डार्विन, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहले टेस्ट के पहले दिन मेजबान ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बेहद खराब रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों ने शुरुआती सत्र में ही चार बड़े झटके दे दिए। लंच तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 4 विकेट पर 74 रन था।
बांग्लादेश के गेंदबाजों ने शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। हसन महमूद ने दो विकेट हासिल किए, जबकि तस्कीन अहमद और इबादत हुसैन ने भी महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं। ऑस्ट्रेलिया का शीर्ष क्रम बांग्लादेश की गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सका।
ऑस्ट्रेलिया को जेक वेदराल्ड 23 रन, ट्रेविस हेड 22 रन और मार्नस लाबुशेन सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद कैमरन ग्रीन भी बड़ी पारी नहीं खेल सके। शुरुआती विकेटों ने ऑस्ट्रेलिया को मुश्किल स्थिति में पहुंचा दिया।
लगातार विकेट गिरने के बीच स्टीव स्मिथ ने मोर्चा संभाला और पारी को स्थिर करने की कोशिश की। लंच तक ऑस्ट्रेलिया 74/4 पर था। दिन के आगे के खेल में स्मिथ और एलेक्स कैरी ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन बांग्लादेश के गेंदबाजों का दबाव बना रहा।
यह मुकाबला बांग्लादेश के लिए खास है, क्योंकि टीम 23 साल बाद ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेल रही है। ऐसे में पहले ही सत्र में ऑस्ट्रेलिया के चार विकेट हासिल करना बांग्लादेश के लिए शानदार शुरुआत मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गॉल, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने पिच का मुआयना किया। टेस्ट से पहले पिच को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि गॉल की परिस्थितियां आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं और मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ स्पिन का प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है। गंभीर ने पिच की स्थिति को करीब से देखा पहले टेस्ट से पहले गौतम गंभीर ने गॉल की पिच का जायजा लिया और विकेट की मौजूदा स्थिति को समझने की कोशिश की। टीम प्रबंधन के लिए पिच का मिजाज बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर प्लेइंग-11 में तेज और स्पिन गेंदबाजों का संतुलन तय किया जा सकता है। गॉल में अक्सर टेस्ट मैच की शुरुआत में बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां अपेक्षाकृत अनुकूल रहती हैं, लेकिन जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ता है, पिच पर टूट-फूट आने के कारण स्पिन गेंदबाजों को अधिक टर्न और उछाल मिल सकता है। स्पिनरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर श्रीलंका की परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय टीम के स्पिन विभाग पर खास नजर रहेगी। रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे गेंदबाजों के अनुभव का भारत को फायदा मिल सकता है। हालांकि, सिर्फ स्पिनरों के लिए पिच तैयार होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। टेस्ट मैच से पहले पिच की अंतिम स्थिति और मौसम भी काफी अहम रहेगा। कप्तान शुभमन गिल और टीम प्रबंधन को अंतिम एकादश चुनते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। श्रीलंका के स्पिनरों से भी चुनौती दूसरी ओर श्रीलंका की टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेगी। गॉल में श्रीलंकाई गेंदबाजों को पिच से मिलने वाली अतिरिक्त मदद भारत के बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन सकती है। भारत की बल्लेबाजी में शुभमन गिल, ऋषभ पंत, यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। अगर पिच पर टर्न बढ़ता है तो बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ धैर्य के साथ खेलना होगा। 15 अगस्त से शुरू होगा पहला टेस्ट भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा। यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 का हिस्सा है। ऐसे में दोनों टीमों के लिए मुकाबला सिर्फ सीरीज जीतने के लिहाज से नहीं, बल्कि WTC अंक तालिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
बेलफास्ट, एजेंसियां। अफगानिस्तान ने आयरलैंड को पांच मैचों की वनडे सीरीज के चौथे मुकाबले में 42 रन से हरा दिया। 12 अगस्त को बेलफास्ट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब, स्टॉर्मॉन्ट में खेले गए मुकाबले में अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 343/9 का विशाल स्कोर बनाया। जवाब में आयरलैंड की पूरी टीम 48 ओवर में 301 रन पर ऑलआउट हो गई। इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अफगानिस्तान ने बनाया अपना सबसे बड़ा ODI स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। 343/9 का स्कोर उसका वनडे क्रिकेट में अब तक का सबसे बड़ा टीम स्कोर रहा। पारी की सबसे बड़ी खासियत सेदिकुल्लाह अटल और इब्राहिम जादरान के बीच 231 रन की साझेदारी रही। यह अफगानिस्तान की वनडे क्रिकेट में दूसरी विकेट के लिए तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी बताई गई है। अटल-जादरान की जोड़ी ने मचाया धमाल अफगानिस्तान की पारी को मजबूत आधार देने में सेदिकुल्लाह अटल और इब्राहिम जादरान की अहम भूमिका रही। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 231 रन जोड़कर आयरलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। जादरान ने इस मुकाबले के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 4,500 रन भी पूरे किए और यह उपलब्धि हासिल करने वाले अफगानिस्तान के पांचवें बल्लेबाज बने। 301 रन पर सिमटी आयरलैंड की पारी 344 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए आयरलैंड ने अच्छी शुरुआत के बाद मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन अफगानिस्तान के गेंदबाजों ने अहम मौकों पर विकेट निकालते रहे। आयरलैंड की टीम 48 ओवर में 301 रन पर ऑलआउट हो गई और अफगानिस्तान ने मुकाबला 42 रन से अपने नाम कर लिया। सीरीज पर अफगानिस्तान का कब्जा, अब क्लीन स्वीप पर नजर इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। सीरीज का पांचवां और आखिरी वनडे 15 अगस्त को बेलफास्ट में खेला जाएगा। अब अफगानिस्तान की नजर सीरीज को 4-0 से खत्म करने और क्लीन स्वीप करने पर होगी, जबकि आयरलैंड आखिरी मुकाबला जीतकर सम्मान बचाने की कोशिश करेगा।
कोलकाता, एजेंसियां। भारतीय ऑलराउंडर और मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या को लेकर IPL ट्रेड की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने सोशल मीडिया पर हार्दिक पांड्या से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके बाद उनके KKR में जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अभी तक हार्दिक के KKR में ट्रेड होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। KKR की पोस्ट ने बढ़ाया सस्पेंस KKR की पोस्ट में उसका स्पिनर वरुण चक्रवर्ती BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अभ्यास करता दिखाई देता है। इसी दौरान हार्दिक पांड्या वहां से गुजरते हैं और वरुण को देखकर मजाकिया अंदाज में उन्हें चिढ़ाते नजर आते हैं। KKR ने इस वीडियो को ऐसे समय पोस्ट किया है, जब हार्दिक के ट्रेड को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही चर्चाएं चल रही थीं। मुंबई इंडियंस से अलग होने की अटकलें IPL 2026 में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई थी। इसके बाद हार्दिक के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे। कई टीमों के साथ उनके संभावित ट्रेड की चर्चाएं सामने आईं, लेकिन अभी तक कोई डील आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है। गुजरात टाइटंस की वापसी भी नहीं हुई हार्दिक के अपनी पुरानी टीम गुजरात टाइटंस में लौटने की संभावना को लेकर भी चर्चा हुई थी। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक कप्तानी को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण यह संभावित डील आगे नहीं बढ़ सकी। हार्दिक कथित तौर पर कप्तानी की भूमिका चाहते थे, जिसे लेकर गुजरात की ओर से सहमति नहीं बनी। KKR में जाने की खबर अभी सिर्फ अटकल KKR की पोस्ट ने निश्चित तौर पर ट्रेड की चर्चा को और हवा दी है, लेकिन हार्दिक पांड्या के KKR में जाने की खबर को अभी पक्की खबर नहीं माना जा सकता। आधिकारिक ट्रेड या फ्रेंचाइजी की घोषणा होने तक इसे महज अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।