नई दिल्ली, एजेंसियां। सैमसंग ने अपनी नई प्रीमियम स्मार्टवॉच Galaxy Watch Ultra 2 को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे खासतौर पर एडवेंचर, फिटनेस और हेल्थ मॉनिटरिंग को ध्यान में रखकर तैयार किया है। नई स्मार्टवॉच में बेहतर AI फीचर्स, ज्यादा बैटरी क्षमता और पहले से ज्यादा ब्राइट डिस्प्ले दिया गया है।
Galaxy Watch Ultra 2 में AI आधारित हेल्थ फीचर्स दिए गए हैं, जो यूजर की नींद, हृदय स्वास्थ्य, फिटनेस गतिविधियों और रिकवरी डेटा का विश्लेषण कर बेहतर सुझाव देने में मदद करेंगे। Samsung Health के साथ इसका इंटीग्रेशन इसे ज्यादा स्मार्ट बनाता है।
इस स्मार्टवॉच में 800mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो पिछली पीढ़ी की तुलना में लगभग 35% ज्यादा क्षमता वाली है। इसमें 5,000 निट्स ब्राइटनेस वाला डिस्प्ले दिया गया है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन आसानी से दिखाई देगी।
Galaxy Watch Ultra 2 में Samsung ने नया Qualcomm Snapdragon Wear Elite प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया है। कंपनी के अनुसार यह प्रोसेसर बेहतर स्पीड, AI प्रोसेसिंग और GPS परफॉर्मेंस देने में मदद करेगा।
स्मार्टवॉच में आउटडोर एक्टिविटी के लिए नए फीचर्स जोड़े गए हैं। इसमें Trail Run, बेहतर GPS ट्रैकिंग, हाइड्रेशन गाइडेंस और डाइविंग से जुड़े फीचर्स शामिल हैं। यह वॉच 10ATM वाटर रेजिस्टेंस और IP69K रेटिंग के साथ आती है।
Galaxy Watch Ultra 2 की कीमत करीब 699.99 डॉलर रखी गई है। इसका मुकाबला प्रीमियम स्मार्टवॉच सेगमेंट में Apple Watch Ultra और Garmin जैसी कंपनियों की घड़ियों से होगा। Samsung का लक्ष्य AI और हेल्थ फीचर्स के जरिए स्मार्टवॉच बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना है।
Samsung की नई स्मार्टवॉच यह दिखाती है कि आने वाले समय में स्मार्टवॉच केवल नोटिफिकेशन देखने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हेल्थ और फिटनेस असिस्टेंट के रूप में भी काम करेंगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्ट ग्लास के क्षेत्र में अब मुकाबला और तेज होने वाला है। Samsung जल्द ही अपना AI-पावर्ड स्मार्ट ग्लास लॉन्च करने की तैयारी में है, जो Meta के लोकप्रिय Ray-Ban Meta Eyewear को चुनौती देगा। Samsung का यह नया डिवाइस Android XR प्लेटफॉर्म और Google Gemini AI के साथ काम करेगा। AI फीचर्स से लैस होगा स्मार्ट ग्लास Samsung के स्मार्ट ग्लास में कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर जैसे फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है। यूजर्स इसे बिना फोन निकाले वॉइस कमांड के जरिए इस्तेमाल कर सकेंगे। इसमें AI असिस्टेंट की मदद से मैसेज का सारांश, रियल टाइम ट्रांसलेशन, नेविगेशन और आसपास की चीजों को पहचानने जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। Google Gemini AI और Android XR का मिलेगा सपोर्ट Samsung और Google मिलकर इस स्मार्ट ग्लास को विकसित कर रहे हैं। यह डिवाइस Google के Android XR प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जिसे खासतौर पर एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) और AI डिवाइस के लिए तैयार किया गया है। इसमें Gemini AI की क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे ग्लास यूजर के आसपास के माहौल को समझकर जवाब दे सकेगा। Ray-Ban Meta से होगी सीधी टक्कर Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लास पहले से ही बाजार में मौजूद हैं, जिनमें कैमरा, ओपन-ईयर स्पीकर और Meta AI जैसी सुविधाएं मिलती हैं। Samsung अब इसी सेगमेंट में उतरकर AI वियरेबल मार्केट में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। डिजाइन और बैटरी पर खास ध्यान लीक रिपोर्ट्स के अनुसार Samsung का स्मार्ट ग्लास हल्के डिजाइन और सामान्य चश्मे जैसा लुक देने की कोशिश करेगा, ताकि लोग इसे रोजमर्रा में आसानी से पहन सकें। इसमें प्राइवेसी के लिए रिकॉर्डिंग इंडिकेटर लाइट और अन्य सुरक्षा फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं। स्मार्ट ग्लास मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा AI तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्मार्ट ग्लास को भविष्य की महत्वपूर्ण डिवाइस कैटेगरी माना जा रहा है। Samsung, Meta और Google जैसी बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही हैं। आने वाले समय में AI ग्लास स्मार्टफोन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक नए डिजिटल असिस्टेंट डिवाइस के रूप में उभर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Garmin ने स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर सेगमेंट में कदम रखते हुए अपना पहला CIRQA Smart Band लॉन्च कर दिया है। यह नया स्मार्ट बैंड बिना डिस्प्ले के आता है और यूज़र्स को लगातार हेल्थ व फिटनेस मॉनिटरिंग की सुविधा देता है। खास बात यह है कि इसके प्रमुख फीचर्स का उपयोग करने के लिए किसी अतिरिक्त सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं होगी। 199.99 डॉलर कीमत, फिलहाल अमेरिका में उपलब्ध Garmin CIRQA Smart Band की कीमत 199.99 डॉलर (करीब 19,000 रुपये) रखी गई है। फिलहाल इसकी बिक्री अमेरिका में Garmin की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए शुरू हुई है। भारत में लॉन्च को लेकर कंपनी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 10 दिन की बैटरी और कई हेल्थ फीचर्स यह स्मार्ट बैंड एक बार फुल चार्ज होने पर 10 दिन तक की बैटरी लाइफ देने का दावा करता है। इसमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, स्लीप ट्रैकिंग, बॉडी बैटरी, स्ट्रेस मॉनिटरिंग, पल्स ऑक्स, स्किन टेम्परेचर और मेंस्ट्रुअल व प्रेगनेंसी ट्रैकिंग जैसे एडवांस हेल्थ फीचर्स दिए गए हैं। 80 से ज्यादा एक्टिविटी मोड का सपोर्ट CIRQA Smart Band में 80 से अधिक स्पोर्ट्स और फिटनेस एक्टिविटी को ट्रैक करने की सुविधा है। यह रनिंग, वॉकिंग, साइक्लिंग, स्विमिंग, योग और जिम वर्कआउट समेत कई गतिविधियों को सपोर्ट करता है। यूज़र अपने सभी हेल्थ और फिटनेस डेटा को Garmin Connect ऐप के जरिए देख और मैनेज कर सकते हैं। स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर सेगमेंट में बढ़ेगा मुकाबला Garmin का नया बैंड ऐसे समय में आया है जब स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर बाजार में Whoop, Noise और Amazfit जैसे ब्रांड पहले से मौजूद हैं। यदि CIRQA Smart Band भारत में लॉन्च होता है, तो इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
लंदन, एजेंसियां। दिग्गज टेक कंपनी Samsung आज अपने बड़े इवेंट Galaxy Unpacked 2026 का आयोजन कर रही है। इस इवेंट में कंपनी की नई पीढ़ी के फोल्डेबल स्मार्टफोन, AI आधारित फीचर्स और स्मार्ट डिवाइस पेश किए जाने की उम्मीद है। कंपनी ने इस बार का फोकस "AI और नए फॉर्म फैक्टर" पर रखा है। Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 पर सबकी नजर Samsung के इस इवेंट में सबसे ज्यादा चर्चा Galaxy Z Fold 8, Galaxy Z Flip 8 और संभावित Galaxy Z Fold 8 Ultra को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए फोल्डेबल फोन में बेहतर डिजाइन, ज्यादा मजबूत डिस्प्ले और पिछले मॉडल की तुलना में बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिल सकती है। AI फीचर्स होंगे लॉन्च का मुख्य आकर्षण कंपनी नए Galaxy डिवाइस में AI क्षमताओं को और विस्तार देने की तैयारी में है। Samsung का फोकस ऐसे AI फीचर्स पर है जो यूजर के रोजमर्रा के काम को आसान बना सकें, जैसे स्मार्ट असिस्टेंस, बेहतर फोटो एडिटिंग और पर्सनलाइज्ड अनुभव। Galaxy Watch और अन्य स्मार्ट डिवाइस भी हो सकते हैं पेश स्मार्टफोन के अलावा Samsung इस इवेंट में नई Galaxy Watch सीरीज और अन्य स्मार्ट डिवाइस की घोषणा भी कर सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में AI आधारित स्मार्ट ग्लासेस की झलक दिखाए जाने की संभावना भी जताई गई है। भारत में भी बढ़ी लॉन्च को लेकर उत्सुकता Samsung ने भारत समेत कई बाजारों में नए Galaxy डिवाइस के लिए प्री-रिजर्वेशन शुरू कर दिए थे। भारतीय यूजर्स की नजर खास तौर पर नए फोल्डेबल फोन की कीमत, उपलब्धता और AI फीचर्स पर रहेगी।