नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय स्मार्टफोन कंपनी Lava ने बजट सेगमेंट में अपना नया 5G स्मार्टफोन Lava Virat V1 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को खासतौर पर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश किया है, जो कम कीमत में बड़ी बैटरी, 5G कनेक्टिविटी और साफ-सुथरा Android अनुभव चाहते हैं। फोन की शुरुआती कीमत करीब ₹12,999 रखी गई है।
Lava Virat V1 5G में 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल का दावा करती है। फोन में 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। कंपनी ने इसे युवाओं और ज्यादा समय तक फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।
परफॉर्मेंस के लिए Lava Virat V1 5G में Unisoc T8200 चिपसेट दिया गया है। फोन में 4GB RAM और 64GB स्टोरेज का विकल्प मिलता है, जिसे मेमोरी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है। यह स्मार्टफोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ आता है।
फोटोग्राफी के लिए फोन में 13MP का रियर कैमरा और सेल्फी के लिए 5MP फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसके अलावा डिवाइस को धूल और पानी से बचाव के लिए IP64 रेटिंग भी मिली है। कंपनी ने इसमें क्लीन सॉफ्टवेयर अनुभव और बेहतर उपयोग के लिए कई सुविधाएं शामिल की हैं।
Lava Virat V1 5G की बिक्री भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शुरू की गई है। बड़ी बैटरी, 5G सपोर्ट और किफायती कीमत के कारण यह फोन Redmi, Realme और अन्य बजट स्मार्टफोन कंपनियों को टक्कर देने की कोशिश करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी और सौर-पवन ऊर्जा जैसी क्लीन एनर्जी तकनीकों का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही लिथियम, कॉपर, निकल और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2040 तक इन खनिजों की मांग में भारी वृद्धि होगी, लेकिन आपूर्ति इसकी तुलना में पीछे रह सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर संकट गहराने की आशंका है। 2040 तक भारी निवेश की जरूरत IEA के मुताबिक, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2040 तक खनन और रिफाइनिंग क्षेत्र में 750 अरब डॉलर से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कॉपर (310 अरब डॉलर) और निकल (280 अरब डॉलर) के उत्पादन और प्रसंस्करण पर खर्च होने का अनुमान है। किन खनिजों की कितनी बढ़ेगी मांग? लिथियम की मांग 2040 तक तीन गुना से अधिक हो सकती है। ग्रेफाइट की जरूरत लगभग दोगुनी होने का अनुमान है। निकल की मांग करीब 65 प्रतिशत और रेयर अर्थ मिनरल्स की मांग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। कॉपर की मांग 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ेगी, जिसके लिए दुनिया को अतिरिक्त 70 लाख टन तांबे की आवश्यकता होगी। चीन की सप्लाई चेन पर निर्भरता चिंता का विषय रिपोर्ट में कहा गया है कि खनिजों के रिफाइनिंग सेक्टर में चीन का दबदबा वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा जोखिम है। वर्तमान में दुनिया का लगभग 90 प्रतिशत ग्रेफाइट, 75 प्रतिशत कोबाल्ट, 70 प्रतिशत लिथियम और 50 प्रतिशत कॉपर चीन में रिफाइन किया जाता है। ऐसे में यदि किसी कारण से चीन की सप्लाई प्रभावित होती है, तो वैश्विक क्लीन एनर्जी परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। रिसाइक्लिंग से कम हो सकता है संकट IEA का मानना है कि भविष्य में खनिजों की कमी से निपटने के लिए बैटरियों और अन्य उपकरणों की रिसाइक्लिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल दुनिया में केवल करीब 10 प्रतिशत महत्वपूर्ण खनिजों की रिसाइक्लिंग होती है। रिपोर्ट का लक्ष्य 2040 तक इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का है, जिससे नए खनन पर निर्भरता कम हो सकेगी और सप्लाई संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने अपने बड़े शॉपिंग इवेंट ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 की घोषणा कर दी है। यह सेल 7 अगस्त 2026 से Amazon.in पर शुरू होगी। इस बार कंपनी ने ग्राहकों के खरीदारी अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए AI आधारित शॉपिंग टूल्स भी शामिल किए हैं, जो ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट खोजने और सही डील चुनने में मदद करेंगे। AI फीचर्स से मिलेगी स्मार्ट शॉपिंग की सुविधा अमेज़न इस सेल में अपने AI शॉपिंग असिस्टेंट Rufus को और बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है। यह AI टूल ग्राहकों को प्रोडक्ट की जानकारी, तुलना, कीमतों का विश्लेषण और खरीदारी से जुड़े सुझाव देने में मदद करेगा। कंपनी का उद्देश्य है कि ग्राहक हजारों विकल्पों में से अपनी जरूरत के अनुसार सही प्रोडक्ट आसानी से चुन सकें। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स पर मिलेंगे बड़े ऑफर ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 में स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण और अन्य कैटेगरी में भारी छूट मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा ग्राहकों को बैंक ऑफर, नो-कॉस्ट EMI, एक्सचेंज ऑफर और Amazon Pay से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे। Prime मेंबर्स को मिल सकता है शुरुआती एक्सेस रिपोर्ट्स के अनुसार, Amazon Prime ग्राहकों को सेल में आम यूजर्स से पहले खरीदारी का मौका मिल सकता है। कंपनी बड़ी संख्या में प्रोडक्ट्स पर विशेष डील और शुरुआती एक्सेस की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। AI और ई-कॉमर्स के नए दौर की शुरुआत टेक विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शॉपिंग फीचर्स आने वाले समय में ऑनलाइन खरीदारी के तरीके को बदल सकते हैं। अमेज़न का लक्ष्य सिर्फ डिस्काउंट देना नहीं, बल्कि AI की मदद से ग्राहकों को तेज, आसान और व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव देना है। ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 में कंपनी इसी दिशा में नए प्रयोग कर रही है।
कैलिफोर्निया, एजेंसियां। WhatsApp अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा फीचर लाने की तैयारी में है। अब यूजर्स बिना किसी अलग ऐप को डाउनलोड किए सीधे वेब ब्राउज़र के जरिए भी वॉयस और वीडियो कॉल कर सकेंगे। ब्राउज़र से ही होगी कॉलिंग नई सुविधा आने के बाद यूजर्स Chrome, Edge, Safari और अन्य समर्थित वेब ब्राउज़र के जरिए WhatsApp Web पर लॉग इन करके सीधे ऑडियो और वीडियो कॉल कर सकेंगे। इसके लिए अलग से डेस्कटॉप एप्लिकेशन इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। यह फीचर खासतौर पर ऑफिस और लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है। बीटा टेस्टिंग में दिखा नया फीचर WhatsApp के नए फीचर्स पर नजर रखने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फीचर की टेस्टिंग वेब संस्करण पर शुरू हो चुकी है। कुछ बीटा यूजर्स को चैट विंडो में वॉयस और वीडियो कॉल के नए बटन दिखाई दिए हैं। सफल परीक्षण के बाद इसे सभी यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन रहेगा बरकरार कंपनी के अनुसार, वेब ब्राउज़र के जरिए होने वाली वॉयस और वीडियो कॉल में भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुरक्षा मिलेगी। यानी कॉल के दौरान होने वाली बातचीत पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और उसे कोई तीसरा पक्ष नहीं देख या सुन सकेगा। Zoom और Google Meet को मिलेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि WhatsApp Web पर वॉयस और वीडियो कॉलिंग फीचर आने के बाद Zoom, Google Meet और Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है। करोड़ों सक्रिय यूजर्स वाला WhatsApp इस नए फीचर के जरिए वेब-आधारित संचार सेवाओं में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की तैयारी में है।