फैशन और ब्यूटी

Dia Mirza Revives 90s Style in Chiffon Saree

दीया मिर्जा की प्रिंटेड शिफॉन साड़ी ने लौटाया 90s का एवरग्रीन चार्म, फ्लोरल प्रिंट और मिरर वर्क ने जीता दिल

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Dia Mirza stuns in a blue and white printed chiffon saree with floral motifs, mirror work, and elegant vintage-inspired styling.
Dia Mirza Printed Chiffon Saree Look

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा एक बार फिर अपने खूबसूरत और सस्टेनेबल फैशन सेंस को लेकर चर्चा में हैं। भारतीय हस्तकरघा, पारंपरिक टेक्सटाइल और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए पहचानी जाने वाली दीया ने हाल ही में एक इवेंट में ऐसी प्रिंटेड शिफॉन साड़ी पहनी, जिसने 90 के दशक के क्लासिक फैशन को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

दीया का यह लुक न सिर्फ बेहद एलिगेंट था, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि पारंपरिक भारतीय परिधान को आधुनिक स्टाइलिंग के साथ कितनी खूबसूरती से पेश किया जा सकता है। हल्की, फ्लोई और ग्रेसफुल शिफॉन साड़ी में फ्लोरल प्रिंट, एब्स्ट्रैक्ट डिज़ाइन और मिरर वर्क का शानदार मेल देखने को मिला, जिसने उनके पूरे लुक को बेहद आकर्षक बना दिया।

भारतीय टेक्सटाइल को बढ़ावा देने में हमेशा आगे रहती हैं दीया

दीया मिर्जा लंबे समय से भारतीय हैंडलूम और पारंपरिक बुनाई को प्रमोट करती रही हैं। वह केवल अपने फैशन चॉइस से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने काम से भी लोगों को प्रेरित करती हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की गुडविल एंबेसडर के रूप में वह सस्टेनेबिलिटी, प्लास्टिक उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर लगातार जागरूकता फैलाती रही हैं।

उनकी वॉर्डरोब भी इसी सोच को दर्शाती है। इससे पहले भी वह हैंडवोवन कॉटन, लिनन ज़री, बनारसी और कलमकारी जैसी भारतीय बुनाई वाली साड़ियों में नजर आ चुकी हैं, जिन्हें फैशन प्रेमियों ने काफी पसंद किया।

90s स्टाइल को मिला मॉडर्न ट्विस्ट

हालिया इवेंट में दीया ने ब्लू और व्हाइट रंग की प्रिंटेड शिफॉन साड़ी पहनी, जिस पर ब्लैक एब्स्ट्रैक्ट और फ्लोरल मोटिफ्स के साथ बारीक मिरर वर्क किया गया था। हल्के और ट्रांसपेरेंट फैब्रिक वाली यह साड़ी बेहद एलिगेंट नजर आई।

उन्होंने इस साड़ी के साथ स्पेगेटी स्ट्रैप ब्लाउज पेयर किया, जिसने 90 के दशक और शुरुआती 2000 के दशक की फैशन स्टाइल को फिर से जीवंत कर दिया। यह कॉम्बिनेशन आज के मॉडर्न फैशन और क्लासिक एस्थेटिक्स का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया।

ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाई खूबसूरती

दीया ने अपने लुक को एंटीक सिल्वर चैंडेलियर ईयररिंग्स से पूरा किया, जिनमें मिरर वर्क की खूबसूरत डिटेलिंग देखने को मिली। इसके साथ उन्होंने डायमंड नोज पिन पहनी, जिसने उनके ट्रेडिशनल लुक में एक एलिगेंट टच जोड़ा।

मेकअप को बेहद नैचुरल और सॉफ्ट रखा गया। काजल से सजी आंखें, हल्के ब्लश वाले गाल और न्यूड ब्राउन लिपस्टिक ने उनके चेहरे की प्राकृतिक खूबसूरती को और निखारा। वहीं साइड-पार्टेड स्लीक बन हेयरस्टाइल ने पूरे लुक को क्लासी फिनिश दी।

शिफॉन साड़ी का फैशन आज भी कायम

भारतीय फैशन में शिफॉन साड़ी का अपना अलग स्थान है। इसकी लोकप्रियता को कभी जयपुर की महारानी Gayatri Devi ने नई पहचान दी थी। उनकी खूबसूरत शिफॉन साड़ियों ने इसे भारतीय महिलाओं की पसंदीदा ड्रेप्स में शामिल कर दिया।

हाल के वर्षों में भी शिफॉन साड़ी का आकर्षण बरकरार है। इसी साल आयोजित Met Gala 2026 में Gauravi Kumari ने अपनी दादी की विरासत को सम्मान देते हुए उनकी शिफॉन साड़ी को अपसाइकिल कर साड़ी गाउन के रूप में प्रस्तुत किया था, जिसने वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा बटोरी।

दीया मिर्जा का यह नया लुक एक बार फिर साबित करता है कि फैशन केवल ट्रेंड्स का पालन करना नहीं, बल्कि अपनी विरासत, पहचान और व्यक्तिगत सोच को खूबसूरती से प्रस्तुत करना भी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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नई दिल्ली। फैशन की दुनिया में मैक्सी स्कर्ट एक ऐसा आउटफिट है जो कभी आउट ऑफ ट्रेंड नहीं होता। यह न केवल आरामदायक है बल्कि बेहद एलिगेंट और वर्सेटाइल भी माना जाता है। चाहे कॉलेज जाना हो, ऑफिस मीटिंग हो या कैजुअल आउटिंग—मैक्सी स्कर्ट हर मौके पर स्टाइलिश लुक दे सकती है।   बेसिक टी-शर्ट से मिलता है सिंपल और क्लासी लुक फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लोई मैक्सी स्कर्ट के साथ बेसिक टी-शर्ट एक सुरक्षित और स्टाइलिश विकल्प है। यह खासकर गर्मियों में कॉलेज और कैजुअल आउटिंग के लिए बेहतर माना जाता है।   पेपलम टॉप और ऑफ-शोल्डर टॉप से बढ़ता है ग्लैमरस लुक पेपलम टॉप कमर को हाइलाइट कर फिगर को आकर्षक बनाता है, जबकि ऑफ-शोल्डर या असिमेट्रिक टॉप पार्टी और डेट नाइट के लिए परफेक्ट ग्लैमरस लुक देते हैं।   ऑफिस के लिए फॉर्मल शर्ट है बेस्ट विकल्प ऑफिस या प्रोफेशनल मीटिंग के लिए मैक्सी स्कर्ट के साथ फॉर्मल शर्ट का कॉम्बिनेशन ट्रेंड में है। इसे बेल्ट और हील्स के साथ स्टाइल करने पर पॉलिश्ड लुक मिलता है।   वेस्टकोट और कार्डिगन भी हैं ट्रेंडी विकल्प फैशन में पावर ड्रेसिंग के लिए वेस्टकोट और सैटिन मैक्सी स्कर्ट का कॉम्बिनेशन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जबकि कार्डिगन के साथ यह लुक सिंपल और क्लासी बन जाता है।   विशेषज्ञों का कहना है कि सही टॉप का चुनाव आपकी पूरी पर्सनैलिटी को निखार सकता है, इसलिए स्कर्ट की फिटिंग, फैब्रिक और मौके के अनुसार स्टाइल चुनना जरूरी है।

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Corset से Cut-Out तक, इन 7 स्टेटमेंट ब्लाउज डिजाइनों ने बदला इंडियन फैशन का अंदाज

नई दिल्ली: भारतीय पारंपरिक परिधानों में ब्लाउज को लंबे समय तक केवल एक सहायक परिधान माना जाता रहा। साड़ी के पल्लू या दुपट्टे के नीचे छिपा यह हिस्सा अक्सर पूरे लुक का केंद्र नहीं बन पाता था। लेकिन अब फैशन की दुनिया में स्टेटमेंट ब्लाउज का दौर है, जहां ब्लाउज केवल एक जरूरत नहीं बल्कि पूरे आउटफिट का सबसे आकर्षक हिस्सा बन चुका है। कॉर्सेट, हाई कॉलर, कट-आउट, ज्वेलरी ब्लाउज और अनोखे नेकलाइन डिजाइनों ने पारंपरिक भारतीय पहनावे को नया और आधुनिक रूप दिया है। बॉलीवुड और देश की कई चर्चित हस्तियों ने अपने अनोखे ब्लाउज डिजाइनों से इस ट्रेंड को लोकप्रिय बनाया है। 1. राधिका अंबानी का मेटल कॉर्सेट ब्लाउज राधिका अंबानी ने अपने वेडिंग रिसेप्शन में अनामिका खन्ना की गोल्डन साड़ी के साथ Dolce & Gabbana Alta Moda का मेटल कॉर्सेट पहना था। यह आर्मर-स्टाइल ब्लाउज पारंपरिक साड़ी के साथ आधुनिक फैशन का बेहतरीन उदाहरण बना। 2. ईशा अंबानी का जड़ाऊ ज्वेलरी ब्लाउज ईशा अंबानी का Abu Jani Sandeep Khosla द्वारा डिजाइन किया गया ब्लाउज बेहद खास था। इसे जड़ाऊ ज्वेलरी से तैयार किया गया था, जिसमें उनके निजी कलेक्शन के पारंपरिक आभूषणों को नए डिजाइन के साथ शामिल किया गया। 3. अनन्या पांडे का Qipao-प्रेरित कॉलर ब्लाउज Ekaya Banaras की पाउडर ब्लू साड़ी के साथ अनन्या पांडे ने एक अनोखा हाई-कॉलर ब्लाउज पहना, जो चीनी Qipao स्टाइल से प्रेरित था। इसमें पीक-ए-बू नेकलाइन और बो डिटेलिंग ने पूरे लुक को अलग पहचान दी। 4. जाह्नवी कपूर का रॉयल कट-आउट ब्लाउज Marwar Couture की साड़ी के साथ जाह्नवी कपूर का ब्लैक वेलवेट ब्लाउज काफी चर्चा में रहा। इसमें Queen Anne नेकलाइन, हाई कॉलर और बैक कट-आउट डिजाइन ने इसे शाही और एलिगेंट लुक दिया। रंग-बिरंगे टैसल्स ने इसमें और आकर्षण जोड़ा। 5. कियारा आडवाणी का स्वीटहार्ट नेकलाइन ब्लाउज House of Masaba की साड़ी के साथ कियारा आडवाणी ने गोल्ड एम्ब्रॉयडरी वाला स्पेगेटी स्ट्रैप ब्लाउज पहना। इसका स्वीटहार्ट नेकलाइन डिजाइन और शीयर पल्लू के जरिए दिखाई देने वाला पैटर्न पूरे लुक का मुख्य आकर्षण बना। 6. भूमि पेडनेकर का हैल्टर-नेक ग्लैमरस लुक Shehla Chatoor के डिजाइन किए गए आउटफिट में भूमि पेडनेकर का हैल्टर-नेक ब्लाउज बेहद आकर्षक नजर आया। क्रिस्टल, स्टोन और बीडवर्क से सजे इस हाई-नेक और ओपन-बैक ब्लाउज ने उनके लुक को ग्लैमरस टच दिया। 7. खुशी कपूर का मल्टीकलर टैसल ब्लाउज Nidhi Tambi Kejriwal की रेड साड़ी के साथ खुशी कपूर ने एक्वामरीन शेड का स्कूप नेक ब्लाउज पहना। ब्लाउज के पीछे और हेमलाइन पर लगे मल्टीकलर टैसल्स ने इसे बेहद ट्रेंडी और युवा अंदाज दिया। क्यों बढ़ रहा है स्टेटमेंट ब्लाउज का ट्रेंड? आज के समय में महिलाएं केवल भारी साड़ी या लहंगे पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। एक यूनिक ब्लाउज पूरे लुक को नया आयाम दे सकता है। यही वजह है कि फैशन डिजाइनर अब पारंपरिक ब्लाउज में मॉडर्न सिल्हूट, कॉर्सेट, कॉलर और कट-आउट जैसे तत्व जोड़ रहे हैं। अगर आप भी शादी, रिसेप्शन या फेस्टिव सीजन के लिए नया लुक तलाश रही हैं, तो ये स्टेटमेंट ब्लाउज डिजाइन्स आपके लिए शानदार प्रेरणा बन सकते हैं।  

surbhi जून 24, 2026 0
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