महाराष्ट्र राजनीति

Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde welcomes six Shiv Sena UBT MPs joining his faction in Mumbai.
Maharashtra Politics: 'ऑपरेशन टाइगर' सफल! शिवसेना (UBT) के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल, NDA और हुआ मजबूत

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Yogi Adityanath Lucknow Coaching Fire
लखनऊ अग्निकांड की जांच तेज, एसआईटी और फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा

लखनऊ, एजेंसियां। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया। हादसे में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन हर पहलू की गहन जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में एसी के कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।   सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अलग से पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है।   चार अधिकारी निलंबित, चार आरोपी गिरफ्तार   प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इमारत मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।   वेयरहाउस से शुरू हुई थी आग सोमवार दोपहर अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत के प्रथम तल पर बने वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित थे, जहां कई छात्र फंस गए।   15 छात्रों की मौत, कई घायल दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने घंटों तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तब तक 15 छात्रों की जान जा चुकी थी। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए इमारत से कूदने वाले नौ छात्रों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

abhishek singh जून 23, 2026 0
Uddhav Thackeray addresses party leaders as reports emerge of six Shiv Sena UBT MPs likely joining Eknath Shinde’s faction.
Maharashtra Politics: शिंदे की ताकत बढ़ी, उद्धव गुट के 6 सांसद आज बदल सकते हैं पाला, शिवसेना (UBT) में मची हलचल

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने की संभावना है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी लोकसभा सांसद सोमवार (22 जून) को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों का औपचारिक विलय सोमवार दोपहर 3 बजे हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो लोकसभा में शिंदे गुट को दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा और पार्टी की राजनीतिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो जाएगी। उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक बढ़ती बगावत की आशंकाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक दोपहर 2:30 बजे मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में होगी। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन बुलाई गई इस बैठक को पार्टी में संभावित टूट-फूट रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे इस दौरान विधायकों और नेताओं को संबोधित कर पार्टी की एकजुटता बनाए रखने की अपील करेंगे। दो सांसदों ने सार्वजनिक रूप से की पुष्टि राजनीतिक घटनाक्रम उस समय तेज हो गया जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने रविवार (21 जून) को सार्वजनिक रूप से एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के अपने फैसले की पुष्टि कर दी। इन दोनों नेताओं के बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) में और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। ये छह सांसद बदल सकते हैं पाला 17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। इनमें शामिल हैं: संजय दीना पाटिल संजय देशमुख संजय जाधव भाऊसाहेब वाकचौरे नागेश पाटिल-अष्टीकर ओमप्रकाश राजे निम्बालकर इन सांसदों की गैरमौजूदगी के बाद से ही पार्टी में बड़े विभाजन की चर्चा शुरू हो गई थी। दल-बदल कानून का गणित वर्तमान में लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत किसी दल में विभाजन या विलय को वैध ठहराने के लिए कम-से-कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। नौ सांसदों की स्थिति में यह संख्या छह बनती है। यदि सभी छह बागी सांसद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो उन्हें अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा और यह विलय कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगा। महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ सकती है उथल-पुथल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह सांसदों का विलय हो जाता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका साबित होगा और महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन एक बार फिर एकनाथ शिंदे के पक्ष में झुक सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर सोमवार को होने वाली दोनों बैठकों और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Uddhav Thackeray addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event and offers to step down amid rebellion by party MPs.
उद्धव ठाकरे बोले- अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार, कांग्रेस में विलय की अटकलों पर दिया बड़ा बयान

  शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संगठन में जारी बगावत के बीच बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को उन पर भरोसा नहीं है, तो वे पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। किसी और को शिवसेना का अध्यक्ष बना दीजिए।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे संकट के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने संबोधन में ठाकरे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां “एक पार्टी व्यवस्था और बिना चुनाव” जैसी स्थिति बन सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। बागी सांसदों को लेकर जताई चिंता, मांगी माफी कार्यक्रम में ठाकरे ने उन मतदाताओं से माफी भी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के सांसदों को वोट दिया था, लेकिन अब उनके बगावत करने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में अभी भी उत्साह बना हुआ है और शिवसेना की विचारधारा मजबूत है। कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना का किसी पार्टी में विलय का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक गठबंधन किया, लेकिन कभी भी विलय नहीं किया। छह सांसदों के बगावत से संकट गहराया शिवसेना (UBT) इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच संगठन में हलचल तेज हो गई है। ये सांसद हाल ही में पार्टी की संसदीय बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। भाजपा पर लगाए आरोप पार्टी नेता अंबादास दानवे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की भूमिका का आरोप लगाया है। वहीं संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को मंत्री पद और आर्थिक प्रलोभन दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event amid growing speculation of a major split in the UBT faction.
शिवसेना में सियासी संकट गहराया, शिंदे का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला; 6 सांसदों की बगावत से बढ़ा तनाव

  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच तीखी बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। शिंदे का उद्धव ठाकरे पर तीखा तंज शिवसेना स्थापना दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर अप्रत्यक्ष हमला किया। उन्होंने कहा— “भेड़िया, बाघ की खाल ओढ़ ले, तो भी बाघ नहीं बन सकता।” शिंदे ने आगे कहा कि यह राजनीतिक घटनाक्रम केवल “ट्रेलर” है, जबकि “पूरी फिल्म अभी बाकी है।” उनके इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यूबीटी गुट में बढ़ा संकट, 6 सांसदों के टूटने की चर्चा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इन सांसदों में शामिल हैं: संजय दीना पाटिल संजय देशमुख संजय जाधव भाऊसाहेब वाकचौरे नागेश पाटिल-आष्टीकर ओमप्रकाश राजे निंबालकर सूत्रों के अनुसार, ये सभी सांसद 18 जून को हुई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी में टूट की स्थिति और स्पष्ट हो गई है। महायुति को मजबूत दावा शिंदे ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि आगामी विधान परिषद चुनाव में महायुति सभी 17 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि जनता का रुझान उनके गठबंधन के पक्ष में है। भावुक हुए उद्धव ठाकरे, नेतृत्व छोड़ने के संकेत बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि लगातार राजनीतिक चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका आत्मबल कमजोर नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पार्टी के लोग उन पर भरोसा नहीं करते हैं तो वे पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वे पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और अब निर्णय शिवसैनिकों को करना है कि वे उन्हें नेतृत्व में देखना चाहते हैं या नहीं। शिवसेना में दूसरी बड़ी टूट की आशंका पिछले चार वर्षों में यह दूसरी बड़ी राजनीतिक टूट मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर 6 सांसदों के पाला बदलने की खबरें सही साबित होती हैं तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका होगा और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। निष्कर्ष शिवसेना में जारी यह राजनीतिक संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शिंदे और ठाकरे गुट के बीच बढ़ती खाई न सिर्फ पार्टी के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकती है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Shiv Sena UBT MPs meeting in Maharashtra amid speculation of six MPs joining Eknath Shinde faction.
शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत बोले- ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी’

  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसदों के शामिल नहीं होने से पार्टी में नई टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। बैठक से गायब रहे 6 सांसद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद अनुपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है और बागी सांसद अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अनुपस्थित सांसदों के नाम: Sanjay Jadhav (परभणी) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omraje Nimbalkar (धाराशिव) Sanjay Patil (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त करेंगे’ : संजय राउत बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने कहा कि पार्टी का व्हिप जारी होने के बावजूद छह सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "जो सांसद पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें हम गद्दार मानते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।" बागी सांसदों को भेजा जाएगा नोटिस पार्टी सांसद Arvind Sawant ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों को आज ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी बैठक में क्यों नहीं आए। ‘बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं’ संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के व्हिप का उल्लंघन अनुशासनहीनता है। ये लोग बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं।" बीजेपी और शिंदे पर लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप संजय राउत ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party और एकनाथ शिंदे गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा, "जो जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर जाएं। वे शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ धोखेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।" एक और टूट की ओर बढ़ रही शिवसेना (यूबीटी) छह सांसदों की गैरमौजूदगी और पार्टी नेतृत्व के तीखे बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की संभावना बढ़ गई है। यदि ये सांसद अलग समूह बनाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Shiv Sena UBT leaders Uddhav Thackeray and Sanjay Raut amid fresh political speculation over possible defections in Maharashtra.
'2029 तक खत्म हो जाएगी UBT', संजय निरुपम का बड़ा दावा; संजय राउत ने कहा- यह सिर्फ अफवाह

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) धीरे-धीरे खत्म हो रही है और वर्ष 2029 तक पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हालांकि, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज अफवाह करार दिया है। 'UBT नेतृत्व पर नहीं रहा नेताओं का भरोसा': संजय निरुपम शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर कहा कि शिवसेना (UBT) के विधायक और सांसद अब पार्टी नेतृत्व पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी से लगातार लोग अलग हो रहे हैं और आने वाले समय में यह राजनीतिक दल पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। निरुपम ने कहा, "UBT पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उसके नेता और जनप्रतिनिधि नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। 2029 तक यह पार्टी समाप्त हो जाएगी।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना (UBT) के सांसदों के संभावित पाला बदलने का मामला उनकी पार्टी का आंतरिक विषय है और शिंदे गुट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। संजय राउत ने किया पलटवार, बोले- सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने पार्टी में टूट की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं। राउत ने कहा, "यह पूरी तरह झूठी और निराधार खबर है। चार दिन पहले सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे की बैठक में हिस्सा लिया और उनके नेतृत्व में विश्वास जताया। कुछ नेताओं ने तो व्यक्तिगत रूप से समर्थन का भरोसा भी दिया है।" 'जागते बाघ को कोई नहीं छू सकता' 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना (UBT) को तोड़ना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, "बाघ को पकड़ने के लिए पहले उसे बेहोश करना पड़ता है, फिर उसके पैर बांधने पड़ते हैं। हमारे मामले में ऐसा संभव नहीं है। हमारे बाघ खुलेआम घूम रहे हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं।" शिंदे गुट के दावे से बढ़ी अटकलें शिवसेना एमएलसी Kripal Tumane ने दावा किया है कि शिवसेना (UBT) के सात सांसद उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। हालांकि, संजय राउत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे दावे करने वाले कई लोग हैं, जिनकी बातों का कोई आधार नहीं है। राउत ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से राजनीतिक दलों को तोड़ना भारतीय जनता पार्टी की रणनीति रही है। उद्धव ठाकरे की बैठक से पांच सांसद रहे थे अनुपस्थित सियासी अटकलों को उस समय और बल मिला, जब रविवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई पार्टी सांसदों की बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। बैठक में Arvind Sawant, Anil Desai, Rajabhau Waje और Sanjay Patil शामिल हुए, जबकि अन्य सांसदों ने ऑनलाइन या फोन के माध्यम से बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित राजनीतिक फेरबदल की अटकलों को जरूर हवा दे दी है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Maharashtra CM Eknath Shinde and Uddhav Thackeray amid speculation of Shiv Sena (UBT) MPs switching sides.
उद्धव ठाकरे को लग सकता है बड़ा झटका! 9 में से 6 सांसद बदल सकते हैं पाला, शिंदे गुट ने दिया खुला ऑफर

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। अटकलें हैं कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नौ में से छह सांसद पाला बदल सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है और राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी के दरवाजे उन नेताओं के लिए खुले हैं, जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के विचारों में विश्वास रखते हैं। शिंदे गुट ने दिया खुला संदेश प्रताप सरनाईक ने कहा कि यदि कोई सांसद या विधायक अपने वर्तमान नेतृत्व से संतुष्ट नहीं है और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहता है, तो पार्टी उसका स्वागत करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता भी दी जाएगी। उद्धव की बैठक में नहीं पहुंचे सभी सांसद राजनीतिक अटकलों को उस समय और बल मिला, जब रविवार (14 जून) को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई लोकसभा सांसदों की बैठक में पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार सांसद ही शामिल हुए। बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल मौजूद रहे। वहीं, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन जुड़े, जबकि सांसद संजय जाधव ने फोन पर उद्धव ठाकरे से बातचीत की। संजय देशमुख की मुलाकात से बढ़ीं अटकलें यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख ने बैठक में शामिल नहीं होने के पीछे पारिवारिक कारण बताए थे। अगले ही दिन उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की, जो एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना से जुड़े हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
BJP leaders celebrating unopposed victory in Maharashtra MLC elections with supporters and party flags
बंगाल-असम के बाद महाराष्ट्र में भी BJP का दबदबा, विधान परिषद चुनाव में 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

Maharashtra Vidhan Parishad Election: बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखा दी है। महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में पार्टी के 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीतकर सदन में पहुंचे हैं। सोमवार (4 मई) को हुए चुनाव में कुल 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो गई है। किन नेताओं को मिली जीत निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में उपसभापति नीलम गोरहे, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे और पूर्व मंत्री बी. काडू जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। भाजपा की ओर से सुनील विनायक कर्जतकर, माधवी नाइक, संजय नत्थूजी भेंडे, विवेक बिपिंदादा कोल्हे और प्रमोद शांताराम जठार जैसे उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं। कैसे हुआ निर्विरोध चुनाव इस चुनाव के लिए कुल 14 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें चार निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे। लेकिन आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण इन सभी निर्दलीयों के नामांकन रद्द कर दिए गए। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा, जिसके चलते सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। विपक्ष को सीमित सफलता जहां भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीतीं, वहीं शिवसेना (UBT) को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा। बाकी सीटें सहयोगी दलों और अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। राजनीतिक संकेत क्या हैं? महाराष्ट्र में यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि महायुति गठबंधन का दबदबा बरकरार है। बंगाल और असम के बाद महाराष्ट्र में भी भाजपा की मजबूती पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाती है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Helicopter carrying Maharashtra minister Chhagan Bhujbal lands in Pune parking area instead of designated helipad.
पुणे में बड़ी चूक: मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर हेलीपैड की बजाय कार पार्किंग में उतरा, CM ने दिए जांच के आदेश

महाराष्ट्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राज्य सरकार के मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर निर्धारित हेलीपैड की बजाय सीधे कार पार्किंग क्षेत्र में उतार दिया गया। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और पायलट की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना पुणे के खानवडी इलाके में उस समय हुई, जब भुजबल नासिक से एक जिला परिषद स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। निर्धारित हेलीपैड मौजूद होने के बावजूद पायलट ने हेलीकॉप्टर को पास की पार्किंग में लैंड करा दिया। मौके पर मचा हड़कंप अचानक हुई इस लैंडिंग से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पायलट की लापरवाही पर उठे सवाल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना पायलट की बड़ी चूक मानी जा रही है। एविएशन से जुड़े नियमों के तहत हेलीकॉप्टर को केवल अधिकृत हेलीपैड पर ही उतारने की अनुमति होती है, ऐसे में यह लैंडिंग सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मानी जा रही है। CM ने दिए जांच के आदेश मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा है कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल यह घटना न सिर्फ पायलट की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी चूक भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए जांच के निष्कर्ष बेहद अहम होंगे।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

Deepshikha जून 20, 2026 0