renewable energy

Solar panels and battery storage systems illustrating China's dominance in the global clean energy supply chain.
Clean Energy में चीन की बढ़ती ताकत, वैश्विक सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़; भारत के लिए क्यों बढ़ रही चुनौती?

नई दिल्ली: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार के साथ बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए देश बड़े पैमाने पर क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस वैश्विक बदलाव में चीन ने सोलर उपकरणों, बैटरियों और ऊर्जा भंडारण तकनीक की सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ बना ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ता दबदबा भारत जैसे देशों के लिए अवसर के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी बन सकता है। क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन में चीन की मजबूत स्थिति चीन आज वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख क्लीन एनर्जी उत्पादों के निर्माण में अग्रणी है, जिनमें शामिल हैं— सोलर पैनल और फोटोवोल्टिक (PV) सेल लिथियम-आयन बैटरियां ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम इलेक्ट्रिक वाहनों के बैटरी कंपोनेंट्स इसी वजह से दुनिया के कई देश अपने ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए चीनी उपकरणों पर निर्भर हैं। अमेरिका को भी बढ़ा निर्यात हालिया व्यापार आंकड़ों के अनुसार, चीन से अमेरिका को क्लीन एनर्जी उत्पादों का निर्यात बढ़ा है। मुख्य आंकड़े: सोलर सेल्स का निर्यात: 346% की वार्षिक वृद्धि लिथियम-आयन बैटरी निर्यात: 20.8% की बढ़ोतरी लेड-एसिड बैटरी निर्यात: 151% की वृद्धि यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में चीनी उत्पादों की मांग बनी हुई है। क्यों बढ़ रही है क्लीन एनर्जी की मांग? विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ता फोकस जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की कोशिश सौर और बैटरी तकनीक की घटती लागत कुछ विश्लेषणों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं को भी क्लीन एनर्जी की मांग बढ़ने का एक कारण माना गया है। भारत के लिए क्या है चुनौती? भारत तेजी से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ा रहा है। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें— PLI (Production Linked Incentive) योजना सोलर उपकरणों पर Basic Customs Duty (BCD) 'मेक इन इंडिया' अभियान शामिल हैं। इसके बावजूद, कई परियोजनाओं में अब भी चीनी सोलर सेल, मॉड्यूल और बैटरी कंपोनेंट्स का उपयोग किया जा रहा है, क्योंकि वे अक्सर लागत के लिहाज से अधिक प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं। बढ़ती बिजली मांग से बढ़ेगा दबाव भारत में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और नए डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में बिजली की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में— अधिक सोलर क्षमता स्थापित करनी होगी। बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने होंगे। घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना होगा। आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत स्थानीय उत्पादन, अनुसंधान और सप्लाई चेन को मजबूत करने में सफल रहता है, तो वह इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है।  

surbhi जून 29, 2026 0
Flexible hydrogel generator producing electricity from air moisture and human sweat for wearable devices
हवा की नमी और पसीने से बनेगी बिजली! वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा हाइड्रोजेल जनरेटर, बिना चार्जर चल सकेंगे स्मार्ट डिवाइस

नई दिल्ली: कल्पना कीजिए कि आपकी स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या हेल्थ मॉनिटर को कभी चार्ज करने की जरूरत ही न पड़े। वे सिर्फ हवा की नमी या आपके शरीर के पसीने से खुद ही ऊर्जा बनाकर काम करते रहें। यह सुनने में भले भविष्य की तकनीक लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है। शोधकर्ताओं ने एक नया फ्लेक्सिबल हाइड्रोजेल मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर विकसित किया है, जो वातावरण में मौजूद नमी और मानव शरीर से निकलने वाले पसीने को सोखकर सीधे बिजली उत्पन्न कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में वियरेबल डिवाइस और मेडिकल सेंसर की दुनिया बदल सकती है। क्यों खास है यह नई तकनीक? आज स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, वायरलेस ईयरबड्स और मेडिकल सेंसर जैसे उपकरणों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बैटरी है। इन्हें बार-बार चार्ज करना पड़ता है और समय के साथ बैटरी खराब होने पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी बढ़ता है। वैश्विक स्तर पर ई-वेस्ट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुद ऊर्जा पैदा करने में सक्षम बना सकें। नया हाइड्रोजेल जनरेटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हवा की नमी से कैसे बनती है बिजली? यह मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapor) को अवशोषित करता है और उसे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है। इसका मतलब है कि: त्वचा पर लगाए गए हेल्थ सेंसर फिटनेस बैंड स्मार्ट पैच फेस मास्क आधारित सेंसर मेडिकल मॉनिटर भविष्य में बाहरी चार्जर या बड़ी बैटरी के बिना भी काम कर सकते हैं। नई तकनीक कैसे काम करती है? इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष प्रकार का हाइड्रोजेल है। शोधकर्ताओं ने: पानी और ग्लिसरॉल आधारित चिपकने वाला हाइड्रोजेल तैयार किया। इसे लिक्विड मेटल और स्ट्रेचेबल सिल्वर इलेक्ट्रोड से जोड़ा। ग्लिसरॉल की मदद से हाइड्रोजेल और इलेक्ट्रोड के बीच मजबूत संपर्क बनाया। इससे डिवाइस के अंदर विद्युत प्रवाह लगातार बना रहता है, चाहे उसे मोड़ा जाए, खींचा जाए या पहनकर इस्तेमाल किया जाए। हजारों बार मोड़ने पर भी नहीं हुआ खराब इस तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में इसकी मजबूती शामिल है। परीक्षण के दौरान: डिवाइस को 8,000 बार मोड़ा गया। 80% तक खींचकर 1,000 बार टेस्ट किया गया। 180 डिग्री तक मोड़ने और खींचने के बाद भी इसकी कार्यक्षमता बरकरार रही। यानी यह रोजमर्रा के उपयोग के लिए काफी लचीला और टिकाऊ साबित हुआ। 85% नमी में लगातार 9 दिन तक बिजली टेस्टिंग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि: 85% आर्द्रता (Humidity) में यह लगभग 0.94 वोल्ट बिजली उत्पन्न करने में सक्षम रहा। डिवाइस ने लगातार 220 घंटे यानी 9 दिन से अधिक समय तक स्थिर बिजली उत्पादन किया। हालांकि यह किसी स्मार्टफोन चार्जर जितनी ऊर्जा नहीं बनाता, लेकिन छोटे सेंसर और वियरेबल डिवाइस चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। किन क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग? विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। संभावित उपयोग: स्वास्थ्य सेवाएं ECG मॉनिटर हार्ट रेट सेंसर सांसों की निगरानी करने वाले उपकरण फिटनेस और स्पोर्ट्स फिटनेस ट्रैकर्स एथलीट परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग बुजुर्गों की देखभाल निरंतर स्वास्थ्य निगरानी आपातकालीन स्वास्थ्य सेंसर दूरस्थ चिकित्सा (Telemedicine) ऐसे क्षेत्रों में मेडिकल मॉनिटरिंग जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है क्या स्मार्टवॉच और ईयरबड्स बिना चार्जर चलेंगे? फिलहाल यह तकनीक शुरुआती शोध चरण में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले: लंबे समय तक परीक्षण सुरक्षित पैकेजिंग बड़े आकार के प्रोटोटाइप व्यावसायिक उत्पादन जैसे चरण पूरे करने होंगे। हालांकि यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक बाजार में आती है, तो भविष्य में स्मार्टवॉच, हेल्थ बैंड और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी पर निर्भरता काफी कम हो सकती है। तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह शोध सिर्फ एक नई ऊर्जा तकनीक नहीं बल्कि ई-वेस्ट कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि छोटे उपकरण वातावरण की नमी से स्वयं ऊर्जा पैदा कर सकें, तो बैटरी बदलने और चार्जिंग की जरूरत काफी हद तक घट सकती है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Venezuelan Acting President Delcy Rodríguez meets PM Narendra Modi in New Delhi for bilateral talks.
नई दिल्ली: वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर, पीएम मोदी से अहम वार्ता

  वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez 3 से 7 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग पर केंद्रित रही मोदी-रोड्रिगेज बैठक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवाएं, दवा उद्योग, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत के लिए राहत की खबर, तेल आपूर्ति में बढ़ सकती है वेनेजुएला की भूमिका दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थिरता के बीच नई दिल्ली तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रही है। नई दिल्ली-कराकास संबंधों को मिलेगा नया बल, निवेश के नए अवसरों पर चर्चा दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसरों की पहचान पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद बदला समीकरण, फिर बढ़ा भारत-वेनेजुएला तेल कारोबार भारत 2019 तक वेनेजुएला का प्रमुख तेल खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात में गिरावट आई। हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तेल व्यापार फिर तेजी से बढ़ रहा है और भारत वेनेजुएला के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया है। ईरान संकट के बीच भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की तलाश पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता है वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की कई बड़ी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। इससे भारत घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी लाभ उठा सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी हुई विस्तृत बातचीत प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले रोड्रिगेज ने S. Jaishankar के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। भारत से पुराना जुड़ाव, छठी बार आधिकारिक यात्रा पर आईं रोड्रिगेज डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले विदेश मंत्री, उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री के रूप में कई बार भारत का दौरा कर चुकी हैं। जून 2026 की यह उनकी भारत यात्रा कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पहली आधिकारिक यात्रा है। नई दिल्ली और कराकास के बीच रणनीतिक साझेदारी को मिल सकती है नई रफ्तार उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस यात्रा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में भारत-वेनेजुएला संबंधों के और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Smart electricity meter installation drive announced for 2 crore consumers in West Bengal
बंगाल में 2 करोड़ घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर, बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू होगी बड़ी योजना

  पश्चिम बंगाल में बिजली क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने करीब 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। कोलकाता में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar और मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के बीच हुई समीक्षा बैठक में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर सहमति बनी। योजना के तहत जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बिजली चोरी पर रोक लगेगी, बकाया बिलों की वसूली आसान होगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। पहले सरकारी दफ्तरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर सरकार ने इस परियोजना को मिशन मोड में लागू करने का फैसला किया है। जून 2026 तक सभी सरकारी कार्यालयों और सरकारी परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अगस्त 2026 तक इन सभी कनेक्शनों को प्रीपेड प्रणाली में बदला जाएगा। सरकारी विभागों में बकाया बिलों की समस्या को खत्म करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता भी आएंगे दायरे में सरकारी प्रतिष्ठानों के बाद बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जोड़ा जाएगा। इसके बाद राज्यभर के घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड, किसी भी विकल्प का चयन कर सकेंगे। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम नहीं चुकानी होगी।  स्मार्ट मीटर योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक मीटर पर 900 रुपये की सहायता देगी। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम  राशि नहीं चुकानी होगी। सरकार के अनुसार, उपभोक्ताओं से मासिक बिजली बिल के साथ लगभग 100 रुपये का अतिरिक्त योगदान लिया जाएगा, जिससे मीटर की लागत की भरपाई की जाएगी। 15 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम करने की तैयारी समीक्षा बैठक में सामने आया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर करीब 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ है। इसके अलावा ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य स्मार्ट मीटरिंग के जरिए इस नुकसान को सिंगल डिजिट में लाना है। अगले दो महीनों में एक विस्तृत "सोर्स एलोकेशन प्लान" तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को सुधारने की रणनीति बनाई जाएगी। बकाया बिलों की वसूली के लिए बनेगा सख्त तंत्र राज्य सरकार सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर बकाया लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि की वसूली के लिए भी नई व्यवस्था तैयार कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि स्मार्ट मीटर से रीयल-टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे बकाया भुगतान और बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। सौर ऊर्जा योजनाओं को भी मिलेगा बढ़ावा बैठक में केवल स्मार्ट मीटरिंग ही नहीं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने केंद्र को भरोसा दिलाया है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ती तथा स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi chairs high-level cabinet meeting on energy security and Viksit Bharat 2047 vision
पीएम मोदी की 4 घंटे लंबी महाबैठक, एनर्जी सिक्योरिटी और ‘विकसित भारत 2047’ पर बड़ा मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Godawari Power and Ispat Limited logo with stock market chart indicating share price rise after investment announcement
Smallcap मेटल स्टॉक में उछाल: Godawari Power ने क्लीन एनर्जी यूनिट में ₹50 करोड़ का निवेश किया

  नई दिल्ली: स्मॉलकैप मेटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी Godawari Power and Ispat Limited के शेयरों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती दर्ज की गई। कंपनी द्वारा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई Godawari New Energy Private Limited में ₹50 करोड़ का ताजा इक्विटी निवेश करने की घोषणा के बाद बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में शेयरों में तेजी घोषणा के बाद कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सुबह करीब 9:30 बजे 1.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹305.05 पर ट्रेड करता दिखा। निवेशकों ने इस कदम को कंपनी के दीर्घकालिक विस्तार और नए बिजनेस सेगमेंट में एंट्री के रूप में देखा। राइट्स इश्यू के जरिए निवेश यह निवेश 5 करोड़ इक्विटी शेयरों के आवंटन के माध्यम से किया गया है, जिनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। यह प्रक्रिया राइट्स बेसिस पर पूरी की गई, जो पहले से स्वीकृत पूंजी निवेश योजना के अनुरूप है। कुल ₹200 करोड़ निवेश की योजना कंपनी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह अपनी इस सहायक कंपनी में कुल ₹200 करोड़ तक निवेश करेगी। इस पूंजी का उपयोग कैपिटल एक्सपेंडिचर और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। क्लीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज में एंट्री इस निवेश का मुख्य उद्देश्य 20 GWh क्षमता वाले Battery Energy Storage System (BESS) प्लांट के पहले चरण का विकास करना है। यह कदम कंपनी के क्लीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सेक्टर में प्रवेश को दर्शाता है, जो भविष्य में तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Coal India receives ₹1057 crore battery energy storage order, signaling shift towards clean energy.
Coal India Share: 1057 करोड़ के ऑर्डर से शेयरों में हलचल संभव, क्लीन एनर्जी की ओर बड़ा कदम

Coal India News: सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया (Coal India) के शेयरों में आज हलचल देखने को मिल सकती है। कंपनी को तेलंगाना पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TGGENCO) से 1057.09 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है, जो इसके बिजनेस मॉडल में बदलाव का भी संकेत देता है। क्या है पूरा ऑर्डर? कोल इंडिया को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट पारंपरिक कोयला खनन से अलग एक नई दिशा में कदम है। प्रोजेक्ट: बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लोकेशन: चौटुप्पल, तेलंगाना कुल वैल्यू: ₹1057.09 करोड़ इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को एक बड़े पैमाने पर बिजली स्टोरेज प्लांट स्थापित करना होगा। प्रोजेक्ट की खासियत कुल क्षमता: 750 MWh स्टोरेज समय: 4 घंटे तक बिजली स्टोर प्रोजेक्ट टाइमलाइन: 18 महीने में पूरा करना होगा यह प्लांट खासतौर पर सोलर और विंड एनर्जी को स्टोर करने में मदद करेगा, जिससे पीक डिमांड के समय बिजली की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके। कमाई का नया जरिया इस डील से कोल इंडिया को सिर्फ प्रोजेक्ट वैल्यू ही नहीं, बल्कि रेगुलर इनकम का मौका भी मिलेगा: कंपनी 3.14 लाख मेगावाट प्रति माह के टैरिफ पर बिजली सप्लाई करेगी यानी यह प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म रेवेन्यू स्ट्रीम भी बना सकता है। क्लीन एनर्जी की ओर शिफ्ट अब तक कोल इंडिया मुख्य रूप से कोयला खनन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन यह ऑर्डर कंपनी के एनर्जी ट्रांजिशन प्लान को दिखाता है: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एंट्री बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में निवेश भविष्य के ग्रीन एनर्जी मार्केट में पकड़ मजबूत करने की कोशिश यह कदम निवेशकों के लिए पॉजिटिव संकेत माना जा सकता है। आगे की प्रक्रिया कंपनी को 15 दिनों के भीतर परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा करनी होगी इसके बाद फाइनल एग्रीमेंट साइन होगा यानी फिलहाल यह ऑर्डर शुरुआती स्टेज में है, लेकिन संभावनाएं मजबूत हैं। शेयर पर क्या असर? इस बड़े ऑर्डर के बाद बाजार में कोल इंडिया के शेयरों पर नजर बनी रहेगी। 27 मार्च 2026 को शेयर कीमत: ₹445 के आसपास 1 साल का रिटर्न: लगभग 11–13% 52 वीक हाई: ₹476 52 वीक लो: ₹350 इसके अलावा कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करते हुए ₹26.40 प्रति शेयर डिविडेंड भी दिया है। निवेशकों के लिए संकेत यह डील कंपनी के बिजनेस में डायवर्सिफिकेशन दिखाती है क्लीन एनर्जी में एंट्री से लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावना शॉर्ट टर्म में शेयर में वोलैटिलिटी और पॉजिटिव मूवमेंट संभव

surbhi मार्च 30, 2026 0
Waaree Energies stock rises after ₹3900 crore capex plan for solar glass manufacturing expansion
Waaree Energies में तेजी: ₹3,900 करोड़ के कैपेक्स प्लान और सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ाने का असर

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Waaree Energies के शेयरों में बुधवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के बोर्ड द्वारा ₹3,900 करोड़ के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को मंजूरी देने और सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ाने के फैसले के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। BSE पर सुबह 09:18 बजे कंपनी का शेयर ₹3,140.25 पर ट्रेड कर रहा था, जो ₹54.40 या 1.76% की बढ़त को दर्शाता है। इससे पहले यह ₹3,085.85 पर बंद हुआ था। ग्लास मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Waaree Green Glass के जरिए 2,500 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता वाले ग्लास मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए ₹3,900 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश कर्ज (debt) और आंतरिक संसाधनों (internal accruals) के मिश्रण से किया जाएगा। यह कदम कंपनी की वैल्यू चेन को मजबूत करने और सोलर सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ी इसके साथ ही कंपनी ने अपनी एक अन्य सहायक इकाई Waaree Transpower में हिस्सेदारी 64.04% से बढ़ाकर 75.10% करने का फैसला किया है। इस कदम से कंपनी को संचालन पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं को गति मिलेगी। शेयर का प्रदर्शन कंपनी का शेयर 12 सितंबर 2025 को ₹3,864.40 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा था, जबकि 7 अप्रैल 2025 को ₹1,808.65 के निचले स्तर को छुआ था। वर्तमान में यह अपने हाई से 20.15% नीचे, लेकिन लो से 70.62% ऊपर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का मार्केट कैप ₹88,761.67 करोड़ है, जो इसे रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मजबूत कंपनियों में शामिल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े निवेश और विस्तार योजनाएं कंपनी के दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को और मजबूत कर सकती हैं।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0