Sanjay Raut

Sanjay Raut criticizes Amit Shah over Jammu and Kashmir Kulgam terror attack
'गृहमंत्रालय नहीं, गैंग चला रहे हैं', अमित शाह पर संजय राउत का हमला; कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा

Sanjay Raut On Amit Shah: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पुणे दौरे, संसद में 'वंदे मातरम्' पर चर्चा और जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं को लेकर राउत ने सरकार को घेरते हुए गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। अमित शाह के पुणे दौरे पर साधा निशाना मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा, "रात के अंधेरे में गृह मंत्री पुणे आए। भारतीय जनता पार्टी ने उनके स्वागत में बड़े-बड़े बैनर लगाए कि देश के चाणक्य का पुणे में आगमन हुआ है।" उन्होंने आगे कहा, "यह सवाल गृह मंत्री से पूछा जाना चाहिए। वह गृह मंत्रालय नहीं चला रहे हैं, बल्कि गैंग चला रहे हैं। वह व्यापारियों और गुंडों के गैंग को चला रहे हैं और विपक्ष को खत्म करने का काम कर रहे हैं।" जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर उठाए सवाल राउत ने जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की मौत और आतंकियों की घुसपैठ के लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, आतंकी लगातार घुसपैठ कर रहे हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्री की है।" 'वंदे मातरम्' पर सरकार को घेरा संजय राउत ने संसद में 'वंदे मातरम्' पर हुई चर्चा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस विषय पर चर्चा हो रही थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष सत्र बुलाया गया, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री चर्चा के दौरान सदन में नहीं थे। क्या यह वंदे मातरम् का अपमान नहीं है?" राउत ने आगे कहा कि यदि सरकार राष्ट्रभक्ति की बात करती है, तो उसे ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर सदन में उपस्थित रहना चाहिए था। कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि इस मामले पर गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने पुलवामा देखा, पहलगाम देखा और अब कुलगाम में फिर लोग मारे गए। इसके बावजूद गृह मंत्री इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। अब उन्हें सरकार में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।" संजय राउत के इन बयानों के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल गृह मंत्री अमित शाह या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Halterneck tops styled with jeans, cargo pants and skirts for a glamorous Y2K inspired summer fashion look
टैंक टॉप से हो गए हैं बोर? इस सीजन हॉल्टरनेक टॉप से पाएं अपने वॉर्डरोब को Y2K ग्लैमर का ट्विस्ट

गर्मियों में टैंक टॉप और स्पेगेटी-स्ट्रैप कैमिसोल भले ही सबसे आसान फैशन विकल्प हों, लेकिन लगातार इन्हीं बेसिक्स को पहनते-पहनते अगर आपका वॉर्डरोब बोरिंग लगने लगा है, तो अब स्टाइल बदलने का समय है। इस सीजन फैशन की दुनिया में हॉल्टरनेक टॉप एक बार फिर जोरदार वापसी कर रहा है। कंधों को खुला रखने वाली इसकी खास नेकलाइन साधारण आउटफिट में भी तुरंत ग्लैमर और पर्सनैलिटी जोड़ देती है। खास बात यह है कि इसे स्टाइल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। सिल्क स्कर्ट हो, बैगी बास्केटबॉल शॉर्ट्स हों या स्लाउची कार्गो ट्राउजर—हॉल्टरनेक लगभग हर तरह के बॉटम के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। Y2K फैशन से है खास कनेक्शन हॉल्टरनेक टॉप का आकर्षण सिर्फ इसके मॉडर्न लुक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे Y2K दौर की मजबूत फैशन नॉस्टैल्जिया भी जुड़ी हुई है। 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में हॉल्टरनेक फैशन का एक अहम हिस्सा बन चुका था। Chloé में Stella McCartney के दौर के दौरान स्कार्फ-स्टाइल और राइनस्टोन हॉल्टरनेक रनवे पर खूब नजर आए। उस समय Charlize Theron जैसे सितारों ने भी इस स्टाइल को अपनाया। इसके बाद Paris Hilton के 2000s वाले ग्लैमरस फैशन ने हॉल्टरनेक को पार्टी और नाइट-आउट स्टाइल का हिस्सा बना दिया। वहीं, 2002 की फिल्म Bend It Like Beckham में Keira Knightley के किरदार द्वारा पहना गया मेटैलिक टाइगर-स्ट्राइप्ड काउल-नेक हॉल्टरनेक आज भी इस ट्रेंड के यादगार लुक्स में गिना जाता है। अब नए अंदाज में लौट रहा है हॉल्टरनेक आज का हॉल्टरनेक अपने पुराने Y2K अवतार की तुलना में थोड़ा ज्यादा मिनिमल और सॉफिस्टिकेटेड नजर आ रहा है। जहां पहले इसमें ग्लिटर, बीड्स और स्टड्स का भरपूर इस्तेमाल होता था, वहीं अब डिजाइन ज्यादा साफ-सुथरे और पहनने में आसान हैं। रेड कार्पेट पर भी इस ट्रेंड की वापसी दिखाई दे रही है। Zoë Kravitz ने Saint Laurent के स्लिंकी हॉल्टरनेक गाउन में इस सिल्हूट को अपनाया, जबकि Alexa Demie Chanel के LBD में हॉल्टरनेक स्टाइल को एक मॉडर्न और ग्लैमरस रूप देती नजर आईं। इससे साफ है कि हॉल्टरनेक अब सिर्फ Y2K nostalgia तक सीमित नहीं है। यह मौजूदा फैशन ट्रेंड में भी अपनी जगह बना चुका है। रोजमर्रा के लुक को भी बना सकता है खास हॉल्टरनेक की सबसे बड़ी खासियत इसकी versatility है। इसे केवल पार्टी या नाइट-आउट के लिए पहनना जरूरी नहीं है। अगर आप कैजुअल लुक चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप को बैगी जींस, कार्गो पैंट या शॉर्ट्स के साथ पेयर किया जा सकता है। वहीं, शाम की आउटिंग के लिए इसे सिल्क या फ्लोई स्कर्ट के साथ स्टाइल करके ज्यादा ग्लैमरस लुक पाया जा सकता है। यानी जिस तरह एक बेसिक टैंक टॉप बिना ज्यादा सोचे पहना जा सकता है, हॉल्टरनेक भी लगभग उतना ही आसान विकल्प है, लेकिन इसका प्रभाव कहीं ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है। सेलिब्रिटी स्टाइल से लें इंस्पिरेशन हॉल्टरनेक की वापसी को सेलिब्रिटी फैशन भी मजबूती दे रहा है। Zoë Kravitz और Alexa Demie जैसे स्टार्स के रेड कार्पेट लुक्स दिखाते हैं कि यह नेकलाइन आज के मिनिमल लेकिन ग्लैमरस फैशन के साथ कितनी आसानी से फिट हो सकती है। अगर आप अपने समर वॉर्डरोब में बिना बहुत ज्यादा बदलाव किए कुछ नया जोड़ना चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप एक आसान विकल्प हो सकता है। इस सीजन कैसे अपनाएं हॉल्टरनेक ट्रेंड? हॉल्टरनेक को अपने स्टाइल में शामिल करने के कुछ आसान तरीके हैं: कैजुअल डे लुक: हॉल्टरनेक टॉप के साथ बैगी जींस या कार्गो पैंट पहनें। नाइट आउट: स्लिंकी हॉल्टरनेक को मिनी या सिल्क स्कर्ट के साथ पेयर करें। Y2K लुक: राइनस्टोन, स्टडेड या मेटैलिक हॉल्टरनेक के साथ लो-राइज बॉटम चुनें। मिनिमल स्टाइल: सिंपल हॉल्टरनेक को न्यूट्रल ट्राउजर और मिनिमल एक्सेसरीज के साथ पहनें। फेस्टिव या पार्टी लुक: ग्लैमरस हॉल्टरनेक को स्टेटमेंट ज्वेलरी और हील्स के साथ स्टाइल करें। वर्तमान फैशन ट्रेंड में हॉल्टरनेक की वापसी उन लोगों के लिए खास तौर पर दिलचस्प है, जो अपने रोजमर्रा के वॉर्डरोब में बिना ज्यादा मेहनत किए थोड़ा ग्लैमर जोड़ना चाहते हैं। यह टैंक टॉप की तरह आसान है, लेकिन इसकी shoulder-baring neckline पूरे लुक को ज्यादा considered और fashion-forward बना देती है। अगर इस सीजन आपका वॉर्डरोब आपको नीरस लगने लगा है, तो शायद आपको नए कपड़ों की नहीं, सिर्फ एक नए सिल्हूट की जरूरत है—और हॉल्टरनेक वही छोटा लेकिन असरदार बदलाव हो सकता है।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
Setback for Uddhav Thackeray
उद्धव ठाकरे को झटका, 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल

मुंबई, एजेंसियां। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है। सोमवार को सभी बागी सांसदों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके नंदनवन बंगले पर मुलाकात की और बाद में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले की जानकारी दी। शिंदे गुट की बढ़ी ताकत इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत 7 से बढ़कर 13 सांसदों तक पहुंच गई है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसदों में अब केवल 3 सांसद ही बचे हैं। बागी सांसदों में संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। उद्धव ठाकरे ने की बैठक इधर, मुंबई में उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की। हालांकि बैठक में कुछ विधायक अनुपस्थित रहे, जिससे पार्टी में और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बागी सांसदों पर वफादारी बेचने का आरोप लगाया। वहीं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे “गद्दारी” करार देते हुए कहा कि पार्टी को अब बड़े राजनीतिक ऑपरेशन की जरूरत है। ठाकरे 27 जून से राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले बड़ा असर डाल सकता है। इसी बीच उद्धव ठाकरे 27 जून से राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं, जिसके जरिए वे अपने संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगे।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Uddhav Thackeray addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event and offers to step down amid rebellion by party MPs.
उद्धव ठाकरे बोले- अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार, कांग्रेस में विलय की अटकलों पर दिया बड़ा बयान

  शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संगठन में जारी बगावत के बीच बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को उन पर भरोसा नहीं है, तो वे पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। किसी और को शिवसेना का अध्यक्ष बना दीजिए।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे संकट के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने संबोधन में ठाकरे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां “एक पार्टी व्यवस्था और बिना चुनाव” जैसी स्थिति बन सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। बागी सांसदों को लेकर जताई चिंता, मांगी माफी कार्यक्रम में ठाकरे ने उन मतदाताओं से माफी भी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के सांसदों को वोट दिया था, लेकिन अब उनके बगावत करने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में अभी भी उत्साह बना हुआ है और शिवसेना की विचारधारा मजबूत है। कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना का किसी पार्टी में विलय का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक गठबंधन किया, लेकिन कभी भी विलय नहीं किया। छह सांसदों के बगावत से संकट गहराया शिवसेना (UBT) इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच संगठन में हलचल तेज हो गई है। ये सांसद हाल ही में पार्टी की संसदीय बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। भाजपा पर लगाए आरोप पार्टी नेता अंबादास दानवे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की भूमिका का आरोप लगाया है। वहीं संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को मंत्री पद और आर्थिक प्रलोभन दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event amid growing speculation of a major split in the UBT faction.
शिवसेना में सियासी संकट गहराया, शिंदे का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला; 6 सांसदों की बगावत से बढ़ा तनाव

  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच तीखी बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। शिंदे का उद्धव ठाकरे पर तीखा तंज शिवसेना स्थापना दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर अप्रत्यक्ष हमला किया। उन्होंने कहा— “भेड़िया, बाघ की खाल ओढ़ ले, तो भी बाघ नहीं बन सकता।” शिंदे ने आगे कहा कि यह राजनीतिक घटनाक्रम केवल “ट्रेलर” है, जबकि “पूरी फिल्म अभी बाकी है।” उनके इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यूबीटी गुट में बढ़ा संकट, 6 सांसदों के टूटने की चर्चा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इन सांसदों में शामिल हैं: संजय दीना पाटिल संजय देशमुख संजय जाधव भाऊसाहेब वाकचौरे नागेश पाटिल-आष्टीकर ओमप्रकाश राजे निंबालकर सूत्रों के अनुसार, ये सभी सांसद 18 जून को हुई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी में टूट की स्थिति और स्पष्ट हो गई है। महायुति को मजबूत दावा शिंदे ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि आगामी विधान परिषद चुनाव में महायुति सभी 17 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि जनता का रुझान उनके गठबंधन के पक्ष में है। भावुक हुए उद्धव ठाकरे, नेतृत्व छोड़ने के संकेत बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि लगातार राजनीतिक चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका आत्मबल कमजोर नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पार्टी के लोग उन पर भरोसा नहीं करते हैं तो वे पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वे पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और अब निर्णय शिवसैनिकों को करना है कि वे उन्हें नेतृत्व में देखना चाहते हैं या नहीं। शिवसेना में दूसरी बड़ी टूट की आशंका पिछले चार वर्षों में यह दूसरी बड़ी राजनीतिक टूट मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर 6 सांसदों के पाला बदलने की खबरें सही साबित होती हैं तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका होगा और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। निष्कर्ष शिवसेना में जारी यह राजनीतिक संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शिंदे और ठाकरे गुट के बीच बढ़ती खाई न सिर्फ पार्टी के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकती है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Shiv Sena UBT MPs meeting in Maharashtra amid speculation of six MPs joining Eknath Shinde faction.
शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत बोले- ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी’

  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसदों के शामिल नहीं होने से पार्टी में नई टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। बैठक से गायब रहे 6 सांसद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद अनुपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है और बागी सांसद अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अनुपस्थित सांसदों के नाम: Sanjay Jadhav (परभणी) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omraje Nimbalkar (धाराशिव) Sanjay Patil (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त करेंगे’ : संजय राउत बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने कहा कि पार्टी का व्हिप जारी होने के बावजूद छह सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "जो सांसद पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें हम गद्दार मानते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।" बागी सांसदों को भेजा जाएगा नोटिस पार्टी सांसद Arvind Sawant ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों को आज ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी बैठक में क्यों नहीं आए। ‘बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं’ संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के व्हिप का उल्लंघन अनुशासनहीनता है। ये लोग बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं।" बीजेपी और शिंदे पर लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप संजय राउत ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party और एकनाथ शिंदे गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा, "जो जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर जाएं। वे शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ धोखेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।" एक और टूट की ओर बढ़ रही शिवसेना (यूबीटी) छह सांसदों की गैरमौजूदगी और पार्टी नेतृत्व के तीखे बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की संभावना बढ़ गई है। यदि ये सांसद अलग समूह बनाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
MODI Amit Shah
बंगाल-महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु पर भाजपा की नजर

850 सीटों वाली संसद की तैयारी, दो-तिहाई बहुमत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार, 44 सांसदों की जरूरत मुंबई, एजेंसियां। मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है। बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई, तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है। उद्धव गुट की शिवसेना ने बैठक में सभी सांसदों को बुलाया शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल के कार्यालय में होगी। 6 सांसदों ने बगावत कर दी है यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा   यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था।  संजय राउत ने बागियों को गाली दी इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए। शिवसेना में दूसरी टूट शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Shiv Sena UBT leaders Uddhav Thackeray and Sanjay Raut amid fresh political speculation over possible defections in Maharashtra.
'2029 तक खत्म हो जाएगी UBT', संजय निरुपम का बड़ा दावा; संजय राउत ने कहा- यह सिर्फ अफवाह

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) धीरे-धीरे खत्म हो रही है और वर्ष 2029 तक पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हालांकि, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज अफवाह करार दिया है। 'UBT नेतृत्व पर नहीं रहा नेताओं का भरोसा': संजय निरुपम शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर कहा कि शिवसेना (UBT) के विधायक और सांसद अब पार्टी नेतृत्व पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी से लगातार लोग अलग हो रहे हैं और आने वाले समय में यह राजनीतिक दल पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। निरुपम ने कहा, "UBT पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उसके नेता और जनप्रतिनिधि नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। 2029 तक यह पार्टी समाप्त हो जाएगी।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना (UBT) के सांसदों के संभावित पाला बदलने का मामला उनकी पार्टी का आंतरिक विषय है और शिंदे गुट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। संजय राउत ने किया पलटवार, बोले- सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने पार्टी में टूट की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं। राउत ने कहा, "यह पूरी तरह झूठी और निराधार खबर है। चार दिन पहले सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे की बैठक में हिस्सा लिया और उनके नेतृत्व में विश्वास जताया। कुछ नेताओं ने तो व्यक्तिगत रूप से समर्थन का भरोसा भी दिया है।" 'जागते बाघ को कोई नहीं छू सकता' 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना (UBT) को तोड़ना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, "बाघ को पकड़ने के लिए पहले उसे बेहोश करना पड़ता है, फिर उसके पैर बांधने पड़ते हैं। हमारे मामले में ऐसा संभव नहीं है। हमारे बाघ खुलेआम घूम रहे हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं।" शिंदे गुट के दावे से बढ़ी अटकलें शिवसेना एमएलसी Kripal Tumane ने दावा किया है कि शिवसेना (UBT) के सात सांसद उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। हालांकि, संजय राउत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे दावे करने वाले कई लोग हैं, जिनकी बातों का कोई आधार नहीं है। राउत ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से राजनीतिक दलों को तोड़ना भारतीय जनता पार्टी की रणनीति रही है। उद्धव ठाकरे की बैठक से पांच सांसद रहे थे अनुपस्थित सियासी अटकलों को उस समय और बल मिला, जब रविवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई पार्टी सांसदों की बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। बैठक में Arvind Sawant, Anil Desai, Rajabhau Waje और Sanjay Patil शामिल हुए, जबकि अन्य सांसदों ने ऑनलाइन या फोन के माध्यम से बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित राजनीतिक फेरबदल की अटकलों को जरूर हवा दे दी है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0