Sanjay Raut On Amit Shah: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पुणे दौरे, संसद में 'वंदे मातरम्' पर चर्चा और जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं को लेकर राउत ने सरकार को घेरते हुए गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। अमित शाह के पुणे दौरे पर साधा निशाना मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा, "रात के अंधेरे में गृह मंत्री पुणे आए। भारतीय जनता पार्टी ने उनके स्वागत में बड़े-बड़े बैनर लगाए कि देश के चाणक्य का पुणे में आगमन हुआ है।" उन्होंने आगे कहा, "यह सवाल गृह मंत्री से पूछा जाना चाहिए। वह गृह मंत्रालय नहीं चला रहे हैं, बल्कि गैंग चला रहे हैं। वह व्यापारियों और गुंडों के गैंग को चला रहे हैं और विपक्ष को खत्म करने का काम कर रहे हैं।" जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर उठाए सवाल राउत ने जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की मौत और आतंकियों की घुसपैठ के लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, आतंकी लगातार घुसपैठ कर रहे हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्री की है।" 'वंदे मातरम्' पर सरकार को घेरा संजय राउत ने संसद में 'वंदे मातरम्' पर हुई चर्चा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस विषय पर चर्चा हो रही थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष सत्र बुलाया गया, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री चर्चा के दौरान सदन में नहीं थे। क्या यह वंदे मातरम् का अपमान नहीं है?" राउत ने आगे कहा कि यदि सरकार राष्ट्रभक्ति की बात करती है, तो उसे ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर सदन में उपस्थित रहना चाहिए था। कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि इस मामले पर गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने पुलवामा देखा, पहलगाम देखा और अब कुलगाम में फिर लोग मारे गए। इसके बावजूद गृह मंत्री इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। अब उन्हें सरकार में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।" संजय राउत के इन बयानों के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल गृह मंत्री अमित शाह या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गर्मियों में टैंक टॉप और स्पेगेटी-स्ट्रैप कैमिसोल भले ही सबसे आसान फैशन विकल्प हों, लेकिन लगातार इन्हीं बेसिक्स को पहनते-पहनते अगर आपका वॉर्डरोब बोरिंग लगने लगा है, तो अब स्टाइल बदलने का समय है। इस सीजन फैशन की दुनिया में हॉल्टरनेक टॉप एक बार फिर जोरदार वापसी कर रहा है। कंधों को खुला रखने वाली इसकी खास नेकलाइन साधारण आउटफिट में भी तुरंत ग्लैमर और पर्सनैलिटी जोड़ देती है। खास बात यह है कि इसे स्टाइल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। सिल्क स्कर्ट हो, बैगी बास्केटबॉल शॉर्ट्स हों या स्लाउची कार्गो ट्राउजर—हॉल्टरनेक लगभग हर तरह के बॉटम के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। Y2K फैशन से है खास कनेक्शन हॉल्टरनेक टॉप का आकर्षण सिर्फ इसके मॉडर्न लुक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे Y2K दौर की मजबूत फैशन नॉस्टैल्जिया भी जुड़ी हुई है। 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में हॉल्टरनेक फैशन का एक अहम हिस्सा बन चुका था। Chloé में Stella McCartney के दौर के दौरान स्कार्फ-स्टाइल और राइनस्टोन हॉल्टरनेक रनवे पर खूब नजर आए। उस समय Charlize Theron जैसे सितारों ने भी इस स्टाइल को अपनाया। इसके बाद Paris Hilton के 2000s वाले ग्लैमरस फैशन ने हॉल्टरनेक को पार्टी और नाइट-आउट स्टाइल का हिस्सा बना दिया। वहीं, 2002 की फिल्म Bend It Like Beckham में Keira Knightley के किरदार द्वारा पहना गया मेटैलिक टाइगर-स्ट्राइप्ड काउल-नेक हॉल्टरनेक आज भी इस ट्रेंड के यादगार लुक्स में गिना जाता है। अब नए अंदाज में लौट रहा है हॉल्टरनेक आज का हॉल्टरनेक अपने पुराने Y2K अवतार की तुलना में थोड़ा ज्यादा मिनिमल और सॉफिस्टिकेटेड नजर आ रहा है। जहां पहले इसमें ग्लिटर, बीड्स और स्टड्स का भरपूर इस्तेमाल होता था, वहीं अब डिजाइन ज्यादा साफ-सुथरे और पहनने में आसान हैं। रेड कार्पेट पर भी इस ट्रेंड की वापसी दिखाई दे रही है। Zoë Kravitz ने Saint Laurent के स्लिंकी हॉल्टरनेक गाउन में इस सिल्हूट को अपनाया, जबकि Alexa Demie Chanel के LBD में हॉल्टरनेक स्टाइल को एक मॉडर्न और ग्लैमरस रूप देती नजर आईं। इससे साफ है कि हॉल्टरनेक अब सिर्फ Y2K nostalgia तक सीमित नहीं है। यह मौजूदा फैशन ट्रेंड में भी अपनी जगह बना चुका है। रोजमर्रा के लुक को भी बना सकता है खास हॉल्टरनेक की सबसे बड़ी खासियत इसकी versatility है। इसे केवल पार्टी या नाइट-आउट के लिए पहनना जरूरी नहीं है। अगर आप कैजुअल लुक चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप को बैगी जींस, कार्गो पैंट या शॉर्ट्स के साथ पेयर किया जा सकता है। वहीं, शाम की आउटिंग के लिए इसे सिल्क या फ्लोई स्कर्ट के साथ स्टाइल करके ज्यादा ग्लैमरस लुक पाया जा सकता है। यानी जिस तरह एक बेसिक टैंक टॉप बिना ज्यादा सोचे पहना जा सकता है, हॉल्टरनेक भी लगभग उतना ही आसान विकल्प है, लेकिन इसका प्रभाव कहीं ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है। सेलिब्रिटी स्टाइल से लें इंस्पिरेशन हॉल्टरनेक की वापसी को सेलिब्रिटी फैशन भी मजबूती दे रहा है। Zoë Kravitz और Alexa Demie जैसे स्टार्स के रेड कार्पेट लुक्स दिखाते हैं कि यह नेकलाइन आज के मिनिमल लेकिन ग्लैमरस फैशन के साथ कितनी आसानी से फिट हो सकती है। अगर आप अपने समर वॉर्डरोब में बिना बहुत ज्यादा बदलाव किए कुछ नया जोड़ना चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप एक आसान विकल्प हो सकता है। इस सीजन कैसे अपनाएं हॉल्टरनेक ट्रेंड? हॉल्टरनेक को अपने स्टाइल में शामिल करने के कुछ आसान तरीके हैं: कैजुअल डे लुक: हॉल्टरनेक टॉप के साथ बैगी जींस या कार्गो पैंट पहनें। नाइट आउट: स्लिंकी हॉल्टरनेक को मिनी या सिल्क स्कर्ट के साथ पेयर करें। Y2K लुक: राइनस्टोन, स्टडेड या मेटैलिक हॉल्टरनेक के साथ लो-राइज बॉटम चुनें। मिनिमल स्टाइल: सिंपल हॉल्टरनेक को न्यूट्रल ट्राउजर और मिनिमल एक्सेसरीज के साथ पहनें। फेस्टिव या पार्टी लुक: ग्लैमरस हॉल्टरनेक को स्टेटमेंट ज्वेलरी और हील्स के साथ स्टाइल करें। वर्तमान फैशन ट्रेंड में हॉल्टरनेक की वापसी उन लोगों के लिए खास तौर पर दिलचस्प है, जो अपने रोजमर्रा के वॉर्डरोब में बिना ज्यादा मेहनत किए थोड़ा ग्लैमर जोड़ना चाहते हैं। यह टैंक टॉप की तरह आसान है, लेकिन इसकी shoulder-baring neckline पूरे लुक को ज्यादा considered और fashion-forward बना देती है। अगर इस सीजन आपका वॉर्डरोब आपको नीरस लगने लगा है, तो शायद आपको नए कपड़ों की नहीं, सिर्फ एक नए सिल्हूट की जरूरत है—और हॉल्टरनेक वही छोटा लेकिन असरदार बदलाव हो सकता है।
Shehzad Poonawalla Resignation News: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उनकी प्रोफाइल में हुए बदलाव के बाद उनके बीजेपी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक न तो बीजेपी और न ही शहजाद पूनावाला की ओर से इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है। X प्रोफाइल से हटाया बीजेपी का जिक्र चर्चा की शुरुआत तब हुई जब शहजाद पूनावाला ने अपने X अकाउंट की प्रोफाइल अपडेट की। नई प्रोफाइल में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का कोई उल्लेख नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने खुद को "Lifelong Follower of Prime Minister Narendra Modi" बताया है। प्रोफाइल में हुए इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। सूत्रों के हवाले से इस्तीफे का दावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि शहजाद पूनावाला ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए बीजेपी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, शहजाद पूनावाला ने भी सार्वजनिक रूप से इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे की खबर को आधिकारिक तौर पर पुष्टि किया गया घटनाक्रम नहीं माना जा सकता। 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में हुए थे शामिल शहजाद पूनावाला ने वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उस समय उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों और आंतरिक लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी। टीवी डिबेट और राजनीतिक मुद्दों पर आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रखने वाले नेताओं में उनकी पहचान बनी। सोशल मीडिया पोस्ट से पहले भी दिए थे संकेत पिछले कुछ समय से शहजाद पूनावाला अपने X अकाउंट पर ऐसे वीडियो साझा कर रहे थे, जिन्हें सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा गया। उन्होंने अपने पुराने इंटरव्यू के वीडियो बिना किसी कैप्शन के पोस्ट किए, जिनमें वह राजनीति, सार्वजनिक जीवन और समाज सेवा को लेकर अपनी सोच रखते नजर आए। 'राजनीतिक लक्ष्य और चुनावी लक्ष्य अलग होते हैं' जनवरी 2025 के एक वीडियो क्लिप में शहजाद पूनावाला ने कहा था कि "राजनीतिक लक्ष्य और चुनावी लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। यदि कोई सांसद या विधायक नहीं बनता, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह देश और समाज की सेवा नहीं कर सकता।" उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के कई रास्ते होते हैं और राजनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। 2024 चुनाव को बताया था आखिरी चुनाव एक अन्य वीडियो में उन्होंने कहा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से अलग होने का फैसला कर लिया था। हालांकि, उन्होंने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे अहम चुनावों तक पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि अब वह सार्वजनिक जीवन में किसी दूसरी भूमिका पर ध्यान देना चाहते हैं। आधिकारिक बयान का इंतजार फिलहाल शहजाद पूनावाला के बीजेपी छोड़ने की चर्चा सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में जरूर है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनके इस्तीफे को लेकर अंतिम स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब बीजेपी या स्वयं शहजाद पूनावाला इस संबंध में औपचारिक बयान जारी करेंगे।
संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार (31 जुलाई) को लोकसभा और राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है. सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में पेश कर सकती है. वहीं, सत्र की शुरुआत से पहले और दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही. लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित शुक्रवार सुबह हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद सदन की बैठक फिर से शुरू होगी. पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से CJP छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल पूछा गया. जवाब देने के बजाय राहुल गांधी ने पत्रकार से ही पूछा, "क्या आप BJP के हैं?" उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. मोदी-शाह पर राहुल गांधी का हमला इससे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेता देश की नई पीढ़ी (Gen Z) को डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आप भारत का अतीत हैं, इसलिए देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ संभलकर पेश आइए." राहुल ने युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा की बात भी कही. झारखंड के भाजपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन झारखंड के भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में मौन प्रदर्शन किया. उन्होंने JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की. सांसदों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है. निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "12 साल सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है." उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार बिना तथ्य के बयान दे रहे हैं. रामगोपाल यादव ने पीएम के संदेश का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने परीक्षा सुधार और पेपर लीक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. वहीं, वंदे मातरम् विधेयक पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोग 'वंदे मातरम्' का नारा लगाते हुए जेल गए और बलिदान दिया.
Datia Bypoll 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर गुरुवार (30 जुलाई) सुबह 7 बजे से उपचुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। इस सीट पर करीब 2.20 लाख मतदाता 21 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मतदान शुरू होने से पहले सुबह 5:30 बजे सभी केंद्रों पर मॉक पोल कराया गया, जो निर्धारित समय से पहले पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि अब तक मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और मौसम भी अनुकूल है। उन्होंने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। नरोत्तम मिश्रा बोले- कमल के निशान वाला बटन दबाया बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी दतिया में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने कमल के निशान वाला बटन दबाया है क्योंकि वह चाहते हैं कि भाजपा की जीत हो और दतिया में विकास कार्यों को नई गति मिले। कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा कि चुनाव में हार की आशंका होते ही कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाने लगती है, जो उसकी निराशा और हताशा को दर्शाता है। बीजेपी उम्मीदवार ने की 100 फीसदी मतदान की अपील बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने दतिया में शत-प्रतिशत मतदान का लक्ष्य हासिल करने की अपील की। कांग्रेस उम्मीदवार ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदाताओं से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और बेहतर कानून-व्यवस्था के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग के आधार पर बढ़ती दूरियों को खत्म करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने युवाओं से नशा और जुए जैसी बुरी आदतों से दूर रहने का आग्रह किया। दतिया सीट पर किसके बीच मुकाबला? दतिया उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दामोदर सिंह यादव को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की जा रही है। इनके अलावा 18 अन्य उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव? साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों से हराया था। हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसी कारण दतिया सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इस उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है। अब मतदान के बाद सभी की नजरें मतगणना और चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।
संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया, जबकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया। छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। खरगे ने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन छात्रों पर कथित अत्याचार करने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की। नड्डा बोले- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हुई कार्रवाई सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानून-व्यवस्था से जुड़ा सामान्य मामला था और इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाया जा रहा है। नड्डा ने कहा, "जो भी छात्र एक्टिविस्ट बनेगा, उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।" उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान छात्र आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें भी कई बार गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल का दिया उदाहरण जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान लगाए गए आपातकाल में उन्हें कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों में शामिल लोगों को कई बार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और इसे असामान्य नहीं माना जाना चाहिए। विपक्ष पर लगाया मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप नड्डा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को राजनीतिक रंग देकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की थी और इसे लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई, जबकि सरकार ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गठबंधन पर सीधे जवाब देने से बचते हुए अखिलेश ने कहा कि "अभी चुनाव दूर है, अभी लोकसभा में हम सब लोग एक साथ हैं।" उनके इस बयान के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव में INDIA गठबंधन की रणनीति को लेकर नए कयास लगाए जा रहे हैं। गठबंधन पर क्या बोले अखिलेश यादव? कांग्रेस के साथ भविष्य के गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि फिलहाल विधानसभा चुनाव में काफी समय बाकी है और मौजूदा समय में विपक्षी दल संसद के भीतर एकजुट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी किसी तरह के टकराव की जरूरत नहीं है और सभी का ध्यान सामाजिक न्याय तथा जनता के मुद्दों पर होना चाहिए। PDA रणनीति पर फिर जताया भरोसा अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपनी PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति को दोहराते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी इसी रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य सामाजिक न्याय स्थापित करना, संविधान के तहत सभी वर्गों को अधिकार और सम्मान दिलाना तथा कमजोर तबकों की आवाज को मजबूत करना है। सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी राजनीतिक प्राथमिकता गठबंधन की अटकलों से अधिक जनता के मुद्दों और सामाजिक न्याय के एजेंडे पर केंद्रित है। BJP को हराने का किया दावा अखिलेश यादव ने कहा कि जिस विपक्षी गठबंधन का उनकी पार्टी हिस्सा है, उसने हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कई महत्वपूर्ण सीटों पर चुनौती दी और जीत भी हासिल की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं और पार्टी आगे भी जनता के हितों के मुद्दे उठाती रहेगी। बयान के कई राजनीतिक मायने हालांकि अखिलेश यादव ने कांग्रेस से दूरी बनाने जैसी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की, लेकिन गठबंधन पर सीधा भरोसा जताने से भी परहेज किया। ऐसे में उनके बयान को राजनीतिक विश्लेषक कई नजरियों से देख रहे हैं। एक ओर उन्होंने मौजूदा विपक्षी एकजुटता की बात दोहराई, वहीं दूसरी ओर भविष्य के विधानसभा चुनाव को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे, राजनीतिक समीकरण और विपक्षी दलों की रणनीति पर आने वाले समय में तस्वीर और साफ होने की संभावना है। फिलहाल सपा अपनी PDA रणनीति और सामाजिक न्याय के एजेंडे को चुनावी राजनीति का केंद्र बनाए रखने के संकेत दे रही है।
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र में सोमवार (27 जुलाई) को शुरुआत से ही भारी हंगामा देखने को मिला। NEET-UG पेपर लीक मामले, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर, केंद्र सरकार आज पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाते हुए गृह मंत्री से जवाब और पूरे मामले पर संसद में चर्चा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। पवन खेड़ा ने सरकार से मांगी माफी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा सुधारों के लिए गठित नई टास्क फोर्स पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पुराने सुझावों को लागू करने के बजाय नई समितियां बनाकर समय बिता रही है। राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर सरकार से सवाल सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार से पूछा कि दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की 184 पन्नों की रिपोर्ट का क्या हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई टास्क फोर्स बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटका रही है, जबकि जरूरत परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार लागू करने की है। पेपर लीक विधेयक पर सरकार का जोर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि आज संसद में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून वाला विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि हंगामे की बजाय इस महत्वपूर्ण कानून पर गंभीर चर्चा करें ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। TMC और अन्य दलों की प्रतिक्रिया टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का स्वागत किया, लेकिन कहा कि विपक्ष की सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ माजी ने कहा कि नया कानून पूरी तरह दोषमुक्त होना चाहिए ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और निर्दोष छात्रों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बीजेपी ने विधेयक का किया समर्थन बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने तेजी से सही कदम उठाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में इस पर सकारात्मक चर्चा होगी और देश को मजबूत परीक्षा व्यवस्था देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा। आज संसद में पेश होंगे दो अहम विधेयक आज के संसदीय कार्यसूची में दो महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं— लोकसभा: पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पेश करेंगे। राज्यसभा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सम्मान का अपमान (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से जुड़े कानून को और प्रभावी बनाना है। संसद में टकराव के आसार बरकरार हालांकि CJP ने अपनी प्रमुख मांगें स्वीकार होने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया है, लेकिन कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे NEET विवाद, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरते रहेंगे। ऐसे में दिनभर संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं।
Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार (27 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके धर्मेंद्र प्रधान का संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने जोरदार स्वागत किया। मकर द्वार पर पहले से मौजूद सांसदों ने उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के बीच संसद भवन तक उनके साथ पहुंचे। इस दौरान संसद परिसर में कुछ देर के लिए राजनीतिक उत्साह और शक्ति प्रदर्शन का माहौल देखने को मिला। पारंपरिक सम्मान के साथ संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे, भाजपा और एनडीए के सांसदों ने तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया गया और सांसदों ने उन्हें घेरकर संसद भवन के अंदर तक पहुंचाया। इस दौरान समर्थक सांसद लगातार 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाते रहे। बताया जा रहा है कि यह स्वागत ऐसे समय हुआ, जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच दो दिन पहले ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। संसद परिसर में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत के तुरंत बाद संसद परिसर में विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। 'शिक्षा चोरी' के नारे, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में 'शिक्षा चोरी' के नारे लगाए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रही है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने छात्रों पर कार्रवाई का उठाया मुद्दा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के पास प्रदर्शन करते हुए 20 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर लिखा था— "वोट चोरी, पेपर चोरी, चंदा चोरी" विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब देने की मांग की। संसद का पहला दिन रहा राजनीतिक टकराव के नाम मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। एक ओर एनडीए सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एकजुटता दिखाई, वहीं विपक्ष ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
लखनऊ, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर समस्या की जड़ में बीमारी है तो सिर्फ ऊपर-ऊपर का समाधान करने से बात नहीं बनेगी। अखिलेश ने सरकार पर साधा निशाना अखिलेश यादव ने अपने बयान में लिखा कि "जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं मानने वाला"। उन्होंने इस बयान के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान मूल कारणों को दूर करने से ही संभव है। सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन लद्दाख से जुड़े मुद्दों और छात्रों के समर्थन में अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी पर भी किया हमला अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश की कई समस्याओं की जड़ राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और बदलाव की जरूरत बताई। सपा नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया सपा नेताओं ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जीवन की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन हुआ है, उनका समाधान होना चाहिए।
संसद के मानसून सत्र का आज (शुक्रवार, 24 जुलाई) पांचवां दिन है। पिछले चार दिनों तक विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। आज सरकार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ा एक अहम विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक प्रस्तावित बिल का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद सदन में चर्चा में हिस्सा ले सकती है। ऐसे में आज का दिन संसद की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पेपर लीक पर घमासान जारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्तापक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। खरगे का पीएम मोदी पर निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना होता है, देर रात वीडियो बनाकर संसद के बाहर एकतरफा 'मन की बात' नहीं करनी होती। पीएम मोदी, आज संसद में आने से पहले धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके आइए।" खरगे का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की थी। निर्मला सीतारमण बोलीं- चर्चा के लिए सरकार तैयार गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला देश के छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है। सीतारमण ने कहा, "पेपर लीक के बाद तुरंत दोबारा परीक्षा कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए। अब छात्र आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।" विपक्ष पर लगाया शर्तें बदलने का आरोप वित्त मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले उसने संसद में चर्चा की मांग की और जब सरकार ने सहमति दे दी, तब विपक्ष ने नई-नई शर्तें रखनी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा चाहती है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करने से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। आज के सत्र पर सबकी नजर मानसून सत्र के पांचवें दिन सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार पेपर लीक से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक पेश करती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष चर्चा में शामिल होता है या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखता है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर आज संसद में तीखी बहस होने के आसार हैं।
संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। खरगे की दो टूक: पहले इस्तीफा, फिर चर्चा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष शुरू से ही NEET मामले पर चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार ने पहले इस पर सहमति नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई हुई और विपक्षी नेताओं का अपमान किया गया। खरगे ने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्यसभा परिसर में उन्हें रोकने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण गुरुवार को भी संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही भी लगातार नारेबाजी के कारण पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। पीएम मोदी और अमित शाह का संदेश देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। रिजिजू का विपक्ष पर हमला संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार शुरू से ही NEET मामले पर चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष नई-नई शर्तें रख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर खुली चर्चा के पक्ष में है, लेकिन सदन की कार्यवाही शर्तों के आधार पर नहीं चल सकती। राहुल गांधी ने सरकार को घेरा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा प्रणाली को कमजोर होने दिया और छात्र लगातार परेशान हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रियंका गांधी और महुआ मोइत्रा का विरोध प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में विपक्ष के प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विपक्ष और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। सुरजेवाला ने नियम 267 के तहत दिया नोटिस कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस देकर NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर तत्काल चर्चा की मांग की। उनका कहना है कि यह मुद्दा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर सदन में उठाया जाना चाहिए।
जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बीच संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बीजेपी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है और पत्थरबाजी कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सेवा बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों और इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य बातें (Key Points) CJP का प्रदर्शन 34वें दिन भी जंतर-मंतर पर जारी। अभिजीत दीपके ने बीजेपी से जुड़े लोगों पर पत्थरबाजी कराने का आरोप लगाया। दावा किया कि पहले से पत्थर जमा किए गए और बाद में उपद्रव कराया गया। पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप। इंटरनेट सेवा बंद किए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 'आंदोलन को बदनाम करने की हो रही कोशिश' अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे आंदोलन को जनसमर्थन मिल रहा है, कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को हिंसक दिखाने की साजिश रची जा रही है। BJP पर लगाए गंभीर आरोप दीपके ने दावा किया कि बीजेपी से जुड़े लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं और बाद में इसका आरोप CJP कार्यकर्ताओं पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल के आसपास पहले से पत्थर जमा किए गए थे और बाद में कुछ लोगों ने उनका इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस पर भी ऐसे लोगों का साथ देने का आरोप लगाया। 'इंटरनेट बंद कर बड़ी कार्रवाई की तैयारी' अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इंटरनेट बंद करना आंदोलन को दबाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस और सुरक्षाबलों से की अपील दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से बचें और प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहने दें। सोनम वांगचुक को लेकर क्या बोले दीपके? अभिजीत दीपके ने बताया कि CJP का धरना 34वें दिन में पहुंच चुका है, जबकि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 26वें दिन भी जारी है। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों पर कायम रहेगा, लेकिन उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील भी की। दीपके ने कहा कि वह उनकी जान को किसी भी खतरे में नहीं देखना चाहते।
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी स्थिति में धकेलने की कोशिश की जा रही है। साथ ही दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशें पहले भी नाकाम रही हैं और इस बार भी सफल नहीं होंगी। 'भारत को बांग्लादेश बनाने की कोशिश हो रही है' कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान दिलीप घोष ने कहा कि कुछ लोग भारत में वैसा ही माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसा पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में जन आंदोलनों के दौरान देखने को मिला था। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों का उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना है, लेकिन ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी। 'प्रदर्शनकारी विदेशी ताकतों की कठपुतली' दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल कुछ लोग विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आंदोलन से जुड़े कई लोगों को भी अब एहसास हो गया है कि उन्हें केवल मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ पेशेवर समूह माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। संसद सत्र को बताया आसान निशाना उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन करना इसलिए आसान होता है, क्योंकि उस समय बड़ी संख्या में मीडिया मौजूद रहती है। घोष के मुताबिक, प्रदर्शनकारी इसी का फायदा उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। 'मोदी सरकार सही समय पर फैसला लेगी' दिलीप घोष ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह हालात पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उचित समय पर उचित निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार कोई कड़ा कदम उठाती है, तो विपक्ष उसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। किसान आंदोलन का दिया उदाहरण दिलीप घोष ने अपने बयान में किसान आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले हुए आंदोलनों से विपक्ष को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, उसी तरह वर्तमान छात्र आंदोलन भी सफल नहीं होगा। उनके अनुसार, जनता का व्यापक समर्थन आंदोलन के साथ नहीं है और विपक्ष चुनाव में हारने के बाद ऐसे आंदोलनों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री आवास के पास धरने के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। जितेंद्र सिंह ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ धरने पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए उन्हें और गृह सचिव गोविंद मोहन को भेजा था। जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सरकार ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि निर्धारित स्थान के अलावा कहीं और धरना देने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार का दावा- चर्चा की मांग मान ली थी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले शर्त रखी थी कि यदि सरकार NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए, तो वह धरना समाप्त कर देंगे। सरकार का दावा है कि इस मांग को तत्काल स्वीकार कर लिया गया और संसद में चर्चा के लिए सहमति भी दे दी गई। 'फिर बदल दी मांग' जितेंद्र सिंह का आरोप है कि सरकार की सहमति मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपनी मांग बदल दी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई शर्त जोड़ दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि पहले केवल चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी मांग बदल दी। मंत्री ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर की गई कार्रवाई हर भारतीय परिवार पर हमला है। राहुल गांधी ने लोगों से कांग्रेस के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों को न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस का कहना है कि सरकार संसद में NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पिछले कई सप्ताह से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संसद में चर्चा की मांग की जा रही थी, लेकिन जब सदन में बहस का मौका नहीं मिला तो विपक्ष को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। संसद से सड़क तक पहुंचा विवाद NEET पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा अब संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, संगठित अपराध और देश विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) के गठन का प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में राज्य में NIA की तर्ज पर एक विशेष जांच एजेंसी बनाने की जरूरत पर चर्चा की गई। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, कट्टरपंथ, अवैध हथियारों, नशा तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में ऐसी विशेष एजेंसी की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जो गंभीर मामलों की जांच तेजी से कर सके। SIA को मिल सकती है विशेष जांच की जिम्मेदारी प्रस्तावित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके गठन और अधिकारों को लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार और संबंधित विभागों की प्रक्रिया के बाद ही होगा। केंद्र ने सुरक्षा तंत्र मजबूत करने पर दिया जोर अमित शाह की बैठक में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर चर्चा हुई। राजनीतिक बहस भी तेज SIA गठन के प्रस्ताव को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। जहां बीजेपी इसे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल केंद्र के इस कदम को लेकर सवाल उठा सकते हैं। अभी प्रस्ताव, अंतिम निर्णय बाकी फिलहाल पश्चिम बंगाल में SIA के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव और चर्चा के स्तर पर है। आगे राज्य और केंद्र के बीच समन्वय के बाद ही इसकी रूपरेखा तय होगी।
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' संसद में पेश करेंगे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान को कानूनी संरक्षण देना और इसके अपमान या गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाना है। 'वंदे मातरम्' के सम्मान को मिलेगा कानूनी संरक्षण प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत के सम्मान को और मजबूत करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कई अहम विषय उठाए, जिनमें शामिल हैं– अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता सोनम वांगचुक का अनशन विदेश नीति NEET पेपर लीक मामला अन्य समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दे समाजवादी पार्टी ने संकेत दिया है कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले को संसद में प्रमुखता से उठाएगी। टीएमसी और शिवसेना के बागी सांसदों पर विवाद बैठक के दौरान विपक्ष ने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों को बैठक में बुलाने का विरोध किया। विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए वॉकआउट भी किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे सरकार का "तानाशाही फैसला" बताया, जबकि शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय से पहले नए गुट को मान्यता दिए जाने पर सवाल उठाए। सरकार इन प्रमुख विधेयकों को भी करेगी पेश 1. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 'वंदे मातरम्' के अपमान या गायन में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान। राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की पहल। 2. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना। विलंब से पंजीकरण कराने पर नियमों को और सख्त किया जाएगा। 3. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को दी गई कर छूट को स्थायी कानूनी स्वरूप देना। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस और राजनीतिक गर्मी बढ़ने की संभावना है।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। संसद में चर्चा की मांग करेगी कांग्रेस कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राम मंदिर में मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रमोद तिवारी ने लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि मामले की जांच वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। दान और चढ़ावे को लेकर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बता रहे हैं। जांच पूरी होने का इंतजार मामले की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियों के स्तर पर जारी है। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता या जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मानसून सत्र में गरमा सकता है मुद्दा संसद के मानसून सत्र में यह मामला प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकता है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार से इस विषय पर जवाब मांगने की तैयारी में हैं, जबकि सत्ता पक्ष के भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस ने सांसदों की बुलाई अहम बैठक मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर स्थित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में अपने लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में विपक्षी दलों की रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कई अहम मुद्दों को सदन में उठाएगा। इनमें शामिल हैं– NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च महंगाई मणिपुर की स्थिति किसानों से जुड़े मुद्दे चुनाव आयोग के कामकाज अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़ा मामला एथनॉल नीति कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने लोकसभा में NEET-UG पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। सरकार का फोकस आठ विधेयकों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया विधेयक लाया जाएगा तो उसकी जानकारी पहले कार्य मंत्रणा समिति और सभी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है। टीएमसी के बागी सांसदों की सीटें बदलीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के तहत कुल 39 सांसदों की सीटों का पुनः आवंटन किया गया है। संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी मानसून सत्र से पहले संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ और संसद सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। पहले दिन हंगामे के आसार संसद का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में पहले ही दिन सदन में जोरदार बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। 'Musafir Cafe' पर टिकी दर्शकों की नजर इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी बटोर रही सुर्खियां स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर जॉनर के दर्शकों के लिए विकल्प इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं। वीकेंड पर OTT दर्शकों की होगी मौज लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में बनने वाले अमूल के मेगा डेयरी प्लांट की आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में आया राजनीतिक बदलाव आजादी के बाद देश के किसी भी राज्य में हुए सबसे अलग परिवर्तनों में से एक है। उन्होंने वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकारों पर राज्य के विकास को पीछे धकेलने का आरोप भी लगाया। 'वामपंथ और टीएमसी ने बंगाल को पीछे धकेला' पूर्वी कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर से परियोजना का डिजिटल शिलान्यास करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य ने पहले 30 वर्षों तक वामपंथी शासन और उसके बाद 15 वर्षों तक टीएमसी सरकार देखी। उनके अनुसार, इन दोनों सरकारों के कार्यकाल में बंगाल के विकास को नुकसान पहुंचा, जबकि अब जनता बदलाव चाहती है। घुसपैठ और कानून-व्यवस्था पर हुई समीक्षा अपने तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य स्तर पर घुसपैठ रोकने, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। 700 करोड़ की अमूल परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ अमित शाह ने कहा कि हावड़ा में बनने वाला अमूल का यह डेयरी संयंत्र राज्य के डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा और इससे लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ेगी। परियोजना की प्रमुख बातें: कुल निवेश: लगभग 700 करोड़ रुपये दूध प्रसंस्करण क्षमता: प्रतिदिन 30 लाख लीटर उत्पादन क्षमता: रोजाना 10 लाख किलोग्राम (1,000 टन) दही और अन्य डेयरी उत्पाद लाभार्थी: 1.25 लाख से अधिक डेयरी किसान, जिनमें 30 हजार से ज्यादा महिला किसान शामिल हैं। पूर्वी भारत में मजबूत होगा डेयरी नेटवर्क उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वी भारत में सहकारी डेयरी नेटवर्क को मजबूत करना और किसानों को दूध बेचने के लिए स्थायी एवं भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। यह कार्यक्रम अमित शाह के तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे का अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम था। समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और अन्य गणमान्य लोगों ने भी हिस्सा लिया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।