रांची। झारखंड में सक्रिय मानसून के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए 28 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह और आसपास के इलाकों में अगले दो दिनों तक तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों के उफान और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने की आशंका के समय खुले स्थानों में नहीं रुकने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने को कहा गया है। कृषि और जनजीवन पर पड़ सकता है असर लगातार बारिश का असर खेती-किसानी के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के जनजीवन पर भी पड़ सकता है। कई स्थानों पर जलजमाव और सड़क यातायात प्रभावित होने की संभावना है। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन और राहत दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
रांची। एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के तहत आज पहली बार रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में मुकाबले खेले जाएंगे। डूरंड कप के 135 साल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब झारखंड की राजधानी रांची इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी कर रही है। इसे राज्य के खेल इतिहास के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और फुटबॉल प्रेमियों में मुकाबलों को लेकर खासा उत्साह है। जमशेदपुर एफसी और डिफेंडर्स एफसी के बीच पहला मुकाबला रांची में आज का पहला मैच जमशेदपुर एफसी और श्रीलंका के डिफेंडर्स एफसी के बीच खेला जाएगा। मैच शाम 5 बजे बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में शुरू होगा। यह मुकाबला डूरंड कप के ग्रुप चरण का हिस्सा है और झारखंड के दर्शकों को पहली बार अपने शहर में इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय क्लब फुटबॉल देखने का मौका मिलेगा। झारखंड में फुटबॉल को मिलेगा नया मंच राज्य सरकार, भारतीय सेना और डूरंड कप आयोजन समिति का मानना है कि रांची को मेजबान शहर बनाए जाने से झारखंड में फुटबॉल को नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और राज्य में खेल अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी। डूरंड कप के तहत रांची में ग्रुप चरण के कई मुकाबलों के साथ एक क्वार्टर फाइनल मैच भी आयोजित किया जाएगा। दर्शकों में उत्साह, सुरक्षा के कड़े इंतजाम मुकाबलों को लेकर रांची में सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रेमियों के स्टेडियम पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। आयोजकों को उम्मीद है कि डूरंड कप की सफल मेजबानी से रांची भविष्य में भी बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड में चिकन पॉक्स (छोटी चेचक) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। क्षेत्र के बड़ाघाट धीवर टोला गांव में 20 से अधिक लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिली है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और मेडिकल टीम को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। गांव में स्वास्थ्य टीम ने शुरू की जांच मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू की। संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है और ग्रामीणों को संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। संक्रमण रोकने के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि चिकन पॉक्स के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। संक्रमित मरीजों को अलग रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। क्या हैं चिकन पॉक्स के लक्षण? चिकन पॉक्स में आमतौर पर शरीर पर लाल दाने, खुजली, बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर नजर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पहचान और सावधानी से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
रांची। राजधानी रांची में एलपीजी सिलेंडर वितरण में नियमों की अनदेखी करने पर बड़ी कार्रवाई हुई है। बिना डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के गैस सिलेंडर बांटने के मामले में तीन गैस एजेंसियों पर कुल 55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई इंडियन ऑयल की ओर से की गई है। तीन एजेंसियों पर हुई कार्रवाई जांच के दौरान गैस वितरण के रिकॉर्ड और वास्तविक सप्लाई में अंतर पाया गया। इसके बाद इंडियन ऑयल ने तीन एजेंसियों पर आर्थिक दंड लगाया। सुमति इंडेन गैस एजेंसी पर 10 लाख रुपये आनंद गैस एजेंसी (बरियातू) पर 22 लाख रुपये उरांव गैस एजेंसी पर करीब 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। DAC क्यों जरूरी है? DAC यानी Delivery Authentication Code गैस सिलेंडर की सुरक्षित और सही डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उपभोक्ता तक सिलेंडर पहुंचने के बाद ही डिलीवरी प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। तेल कंपनियों ने कालाबाजारी और गलत वितरण रोकने के लिए DAC व्यवस्था को अनिवार्य किया है। जांच में मिला स्टॉक का अंतर जांच में सामने आया कि कुछ सिलेंडर बिना DAC के वितरित कर दिए गए, लेकिन कंपनी के डिजिटल सिस्टम में उनकी डिलीवरी दर्ज नहीं हुई। इससे रिकॉर्ड में स्टॉक और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। रांची की कुछ एजेंसियों में करीब 1800 सिलेंडरों का अंतर भी जांच में सामने आया। एजेंसी संचालकों ने दी सफाई गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उस समय तकनीकी समस्या और सर्वर की दिक्कत के कारण DAC समय पर जनरेट नहीं हो पा रहा था। उनका दावा है कि उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए गैस आपूर्ति जारी रखी गई थी। होम डिलीवरी व्यवस्था पर भी उठे सवाल तेल कंपनियों ने गैस एजेंसियों को नियमों के अनुसार उपभोक्ताओं के घर तक सिलेंडर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। जांच में कुछ जगहों पर सड़क किनारे सिलेंडर वितरण की शिकायतें भी सामने आई हैं।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर स्थित डिमना डैम में शुक्रवार को दर्दनाक हादसा हो गया। एमजीएम अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों की डूबने से मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों के शव बरामद किए गए। डैम घूमने गए थे डॉक्टर, गहरे पानी में जाने से हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, एमजीएम अस्पताल में कार्यरत जूनियर डॉक्टर समीर और सक्षम डिमना डैम क्षेत्र में गए थे। इसी दौरान वे पानी में चले गए और गहरे हिस्से में पहुंचने के बाद डूब गए। आसपास मौजूद लोगों ने घटना की जानकारी प्रशासन को दी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। छह घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन घटना के बाद बचाव दल ने डैम में काफी देर तक खोजबीन की। करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद दोनों डॉक्टरों के शव पानी से बाहर निकाले गए। रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, प्रशासन और सिविल डिफेंस की टीम शामिल रही। एमजीएम अस्पताल में शोक का माहौल दोनों जूनियर डॉक्टरों की मौत की खबर मिलते ही एमजीएम अस्पताल में शोक की लहर फैल गई। डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों ने इस घटना पर दुख जताया। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शुरू की जांच बोड़ाम थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस हादसे के कारणों और पूरी घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। डैम और जलाशयों में सुरक्षा को लेकर सवाल बरसात के मौसम में झारखंड के कई डैम और जलाशयों में घूमने जाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। प्रशासन पहले भी लोगों से गहरे पानी में जाने से बचने और सावधानी बरतने की अपील करता रहा है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया है। सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। टैंक में उतरते ही बिगड़ी हालत जानकारी के अनुसार, धनबाद में कुछ मजदूर सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे। टैंक के भीतर जहरीली गैस बनने के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। बचाने की कोशिश में भी उन्हें बाहर निकालने में काफी परेशानी हुई। बचाव अभियान के बाद निकाले गए शव घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद दोनों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैस से मौत के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सुरक्षा उपकरण, ऑक्सीजन जांच और सावधानी के टैंक में उतरना बेहद खतरनाक हो सकता है। प्रशासन ने शुरू की जांच पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि मजदूरों को बिना सुरक्षा इंतजाम के टैंक में क्यों उतारा गया और हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है। ऐसे हादसों को रोकने की जरूरत प्रशासन की ओर से समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं कि सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही के कारण ऐसे हादसे होते रहते हैं।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में CID ने जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े इनपुट के आधार पर JPSC के पूर्व अध्यक्ष के आवास समेत कुछ अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच CID की कार्रवाई JPSC की कुछ भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और शिकायतों की जांच के तहत की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि चयन प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी या प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। घर और अन्य ठिकानों पर पहुंची जांच टीम रिपोर्ट के अनुसार, CID की टीम ने सुबह से ही संबंधित ठिकानों पर पहुंचकर जांच शुरू की। अधिकारियों ने दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री की पड़ताल की। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। JPSC पहले भी विवादों में रहा है झारखंड लोक सेवा आयोग की कई परीक्षाएं पहले भी विवादों में रही हैं। अभ्यर्थियों ने समय-समय पर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, परिणाम में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। CID जुटा रही है सबूत जांच एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि अगर कोई अनियमितता हुई है तो उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या रही। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रांची। झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जांच प्रक्रिया में पता चला है कि राज्य के करीब 7.81 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि लगभग 2.62 लाख मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पाया है। घर-घर सत्यापन में सामने आई जानकारी निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान बीएलओ (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटाई। इस प्रक्रिया में ऐसे कई मतदाता मिले जो अब अपने पुराने पते पर नहीं रह रहे हैं और दूसरे स्थानों पर बस चुके हैं। इसके अलावा कुछ मतदाताओं के बारे में स्थानीय स्तर पर जानकारी नहीं मिल पाई है। ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 29 जुलाई तक दिया जाएगा फॉर्म भरने का मौका निर्वाचन विभाग ने ऐसे मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मतदाताओं को 29 जुलाई तक फॉर्म उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपनी जानकारी अपडेट करा सकें। इसके लिए विशेष कैंप लगाए जाने और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है। मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाने की कवायद निर्वाचन विभाग का उद्देश्य मतदाता सूची से गलत, डुप्लीकेट या स्थान बदल चुके मतदाताओं की जानकारी को अपडेट करना है, ताकि भविष्य के चुनावों में सही मतदाता सूची का इस्तेमाल हो सके। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में किसी योग्य मतदाता का नाम हटाना उद्देश्य नहीं है, बल्कि वास्तविक स्थिति के आधार पर सूची को दुरुस्त करना लक्ष्य है। राजनीतिक नजरिए से भी अहम है अभियान झारखंड में मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में आने वाले चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में बदलाव और सत्यापन प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। निर्वाचन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जिन मतदाताओं का पता बदला है या जिनकी जानकारी में बदलाव है, वे समय रहते अपनी जानकारी अपडेट करा लें।
रांची। झारखंड के युवाओं के लिए फिल्म, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में करियर बनाने का नया अवसर मिलने जा रहा है। राज्य सरकार ने युवाओं को फिल्म निर्माण, पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया और क्रिएटिव क्षेत्र में प्रशिक्षण देने के लिए रांची स्थित सूचना भवन में शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने की तैयारी की है। इससे राज्य के स्थानीय प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर मंच मिलने की उम्मीद है। छह महीने तक चलेंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम सूचना भवन में शुरू होने वाले इन पाठ्यक्रमों की अवधि लगभग छह महीने तक हो सकती है। इसमें युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में कैमरा संचालन, वीडियो एडिटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग, साउंड रिकॉर्डिंग, डिजिटल कंटेंट निर्माण और मीडिया से जुड़े अन्य विषयों को शामिल किए जाने की योजना है। स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर झारखंड में बड़ी संख्या में युवा कला, अभिनय, संगीत और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। लेकिन प्रशिक्षण और अवसरों की कमी के कारण कई प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे युवाओं को अपने ही राज्य में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। फिल्म नीति को मजबूत करने की दिशा में कदम झारखंड सरकार राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और जनजातीय विरासत फिल्म और वेब सीरीज निर्माण के लिए बेहतर संभावनाएं रखती हैं। प्रशिक्षित युवाओं के माध्यम से राज्य में फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े नए अवसर पैदा हो सकते हैं। रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद फिल्म और मीडिया क्षेत्र में एडिटिंग, कैमरा, ग्राफिक्स, लेखन, प्रोडक्शन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई रोजगार के अवसर हैं। इन कोर्स के जरिए युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर इस क्षेत्र के लिए तैयार किया जाएगा। सरकार की योजना सफल होने पर झारखंड के युवाओं को मनोरंजन और मीडिया उद्योग में अपनी पहचान बनाने का बड़ा मौका मिल सकता है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े विवादों के बीच नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने आयोग के सदस्य जमाल अहमद को पद से हटाने तथा उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में लगाए गंभीर आरोप बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग कर बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। रांची और हजारीबाग में संपत्तियों का लगाया आरोप पत्र में मरांडी ने दावा किया कि जमाल अहमद के पास रांची में 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट है और वे शहर में एक अन्य बड़े फ्लैट की भी तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा हजारीबाग में भी उनके नाम या कथित बेनामी संपत्तियां होने का आरोप लगाया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल भाजपा नेता ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया स्वयं जांच एजेंसियों के दायरे में हो, तो उसे JPSC जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर जमाल अहमद की नियुक्ति की गई। ACB जांच और पदमुक्त करने की मांग मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जमाल अहमद की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के स्रोतों की ACB से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और JPSC की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। JPSC की साख और युवाओं के भविष्य का मुद्दा मरांडी ने कहा कि JPSC जैसी संस्था पर लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य निर्भर करता है। ऐसे में आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर किसी भी प्रकार का सवाल युवाओं के विश्वास को प्रभावित करता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की। पहले से विवादों में है JPSC हाल के दिनों में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोग पहले से ही विवादों में है। छात्र संगठनों के विरोध के बीच अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया है। फिलहाल, जमाल अहमद या राज्य सरकार की ओर से बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जमशेदपुर। शहर के डिमना लेक में हुए दर्दनाक हादसे में महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों की डूबने से मौत हो गई। रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों के शव झील से बाहर निकाले गए। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज और पूरे चिकित्सा जगत में शोक का माहौल है। ड्यूटी के बाद डिमना लेक पहुंचे थे तीनों डॉक्टर जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 11 बजे ड्यूटी समाप्त होने के बाद जूनियर डॉक्टर समीर, सक्षम सिंह और उनके साथी यश डिमना लेक पहुंचे थे। इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल पानी में गिर गया, जिसे निकालने के लिए वह झील में उतरा। दोस्त को बचाने की कोशिश में हुआ हादसा मोबाइल निकालने के दौरान एक डॉक्टर गहरे पानी में फंस गया। उसे बचाने के लिए दूसरा डॉक्टर भी पानी में उतर गया, लेकिन वह भी संतुलन खो बैठा। देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में डूब गए, जबकि उनके साथ मौजूद तीसरा साथी सुरक्षित बच गया और उसने तत्काल घटना की सूचना दी। रेस्क्यू अभियान के बाद मिले दोनों शव सूचना मिलने पर पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। देर रात शुरू हुए रेस्क्यू अभियान को शुक्रवार सुबह तक जारी रखा गया। काफी मशक्कत के बाद दोनों डॉक्टरों के शव डिमना लेक से बरामद कर लिए गए। मृतकों की हुई पहचान मृतकों की पहचान 26 वर्षीय समीर, निवासी काशीडीह, और 22 वर्षीय सक्षम सिंह, निवासी बिनेका गांव (डाल्टनगंज) के रूप में हुई है। दोनों MGM मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर थे। पुलिस कर रही हादसे की जांच ग्रामीण एसपी शुभम खंडेवाल ने बताया कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि तीनों डॉक्टर आधी रात के बाद डिमना लेक क्यों गए और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मेडिकल कॉलेज में शोक की लहर इस हादसे के बाद MGM मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शोक का माहौल है। साथी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों ने दोनों दिवंगत डॉक्टरों को श्रद्धांजलि दी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना के बुकरू ट्रांसपोर्टिंग रोड पर शुक्रवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घायल अपराधी का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा है। हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमन कुमार ने बताया कि दोनों आरोपी कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पगार ओपी क्षेत्र में संचालित चंद्रगुप्त कोल खनन परियोजना के ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर कुछ अपराधियों ने फायरिंग कर गैंग का पर्चा छोड़ा है और जंगल की ओर भाग गए हैं। सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। तड़के करीब 3:15 बजे बुकरू गांव के जंगल के पास एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस वाहन को देखते ही दोनों जंगल की ओर भागने लगे। पुलिस के अनुसार, पीछा किए जाने पर बाइक असंतुलित होकर गिर गई और दोनों आरोपी पैदल जंगल की ओर भागने लगे। इसी दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर लगातार तीन से चार राउंड फायरिंग की। पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन दोबारा गोलीबारी होने पर आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई। पुलिस की तीन राउंड फायरिंग में एक गोली एक आरोपी के पैर में लगी, जबकि दूसरे को मौके से पकड़ लिया गया। घायल आरोपी की पहचान बड़कागांव थाना क्षेत्र के चेप खुर्द निवासी मोहम्मद रागीब अफजल के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी केरेडारी थाना क्षेत्र के पगार ओपी इलाके का रहने वाला है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुद को राहुल दुबे गिरोह का सदस्य बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कथित तौर पर लेवी नहीं मिलने पर कंपनी को धमकाने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ट्रांसपोर्टिंग रोड पर फायरिंग की और गैंग का पर्चा छोड़ा था। एसपी अमन कुमार ने बताया कि घायल मोहम्मद रागीब अफजल का आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
रांची। झारखंड के विश्वविद्यालयों में इन दिनों क्लस्टर सिस्टम सबसे बड़ा विवाद बन गया है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू इस व्यवस्था को लेकर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इसे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं, जबकि छात्र संगठन इसे छात्रों के भविष्य और शिक्षा तक आसान पहुंच के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। राज्य के कई विश्वविद्यालयों में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन, धरना और तालाबंदी जारी है। क्या है क्लस्टर सिस्टम? क्लस्टर सिस्टम के तहत एक ही विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कॉलेजों को एक समूह (क्लस्टर) में बांटा गया है। अब हर कॉलेज में सभी विषयों की पढ़ाई नहीं होगी। किसी कॉलेज को विज्ञान, किसी को कला और किसी को वाणिज्य का केंद्र बनाया गया है। यदि किसी छात्र का पसंदीदा विषय उसके कॉलेज में उपलब्ध नहीं है तो उसे उसी क्लस्टर के दूसरे कॉलेज में जाकर पढ़ाई करनी होगी। सरकार क्यों कर रही है लागू? उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का कहना है कि कई कॉलेज वर्षों से शिक्षकों की कमी, प्रयोगशालाओं के सीमित उपयोग और संसाधनों के असमान वितरण जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। क्लस्टर सिस्टम के जरिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों का बेहतर उपयोग होगा तथा कॉलेजों को विषयवार उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। सरकार के दावे सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी, शिक्षकों की कमी दूर होगी, संसाधनों का प्रभावी उपयोग होगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू करने में मदद मिलेगी। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। छात्र क्यों कर रहे हैं विरोध? छात्र संगठनों का कहना है कि झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने विषय की पढ़ाई के लिए दूसरे कॉलेज तक रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे। छात्राओं ने सुरक्षा और परिवहन सुविधाओं की कमी को भी बड़ी चिंता बताया है। सीटों में कटौती से बढ़ी मुश्किल क्लस्टर सिस्टम लागू होने के साथ कई विश्वविद्यालयों में विषयवार सीटों का पुनर्निर्धारण किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में 10 से 40 प्रतिशत तक सीटें घटने का दावा किया जा रहा है, जिससे छात्रों के लिए मनचाहे विषय और कॉलेज में प्रवेश पाना और कठिन हो गया है। डीएसपीएमयू में सबसे ज्यादा विरोध डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में इस व्यवस्था का सबसे अधिक विरोध देखने को मिल रहा है। यहां कॉमर्स की सीटें 540 से घटाकर 240 और बीबीए की सीटें 700 से घटाकर 180 कर दी गई हैं। वहीं जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के कई विषयों में भी सीटों में उल्लेखनीय कमी की बात सामने आई है, जिसके विरोध में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। दूसरे विश्वविद्यालयों में भी असर रांची विश्वविद्यालय के अलावा बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में भी क्लस्टर मॉडल लागू किया जा रहा है। कई कॉलेजों में विषयों का पुनर्गठन होने से छात्रों को दूसरे कॉलेजों में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों ने सुझाया समाधान पूर्व कुलपति प्रो. एस.एन. मुंडा का मानना है कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरे कॉलेज जाने वाले छात्रों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई की सुविधा दी जाए, विषय विशेषज्ञों को रोटेशन के आधार पर विभिन्न कॉलेजों में भेजा जाए तथा अधिक मांग वाले विषयों में अतिरिक्त बैच और सीटें बढ़ाई जाएं। विवाद के समाधान पर टिकी नजर शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर सिस्टम का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए परिवहन, छात्रावास, छात्रवृत्ति और पर्याप्त सीटों जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। फिलहाल सरकार और छात्र संगठनों के बीच सहमति नहीं बनने से विरोध जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा विषय बना रह सकता है।
रांची। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित कृष्णापुर गांव के रहने वाले आशीष कुमार दास को देश की अग्रणी आईटी कंपनी इंफोसिस का अगला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया गया है। कंपनी के निर्णय के अनुसार, वह 1 अप्रैल 2027 से पांच वर्षों के लिए यह जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति शेयरधारकों की मंजूरी के बाद प्रभावी होगी। इस उपलब्धि के साथ आशीष कुमार दास झारखंड के लिए गर्व का प्रतीक बन गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दास को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उनकी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का सम्मान है। मुख्यमंत्री ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस बैठक के दौरान आशीष कुमार दास के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए बताया कि उस दौरान झारखंड के खनन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और युवाओं के कौशल विकास जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि आशीष के नेतृत्व में झारखंड और इंफोसिस के बीच सहयोग और मजबूत होगा, जिससे राज्य में तकनीकी नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास के नए अवसर पैदा होंगे। सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर आशीष कुमार दास की सफलता संघर्ष और मेहनत की प्रेरक कहानी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजनगर के सरकारी एसएस प्लस टू हाई स्कूल से प्राप्त की और आगे चाईबासा के टाटा कॉलेज में पढ़ाई की। 12वीं कक्षा के दौरान पिता के निधन जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बाद में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम भी पूरा किया। तीन दशक का अनुभव, अब संभालेंगे सबसे बड़ी जिम्मेदारी आशीष कुमार दास पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इंफोसिस से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वह कंपनी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल बिजनेस पोर्टफोलियो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने वैश्विक कारोबार, ग्राहक सेवाओं, डिलीवरी और टिकाऊ व्यावसायिक रणनीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नेतृत्व किया है। फिलहाल वह अमेरिका के लॉस एंजेलिस में रहकर इंफोसिस के वैश्विक कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास निवेशक गठबंधन और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी जुड़े रहे हैं। उनकी नियुक्ति को झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।
लातेहार। झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस ने प्रतिबंधित पीएलएफआई (PLFI) के दो उग्रवादियों को हथियार और चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, दोनों उग्रवादी बालूमाथ क्षेत्र में दहशत फैलाने और हिंसक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन समय रहते की गई कार्रवाई से उनकी योजना विफल हो गई। गुप्त सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी लातेहार एसपी कुमार गौरव को सूचना मिली थी कि पीएलएफआई के कुछ उग्रवादी बाइक से चंदवा से बालूमाथ की ओर जा रहे हैं और किसी बड़ी वारदात की तैयारी में हैं। सूचना के आधार पर डीएसपी उमेश कुमार सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर छापेमारी अभियान चलाया गया। पुलिस को देखकर भागने लगे दोनों आरोपी बालूमाथ थाना क्षेत्र के मकइयाटांड़ पुलिस पिकेट के पास पुलिस ने बाइक सवार दो संदिग्धों को रोका। पुलिस को देखते ही दोनों भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन जवानों ने उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और चोरी की एक बाइक बरामद हुई। पूछताछ में PLFI से जुड़े होने की बात कबूली गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय सिंह और मोहम्मद शहजाद के रूप में हुई है, जो लोहरदगा जिले के निवासी हैं। पूछताछ में दोनों ने खुद को पीएलएफआई का सक्रिय सदस्य बताया। पुलिस के अनुसार, वे संगठन के कमांडर बादल के निर्देश पर बालूमाथ और बरियातू क्षेत्र में दहशत फैलाकर लेवी वसूलने की योजना बना रहे थे। हथियार और चोरी की बाइक बरामद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, जिंदा गोलियां और चोरी की एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद सामान को जब्त कर लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कई पुलिस अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका इस कार्रवाई में डीएसपी उमेश कुमार सिंह के अलावा बालूमाथ थाना प्रभारी अमरेंद्र कुमार, बरियातू थाना प्रभारी रंजन पासवान, सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अभिमन्यु कुमार तथा अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अब गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ कर संगठन के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
हजारीबाग। जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के बीच देर रात मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक अपराधी के पैर में गोली लग गई, जिससे वह घायल हो गया। घायल अपराधी को इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस पूरे इलाके में सर्च अभियान चला रही है। बुकरु ट्रांसपोर्टिंग रोड पर हुई मुठभेड़ जानकारी के अनुसार, केरेडारी चंद्रगुप्त कोल परियोजना क्षेत्र के बुकरु स्थित ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर कुछ अपराधियों के जुटने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलने के बाद केरेडारी थाना पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। पुलिस की गोली से घायल हुआ अपराधी मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली एक अपराधी के पैर में लगी। घायल अपराधी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच उसका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में दोनों ओर से गोलीबारी हुई थी। वहीं, एक अन्य अपराधी के भी शामिल होने की सूचना मिली है, जो मौके से फरार हो गया। मौके से हथियार और बाइक बरामद पुलिस ने घटनास्थल से एक रिवाल्वर और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। घायल अपराधी से पूछताछ कर उसके साथियों और आपराधिक गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए इलाके में लगातार छापेमारी और सर्च अभियान चलाया जा रहा है। एसपी ने घटनास्थल का लिया जायजा मुठभेड़ की सूचना मिलते ही हजारीबाग एसपी अमन कुमार चंद्रगुप्त कोल परियोजना क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। फिलहाल इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अपराधियों की तलाश जारी है। घायल अपराधी का खंगाला जा रहा इतिहास केरेडारी थाना प्रभारी वेद प्रकाश ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि घायल अपराधी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत जानकारी साझा करेगी।
कोडरमा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झारखंड के 2024 मोटरसाइकिल ब्लास्ट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने झारखंड के कोडरमा जिले में चार स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। कार्रवाई के दौरान 1,662 अवैध रूप से रखे गए नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, पांच डिजिटल उपकरण और करीब 16 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। अवैध विस्फोटक नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप NIA के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महेश मेहता और शंकर यादव के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों आरोपी अवैध तरीके से विस्फोटकों के भंडारण और उनके परिवहन से जुड़ी आपराधिक साजिश में शामिल थे। एजेंसी ने कहा कि इन विस्फोटकों को बिना वैध लाइसेंस के हासिल किया गया था और इन्हें अन्य आरोपियों तक पहुंचाने की योजना थी। 2024 में मोटरसाइकिल ब्लास्ट के बाद शुरू हुई थी जांच यह मामला वर्ष 2024 में झारखंड के साल्टोरा क्षेत्र में हुए मोटरसाइकिल विस्फोट से जुड़ा है। जांच के दौरान NIA को कथित तौर पर विस्फोटकों की अवैध खरीद, भंडारण और परिवहन करने वाले नेटवर्क का पता चला। इस मामले में इससे पहले भी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। विस्फोटकों के स्रोत और इस्तेमाल की जांच जारी NIA अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई थी और इन्हें किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाना था। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
रांची। राजधानी रांची की नगड़ी थाना पुलिस ने चांदी के जेवर और नकदी चोरी के मामले का सफल खुलासा करते हुए जमशेदपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बड़ी मात्रा में चोरी किए गए चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। 4 जुलाई को ज्वेलरी दुकान में हुई थी चोरी पुलिस के अनुसार, 4 जुलाई 2026 की रात नगड़ी थाना क्षेत्र के मोरा बाजार स्थित अमित ज्वेलर्स में अज्ञात चोरों ने सेंधमारी कर चांदी के जेवर और नकदी की चोरी कर ली थी। मामले में नगड़ी थाना कांड संख्या 113/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच के आधार पर जमशेदपुर से गिरफ्तारी जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि चोरी में शामिल एक आरोपी जमशेदपुर के आजाद बस्ती क्षेत्र में छिपा हुआ है। ग्रामीण एसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जुगसलाई थाना क्षेत्र स्थित गरीब नवाज कॉलोनी में छापेमारी कर मोहम्मद जावेद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कबूला जुर्म गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद जावेद ने पूछताछ के दौरान चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी में शामिल अन्य आरोपियों अर्जुन शर्मा, बाबू पिल्ले और दीपक कुमार सिंह उर्फ कल्लू सरकार के नामों का भी खुलासा किया। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चला रही है। चोरी के चांदी के जेवरों का बड़ा जखीरा बरामद आरोपी के घर से पुलिस ने बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण बरामद किए। इनमें 36 जोड़ी पायल, 240 पीस बिछिया, 15 बाजूबंद, चांदी का सिक्का, गणेश प्रतिमा, करधनी सहित कई प्रकार के चांदी के आभूषण शामिल हैं। सभी बरामद सामान को जब्त कर लिया गया है। वैज्ञानिक और तकनीकी जांच से मिली सफलता रांची ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने मामले का सफल उद्भेदन किया। उन्होंने कहा कि एक आरोपी की गिरफ्तारी और चोरी के आभूषणों की बरामदगी बड़ी सफलता है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में नगड़ी थाना प्रभारी अभिषेक राय, पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार सिंह और रिजर्व गार्ड के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मामले में शामिल फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और शेष चोरी गए सामान की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में बदलाव की तैयारी चल रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक ASDD (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) श्रेणी में आने वाले मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए अनुमान है कि अंतिम सूची से 25 से 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 5 अगस्त को जारी की जाएगी। ASDD श्रेणी में तेजी से बढ़ रहे मतदाता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार, 22 जुलाई तक 4,15,364 मृत, 1,29,803 अनुपस्थित, 6,09,542 स्थायी रूप से स्थानांतरित और 1,61,926 पहले से निबंधित मतदाता ASDD श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 4,486 विदेशी नागरिक भी इस सूची में शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर ASDD श्रेणी के मतदाताओं की संख्या 13 लाख से अधिक हो चुकी थी। 23 जुलाई तक आंकड़ा 14.18 लाख पहुंचा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि 23 जुलाई की सुबह तक ASDD श्रेणी में दर्ज मतदाताओं की संख्या बढ़कर 14.18 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि अंतिम स्थिति 5 अगस्त को ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद स्पष्ट होगी। ASDD श्रेणी में शामिल मतदाताओं के नाम प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होंगे। 29 जुलाई तक चलेगा गणना प्रपत्र भरने का कार्य राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत गणना प्रपत्र भरने का काम अंतिम चरण में है। यह प्रक्रिया 29 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों का सत्यापन कर ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। पश्चिमी सिंहभूम में सबसे ज्यादा ASDD मतदाता चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले में अब तक सबसे अधिक ASDD श्रेणी के मतदाता मिले हैं। जिले में 50,775 मृत, 22,169 अनुपस्थित, 62,383 स्थानांतरित, 25,647 पहले से निबंधित और 310 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। यह राज्य में सबसे अधिक संख्या है। रांची दूसरे स्थान पर ASDD श्रेणी के मामलों में रांची जिला दूसरे स्थान पर है। यहां अब तक 39,684 मृत, 11,085 अनुपस्थित, 32,120 स्थानांतरित, 13,425 पहले से निबंधित और 303 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। चुनाव आयोग इन सभी मामलों का सत्यापन कर अंतिम सूची तैयार कर रहा है। 5 अगस्त को सामने आएगी वास्तविक तस्वीर चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। अंतिम सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। ऐसे में 5 अगस्त को जारी होने वाला ड्राफ्ट रोल यह स्पष्ट करेगा कि कितने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
रांची। सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे में झारखंड के चार मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में अब तक 22 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में हजारीबाग के जागेश्वर ठाकुर, खूंटी के कृष्णा साहू और विकास कंडुलना तथा पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव निवासी मसीह बारजो शामिल हैं। हादसे की खबर के बाद संबंधित जिलों में शोक की लहर दौड़ गई है। खूंटी के दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ खूंटी जिले के रनिया प्रखंड निवासी कृष्णा साहू पिछले तीन वर्षों से परियोजना में कार्यरत थे। इसी महीने वह घर से वापस ड्यूटी पर लौटे थे। हादसे के बाद उनके बड़े भाई ने शव की पहचान कर परिवार को सूचना दी। वहीं विकास कंडुलना की पत्नी ने बताया कि वह फरवरी में गांव आए थे और मई में फिर काम पर लौट गए थे। उन्होंने बच्चों की बेहतर पढ़ाई का सपना देखा था, जो अब अधूरा रह गया। प्रशासन ने सहायता का दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलते ही रनिया के बीडीओ प्रशांत डांग, सीओ, श्रम अधीक्षक वाल्टर कुजूर, जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मृतकों के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी और सरकारी प्रावधानों के तहत हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। प्रशासन ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शवों को झारखंड लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। रोजगार के मुद्दे पर फिर उठे सवाल इस हादसे के बाद झारखंड से पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार ने आरोप लगाया कि रोजगार के अभाव में युवाओं को दूसरे राज्यों में जोखिम भरे कार्य करने पड़ रहे हैं। हजारीबाग के जागेश्वर ठाकुर के घर पसरा सन्नाटा हजारीबाग के बरही प्रखंड स्थित तिलैया बस्ती निवासी जागेश्वर ठाकुर भी इस हादसे का शिकार हो गए। उनके पुत्र राहुल ठाकुर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सिक्किम पहुंच चुके हैं। परिवार ने अभी तक उनकी पत्नी को घटना की पूरी जानकारी नहीं दी है। परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार से मुआवजा और नौकरी की मांग ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने झारखंड तथा सिक्किम सरकार से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग स्थानीय लोगों ने सुरंग निर्माण में सुरक्षा मानकों की जांच की मांग उठाई है। पड़ोसी सिद्धू कुमार दास ने कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मिट्टी और गैस की वैज्ञानिक जांच हुई थी या नहीं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। शवों के झारखंड पहुंचने का इंतजार प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के शवों को सड़क मार्ग से एम्बुलेंस के जरिए झारखंड लाया जा रहा है। जागेश्वर ठाकुर का पार्थिव शरीर शुक्रवार तक हजारीबाग पहुंचने की संभावना है। परिजन अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे हैं, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।
धनबाद। जिले के बाघमारा थाना क्षेत्र स्थित सदरयाडीह में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे में सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब एक महीने से बंद पड़े नए सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस जमा हो गई थी। सफाई के लिए अंदर उतरते ही दोनों मजदूर बेहोश हो गए और उन्हें तुरंत बाघमारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान सदरयाडीह निवासी दिलीप महतो और महुदा थाना क्षेत्र के अंधारी निवासी राजेश महतो के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही बाघमारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी, हालांकि शुरुआती जांच में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी को हादसे की वजह माना जा रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने BCCL प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बाघमारा क्षेत्र के कई गांव लंबे समय से जहरीली गैस, भू-धंसान और भूमिगत आग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। बाघमारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. ज्योति लाल ने बताया कि दोनों मजदूरों की मौत दम घुटने से हुई है। वहीं, बाघमारा अंचलाधिकारी गिरजानंद किस्कू ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए BCCL के महाप्रबंधक से पत्राचार किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।