टेक्नोलॉजी

BSNL के नए प्लान में 200 Mbps और 27 OTT फ्री

BSNL का नया प्लान, 200 Mbps स्पीड और 27 OTT फ्री; 6 महीने तक मिलेगी अतिरिक्त छूट

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
BSNL के नए 200 Mbps फाइबर ब्रॉडबैंड प्लान में 27 OTT प्लेटफॉर्म
BSNL नए फाइबर प्लान में 200 Mbps स्पीड और 27 OTT का ऑफर

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने ब्रॉडबैंड ग्राहकों के लिए नया फाइबर प्लान पेश किया है। इस प्लान में ग्राहकों को 200 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड, 5,000 GB डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और 27 OTT प्लेटफॉर्म का मुफ्त सब्सक्रिप्शन दिया जा रहा है। कंपनी ने इस ऑफर के साथ ग्राहकों को शुरुआती छह महीनों के लिए अतिरिक्त छूट भी देने की घोषणा की है।

 

200 Mbps स्पीड के साथ 5,000 GB डेटा

 

BSNL के नए प्लान में यूजर्स को 200 Mbps तक की डाउनलोड स्पीड मिलती है। प्लान के तहत 5,000 GB डेटा उपलब्ध है। डेटा सीमा पूरी होने के बाद इंटरनेट की स्पीड कम होकर निर्धारित स्तर पर आ सकती है।

इसके साथ ग्राहकों को अनलिमिटेड लोकल और STD वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। यानी एक ही कनेक्शन में तेज इंटरनेट और कॉलिंग दोनों का लाभ लिया जा सकता है।

 

27 OTT प्लेटफॉर्म का मुफ्त सब्सक्रिप्शन

 

इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका OTT बंडल है। ग्राहकों को 27 लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन बिना अलग से भुगतान किए दिया जा रहा है।

इससे फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी कार्यक्रमों और अन्य मनोरंजन सामग्री के लिए अलग-अलग OTT सेवाओं की सदस्यता लेने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध OTT प्लेटफॉर्म और उनकी शर्तें क्षेत्र या ऑफर के अनुसार बदल सकती हैं।

 

छह महीने तक ₹88 की अतिरिक्त छूट

 

BSNL इस प्लान के साथ पहले छह महीनों तक हर महीने ₹88 की अतिरिक्त छूट भी दे रहा है। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार ग्राहकों को ONT डिवाइस मुफ्त दिया जा रहा है।

BSNL के इस नए ऑफर का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करना है, जो एक ही ब्रॉडबैंड कनेक्शन में तेज इंटरनेट के साथ OTT मनोरंजन और अनलिमिटेड कॉलिंग चाहते हैं।

ध्यान दें: प्लान की कीमत, OTT सूची और ऑफर की उपलब्धता सर्किल के अनुसार अलग हो सकती है। कनेक्शन लेने से पहले अपने क्षेत्र में BSNL की मौजूदा योजना और शर्तों की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 25.15 करोड़ से बढ़कर 109.27 करोड़, BharatNet ने भी पकड़ी रफ्तार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा पिछले 12 वर्षों में तेजी से बढ़ा है। केंद्र सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या मार्च 2014 में 25.15 करोड़ थी, जो बढ़कर मार्च 2026 में 109.27 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में इंटरनेट सब्सक्राइबर आधार में करीब 84.12 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।   12 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़े इंटरनेट सब्सक्राइबर   सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2014 में भारत में 25.15 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे। मार्च 2026 तक यह संख्या 109.27 करोड़ पर पहुंच गई। इस तरह 12 वर्षों में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या चार गुना से भी ज्यादा हो गई है। इसी अवधि में देश में टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। मार्च 2014 में करीब 93.3 करोड़ टेलीफोन कनेक्शन थे, जो मार्च 2026 में बढ़कर 133 करोड़ से अधिक हो गए।   BharatNet से गांवों तक पहुंचा ब्रॉडबैंड   ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने में BharatNet परियोजना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुसार 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सर्विस-रेडी बनाया जा चुका है। इसके अलावा 80,472 से अधिक पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoPs) परिचालन में हैं।   BharatNet का उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली है।   4G से 5G तक बदला डिजिटल परिदृश्य   पिछले एक दशक से ज्यादा समय में भारत के डिजिटल परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव आया है। 4G नेटवर्क के व्यापक विस्तार के बाद 5G सेवाओं ने मोबाइल इंटरनेट की गति और उपयोग के नए अवसर खोले हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ UPI, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। हालांकि, देश के सभी हिस्सों में समान गुणवत्ता वाली इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।   आंकड़े बताते हैं डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार   मार्च 2014 से मार्च 2026 के बीच इंटरनेट सब्सक्राइबर्स में करीब 84 करोड़ की वृद्धि भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के बड़े विस्तार को दिखाती है। हालांकि, इन आंकड़ों को इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले विशिष्ट लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति के पास एक से अधिक इंटरनेट कनेक्शन हो सकते हैं।   कुल मिलाकर, 109.27 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर का आंकड़ा भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार को दर्शाता है, जबकि BharatNet के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

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WhatsApp पर फर्जी इनकम टैक्स नोटिस स्कैम
WhatsApp पर फर्जी इनकम टैक्स नोटिस का स्कैम, करदाताओं को साइबर पुलिस ने किया अलर्ट

भुवनेश्वर, एजेंसियां। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने और रिफंड से जुड़े कामकाज के बीच साइबर ठगों ने करदाताओं को निशाना बनाने के लिए नया तरीका अपनाया है। WhatsApp पर इनकम टैक्स विभाग के नाम से फर्जी नोटिस और संदेश भेजे जा रहे हैं। इनमें टैक्स में गड़बड़ी, पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से लिंक खोलने या दस्तावेज डाउनलोड करने को कहा जा रहा है। भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने इस तरह के संदेशों को लेकर करदाताओं को सतर्क किया है।   72 घंटे में कार्रवाई का डर दिखाकर ठगी   फर्जी संदेशों में अक्सर यह दावा किया जाता है कि इनकम टैक्स जांच में कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं और संबंधित व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर जवाब देने या जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। संदेश में कानूनी कार्रवाई, जुर्माना या टैक्स विभाग की जांच का हवाला देकर लोगों में डर पैदा किया जाता है। इसके साथ किसी दस्तावेज, PDF या अन्य फाइल को डाउनलोड करने अथवा किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जा सकता है। यही इस स्कैम का सबसे बड़ा खतरा है।   फर्जी नोटिस में क्या है खतरा?   साइबर ठग फर्जी नोटिस के साथ ऐसे लिंक या अटैचमेंट भेज सकते हैं, जिनका इस्तेमाल फिशिंग, मालवेयर या संवेदनशील जानकारी चुराने के लिए किया जा सकता है। कुछ मामलों में पीड़ित से PAN, बैंक विवरण, पासवर्ड या OTP जैसी जानकारी हासिल करने की कोशिश भी की जा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी विभाग के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर संदेश को असली दिखाने की कोशिश की जाती है। इसलिए केवल नोटिस का फॉर्मेट देखकर उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।   असली इनकम टैक्स नोटिस कैसे जांचें?   करदाताओं को WhatsApp पर आए किसी भी टैक्स नोटिस को सत्यापित करने के लिए सीधे आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करना चाहिए। वहां Pending Actions और e-Proceedings जैसे सेक्शन में संबंधित संचार की जांच की जा सकती है। किसी संदिग्ध संदेश के लिंक पर क्लिक करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल को स्वयं खोलकर जानकारी जांचना ज्यादा सुरक्षित है। फर्जी WhatsApp संदेशों में भेजे गए दस्तावेज या ऐप को डाउनलोड नहीं करना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
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नई दिल्ली, एजेंसियां। Realme ने अपने नए स्मार्टफोन Realme 16x 5G की भारत में लॉन्च तारीख की घोषणा कर दी है। कंपनी यह फोन 12 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे भारतीय बाजार में पेश करेगी। लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन की कई प्रमुख खूबियों का खुलासा किया है, जिनमें 7,000mAh की बड़ी बैटरी, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले और 50MP AI कैमरा शामिल हैं।   7,000mAh बैटरी पर कंपनी का बड़ा फोकस   Realme 16x 5G में 7,000mAh बैटरी दी जाएगी। कंपनी इसे अपने सेगमेंट की सबसे बड़ी बैटरी के तौर पर प्रचारित कर रही है। फोन में 45W फास्ट चार्जिंग मिलने की भी जानकारी सामने आई है। बड़ी बैटरी का सीधा फायदा उन यूजर्स को मिल सकता है जो फोन पर लंबे समय तक वीडियो देखते हैं, गेमिंग करते हैं या लगातार सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।   144Hz डिस्प्ले और Dimensity 6300 प्रोसेसर   फोन में 144Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले दिया जाएगा। Realme के अनुसार स्क्रीन की अधिकतम ब्राइटनेस 1,200 निट्स तक होगी। ज्यादा रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग और एनिमेशन अधिक स्मूथ नजर आने की उम्मीद है। परफॉर्मेंस के लिए फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिए जाने की पुष्टि रिपोर्टों में हुई है। गेमिंग को बेहतर बनाने के लिए इसमें GT BOOST जैसे सॉफ्टवेयर फीचर्स भी दिए जा सकते हैं।   50MP AI कैमरा से होगी फोटोग्राफी   Realme 16x 5G में 50MP AI कैमरा दिया जाएगा। कंपनी फोन को AI आधारित कैमरा फीचर्स के साथ पेश करने की तैयारी में है। हालांकि, कैमरे के सभी सेंसर और फ्रंट कैमरे की पूरी जानकारी लॉन्च के समय स्पष्ट होने की उम्मीद है। फोन को Endurance Brown और Glory White रंगों में पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। साथ ही डिवाइस में IP65 रेटिंग और MIL-STD-810H आधारित मजबूती परीक्षण का उल्लेख किया गया है।   कीमत का खुलासा लॉन्च के दिन   Realme ने अभी Realme 16x 5G की आधिकारिक कीमत घोषित नहीं की है। कुछ रिपोर्टों में इसकी संभावित शुरुआती कीमत करीब ₹17,000-₹20,000 के आसपास बताई जा रही है, लेकिन इसे अभी अंतिम कीमत नहीं माना जाना चाहिए। फोन की बिक्री और उपलब्धता से जुड़ी जानकारी भी लॉन्च के दौरान सामने आएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, इसे Flipkart के जरिए उपलब्ध कराया जा सकता है।

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ChatGPT का बड़ा अपडेट, फ्री यूजर्स को मिलेगी अनलिमिटेड टेक्स्ट चैट

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surbhi अगस्त 7, 2026 0

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