टेक्नोलॉजी

New Solar Tech Boosts Energy Output

नई Solar Technology से बदलेगा ग्रीन एनर्जी का भविष्य, कम धूप और छाया में भी बनेगी ज्यादा बिजली

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Advanced perovskite-organic tandem solar cells generating higher electricity in low sunlight and shaded conditions for improved clean energy.
New Perovskite Solar Cell Technology

New Solar Technology: सोलर एनर्जी के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। Hong Kong Polytechnic University (PolyU) के शोधकर्ताओं ने एक नई सोलर सेल तकनीक विकसित की है, जो कम धूप और छाया वाली परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। शोध के अनुसार, इस तकनीक की मदद से सोलर पैनलों की बिजली उत्पादन क्षमता 26% तक बढ़ाई जा सकती है, साथ ही उनकी उम्र और कार्यक्षमता भी बेहतर होगी।

क्या है नई तकनीक?

शोधकर्ताओं ने Perovskite-Organic Tandem Solar Cell विकसित किया है। यह नई पीढ़ी का सोलर सेल पारंपरिक थिन-फिल्म सोलर पैनलों की तुलना में छाया के कारण होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम करता है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह -40 वोल्ट तक के Reverse Bias Stress को झेलने के बाद भी अपनी 90% से अधिक दक्षता बनाए रखता है।

छाया पड़ने से क्यों घटती है सोलर पैनल की क्षमता?

आमतौर पर सोलर पैनलों पर पेड़, इमारत या बादलों की छाया पड़ने पर कुछ सेल्स में Reverse Bias Voltage बनने लगता है।

इससे:

  • बिजली का प्रवाह प्रभावित होता है।
  • Deep Trap States बनने लगते हैं।
  • चार्ज फंस जाता है।
  • समय के साथ पैनल की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
  • पैनल स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।

नई तकनीक कैसे करेगी काम?

शोधकर्ताओं ने सोलर सेल की आंतरिक संरचना में सुधार कर ऐसी तकनीक विकसित की है जो छाया के दौरान बनने वाले नकारात्मक चार्ज को नियंत्रित करती है।

रिसर्च के दौरान नए सोलर सेल ने शानदार प्रदर्शन किया:

  • -40V पर भी 90% से अधिक दक्षता बरकरार
  • -20V पर 12 घंटे बाद भी लगभग 90% क्षमता
  • -4.5V पर करीब 2000 घंटे (83 दिन) बाद भी 97% दक्षता

क्या होंगे फायदे?

नई तकनीक से मिलने वाले प्रमुख लाभ:

  • कम धूप में भी बेहतर बिजली उत्पादन
  • छाया का कम असर
  • सोलर पैनल की लंबी उम्र
  • लगभग 26% अधिक बिजली उत्पादन
  • ग्रीन एनर्जी सिस्टम की विश्वसनीयता में सुधार
  • बड़े सोलर प्लांट और घरेलू इंस्टॉलेशन दोनों के लिए उपयोगी

भविष्य में क्या बदलेगा?

यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है, तो ऐसे स्थानों पर भी सोलर पैनल अधिक प्रभावी होंगे जहां दिनभर पूरी धूप नहीं मिलती। इससे शहरों, इमारतों और सीमित जगहों पर सोलर एनर्जी का उपयोग और आसान हो सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

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  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Semiconductor chips, silicon wafers, and advanced fabrication facilities representing India's ₹1.27 lakh crore Semicon 2.0 mission.
सेमिकॉन 2.0: भारत का ₹1.27 लाख करोड़ का सबसे बड़ा चिप मिशन, जानिए कैसे बदलेगी देश की टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था

भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0) को मंजूरी देते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस नई योजना का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगी। सेमिकॉन 1.0 के बाद अब दूसरा बड़ा कदम दिसंबर 2021 में शुरू किए गए Semicon 1.0 के तहत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने का प्रयास किया था। इस चरण में सिलिकॉन फैब, पैकेजिंग यूनिट और चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें सिलिकॉन फैब्रिकेशन प्लांट, कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और कई पैकेजिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कई भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई को चिप डिजाइन विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए। Semicon 2.0 किन क्षेत्रों पर करेगा फोकस? नई योजना को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है, जिनके जरिए भारत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को विकसित करना चाहता है। इनमें शामिल हैं– चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर आईपी मशीनरी, उपकरण और कच्चा माल नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट एटीएमपी (ATMP) और ओसैट (OSAT) यूनिट अनुसंधान एवं विकास (R&D) कुशल मानव संसाधन और प्रशिक्षण सरकार का लक्ष्य केवल चिप बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक पूरी प्रक्रिया को भारत में विकसित करना है। रिसर्च और नई तकनीक पर रहेगा विशेष जोर Semicon 2.0 के तहत अत्याधुनिक चिप तकनीकों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भविष्य की उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने के साथ-साथ भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर नई योजना के तहत कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं निर्माण से जुड़ी ट्रेनिंग को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा क्लीनरूम ऑपरेशन, फैब निर्माण, चिप डिजाइन और अन्य विशेष तकनीकी क्षेत्रों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण भी बढ़ाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। आयात पर निर्भरता होगी कम विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी तक चिप निर्माण के लिए गैस, केमिकल, मशीनरी और कई अन्य जरूरी संसाधनों के लिए विदेशों पर निर्भर है। Semicon 2.0 के तहत इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आयात कम होगा और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा और औद्योगिक उपकरण जैसे क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी। वैश्विक निवेश आकर्षित करने की तैयारी सरकार को उम्मीद है कि नई नीति के बाद अमेरिका, यूरोप, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों की प्रमुख टेक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली हब ही नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है। लंबी अवधि की रणनीति पर आधारित है योजना सेमीकंडक्टर उद्योग में किसी भी परियोजना को पूरी तरह विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। ऐसे में Semicon 2.0 को दीर्घकालिक रणनीति के तहत तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के वास्तविक परिणाम अगले कुछ वर्षों में दिखाई देंगे। यदि निवेश, अनुसंधान और निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ती रही, तो भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।  

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