मुंबई, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद अब एक नए रोल में नजर आने वाले हैं। रहाणे भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज में कमेंटेटर के रूप में अपना टेस्ट कमेंट्री डेब्यू करेंगे। वह Sony Sports Network के कमेंट्री पैनल का हिस्सा होंगे।
भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त 2026 से गॉल में खेला जाएगा। इसी सीरीज के दौरान रहाणे पहली बार टेस्ट मैच में कमेंट्री करते दिखाई देंगे। उनके पास करीब 18 साल के प्रथम श्रेणी क्रिकेट अनुभव का फायदा अब दर्शकों को कमेंट्री के जरिए मिलने वाला है।
रहाणे का शांत स्वभाव और टेस्ट क्रिकेट की गहरी समझ उन्हें कमेंट्री के लिए खास बनाती है। खास तौर पर भारतीय बल्लेबाजी, टेस्ट मैच की रणनीति और विदेशी परिस्थितियों में खेलने के उनके अनुभव से दर्शकों को मैच को समझने में मदद मिल सकती है।
अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच खेले और 5,077 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं। वह भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम के महत्वपूर्ण बल्लेबाज रहे हैं और मुश्किल विदेशी परिस्थितियों में कई यादगार पारियां खेल चुके हैं।
रहाणे ने भारत की कप्तानी भी की और उनके नेतृत्व में भारत ने 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराया था। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी उपलब्धियों में यह जीत शामिल है।
रहाणे का नया कमेंट्री रोल यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बावजूद वह क्रिकेट से जुड़े रहना चाहते हैं। हालांकि, कमेंट्री उनका एकमात्र नया क्रिकेट अध्याय नहीं है। अगस्त की शुरुआत में उन्हें European T20 Premier League में Amsterdam Flames के मार्की खिलाड़ी के तौर पर भी शामिल किया गया था। यानी रहाणे के लिए यह दौर क्रिकेट से विदाई का नहीं, बल्कि नई भूमिकाओं के साथ नई पारी शुरू करने का है।
रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है और कप्तानी का अनुभव भी उनके पास है। ऐसे में कमेंट्री बॉक्स में उनका विश्लेषण खास तौर पर टेस्ट रणनीति, बल्लेबाजी तकनीक, कप्तानी के फैसलों और विदेशी परिस्थितियों को लेकर दिलचस्प हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
डार्विन, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन बांग्लादेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में सिर्फ 198 रन पर ऑलआउट कर दिया। जवाब में बांग्लादेश ने दिन का खेल खत्म होने तक 24 ओवर में 1 विकेट पर 96 रन बना लिए। इस तरह बांग्लादेश ऑस्ट्रेलिया से अभी 102 रन पीछे है और उसके नौ विकेट सुरक्षित हैं। हसन महमूद ने बरपाया कहर बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद पहले दिन के सबसे बड़े स्टार रहे। उन्होंने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 55 रन देकर 6 विकेट चटकाए और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की कमर तोड़ दी। हसन की शानदार गेंदबाजी के कारण ऑस्ट्रेलिया एक समय लगातार विकेट गंवाता रहा और पूरी टीम 198 रन पर सिमट गई। स्टीव स्मिथ ने बचाई ऑस्ट्रेलिया की लाज ऑस्ट्रेलिया की तरफ से स्टीव स्मिथ ने 71 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उन्होंने एक छोर संभाले रखा, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। स्मिथ के अलावा ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बांग्लादेश के गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सके। बांग्लादेश ने भी की मजबूत शुरुआत 198 रन के जवाब में बांग्लादेश ने पहले दिन के अंत तक 96/1 का स्कोर बना लिया। स्टंप्स के समय मोमिनुल हक 35 रन और तंजिद हसन 32 रन पर नाबाद थे। बांग्लादेश अभी ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के स्कोर से 102 रन पीछे है। ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिचेल स्टार्क ने एक विकेट हासिल किया, जबकि बांग्लादेश ने दिन का खेल स्पष्ट बढ़त के साथ समाप्त किया। दूसरे दिन ऑस्ट्रेलिया पर दबाव पहले दिन के प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के पास दूसरे दिन ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बढ़ाने का अच्छा मौका है। यदि बांग्लादेश पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के स्कोर को पार कर बढ़त हासिल करता है, तो मैच में उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।
गॉल, एजेंसियां। भारत के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए श्रीलंका ने 16 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। श्रीलंका क्रिकेट ने 12 अगस्त को टीम का ऐलान किया। धनंजय डी सिल्वा टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि कामिंदु मेंडिस को उपकप्तान बनाया गया है। यह मुकाबला ICC विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 का हिस्सा है। धनंजय डी सिल्वा को मिली कप्तानी की जिम्मेदारी श्रीलंका की 16 सदस्यीय टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का मिश्रण है। टीम की कमान धनंजय डी सिल्वा के हाथों में होगी और कामिंदु मेंडिस उनके डिप्टी होंगे। श्रीलंका की 16 सदस्यीय टीम: धनंजय डी सिल्वा (कप्तान), लाहिरू उदाना, निशान मदुश्का, कामिंदु मेंडिस, दिनेश चांदीमल, पसिंदु सूरियाबंडारा, सोनल दिनूषा, निरोशन डिकवेला, रमेश मेंडिस, प्रभात जयसूर्या, केशरा नुवांथा, मिलान रत्नायके, असिथा फर्नांडो, लाहिरू कुमारा, विश्वा फर्नांडो और दिलशान मदुशंका। कुसल मेंडिस और पथुम निसांका टीम से बाहर श्रीलंका को दो अहम बल्लेबाजों की कमी खलेगी। कुसल मेंडिस चोट के कारण पहले टेस्ट से बाहर हैं, जबकि अनुभवी बल्लेबाज पथुम निसांका कलाई की सर्जरी से उबर रहे हैं। कुसल के बाहर होने के बाद विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला की टेस्ट टीम में वापसी का रास्ता खुल गया है। डिकवेला ने आखिरी बार 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट खेला था। दो खिलाड़ियों के टेस्ट डेब्यू पर नजर श्रीलंका ने टीम में पसिंदु सूरियाबंडारा और ऑफ स्पिनर केशरा नुवांथा को भी जगह दी है। घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बाद दोनों खिलाड़ियों के पास टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका है। वहीं तेज गेंदबाज दिलशान मदुशंका की भी टीम में वापसी हुई है। उन्होंने श्रीलंका के लिए अपना एकमात्र टेस्ट 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। भारत के खिलाफ सीरीज WTC के लिहाज से अहम भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट 15 से 19 अगस्त तक गॉल में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो में होगा। श्रीलंका फिलहाल WTC तालिका में छठे स्थान पर है, जबकि भारत पांचवें स्थान पर है। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह दो टेस्ट काफी महत्वपूर्ण हैं।
गाले, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में भारतीय कप्तान शुभमन गिल के पास एक खास उपलब्धि हासिल करने का मौका है। गिल अगर सीरीज में 157 रन बना लेते हैं तो वह विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के इतिहास में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन जाएंगे। 157 रन बनाते ही रचेंगे इतिहास गिल ने WTC में अब तक 2,843 रन बनाए हैं और 3,000 रन के आंकड़े से 157 रन दूर हैं। श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में उनके पास यह उपलब्धि हासिल करने का शानदार मौका है। ऐसा करने पर वह WTC में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बन जाएंगे। कप्तान के रूप में बढ़ी जिम्मेदारी शुभमन गिल इस सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे। इंग्लैंड के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद उनसे श्रीलंका के खिलाफ भी बड़ी पारियों की उम्मीद है। टीम इंडिया के लिए यह सीरीज WTC 2025-27 चक्र के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के लिए भी अहम होगी सीरीज भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट 15 अगस्त से गाले में खेला जाएगा। दोनों मुकाबले मौजूदा WTC चक्र का हिस्सा हैं। भारत इस समय WTC तालिका में पांचवें स्थान पर है, इसलिए सीरीज में अच्छे प्रदर्शन से टीम अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी। गिल के बल्ले पर रहेंगी निगाहें श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ गिल की बल्लेबाजी अहम होगी। अगर वह दोनों टेस्ट में 157 या उससे ज्यादा रन बना लेते हैं, तो उनके नाम WTC में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज का रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा।