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झारखंड में मनरेगा, पीएम आवास और जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में अनियमितताओं का कैग रिपोर्ट में खुलासा

anjali kumari अगस्त 13, 2026 0
Jharkhand CAG Report
Jharkhand CAG Report

रांची। झारखंड विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों ने ग्रामीण विकास से जुड़ी तीन बड़ी केंद्रीय योजनाओं—प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G), जल जीवन मिशन (JJM) और मनरेगा—के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऑडिट में योजना बनाने से लेकर धन के इस्तेमाल, कार्यों की प्रगति और निगरानी तक कई स्तरों पर कमियां और अनियमितताएं सामने आई हैं।

 

पीएम आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवार छूटे

 

CAG की PMAY-G ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2022 तक झारखंड में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गई थी। लेकिन प्राथमिकता सूची में खामियों, लक्ष्यों का सही इस्तेमाल नहीं होने और लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देरी के कारण केंद्र ने केवल 16.02 लाख घरों का लक्ष्य आवंटित किया।

 

इसका परिणाम यह हुआ कि करीब 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गए। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2024 के बीच राज्य में 15,92,124 घर स्वीकृत किए गए थे, जबकि जनवरी 2025 तक 15,62,249 घरों का निर्माण पूरा हुआ था।

 

रिपोर्ट ने योजना के वित्तीय प्रबंधन को भी अपर्याप्त बताया। उपलब्ध ₹20,199.98 करोड़ में से करीब ₹14,113 करोड़ ही खर्च किए गए और 2019 से 2024 के बीच धन के उपयोग का स्तर 55 से 83 प्रतिशत के बीच रहा।

 

जल जीवन मिशन में हजारों योजनाएं अधूरी

 

जल जीवन मिशन को लेकर भी CAG ने योजनाओं की धीमी प्रगति और वित्तीय एवं ठेका प्रबंधन में कमियां दर्ज की हैं। राज्य सरकार ने करीब ₹24,360 करोड़ की अनुमानित लागत से 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से 97,535 योजनाएं करीब ₹24,665.29 करोड़ की सहमत लागत पर क्रियान्वयन के लिए ली गईं, लेकिन दिसंबर 2024 तक केवल 27,249 योजनाएं पूरी हो सकीं।

 

CAG की आधिकारिक रिपोर्ट में ठेका प्रबंधन, खरीद प्रक्रिया, पानी की गुणवत्ता, स्रोत की उपलब्धता और योजनाओं की निगरानी से जुड़ी कमियों का भी उल्लेख है। कुछ मामलों में कम प्रतिस्पर्धा वाली निविदाओं और ठेकेदारों की पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

 

मार्च 2025 तक झारखंड के 62,53,471 ग्रामीण परिवारों में से 34,31,115 परिवारों, यानी करीब 55 प्रतिशत को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन मिला था। यह उस समय के राष्ट्रीय स्तर के लगभग 80 प्रतिशत कवरेज से कम था।

 

मनरेगा में मजदूरी बकाया और काम अधूरे

 

मनरेगा की ऑडिट में विभाग के प्रमाणित वित्तीय खातों और NREGASoft पोर्टल के आंकड़ों में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 से 2023-24 के बीच अकुशल श्रमिकों की करीब ₹321.84 करोड़ की मजदूरी बकाया थी।

 

ऑडिट में यह भी सामने आया कि 2019 से मार्च 2024 के बीच काम के लिए प्रस्तावित 1,02,68,484 कार्यों में से केवल 27,96,044 यानी करीब 27 प्रतिशत ही पूरे हुए। वहीं 50,21,492 कार्य यानी करीब 49 प्रतिशत अधूरे थे। इन कार्यों पर करीब ₹2,633 करोड़ खर्च किए गए थे।

 

CAG ने मनरेगा में सर्वेक्षण, जॉब कार्ड के रखरखाव, मस्टर रोल और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी कमियां दर्ज की हैं।

 

रिपोर्ट के बाद सरकार पर उठे सवाल

 

CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद झारखंड में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से CAG की टिप्पणियों पर जवाब देने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

 

हालांकि, CAG की रिपोर्ट में दर्ज अनियमितता का अर्थ अपने आप में भ्रष्टाचार साबित होना नहीं है। यह ऑडिट के दौरान सामने आई प्रक्रियागत, वित्तीय और क्रियान्वयन संबंधी कमियों को दर्शाती है। आगे सरकार की कार्रवाई और संबंधित विभागों के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि किन मामलों में जिम्मेदारी तय की जाती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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मोरहाबादी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल
मोरहाबादी में स्वतंत्रता दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल, 14 प्लाटूनों ने किया परेड का अभ्यास

रांची। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह को लेकर रांची के मोरहाबादी मैदान में गुरुवार को फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। 15 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यहां ध्वजारोहण करेंगे। समारोह की तैयारियों के तहत 14 प्लाटूनों और पुलिस बैंड पार्टी ने परेड, कदमताल और सलामी का अभ्यास किया।   डीसी-एसएसपी की मौजूदगी में हुआ रिहर्सल   रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन की देखरेख में फुल ड्रेस रिहर्सल हुआ। इस दौरान परेड, सलामी, राष्ट्रगान और स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ी अन्य औपचारिक गतिविधियों का पूर्वाभ्यास किया गया। दोनों अधिकारियों ने परेड की सलामी ली और जवानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की ब्रीफिंग   समारोह को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग भी हुई। डीसी, एसएसपी, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह और अपर जिला दंडाधिकारी धनंजय ने अधिकारियों और जवानों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने ड्यूटी प्वाइंट और जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी रखें। मुख्य अतिथियों के आगमन से लेकर समारोह समाप्त होने तक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया।   मोरहाबादी मैदान में ड्रोन उड़ाने पर रोक   सुरक्षा कारणों से स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मोरहाबादी मैदान में आम लोगों को ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं होगी। केवल अधिकृत विभागीय ड्रोन से ही वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी की जा सकेगी। एसएसपी ने समारोह में आने वाले लोगों की सघन जांच करने और किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के साथ प्रवेश रोकने के निर्देश दिए हैं।   14 प्लाटून और तीन बैंड पार्टियां लेंगी हिस्सा   राज्य स्तरीय समारोह की परेड में अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस, झारखंड जगुआर, होमगार्ड और एनसीसी की कुल 14 टुकड़ियां शामिल होंगी। इनमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ, ओडिशा पुलिस, झारखंड जगुआर, जैप-1, जैप-2, जैप-10, रांची जिला पुलिस की पुरुष और महिला टुकड़ी, झारखंड गृहरक्षा वाहिनी तथा एनसीसी की टुकड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा जैप-1, जैप-10 और झारखंड गृहरक्षा वाहिनी की तीन बैंड पार्टियां समारोह में प्रस्तुति देंगी।   IPS राघवेंद्र शर्मा होंगे फर्स्ट इन कमांड   समारोह की परेड में 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी राघवेंद्र शर्मा फर्स्ट इन कमांड की जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में वह रामगढ़ में पदस्थापित हैं। वहीं, परिचारी प्रवर द्वितीय अनिश मोमित कुजूर सेकेंड इन कमांड की भूमिका में होंगे।   बोकारो में भी हुआ फुल ड्रेस रिहर्सल   बोकारो के सेक्टर-12 स्थित पुलिस लाइन मैदान में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। डीसी अजय नाथ झा और एसपी नाथू सिंह मीना ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली और समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। डीसी ने बताया कि इस बार जिले में ध्वजारोहण से पहले और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय गीत का गायन किया जाएगा। वहीं, सुरक्षा को देखते हुए होटल, लॉज और प्रमुख चौक-चौराहों पर लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
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चाईबासा में चार माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद नक्सलमुक्त घोषणा
चाईबासा नक्सलमुक्त घोषित, चार माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने किया बड़ा ऐलान

चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता सामने आई है। 10 लाख रुपये के इनामी माओवादी नेता सालुका कायम समेत चार माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद पश्चिमी सिंहभूम को नक्सलमुक्त घोषित किया गया है। पुलिस के अनुसार, सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में अब कोई सक्रिय नक्सली नहीं बचा है।   10 लाख के इनामी समेत चार माओवादियों ने डाले हथियार     चाईबासा पुलिस केंद्र में हुए आत्मसमर्पण कार्यक्रम में चार माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार डाल दिए। इनमें सालुका कायम प्रमुख नाम है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह भाकपा माओवादी की जोनल कमेटी से जुड़ा बताया गया है।   अन्य आत्मसमर्पण करने वालों में कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ति और अनिता तामसोय शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज थे।   सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट में खत्म हुआ माओवादी प्रभाव     पश्चिमी सिंहभूम लंबे समय से झारखंड में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। विशेष रूप से सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के घने जंगल सुरक्षा बलों के लिए चुनौती रहे हैं।   पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए गए अभियान, मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के कारण इन इलाकों में माओवादी संगठन का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है। इसी आधार पर इन तीनों वन प्रभागों को पूर्णतः नक्सलमुक्त घोषित किया गया है।   ऑपरेशन नवजीवन से मिली बड़ी कामयाबी     नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन नवजीवन’ चलाया। इसके अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में माओवादियों ने हथियार छोड़े हैं।   पुलिस के अनुसार, पिछले एक साल में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा अभियान के दौरान हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं।   गृह मंत्रालय की सूची से भी चाईबासा बाहर     इस घटनाक्रम के साथ एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव भी सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताजा सूची में पश्चिमी सिंहभूम यानी चाईबासा को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, इसे पूरी तरह सुरक्षा चुनौती खत्म होने के समान नहीं माना जा रहा है।   रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के चाईबासा, बोकारो, चतरा और लातेहार को ‘Legacy and Thrust’ श्रेणी में रखा गया है, जिसके तहत नक्सलवाद का प्रभाव खत्म होने के बावजूद सुरक्षा निगरानी और केंद्रीय सहायता जारी रह सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
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JPSC JSSC Protest
अस्पताल में भर्ती JLKM नेता देवेंद्र महतो ने सिविल सर्जन को लिखा पत्र, धरना स्थल लौटने की मांगी अनुमति

रांची। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से धरना स्थल लौटने की अनुमति मांगी है। उन्होंने रांची के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित सत्याग्रह स्थल पर वापस जाने की अनुमति देने का आग्रह किया है।   11 दिनों से जारी है भूख हड़ताल   देवेंद्र नाथ महतो पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद महतो को रांची के सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।   बोले- शरीर अस्पताल में, आत्मा धरना स्थल पर   सिविल सर्जन को लिखे पत्र में महतो ने कहा कि वह अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, लेकिन उनका मन और संकल्प आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों के साथ है। उन्होंने प्रशासन से उन्हें सत्याग्रह स्थल पर वापस जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।   छात्रों की मांगों पर जारी है आंदोलन   JPSC-JSSC सुधार मंच से जुड़े छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कई परीक्षाओं को रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आंदोलन 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

anjali kumari अगस्त 13, 2026 0
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