रांची

Jharkhand NIA Court
Jharkhand NIA Court: टेरर फंडिंग और कोयला लेवी वसूली मामले में 12 दोषियों को सजा, 5 को 10 साल की उम्र कैद

रांची। झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को सजा सुनाई है। अदालत ने पांच दोषियों को 10 साल की सश्रम कारावास, छह दोषियों को 8 साल की सश्रम कारावास और एक दोषी को 5 साल की सश्रम कारावास की सजा दी है। यह मामला NIA केस RC-06/2018/NIA/DLI से जुड़ा है।   पांच दोषियों को 10 साल की सजा   अदालत ने मामले में पांच दोषियों को 10-10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं छह दोषियों को आठ-आठ साल और एक अन्य दोषी को पांच साल की सजा मिली है। सजा पाने वालों में टीपीसी के सक्रिय सदस्य बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू, प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा, विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां शामिल हैं।   कोयला कारोबारियों से लेवी वसूलने का आरोप   मामला चतरा के अम्रपाली-मगध कोयला खनन और परिवहन गतिविधियों से जुड़ा है। आरोप था कि कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों और अन्य व्यवसायियों से लेवी वसूलकर प्रतिबंधित टीपीसी के लिए धन जुटाया जाता था।   एनआईए की जांच के अनुसार, संगठन के सदस्य स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलते थे। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी से संबद्ध थे।   21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट   एनआईए ने इस मामले में कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गई थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया।   मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 119 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सुनवाई के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई।   सजा का विवरण   5 दोषी: 10 साल की सश्रम कारावास 6 दोषी: 8 साल की सश्रम कारावास 1 दोषी: 5 साल की सश्रम कारावास   अदालत के इस फैसले के बाद कोयला लेवी वसूली और प्रतिबंधित संगठन के लिए फंडिंग से जुड़े इस मामले में दोषियों को सजा मिली है।

abhishek singh अगस्त 19, 2026 0
Jharkhand Weather
Jharkhand Weather: रांची में 24 घंटे में 56 मिमी बारिश, आज छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

रांची। झारखंड में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और मॉनसूनी बादलों के कारण मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। रांची में पिछले 24 घंटे के दौरान सबसे अधिक 56 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बुधवार को राज्य के छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।   रांची में सामान्य से एक प्रतिशत अधिक बारिश   मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रांची में 1 जून से 19 अगस्त 2026 तक सामान्य बारिश 707.7 मिमी होती है, जबकि इस अवधि में अब तक 713.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यानी राजधानी में बारिश सामान्य से करीब एक प्रतिशत अधिक रही है।   हालांकि, पूरे झारखंड की स्थिति इससे अलग है। राज्य में अब तक सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 19 अगस्त तक झारखंड में सामान्य बारिश 689.8 मिमी के मुकाबले 606.1 मिमी बारिश हुई है।   छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट   मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रांची में बुधवार को आसमान में बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।   बारिश से जनजीवन प्रभावित   लगातार बारिश के कारण शहरों और ग्रामीण इलाकों में कई जगह जलजमाव की स्थिति बन गई है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण नदियों और डैमों का जलस्तर भी बढ़ गया है।   गुरुवार से धीरे-धीरे साफ होगा मौसम   मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसूनी बादल अगले 12 घंटे में झारखंड और बिहार के ऊपर से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेंगे और धीरे-धीरे कमजोर होंगे। इसके प्रभाव से गुरुवार से झारखंड के कई हिस्सों में मौसम साफ होने की संभावना है।   फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को भारी बारिश वाले जिलों में सतर्क रहने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।

abhishek singh अगस्त 19, 2026 0
JSSC CGL Protest
JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों में आक्रोश, परीक्षा रद्द होने के खिलाफ प्रदर्शन तेज

रांची। झारखंड सरकार द्वारा JSSC CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में चयनित और नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।    नौकरी बचाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी   प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद JSSC CGL परीक्षा पास की और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई लोगों को सरकारी नौकरी भी मिल चुकी है। अब परीक्षा रद्द होने से उनकी नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का डर है।   अभ्यर्थियों ने सरकार से सवाल किया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन मेहनत से परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े।   प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च   चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर भी विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नियुक्तियां बहाल करने की मांग उठाई।   कई अभ्यर्थियों ने अपनी व्यक्तिगत परेशानियों का भी जिक्र किया। कुछ ने बताया कि नौकरी मिलने के भरोसे उन्होंने दूसरे रोजगार छोड़े, जबकि कुछ अभ्यर्थी शादी, परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच अब भविष्य को लेकर चिंतित हैं।   सरकार के फैसले के बाद दोहरा आंदोलन   JSSC CGL को लेकर झारखंड में अब स्थिति जटिल हो गई है। एक तरफ परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा पास कर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थी परीक्षा और नियुक्तियां रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं।   राज्य सरकार ने JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के साथ पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच का फैसला लिया है। ऐसे में अब चयनित अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित कानूनी कार्रवाई पर है।   अभ्यर्थियों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी   प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन जारी रखेंगे। कुछ अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वहीं सरकार की ओर से सफल अभ्यर्थियों को न्यायिक रास्ता अपनाने की बात कही गई है।   फिलहाल JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी सुरक्षित रखी जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

abhishek singh अगस्त 19, 2026 0
New Endoscopy-USG machine installed at a super specialty hospital for advanced gastrointestinal diagnosis
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लगी इंडोस्कोपी-यूएसजी मशीन, जल्द शुरू होगी मुफ्त जांच सुविधा

रांची: सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों के लिए बड़ी स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है. अस्पताल में इंडोस्कोपी-यूएसजी मशीन का इंस्टॉलेशन पूरा हो गया है. आने वाले दिनों में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में इस अत्याधुनिक मशीन से मरीजों की जांच शुरू की जायेगी. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह सुविधा मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध करायी जायेगी. नई मशीन के शुरू होने से पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर और जटिल बीमारियों की जांच में काफी मदद मिलेगी. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी अस्पतालों में होने वाले महंगे इलाज और जांच के खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है. एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड दोनों की सुविधा इंडोस्कोपी-यूएसजी आधुनिक जांच तकनीक है, जिसमें एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक पतली ट्यूब की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की बारीकी से जांच की जाती है. इस तकनीक से पेट, पैंक्रियाज, लिवर, पित्ताशय और आंतों से जुड़ी समस्याओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है. इससे डॉक्टरों को बीमारी की सही स्थिति समझने और इलाज की दिशा तय करने में मदद मिलती है. कैंसर और ट्यूमर की शुरुआती पहचान में मदद नई तकनीक की मदद से कैंसर, ट्यूमर और अल्सर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में सहायता मिलेगी. बीमारी का समय रहते पता चलने पर मरीज का इलाज जल्द शुरू किया जा सकता है. खासकर पैंक्रियाटिक कैंसर, लिवर से जुड़ी बीमारियों और पित्ताशय तथा पाचन तंत्र की जटिल समस्याओं की जांच में यह मशीन काफी उपयोगी मानी जाती है. जांच के साथ बायोप्सी की भी सुविधा इंडोस्कोपी-यूएसजी की एक खास सुविधा यह है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रभावित हिस्से से बायोप्सी के लिए सैंपल भी ले सकते हैं. इससे संदिग्ध बीमारी की पुष्टि करने में मदद मिलती है. एक ही प्रक्रिया के दौरान विस्तृत जांच और आवश्यकतानुसार सैंपल लेने की सुविधा मिलने से मरीजों को अलग-अलग जांच के लिए कई जगह जाने की जरूरत कम होगी. निजी अस्पतालों के महंगे खर्च से मिलेगी राहत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. निजी अस्पतालों में ऐसी आधुनिक जांच पर होने वाला भारी खर्च कई मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनता है. मशीन के संचालन के साथ गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों की आधुनिक जांच की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में मशीन से मरीजों की जांच शुरू करने की तैयारी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Fish farmers attending a two-day insurance awareness camp in Ranchi under the PM Matsya Kisan Samridhi Sah-Yojana
झारखंड के मत्स्य पालकों को मिलेगा बीमा का सुरक्षा कवच, रांची में दो दिवसीय जागरूकता शिविर शुरू

रांची: झारखंड के मत्स्य पालकों को जलीय कृषि में होने वाले संभावित नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, शालीमार में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत दो दिवसीय बीमा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आये मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्य और मत्स्य विभाग की योजनाओं से जुड़े सैकड़ों लाभुक शामिल हुए. इस दौरान मत्स्य पालकों को बीमा योजना की जानकारी देने के साथ इसके लिए पंजीकरण कराने की प्रक्रिया भी समझायी गयी. जलीय कृषि में नुकसान से बचाएगा बीमा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जलीय कृषि में कई तरह के जोखिम और नुकसान की आशंका बनी रहती है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लागू बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करेगी. उन्होंने मत्स्य पालकों से योजना का लाभ लेने और बीमा के महत्व को समझने की अपील की. अधिकारियों ने बताया कि बीमा से जुड़कर किसान अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं. NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने अधिक से अधिक पात्र मत्स्य किसानों से NFDP पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराने की अपील की. मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि बीमा योजना से जुड़ने से मत्स्य पालकों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है. उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि राज्य का कोई भी पात्र मत्स्य किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए निदेशालय स्तर से आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र मत्स्य कृषकों को योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना विभाग की प्राथमिकता है. विशेषज्ञों ने बीमा योजना की पूरी प्रक्रिया समझायी दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में एनएफडीबी, हैदराबाद और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी, रांची के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना की विस्तृत जानकारी दी. विशेषज्ञों ने किसानों को बीमा की प्रक्रिया, योजना के लाभ और इससे जुड़ी जरूरी औपचारिकताओं के बारे में बताया. साथ ही किसानों की ओर से पूछे गये सवालों और उनकी शंकाओं का भी समाधान किया गया. अधिकारियों और बीमा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा कार्यक्रम में उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय गुप्ता, उप निदेशक शंभु प्रसाद यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की क्षेत्रीय प्रबंधक आशा प्रसाद और उप प्रबंधक मनीषा टोप्पो समेत विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे. जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य पालकों को बीमा योजना से जोड़ने के साथ उन्हें जलीय कृषि में आने वाले जोखिमों के प्रति जागरूक करना है, ताकि नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना कम करना पड़े.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Damaged petrol pump shed after a powerful blast at Diamond Sales petrol pump in Koker, Ranchi
रांची के कोकर पेट्रोल पंप में जोरदार विस्फोट, दूर तक सुनाई दी आवाज; जांच में जुटी पुलिस

रांची: सदर थाना क्षेत्र के कोकर स्थित डायमंड सेल्स पेट्रोल पंप परिसर में मंगलवार रात अचानक हुए जोरदार विस्फोट से इलाके में अफरा-तफरी मच गयी. धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज आसपास के कई इलाकों तक सुनाई दी. विस्फोट के साथ पेट्रोल पंप परिसर में आग की लपटें भी दिखाई दीं, जिससे वहां मौजूद कर्मचारी और आसपास के लोग सहम गये. घटना रात करीब 8.25 बजे की बतायी जा रही है. प्रारंभिक जांच में पैनल रूम में गड़बड़ी को विस्फोट की संभावित वजह माना जा रहा है. हालांकि, पुलिस ने अभी धमाके के वास्तविक कारण की पुष्टि नहीं की है. मामले की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी. पेट्रोल भरते समय हुआ जोरदार धमाका बताया गया कि जिस समय धमाका हुआ, उस वक्त पेट्रोल पंप पर कर्मचारी वाहनों में ईंधन भर रहे थे. पंप परिसर के पास ही एक तेल टैंकर भी खड़ा था. ऐसे में धमाके के बाद वहां मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया. धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे. कुछ ही देर में पेट्रोल पंप परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गयी. हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. शेड और आसपास की दुकानों को पहुंचा नुकसान विस्फोट के कारण पेट्रोल पंप के शेड का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इसके अलावा पास स्थित वेयरहाउस की टिन भी उखड़ गयी. पेट्रोल पंप परिसर में बने बाथरूम के गेट का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है. धमाके की वजह से गमले समेत बैक ऑफिस की बिल्डिंग के निचले हिस्से और आसपास की कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है. तेज धमाके के कारण आसपास के लोगों में काफी देर तक दहशत बनी रही. पुलिस ने पूरे परिसर को घेरकर शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गयी. पुलिस ने पेट्रोल पंप परिसर को चारों तरफ से घेर लिया और घटना की जांच शुरू कर दी. सुरक्षा को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों को भी दूर किया गया. धमाके की वजह स्पष्ट करने के लिए बम निरोधक दस्ते को भी सूचना दी गयी. टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की जांच शुरू की. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोट किसी तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या पेट्रोल पंप के किसी उपकरण में हुई गड़बड़ी के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह है. जांच रिपोर्ट के बाद सामने आयेगा असली कारण सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. प्रारंभिक तौर पर पैनल रूम में गड़बड़ी की बात सामने आयी है, लेकिन विस्फोट का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. पेट्रोल पंप परिसर में तेल टैंकर मौजूद होने के कारण घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है. हालांकि, समय रहते स्थिति नियंत्रित हो जाने और किसी के घायल नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
BIT Mesra campus in Ranchi where 50% seat quota for Jharkhand students is expected to return next academic session
BIT Mesra में फिर लागू होगा झारखंड के छात्रों का 50% कोटा, अगले सत्र से मिलेगा आरक्षण

रांची: झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है. पत्र के अनुसार, राज्य सरकार बीआइटी मेसरा की कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित कराने को लेकर आवश्यक कदम उठायेगी. यह निर्णय ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जायेगा. इस संबंध में सम्यक विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जायेगी. 2026-27 में खत्म हो गया था होम स्टेट कोटा बीआइटी मेसरा में फिलहाल झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया है. JoSAA 2026 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्थान में नामांकन ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किया जा रहा है. इस बदलाव के बाद झारखंड के विद्यार्थियों को पहले की तरह राज्य कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है. इसे लेकर विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सवाल उठाये गये थे. राज्य सरकार और BIT Mesra के बीच समझौता हुआ था समाप्त विभाग की जानकारी के अनुसार, बीआइटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो वर्ष पहले समाप्त हो गया था. समझौता समाप्त होने के बाद राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया रहा. संस्थान की ओर से समझौते के नवीकरण को लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे गये, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका. इसके बाद संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने का फैसला किया. पहले करीब 650 बीटेक सीटों पर मिलता था लाभ पूर्व की व्यवस्था के तहत बीआइटी मेसरा में बीटेक की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम स्टेट कोटा का लाभ मिलता था. इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित रहती थीं. राज्य में इस कोटे को दोबारा लागू करने की मांग लगातार उठती रही है. अब सरकार के अगले सत्र से 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कराने के निर्णय से झारखंड के विद्यार्थियों को बीआइटी मेसरा में नामांकन के लिए फिर से बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है. विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी मांगी थी जानकारी बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा समाप्त किये जाने का कारण और आगे की व्यवस्था को लेकर विधायक सुरेश कुमार बैठा ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी. विभाग की ओर से विधायक को भी इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी है. राज्य सरकार के ताजा रुख के बाद अब अगले शैक्षणिक सत्र से बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटों की व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद बढ़ गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Model Rural Health Research Unit to be established in Angara, Ranchi, to study health issues in rural and tribal areas
रांची के अनगढ़ा में खुलेगा मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट, आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य समस्याओं पर होगा रिसर्च

रांची: ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में रांची में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से रांची जिले के अनगढ़ा में मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट (MRHRU) सेंटर स्थापित किया जाएगा. बुधवार शाम चार बजे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी इसके भवन का शिलान्यास करेंगे. यह संस्थान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत काम करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की स्वास्थ्य समस्याओं को बेहतर तरीके से समझना और उनके आधार पर उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देना है. ग्रामीण और आदिवासी आबादी की स्वास्थ्य समस्याओं पर होगा अध्ययन मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट की स्थापना आईसीएमआर और एनएमआईआर के संयुक्त प्रयास से की जा रही है. इसके माध्यम से अनगढ़ा और आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े जुटाये जायेंगे. स्थानीय लोगों में पायी जाने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं, बीमारियों और उनके कारणों का अध्ययन कर वैज्ञानिक स्तर पर शोध किया जायेगा. इससे क्षेत्र की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति को समझने और भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है. स्थानीय आबादी को भी मिल सकता है लाभ अनगढ़ा जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्र में इस तरह का अनुसंधान केंद्र स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. शोध के दौरान जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और बीमारियों के पैटर्न को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन को भी मजबूती मिल सकती है. शिलान्यास कार्यक्रम में कई अधिकारी होंगे शामिल मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. कार्यक्रम में खिजरी विधायक राजेश कच्छप, आईसीएमआर के निदेशक डॉ. अनूप अन्विकार, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की उप सचिव धारकत आर. लुईकांग, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और आईसीएमआर-एनएमआईआर फील्ड यूनिट रांची के प्रभारी अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे. इस केंद्र के शुरू होने के बाद रांची के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Heavy rain and rising water levels in rivers and streams disrupt life and coal production in Khelari, Ranchi
खलारी में बारिश का कहर: नदियां-नाले उफान पर, जनजीवन प्रभावित; कोयला उत्पादन 70% घटा

रांची (खलारी)। खलारी प्रखंड में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. तेज बारिश के कारण क्षेत्र की नदियों और पहाड़ी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. सपही, दामोदर और सोनाडुबी नदियां उफान पर हैं. कई इलाकों में जलजमाव और कीचड़ की स्थिति बन गयी है, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. वहीं, लगातार बारिश का सीधा असर कोयला उत्पादन पर भी पड़ा है. सीसीएल एनके एरिया की विभिन्न परियोजनाओं में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम कोयला उत्पादन हुआ है. कॉलोनियों में घुसा बारिश का पानी, लोगों की बढ़ी परेशानी लगातार बारिश के कारण सीसीएल की कई कॉलोनियों में नालियों की गंदगी और पानी सड़कों पर बहने लगा. कई जगह बारिश का पानी क्वार्टरों में भी घुस गया. इससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. जलजमाव के कारण सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया है. वहीं, पतरातू-मैक्लुस्कीगंज मार्ग पर चूरी गांव के समीप अधूरी सड़क के गड्ढों में पानी और कीचड़ जमा हो गया है. इस कारण इस मार्ग पर आवागमन जोखिमपूर्ण हो गया है. खलारी से बाजारटांड़ जाने वाले मार्ग पर भी कई स्थानों पर जलजमाव और फिसलन की स्थिति बनी हुई है. बारिश के कारण स्कूली बच्चों और अभिभावकों को भी काफी दिक्कत हुई. नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण सपही, दामोदर और सोनाडुबी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. इसके अलावा पहाड़ी नालों में भी तेज बहाव देखने को मिल रहा है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. कोयला उत्पादन में 70 प्रतिशत तक गिरावट बारिश का सबसे बड़ा असर खलारी के कोयला उत्पादन पर पड़ा है. सीसीएल एनके एरिया की डकरा, केडीएच और रोहिणी परियोजनाओं में लगातार बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है. सामान्य दिनों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम कोयला उत्पादन दर्ज किया गया है. हाल रोड पर अत्यधिक फिसलन होने के कारण हालपैक डंपरों का परिचालन भी रोक दिया गया है. इससे ओपनकास्ट परियोजनाओं में कोयले के उत्पादन और परिवहन पर असर पड़ा है. मशीनों को सुरक्षित स्थान पर किया जा रहा शिफ्ट ओपनकास्ट खदानों के निचले हिस्सों में पानी भरने के कारण वहां लगे मोटर और पंपों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है. अधिकारियों को मशीनों और अन्य उपकरणों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है. प्रबंधन की ओर से जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है. हालांकि, चूरी भूमिगत खदान में स्थिति सामान्य बतायी गयी है और वहां कामकाज जारी है. रेलवे रैक के परिचालन पर ज्यादा असर नहीं बारिश के बावजूद साइडिंग से कोयला लदे रेलवे रैक के परिचालन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. रेल यातायात निरीक्षक उमेश कुमार के अनुसार, केडीएच और डकरा साइडिंग से पहले की तरह सप्ताह में एक-एक रैक निकल रहा है. आरसीएम राय साइडिंग पहले से बंद है, जबकि राजधर और बचरा साइडिंग से सामान्य से एक-एक रैक कम निकला है. लगातार बारिश जारी रहने पर खलारी में जलजमाव, सड़क संपर्क और कोयला उत्पादन की स्थिति और प्रभावित होने की आशंका है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Damaged bridge over the Radhu River in Silli as rising water levels threaten its structure
राढ़ू नदी पर पुल का बीच का हिस्सा धंसा, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे लोग

रांची/सिल्ली: लगातार हो रही बारिश के कारण सिल्ली प्रखंड में राढ़ू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. पतराहातू से तेतला बड़ाइक टांड़ जाने वाले मार्ग पर नदी के ऊपर बना करीब 10 वर्ष पुराना उच्चस्तरीय पुल अब खतरे में आ गया है. पुल के 18 पिलरों में बीच का हिस्सा बुरी तरह धंस गया है, जिससे इसके कभी भी क्षतिग्रस्त होकर बह जाने की आशंका बनी हुई है. बारिश के बाद बढ़ा नदी का जलस्तर पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश होने के कारण राढ़ू नदी उफान पर है. नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पुल पर भी दबाव बढ़ गया है. वर्तमान में पुल और नदी के पानी के बीच करीब पांच से सात फीट की दूरी ही बची है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही और नदी का जलस्तर और बढ़ा, तो पुल को भारी नुकसान हो सकता है. पुल का बीच का हिस्सा धंसा, बढ़ा खतरा पुल के बीच का हिस्सा धंसने के कारण उसका एक भाग टेढ़ा हो गया है. इसकी जानकारी मिलने के बाद मंगलवार की शाम बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गये. लोगों ने पुल की स्थिति देखकर चिंता जतायी और प्रशासन से तत्काल जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की. हालांकि खतरे के बावजूद मंगलवार को पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद नहीं हुआ. कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार करते नजर आये. वहीं, कुछ ग्रामीणों ने खतरे को देखते हुए वैकल्पिक रास्ते का सहारा लिया. ग्रामीणों में दहशत, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है. पुल का हिस्सा धंसने के बाद भी यदि वाहनों और लोगों की आवाजाही जारी रही, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. बारिश के कारण नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में पुल की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल की तत्काल तकनीकी जांच करायी जाये और खतरे को देखते हुए जरूरत पड़ने पर आवागमन रोक दिया जाये. साथ ही, लोगों की सुरक्षा के लिए मौके पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
CID officials investigating alleged JPSC exam irregularities in Jharkhand
JPSC Scam: CID ने 3 आरोपियों को 5 दिन की रिमांड पर लिया, खुलेंगे परीक्षा घोटाले के और राज? देवघर-गिरिडीह से 2 नए आरोपी गिरफ्तार

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है. मामले की पड़ताल कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने पूर्व में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है. एजेंसी अब इनसे गहन पूछताछ कर परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े नेटवर्क, एजेंटों और अन्य संभावित आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी. CID थाना कांड संख्या 16/2026 में गिरफ्तार मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव को अदालत से पांच दिनों की रिमांड मिली है. रिमांड अवधि के दौरान जांच टीम आरोपियों से परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं को लेकर पूछताछ करेगी. 5 दिन की रिमांड में आरोपियों से होगी गहन पूछताछ तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेने के बाद CID की जांच टीम अब मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं की पड़ताल करेगी. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. पूछताछ के दौरान आरोपियों से परीक्षा में सेटिंग, अभ्यर्थियों से संपर्क, आर्थिक लेन-देन और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी. आरोपियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है. देवघर और गिरिडीह से 2 नए आरोपी गिरफ्तार इधर, CID ने एक अन्य मामले में भी कार्रवाई करते हुए देवघर और गिरिडीह से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई कांड संख्या 01/25, दिनांक 1 जनवरी 2025 से जुड़े मामले में की गयी है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवघर जिले के कोदारकोसो निवासी अक्षय कुमार तिवारी और गिरिडीह जिले के हथगढ़ निवासी सुषमा कुमारी के रूप में हुई है. दोनों से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है. क्या सामने आएगा परीक्षा घोटाले का बड़ा नेटवर्क? JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. अब CID की लगातार कार्रवाई के बाद इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना बढ़ गयी है. जांच एजेंसी रिमांड पर लिये गये आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में गड़बड़ी के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं. साथ ही एजेंसी उन लोगों की भी पहचान करने की कोशिश करेगी, जिन्होंने कथित तौर पर इस पूरे मामले में किसी तरह की भूमिका निभाई. सफेदपोशों तक पहुंचेगी जांच? मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच की कड़ियां किसी बड़े नेटवर्क या प्रभावशाली लोगों तक पहुंचती हैं. CID की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के पीछे छिपे लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है. फिलहाल पांच दिन की पुलिस रिमांड को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है. अब आरोपियों से पूछताछ के बाद कौन से नए नाम सामने आते हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Jharkhand CM Hemant Soren meeting Congress leaders amid the JSSC exam controversy in Ranchi
JSSC परीक्षा विवाद पर बोले CM हेमंत सोरेन- युवाओं के हितों की हर हाल में होगी रक्षा, छात्रों ने स्थगित किया CM आवास घेराव

रांची: झारखंड में JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा का भरोसा दिया है. मंगलवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. इस दौरान छात्रहित में कैबिनेट की विशेष बैठक में लिए गए फैसलों को लेकर मुख्यमंत्री का आभार जताया गया. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का सरकार का फैसला विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण कदम है. वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हितों की हर हाल में रक्षा की जाएगी. छात्रों के भविष्य की रक्षा सरकार की प्राथमिकता- CM मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश समेत मंत्रियों और विधायकों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है. सीएम ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार पूरी गंभीरता के साथ फैसले ले रही है. छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. 20 अगस्त का CM आवास घेराव स्थगित सरकार के फैसले के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने फिलहाल 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है. हालांकि, आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द करना उनकी मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन CBI जांच की मांग अभी बाकी है. जब तक इस मांग पर फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रखने की बात छात्रों ने कही है. JSSC CGL नियुक्त अभ्यर्थी भी उतरे सड़क पर दूसरी ओर, JSSC CGL की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले से प्रभावित नवनियुक्त कर्मचारी भी आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि परीक्षा में यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत दोष के नियुक्त अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है. कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें प्रोजेक्ट भवन सचिवालय में काम करने से रोका जा रहा है. इसको लेकर वे सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा- छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए JSSC विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनना अच्छी बात है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार की बातचीत के रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश की सराहना की. राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सवाल पूछें तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए और देश के हर छात्र के साथ खड़े रहने की बात कही. अब आगे क्या होगा? फिलहाल सरकार के फैसले के बाद छात्र आंदोलन में एक नया मोड़ आया है. एक तरफ परीक्षा रद्द होने से आंदोलनकारी छात्रों को राहत मिली है, वहीं CBI जांच को लेकर उनका दबाव बना हुआ है. दूसरी ओर JSSC CGL से नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के फैसले, CBI जांच की मांग और नियुक्त अभ्यर्थियों की कानूनी चुनौती पर सभी की नजर रहेगी.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Heavy rain in Ranchi as Jharkhand weather is expected to clear from Thursday
झारखंड में बारिश का दौर थमेगा, रांची में 24 घंटे में 56 मिमी बारिश; कल से साफ होने लगेगा मौसम

रांची: बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मॉनसून के कारण झारखंड में बारिश का दौर जारी है. मंगलवार को राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई. रांची में पिछले 24 घंटे के दौरान 56 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जो राज्य में सबसे अधिक रही. लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी रही और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले कुछ घंटों में निम्न दबाव का क्षेत्र झारखंड और बिहार के ऊपर से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. इसके असर से गुरुवार से राज्य के कई हिस्सों में मौसम साफ होने की संभावना है. रांची में सामान्य से ज्यादा हुई बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रांची में एक जून से 19 अगस्त 2026 तक सामान्य से करीब एक प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गयी है. इस अवधि में रांची में सामान्य बारिश 707.7 मिमी होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 713.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है. मंगलवार को हुई तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर पानी जमा हो गया. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. आज इन छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को झारखंड के गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. इन छह जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बारिश के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गयी है. वहीं, रांची समेत अन्य जिलों में भी बादल छाये रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है. नदियों और डैमों का बढ़ा जलस्तर लगातार हो रही बारिश का असर राज्य के जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है. कई नदियों और डैमों का जलस्तर बढ़ा है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी बारिश के कारण कई जगहों पर रास्तों में पानी भर गया है. बारिश के कारण शहरों में यातायात भी प्रभावित हुआ. कई प्रमुख सड़कों पर जलजमाव की स्थिति देखने को मिली, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई. गुरुवार से धीरे-धीरे साफ होगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसूनी बादल अगले 12 घंटे में झारखंड और बिहार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ेंगे. इसके बाद सिस्टम कमजोर होने की संभावना है. इसका असर झारखंड के मौसम पर भी पड़ेगा और गुरुवार से कई इलाकों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी. हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बादल छाये रहने की संभावना बनी रह सकती है. झारखंड में अब भी सामान्य से 12% कम बारिश बारिश के बावजूद पूरे झारखंड में इस मानसून अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गयी है. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 1 जून से 19 अगस्त 2026 तक राज्य में सामान्य बारिश 689.8 मिमी होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 606.1 मिमी बारिश हुई है. इस तरह राज्य में अभी भी सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है. आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जल संकट और खेती की स्थिति पर भी असर डाल सकती हैं.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Newly appointed JSSC CGL ASOs protest outside Project Bhawan in Ranchi amid heavy rain
JSSC CGL नियुक्ति रद्द करने के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरे ASO, प्रोजेक्ट भवन के बाहर भारी बारिश में प्रदर्शन

रांची: JSSC CGL के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (ASO) का आक्रोश बढ़ गया है. मंगलवार को बड़ी संख्या में ASO प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के मुख्य गेट के सामने पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे. भारी बारिश के बावजूद कर्मचारी घंटों तक सड़क पर डटे रहे और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति हासिल की है और कई महीनों से सरकारी सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी का खामियाजा चयनित और कार्यरत अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है. कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. प्रोजेक्ट भवन में प्रवेश से रोका गया मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में नवनियुक्त ASO प्रोजेक्ट भवन पहुंचे. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सचिवालय के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. यहां तक कि प्रोजेक्ट भवन में पहले से कार्यरत कुछ ASO को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गयी. इसके बाद नेपाल हाउस, एफएफपी बिल्डिंग और अन्य कार्यालयों में कार्यरत सहायक प्रशाखा पदाधिकारी भी प्रोजेक्ट भवन के बाहर पहुंच गये. देखते ही देखते सचिवालय के मुख्य गेट के सामने कर्मचारियों की भीड़ जमा हो गयी. कई कर्मचारी सड़क पर बैठकर विरोध करने लगे. 'जिन्होंने गलती की, उन्हें सजा मिले, हमारी नौकरी क्यों जाए?' प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने मेहनत और चयन प्रक्रिया के बाद नौकरी हासिल की, उन्हें बेरोजगार करना उचित नहीं है. कर्मचारियों का कहना था कि "जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें सजा दीजिए, लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी क्यों छीनी जा रही है?" उन्होंने कहा कि उनके परिवारों की आर्थिक जिम्मेदारी अब इसी नौकरी से जुड़ी हुई है. 'हमारी बहाली रद्द होने का कोई आदेश नहीं मिला' प्रदर्शन कर रहे ASO लगातार यह भी कहते रहे कि उन्हें नियुक्ति रद्द होने का कोई व्यक्तिगत आदेश या नोटिस नहीं मिला है. उनका कहना था कि जब तक उन्हें आधिकारिक तौर पर कोई आदेश नहीं मिलता, वे खुद को कार्यरत कर्मचारी मानते हैं. कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी अटेंडेंस बनाने के लिए प्रोजेक्ट भवन के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया. इसको लेकर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कुछ देर नोकझोंक की स्थिति भी बनी. कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों में हुई नोकझोंक ASO सचिवालय में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हें रोक रहे थे. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस हुई. कर्मचारियों ने कहा कि वे सचिवालय के ही अधिकारी हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. बाद में सुरक्षाकर्मियों की ओर से प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और मुख्य गेट को जाम नहीं करने की अपील की गयी. साथ ही स्थिति बिगड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गयी. 'हमारी नियुक्ति कोर्ट के आदेश के बाद हुई है' सहायक प्रशाखा पदाधिकारी जन्मजय सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें नियुक्ति रद्द करने से संबंधित कोई नोटिस नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई है और कार्मिक विभाग की ओर से उन्हें नियुक्त किया गया था. उन्होंने कहा कि कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं. प्रशासन से भी उन्होंने अपील की कि आंदोलन को लेकर किसी तरह की टकराव की स्थिति पैदा न की जाए. प्रोजेक्ट भवन के बाहर जारी रहेगा धरना ASO ने अब प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के सामने लगातार धरना देने की तैयारी शुरू कर दी है. कर्मचारियों की ओर से मौके पर टेंट लगाने की व्यवस्था की जा रही है. उनका कहना है कि जब तक सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति सरकार की ओर से आने वाले आधिकारिक आदेश और बातचीत के आधार पर तय की जाएगी. जरूरत पड़ने पर वे कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे. बारिश में भी घंटों डटे रहे कर्मचारी प्रदर्शन के दौरान मौसम भी कर्मचारियों के हौसले को नहीं तोड़ सका. लगातार बारिश के बीच ASO छाता और रेनकोट लेकर सड़क पर खड़े रहे. कई कर्मचारी पूरी तरह भीग गये. कर्मचारियों का कहना था कि वे अपनी नौकरी और भविष्य बचाने के लिए सुबह से भूखे-प्यासे प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं. अब JSSC CGL से नियुक्त कर्मचारियों के आंदोलन और सरकार के फैसले को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर है. साथ ही संभावित न्यायिक चुनौती के बाद इस मामले में अदालत का रुख भी महत्वपूर्ण होगा.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
JSSC and JPSC candidates concerned after cancellation of recruitment exams and CID investigation in Jharkhand
JSSC CGL समेत 22 परीक्षाएं रद्द, 23 की होगी CID जांच; 1975 कर्मियों समेत कई नियुक्तियां संकट में

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने TDPL के पूर्ण या आंशिक रूप से शामिल रहने वाली 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इनमें JSSC CGL (10/2023) और JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल हैं. वहीं, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश जारी किया गया है. सरकार की ओर से यह फैसला सीआईडी/एसआईटी जांच में सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर लिया गया है. 18 अगस्त को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की. फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, जो रद्द की गयी परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर सरकारी सेवा में कार्यरत हैं. JSSC CGL से नियुक्त 1975 कर्मियों की नौकरी पर संकट JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद इस परीक्षा से चयनित करीब 1975 कर्मचारी सबसे बड़े असमंजस में हैं. ये अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से अलग-अलग सरकारी विभागों में सेवा दे रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़ा हो गया है. कई चयनित अभ्यर्थियों ने पहले ही सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा में योगदान दिया है. कई अभ्यर्थियों ने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के पद पर योगदान किया था. JPSC 11वीं-13वीं के 342 अफसरों का भविष्य भी अधर में सरकार के आदेश का असर JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा पर भी पड़ा है. इस परीक्षा में सफल होकर करीब 342 अधिकारी वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की नियुक्ति और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं. इसके अलावा 64 सीडीपीओ और 56 फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि जिन परीक्षाओं के माध्यम से इनकी नियुक्ति हुई, उन्हें सरकार ने रद्द कर दिया है. 23 परीक्षाओं की अब CID करेगी जांच सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश दिया है. इनमें कई पुरानी JPSC परीक्षाएं भी शामिल हैं. जांच के दायरे में फूड एनालिस्ट, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, सिविल जज, सिविल सेवा परीक्षा, असिस्टेंट इंजीनियर, डेंटल डॉक्टर समेत कई पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं. जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की भी पहल JPSC और JSSC में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई जल्द पूरी कराने के लिए सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आग्रह करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित करने की भी बात कही गई है. सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में निगरानी बढ़ाना और भविष्य में गड़बड़ियों को रोकना है. रद्द की गई परीक्षाओं में कई बड़ी भर्तियां शामिल रद्द की गयी 22 परीक्षाओं में JPSC की कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां शामिल हैं. इनमें सिविल जज जूनियर डिविजन, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एपीपी, सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ और झारखंड पात्रता परीक्षा जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. सरकार के इस फैसले के बाद जहां परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में संतोष है, वहीं नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गयी है. अब इस पूरे मामले में CID जांच, सरकार के अगले कदम और अदालत में संभावित कानूनी चुनौती पर सबकी नजर रहेगी.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
JSSC candidates protesting over different EWS and OBC-NCL certificate rules in recruitment exams
JSSC में प्रमाण पत्र को लेकर दोहरा नियम? एक परीक्षा में नियुक्ति, दूसरी में 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोका

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाने का मामला सामने आया है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक ही तरह के प्रमाण पत्र को लेकर आयोग ने अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग नियम लागू किए. इसका सबसे ज्यादा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति की उम्मीद लगायी थी. अभ्यर्थियों के अनुसार, महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा में अद्यतन ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र को आधार मानकर कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गयी. वहीं, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में इसी तरह के प्रमाण पत्र को लेकर 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है. अब अभ्यर्थी आयोग से सवाल कर रहे हैं कि जब प्रमाण पत्र को लेकर नियम समान हैं, तो अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग मापदंड क्यों अपनाये जा रहे हैं. विज्ञापन में प्रमाण पत्र की शर्त स्पष्ट नहीं होने का आरोप अभ्यर्थियों का कहना है कि JSSC की ओर से जारी नियुक्ति विज्ञापनों में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती. आवेदन के समय भी कई मामलों में संबंधित प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया जाता है. ऐसे में अभ्यर्थियों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि आवेदन की अंतिम तिथि, प्रमाण पत्र सत्यापन की तारीख या नियुक्ति के समय किस वर्ष का प्रमाण पत्र अनिवार्य माना जायेगा. अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया कई वर्षों तक चलती है. इस दौरान प्रमाण पत्र की वैधता और वित्तीय वर्ष बदल जाता है. ऐसे में आयोग को विज्ञापन जारी करते समय ही प्रमाण पत्र की तारीख और वैधता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देना चाहिए, ताकि बाद में अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना न करना पड़े. महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र पर मिली नियुक्ति महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा में अद्यतन ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र के आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा किये जाने की बात सामने आयी है. बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी थे, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था, लेकिन उनके पास बाद के वर्ष का वैध प्रमाण पत्र था. ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की गयी. कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी मिल चुका है. हालांकि, बाद में विभागीय स्तर पर कुछ नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे और संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस भी जारी किया गया. इससे अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गयी है. माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोका दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में प्रमाण पत्र को लेकर अलग स्थिति देखने को मिली. अलग-अलग विषयों में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाये गये 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है. अभ्यर्थियों से आवेदन जमा करने के समय और प्रमाण पत्र सत्यापन के समय से संबंधित वित्तीय वर्ष का ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. उर्दू विषय के एक अभ्यर्थी ने भी दावा किया कि उससे आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया. ऐसे में अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब एक परीक्षा में बाद के वर्ष का अद्यतन प्रमाण पत्र स्वीकार करते हुए नियुक्ति की अनुशंसा की गयी, तो दूसरी परीक्षा में इसी तरह के प्रमाण पत्र को आधार बनाकर रिजल्ट रोकना किस नियम के तहत किया गया. एक ही आयोग में अलग-अलग नियम क्यों? अभ्यर्थियों का मुख्य सवाल यही है कि JSSC की सभी नियुक्ति परीक्षाओं के लिए प्रमाण पत्र को लेकर एक समान नियम क्यों नहीं है? अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आवेदन की अंतिम तिथि तक का प्रमाण पत्र अनिवार्य है, तो यह शर्त हर नियुक्ति परीक्षा के विज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए. वहीं, अगर नियुक्ति के समय अद्यतन प्रमाण पत्र को मान्य किया जाता है, तो सभी परीक्षाओं में यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए. उनका कहना है कि अलग-अलग मापदंड के कारण एक ही परिस्थिति वाले अभ्यर्थियों के साथ अलग व्यवहार हो रहा है. इससे परीक्षा पास करने के बावजूद कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटक गयी है. लंबी भर्ती प्रक्रिया से बढ़ रही परेशानी JSSC की नियुक्ति प्रक्रिया अक्सर आवेदन से लेकर परीक्षा, रिजल्ट, प्रमाण पत्र सत्यापन और नियुक्ति तक लंबी चलती है. इस दौरान ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र से जुड़े वित्तीय वर्ष में बदलाव हो जाता है. ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को भर्ती प्रक्रिया के हर चरण में प्रमाण पत्र की जरूरत और उसकी वैधता को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए. नियम अस्पष्ट रहने पर बाद में अभ्यर्थियों को दस्तावेजों के कारण नियुक्ति से बाहर होने का डर बना रहता है. अभ्यर्थियों ने की समान नियम लागू करने की मांग प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद के बीच अभ्यर्थियों ने JSSC से पूरे मामले की समीक्षा करने और सभी नियुक्ति परीक्षाओं में एक समान नियम लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि किसी परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र को मान्य किया गया है, तो समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों को दूसरी परीक्षा में अलग मापदंड के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए. अब सवाल यह है कि JSSC इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में रोके गये 50 से अधिक अभ्यर्थियों के रिजल्ट को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है. भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समान नियम की मांग के बीच यह मामला आयोग के लिए भी एक अहम परीक्षा बन गया है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षण की खबर
BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर 50% सीटें होंगी आरक्षित, अगले सत्र से लागू होगी व्यवस्था

रांची। झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर से 50% सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की तैयारी है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गई है।   अगले सत्र से 50% सीटों पर झारखंड के छात्रों का हक   उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से BIT Mesra की कुल सीटों में से 50% सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित करना सुनिश्चित करेगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। इस संबंध में सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।   2026-27 में खत्म हो गया था होम-स्टेट कोटा   दरअसल, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए लागू 50% होम-स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद संस्थान में दाखिले ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किए जा रहे हैं। इससे झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला राज्य कोटा प्रभावित हुआ था।   समझौता खत्म होने के बाद बदली व्यवस्था   जानकारी के मुताबिक, BIT Mesra और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार की ओर से संस्थान को मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी बकाया हो गया। संस्थान ने समझौते के नवीकरण के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका। इसके बाद 2026-27 सत्र में सभी सीटों पर ऑल इंडिया कोटे के तहत नामांकन लेने का फैसला किया गया।   पहले करीब 650 BTech सीटों पर मिलता था लाभ   पहले व्यवस्था के तहत BIT Mesra में BTech की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम-स्टेट कोटे का लाभ मिलता था। इसके अलावा BC-I और BC-II वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित थीं। अब राज्य सरकार के नए फैसले से अगले शैक्षणिक सत्र से झारखंड के विद्यार्थियों को फिर से 50% सीटों का लाभ मिलने की उम्मीद है।   विधायक ने भी मांगी थी जानकारी   BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा खत्म किए जाने के मामले में विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। विभाग की ओर से उन्हें कोटा खत्म होने के कारण और भविष्य की योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से झारखंड के विद्यार्थियों के लिए BIT Mesra में दाखिले के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
JSSC परीक्षा में EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर विवाद
JSSC का दोहरा नियम? एक में नियुक्ति, दूसरी परीक्षा में रिजल्ट रोका

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई, जबकि दूसरी परीक्षा में आवेदन वर्ष के प्रमाण पत्र को लेकर 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया। अभ्यर्थियों ने आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सभी नियुक्ति परीक्षाओं में प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर एक समान नियम लागू करने की मांग की है।   महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति   अभ्यर्थियों के मुताबिक, महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में अद्यतन EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई। दावा है कि कुछ ऐसे अभ्यर्थियों की भी नियुक्ति की अनुशंसा हुई, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र नहीं था। इनमें कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया। हालांकि, बाद में कुछ नियुक्तियों को विभागीय स्तर पर रोक दिया गया और संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस भी जारी किए गए।   माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से अधिक का रिजल्ट रोका   दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में अलग-अलग विषयों के 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट प्रमाण पत्र को लेकर रोक दिए जाने का दावा किया गया है। अभ्यर्थियों के अनुसार, प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान उनसे आवेदन जमा करने के समय और प्रमाण पत्र सत्यापन के समय, दोनों वित्तीय वर्षों के EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। उर्दू विषय में सत्यापन के लिए पहुंचे एक अभ्यर्थी से भी आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी EWS प्रमाण पत्र मांगे जाने की बात सामने आई है।   विज्ञापन में प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्टता नहीं   अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति परीक्षा के विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि प्रमाण पत्र किस वित्तीय वर्ष का होना चाहिए। आवेदन के समय भी प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया जाता है। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर आवेदन के समय प्रमाण पत्र की मांग नहीं की गई, तो नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम चरण में अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों लागू किए जा रहे हैं।   क्या है EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र का नियम?   EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र निर्धारित वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी किए जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया लंबी होने की स्थिति में आवेदन के समय की पात्रता और नियुक्ति के समय की स्थिति की जांच अलग-अलग चरणों में की जा सकती है। इसी वजह से कई भर्तियों में आवेदन वर्ष के साथ-साथ नियुक्ति या प्रमाण पत्र सत्यापन के समय का अद्यतन प्रमाण पत्र भी मांगा जाता है। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही आयोग की अलग-अलग परीक्षाओं में नियमों की व्याख्या अलग तरीके से नहीं होनी चाहिए।   अभ्यर्थियों ने की समान नियम लागू करने की मांग   JSSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले भी अभ्यर्थी विसंगतियों के आरोप लगाते रहे हैं। अब प्रमाण पत्र को लेकर सामने आए इस मामले में अभ्यर्थियों ने आयोग से स्थिति स्पष्ट करने और सभी नियुक्ति परीक्षाओं में एक समान एवं पारदर्शी नियम लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा पास करने के बाद केवल प्रमाण पत्र के अलग-अलग मानदंड के कारण किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
रांची के कोकर चौक के पास धमाके के बाद बम निरोधक दस्ते की जांच
रांची के कोकर चौक के पास तेज धमाका, दुकानों और घरों के टूटे शीशे; बम निरोधक दस्ता जांच में जुटा

रांची। राजधानी रांची के कोकर चौक इलाके में मंगलवार शाम एक गोदाम के पास अचानक तेज धमाका होने से अफरातफरी मच गई। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास स्थित पेट्रोल पंप, दुकानों और कई घरों के शीशे टूट गए। घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।   इलेक्ट्रिक रूम में हुआ धमाका   सदर थाना प्रभारी कुलदीप के मुताबिक, इलाके में अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। जांच में पता चला कि धमाका गोदाम और पेट्रोल पंप के बीच स्थित इलेक्ट्रिक रूम में हुआ। यह इलेक्ट्रिक रूम पेट्रोल पंप से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई दुकानों और घरों के शीशे टूट गए। पेट्रोल पंप के शीशे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।   बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया   घटना की गंभीरता को देखते हुए झारखंड जगुआर के बम निरोधक दस्ते (BDS) को मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाके की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इलेक्ट्रिक रूम में आखिर किस वजह से इतना तेज विस्फोट हुआ। साथ ही गोदाम में किसी तरह की विस्फोटक सामग्री मौजूद होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।   धमाके की वजह अभी साफ नहीं   फिलहाल धमाके के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस और बम निरोधक दस्ते की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल मरांडी की CBI जांच की मांग
JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- CBI जांच से ही मिलेगा छात्रों को न्याय

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षाएं रद्द करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए, ताकि कथित गड़बड़ी, नौकरी खरीद-फरोख्त और इसके पीछे शामिल लोगों का पता चल सके।   परीक्षाएं रद्द करना समाधान नहीं- बाबूलाल   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बीजेपी शुरू से ही परीक्षाएं रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार परीक्षा रद्द करने का फैसला लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि छात्रों की मुख्य मांग कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच है। उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई रिपोर्टों में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।   CID जांच पर भी उठाए सवाल   बीजेपी नेता ने CID की जांच पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि CID पहले इन मामलों की जांच कर चुकी है और अदालत के समक्ष ऐसी रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी या नौकरी की बिक्री से इनकार किया गया था। बाबूलाल ने कहा कि अगर पहले की जांच पर ही सवाल उठ रहे हैं तो उसी एजेंसी से दोबारा जांच कराने से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद कम है। उन्होंने जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की।   JSSC चेयरमैन को हटाने पर सवाल   बाबूलाल मरांडी ने JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों का हवाला देते हुए आयोग के चेयरमैन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब आयोग लगातार विवादों में है तो उसके चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कथित तौर पर परीक्षा में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों को बचाने की कोशिश कर रही है।   सरकार पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप   नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लाई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की मांग का स्थायी समाधान करना नहीं, बल्कि आंदोलन को शांत करना है। बाबूलाल ने यह भी दावा किया कि परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर सरकार को अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार को परीक्षा रद्द करने के पर्याप्त आधार और सबूत अदालत के सामने रखने होंगे।   अन्नपूर्णा देवी ने भी साधा निशाना   वहीं, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी JPSC-CGL परीक्षा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। बोकारो में उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने में काफी देर की। उनके मुताबिक, छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे और कथित धांधली की CBI जांच की मांग कर रहे थे। अन्नपूर्णा देवी ने सवाल उठाया कि जब छात्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं तो राज्य सरकार इससे क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।   'CBI जांच से ही सामने आएगा पूरा सच'   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CBI जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी किसने खरीदी, नौकरी बेचने वाले कौन थे और पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए बीजेपी CBI जांच की मांग पर कायम रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
Devendra Nath Mahto Hunger Strike
16 दिन की भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म किया, सरकार के फैसले का किया स्वागत

रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मंगलवार को अपना अनशन खत्म कर दिया। राज्य सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों व चयन प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। रांची सदर अस्पताल में जूस पीकर उन्होंने अनशन तोड़ा।   सरकार के फैसले को बताया बड़ी जीत   देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित आंदोलन के दौरान साथ देने वाले छात्रों, समर्थकों और मीडिया का आभार जताया।   महतो ने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हालांकि, उनका जोर भर्ती प्रक्रिया में आगे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर भी रहा है।   सदर अस्पताल में तोड़ा अनशन   लंबी भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत को लेकर लगातार चिंता बनी हुई थी। मंगलवार को रांची के सदर अस्पताल में उनका अनशन समाप्त कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान जयराम महतो ने उन्हें जूस पिलाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने देवेंद्र महतो समेत अन्य प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य जांच भी की।   CBI जांच की मांग अभी भी मुद्दा   JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बावजूद छात्र आंदोलन की CBI जांच की मांग का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ प्रदर्शनकारी अभी भी पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।   झारखंड सरकार के फैसले के बाद देवेंद्र नाथ महतो की 16 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त हो गई है। अब आंदोलन से जुड़े छात्रों की नजर सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं की नई व्यवस्था और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर उठाए जाने वाले अगले कदमों पर है।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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