आम आदमी पार्टी में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व को लेकर तीखा संदेश दिया है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी खामोशी को कमजोरी या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Aam Aadmi Party के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें जानबूझकर खामोश करने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर उठाए गए मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों के कारण उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। “जनता की आवाज उठाना क्या अपराध है?” अपने बयान में चड्ढा ने सीधे सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दों को उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि वह लगातार आम लोगों से जुड़े विषयों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे हैं, लेकिन इसके चलते उन्हें राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और भविष्य में भी जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे। राजनीतिक संकेत और संभावित असर राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करता है। उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि AAP के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर असर डाल सकता है। आगे क्या? हालांकि, पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन चड्ढा का यह खुला संदेश सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है और इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। मालदा जिले के वैष्णव नगर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे केंद्र की सत्ता से भी भाजपा को हटाने का संकल्प ले चुकी हैं। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि वह पहले पश्चिम बंगाल से भाजपा को बाहर करेंगी और इसके बाद दिल्ली की सत्ता से भी उसे उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने इसे जनता के सामने किया गया वादा बताते हुए कहा कि देश की मौजूदा नीतियां जनता को नुकसान पहुंचा रही हैं और बदलाव की आवश्यकता है। निर्वाचन आयोग और केंद्र पर तीखा हमला सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव कर विकास कार्यों को बाधित किया है। उनके अनुसार, यह कदम निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मालदा घटना पर सख्त रुख हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राज्य की छवि के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। विपक्षी दलों पर मिलीभगत का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पार्टियां अंदरखाने एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं और राज्य के विकास में बाधा डाल रही हैं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे इन दलों को चुनाव में जवाब दें। चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी घमासान पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक कदम उठाने की तैयारी की है। इस सत्र में नारी वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने हैं। क्या है सरकार का प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण कानून में दो बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है: परिसीमन (Delimitation) के लिए नई जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाना लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में लगभग 50% तक बढ़ोतरी अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो: उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं बिहार में 40 से 60 तमिलनाडु में 39 से 58 इस तरह कुल लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर करीब 816 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का क्या कहना है? केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिला प्रतिनिधित्व को तेजी से लागू करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि 2029 तक इसे लागू किया जा सके। विपक्ष क्यों कर रहा विरोध? विपक्ष इस कदम को चुनावी रणनीति बता रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है राजीव शुक्ला ने इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया कांग्रेस का दावा है कि महिला आरक्षण की पहल पहले उसी ने की थी OBC महिलाओं के आरक्षण की मांग समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि: केवल सामान्य महिला आरक्षण पर्याप्त नहीं है पिछड़ी जातियों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्या है असली सियासी गणित? विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन कई स्तरों पर असर डाल सकता है: महिला वोट बैंक को प्रभावित करेगा राज्यों में सीटों के पुनर्वितरण से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे 2029 चुनाव से पहले बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है पास होने में क्या है चुनौती? चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि कोई भी पार्टी खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रही, लेकिन: परिसीमन के आधार OBC आरक्षण समय और मंशा इन मुद्दों पर तीखी बहस तय मानी जा रही है। निष्कर्ष महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब पार्टी ने अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया है। राज्यसभा सचिवालय को दी सूचना AAP ने इस फैसले की जानकारी राज्यसभा सचिवालय को भी दे दी है। पार्टी ने साफ कहा है कि: राघव चड्ढा को अब पार्टी की ओर से बोलने का मौका न दिया जाए सदन में उनकी भूमिका और बोलने का समय सीमित किया जाए क्यों लिया गया यह फैसला? हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक: राघव चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर मुद्दे उठा रहे थे कई बार बिना पूर्व सूचना के सदन में बोलते थे पार्टी ने पहले उन्हें चेतावनी भी दी थी जनहित के मुद्दों पर रहे सक्रिय हाल के समय में राघव चड्ढा संसद में कई मुद्दे उठा रहे थे, जैसे: एयरपोर्ट पर महंगी चाय (₹10 मुद्दा) डिलीवरी बॉयज से जुड़े मुद्दे आम जनता से जुड़े अन्य सवाल अशोक मित्तल को मिली नई जिम्मेदारी अब राज्यसभा में AAP की ओर से: अशोक मित्तल उपनेता की भूमिका निभाएंगे सदन में पार्टी की रणनीति और लाइन को आगे बढ़ाएंगे
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। ममता को बताया “सुपर टाइगर” आईएएनएस से बातचीत में पप्पू यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा: “बंगाल की संस्कृति की रक्षा करने वाली, बांग्ला की आवाज-एक ही शेरनी है, ममता दीदी। पूरा बंगाल और बंगाली भावनाएं उनके साथ हैं।” BJP पर तीखा हमला पप्पू यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा: बीजेपी बंगाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा के खिलाफ रही है पार्टी बंगाल में कभी मजबूत स्थिति में नहीं रही “100 जन्म में भी बंगाल की जनता बीजेपी को स्वीकार नहीं करेगी” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की जीत रणनीति और साजिश पर आधारित होती है। चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं बीजेपी राज्य में सत्ता में आने का दावा कर रही है वहीं क्षेत्रीय और विपक्षी दल ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल बता रहे हैं BJP का पलटवार पप्पू यादव के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा: “सुपर टाइगर और शेरनी जैसे जुमलों से जनता प्रभावित नहीं होगी। जिनका खुद का जनाधार नहीं होता, वे दूसरों के सहारे राजनीति करते हैं।” उन्होंने पप्पू यादव के बयान को “हास्यास्पद” और सिर्फ सुर्खियों में रहने की कोशिश बताया।
कोलकाता/तिरुवनंतपुरम: विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल और केरल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो कर चुनावी माहौल गरमा दिया, वहीं केरल में UDF ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो जारी कर कई बड़े वादे किए हैं। भवानीपुर में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे, जो इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा: “इस बार बंगाल में बदलाव तय है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है, वोटरों को कोई गुंडा नहीं रोक सकता।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य सिर्फ जीत नहीं, बल्कि “ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हराना है।” भवानीपुर सीट पर सीधी टक्कर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी भी चुनाव मैदान में हैं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी ने यहां से उतारा है ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से भी उम्मीदवार हैं इस सीट को लेकर मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। चुनावी माहौल तेज दोनों राज्यों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है: बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच सीधी टक्कर केरल में LDF बनाम UDF मुकाबला नेताओं के रोड शो, रैलियां और वादों के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी रैलियों से लेकर दल-बदल तक, कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रियंका गांधी का हमला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम के शिवसागर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिका के गुलाम हैं… और असम के मुख्यमंत्री उनके गुलाम हैं।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डर और दबाव की राजनीति कर रही है और इससे देश को नुकसान हो रहा है। ओवैसी का मुर्शिदाबाद में बयान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि: अगर जनता का अपना नेता नहीं होगा, तो उनकी आवाज दबा दी जाएगी ममता बनर्जी और मोदी सरकार पर एक जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया उन्होंने लोगों से अपनी “स्वतंत्र लीडरशिप” चुनने की अपील की। बड़ा राजनीतिक बदलाव वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। फूलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं 2014 में AAP में शामिल हुए थे, 2019 में पार्टी छोड़ दी थी महाराष्ट्र उपचुनाव अपडेट भाजपा ने महाराष्ट्र के राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए अक्षय शिवाजीराव कर्डिले को उम्मीदवार घोषित किया है अहम तारीखें: नामांकन की अंतिम तारीख:6 अप्रैल जांच:7 अप्रैल नाम वापसी:9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल मतगणना: 4 मई यह सीट ग्रामीण और कृषि प्रधान है, जहां मराठा, ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। चुनावी माहौल गरम देश के पांच राज्यों में चुनाव के बीच: नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज दल-बदल की राजनीति जारी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर दिए अपने विवादित बयान को लेकर माफी मांग ली है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि उनके बयान से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे बिना शर्त क्षमा चाहते हैं। दुबे ने लिखा कि “बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा एक बड़े कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे”। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान उनकी निजी राय थी, जिसे गलत तरीके से समझा गया। क्या था विवाद? दरअसल, 27 मार्च को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि: 1962 के चीन युद्ध में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिका और CIA की मदद ली थी और बीजू पटनायक को अमेरिका, CIA और नेहरू के बीच कड़ी बताया था इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। अब क्या कहा दुबे ने? माफी मांगते हुए दुबे ने कहा: उनके बयान को गलत संदर्भ में जोड़ा गया नेहरू पर की गई टिप्पणी को बीजू पटनायक से जोड़ना सही नहीं है विपक्ष का कड़ा विरोध दुबे के बयान पर बीजू जनता दल (BJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी: राज्यसभा में BJD सांसदों ने विरोध करते हुए वॉकआउट किया सांसद सस्मित पात्रा ने इसे “पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत” बताया वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बयान की आलोचना करते हुए इसे आपत्तिजनक बताया। PM मोदी ने की बीजू पटनायक की सराहना विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्कल दिवस के मौके पर बीजू पटनायक को याद करते हुए उन्हें: देश निर्माण के लिए समर्पित नेता और साहस का प्रतीक बताया। कौन थे बीजू पटनायक? ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री (1961-63, 1990-95) स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट 1947 में इंडोनेशिया मिशन के लिए प्रसिद्ध द्वितीय विश्व युद्ध में भी अहम भूमिका
नई दिल्ली/कोलकाता,एजेंसियां। पांच राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में एक ओर भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने नदिया जिले के एक बीडीओ को निलंबित कर सख्त संदेश दिया है। चुनाव प्रशिक्षण के दौरान विवाद चुनाव आयोग ने नदिया जिले के हंसखली ब्लॉक में तैनात बीडीओ सायनतन भट्टाचार्य को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 27 मार्च को चुनाव अधिकारियों की ट्रेनिंग के दौरान हुई हिंसा के बाद की गई। आरोप है कि प्रशिक्षण शुरू होने से पहले प्रोजेक्टर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सरकारी विज्ञापन दिखाया गया, जिस पर शिक्षक सैकत चट्टोपाध्याय ने आपत्ति जताई। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट हुई और सिर में गंभीर चोट आई। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है। आयोग ने माना गंभीर लापरवाही चुनाव आयोग ने कहा कि बीडीओ ट्रेनिंग कार्यक्रम के प्रभारी थे, लेकिन वे प्रोटोकॉल और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का पालन कराने में विफल रहे। आयोग ने राज्य प्रशासन को आदेश दिया है कि निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू की जाए। भवानीपुर सीट पर सियासी घमासान पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी दो अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन भरेंगे। इसे भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आठ अप्रैल को कालीघाट से शक्ति जुलूस निकालकर नामांकन दाखिल करेंगी। अन्य चुनावी हलचल भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची भी जारी की है। वहीं, केरल चुनाव में कांग्रेस के समर्थन में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी एक और दो अप्रैल को प्रचार करेंगे।
गुवाहाटी/धेमाजी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्य में कई रैलियों को संबोधित करते हुए भरोसा जताया कि बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA एक बार फिर सरकार बनाएगा और हैट्रिक पूरी करेगा। पीएम मोदी का बड़ा बयान गोगामुख और धेमाजी में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असम ने पिछले 10 वर्षों में अभूतपूर्व विकास देखा है। उन्होंने कहा, “इस बार का चुनाव विकसित भारत (Viksit Bharat) बनाने का संकल्प है। जनता का उत्साह बता रहा है कि NDA फिर से सत्ता में आएगा।” कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस को एक और बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी “हार का शतक” लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम मोदी ने यह भी दावा किया कि असम में कांग्रेस की हार तय है। चुनावी रैलियां और कार्यक्रम पीएम मोदी ने आज धेमाजी और बिस्वनाथ जिलों में रैलियों को संबोधित किया सुबह 11 बजे गोगामुख में पहली रैली हुई इसके बाद बिस्वनाथ के बेहाली में दूसरी जनसभा आयोजित हुई वह 31 मार्च को ही डिब्रूगढ़ पहुंच चुके थे बीजेपी का ‘संकल्प पत्र’ (घोषणापत्र) बीजेपी ने असम चुनाव के लिए 31 वादों वाला ‘संकल्प पत्र’ जारी किया है, जिसमें विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया गया है। मुख्य वादे: असम को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए 18,000 करोड़ रुपये का ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर असम को ‘ईस्टर्न गेटवे’ बनाना युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर किसानों की आय सुरक्षा मजबूत करना मछुआरों को आर्थिक सहायता महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण हर जिले में यूनिवर्सिटी और शिक्षा ढांचे को मजबूत करना गरीब परिवारों को मुफ्त राशन और सस्ती दरों पर जरूरी खाद्य सामग्री जनजातीय और स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि और अधिकारों की सुरक्षा सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर फोकस 7 समुदायों को OBC सूची में शामिल कराने का प्रयास विभिन्न जनजातीय स्वायत्त परिषदों को संवैधानिक दर्जा देने की दिशा में काम चाय बागान और आदिवासी समुदायों के समग्र विकास का वादा चुनाव की तारीख असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने हैं, जिसे लेकर सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी Leander Paes ने औपचारिक रूप से Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया है। उनकी एंट्री ऐसे समय पर हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरमा रहा है और सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति को धार दे रही हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ औपचारिक स्वागत Leander Paes को पार्टी में शामिल करने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा नेता Sukanta Majumdar मौजूद रहे। Kiren Rijiju ने पेस की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहचान दिलाई और अब वे राजनीति के जरिए देश की सेवा करेंगे। “अब देश और युवाओं की सेवा का समय” BJP में शामिल होने के बाद Leander Paes ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों में खेल के जरिए देश का प्रतिनिधित्व किया है और अब वे युवाओं और देश की सेवा के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया। खेल से राजनीति तक का सफर Leander Paes भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं: 1996 बार्सिलोना ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल डेविस कप और ग्रैंड स्लैम में शानदार प्रदर्शन विंबलडन समेत कई अंतरराष्ट्रीय खिताब उनकी लोकप्रियता और पहचान को देखते हुए BJP को उम्मीद है कि यह कदम खासकर युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच असर डाल सकता है। चुनावी समीकरण पर क्या असर? Leander Paes की एंट्री को BJP के लिए एक “स्टार पावर” रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी की छवि को मजबूती मिल सकती है युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बन सकता है हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लोकप्रियता वोट में कितनी तब्दील होती है। निष्कर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति में Leander Paes की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। खेल के मैदान से राजनीति के मैदान तक उनका यह सफर BJP के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आए ताज़ा ओपिनियन पोल्स ने सियासी तस्वीर को बेहद दिलचस्प और अनिश्चित बना दिया है। राज्य में 23 अप्रैल को मतदान और 4 मई को मतगणना होनी है, लेकिन उससे पहले ही सर्वे रिपोर्ट्स ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। मुकाबला मुख्य रूप से DMK और AIADMK के बीच है, जबकि अभिनेता Vijay की पार्टी TVK ने समीकरणों को और जटिल बना दिया है। ओपिनियन पोल्स: तस्वीर साफ नहीं, मुकाबला बेहद करीबी तीन प्रमुख सर्वे-VoteVibe, IANS-Matrize और Agni News अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं: VoteVibe सर्वे के अनुसार DMK गठबंधन को 113–123 सीटें मिल सकती हैं, जबकि AIADMK गठबंधन 106–116 सीटों के बीच रह सकता है। IANS-Matrize सर्वे AIADMK को 114–127 सीटों के साथ बढ़त में दिखाता है, जबकि DMK 104–114 सीटों पर सिमट सकती है। Agni सर्वे सबसे अलग तस्वीर दिखाता है, जिसमें DMK को 180 सीटों की बड़ी जीत का अनुमान है, जबकि AIADMK 54 सीटों तक सीमित रह सकती है। इन विरोधाभासी आंकड़ों से साफ है कि चुनाव बेहद करीबी और अनिश्चित होने वाला है, जहां मामूली वोट शेयर का अंतर भी नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है। वोटर मूड: बटी हुई जनता सर्वे बताते हैं कि मतदाता पूरी तरह विभाजित हैं: करीब 40% लोग सरकार के काम से संतुष्ट हैं लगभग 39% मतदाता असंतोष जाहिर कर रहे हैं यानी राज्य में न तो स्पष्ट सरकार विरोधी लहर है और न ही पूरी तरह समर्थन-यही वजह है कि मुकाबला इतना टाइट बना हुआ है। किस वर्ग का झुकाव किस ओर? महिलाएं और अल्पसंख्यक वोटर DMK के साथ दिख रहे हैं पुरुष, OBC और सवर्ण वोटर AIADMK की ओर झुकाव दिखा रहे हैं युवा मतदाता बदलाव की ओर देख रहे हैं यह सामाजिक विभाजन चुनाव को और जटिल बना रहा है। विजय की TVK: गेम चेंजर या वोट कटवा? Vijay की पार्टी TVK पहली बार चुनावी मैदान में है। सर्वे के मुताबिक TVK को 2–8 सीटें मिल सकती हैं युवाओं में इसकी पकड़ जरूर दिख रही है हालांकि, अभी तक TVK को निर्णायक “गेम चेंजर” के बजाय “वोट कटवा” के रूप में देखा जा रहा है, जो किसी एक बड़े दल का खेल बिगाड़ सकती है। CM फेस: स्टालिन को मामूली बढ़त मुख्यमंत्री M. K. Stalin को AIADMK नेता Edappadi K. Palaniswami पर हल्की बढ़त मिलती दिख रही है, लेकिन अंतर इतना कम है कि इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता। निष्कर्ष: हाई-वोल्टेज और अनप्रेडिक्टेबल चुनाव कुल मिलाकर, तमिलनाडु चुनाव 2026 एक बेहद रोमांचक और अनिश्चित मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। DMK को हल्की बढ़त जरूर दिख रही है, लेकिन AIADMK पूरी ताकत से चुनौती दे रही है। अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि आखिरी समय में मतदाता किस ओर झुकते हैं और मतदान प्रतिशत कैसा रहता है।
अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर लगभग 90 मिनट तक ऐसा आक्रामक और रणनीतिक भाषण दिया, जिसने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। उनका यह संबोधन केवल एक राजनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित सियासी हमला था, जिसमें उन्होंने आंकड़ों, इतिहास और तर्कों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की। खामोशी से शुरुआत, रणनीति की तैयारी भाषण देने से करीब दो घंटे पहले ही अमित शाह सदन में मौजूद थे। वे शांत बैठकर हर वक्ता की बात ध्यान से सुन रहे थे और अहम बिंदुओं को नोट कर रहे थे। इस दौरान विपक्ष की बेंच काफी हद तक खाली दिखीं- Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Dimple Yadav जैसे बड़े चेहरे मौजूद नहीं थे। बहस के बीच भावनात्मक मोड़ बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने अपने परिवार की निजी त्रासदी का जिक्र किया, जिसमें उनके दादा की नक्सलियों द्वारा हत्या की बात सामने आई। इससे बहस का माहौल भावनात्मक हो गया। वहीं अभिनेत्री और सांसद Kangana Ranaut ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, जिससे सदन में हंगामा भी हुआ। 6:04 बजे शुरू हुआ ‘मुख्य प्रहार’ शाम 6:04 बजे अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए और सीधे इतिहास से शुरुआत की। उन्होंने Indira Gandhi पर नक्सल विचारधारा को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया, जिस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। ‘गरीबी नहीं, नक्सलवाद से फैली गरीबी’ अपने भाषण के दौरान शाह ने विपक्ष के तर्क को पलटते हुए कहा: “नक्सलवाद गरीबी की वजह से नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नक्सल हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी- “जो हथियार उठाएंगे, उन्हें समझाया जाएगा, नहीं मानेंगे तो बल का इस्तेमाल होगा।” तारीख, डेटा और रणनीतिक रोडमैप अमित शाह ने अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए कई अहम तारीखें पेश कीं: 20 अगस्त 2019: पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की नीति की शुरुआत 24 अगस्त 2024: भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य उन्होंने दावा किया कि सरकार की रणनीति और लगातार कार्रवाई से देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। 90 मिनट में बदला पूरा माहौल करीब 7:25 बजे जब उनका भाषण खत्म हुआ, तब तक सदन में कई बार हंगामा और नारेबाजी हो चुकी थी। लेकिन यह साफ था कि अमित शाह ने बहस की दिशा तय कर दी थी। उनका यह भाषण एक राजनीतिक प्रदर्शन जैसा था-जो खामोशी से शुरू हुआ और आक्रामक अंदाज में खत्म हुआ।
भुवनेश्वर, 31 मार्च 2026: ओडिशा की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। विवाद की वजह बना है Nishikant Dubey का एक बयान, जिसमें उन्होंने दिग्गज नेता Biju Patnaik को लेकर टिप्पणी की। इस बयान के बाद न सिर्फ विपक्ष, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी नाराजगी जताई है। क्या कहा था निशिकांत दुबे ने? बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के साथ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक, पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे बीजू पटनायक की छवि पर सवाल उठाने वाला माना गया। नवीन पटनायक का तीखा हमला बीजू पटनायक के बेटे और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल अपमानजनक है, बल्कि तथ्यों से परे भी है। नवीन पटनायक ने यहां तक कह दिया कि ऐसा बयान देने वाले को “मानसिक जांच” की जरूरत है। सफाई में क्या बोले निशिकांत दुबे? विवाद बढ़ता देख निशिकांत दुबे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा बीजू पटनायक की ओर नहीं, बल्कि नेहरू-गांधी परिवार की ओर था। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक उनके लिए भी सम्माननीय हैं और उनके योगदान पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने ओडिशा की जनता से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप न दिया जाए। बीजेपी ने बनाई दूरी इस विवाद के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने भी दुबे के बयान से खुद को अलग कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता Baijayant Panda ने बीजू पटनायक को महान देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। बीजेडी का विरोध और प्रदर्शन Biju Janata Dal ने इस मुद्दे को लेकर विरोध तेज कर दिया है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया और निशिकांत दुबे से बिना शर्त माफी की मांग की। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया गया, जिससे यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। क्यों बढ़ा विवाद? बीजू पटनायक ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश के एक सम्मानित और प्रभावशाली नेता रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी विवादित टिप्पणी को जनता और राजनीतिक दल गंभीरता से लेते हैं। यही वजह है कि यह मामला तेजी से तूल पकड़ गया और अब तक शांत नहीं हुआ है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।
देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। तमिलनाडु समेत असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार तेज हो गया है। इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और अभिनेता से नेता बने विजय ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। स्टालिन ने कोलाथुर से भरा पर्चा, जताया भरोसा डीएमके प्रमुख स्टालिन ने चेन्नई की कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। यह सीट वे 2011 से लगातार जीतते आ रहे हैं। नामांकन के बाद उन्होंने रोड शो भी किया और दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार भी भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के वादों पर जनता को भरोसा है और पिछले कार्यकाल में किए गए कामों का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा। विजय का सियासी डेब्यू, पेरंबूर से मैदान में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय ने भी पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल कर राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। विजय के नामांकन के दौरान भारी भीड़ और समर्थकों का उत्साह देखने को मिला। वे इस चुनाव के जरिए अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश करेंगे। चुनावी मैदान में बढ़ी टक्कर विजय की एंट्री ने तमिलनाडु चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ सत्ताधारी डीएमके अपनी उपलब्धियों के दम पर मैदान में है, वहीं दूसरी ओर नए चेहरे के रूप में विजय का करिश्मा भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अन्य राज्यों में भी तेज प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावी राज्यों में सक्रिय हैं और ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद’ अभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं। बीजेपी को असम और पुडुचेरी में जीत का भरोसा जताया गया है।
पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राज्यसभा से विदाई ले रहे हैं, लेकिन यह विदाई उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। 79 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और मुखर बने रहने वाले दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दिया है कि वे न तो “टायर्ड” हैं और न ही “रिटायर्ड”। मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में रणनीतिकार और अहम सिपहसालार की भूमिका निभाते रहे हैं। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनकी अगली राजनीतिक भूमिका क्या होगी। क्या खत्म होगी सक्रिय राजनीति? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के लिए सक्रिय राजनीति के विकल्प भले सीमित नजर आ रहे हों, लेकिन उनकी उपयोगिता अभी भी खत्म नहीं हुई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह पहले से सक्रिय हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर उनकी भूमिका कम हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें एक रणनीतिक सलाहकार या विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘सनातन’ पर स्पष्ट रुख दिग्विजय सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो ‘हिंदुत्व’ की राजनीति का विरोध करते हुए खुद को सनातन परंपरा का समर्थक बताते हैं। वे कई बार भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को ‘सच्चे हिंदुत्व’ पर खुली बहस की चुनौती दे चुके हैं। उनका मानना है कि ‘सर्वधर्म समभाव’ ही सनातन धर्म की मूल भावना है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा से सियासी संदेश 2017-18 की उनकी प्रसिद्ध नर्मदा परिक्रमा को उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है। करीब 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा ने न केवल उन्हें जनता से जोड़ा, बल्कि 2018 के मध्य प्रदेश चुनावों में कांग्रेस की वापसी का आधार भी बनी। कांग्रेस में अब भी मजबूत पकड़ कांग्रेस के भीतर दिग्विजय सिंह को आज भी एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि वे साधु-संतों और धार्मिक वर्गों से संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं-जो कांग्रेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में उनका नाम सामने आना भी उनकी प्रासंगिकता को दर्शाता है, हालांकि अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी मिली। आगे क्या? राज्यसभा से विदाई के बावजूद दिग्विजय सिंह की सक्रियता कम होने के संकेत नहीं हैं। उनके अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और वैचारिक स्पष्टता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में कांग्रेस की रणनीति और वैचारिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए कुल 284 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। यह सूची नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की पार्लियामेंटरी बोर्ड की दो दिवसीय बैठक के बाद जारी की गई। इस सूची में पार्टी ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों-उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक-राजनीतिक समीकरण साधे जा सकें। प्रमुख सीटों पर दिग्गजों की तैनाती कांग्रेस की सूची में सबसे चर्चित नाम Adhir Ranjan Chowdhury का है, जिन्हें उनके गढ़ बहरमपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अधीर रंजन चौधरी लंबे समय से इस क्षेत्र में पार्टी का मजबूत चेहरा रहे हैं और उन्होंने पहले ही यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। भवानीपुर में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी भवानीपुर सीट इस बार सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गई है। यहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मैदान में उतारा है। इस सीट पर नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari की मौजूदगी से मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है। अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवार नंदीग्राम से शेख जरियातुल हुसैन को टिकट दिया गया है खड़गपुर सदर में भाजपा नेता Dilip Ghosh के खिलाफ डॉ. पापिया चक्रवर्ती मैदान में हैं संदेशखाली (ST) सीट से युधिष्ठिर भुइयां को उम्मीदवार बनाया गया है डायमंड हार्बर से गौतम भट्टाचार्य, सिंगूर से बरुण कुमार मलिक और रायगंज से मोहित सेनगुप्ता को मौका मिला है क्षेत्रीय समीकरणों पर खास ध्यान कांग्रेस ने अपनी रणनीति में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे पारंपरिक गढ़ों में मुस्लिम उम्मीदवारों और पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है। वहीं उत्तर बंगाल की चाय बागान सीटों-जैसे कालचीनी और मदारीहाट-पर जनजातीय चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। सिलीगुड़ी से आलोक धारा और दार्जिलिंग से माधव राय को टिकट देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह सूची राज्य में पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करने और प्रमुख सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में दल-बदल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के विश्लेषण में यह सवाल उठाया गया है कि क्या “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा अब धीरे-धीरे “कांग्रेस-युक्त बीजेपी” में बदलता जा रहा है। आंकड़े क्या कहते हैं? पिछले एक दशक में 200 से अधिक सांसद और विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से आए हैं। 2024 के आम चुनावों में भी बीजेपी के 100 से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे थे, जो पहले अन्य दलों, खासकर कांग्रेस से जुड़े रहे। असम बना सबसे बड़ा उदाहरण असम की राजनीति इस बदलाव की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद कांग्रेस से बीजेपी में आए और आज राज्य में पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। हाल ही में कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में शामिल होना भी इसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। विचारधारा से ज्यादा ‘सत्ता’ का महत्व विश्लेषण में कहा गया है कि अब राजनीति में विचारधारा की जगह सत्ता और अवसरवादिता ने ले ली है। जो नेता कभी बीजेपी की विचारधारा का विरोध करते थे, वही अब उसी का समर्थन करते नजर आते हैं। इससे राजनीतिक सीमाएं पहले की तुलना में कहीं ज्यादा धुंधली हो गई हैं। कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी कांग्रेस की कमजोर होती संगठनात्मक पकड़ भी इस ट्रेंड की बड़ी वजह मानी जा रही है। कई राज्यों में पार्टी नेतृत्व को बनाए रखने और नए नेताओं को आगे लाने में असफल रही है, जिससे नेताओं के लिए दूसरे विकल्प तलाशना आसान हो गया है। लोकतंत्र पर क्या असर? दल-बदल का यह सिलसिला लोकतंत्र के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जब कोई नेता एक पार्टी के टिकट पर जीतकर दूसरी पार्टी में चला जाता है, तो मतदाता का जनादेश कमजोर पड़ता है। हालांकि, कई मामलों में ऐसे नेताओं को दोबारा जीत मिलना यह भी दिखाता है कि मतदाता विकास और सत्ता के करीब रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। समाधान क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि दल-बदल रोकने के लिए कड़े नियम जरूरी हैं। जैसे—दल बदलने वाले नेताओं को कुछ समय तक मंत्री बनने से रोकना या एंटी-डिफेक्शन कानून को और सख्त बनाना। लेकिन असली समाधान मजबूत विपक्ष और राजनीतिक सुधारों में ही छिपा है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच अलीपुर से एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। देर रात हुए इस घटनाक्रम में भाजपा नेता और भवानीपुर सीट से उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए, जिससे इलाके में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी शिविर लगाने के लिए बांस से लदा एक ट्रक ले जाया जा रहा था। यह ट्रक अलीपुर थाना क्षेत्र के अनाथालय रोड के पास पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे रोक लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना स्पष्ट कारण के ट्रक को रोका, जिसके बाद मौके पर मौजूद समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। आधी रात पहुंचे शुभेंदु अधिकारी घटना की जानकारी मिलते ही प्रचार से लौट रहे शुभेंदु अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके से ही कोलकाता पुलिस आयुक्त को फोन कर हस्तक्षेप की मांग की और इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इस दौरान पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। घंटों चला तनाव, भारी पुलिस बल तैनात घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। अलीपुर के ओरफनगंज रोड से सटे क्षेत्र में देर रात तक माहौल गरम रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे स्थिति नियंत्रण में लाने में समय लगा। अधिकारियों के दखल के बाद सुलझा मामला आखिरकार, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और पुलिस ने बांस से लदे ट्रक को जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी भी घटनास्थल से रवाना हो गए। चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है। विपक्षी दल जहां इसे प्रशासनिक दखल बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से इस पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज