लेकिन सवाल यह है कि क्या ड्राई शैंपू का नियमित इस्तेमाल बालों और स्कैल्प के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इसका जवाब है—कितनी बार और किस तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है।
ट्राइकोलॉजिस्ट अनाबेल किंग्सले के अनुसार ड्राई शैंपू में अक्सर राइस या कॉर्न स्टार्च और कुछ फॉर्मूलों में अल्कोहल जैसे तत्व होते हैं। ये स्कैल्प और बालों से अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद करते हैं, जिससे बाल कुछ समय के लिए साफ और फ्रेश नजर आते हैं।
लेकिन नाम में 'शैंपू' होने के बावजूद यह सामान्य शैंपू की तरह बालों और स्कैल्प को साफ नहीं करता।
बालों और स्कैल्प की वास्तविक सफाई के लिए पानी और क्लीनिंग एजेंट यानी सर्फैक्टेंट की जरूरत होती है। इसलिए ड्राई शैंपू को नियमित हेयर वॉश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
अगर आप ड्राई शैंपू का इस्तेमाल कभी-कभार करते हैं ताकि एक या दो दिन तक हेयर वॉश को टाला जा सके, तो आमतौर पर इससे बड़ी समस्या नहीं होनी चाहिए।
समस्या तब शुरू हो सकती है जब ड्राई शैंपू को नियमित रूप से असली शैंपू की जगह इस्तेमाल किया जाए।
ऐसा करने पर स्कैल्प पर ड्राई शैंपू, सीबम, मृत त्वचा कोशिकाओं और दूसरे हेयर प्रोडक्ट्स का जमाव हो सकता है।
लंबे समय तक प्रोडक्ट बिल्डअप रहने से स्कैल्प में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
अगर किसी व्यक्ति को डैंड्रफ या सेबोरिक डर्मेटाइटिस जैसी समस्या है, तो बार-बार हेयर वॉश को टालना स्थिति को और खराब कर सकता है।
ड्राई शैंपू को सीधे तौर पर बाल झड़ने का कारण नहीं माना जाता। लेकिन अगर इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जाए और स्कैल्प की नियमित सफाई न हो, तो प्रोडक्ट, तेल और मृत त्वचा का जमाव फॉलिकल्स को प्रभावित कर सकता है।
इससे स्कैल्प में जलन या असहजता हो सकती है और लंबे समय तक स्वस्थ हेयर ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही है कि ड्राई शैंपू खुद सीधे हेयर लॉस नहीं करता, लेकिन इसका गलत और अत्यधिक इस्तेमाल स्कैल्प के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
ट्राइकोलॉजिस्ट की सलाह के मुताबिक ड्राई शैंपू को लगातार दो दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करना बेहतर है।
अगर आपके बाल बहुत पतले या फाइन हैं, तो इसे एक दिन तक सीमित रखना बेहतर हो सकता है।
इसके बाद बालों और स्कैल्प को सामान्य शैंपू और पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए।
ड्राई शैंपू लगाने के तरीके से भी काफी फर्क पड़ता है।
सही तरीका:
कई लोग ड्राई शैंपू लगाने के बाद ब्रश करना भूल जाते हैं, जबकि यह स्टेप अतिरिक्त प्रोडक्ट हटाने के लिए महत्वपूर्ण है।
हां। ड्राई शैंपू का इस्तेमाल सिर्फ ऑयली बालों को फ्रेश दिखाने के लिए ही नहीं होता।
अगर आपके बाल बहुत फाइन, पतले या फ्लैट हैं, तो साफ बालों पर थोड़ी मात्रा में ड्राई शैंपू लगाने से जड़ों में वॉल्यूम, टेक्सचर और ग्रिप मिल सकती है। यह हेयरस्टाइल को लंबे समय तक बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।
यानी इसे हेयरकेयर के साथ-साथ स्टाइलिंग प्रोडक्ट की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर आप नियमित रूप से ड्राई शैंपू इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसा फॉर्मूला चुनना बेहतर है जो स्कैल्प के लिए अपेक्षाकृत जेंटल हो।
कुछ फॉर्मूलों में एलैंटोइन, Zinc PCA और नायसिनामाइड जैसे स्कैल्प-फ्रेंडली इंग्रीडिएंट्स शामिल किए जाते हैं।
हालांकि किसी भी प्रोडक्ट को चुनते समय अपने स्कैल्प की स्थिति और व्यक्तिगत संवेदनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ड्राई शैंपू उन लोगों के लिए किसी आसान समाधान से कम नहीं है, जिनके पास बाल धोने का समय कम होता है या जो जिम, यात्रा और व्यस्त दिनचर्या के कारण बार-बार हेयर वॉश नहीं कर पाते। यह स्कैल्प का अतिरिक्त तेल सोखकर बालों की जड़ों को कुछ समय के लिए फ्रेश और वॉल्यूमिनस दिखा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ड्राई शैंपू का नियमित इस्तेमाल बालों और स्कैल्प के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इसका जवाब है—कितनी बार और किस तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। ड्राई शैंपू असल में करता क्या है? ट्राइकोलॉजिस्ट अनाबेल किंग्सले के अनुसार ड्राई शैंपू में अक्सर राइस या कॉर्न स्टार्च और कुछ फॉर्मूलों में अल्कोहल जैसे तत्व होते हैं। ये स्कैल्प और बालों से अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद करते हैं, जिससे बाल कुछ समय के लिए साफ और फ्रेश नजर आते हैं। लेकिन नाम में 'शैंपू' होने के बावजूद यह सामान्य शैंपू की तरह बालों और स्कैल्प को साफ नहीं करता। बालों और स्कैल्प की वास्तविक सफाई के लिए पानी और क्लीनिंग एजेंट यानी सर्फैक्टेंट की जरूरत होती है। इसलिए ड्राई शैंपू को नियमित हेयर वॉश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कभी-कभार इस्तेमाल करना आमतौर पर ठीक अगर आप ड्राई शैंपू का इस्तेमाल कभी-कभार करते हैं ताकि एक या दो दिन तक हेयर वॉश को टाला जा सके, तो आमतौर पर इससे बड़ी समस्या नहीं होनी चाहिए। समस्या तब शुरू हो सकती है जब ड्राई शैंपू को नियमित रूप से असली शैंपू की जगह इस्तेमाल किया जाए। ऐसा करने पर स्कैल्प पर ड्राई शैंपू, सीबम, मृत त्वचा कोशिकाओं और दूसरे हेयर प्रोडक्ट्स का जमाव हो सकता है। ज्यादा इस्तेमाल से स्कैल्प में हो सकती है परेशानी लंबे समय तक प्रोडक्ट बिल्डअप रहने से स्कैल्प में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे: खुजली और जलन मृत त्वचा कोशिकाओं का जमाव हेयर फॉलिकल्स के आसपास बिल्डअप बालों का भारी और बेजान दिखना बालों में रूखापन स्कैल्प से जुड़ी मौजूदा समस्याओं का बढ़ना अगर किसी व्यक्ति को डैंड्रफ या सेबोरिक डर्मेटाइटिस जैसी समस्या है, तो बार-बार हेयर वॉश को टालना स्थिति को और खराब कर सकता है। क्या ड्राई शैंपू से बाल झड़ सकते हैं? ड्राई शैंपू को सीधे तौर पर बाल झड़ने का कारण नहीं माना जाता। लेकिन अगर इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जाए और स्कैल्प की नियमित सफाई न हो, तो प्रोडक्ट, तेल और मृत त्वचा का जमाव फॉलिकल्स को प्रभावित कर सकता है। इससे स्कैल्प में जलन या असहजता हो सकती है और लंबे समय तक स्वस्थ हेयर ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए यह कहना ज्यादा सही है कि ड्राई शैंपू खुद सीधे हेयर लॉस नहीं करता, लेकिन इसका गलत और अत्यधिक इस्तेमाल स्कैल्प के लिए समस्या पैदा कर सकता है। कितने दिन लगातार इस्तेमाल करना चाहिए? ट्राइकोलॉजिस्ट की सलाह के मुताबिक ड्राई शैंपू को लगातार दो दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करना बेहतर है। अगर आपके बाल बहुत पतले या फाइन हैं, तो इसे एक दिन तक सीमित रखना बेहतर हो सकता है। इसके बाद बालों और स्कैल्प को सामान्य शैंपू और पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए। ड्राई शैंपू लगाने का सही तरीका ड्राई शैंपू लगाने के तरीके से भी काफी फर्क पड़ता है। सही तरीका: ड्राई शैंपू को मुख्य रूप से जड़ों और ऑयली हिस्से पर लगाएं। इसे तुरंत रगड़ने के बजाय कुछ समय सूखने दें। इसके बाद बालों को अच्छी तरह ब्रश करें। ब्रश करने से प्रोडक्ट पूरे हिस्से में फैलता है और अतिरिक्त तेल के साथ बचा हुआ पाउडर भी हटाने में मदद मिलती है। इसके बाद उचित समय पर बालों को सामान्य शैंपू और पानी से धोएं। कई लोग ड्राई शैंपू लगाने के बाद ब्रश करना भूल जाते हैं, जबकि यह स्टेप अतिरिक्त प्रोडक्ट हटाने के लिए महत्वपूर्ण है। क्या साफ बालों पर भी ड्राई शैंपू लगा सकते हैं? हां। ड्राई शैंपू का इस्तेमाल सिर्फ ऑयली बालों को फ्रेश दिखाने के लिए ही नहीं होता। अगर आपके बाल बहुत फाइन, पतले या फ्लैट हैं, तो साफ बालों पर थोड़ी मात्रा में ड्राई शैंपू लगाने से जड़ों में वॉल्यूम, टेक्सचर और ग्रिप मिल सकती है। यह हेयरस्टाइल को लंबे समय तक बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। यानी इसे हेयरकेयर के साथ-साथ स्टाइलिंग प्रोडक्ट की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ड्राई शैंपू खरीदते समय किन चीजों पर ध्यान दें? अगर आप नियमित रूप से ड्राई शैंपू इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसा फॉर्मूला चुनना बेहतर है जो स्कैल्प के लिए अपेक्षाकृत जेंटल हो। कुछ फॉर्मूलों में एलैंटोइन, Zinc PCA और नायसिनामाइड जैसे स्कैल्प-फ्रेंडली इंग्रीडिएंट्स शामिल किए जाते हैं। हालांकि किसी भी प्रोडक्ट को चुनते समय अपने स्कैल्प की स्थिति और व्यक्तिगत संवेदनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है।
गर्मियों में बालों को मैनेज करना खासतौर पर कर्ली हेयर वाली महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नमी, पसीना और बार-बार हीट स्टाइलिंग से कर्ल्स की प्राकृतिक बनावट प्रभावित हो सकती है। ऐसे में 2026 का ‘बेबी बॉब’ हेयरकट कर्ली गर्ल्स के लिए एक ऐसा विकल्प बनकर सामने आया है, जो कम मेहनत में बालों की प्राकृतिक खूबसूरती और बाउंस को बनाए रखने पर जोर देता है। यह हेयरकट न केवल छोटा और आधुनिक है, बल्कि कर्ल्स को दबाने या सीधा करने के बजाय उनकी प्राकृतिक मूवमेंट और वॉल्यूम को उभारता है। यही वजह है कि गर्म मौसम में यह स्टाइल तेजी से पसंद किया जा रहा है। क्या है ‘बेबी बॉब’ हेयरकट? ‘बेबी बॉब’ को बॉब हेयरकट का सबसे छोटा और ज्यादा ग्राफिक वर्जन माना जा रहा है। इसका नाम फिल्म ‘डर्टी डांसिंग’ की मशहूर किरदार बेबी से जुड़ा है। हेयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कट आमतौर पर जबड़े की लाइन तक या उससे थोड़ा ऊपर रहता है और कुछ मामलों में कान की लोब तक भी जा सकता है। पारंपरिक फ्रेंच बॉब की तुलना में यह छोटा और ज्यादा बोल्ड दिखाई देता है। कर्ली बालों में इसकी खासियत यह है कि कट को बालों की प्राकृतिक बनावट के हिसाब से तैयार किया जाता है। यह 2B से लेकर 3C तक के कई कर्ल पैटर्न पर अच्छा काम कर सकता है। गर्मियों में क्यों ट्रेंड कर रहा है बेबी बॉब? इस हेयरकट की लोकप्रियता केवल इसकी लंबाई की वजह से नहीं है। इसके पीछे फैशन और ब्यूटी इंडस्ट्री में आया एक बड़ा बदलाव भी है। अब बालों को पूरी तरह सीधा, बेहद चमकदार और परफेक्ट बनाने की बजाय उनकी प्राकृतिक बनावट को स्वीकार करने का ट्रेंड बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच ‘क्लाउड कर्ल्स’ जैसे वॉल्यूम वाले हेयर ट्रेंड भी लोकप्रिय हुए हैं। बेबी बॉब इसी सोच को आगे बढ़ाता है। इसमें कर्ल्स को नियंत्रित करने के बजाय उनके प्राकृतिक बाउंस, वॉल्यूम और मूवमेंट को प्राथमिकता दी जाती है। कर्ली हेयर एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे कट से बालों के कमजोर मिड-लेंथ हिस्से हट जाते हैं और बचा हुआ हेयर ज्यादा स्वस्थ और बाउंसी दिखाई दे सकता है। कर्ली बालों के लिए यह कट क्यों है खास? कर्ली बालों को छोटा करते समय सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बालों का आकार जरूरत से ज्यादा चौड़ा या त्रिकोण जैसा न दिखने लगे। सही तरीके से किया गया बेबी बॉब इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। इसमें बालों को बहुत ज्यादा लेयर करने के बजाय मजबूत बेसलाइन रखी जाती है। सामने के हिस्से में हल्का वजन कम करके चेहरे के आसपास सॉफ्ट फ्रेम बनाया जाता है। इसका फायदा यह है कि बालों का प्राकृतिक वॉल्यूम बना रहता है, लेकिन पूरा हेयरकट ज्यादा संतुलित दिखाई देता है। किन फेस शेप पर अच्छा लगेगा बेबी बॉब? बेबी बॉब को आमतौर पर ओवल और हार्ट शेप चेहरे के लिए काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसकी छोटी लंबाई चेहरे के ऊपरी हिस्से और चीकबोन्स को उभार सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राउंड या स्क्वायर फेस शेप वाली महिलाएं इसे नहीं अपना सकतीं। राउंड फेस के लिए सामने थोड़ी लंबाई रखी जा सकती है या बालों के अंदरूनी हिस्से का कुछ वजन कम किया जा सकता है। इससे चेहरा जरूरत से ज्यादा चौड़ा नजर नहीं आता। वहीं लंबे चेहरे के साथ फ्रिंज या बैंग्स जोड़कर चेहरे के अनुपात को संतुलित किया जा सकता है। यानी सही कटिंग तकनीक के साथ बेबी बॉब को अलग-अलग फेस शेप के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है। हेयरस्टाइलिस्ट से बेबी बॉब करवाते समय क्या कहें? अगर आप बेबी बॉब करवाने का मन बना रही हैं, तो केवल हेयरकट का नाम बताना पर्याप्त नहीं है। कर्ली बालों की प्राकृतिक बनावट को ध्यान में रखते हुए कट करवाना जरूरी है। हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार: पूरे सिर पर बहुत ज्यादा लेयरिंग न कराएं। बालों के सिरों पर मजबूत और भरी हुई बेसलाइन रखें। सामने के कोनों से केवल थोड़ा वजन हटाएं। चेहरे को सॉफ्ट फ्रेम देने पर ध्यान दें। बालों को मिडिल पार्टिंग के साथ कट करवाना ज्यादा वर्सेटाइल हो सकता है। कर्ली बालों में संभव हो तो बालों की प्राकृतिक अवस्था और कर्ल पैटर्न को देखकर कट तय करें। 2026 में इस कट का लुक पहले की तुलना में ज्यादा रिलैक्स्ड हो रहा है। बहुत सख्त ब्लंट लाइन की जगह सॉफ्ट किनारे, हल्के पीस-वाई एंड्स और नेचुरल टेक्सचर को प्राथमिकता दी जा रही है। बेबी बॉब को कैसे करें स्टाइल? बेबी बॉब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती। आपका स्टाइलिंग रूटीन आपके कर्ल पैटर्न के अनुसार हल्का और आसान रखा जा सकता है। सबसे पहले चौड़े दांतों वाली कंघी से बालों को धीरे-धीरे सुलझाएं। इसके बाद हल्का हेयर बाम या कम होल्ड वाला मूस लगाएं। बालों को माइक्रोफाइबर टॉवल या कॉटन टी-शर्ट से हल्के हाथों से स्क्रंच करें। इससे कर्ल पैटर्न उभरने में मदद मिलती है। इसके बाद बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या डिफ्यूजर का इस्तेमाल करें। अगर डिफ्यूजर इस्तेमाल कर रही हैं तो कम गर्मी रखें। अंत में कुछ बूंदें पौष्टिक हेयर ऑयल की लगाई जा सकती हैं। अगर आपको ज्यादा फ्लफी और नेचुरल फिनिश पसंद है, तो कम स्पीड पर ठंडी हवा से बालों को सुखाया जा सकता है। ‘जीरो क्रंच’ और ज्यादा बाउंस का नया तरीका बेबी बॉब का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि इसमें कर्ल्स को कठोर या चिपचिपा बनाने की जरूरत नहीं होती। हल्के स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स और सही कट के साथ बालों में प्राकृतिक बाउंस और मूवमेंट बरकरार रखा जा सकता है। आज की ब्यूटी दुनिया में यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है कि बालों को हर दिन परफेक्ट बनाने की बजाय उनकी प्राकृतिक बनावट को स्वीकार किया जा रहा है। बेबी बॉब इसी बदलाव का हिस्सा है। अगर आपके कर्ली बाल गर्मी में भारी, बेजान या मैनेज करने में मुश्किल लगते हैं, तो सही हेयर एक्सपर्ट से सलाह लेकर यह छोटा और आधुनिक कट आपके लिए एक नया विकल्प हो सकता है।
बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा एक बार फिर अपने शानदार साड़ी लुक से फैशन प्रेमियों का ध्यान खींच रही हैं। इस बार उन्होंने पारंपरिक साड़ी को बिल्कुल आधुनिक अंदाज में पेश किया। चॉकलेट ब्राउन रंग की उनकी प्री-ड्रेप्ड साड़ी ने जहां उनके लुक को बेहद आकर्षक बनाया, वहीं ब्लाउज में ही बनाया गया नेकलेस जैसा डिजाइन इस पूरे परिधान की सबसे खास खूबी रहा। शिल्पा शेट्टी का साड़ी के साथ रिश्ता हमेशा से खास रहा है। पारंपरिक रेशमी साड़ियों से लेकर हल्की शिफॉन और आधुनिक प्रयोगधर्मी ड्रेप्स तक, अभिनेत्री ने अलग-अलग मौकों पर साड़ी को नए अंदाज में पेश किया है। इस बार भी उन्होंने साड़ी के पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए उसमें आधुनिक फैशन का शानदार मेल किया। चॉकलेट ब्राउन रंग में दिखा नया फैशन ट्रेंड शिल्पा ने गहरे चॉकलेट ब्राउन और मोका शेड वाली साड़ी पहनी। यह रंग इस समय अवसरों और उत्सवों के परिधानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जहां आमतौर पर शादी और उत्सवों के लिए लाल, हरे, गुलाबी या सुनहरे जैसे चमकीले रंगों को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं चॉकलेट ब्राउन एक परिष्कृत और अलग विकल्प के तौर पर सामने आ रहा है। शिल्पा के लुक ने यह भी दिखाया कि गहरा भूरा रंग केवल साधारण या कैजुअल पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्लैमरस अवसरों पर भी बेहद खूबसूरती से पहना जा सकता है। प्री-ड्रेप्ड साड़ी ने दिया आधुनिक सिल्हूट शिल्पा ने पारंपरिक तरीके से साड़ी पहनने के बजाय प्री-ड्रेप्ड शैली को चुना। इस डिजाइन में साड़ी शरीर की बनावट के अनुसार सधे हुए अंदाज में नजर आती है और पहनने वाले को आधुनिक, आकर्षक सिल्हूट देती है। कपड़े पर उसी रंग के चमकदार क्रिस्टल लगाए गए हैं, जो रोशनी पड़ने पर हल्की चमक पैदा करते हैं। यह सजावट बहुत अधिक भड़कीली नहीं लगती, बल्कि पूरे परिधान को एक सॉफ्ट और लक्जरी प्रभाव देती है। ब्लाउज में ही बना दिया गया नेकलेस इस लुक की सबसे खास बात इसका ब्लाउज रहा। ब्लाउज का डिजाइन तांबे और सुनहरे रंग के चमकदार टोन में तैयार किया गया था। इसमें क्रिस्टल और बारीक बीडवर्क का इस्तेमाल किया गया। इस सजावट को इस तरह डिजाइन किया गया कि देखने पर ऐसा लगे जैसे ब्लाउज के ऊपर कोई भारी नेकलेस पहना गया हो। यानी यहां परिधान और आभूषण को एक ही डिजाइन में मिला दिया गया। यह डिजाइन न सिर्फ देखने में आकर्षक है, बल्कि इसका एक व्यावहारिक फायदा भी है। इस तरह के ब्लाउज के साथ भारी नेकलेस पहनने की जरूरत नहीं पड़ती और पूरा लुक अधिक संतुलित दिखाई देता है। एक्सेसरीज में रखा गया सादगी का संतुलन जब साड़ी और ब्लाउज खुद ही इतना आकर्षक हो, तो ज्यादा आभूषण पूरे लुक को भारी बना सकते हैं। शायद यही वजह है कि शिल्पा ने बाकी एक्सेसरीज को काफी संतुलित रखा। उन्होंने कंधों तक आने वाले दिल के आकार के इयररिंग्स पहने। इसके साथ उनकी डायमंड एंगेजमेंट रिंग भी नजर आई। हाथ में भूरे रंग की लेदर स्ट्रैप वाली घड़ी और एक पतला सुनहरा कंगन उनके लुक को पूरा कर रहा था। इस तरह उन्होंने साड़ी, ब्लाउज और आभूषणों के बीच सही संतुलन बनाए रखा। मेकअप भी मोका पैलेट के साथ रखा मेल शिल्पा ने अपने पसंदीदा ग्लैमरस ब्यूटी लुक को इस परिधान के साथ जोड़ा। उनके बालों को वॉल्यूम वाला ब्लो-ड्राई दिया गया था। मेकअप में स्मोकी आईज, अच्छी तरह परिभाषित लैशेज और न्यूड ब्राउन लिप्स शामिल थे। यह पूरा मेकअप उनकी चॉकलेट ब्राउन साड़ी के रंगों के साथ पूरी तरह मेल खाता नजर आया। क्या चॉकलेट ब्राउन नया रेड बन रहा है? शिल्पा का यह लुक फैशन की बदलती पसंद की ओर भी इशारा करता है। उत्सवों और खास मौकों के लिए लंबे समय से लाल, ज्वेल टोन और मेटैलिक रंगों का दबदबा रहा है। लेकिन चॉकलेट ब्राउन अब एक ऐसे विकल्प के रूप में सामने आ रहा है जो एक साथ आधुनिक, सुरुचिपूर्ण और आकर्षक दिखाई देता है। खास बात यह है कि इस रंग को पारंपरिक साड़ी, प्री-ड्रेप्ड साड़ी, लहंगे या आधुनिक ब्लाउज के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। शिल्पा का यह लुक यह साबित करता है कि साड़ी को आधुनिक बनाने के लिए उसके मूल स्वरूप को पूरी तरह बदलने की जरूरत नहीं है। सही रंग, फिटिंग, सिल्हूट और सजावट के जरिए पारंपरिक परिधान को भी बिल्कुल नया और समकालीन रूप दिया जा सकता है।