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सफलता मिलने के बाद भी खुद को उसका हकदार न मानना इम्पोस्टर सिंड्रोम का संकेत हो सकता है।

Imposter Syndrome: सफलता के बाद भी खुद को अयोग्य समझते हैं? जानिए क्या है इम्पोस्टर सिंड्रोम

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
इम्पोस्टर सिंड्रोम
Imposter Syndrome

नई दिल्ली, एजेंसियां। कई लोग जीवन में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी खुद को उसका हकदार नहीं मानते। उन्हें लगता है कि उनकी उपलब्धियां मेहनत या प्रतिभा की वजह से नहीं, बल्कि किस्मत या दूसरों की मदद से मिली हैं। अगर आपके मन में भी बार-बार ऐसे विचार आते हैं, तो यह इम्पोस्टर सिंड्रोम (Imposter Syndrome) का संकेत हो सकता है। यह कोई मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जो आत्मविश्वास, करियर, पढ़ाई और रिश्तों पर गहरा असर डाल सकती है।

 

क्या है इम्पोस्टर सिंड्रोम?

 

इम्पोस्टर सिंड्रोम ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी उपलब्धियों के बावजूद खुद को योग्य नहीं मानता। उसे हमेशा यह डर बना रहता है कि एक दिन लोग उसकी 'असलियत' जान जाएंगे और उसे अयोग्य समझेंगे। यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों में हो सकती है, चाहे वे छात्र हों, नौकरीपेशा, डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, उद्यमी या किसी भी क्षेत्र के सफल व्यक्ति।

 

इन संकेतों से करें पहचान

 

इस स्थिति से जूझ रहे लोग अक्सर अपनी सफलता का श्रेय खुद को नहीं देते, लगातार दूसरों से तुलना करते हैं और हर काम में पूर्णता (परफेक्शन) की उम्मीद रखते हैं। तारीफ मिलने पर असहज महसूस करना, छोटी-सी गलती पर खुद को असफल मान लेना, नई जिम्मेदारियों से डरना और हर समय अपनी कमियां उजागर होने का डर भी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

 

किन कारणों से बढ़ती है यह समस्या?

 

विशेषज्ञों के अनुसार, इम्पोस्टर सिंड्रोम के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं। बचपन में लगातार तुलना होना, केवल बेहतरीन प्रदर्शन पर ही सराहना मिलना, परफेक्शन की आदत, नई नौकरी या प्रमोशन जैसी परिस्थितियां और सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता से खुद की तुलना करना इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।

 

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

 

अगर यह भावना लंबे समय तक बनी रहे, तो व्यक्ति तनाव, चिंता, आत्मविश्वास में कमी और बर्नआउट जैसी समस्याओं का शिकार हो सकता है। कुछ लोग खुद को साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा काम करने लगते हैं, जबकि कई लोग असफलता के डर से नए अवसरों से दूर रहने लगते हैं।

 

कैसे पाएं इम्पोस्टर सिंड्रोम से राहत?

 

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी छोटी-बड़ी उपलब्धियों को स्वीकार करें और उन्हें लिखकर रखें। नकारात्मक विचार आने पर खुद से पूछें कि क्या उसके पीछे कोई ठोस प्रमाण है। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी प्रगति पर ध्यान दें और गलतियों को सीखने का अवसर मानें। अपनी भावनाएं किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य, मेंटर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से साझा करने से भी मदद मिल सकती है।

 

कब लें विशेषज्ञ की सलाह?

 

यदि खुद को अयोग्य समझने की भावना लंबे समय तक बनी रहे और इसका असर आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार तनाव, चिंता, उदासी या आत्मविश्वास में गंभीर कमी महसूस होने पर मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। समय पर सही सहायता मिलने से इस स्थिति से बाहर निकलना आसान हो सकता है।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Person experiencing heartburn and acid reflux with dietary and lifestyle tips for better digestive health
बार-बार सीने में जलन और एसिडिटी को न करें नजरअंदाज, पित्त असंतुलन से जोड़ता है आयुर्वेद; जानिए खानपान और दिनचर्या में क्या करें बदलाव

बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, मुंह में कड़वाहट या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होना आम समस्या लग सकती है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में ऐसी कई परेशानियों को पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है। वहीं आधुनिक चिकित्सा में सीने की जलन और खट्टी डकार जैसे लक्षण एसिड रिफ्लक्स या गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD से जुड़े हो सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ तीन दोषों का संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है। पित्त को पाचन और शरीर की गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में बहुत ज्यादा मसालेदार, खट्टा और गर्म प्रकृति वाला भोजन, अनियमित दिनचर्या, तनाव और पर्याप्त आराम न मिलने को पित्त बढ़ाने वाले कारकों में गिना जाता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर बार होने वाली एसिडिटी को केवल 'पित्त बढ़ना' मान लेना सही नहीं है। GERD में समस्या सिर्फ पेट में ज्यादा एसिड बनने की वजह से नहीं होती, बल्कि पेट की सामग्री का बार-बार भोजन नली में ऊपर आना भी इसका कारण हो सकता है। पित्त बढ़ने पर कौन से लक्षण दिख सकते हैं? आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार पित्त असंतुलन के दौरान कुछ लोगों में शरीर में गर्मी, जलन और पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इनमें शामिल हैं: सीने या पेट में जलन खट्टी डकार या मुंह में कड़वा स्वाद शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होना अत्यधिक पसीना मुंह में छाले त्वचा पर लालिमा या जलन चिड़चिड़ापन और बेचैनी सिरदर्द या आंखों में जलन दूसरी ओर, सीने में जलन और मुंह में पेट की सामग्री या एसिड आने जैसा महसूस होना GERD के आम लक्षण हैं। लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों की सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। खानपान में इन बदलावों से मिल सकती है मदद एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या में हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। आम तौर पर बहुत मसालेदार, अम्लीय, अधिक वसा वाले भोजन, कॉफी, चॉकलेट और शराब कुछ लोगों में लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपने उन खाद्य पदार्थों की पहचान करना जरूरी है जिनके बाद जलन बढ़ती है। गाय का घी: आयुर्वेद में क्यों माना जाता है उपयोगी? दिए गए आयुर्वेदिक सुझाव में सुबह गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच गाय का घी लेने की सलाह दी गई है और इसे पित्त शांत करने वाला उपाय बताया गया है। हालांकि, इसे एसिडिटी या GERD का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। खासकर यह दावा कि घी लेने से जलन तुरंत ठीक हो जाएगी, सभी लोगों पर लागू नहीं होता। उल्टा, अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को घी लेने के बाद जलन या खट्टी डकार बढ़ती है, तो इसका सेवन जारी रखने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खीरा, लौकी और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ आयुर्वेदिक आहार पद्धति में खीरा, लौकी, तरबूज, खरबूजा और अनार जैसे खाद्य पदार्थों को पित्त संतुलित करने वाले आहार में शामिल किया जाता है। व्यावहारिक तौर पर भी पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को एसिडिटी का इलाज मानने के बजाय अपनी समस्या के ट्रिगर को पहचानना ज्यादा जरूरी है। जीरा, धनिया और सौंफ का इस्तेमाल आयुर्वेद में जीरा, धनिया और सौंफ का इस्तेमाल पाचन से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। भोजन के बाद सौंफ लेना या जीरा-धनिया पानी जैसे पारंपरिक उपाय कुछ लोगों को आरामदायक लग सकते हैं। लेकिन इन उपायों को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर जलन बार-बार हो रही है तो इसकी मूल वजह की जांच जरूरी है। नारियल पानी कितना फायदेमंद? नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है और इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं। गर्मी के मौसम में यह एक उपयोगी पेय हो सकता है। हालांकि, इसे एसिडिटी या पित्त दोष का निश्चित इलाज बताने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं हैं। किसी भी खाद्य या पेय का असर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। एसिडिटी से बचने के लिए दिनचर्या में क्या बदलें? बार-बार होने वाले एसिड रिफ्लक्स में जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं। डॉक्टर भोजन और सोने के बीच कम से कम 3 घंटे का अंतर रखने की सलाह दे सकते हैं, खासकर रात में लक्षण होने पर। इसके अलावा: बहुत ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन सीमित करें। अपने व्यक्तिगत फूड ट्रिगर्स पहचानें। रात में खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें। अगर वजन अधिक है तो डॉक्टर की सलाह से वजन नियंत्रित करें। धूम्रपान से बचें। बार-बार होने वाली जलन के लिए खुद से लंबे समय तक दवाएं न लेते रहें। कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है? अगर सीने में जलन सप्ताह में दो या उससे अधिक बार होती है, या बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एसिडिटी की दवा लेनी पड़ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। लगातार GERD का उपचार न होने पर भोजन नली में सूजन और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। अगर सीने में तेज दर्द, निगलने में परेशानी, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काले रंग का मल या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
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Gavi को 600 मिलियन डॉलर की फंडिंग बहाल करेगा अमेरिका, WHO के लिए वित्तीय रोक रहेगी जारी

वैक्सीन कार्यक्रम को मिली राहत, WHO पर अमेरिकी रुख नहीं बदला   वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका ने वैश्विक वैक्सीन गठबंधन Gavi के लिए 600 मिलियन डॉलर की फंडिंग बहाल करने का फैसला किया है। यह राशि पहले रोक दी गई थी, लेकिन अब इसे फिर से जारी किया जाएगा ताकि दुनिया के गरीब और विकासशील देशों में टीकाकरण कार्यक्रमों को समर्थन मिल सके। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को Gavi के माध्यम से कोई अमेरिकी फंड नहीं दिया जाएगा।   गरीब देशों के टीकाकरण अभियान को मिलेगा समर्थन   Gavi दुनिया के कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में बच्चों और कमजोर आबादी के लिए टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करता है। अमेरिका की ओर से फंडिंग बहाल होने से खसरा, डिप्थीरिया, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण अभियानों को गति मिलने की उम्मीद है।   WHO पर वित्तीय रोक बरकरार   अमेरिकी विदेश विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त बयान में कहा कि Gavi को सहायता बहाल की जा रही है, लेकिन WHO के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता पर लगी रोक जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला उसकी मौजूदा वैश्विक स्वास्थ्य नीति के अनुरूप है।   Gavi के साथ फिर बढ़ेगा सहयोग   अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि वह Gavi के साथ दोबारा सक्रिय सहयोग करेगा और उसके बोर्ड में अपनी भागीदारी जारी रखेगा। साथ ही, भविष्य में संगठन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली की समीक्षा के आधार पर आगे की सहायता पर निर्णय लिया जाएगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
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