Bag Charms Fashion Trend 2026: अगर आपका रोज़ाना इस्तेमाल होने वाला हैंडबैग आपको अब थोड़ा साधारण लगने लगा है, तो नया बैग खरीदने की ज़रूरत नहीं है। फैशन की दुनिया में इन दिनों बैग चार्म्स (Bag Charms) का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। छोटे-छोटे एक्सेसरीज़ की मदद से आप अपने पुराने बैग को भी बिल्कुल नया, स्टाइलिश और यूनिक लुक दे सकते हैं।
पोस्ट-पैंडेमिक दौर में DIY फैशन, पर्सनल स्टाइल और नॉस्टैल्जिक ट्रेंड्स की वापसी के साथ लोग अपने बैग को अलग अंदाज़ में सजाना पसंद कर रहे हैं। रंग-बिरंगे स्कार्फ, की-रिंग, मिनी पाउच और ब्रेसलेट जैसे एक्सेसरीज़ अब सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि फैशन स्टेटमेंट बन चुके हैं।
अगर आपके पास बीडेड या चार्म ब्रेसलेट है, तो उसे बैग के हैंडल पर लपेटकर नया लुक दिया जा सकता है। एक से अधिक ब्रेसलेट का इस्तेमाल करके लेयर्ड स्टाइल भी बनाया जा सकता है, जो बैग को आकर्षक और ट्रेंडी बनाता है।
की-रिंग सबसे आसान और लोकप्रिय बैग एक्सेसरी है। अपने पसंदीदा कैरेक्टर, सिंबल, रंग या डिजाइन वाली की-रिंग को बैग के ज़िप या हैंडल पर लगाकर आप अपने स्टाइल और व्यक्तित्व को अलग पहचान दे सकते हैं।
रंग-बिरंगे या प्रिंटेड शूलेस और कॉर्ड को बैग के हैंडल या स्ट्रैप पर बांधकर एक नया डिजाइन तैयार किया जा सकता है। इन्हें बो या नॉट की तरह बांधने से बैग का लुक और भी स्टाइलिश दिखाई देता है।
अगर आप क्लासी और एलिगेंट लुक पसंद करते हैं, तो बैग के हैंडल पर सिल्क स्कार्फ या रिबन बांधना बेहतरीन विकल्प है। यह छोटे बदलाव के साथ आपके बैग को प्रीमियम और फैशनेबल लुक देता है।
माइक्रो पाउच अब केवल फैशन एक्सेसरी नहीं, बल्कि बेहद उपयोगी भी हैं। इन्हें बड़े टोट बैग या शोल्डर बैग के साथ क्लिप करके लिप बाम, कार्ड, सिक्के या छोटी जरूरी चीजें आसानी से रखी जा सकती हैं। साथ ही यह बैग में रंग और स्टाइल भी जोड़ते हैं।
क्लाइम्बिंग गियर से प्रेरित कैराबिनर अब फैशन एक्सेसरी बन चुके हैं। इनमें की-रिंग, चार्म्स और मिनी पाउच को एक साथ जोड़कर बैग पर लगाया जा सकता है, जिससे बैग को मॉडर्न और ट्रेंडी लुक मिलता है।
अगर आप एयरपॉड्स इस्तेमाल करते हैं, तो उनके केस को बैग के ज़िप या स्ट्रैप पर अटैच कर सकते हैं। इससे न केवल एयरपॉड्स आसानी से मिल जाते हैं, बल्कि बैग का लुक भी अधिक स्टाइलिश दिखाई देता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Bag Charms Fashion Trend 2026: अगर आपका रोज़ाना इस्तेमाल होने वाला हैंडबैग आपको अब थोड़ा साधारण लगने लगा है, तो नया बैग खरीदने की ज़रूरत नहीं है। फैशन की दुनिया में इन दिनों बैग चार्म्स (Bag Charms) का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। छोटे-छोटे एक्सेसरीज़ की मदद से आप अपने पुराने बैग को भी बिल्कुल नया, स्टाइलिश और यूनिक लुक दे सकते हैं। पोस्ट-पैंडेमिक दौर में DIY फैशन, पर्सनल स्टाइल और नॉस्टैल्जिक ट्रेंड्स की वापसी के साथ लोग अपने बैग को अलग अंदाज़ में सजाना पसंद कर रहे हैं। रंग-बिरंगे स्कार्फ, की-रिंग, मिनी पाउच और ब्रेसलेट जैसे एक्सेसरीज़ अब सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि फैशन स्टेटमेंट बन चुके हैं। ब्रेसलेट से बढ़ाएं बैग की खूबसूरती अगर आपके पास बीडेड या चार्म ब्रेसलेट है, तो उसे बैग के हैंडल पर लपेटकर नया लुक दिया जा सकता है। एक से अधिक ब्रेसलेट का इस्तेमाल करके लेयर्ड स्टाइल भी बनाया जा सकता है, जो बैग को आकर्षक और ट्रेंडी बनाता है। की-रिंग से दें पर्सनल टच की-रिंग सबसे आसान और लोकप्रिय बैग एक्सेसरी है। अपने पसंदीदा कैरेक्टर, सिंबल, रंग या डिजाइन वाली की-रिंग को बैग के ज़िप या हैंडल पर लगाकर आप अपने स्टाइल और व्यक्तित्व को अलग पहचान दे सकते हैं। रंगीन शूलेस और कॉर्ड भी हैं ट्रेंड में रंग-बिरंगे या प्रिंटेड शूलेस और कॉर्ड को बैग के हैंडल या स्ट्रैप पर बांधकर एक नया डिजाइन तैयार किया जा सकता है। इन्हें बो या नॉट की तरह बांधने से बैग का लुक और भी स्टाइलिश दिखाई देता है। सिल्क स्कार्फ और रिबन से मिलेगी एलिगेंट फिनिश अगर आप क्लासी और एलिगेंट लुक पसंद करते हैं, तो बैग के हैंडल पर सिल्क स्कार्फ या रिबन बांधना बेहतरीन विकल्प है। यह छोटे बदलाव के साथ आपके बैग को प्रीमियम और फैशनेबल लुक देता है। मिनी पाउच बन रहे हैं नया फैशन स्टेटमेंट माइक्रो पाउच अब केवल फैशन एक्सेसरी नहीं, बल्कि बेहद उपयोगी भी हैं। इन्हें बड़े टोट बैग या शोल्डर बैग के साथ क्लिप करके लिप बाम, कार्ड, सिक्के या छोटी जरूरी चीजें आसानी से रखी जा सकती हैं। साथ ही यह बैग में रंग और स्टाइल भी जोड़ते हैं। कैराबिनर से बनाएं यूनिक क्लस्टर क्लाइम्बिंग गियर से प्रेरित कैराबिनर अब फैशन एक्सेसरी बन चुके हैं। इनमें की-रिंग, चार्म्स और मिनी पाउच को एक साथ जोड़कर बैग पर लगाया जा सकता है, जिससे बैग को मॉडर्न और ट्रेंडी लुक मिलता है। एयरपॉड केस भी बन सकता है स्टाइलिश एक्सेसरी अगर आप एयरपॉड्स इस्तेमाल करते हैं, तो उनके केस को बैग के ज़िप या स्ट्रैप पर अटैच कर सकते हैं। इससे न केवल एयरपॉड्स आसानी से मिल जाते हैं, बल्कि बैग का लुक भी अधिक स्टाइलिश दिखाई देता है।
नई दिल्ली: फैशन की दुनिया में साल 2026 में डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स, जिन्हें जॉर्ट्स भी कहा जाता है, सबसे बड़े स्ट्रीटवियर ट्रेंड के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कभी इन्हें स्टाइल करना मुश्किल माना जाता था, लेकिन अब यही परिधान युवाओं से लेकर फैशन प्रेमियों की पहली पसंद बन गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आरामदायक होने के साथ-साथ बेहद स्टाइलिश भी है और इसे अलग-अलग मौकों पर आसानी से पहना जा सकता है। चाहे ऑफिस जाना हो, दोस्तों के साथ आउटिंग, छुट्टियां बितानी हों या शाम की पार्टी, डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स हर मौके पर शानदार लुक देते हैं। सही कपड़ों और एक्सेसरीज़ के साथ इन्हें आसानी से कैजुअल या एलिगेंट स्टाइल में बदला जा सकता है। 1. टी-शर्ट के साथ डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स अगर आप रोजमर्रा के लिए आरामदायक और स्टाइलिश लुक चाहते हैं, तो मिडी लंबाई वाले डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स को फिटेड या ओवरसाइज टी-शर्ट के साथ पहनें। इसके साथ बैले फ्लैट्स, स्नीकर्स या किटन हील्स आपके लुक को और आकर्षक बना सकते हैं। 2. सफेद बरमूडा शॉर्ट्स और ओवरसाइज शर्ट गर्मी के मौसम में ऑफिस या फॉर्मल लुक के लिए सफेद बरमूडा शॉर्ट्स के साथ ओवरसाइज लिनेन या कॉटन शर्ट बेहतरीन विकल्प है। यह स्टाइल सादगी, आराम और एलिगेंस का शानदार मेल है। बैले फ्लैट्स या लोफर्स इस लुक को और निखारते हैं। 3. फेमिनिन टॉप के साथ बरमूडा शॉर्ट्स अगर आप क्लासी और मॉडर्न लुक चाहती हैं, तो डार्क डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स के साथ रफल, वन-शोल्डर या फिटेड टॉप पहनें। इसके साथ सैंडल, स्टाइलिश बेल्ट, सनग्लासेस और स्ट्रक्चर्ड बैग आपके पूरे लुक को खास बना देंगे। 4. रंगीन बरमूडा शॉर्ट्स और धारीदार टी-शर्ट सिर्फ नीले डेनिम तक सीमित न रहें। बटर येलो या अन्य हल्के रंगों के बरमूडा शॉर्ट्स इस साल काफी पसंद किए जा रहे हैं। इन्हें धारीदार टी-शर्ट या पोलो टॉप के साथ पहनकर प्रीपी स्टाइल हासिल किया जा सकता है। लोफर्स, फ्लैट सैंडल और बड़ा पेंडेंट इस लुक को पूरा करते हैं। 5. फुटबॉल जर्सी के साथ बरमूडा शॉर्ट्स स्पोर्टी फैशन भी इस साल ट्रेंड में है। हल्के रंग के डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स के साथ फुटबॉल जर्सी या शर्ट पहनकर स्पोर्टी-चिक लुक बनाया जा सकता है। इसके साथ आकर्षक स्नीकर्स पूरे लुक को और स्टाइलिश बना देते हैं। आखिर क्यों ट्रेंड में हैं बरमूडा शॉर्ट्स? डेनिम बरमूडा शॉर्ट्स आराम, फैशन और बहुउपयोगिता का बेहतरीन मेल हैं। इन्हें दिन और रात दोनों समय आसानी से पहना जा सकता है। इनकी लंबाई सामान्य शॉर्ट्स की तुलना में अधिक होने के कारण ये अधिक सलीकेदार और मॉडर्न लुक देते हैं। स्टाइलिंग के आसान टिप्स घुटनों के आसपास तक की लंबाई वाले बरमूडा शॉर्ट्स चुनें। ढीले शॉर्ट्स के साथ फिटेड टॉप या शर्ट को टक-इन करके पहनें। बेल्ट, सनग्लासेस और स्टाइलिश बैग से लुक को बेहतर बनाएं। अवसर के अनुसार स्नीकर्स, लोफर्स, सैंडल, बैले फ्लैट्स या किटन हील्स चुनें। कम लेकिन आकर्षक एक्सेसरीज़ पहनें ताकि लुक संतुलित और मॉडर्न दिखे।
एक्ने-प्रोन और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए रेटिनॉइड्स का इस्तेमाल अक्सर चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जलन, लालिमा और स्किन पर्जिंग जैसी समस्याओं के कारण कई लोग इनसे दूरी बना लेते हैं। हालांकि, हाल ही में लॉन्च हुआ Amahvas Ocean of Milk Nocturnal Renewal Concentrate अपनी हल्की और बैरियर-फ्रेंडली फॉर्मूलेशन की वजह से चर्चा में है। शुरुआती अनुभव बताते हैं कि यह सीरम प्रभावी होने के साथ-साथ अपेक्षाकृत सौम्य भी है। क्या है Ocean of Milk रेटिनल सीरम? Amahvas का Ocean of Milk एक नाइट सीरम है, जिसमें 0.1% Encapsulated Retinaldehyde (रेटिनल) के साथ बायो-फर्मेंट्स, नायसिनामाइड, पीएचए, पेप्टाइड्स, ह्यूमेक्टेंट्स और अश्वगंधा जैसे तत्व शामिल किए गए हैं। ब्रांड का दावा है कि यह फॉर्मूला त्वचा की मरम्मत, टेक्सचर सुधारने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में मदद करता है। रेटिनल और रेटिनॉल में क्या अंतर है? रेटिनल और रेटिनॉल दोनों ही विटामिन-A के डेरिवेटिव हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली अलग होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनल (Retinaldehyde) त्वचा में सक्रिय रूप लेने के लिए केवल एक चरण से गुजरता है, जबकि रेटिनॉल को दो चरणों से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि रेटिनल कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम दे सकता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता के कारण सही फॉर्मूलेशन बेहद जरूरी माना जाता है ताकि त्वचा में जलन या अत्यधिक संवेदनशीलता न हो। एक्ने-प्रोन स्किन पर कैसा रहा अनुभव? रिव्यू के अनुसार, पहली बार इस्तेमाल करने पर सीरम की बनावट हल्की महसूस हुई और अगले दिन त्वचा में न तो लालिमा दिखी और न ही किसी तरह की जलन हुई। लगातार कुछ दिनों तक उपयोग करने के बाद स्किन पहले से अधिक स्मूद और संतुलित नजर आई। सबसे खास बात यह रही कि सीरम ने त्वचा पर बिना अधिक इरिटेशन के असर दिखाया, जो संवेदनशील और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि 0.1% Encapsulated Retinaldehyde एक संतुलित विकल्प माना जा सकता है, जो सामान्य रेटिनॉल और प्रिस्क्रिप्शन रेटिनॉइड्स के बीच का स्तर प्रदान करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल एक्टिव इंग्रीडिएंट ही नहीं बल्कि पूरी फॉर्मूलेशन महत्वपूर्ण होती है। यदि रेटिनल के साथ त्वचा को हाइड्रेट और शांत रखने वाले तत्व भी मौजूद हों, तो स्किन बैरियर को बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। कैसे करें इस्तेमाल? अगर आप पहली बार रेटिनल का उपयोग कर रहे हैं, तो विशेषज्ञ इन बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। शुरुआत सप्ताह में केवल 2 रात करें। धीरे-धीरे त्वचा की सहनशीलता के अनुसार उपयोग बढ़ाएं। हर बार मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। दिन में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। शुरुआत में तेज एसिड या अन्य एक्टिव्स के साथ इसे एक साथ न लगाएं। क्या यह सभी के लिए सही विकल्प है? हालांकि शुरुआती अनुभव सकारात्मक रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसा प्रतिक्रिया दे। कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में हल्की पर्जिंग या छोटे ब्रेकआउट का अनुभव हो सकता है। इसलिए किसी भी नए एक्टिव स्किनकेयर प्रोडक्ट को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। क्या है निष्कर्ष? Amahvas का Ocean of Milk उन लोगों के लिए एक दिलचस्प विकल्प बनकर सामने आया है जो रेटिनल के फायदे चाहते हैं लेकिन अत्यधिक जलन या स्किन इरिटेशन से बचना चाहते हैं। यह सीरम रातोंरात चमत्कारी बदलाव का दावा नहीं करता, बल्कि नियमित और संतुलित स्किनकेयर रूटीन के साथ धीरे-धीरे त्वचा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देता है।