रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एकसाथ 27 नक्सलियों के सरेंडर पर कहा कि लोग तेजी से मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। यह सरकार मुख्यालय से नहीं, बल्कि राज्य के सुदूर गांवों से चल रही है। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात कहकर राज्य में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच बिल्कुल स्पष्ट है, हर व्यक्ति का विकास और हर व्यक्ति की भागीदारी। सरकार की नजर और आवाज गांव के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही है। हर व्यक्ति सरकार के साथ जुड़ रहा है। आज उसी का परिणाम है कि लोग तेजी से मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं। शहीदों के सपनों का झारखंड इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दुर्गा सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण ऐसे ही कर्मठ युवाओं और आंदोलनकारियों की शहादत व लंबे संघर्ष की बदौलत हुआ है। अपने महान नेताओं पर पूरे राज्य को गर्व है और उनके दिखाएं रास्ते पर चलकर ही एक सशक्त और भयमुक्त झारखंड का निर्माण हो रहा है। हमें अपने नेताओं पर गर्व है। इनके मार्गदर्शन और संघर्ष की बदौलत मंजिल पाई। अलग राज्य बना। उन सभी लोगों की शहादत और संघर्ष की बदौलत ये राज्य है। हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
रांची। नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत झारखंड पुलिस और CRPF को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड में पहली बार एक साथ 27 नक्सलियों ने भारी संख्या में हथियार के साथ सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले 27 नक्सलियों में 25 भाकपा माओवादी संगठन और दो जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के नक्सली शामिल है। सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों में आठ नक्सलियों के ऊपर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित है। इन सभी नक्सलियों के खिलाफ कुल 426 नक्सल मामले दर्ज है। डीजीपी के समक्ष सरेंडर गुरुवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी अभियान, एडीजी मनोज कौशिक सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने इन सभी नक्सलियों को झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों के द्वारा आधिकारिक तौर पर सरेंडर कराया गया। ये पुलिस अधिकारी रहे मौजूद आईजी पंकज कंबोज, आईजी प्रभात कुमार, आईजी सुनील बंसल, आईजी असीम विक्रांत मिंज, आईजी अनूप बिरथरे, आईजी मयूर पटेल कन्हैयालाल, डीआईजी, इन्द्रजीत महथा, डीआईजी मनोज रतन चौथे, डीआईजी कार्तिक एस, शैलेंद्र वर्णवाल, एसएसपी राकेश रंजन, एसपी हरिश बिन जमा, एसपी श्री सौरभ समेत कई अधिकारी उपस्थित थे। नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार पुलिस को सौंपे इस आत्मसमर्पण के साथ ही नक्सलियों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, मैगजीन और हजारों राउंड जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे हैं। जिनमें एक इंसास एलएमजी, पांच इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन रायफल और एक पिस्टल शामिल है। इसके अलावा 31 मैगजीन और 2987 राउंड कारतूस भी इन नक्सलियों के द्वारा पुलिस को सौंपे गए है। सरेंडर करनेवाले नक्सलियों के रैंक – विशेष क्षेत्र समिति सदस्य: 07 – एरिया कमांडर: 07 – सक्रिय कैडर: 13 सरेंडर करने वाले भाकपा माओवादियों की सूची – करण तियू (निवासी गोइल केरा चाईबासा) एरिया कमिटी मेम्बर, 2 लाख इनामी, चाईबासा में 29 मामले दर्ज। – गादी मुण्डा उर्फ गुलशन (निवासी: बुण्डू, रांची), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा, सरायकेला, रांची और खूंटी मिलाकर कुल 48 मामले दर्ज। – नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया (निवासी: अड़की, खूंटी), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा और सरायकेला में कुल 38 मामले दर्ज। – रेखा मुण्डा उर्फ जयंती (निवासी: बुण्डू, रांची) विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा और सरायकेला में कुल 18 मामले दर्ज। – सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल (निवासी: गोइलकेरा, चाईबासा), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा में रिकॉर्ड 123 मामले दर्ज। – दर्शन उर्फ बिंज हांसदा (निवासी: चाईबासा), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, चाईबासा में 14 मामले दर्ज। – सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा, (निवासी: छोटानगरा,चाईबासा),विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा में 13 मामले दर्ज। – बासुमती जेराई उर्फ बासू (निवासी: किरीबुरू, चाईबासा), एरिया कॉमेडनर इनाम: 1 लाख रुपया, चाईबासा में 14 मामले दर्ज। – बैजनाथ मुण्डा: (निवासी: तमाड़, रांची), एरिया कमांडर चाईबासा में 4 मामले दर्ज। – रघु कायम उर्फ गुणा (निवासी: मुफसिल, चाईबासा), एरिया कमांडर, चाईबासा में 19 मामले दर्ज। – किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका: (निवासी: टोंटो, चाईबासा), एरिया कमांडर, चाईबासा में 11 मामले दर्ज। – राम दयाल मुण्डा: (निवासी: तमाड़, रांची), एरिया कमांडर रैंक, सरायकेला और चाईबासा में कुल चार मामले दर्ज। – इसके अलावा 13 अन्य सक्रिय कैडर्स ने भी आत्मसमर्पण किया है। इनमें वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, डांगुर बोइपाई, बसंती देवगम, मुन्नीराम मुण्डा, अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई उर्फ निति हेंब्रम और लादू तिरिया शामिल हैं। इन कैडर्स पर भी चाईबासा और अन्य थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। JJMP के 1 इनामी समेत 2 नक्सलियों ने किया सरेंडरः – सचिन बैक: (अपर घाट, गुमला) 5 लाख का इनामी, 6 मामले गुमला में दर्ज है। – श्रवण गोप: (कलिगा, गुमला) 8 मामले गुमला में दर्ज है। झारखंड में सक्रिय 3 भाकपा माओवादी नक्सली ने दूसरे राज्यों में किया सरेंडर – विश्वनाथ उर्फ संतोष उर्फ सिलाय: (निवासी: पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश) – स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य चाईबासा में 13 मामले दर्ज है। इन्होंने तेलंगाना में सरेंडर किया। – पूनम उर्फ जोभा उर्फ भवानी उर्फ सुजाता: (पति: विश्वनाथ, निवासी: पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश), रिजनल कमेटी सदस्य, चाईबासा में 11 मामले दर्ज। इन्होंने भी तेलंगाना में सरेंडर किया। – समर दा उर्फ मधाई पात्रा: (निवासी: पश्चिम बंगाल) – जोनल कमेटी सदस्य, चाईबासा में 3 मामले दर्ज। एक सप्ताह पहले पश्चिम बंगाल में किया सरेंडर। झारखंड में सक्रिय 15 लाख इनामी महिला नक्सली बंगाल में गिरफ्तारः – 15 लाख इनामी बेला सरकार उर्फ आशा दी उर्फ दीपा सरकार: (पति: श्याम सिंकू, निवासी: नादिया मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल), रिजनल कमेटी सदस्य,चाईबासा में 3 मामले दर्ज। बाकी बचे नक्सलियों से मुख्य धारा में लौटने की अपील पुलिस प्रशासन के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में कुख्यात नक्सलियों और शीर्ष कमेटी के सदस्यों का मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। सरकार की आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली अब लगातार हथियार डाल रहे हैं। पुलिस ने अन्य भटके हुए नक्सलियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है।
रांची। झारखंड के पुलिस थानों को अब मामला दर्ज होने के बाद 60 से 90 दिनों में अनुसंधान पूरा करना होगा। राज्य में नए आपराधिक कानूनों को धरातल पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय अब सख्त हो गया है। डीजीपी द्वारा सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को इस संबंध में निर्देश जारी किया गया है। आज की बैठक अहम आज यानी 21 मई को दोपहर तीन बजे पुलिस आईजी अभियान की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ऑनलाइन समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्य के नए आपराधिक कानूनों के परिप्रेक्ष्य में पुलिस की तैयारियों और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। 5 मुख्य बिंदुओं पर होगी समीक्षा – मोबाइल फोनः नए कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिसकर्मियों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की प्रगति की जांच होगी। – ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोडिंग: डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए ‘ई-साक्ष्य’ ऐप और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी। – 60 से 90 दिनों में जांच पूरी करना: नए कानूनों के प्रावधानों के तहत मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए पुलिस को 60 से 90 दिनों के भीतर अपनी जांच अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी, इसकी कार्ययोजना पर बात होगी। – हर जिले में CCTNS ऑपरेटर: क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर जिले में ऑपरेटरों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। – CCTNS में पुराने डेटा की एंट्री: पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और डेटा को डिजिटल सिस्टम में दर्ज करने को लेकर धनबाद एसएसपी द्वारा एक विशेष प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।
रांची। सिविल कोर्ट ने गुरुवार को डीएवी स्कूल, कडरू के प्रिंसिपल एमके सिन्हा को दोषी करार दिया है। उन्हें कल शुक्रवार को सजा सुनाई जायेगी। मामले में अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया। नर्स ने लगाए थे गंभीर आरोप मामला मई 2022 का है, जिसमें स्कूल की एक महिला स्टाफ नर्स ने एमके सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का आरोप था कि प्रिंसिपल बीपी चेक करने के बहाने उन्हें अपने कमरे में बुलाते थे और अश्लील हरकत करते थे। साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाते थे। इन आरोपों के आधार पर पीड़िता ने अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एमके सिन्हा फरार हो गए थे। करीब चार दिनों तक फरार रहने के बाद पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हाईकोर्ट से मिली जमानत हुई रद्द बाद में 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। फिर पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत रद्द करने की मांग की। मामले पर सुनवाई करते हुए 20 जून 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली बेल सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश के बाद उन्होंने सिविल कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद से वह जेल में बंद हैं।
रांची। वेटिंग टिकट की लगातार बढ़ती संख्या और यात्रियों को कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रांची रेल मंडल ने बड़ी पहल की है। मंडल ने सात प्रमुख ट्रेनों में करीब 20 अतिरिक्त कोच स्थायी रूप से जोड़े जाएंगे। स्थाई रूप से लगेंगे अतिरिक्त कोच अब तक त्योहारों या भीड़ के समय अतिरिक्त कोच अस्थायी रूप से लगाए जाते थे, लेकिन इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद इन ट्रेनों में स्थायी तौर पर कोच बढ़ा दिए जाएंगे। लंबी वेटिंग की समस्या कम होगी रेल मंडल की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार विभिन्न ट्रेनों में थर्ड एसी, स्लीपर और एसी चेयर कार कोच बढ़ाए जाएंगे। इससे लंबी वेटिंग की समस्या कम होगी और यात्रियों को अधिक संख्या में कन्फर्म टिकट मिल सकेंगे। जल्द ही इसकी सेवा यात्रियों को मिलेगी। इन ट्रेनों में बढ़ाए गए हैं अतिरिक्त कोच प्रस्ताव के तहत 12877 रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस में वर्तमान 20 एलएचबी कोच की जगह 21 कोच किए जाएंगे। इसमें एक अतिरिक्त थर्ड एसी कोच जोड़ा जाएगा। 18640 रांची-आरा एक्सप्रेस में वर्तमान 15 एलएचबी कोच की संख्या बढ़ाकर 20 की जाएगी। इसमें एक स्लीपर और चार थर्ड एसी कोच जोड़े जाएंगे। 18619 रांची-गोड्डा एक्सप्रेस में वर्तमान 20 आईसीएफ कोच की जगह 22 कोच किए जाएंगे। इसमें दो अतिरिक्त थर्ड एसी कोच लगाए जाएंगे। 18622 हटिया-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस में 21 एलएचबी कोच की संख्या बढ़ाकर 22 की जाएगी। इसमें एक अतिरिक्त स्लीपर कोच जोड़ा जाएगा। रांची-गोड्डा वाया भागलपुर एक्सप्रेस में 21 कोच 18603 रांची-गोड्डा वाया भागलपुर एक्सप्रेस में वर्तमान 17 आईसीएफ कोच की जगह 21 कोच किए जाएंगे। इसमें एक स्लीपर और तीन थर्ड एसी कोच लगाए जाएंगे। 18631 रांची-चोपन एक्सप्रेस में 14 आईसीएफ कोच की संख्या बढ़ाकर 19 की जाएगी। इसमें चार थर्ड एसी और एक स्लीपर कोच बढ़ाने का प्रस्ताव है। 18635 रांची-सासाराम एक्सप्रेस में वर्तमान 14 आईसीएफ कोच की जगह 15 कोच किए जाएंगे। इसमें एक अतिरिक्त एसी चेयर कार कोच लगाया जाएगा।
रांची। बिजली की समस्या से जूझ रही राजधानी रांची सुधार के प्रयास तेज हो गये हैं। बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए बिजली विभाग अब ग्रिडों की क्षमता बढ़ाने जा रहा है। शहर के तीन बड़े ग्रिड स्टेशन नामकुम, कांके और हटिया की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इससे आने वाले दिनों में लोगों को बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्याओं से काफी राहत मिलेगी। रांची में तेजी से आबादी बढ़ रही है। नए अपार्टमेंट, कॉलोनियां और कमर्शियल बिल्डिंग लगातार बन रहे हैं। इसके साथ ही गर्मी बढ़ने पर AC, कूलर और दूसरे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से शहर के कई इलाकों में बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है। कई बार ओवरलोडिंग की वजह से फॉल्ट और बिजली बाधित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। तीन बड़े ग्रिड होंगे अपग्रेड बिजली विभाग की योजना के तहत नामकुम, कांके और हटिया ग्रिड स्टेशनों को अपग्रेड किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इन ग्रिडों में ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि ज्यादा लोड संभाला जा सके। मौजूदा समय में हटिया और नामकुम ग्रिड में 50 MVA क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर लगे हैं। अब इनमें से कुछ ट्रांसफॉर्मरों को 80 MVA क्षमता में अपग्रेड करने की तैयारी है। इससे कुल बिजली आपूर्ति क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या रांची के कई इलाकों में गर्मी के दिनों में लो-वोल्टेज की समस्या आम हो जाती है। लोगों को पंखा, कूलर और मोटर तक सही तरीके से नहीं चलने की शिकायत रहती है। ग्रिड की क्षमता बढ़ने के बाद बिजली सप्लाई ज्यादा स्थिर होगी। इससे ट्रिपिंग कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज मिलने की उम्मीद है। खासकर शाम के पीक आवर में राहत मिल सकती है। बिजली विभाग सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि आने वाले मानसून को देखते हुए भी तैयारी कर रहा है। बारिश के दौरान कई बार लाइन फॉल्ट और ओवरलोडिंग की दिक्कत बढ़ जाती है। ऐसे में पहले से ग्रिड मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नामकुम, कांके और हटिया ग्रिड रांची शहर की बिजली व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनकी क्षमता बढ़ने से राजधानी के लाखों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
रांची। राजधानी रांची के कोकर इलाके से 9 मई से लापता 18 माह की मासूम अदिति पांडेय की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर सदर थाना के समक्ष JLKM ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी ने सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के द्वारा एसएसपी राकेश रंजन के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में जेएलकेएम पार्टी के केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो, अदिति की माता अंकिता पांडेय, पिता मनीष पांडेय और बड़ी संख्या में महिला, सामाजिक कार्यकर्ता, युवाओं एवं आम नागरिकों ने भाग लेकर मासूम बच्ची की सुरक्षित वापसी की मांग को बुलंद किया। कानून व्यवस्था पर सवाल इस दौरान झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि पिछले 12 दिनों से एक 18 माह की मासूम बच्ची का लापता रहना अत्यंत गंभीर विषय है। यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज और कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व महासचिव एवं युवा मोर्चा के संस्थापक स्वर्गीय दुर्ग सोरेन की 17वीं पुण्यतिथि दुर्गा सोरेन चौक रांची पर मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और स्व. सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे, मुश्ताक आलम, अंतू तिर्की, उमेश यादव, रामशरण विश्वकर्मा, तारकेश्वर महतो, वीरू साहू, अभय ढूंढो, सुनील टीका, शांति चामू, बाग कुजूर, पवन तिर्की, बिहारी गोप, उत्तम यादव एवं पवन जेडिया समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रांची। आने वाले चुनाव में मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मैप्ड इलेक्टर लिस्ट प्रकाशित करने का फैसला लिया है। अगर आपका नाम पुरानी मतदाता सूची से नई सूची में सही तरीके से मैप नहीं हुआ है, तो आने वाले चुनाव में दिक्कत हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मेप्ड इलेक्टोरल लिस्ट प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराये यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत जारी की जाएगी। इस दौरान जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से अब तक मैप नहीं हो पाया है, वे अपने संबंधित बूथ पर जाकर सूची में नाम जांच सकेंगे और मौके पर मौजूद बीएलओ की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे। सूची सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी। भविष्य में हो सकती है परेशानी ऐसे मतदाता, जिनका नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से वर्तमान सूची में सही तरीके से मैप नहीं हो पाया है, उन्हें भविष्य में मतदान के दौरान परेशानी हो सकती है। इसी को देखते हुए यह विशेष व्यवस्था की जा रही है। मतदाता अपने संबंधित मतदान केंद्र पर पहुंच कर सूची में अपना नाम जांच सकेंगे। मौके पर मौजूद बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ जरूरी जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया पूरी कराने में भी मदद करेंगे। नाम जुड़वाने के लिए ये हैं विकल्प 1. एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा : बीएलओ द्वारा दिया गया फॉर्म सही जानकारी के साथ भरकर जमा करना होगा। पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। यदि 2003 की सूची में नाम नहीं मिलता है, तो मतदाता को अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें आधार, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण, स्कूल सर्टिफिकेट या अन्य स्वीकृत दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। 2. माता-पिता के 2003 रिकॉर्ड का उपयोग : अगर खुद का नाम 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन माता या पिता का नाम उस सूची में है तो उनके पुराने वोटर रिकॉर्ड का अंश लगाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ऐसे मामलों में माता-पिता के लिए अलग दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। 3. दावेदारी का मौका मिलेगा : जिनका डेटा मैप नहीं होगा, उन्हें निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से नोटिस दिया जा सकता है। इसके बाद दस्तावेज देकर दावा पेश कर सकते हैं। 4. दावा-आपत्ति अवधि में आवेदन कर सकते हैं : ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद नाम जोड़ने, सुधार कराने या आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाता है। क्यों जरूरी है यह जांच मतदाता सूची में नाम सही तरीके से मैप नहीं होने पर भविष्य में वोट डालने, नाम सत्यापन या चुनाव संबंधी अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है। इसलिए जिला प्रशासन ने अपील की है कि लोग इस विशेष अभियान का लाभ उठाकर समय रहते अपना नाम सत्यापित करा लें। क्या करें मतदाता • 23 मई को अपने मतदान केंद्र पर जाएं • सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सूची जांचें • यदि नाम यूएन-मैप्ड इलेक्टोरल लिस्ट में नहीं मिले तो तुरंत बीएलओ से संपर्क करें • जरूरी जानकारी व दस्तावेज देकर मैपिंग पूरी कराएं • आधार कार्ड व मतदाता पहचान पत्र लेकर जाएं सभी सातों विस के बूथों पर रहेगी व्यवस्था उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर रांची जिले के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों - तमाड़ विधानसभा क्षेत्र, सिल्ली विधानसभा क्षेत्र, खिजरी विधानसभा क्षेत्र, रांची विधानसभा क्षेत्र, हटिया विधानसभा क्षेत्र, कांके विधानसभा क्षेत्र और मांडर विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर यह व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों तथा बीएलओ को मतदान केंद्रों पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है। साथ ही शिक्षा और समाज कल्याण विभाग को भी अपने अधीन कार्यरत बीएलओ एवं पर्यवेक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
रांची। राजधानी रांची में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ स्कूटी चलाते दिखे। उनके पीछे स्कूटी पर सवार थे केंद्रीय उड्डयन मंत्री। दरअसल रांची एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे उड्डयन मंत्री को संजय सेठ ने स्कूटी की सवारी कराई। उन्हें स्कूटी से एयरपोर्ट से काजू बगान हेहल स्थित अपने आवास पर ले गए। वहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। फिर उन्हें लेकर एयरपोर्ट पहुंचे। स्कूटी संजय सेठ चला रहे थे। पीछे-पीछे सुरक्षाकर्मी और समर्थक चल रहे थे।
रांची। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उड़ान यात्री कैफे शुरू हो गया है। अब यहां यात्रियों को 10 रुपए में चाय मिलेगी। वहीं 20 रुपए में कॉफी और 20 रुपए में स्नैक्स मिलेगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापू ने इसका उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने किड्स प्ले जोन और फ्लाइब्रेरी (लाइब्रेरी) का भी उद्घाटन किया। अवसर आउटलेट भी शुरू रांची एयरपोर्ट पर अवसर आउटलेट भी शुरू की गई है, जहां झारखंड के सोहराई पेंटिंग और अन्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि रांची से जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होगी। दुमका, हजारीबाग, चाईबासा और डालटनगंज को भी जल्दी ही हवाई सेवा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
रांची। झारखंड में बालू खनन पर 10 जून से लगने वाली एनजीटी की रोक से पहले सरकार ने बालू संकट से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार अधिक से अधिक बालू निकालकर सुरक्षित स्टॉक तैयार करने पर ज्यादा जोर है, ताकि मानसून के दौरान निर्माण कार्य प्रभावित न हो। इसके लिए विभिन्न जिलों के डीसी ने नौ महत्वपूर्ण बालू घाटों की लीज डीड पर हस्ताक्षर कर दिए है। इन घाटों के संचालन के लिए कंसेंट टू एस्टेब्लिस (सीटीई) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 444 घाटों में 299 की नीलामी पूरी झारखंड में कुल 444 बालू घाट हैं। इनमें से 299 घाटों की नीलामी हो चुकी है। इनमें से 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें नौ घाटों की लीज डीड फाइनल हो चुकी है। जिन 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिली है, उनका कुल क्षेत्रफल 192.2 हेक्टेयर है। इनमें सबसे अधिक 85.40 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले बालू घाट पूर्वी सिंहभूम में है। यहां गुड़ाबांदा अंचल के कोरेयामोहनपाल और स्वर्णरेखा नदी क्षेत्र के घाट सबसे बड़े हैं। इसके बाद बाकारो में 30.86 हेक्टेयर और हजारीबाग में 15.26 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले घाट शामिल हैं। यहां बनाए गए स्टॉकयार्डः गोड्डा: लोचनी, राजोन कला, मखनी रांची: गाड़ीहालमद बोकारो: खेतको जमशेदपुर: कोरेयामोहनपाल व स्वर्णरेखा 2 करोड़ सीएफटी बालू स्टॉक करने का लक्ष्य राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के निर्देश के अनुसार आमतौर पर एक हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले बालू घाट की क्षमता करीब पांच लाख सीएफटी होती है। इसे सात-आठ महीने में निकाला जा सकता है। इस लिहाज से लीज डीड वाले इन घोटालें की कुल वार्षिक क्षमता करीब 3.5 से 5 करोड़ सीएफटी आंकी गई है। चूंकि मानसून के दौरान नदियों से बालू निकालने पर एनजीटी की रोक रहती है। इसलिए यह रोक लागू होने से पहले करीब दो करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
रांची। UPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को रांची में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और प्रमंडलीय अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस संबंध में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त Manoj Kumar की अध्यक्षता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारियों की जानकारी बैठक में आयुक्त के सचिव अलोक कुमार ने परीक्षा कार्य में प्रतिनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान प्रत्येक केंद्र पर प्रशासनिक निगरानी रखी जाएगी और सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश आयुक्त मनोज कुमार ने सभी केंद्र अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। दो पालियों में आयोजित होगी परीक्षा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। पहला पेपर सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक लिया जाएगा। रांची के 36 परीक्षा केंद्रों पर कुल 16,531 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा अवधि में अधिकारी रहेंगे अलर्ट आयुक्त ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के एक दिन पहले से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सभी अधिकारी अलर्ट मोड में रहेंगे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है।
रांची। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य पुलिस सेवा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। बता दे एक साथ 201 डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बुधवार, 20 मई को जारी अधिसूचना में कई जिलों के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), यातायात डीएसपी, साइबर सेल, विशेष शाखा और पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसे राज्य में लंबे समय बाद हुआ सबसे बड़ा पुलिस प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। कई जिलों में बदले गए एसडीपीओ सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार, कई जिलों के एसडीपीओ को नई जगहों पर तैनात किया गया है। गढ़वा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी नीरज कुमार को हटिया का डीएसपी बनाया गया है। वहीं, पुलिस मुख्यालय रांची में पदस्थापित दीपक कुमार को बेड़ो का डीएसपी बनाया गया है। हजारीबाग में झारखंड सशस्त्र पुलिस-7 में तैनात मनीष चंद्र लाल को सिल्ली का डीएसपी नियुक्त किया गया है। बसिया के एसडीपीओ नाजीर अख्तर को धनबाद मुख्यालय-2 भेजा गया है। बरही के एसडीपीओ अजित कुमार विमल को बाघमारा का अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा विशेष शाखा में कार्यरत लिलेश्वर महतो को निरसा और प्रकाश चंद्र महतो को सिंदरी का एसडीपीओ बनाया गया है। सरकार ने कई जिलों में लंबे समय से तैनात अधिकारियों को भी बदला है ताकि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा लाई जा सके। रांची और धनबाद में बड़े स्तर पर बदलाव राजधानी रांची और धनबाद जिले में भी व्यापक फेरबदल किया गया है। आलोक कुमार सिंह को सीसीआर रांची, अजय आर्यन को डीएसपी मुख्यालय-2 रांची और रामाकांत रजक को यातायात-4 रांची में तैनात किया गया है। ताराश सोरेन को यातायात-2 रांची की जिम्मेदारी मिली है, जबकि प्रदीप कुमार-2 को साइबर डीएसपी रांची बनाया गया है। धनबाद में कुमार विनोद को मुख्यालय-4 का डीएसपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा ट्रैफिक, साइबर सेल और विशेष शाखा में भी कई अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है। कानून-व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश सरकार के इस फैसले को राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध पर निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यापक बदलाव किया गया है। सरकार का मानना है कि नई तैनाती से पुलिस प्रशासन अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द नई जगह पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य की पुलिस व्यवस्था और अपराध नियंत्रण प्रणाली में इसका असर साफ दिखाई देगा।
रांची। झारखंड में गुरुवार को अब तक का सबसे बड़ा एकल-दिवसीय माओवादी आत्मसमर्पण होने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में सक्रिय लगभग 25 बड़े और खूंखार माओवादी सुरक्षा बलों के सामने हथियार डालेंगे। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 महिला माओवादी भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे राज्य में नक्सल अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं। सूत्रों के मुताबिक सूत्रों के मुताबिक आत्मसमर्पण के दौरान माओवादी बड़ी संख्या में हथियार भी जमा करेंगे। लंबे समय से सुरक्षा बलों की कार्रवाई और लगातार बढ़ते दबाव के कारण माओवादी संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण झारखंड में नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। सारंडा में सिर्फ मिसिर बेसरा बचेगा इन 25 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद सारंडा क्षेत्र में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी Misir Besra ही प्रमुख रूप से बच जाएगा। बताया जा रहा है कि उसके साथ करीब 15 माओवादी और मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि लगातार घिरते जाने के कारण वह भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकता है। सारंडा लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि पिछले एक वर्ष में सुरक्षा बलों ने यहां बड़े स्तर पर अभियान चलाकर माओवादियों की कमर तोड़ दी है। लगातार अभियान से कमजोर हुआ नक्सल नेटवर्क सुरक्षा बलों ने हाल के महीनों में कई मुठभेड़ों में दो दर्जन से अधिक माओवादियों को मार गिराया है। जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन और खुफिया कार्रवाई के चलते माओवादी संगठन दबाव में आ गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का भी असर दिख रहा है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास, आर्थिक सहायता और मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण झारखंड में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का संकेत है और इससे क्षेत्र में विकास और शांति की संभावनाएं मजबूत होंगी।
रांची। गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने “संघे शक्ति कलियुगे” की अवधारणा को सामने रखते हुए श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ को महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि लिज्जत पापड़ केवल एक व्यावसायिक संस्था नहीं, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति, आत्मविश्वास और सहयोग का जीवंत आंदोलन है। इस मॉडल ने लाखों महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का काम किया है। विधायक के अनुसार, सहकारी मॉडल समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने की बड़ी क्षमता रखते हैं। विकेन्द्रित उत्पादन मॉडल की सराहना कल्पना सोरेन ने “डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन” यानी विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल महिलाओं को घर या स्थानीय स्तर पर रहकर काम करने का अवसर देता है। इससे महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बनती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलती है। उनके अनुसार, कुटीर और गृह उद्योग गांवों में रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की मांग विधायक ने सुझाव दिया कि लिज्जत पापड़ जैसे सफल सहकारी मॉडलों को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और लघु उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए। इससे अधिक संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा और ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका का अवसर मिलेगा। उन्होंने सरकार, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र से समन्वित प्रयास करने की अपील की। सोशल मीडिया पर उनका यह संदेश तेजी से वायरल हो रहा है और महिला सशक्तिकरण व ग्रामीण विकास को लेकर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
रांची। दुनिया के कई देशों में इन दिनों दो खतरनाक वायरस इबोला और हंतावायरस को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, वहीं कुछ देशों में हंतावायरस संक्रमण के केस भी दर्ज किए गए हैं।फिलहाल भारत में इन दोनों वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इनके लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी जरूर होनी चाहिए। इबोला और हंतावायरस में क्या है अंतर? विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस का ट्रांसमिशन एक से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है, लेकिन हंतावायरस में ऐसा होने की आशंका कम रहती है। हंतावायरस उतनी तेजी से नहीं फैलता है। जबकि इबोला फैल सकता है। चिंता की बात यह है कि अभी तक हंतावायरस की कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। जबकि इबोला की वैक्सीन बन चुकी है। इबोला एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है।वहीं हंतावायरस एक ऐसा संक्रमण है जो आमतौर पर चूहों के संपर्क से फैलता है। संक्रमित चूहों के यूरिन, मल या लार के कण हवा में मिलकर इंसानों तक पहुंच सकते हैं। बता दे सबसे पहले एक क्रूज शिप पर इस वायरस का आउटब्रेक हुआ था। तब से इसके केस लगातार बढ़ रहे हैं। इबोला के प्रमुख लक्षण • तेज बुखार • सिरदर्द • कमजोरी • उल्टी और दस्त • शरीर में दर्द • गंभीर मामलों में इंटरनल ब्लीडिंग हंतावायरस के लक्षण • तेज बुखार • मांसपेशियों और शरीर में दर्द • अत्यधिक थकान • सांस लेने में दिक्कत • कमजोरी और चक्कर बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय • भोजन से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं • चूहों और गंदगी वाले इलाकों से दूरी बनाएं • संक्रमित देशों की यात्रा से बचें • बुखार, सांस की तकलीफ या कमजोरी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें • विदेश से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग पर ध्यान दें वैक्सीन और वायरस के बढ़ते खतरे को लेकर क्या बोले डॉक्टर प्रमोद? डॉ. प्रमोद (General Physician) ने बताया कि इबोला वायरस के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हंतावायरस के लिए अभी तक कोई प्रभावी वैक्सीन नहीं बनी है। वह कहते है कि हालांकि भारत में फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संक्रमण को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे बताया कि हंतावायरस चूहों से फैलता है वहीं इबोला human to human फैलता है। बचाव के लिए मास्क पहने। चूहों के होल्स दिखे तो झाड़ू नहीं लगाए। हाथ धोकर खाए। हाइजीन् रहे उनका मानना है कि सही जानकारी, सतर्कता और समय पर इलाज से इन खतरनाक वायरसों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रांची। झारखंड में तकनीक और संवेदनशीलता के मेल से सुशासन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पद सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं और शासन में पारदर्शिता लाने के लिए इसका बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। राज्य के किसी भी कोने से 'एक्स' (ट्विटर) पर शिकायत मिलते ही मुख्यमंत्री सीधे संबंधित जिले के आला अधिकारियों को वहीं पर कार्रवाई के निर्देश जारी कर देते हैं। इस डिजिटल पहल का असर ये है कि जो गरीब परिवार महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, उनकी एक सिसकी पर अब पूरा प्रशासनिक महकमा खुद कागजातों का पुलिंदा लेकर उनके घर पहुंच रहा है। हेमंत के लिए सोशल मीडिया बना डिजिटल जनता दरबार झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन काफी समय से सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं, लेकिन सरकार में आने के बाद उन्होंने इसे जन-शिकायत निवारण का मुख्य जरिया बना लिया है। वह न केवल शिकायतों को गंभीरता से पढ़ते हैं, बल्कि अधिकारियों को टैग करके सीधे एक्शन रिपोर्ट भी सोशल मीडिया पर सबूत के साथ मांगते हैं। मुख्यमंत्री की इस सक्रियता ने ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालयों तक के अधिकारियों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने के लिए मजबूर कर दिया है। 'सरकार' की एक ट्वीट पर घर पहुंची सरकार सोशल मीडिया पर एक शख्स ने सीएम हेमंत सोरेन को टैग करते हुए ट्वीट किया, 'पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई और मां रांची के रिम्स में जिंदगी और मौत से लड़ रही है। इधर घर पर तीन बच्चे हैं, जिनकी स्थिति देखकर रोना आ रहा है। मामला बोकारो जिला के चंदनकियारी के बरमसिया ओपी क्षेत्र का है। बीते दिनों दुबेकांटा के पास एक सड़क दुर्घटना में सपन मांझी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पत्नी लक्ष्मी देवी गंभीर रूप से घायल हो गई। उनका इलाज रिम्स में चल रहा है। परिवार में बेटी पल्लवी और बेटे विमल मांझी, विद्युत मांझी बचे हैं। जिनकी सिसकियां भावुक कर रही हैं। जिस गाड़ी से हादसा हुआ उसने 50 हजार रुपये मुआवजा देने का वादा किया था, लेकिन अब वो भी मुकर गया। बच्चों को मदद की जरूरत है।' इसके बाद हेमंत सोरेन ने इस ट्वीट को बोकारो के डीसी को टैग करते हुए लिखा, 'अविलम्ब संज्ञान लें। माता के इलाज एवं बच्चों के उचित देखभाल सुनिश्चित करते हुए सूचना दें।' फिर सोशल मीडिया पर बोकारो के डीसी ने बताया, 'माननीय सर, चंदनकियारी बीडीओ ने अभी बच्चों के घर जाकर परिवार की स्थिति का जायजा लिया एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से आच्छादित करने की प्रक्रिया शुरू की है। बच्चों को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत तत्काल 50 किलोग्राम अनाज, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत ₹2 लाख बीमा राशि, मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत प्रति बच्चे को ₹4000 प्रतिमाह, 18 वर्ष पूर्ण होने पर पीएम आवास योजना एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चंदनकियारी में नामांकन एवं सावित्री बाई फुले योजना से सहायता सुनिश्चित कराने की कार्रवाई की जा रही है। पात्रता अनुसार राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना एवं मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के तहत भी लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। देवघर में 'सरकार' ने लिया संज्ञान सोशल मीडिया एक्स पर देवघर के गौरी की कहानी को एक शख्स ने शेयर किया। उसने लिखा, 'सड़क हादसे में उजड़ा परिवार, मुआवजे के इंतजार में बीता एक साल। देवघर के मधुपुर प्रखंड के बिल्ली गांव निवासी गौरी देवी अपने दो मासूम बच्चों के साथ पिछले एक साल से सरकारी सहायता की आस लगाये बैठी हैं। पति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद परिवार पूरी तरह आर्थिक संकट में डूब गया है, 22 दिसंबर 2024 को मंटू मांझी ने घर पर ही दम तोड़ दिया। गौरी देवी को उम्मीद थी कि सड़क दुर्घटना मुआवजा मिलने से बच्चों का भविष्य किसी तरह संभल जायेगा, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। 9 मार्च 2026 को आवश्यक दस्तावेजों के साथ अंचल कार्यालय सारठ में मुआवजा के लिए आवेदन जमा कराया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहा यह परिवार अब सरकारी सहायता और प्रशासनिक पहल का इंतजार कर रहा है। वर्चुअल दुनिया से होते हुए गौरी की बात झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन तक भी पहुंची। फिर उन्होंने देवघर उपायुक्त को सोशल मीडिया एक्स पर ही निर्देश दे दिया। उन्होंने लिखा, उक्त मामले की जांच कर गौरी देवी जी और उनके बच्चों को शीघ्र मदद पहुंचाते हुए सूचित करें। यह भी सुनिश्चित करें कि परिवार को जरूरी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा हो। साथ ही मामले में हुई देरी का स्पष्टीकरण मांगते हुए भी सूचित करें।
रांची। रांची के मारवाड़ी कॉलेज की ऑटोनॉमी खत्म हो गई है। 17 वर्षों तक स्वायत्त संस्थान के रूप में संचालित होने के बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेज रांची यूनिवर्सिटी की पारंपरिक व्यवस्था में लौट जाएगा। इसका सीधा असर कॉलेज के 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। अब परीक्षा, रिजल्ट, सिलेबस, मूल्यांकन प्रणाली और अकादमिक कैलेंडर तक का नियंत्रण फिर से रांची यूनिवर्सिटी के हाथों में होगा। रांची विवि की परीक्षा व्यवस्था सवालों मे रांची यूनिवर्सिटी की परीक्षा, रिजल्ट व्यवस्था और सेशन लेट को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मारवाड़ी कॉलेज जैसे बड़े संस्थान की स्वायत्तता समाप्त होना केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि एक बार फिर शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। मारवाड़ी कॉलेज लंबे समय से झारखंड में ऑटोनॉमस शिक्षा मॉडल का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। यही कारण रहा कि कॉलेज ने राज्य के अन्य संस्थानों की तुलना में अपनी अलग शैक्षणिक पहचान बनाई। लेकिन, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉलेज दोबारा उसी शैक्षणिक संकट में फंसेगा, जिससे वह पहले गुजर चुका है? क्योंकि, पिछली बार ऑटोनॉमी समाप्त होने के बाद कॉलेज का सत्र भी रांची यूनिवर्सिटी की तरह अव्यवस्थित हो गया था। 2009 में पहली बार मिली थी ऑटोनॉमी मारवाड़ी कॉलेज को पहली बार वर्ष 2009 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी ने ऑटोनॉमस स्टेटस दिया था। उस समय इसे झारखंड में उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया था। ऑटोनॉमी मिलने के बाद कॉलेज को कई शैक्षणिक अधिकार मिले। कॉलेज ने स्वयं परीक्षा आयोजित करनी शुरू की, अपने स्तर पर सिलेबस अपडेट और डिजाइन किया तथा कई नए प्रोफेशनल और जॉब ओरिएंटेड कोर्स शुरू किए। इसका सबसे बड़ा असर परीक्षा और रिजल्ट व्यवस्था पर पड़ा। 2021 में पहली बार खत्म हुई थी कॉलेज की ऑटोनॉमी पहली बार वर्ष 2021 में समाप्त हुई थी। तब कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा था। परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया रांची यूनिवर्सिटी की व्यवस्था से जुड़ते ही सत्र गड़बड़ा गया था।बाद में जब कॉलेज को दोबारा ऑटोनॉमी मिली, तब कॉलेज प्रबंधन ने परीक्षा कैलेंडर को व्यवस्थित करने और सत्र नियमित करने पर विशेष फोकस किया। क्या पड़ेगा असर परीक्षा कार्यक्रम अब रांची यूनिवर्सिटी तय करेगी। सिलेबस, प्रश्नपत्र और मूल्यांकन प्रक्रिया अब रांची विश्वविद्यालय के अधीन होगी। रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया केंद्रीकृत होगी। मारवाड़ी कॉलेज खुद नए कोर्स शुरू करता था, पर अब लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। अकादमिक कैलेंडर की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी, रांची यूनिवर्सिटी के फैसला लागू होगा। मारवाड़ी कॉलेज का सफर 1963: मारवाड़ी शिक्षा ट्रस्ट ने मारवाड़ी कॉलेज की स्थापना की। 1980: मारवाड़ी कॉलेज रांची यूनिवर्सिटी की अंगीभूत इकाई बना। 2009: यूजीसी से पहली बार ऑटोनॉमी मिली। 2021: पहली बार स्वायत्तता समाप्त हुई। 2026: अप्रैल में फिर समाप्त हुई स्वायत्तता। यूजीसी को फिर से आवेदन देंगे: प्रिंसिपल मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने कहा कि ऑटोनॉमी मिलने के बाद क्वालिटी एजुकेशन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स की पढ़ाई शुरू करने वाला मारवाड़ी कॉलेज राज्य का पहला कॉलेज है। नैक के पुराने ग्रेडिंग के आधार पर मान्यता खत्म की गई है। लंबे समय से नैक का निरीक्षण नहीं हो रहा है। फिर से विचार करने के लिए यूजीसी को आवेदन देंगे।
रांची। दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन ने रांची और हटिया रेलवे स्टेशन पर चल रहे रिडेवलपमेंट कार्यों का निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक दोनों स्टेशनों पर चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करने के दौरान उन्होंने यात्रियों की सुविधा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। निरीक्षण के दौरान जीएम ने विशेष रूप से कहा कि रांची रेलवे स्टेशन पर बड़े और आधुनिक रेलवे स्टेशनों तथा मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर अंडरपासवे की व्यवस्था होनी चाहिए। यात्रियों को होगी सहुलियत इससे यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने में अधिक सहूलियत होगी और भीड़ प्रबंधन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों से इस दिशा में संभावनाएं तलाशने को कहा। जून 2026 तक साउथ गेट भवन पूरा करने का लक्ष्य अधिकारियों ने जीएम को बताया कि रांची रेलवे स्टेशन के साउथ गेट पर बन रहे नए भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसे 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि फिनिशिंग और आंतरिक कार्यों में अतिरिक्त समय लग सकता है। यह भी जानकारी दी गई कि नार्थ गेट स्थित कार्यालयों और अन्य व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे साउथ गेट की ओर शिफ्ट किया जाएगा। रांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है और यहां कुल छह प्लेटफार्म विकसित किए जा रहे हैं। भविष्य में कई प्रीमियम ट्रेनों का परिचालन भी यहीं से किया जाएगा। प्लेटफार्म पर शेड, टाइल्स और फॉल्स सीलिंग का काम बाकी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म पर शेड लगाने, टाइल्स बिछाने, फाल्स सीलिंग, रेलिंग और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य अभी शेष हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। मंडल रेल प्रबंधक करुण निधि ने बताया कि स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियों और कानकोर्स की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यात्रियों को प्लेटफार्म तक पहुंचने में आसानी होगी। साउथ गेट को जोड़ेगा रोड ओवरब्रिज मौके पर मौजूद इंजीनियरों ने बताया कि चुटिया ऑयल डिपो से साउथ गेट की ओर रोड ओवरब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसे अगले दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने के बाद साउथ गेट से आने-जाने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। हटिया स्टेशन में भी बड़े बदलाव की तैयारी इसके बाद जीएम ने हटिया रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट सिटी की ओर हटिया स्टेशन का नया साउथ गेट बनाया जाएगा, जिससे धुर्वा और आसपास की बड़ी आबादी सीधे स्टेशन से जुड़ सकेगी। इसके अलावा 33 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़े अंडरपासवे का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके बनने से धुर्वा की ओर से आने वाले यात्रियों को बिरसा चौक होकर नहीं आना पड़ेगा और वे सीधे हटिया स्टेशन के नार्थ गेट तक पहुंच सकेंगे। हटिया यार्ड में वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के रखरखाव के लिए दो नई पिटलाइन भी बनाई जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान जीएम ने सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। मौके पर एडीआरएम, सीनियर डीसीएम, डीएससी समेत कई रेल अधिकारी मौजूद थे। रांची स्टेशन के साउथ गेट पर लगा स्वचालित सीढ़ी रांची रेलवे स्टेशन के साउथ गेट पर स्वचालित सीढ़ी को लगा दिया गया है। प्रवेश द्वार से आगे बढ़ने के बाद कानकार्स तक जाने के लिए इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही एक लिफ्ट की व्यवस्था की गई है।
रांची। दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अलग-अलग शिष्टाचार मुलाकात की। लोक भवन में मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने राज्य में लंबित रेल परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया। उन्होंने रांची से मुंबई के लिए प्रतिदिन रेल सेवा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में यात्री इस मार्ग से आवागमन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रांची से नई दिल्ली के लिए अतिरिक्त ट्रेन सेवा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने रांची-लखनऊ रेल सेवा को शीघ्र प्रारंभ किए जाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री से मिले जीएम इधर, दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ने मुख्यमंत्री से भी कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मुलाकात की। उनके साथ रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह भी थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं रेल अधिकारियों के बीच राज्य में रेल सेवाओं के विस्तार, यात्री सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा रेलवे से संबंधित विकासात्मक परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। मौके पर सीनियर डीसीएम रांची रेल मंडल श्रेया सिंह एवं महाप्रबंधक के सचिव अजय कुमार भी उपस्थित थे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।