉलर विंडो’ तेल कंपनियां रोजाना भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं। रोज 250–300 मिलियन डॉलर की मांग इससे बाजार पर दबाव बढ़ता है SBI का सुझाव है कि इनके लिए अलग विंडो बनाई जाए, जिससे खुले बाजार पर दबाव कम हो। 3. सट्टेबाजों पर सख्ती रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत फॉरेक्स रिजर्व का उपयोग कर सट्टेबाजों को “सख्त संदेश” देना जरूरी है। RBI के हस्तक्षेप से अनावश्यक गिरावट रोकी जा सकती है बाजार में भरोसा लौटेगा 4. 100 मिलियन डॉलर लिमिट पर पुनर्विचार RBI ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की है। SBI का तर्क: यह नियम पूरे बैंक पर लागू करने के बजाय केवल ट्रेडिंग गतिविधियों पर लागू हो वरना विदेशी निवेशकों के एग्जिट में दिक्कतें आ सकती हैं 5. ऑफशोर मार्केट पर नजर विदेशी बाजारों में रुपये पर दबाव और ज्यादा दिख रहा है। प्रीमियम 3.43% से बढ़कर 4.19% लिक्विडिटी संकट का खतरा SBI ने चेतावनी दी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। क्या सिर्फ भारत ही संकट में है? नहीं। एशिया की कई करेंसी दबाव में हैं: जापानी येन: ~6% गिरावट फिलिपीन पीसो: ~5.7% गिरावट दक्षिण कोरियाई वॉन: ~2.8% गिरावट यह दिखाता है कि समस्या वैश्विक है, लेकिन समाधान के लिए घरेलू नीति अहम होगी। निष्कर्ष रुपये की मौजूदा स्थिति सिर्फ एक आर्थिक संकेत नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक अस्थिरता का असर है। SBI की रिपोर्ट साफ तौर पर RBI से आक्रामक नीति अपनाने की मांग करती है। अब नजर इस बात पर होगी कि Reserve Bank of India इन सुझावों पर कितना और कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Closed stock market display board on Mahavir Jayanti with Sensex Nifty data and Gift Nifty trend
श्री महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी में शाम से ट्रेडिंग; गिफ्ट निफ्टी में तेजी

श्री महावीर जयंती के अवसर पर आज घरेलू शेयर बाजार में कारोबार पूरी तरह बंद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेडिंग नहीं हो रही है। वहीं, कमोडिटी मार्केट में भी सुबह का सत्र बंद है, लेकिन इवनिंग सेशन शाम 5 बजे से शुरू होगा, जो रात 11:30/11:55 बजे तक चलेगा। अब बाजार 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष 2026-27 के साथ सामान्य रूप से खुलेगा। बाजार का हाल: भारी गिरावट के बाद छुट्टी छुट्टी से पहले यानी 30 मार्च को बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली थी। Sensex: 1635.67 अंक (-2.22%) गिरकर 71,947.55 पर बंद Nifty: 488.20 अंक (-2.14%) गिरकर 22,331.4 पर बंद मार्च महीने में निफ्टी में 11% से ज्यादा गिरावट, जो कोरोना काल (2020) के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। बैंकिंग सेक्टर पर खास दबाव रहा, जिसकी वजह RBI की डॉलर पोजिशन पर सख्ती रही। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 2.5% से ज्यादा की गिरावट आई। सभी सेक्टर लाल निशान में पिछले कारोबारी दिन लगभग सभी सेक्टर्स में बिकवाली रही: ऑटो, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कैपिटल गुड्स, टेलीकॉम प्राइवेट बैंक और PSU बैंक कई सेक्टर इंडेक्स 2% से 4% तक टूटे, जिससे बाजार में हाहाकार जैसा माहौल रहा। एक्सपर्ट्स की राय कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक: निफ्टी ने 22,500 और सेंसेक्स ने 72,500 का अहम सपोर्ट तोड़ दिया है अब ये लेवल रेजिस्टेंस बन गए हैं अगर बाजार नीचे बना रहता है: निफ्टी: 22,000 तक गिर सकता है सेंसेक्स: 71,000 तक फिसल सकता है हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट एक मौका भी हो सकती है। एशियाई बाजारों का हाल घरेलू बाजार बंद होने के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है: Gift Nifty: 0.94% बढ़कर 22,643.50 (ग्रीन संकेत) सिंगापुर और चीन के बाजारों में तेजी जापान, हॉन्गकॉन्ग में हल्की गिरावट कोरिया (Kospi) में 2% से ज्यादा कमजोरी

surbhi मार्च 31, 2026 0
Stock market graph showing volatility with rising and falling trends in FY26 impacting investors
Stock Markets: FY26 में उतार-चढ़ाव का साल, किसने कमाया और किसने गंवाया?

वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लंबे समय बाद ऐसा हुआ जब बाजार ने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया। पूरे साल बाजार में अस्थिरता बनी रही और खासतौर पर आखिरी तिमाही में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार क्यों गिरा? FY26 में बाजार पर कई बड़े फैक्टर्स का असर पड़ा: विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली ऊंचे वैल्यूएशन, जिससे निवेशकों में डर बना रहा आईटी सेक्टर में दबाव, खासकर AI टेक्नोलॉजी के कारण मिडिल ईस्ट तनाव (अमेरिका-इजरायल-ईरान), जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट कमजोर हुआ इन सभी कारणों से बाजार में लगातार दबाव बना रहा और निवेशकों का भरोसा डगमगाया। इंडेक्स का प्रदर्शन Sensex: -7% Nifty: -5% मार्च महीना सबसे ज्यादा खराब रहा: सेंसेक्स: -11.48% निफ्टी: -11.14% बैंक निफ्टी: -15.95% यानी साल का अंत सबसे ज्यादा नुकसान के साथ हुआ। गिरावट में भी चमके ये शेयर बाजार भले गिरा, लेकिन कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL): +35% (डिफेंस सेक्टर का बूम) Shriram Finance: +36% (NBFC सेक्टर की मजबूती) Hindalco: +34% (मेटल डिमांड का फायदा) Titan: +33% (ज्वेलरी और रिटेल ग्रोथ) SBI: +27% (बैंकिंग सेक्टर का सपोर्ट) इन स्टॉक्स ने साबित किया कि सही सेक्टर चुनना कितना जरूरी है। इन शेयरों ने किया निराश कुछ बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले स्टॉक्स भी गिरावट से नहीं बच पाए: TCS: -33% (AI के कारण IT सेक्टर पर दबाव) ITC: -29% (प्रॉफिट बुकिंग और स्लो ग्रोथ) IndiGo: -21% (कॉस्ट और ऑपरेशन प्रेशर) Trent: -40% (सबसे ज्यादा गिरावट, वैल्यूएशन करेक्शन) इससे साफ है कि बड़े नाम भी जोखिम से बाहर नहीं हैं। निवेशकों के लिए क्या सीख? सिर्फ बड़े ब्रांड देखकर निवेश करना सुरक्षित नहीं सेक्टर ट्रेंड और ग्लोबल फैक्टर्स समझना जरूरी गिरते बाजार में भी मौके होते हैं डायवर्सिफिकेशन सबसे जरूरी रणनीति है

surbhi मार्च 31, 2026 0
People checking financial updates on phone as new tax, banking and payment rules come into effect
1 अप्रैल से बदलेंगे कई बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं, जिनका असर आपकी टैक्स, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और रेलवे यात्रा पर पड़ेगा।  आइए आसान भाषा में समझते हैं ये अहम बदलाव  1. इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव अब FY और AY खत्म, सिर्फ एक “टैक्स ईयर” होगा जिस साल कमाई, उसी साल का टैक्स ITR फाइलिंग: सैलरीड: 31 जुलाई 2026 अन्य: 31 अगस्त 2026 2. PAN और ट्रांजैक्शन के नियम सख्त सिर्फ आधार से PAN नहीं बनेगा इन मामलों में PAN जरूरी: ₹10 लाख+ कैश जमा ₹5 लाख+ की गाड़ी खरीद ₹20 लाख+ प्रॉपर्टी डील 3. बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड बदलाव ₹10 लाख+ कार्ड खर्च की जानकारी टैक्स विभाग को जाएगी कुछ बैंकों में: कैशबैक और लाउंज एक्सेस में बदलाव बिल पेमेंट पर 1% चार्ज ATM/UPI निकासी पर लिमिट के बाद ₹23 चार्ज 4. डिजिटल पेमेंट होगा ज्यादा सुरक्षित अब 2FA (Two-Factor Authentication) जरूरी OTP के साथ बायोमेट्रिक/डिवाइस वेरिफिकेशन भी लागू 5. रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियम सख्त अब 8 घंटे पहले तक ही रिफंड 8 घंटे के अंदर कैंसिल पर रिफंड नहीं 6. शेयर बाजार और निवेश F&O ट्रेडिंग महंगी (STT बढ़ा) SGB टैक्स नियम बदले सिर्फ ओरिजिनल खरीदार को छूट सेकेंडरी खरीदार को टैक्स देना होगा 7. सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव बेसिक + DA = कुल सैलरी का 50% जरूरी PF और ग्रेच्युटी बढ़ेगी लेकिन Take-home सैलरी घट सकती है

surbhi मार्च 31, 2026 0
NSE launching Brent Crude futures from April 13, 2026, for Indian traders and investors.
NSE 13 अप्रैल से लॉन्च करेगा ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स: जानिए क्या बदलेगा, कैसे करें ट्रेड और निवेशकों के लिए क्या मायने

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 13 अप्रैल 2026 से अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में डेटेड ब्रेंट क्रूड (Platts) फ्यूचर्स लॉन्च करने जा रहा है। S&P ग्लोबल एनर्जी (Platts) के साथ साझेदारी में शुरू हो रहा यह प्रोडक्ट भारतीय कमोडिटी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। SEBI की मंजूरी के बाद यह कदम अब भारत के ट्रेडर्स, रिफाइनरियों और निवेशकों को ग्लोबल ऑयल प्राइस पर सीधे दांव लगाने और हेजिंग करने का मौका देगा। क्या है यह नया प्रोडक्ट? ब्रेंट क्रूड दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल बेंचमार्क है, जिस पर 60-70% वैश्विक तेल व्यापार होता है। अभी तक भारत में ज्यादातर ट्रेडिंग MCX पर WTI क्रूड के आधार पर होती थी, लेकिन NSE का यह नया प्रोडक्ट सीधे ब्रेंट प्राइस से जुड़ा होगा। यानी अब भारतीय निवेशक इंटरनेशनल मार्केट के साथ ज्यादा सिंक में ट्रेड कर सकेंगे। ट्रेडिंग के नियम एक नजर में कॉन्ट्रैक्ट सिंबल: BRCRUDEOIL न्यूनतम साइज: 100 बैरल सेटलमेंट: कैश सेटल्ड (कोई फिजिकल डिलीवरी नहीं) ट्रेडिंग करेंसी: भारतीय रुपये बेस प्राइस: Platts Dated Brent Benchmark इससे ट्रेडिंग आसान, ट्रांसपेरेंट और ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब होगी। क्यों यह लॉन्च इतना अहम है? 1. ग्लोबल मार्केट से सीधा कनेक्शन अब भारतीय ट्रेडर्स सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर ट्रेड कर सकेंगे, जिससे प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी। 2. हेजिंग के नए मौके तेल कंपनियां पहले से ही कीमत लॉक कर सकेंगी, जिससे कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का जोखिम कम होगा। 3. MCX को मिलेगी टक्कर अब कमोडिटी ट्रेडिंग में NSE की एंट्री से कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जिससे निवेशकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे। 4. रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा मौका छोटे निवेशकों को भी अब ग्लोबल ऑयल मूवमेंट से कमाई का मौका मिलेगा। किन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर? ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रिफाइनरी सेक्टर एविएशन (फ्यूल कॉस्ट पर असर) ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इन सेक्टर्स के लिए हेजिंग आसान और ज्यादा प्रभावी होगी। क्या हैं जोखिम? कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जियोपॉलिटिकल तनाव का सीधा असर नए निवेशकों के लिए हाई रिस्क इसलिए बिना समझे ट्रेडिंग करना नुकसानदायक हो सकता है। निवेशक क्या करें? शुरुआती दिनों में बाजार का ट्रेंड समझें छोटे अमाउंट से शुरुआत करें ग्लोबल न्यूज (जंग, सप्लाई, OPEC फैसले) पर नजर रखें लॉन्ग टर्म के लिए इसे डाइवर्सिफिकेशन टूल की तरह देखें

surbhi मार्च 30, 2026 0
Indian stock market sees sharp volatility with Sensex down 544 points, Nifty at 22,683 amid global tensions.
Stock Market Updates: भारी गिरावट के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स 544 अंक नीचे, निफ्टी 22683 पर

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बाजार ने जोरदार गिरावट के साथ शुरुआत की। हालांकि, दिन के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर मिली। शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट सोमवार को बाजार खुलते ही भारी दबाव में नजर आया: सेंसेक्स 1018 अंक गिरकर 72,565 पर खुला निफ्टी 269 अंक टूटकर 22,549 पर ओपन हुआ यह गिरावट साफ तौर पर ग्लोबल नेगेटिव संकेतों और निवेशकों के कमजोर सेंटिमेंट का असर दिखाती है। बाद में आई रिकवरी हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में हल्की खरीदारी देखने को मिली: सेंसेक्स अब 544 अंक नीचे 73,038 पर ट्रेड कर रहा है निफ्टी 136 अंक गिरकर 22,683 के आसपास बना हुआ है इससे संकेत मिलता है कि निचले स्तरों पर कुछ निवेशक खरीदारी कर रहे हैं। गिरावट की बड़ी वजहें (डिटेल में) 1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है। इससे वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं इक्विटी मार्केट से पैसा निकलकर सुरक्षित निवेश (Gold, Bonds) की ओर जा रहा है 2. कच्चे तेल की कीमतों में विस्फोटक तेजी ब्रेंट क्रूड 115–120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया फरवरी के मुकाबले इसमें करीब 59% उछाल भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बेहद चिंताजनक है क्योंकि: महंगाई बढ़ने का खतरा कंपनियों की लागत बढ़ेगी चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है 3. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली मार्च 2026 में अब तक 1,13,810 करोड़ रुपये की बिकवाली इससे बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है और लिक्विडिटी पर असर पड़ रहा है। 4. रुपये की रिकॉर्ड गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपया 94.82 के स्तर पर पहुंच गया इसका असर: आयात महंगा विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर बाजार में और बिकवाली का दबाव एशियाई बाजारों में हाहाकार भारतीय बाजार ही नहीं, पूरे एशिया में गिरावट का माहौल: निक्केई 225 (जापान): ~3.97% गिरावट टॉपिक्स: ~3.9% नीचे कोस्पी (दक्षिण कोरिया): 5% से ज्यादा टूटा कोस्डैक: ~3.97% गिरावट हैंग सेंग फ्यूचर्स: भी दबाव में यह दर्शाता है कि गिरावट पूरी तरह ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है। अमेरिकी बाजार से भी नेगेटिव संकेत शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई: डाऊ जोन्स: 793 अंक (1.73%) गिरावट S&P 500: 1.67% गिरकर 7 महीने के निचले स्तर पर नैस्डेक: 2.15% टूटा अमेरिकी बाजार की कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। कमोडिटी मार्केट में उथल-पुथल ब्रेंट क्रूड: 115.55 डॉलर/बैरल COMEX क्रूड: 102.59 डॉलर/बैरल 27 फरवरी के बाद से तेल में तेज उछाल युद्ध के चलते सप्लाई को लेकर डर बढ़ गया है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। सेक्टोरल असर (कौन प्रभावित?) सबसे ज्यादा दबाव में: ऑटो सेक्टर (महंगा ईंधन) एविएशन (फ्यूल कॉस्ट बढ़ी) पेंट और केमिकल कंपनियां कुछ सेक्टर सुरक्षित: आईटी (डॉलर मजबूत होने से फायदा) फार्मा (डिफेंसिव सेक्टर) निवेशकों के लिए सलाह फिलहाल बाजार में हाई वोलैटिलिटी बनी रहेगी शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में सतर्कता जरूरी लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट को बायिंग ऑपर्च्युनिटी मान सकते हैं क्रूड ऑयल और ग्लोबल न्यूज पर नजर रखें

surbhi मार्च 30, 2026 0
Coal India receives ₹1057 crore battery energy storage order, signaling shift towards clean energy.
Coal India Share: 1057 करोड़ के ऑर्डर से शेयरों में हलचल संभव, क्लीन एनर्जी की ओर बड़ा कदम

Coal India News: सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया (Coal India) के शेयरों में आज हलचल देखने को मिल सकती है। कंपनी को तेलंगाना पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TGGENCO) से 1057.09 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है, जो इसके बिजनेस मॉडल में बदलाव का भी संकेत देता है। क्या है पूरा ऑर्डर? कोल इंडिया को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट पारंपरिक कोयला खनन से अलग एक नई दिशा में कदम है। प्रोजेक्ट: बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लोकेशन: चौटुप्पल, तेलंगाना कुल वैल्यू: ₹1057.09 करोड़ इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को एक बड़े पैमाने पर बिजली स्टोरेज प्लांट स्थापित करना होगा। प्रोजेक्ट की खासियत कुल क्षमता: 750 MWh स्टोरेज समय: 4 घंटे तक बिजली स्टोर प्रोजेक्ट टाइमलाइन: 18 महीने में पूरा करना होगा यह प्लांट खासतौर पर सोलर और विंड एनर्जी को स्टोर करने में मदद करेगा, जिससे पीक डिमांड के समय बिजली की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके। कमाई का नया जरिया इस डील से कोल इंडिया को सिर्फ प्रोजेक्ट वैल्यू ही नहीं, बल्कि रेगुलर इनकम का मौका भी मिलेगा: कंपनी 3.14 लाख मेगावाट प्रति माह के टैरिफ पर बिजली सप्लाई करेगी यानी यह प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म रेवेन्यू स्ट्रीम भी बना सकता है। क्लीन एनर्जी की ओर शिफ्ट अब तक कोल इंडिया मुख्य रूप से कोयला खनन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन यह ऑर्डर कंपनी के एनर्जी ट्रांजिशन प्लान को दिखाता है: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एंट्री बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में निवेश भविष्य के ग्रीन एनर्जी मार्केट में पकड़ मजबूत करने की कोशिश यह कदम निवेशकों के लिए पॉजिटिव संकेत माना जा सकता है। आगे की प्रक्रिया कंपनी को 15 दिनों के भीतर परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा करनी होगी इसके बाद फाइनल एग्रीमेंट साइन होगा यानी फिलहाल यह ऑर्डर शुरुआती स्टेज में है, लेकिन संभावनाएं मजबूत हैं। शेयर पर क्या असर? इस बड़े ऑर्डर के बाद बाजार में कोल इंडिया के शेयरों पर नजर बनी रहेगी। 27 मार्च 2026 को शेयर कीमत: ₹445 के आसपास 1 साल का रिटर्न: लगभग 11–13% 52 वीक हाई: ₹476 52 वीक लो: ₹350 इसके अलावा कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करते हुए ₹26.40 प्रति शेयर डिविडेंड भी दिया है। निवेशकों के लिए संकेत यह डील कंपनी के बिजनेस में डायवर्सिफिकेशन दिखाती है क्लीन एनर्जी में एंट्री से लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावना शॉर्ट टर्म में शेयर में वोलैटिलिटी और पॉजिटिव मूवमेंट संभव

surbhi मार्च 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0

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