धनबाद: धनबाद में वायु प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हो सका है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच धनबाद को 147.06 करोड़ रुपये मिले, जिसमें से केवल 19.94 करोड़ रुपये ही खर्च किये गये। यानी करीब 127.12 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने से बच गयी। उपलब्ध राशि का महज करीब 13.6 प्रतिशत ही इस्तेमाल किया जा सका।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 10 अगस्त को लोकसभा में यह जानकारी दी। खास बात यह है कि जहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए बड़ी राशि उपलब्ध है, वहीं धनबाद की हवा अब भी राष्ट्रीय मानक से काफी खराब बनी हुई है। शहर में पीएम10 का स्तर लगातार निर्धारित सीमा से ऊपर दर्ज किया जा रहा है।
धनबाद में वायु गुणवत्ता में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुधार जरूर हुआ है, लेकिन प्रदूषण अभी भी गंभीर स्तर पर है। वर्ष 2017-18 में धनबाद में पीएम10 की वार्षिक औसत सांद्रता 315 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। यह वर्ष 2024-25 में घटकर 138 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर हो गयी।
इस तरह करीब सात वर्षों में पीएम10 के स्तर में लगभग 56 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके बावजूद यह आंकड़ा राष्ट्रीय वार्षिक मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से करीब 78 माइक्रोग्राम अधिक है। यानी सुधार के बावजूद धनबाद अभी भी स्वच्छ हवा के तय मानक से काफी दूर है।
एनसीएपी के तहत मिलने वाली राशि का इस्तेमाल वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई योजनाओं में किया जाता है। इसमें सड़कों की धूल कम करना, सड़कों का पक्कीकरण, हरित क्षेत्र विकसित करना, यातायात व्यवस्था में सुधार, माइक्रो फॉरेस्ट तैयार करना और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपाय शामिल हैं।
धनबाद में कोयला खनन, कोयले का परिवहन, औद्योगिक गतिविधियां और सड़क की धूल प्रदूषण के प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में उपलब्ध राशि का समय पर और प्रभावी इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च नहीं होने से योजनाओं की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
झारखंड के दूसरे बड़े शहरों में भी वायु प्रदूषण की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। रांची के लिए 2023-24 से 2025-26 के दौरान 68.62 करोड़ रुपये जारी किये गये, जिसमें से 39.95 करोड़ रुपये खर्च हुए।
वहीं, जमशेदपुर अर्बन एरिया के लिए इस अवधि में नयी राशि जारी नहीं की गयी, लेकिन 23.03 करोड़ रुपये खर्च किये गये। इसमें पिछले वर्षों में जारी राशि का उपयोग भी शामिल है। धनबाद, रांची और जमशेदपुर तीनों ही क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान पीएम10 का स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक रहा।
एनसीएपी के तहत देश के 130 शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए योजनाएं चलायी जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में इनमें से 108 शहरों में पीएम10 की सांद्रता में वर्ष 2017-18 की तुलना में कमी दर्ज की गयी।
इनमें 72 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक कमी आयी। हालांकि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक हासिल करने वाले शहरों की संख्या अभी भी कम है। वर्ष 2025-26 में केवल 14 शहर ही इस मानक को पूरा कर सके।
एनसीएपी के तहत देश के 119 शहरों में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का अध्ययन कराया गया है। इसमें वाहनों, उद्योगों, सड़क की धूल, निर्माण कार्य और घरेलू ईंधन से होने वाले प्रदूषण का आकलन किया जा रहा है।
धनबाद जैसे कोयला आधारित शहर में इस तरह के अध्ययन की खास अहमियत है। प्रदूषण के स्रोतों की स्पष्ट पहचान होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाये जा सकते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध 127 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का समय पर और सही तरीके से इस्तेमाल कर धनबाद की हवा को राष्ट्रीय मानक के करीब लाना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: युवाओं और खासकर पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने के उद्देश्य से निर्मला कॉलेज में बुधवार को मतदाता साक्षरता एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। निर्मला कॉलेज और जिला निर्वाचन कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर की करीब 2000 छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, नाम-पता समेत अन्य विवरण में सुधार कराने और निर्वाचन से जुड़ी ऑनलाइन सुविधाओं की जानकारी दी गयी। अधिकारियों ने छात्राओं को बताया कि पात्र युवा समय पर मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। 18 साल की उम्र पूरी होने पर ऐसे जुड़वाएं नाम जिला निर्वाचन कार्यालय के पदाधिकारी आदित्य झा ने छात्राओं को ईसीआइ पोर्टल और ईसीआइ नेट एप के माध्यम से ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया समझायी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र युवा मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, पहले से मतदाता सूची में दर्ज नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत विवरण में किसी तरह का सुधार कराने के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जाता है। छात्राओं को मतदान केंद्र बदलने, नाम हटाने और निर्वाचन से जुड़ी अन्य ऑनलाइन सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गयी। ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन की भी जानकारी अभियान के दौरान छात्राओं को ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करने के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने आवेदन के दौरान होने वाली सामान्य समस्याओं और उनके समाधान की जानकारी भी दी, ताकि नए मतदाताओं को पंजीकरण कराने में किसी तरह की परेशानी न हो। छात्राओं से खुद वोटर बनने की अपील कॉलेज की उपप्राचार्या डॉ. सिस्टर शोभा ने छात्राओं से स्वयं मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्राएं अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों और आसपास के युवाओं को भी मतदाता पंजीकरण और मतदान के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि युवा लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी भागीदारी से निर्वाचन प्रक्रिया और अधिक मजबूत होती है। पात्र युवाओं को समय पर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराना चाहिए। करीब 2000 छात्राओं ने लिया हिस्सा कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक और शिक्षकेत्तरकर्मी भी मौजूद रहे। इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर की करीब 2000 छात्राओं ने अभियान में हिस्सा लेकर मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हासिल की। शिक्षकेत्तरकर्मी नवेन्द्र झा ने नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया और आवेदन के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान से संबंधित जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. ज्योति प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
धनबाद: परिवार से दूर रह रहे और देखभाल की जरूरत वाले बच्चों के लिए धनबाद में एक अच्छी पहल शुरू की गयी है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से मिशन वात्सल्य के तहत पालन-पोषण देखरेख यानी फोस्टर केयर योजना लागू की गयी है। योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें संस्थागत माहौल के बजाय कुछ समय के लिए परिवार जैसा अपनापन मिल सके। योजना के तहत जिले के विभिन्न बाल गृहों में रह रहे 18 वर्ष से कम उम्र के परिवार विहीन बच्चों को इच्छुक और पात्र परिवारों से जोड़ा जायेगा। चयनित परिवार इन बच्चों को अपने साथ रखकर उनकी देखभाल, शिक्षा और दैनिक जरूरतों का ध्यान रख सकेंगे। बच्चों को मिलेगा परिवार जैसा माहौल फोस्टर केयर योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल रहने की जगह उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें प्यार, सुरक्षा और पारिवारिक वातावरण देना है। परिवार के साथ रहने से बच्चों के भावनात्मक और सामाजिक विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत बच्चों को उनकी जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार अल्प अवधि के लिए परिवार से जोड़ा जा सकता है। इस दौरान परिवार की जिम्मेदारी होगी कि बच्चे की देखभाल सुरक्षित और संवेदनशील तरीके से की जाये। शिक्षा, पोषण और इलाज के लिए सहायता बच्चों की देखभाल के दौरान उनकी शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। इससे फोस्टर परिवार पर बच्चे की बुनियादी जरूरतों का पूरा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। योजना के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि परिवार से वंचित बच्चों को ऐसा माहौल मिले, जहां वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और सामान्य बच्चों की तरह शिक्षा और विकास के अवसर प्राप्त कर सकें। इच्छुक परिवार कर सकते हैं आवेदन धनबाद जिले में ऐसे दंपती या परिवार, जो किसी परिवार विहीन 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को अल्प अवधि के लिए अपने साथ रखकर उसकी देखभाल करना चाहते हैं, वे जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर सकते हैं। इच्छुक परिवार जिला बाल संरक्षण इकाई, मिश्रित भवन, भू-तल, कमरा संख्या-07, धनबाद-826001 में संपर्क कर योजना की जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा 7903353045 और 7004246414 नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है। बच्चों को मिलेगा सुरक्षित भविष्य का सहारा फोस्टर केयर योजना ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिन्हें पारिवारिक संरक्षण की जरूरत है। योजना के जरिए बच्चों को अस्थायी रूप से परिवार का साथ, बेहतर देखभाल और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे बच्चों के भीतर अपनापन और सुरक्षा की भावना मजबूत होने के साथ उनके बेहतर भविष्य की राह भी आसान हो सकती है।
रातू: सिमलिया स्थित लीवेंस स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में बच्चे को लेने पहुंचे एक अभिभावक पर डंडे से हमला करने का मामला सामने आया है। घटना उस समय हुई, जब डॉ. दीपक कुमार अपनी पत्नी के साथ कथित दुर्व्यवहार का विरोध कर रहे थे। घटना के बाद उन्होंने रातू थाना में लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, डॉ. दीपक कुमार अपनी पत्नी के साथ स्कूल परिसर में मौजूद थे। इसी दौरान एक अन्य अभिभावक द्वारा उनकी पत्नी के साथ कथित रूप से अपशब्दों का प्रयोग किया गया। डॉ. दीपक कुमार ने इसका विरोध किया। आरोप है कि विरोध के बाद मामला और बढ़ गया। स्कूल के बाहर डंडा लेकर कर रहा था इंतजार डॉ. दीपक कुमार का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति स्कूल से बाहर निकलने के बाद भी उनका इंतजार कर रहा था। उसके हाथ में डंडा था। जैसे ही डॉ. दीपक कुमार बाहर पहुंचे, आरोपी ने कथित तौर पर उनके सिर पर डंडे से वार कर दिया। हमले में उनके सिर में गहरा कट लग गया और खून बहने लगा। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना कई लोगों की मौजूदगी में हुई। पुलिस को तस्वीर और वाहन की जानकारी देने की बात घटना के बाद डॉ. दीपक कुमार ने रातू थाना पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। उन्होंने आरोपी की तस्वीर और उसके वाहन का नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि उसकी पहचान कर कार्रवाई की जा सके। पुलिस ने शुरू की मामले की जांच शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। स्कूल परिसर और आसपास मौजूद लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जा सकती है। मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।