नई दिल्ली, एजेंसियां। JBL से जुड़े एक खास डिजाइन वाले लालटेन स्टाइल स्पीकर ने स्मार्ट लाइटिंग और ऑडियो को एक साथ लाने की दिशा में ध्यान खींचा है। इस तरह के उत्पाद में स्पीकर के साथ LED लाइटिंग को जोड़ा गया है, जिससे यह सामान्य Bluetooth स्पीकर के बजाय एक सजावटी लैंप या लालटेन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उपलब्ध उत्पाद जानकारी में इसे Lite Up Play नाम से JBL साउंड वाले cordless speaker-lantern के रूप में पेश किया गया है।
इस डिवाइस की खासियत इसका लालटेन जैसा डिजाइन है। इसमें LED लाइटिंग के साथ Bluetooth स्पीकर दिया गया है। इसका इस्तेमाल घर के अंदर के साथ-साथ आउटडोर जगहों पर भी किया जा सकता है। Weather-resistant डिजाइन होने के कारण इसे बाहरी वातावरण में इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार किया गया है।
कुछ उपलब्ध वेरिएंट में लकड़ी और मेटल एक्सेंट के साथ आधुनिक डिजाइन दिया गया है, जिससे यह केवल ऑडियो डिवाइस नहीं बल्कि कमरे, बालकनी या आउटडोर बैठने की जगह के लिए सजावटी उत्पाद जैसा भी नजर आता है।
उपलब्ध उत्पाद जानकारी के अनुसार Lite Up Play वेरिएंट में 8 घंटे तक की बैटरी लाइफ दी गई है और USB-C के जरिए इसे रिचार्ज किया जा सकता है। इसका कॉर्डलेस डिजाइन इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सुविधाजनक बनाता है।
लालटेन स्टाइल डिजाइन का फायदा यह है कि इसे केवल संगीत सुनने के लिए ही नहीं बल्कि ambient lighting के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे स्पीकर शाम के समय बालकनी, टेरेस, गार्डन या कैंपिंग जैसी जगहों पर खास तौर पर उपयोगी हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। vivo ने अपने नए vivo S2 5G स्मार्टफोन की भारत में पहली बिक्री शुरू कर दी है। फोन को 6 अगस्त को लॉन्च किया गया था और अब 11 अगस्त से इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है। स्मार्टफोन में 7050mAh की बड़ी बैटरी, 50MP रियर कैमरा और 120Hz AMOLED डिस्प्ले जैसे फीचर्स दिए गए हैं। 7050mAh की बड़ी बैटरी vivo S2 में 7050mAh बैटरी दी गई है, जिसे 44W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। कंपनी ने फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है। स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 7360 Turbo प्रोसेसर पर काम करता है और इसमें Android 16 आधारित OriginOS 6 दिया गया है। 6.83 इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले फोन में 6.83 इंच का 1.5K कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले मिलता है। स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है। इसके अलावा फोन में डुअल स्पीकर और IP69 रेटिंग जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। 50MP कैमरा और 4K वीडियो रिकॉर्डिंग फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे 50MP का मुख्य कैमरा और 2MP डेप्थ सेंसर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 32MP फ्रंट कैमरा मिलता है। फ्रंट और रियर दोनों कैमरों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग का सपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। कीमत और बिक्री भारत में vivo S2 के 8GB RAM + 128GB स्टोरेज मॉडल की कीमत ₹39,999, जबकि 8GB + 256GB मॉडल की कीमत ₹45,999 बताई गई है। फोन Silk White, Sapphire Blue और Regal Bronze रंगों में उपलब्ध है। इसकी बिक्री 11 अगस्त से शुरू हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Samsung के आगामी Galaxy S26 FE को लेकर नए लीक्स सामने आए हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फोन में 6.7 इंच का 120Hz AMOLED डिस्प्ले, Exynos 2500 प्रोसेसर, 8GB RAM और 256GB तक स्टोरेज मिल सकती है। Samsung ने अभी इन स्पेसिफिकेशन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैमरा सेटअप में बड़े बदलाव की उम्मीद कम लीक के अनुसार Galaxy S26 FE में 50MP का मुख्य कैमरा दिया जा सकता है। रिपोर्टों में Samsung ISOCELL S5KGN3 सेंसर के इस्तेमाल की बात कही गई है। इसके अलावा 8MP टेलीफोटो कैमरा भी मिल सकता है। यह कैमरा हार्डवेयर पिछले FE मॉडल से काफी मिलता-जुलता हो सकता है। Exynos 2500 और 45W चार्जिंग फोन में Exynos 2500 चिपसेट दिए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है। इसके साथ 8GB RAM और 256GB तक स्टोरेज मिलने की जानकारी सामने आई है। फोन में 45W फास्ट चार्जिंग मिलने की भी रिपोर्ट है। डिस्प्ले की बात करें तो 6.7 इंच का 120Hz AMOLED पैनल मिलने की उम्मीद है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग का अनुभव बेहतर हो सकता है। सितंबर के आसपास लॉन्च की संभावना Samsung के एक अधिकारी ने Galaxy S26 FE के आने की पुष्टि की है और संकेत दिया है कि फोन जल्द लॉन्च हो सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी लॉन्च की निश्चित तारीख नहीं बताई है। मौजूदा लीक्स सितंबर 2026 के आसपास लॉन्च की ओर इशारा करते हैं। भारत में इसकी शुरुआती कीमत को लेकर पहले ₹59,999 से ₹65,000 के आसपास के अनुमान सामने आए हैं, लेकिन यह आधिकारिक कीमत नहीं है। ध्यान दें: Galaxy S26 FE के ज्यादातर स्पेसिफिकेशन अभी लीक्स और रिपोर्टों पर आधारित हैं। Samsung की आधिकारिक घोषणा के बाद ही कीमत, कैमरा, बैटरी और अन्य फीचर्स की अंतिम पुष्टि होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Google अपने बड़े हार्डवेयर इवेंट में Pixel 11 सीरीज के साथ Pixel Watch 5 भी पेश करने की तैयारी में है। कंपनी का ‘Made by Google’ इवेंट 12 अगस्त 2026 को आयोजित होगा, जिसमें नए स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस पेश किए जाने की उम्मीद है। Pixel Watch 5 को लेकर लॉन्च से पहले कई जानकारियां सामने आ चुकी हैं। दो साइज में आ सकती है Pixel Watch 5 रिपोर्टों के मुताबिक Pixel Watch 5 को 41mm और 45mm के दो आकारों में पेश किया जा सकता है। इससे यूजर्स को अपनी कलाई और पसंद के हिसाब से मॉडल चुनने का विकल्प मिलेगा। डिजाइन के मामले में पिछली पीढ़ी की तुलना में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन Google नए रंगों और कुछ हार्डवेयर सुधारों के साथ इसे पेश कर सकता है। Gemini AI पर रहेगा खास फोकस Pixel Watch 5 में Gemini AI के बेहतर एकीकरण की उम्मीद की जा रही है। इससे स्मार्टवॉच पर वॉयस कमांड, सवालों के जवाब और रोजमर्रा के कामों में AI की उपयोगिता बढ़ सकती है। Google अपनी Pixel डिवाइस रणनीति में AI को प्रमुखता दे रहा है और Watch 5 में भी Gemini को ज्यादा उपयोगी बनाने की तैयारी की खबरें हैं। हालांकि, लॉन्च से पहले सामने आई इन जानकारियों में से सभी फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 64GB स्टोरेज और नए स्मार्ट फीचर्स की चर्चा लीक्स के अनुसार Pixel Watch 5 में 64GB स्टोरेज मिलने की उम्मीद है। स्मार्टवॉच में Wear OS आधारित नए फीचर्स के साथ Google के AI और स्वास्थ्य संबंधी फीचर्स का बेहतर इस्तेमाल देखने को मिल सकता है। बैटरी क्षमता में बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन सॉफ्टवेयर और पावर मैनेजमेंट में सुधार के जरिए बैटरी बैकअप को बेहतर बनाने की कोशिश की जा सकती है। Pixel 11 सीरीज के साथ होगी बड़ी लॉन्चिंग Pixel Watch 5 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसकी घोषणा Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold के साथ होने की उम्मीद है। Google के 12 अगस्त के इवेंट में स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और अन्य नए एक्सेसरीज पेश किए जा सकते हैं। फिलहाल Pixel Watch 5 की भारतीय कीमत, बिक्री की तारीख और सभी फीचर्स की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 12 अगस्त के लॉन्च इवेंट के बाद इन जानकारियों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।