राजनीति

Uddhav Offers to Quit Amid Shiv Sena Crisis

उद्धव ठाकरे बोले- अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार, कांग्रेस में विलय की अटकलों पर दिया बड़ा बयान

Deepshikha जून 20, 2026 0
Uddhav Thackeray addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event and offers to step down amid rebellion by party MPs.
Uddhav Thackeray Offers to Quit Amid Shiv Sena UBT Crisis

 

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संगठन में जारी बगावत के बीच बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को उन पर भरोसा नहीं है, तो वे पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं।

उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। किसी और को शिवसेना का अध्यक्ष बना दीजिए।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे संकट के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अपने संबोधन में ठाकरे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां “एक पार्टी व्यवस्था और बिना चुनाव” जैसी स्थिति बन सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

बागी सांसदों को लेकर जताई चिंता, मांगी माफी

कार्यक्रम में ठाकरे ने उन मतदाताओं से माफी भी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के सांसदों को वोट दिया था, लेकिन अब उनके बगावत करने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में अभी भी उत्साह बना हुआ है और शिवसेना की विचारधारा मजबूत है।

कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम

पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना का किसी पार्टी में विलय का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक गठबंधन किया, लेकिन कभी भी विलय नहीं किया।

छह सांसदों के बगावत से संकट गहराया

शिवसेना (UBT) इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच संगठन में हलचल तेज हो गई है। ये सांसद हाल ही में पार्टी की संसदीय बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे।

भाजपा पर लगाए आरोप

पार्टी नेता अंबादास दानवे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की भूमिका का आरोप लगाया है। वहीं संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को मंत्री पद और आर्थिक प्रलोभन दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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4 साल में अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स पर TMC ने खर्च किए 141 करोड़ रुपये, कुणाल घोष भी नाराज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee की चार्टर्ड फ्लाइट यात्राओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने चार्टर्ड विमानों पर करीब 141 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब चुनावी हार के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चार वर्षों में कितना हुआ खर्च? तृणमूल कांग्रेस की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक चार्टर्ड विमानों पर खर्च का ब्योरा इस प्रकार है: वर्ष खर्च 2022 35 करोड़ रुपये 2023 13 करोड़ रुपये 2024 56 करोड़ रुपये 2025 37 करोड़ रुपये चार वर्षों में कुल खर्च 141 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसे किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल द्वारा हवाई यात्रा पर किया गया असाधारण खर्च माना जा रहा है। बिजनेस क्लास के बजाय प्राइवेट जेट का इस्तेमाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन मार्गों पर बिजनेस क्लास का टिकट 15 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहां भी चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कई यात्राओं में एक बार की उड़ान पर करीब 5 लाख रुपये तक खर्च किए गए। कुणाल घोष ने जताई नाराजगी टीएमसी के वरिष्ठ नेता Kunal Ghosh ने इस मुद्दे पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि चार्टर्ड विमानों पर खर्च किया गया पैसा पार्टी फंड से गया है, तो वह इसका समर्थन नहीं करते। कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के संसाधनों का उपयोग अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। बीजेपी ने साधा निशाना भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी परिवार पर हमला बोला है। भाजपा विधायक Sajal Ghosh ने तंज कसते हुए कहा कि जितनी राशि चार्टर्ड विमानों पर खर्च की गई, उतने पैसों में पार्टी अपना एक नया विमान खरीद सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम कार्यकर्ताओं के पैसे का दुरुपयोग किया गया है और पार्टी नेतृत्व को इसका जवाब देना चाहिए। चुनावी हार के बाद बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच चार्टर्ड फ्लाइट खर्च का यह विवाद अभिषेक बनर्जी के लिए नई चुनौती बन सकता है। पार्टी के भीतर उठते सवाल और विपक्ष के हमलों ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीति का बड़ा विषय बना दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तृणमूल कांग्रेस इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का कारण बनता है।  

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थलापति विजय के 52वें जन्मदिन पर राहुल गांधी का खास संदेश, बोले- तमिल लोगों के अधिकारों की रक्षा में आपके साथ

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने रविवार को अपना 52वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संदेश की रही। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर विजय को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और सफल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कहा कि वह तमिल लोगों के अधिकारों, सम्मान और आकांक्षाओं की रक्षा तथा राज्य की प्रगति के लिए विजय के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।   राहुल गांधी ने अपने संदेश में लिखा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु जोसेफ विजय को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि वह विजय के सभी प्रयासों की सफलता की कामना करते हैं और राज्य के विकास के लिए उनके साथ खड़े हैं।   राहुल गांधी और थलापति विजय राहुल गांधी और थलापति विजय के बीच राजनीतिक रिश्ते पिछले कुछ समय में काफी मजबूत हुए हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों के समर्थन का ऐलान कर राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी।   दोनों दलों की नजदीकियों का एक और उदाहरण  दोनों दलों की नजदीकियों का एक और उदाहरण हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला। टीवीके ने कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट दी, जिस पर कांग्रेस ने प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया और वे संसद के उच्च सदन पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भविष्य में दोनों दलों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का संकेत है।   राहुल गांधी के जन्मदिन संदेश को केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और टीवीके के मजबूत होते रिश्तों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में दोनों दलों की रणनीति और साझेदारी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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TMC, शिवसेना के बाद अब सपा में बड़ी टूट का दावा, ओपी राजभर बोले- कई सांसद BJP के संपर्क में

  उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि Samajwadi Party में जल्द बड़ी टूट हो सकती है और उसके कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा एनडीए के संपर्क में हैं। राजभर ने दावा किया कि हाल के दिनों में अन्य विपक्षी दलों में हुई टूट के बाद अब सपा के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर संसद के आगामी मानसून सत्र में दिखाई दे सकता है। 'कई सांसद भाजपा के संपर्क में' एएनआई से बातचीत में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूर्वांचल के पिछड़े और दलित समुदाय से आने वाले सपा के कई सांसद पार्टी की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नेता भाजपा और एनडीए के साथ आने के इच्छुक हैं। राजभर ने कहा, "टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बाद अब समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। कई सांसद हमारे मंत्रियों और भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं।" मानसून सत्र में दिख सकता है असर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ने दावा किया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान सपा में बिखराव सामने आ सकता है। उनके अनुसार, कई सांसद विपक्ष का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि सपा प्रमुख Akhilesh Yadav की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, जिसके कारण कई नेता वैकल्पिक राजनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। अखिलेश यादव का पलटवार ओम प्रकाश राजभर के दावे पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए राजभर पर पलटवार किया। अखिलेश यादव ने कहा, "भविष्यवाणी करने वाले पहले अपनी पार्टी की भविष्यवाणी करें। पता नहीं इस बार भाजपा उन्हें 75 सीटें दे रही है, 50 सीटें दे रही है या फिर केवल आश्वासन ही मिलेगा।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओम प्रकाश राजभर ने पहले भी भाजपा गठबंधन में ज्यादा सीटें मिलने की अफवाह फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की थी। यूपी की राजनीति में बढ़ी अटकलें ओम प्रकाश राजभर के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही समाजवादी पार्टी के किसी सांसद ने पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में संभावित पुनर्संरेखण और दल-बदल की चर्चाओं के बीच राजभर का यह बयान आने वाले महीनों में प्रदेश की सियासत को और गर्मा सकता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
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