रांची। झारखंड को जल्द ही पांच सूचना आयुक्त मिलेंगे। इनके नाम लगभग तय हैं। इनमें दो पत्रकार अनुज सिन्हा व धर्मवीर सिन्हा, कांग्रेस महासचिव अमूल्य नीरज खलखो, झामुमो आईटी सेल के प्रभारी तनुज खत्री और भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के नाम शामिल हैं। लोकभवन पहुंची फाइल जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को चयन समिति की बैठक में इन नामों का चयन हो चुका है। इस बैठक में सीएम के अलावा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन शामिल थे। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने राज्यपाल संतोष गंगवार की स्वीकृति के लिए फाइल लोकभवन भेज दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी। 335 आवेदन आये थे मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 35 और सूचना आयुक्त के लिए करीब 300 आवेदन चयन समिति के पास आए थे। फिलहाल मुख्य सूचना आयुक्त के लिए किसी का नाम नहीं भेजा गया है। 6 साल से खाली हैं पद राज्य में 6 साल से मुख्य ससूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के सभी पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दबाव के बाद इस नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आई है। 7 अप्रैल तक जारी होगी अधिसूचना झारखंड के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मामले में सरकार से जवाब मांगा है। इस पर महाधिवक्ता ने बताया कि चयन समिति की बैठक हो चुकी है। सात अप्रैल तक इन पदों पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। अब 13 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई होगी।
रांची। राजधानी रांची में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रांची नगर निगम अब शहर का पहला आधुनिक इंडोर स्टेडियम बनाने जा रहा है। यह स्टेडियम वार्ड-3 के एदलहातु-मोरहाबादी इलाके में बनाया जाएगा, जिससे न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि आम नागरिकों को भी खेल के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी। नगर निगम इस परियोजना पर करीब 4 करोड़ 9 लाख रुपये खर्च करेगा। योजना है कि स्टेडियम का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाए। यह रांची का पहला बड़ा इंडोर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस रहेगा। जारी टेंडर के अनुसार जारी टेंडर के अनुसार, स्टेडियम में चार बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाएंगे, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगे। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए वार्मअप एरिया, चेंजिंग रूम, शौचालय और पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। परिसर को आकर्षक और व्यवस्थित बनाने के लिए लैंडस्केपिंग का काम भी कराया जाएगा। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यह सुविधा केवल पेशेवर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी। आम लोग भी यहां बैडमिंटन खेल सकेंगे। हालांकि इसके लिए शुल्क कितना होगा, इस पर अंतिम फैसला निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लिया जाएगा। नगर निगम की क्या योजना हैं? नगर निगम की योजना है कि स्टेडियम के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसी निजी एजेंसी को सौंपी जाए। साथ ही यहां कोचिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और बेहतर अवसर मिल सकें। इस प्रोजेक्ट के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक एजेंसियां 2 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकेंगी, जबकि 18 अप्रैल को टेंडर खोला जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस इंडोर स्टेडियम के बनने से रांची में खेल संस्कृति को नया बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।
रांची। प्राइवेट स्कूलों में किताबों का पूरा सेट एनसीईआरटी की वास्तविक कीमत से कई गुना महंगा बिक रहा है। कक्षा-1 की एनसीईआरटी किताब केवल 260 रुपये में उपलब्ध है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यही किताब पूरे सेट के रूप में 3442 रुपये तक बिक रही है। इस समस्या के पीछे स्कूल और प्रकाशकों के कथित गठजोड़ का हाथ माना जा रहा है। कारोबार और कमीशन का खेल रांची में स्कूली किताबों का कारोबार इस साल लगभग 120 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें करीब 160 सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल शामिल हैं। इस कारोबार में लगभग 36 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में स्कूलों तक पहुंचते हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में 5-6 गुना महंगी होती हैं और स्कूलों द्वारा इन्हें कोर्स में शामिल करना लगभग अनिवार्य है। हर साल बढ़ती कीमतें किताबों की कीमत हर साल 10-15% बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, कक्षा-1 के लिए पिछली बार अभिभावकों को लगभग 3500 रुपये खर्च करने पड़ते थे, जबकि इस साल यह बढ़कर 5195 रुपये हो गया। कक्षा-5 में 21 किताबों का सेट 7580 रुपये तक पहुंच गया है। स्कूल और प्रकाशक की रणनीति किताबों का कंटेंट लगभग वही रहता है, लेकिन प्रकाशक बदल दिए जाते हैं। कुछ अध्याय बदलकर या नया कवर देकर अभिभावकों को नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। कई बार स्कूल नई किताबों की सूची पहले से तय कर देते हैं और अभिभावकों को बताने के लिए यह लिखित या मौखिक रूप में दिया जाता है। एनसीईआरटी की किताबों का मूल्य • कक्षा-1 : 260 रुपये • कक्षा-2 : 260 रुपये • कक्षा-3 : 650 रुपये • कक्षा-4 : 520 रुपये • कक्षा-5 : 390 रुपये • कक्षा-6 : 975 रुपये • कक्षा-7 : 780 रुपये • कक्षा-8 : 650 रुपये डीएवी स्कूलों में किताबों का मूल्य • कक्षा-1 : 517 रुपये • कक्षा-2 : 550 रुपये • कक्षा-3 : 725 रुपये • कक्षा-4 : 815 रुपये • कक्षा-5 : 1009 रुपये • कक्षा-6 : 1208 रुपये • कक्षा-7 : 1314 रुपये • कक्षा-8 : 1620 रुपये निजी स्कूलों में किताबों का मूल्य • कक्षा-1 : 3442 रुपये • कक्षा-2 : 3490 रुपये • कक्षा-3 : 4193 रुपये • कक्षा-4 : 4189 रुपये • कक्षा-5 : 5042 रुपये • कक्षा-6 : 5807 रुपये • कक्षा-7 : 6007 रुपये • कक्षा-8 : 5340 रुपये
चाईबासा। झारखंड के चाईबासा जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरकुंडिया गांव के तुरामडीह टोला का है, जहां बीती रात एक जंगली हाथी ने हमला कर 56 वर्षीय महिला पुजारी चांदो देवी की जान ले ली। इस हमले में उनके साथ मौजूद एक अन्य पुजारी लखन कुदादा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। झोपड़ी में सो रही थीं चांदो देवी, अचानक टूट पड़ा हाथी जानकारी के अनुसार, तांतनगर प्रखंड के कुम्बराम गांव की रहने वाली चांदो देवी पूजा-पाठ करती थीं। सोमवार रात वह बरकुंडिया गांव की एक मंदिरनुमा झोपड़ी में भोजन करने के बाद सो रही थीं। इसी दौरान जंगल की ओर से आया एक जंगली हाथी अचानक झोपड़ी तक पहुंच गया और उसने चांदो देवी को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया। हमला इतना खतरनाक था कि उनकी हालत मौके पर ही गंभीर हो गई। साथी पुजारी ने भागकर बचाई जान, ग्रामीणों ने मशाल से खदेड़ा घटना के समय वहां मौजूद लखन कुदादा पर भी हाथी ने हमला किया, लेकिन वह किसी तरह भागकर झाड़ियों में छिप गए और अपनी जान बचाई। हाथी के हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने टॉर्च, मशाल और शोर-शराबे की मदद से हाथी को खदेड़ने की कोशिश की, जिसके बाद वह वहां से भागा। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत, इलाके में दहशत घटना के बाद ग्रामीणों ने चांदो देवी और घायल पुजारी को सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही चांदो देवी की मौत हो गई। मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा। विभाग ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीन महीने में 25 मौतें, गांवों में डर का माहौल पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले तीन महीनों में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। जंगलों के सिमटने और हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने से मानव-हाथी संघर्ष गंभीर होता जा रहा है। इस घटना के बाद आसपास के गांवों में भारी दहशत है और लोग रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
रांची। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से अंगरक्षकों का ब्योरा मांगा है। सभी जिलों के एसपी को 24 घंटे में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। नागरिकों और अन्य खास लोगों को दिये गए अंगरक्षकों का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है। इसे लेकर डीजीपी कार्यालय से आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। सभी एसएसपी और एसपी को भेजा गया निर्देशः यह आदेश सभी SSP और SP को भेजा गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि जिलों में जिन विशिष्ट और अति-विशिष्ट लोगों को अंगरक्षक दिए गए हैं, उनकी पूरी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाए। क्या-क्या जानकारी देनी होगीः पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए एक तय फॉर्मेट भी जारी किया है, जिसमें अधिकारियों को विस्तार से जानकारी देनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि किस व्यक्ति को अंगरक्षक दिया गया है, कितने अंगरक्षक तैनात हैं, उनकी तैनाती कब से है, उनके पास कौन-कौन से हथियार हैं और किस आदेश के तहत यह सुरक्षा दी गई है। यानी वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी एक साथ मांगी गई है। 24 घंटे की सख्त समय सीमाः इस आदेश की खास बात यह है कि जानकारी देने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया है। यानी सभी जिलों को तुरंत अपने-अपने स्तर पर डेटा जुटाकर पुलिस मुख्यालय को भेजना होगा। क्यों मांगी गई यह रिपोर्टः हालांकि पत्र में सीधे वजह नहीं बताई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि किन लोगों को किस आधार पर सुरक्षा दी जाती है और कितने पुलिसकर्मी इसमें लगे रहते हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट आगे की नीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। पुलिस मुख्यालय की नजर अब वीआईपी सुरक्षा परः इस आदेश से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पुलिस मुख्यालय अब वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में इसमें बदलाव या सख्ती भी देखने को मिल सकती है।
रांची। झारखंड में दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) क्षेत्र के लिए 1 अप्रैल 2026 से नई बिजली दरें लागू हो गई हैं। इस नए टैरिफ का असर सीधे आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ेगा। जहां घरेलू उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत दी गई है, वहीं व्यवसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी कर दी गई है। नई दरों में पुराने बकायों का समायोजन, मौजूदा समीक्षा और भविष्य की योजना को शामिल किया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं को हल्की राहत नई दरों के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमत ₹4.30 प्रति यूनिट से घटाकर ₹4.25 प्रति यूनिट कर दी गई है। हालांकि यह राहत बहुत सीमित मानी जा रही है, लेकिन आम परिवारों के लिए यह एक छोटी राहत जरूर है। व्यापार और दुकानदारों पर बढ़ा खर्च व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली अब पहले से महंगी हो गई है। इस श्रेणी में दर ₹4.30 से बढ़ाकर ₹4.80 प्रति यूनिट कर दी गई है। यानी दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को अब हर यूनिट पर 50 पैसे ज्यादा चुकाने होंगे। इससे व्यापारिक लागत बढ़ने की आशंका है। उद्योगों को सबसे बड़ा झटका नई टैरिफ में सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ा है। • 11 केवी श्रेणी: ₹4.20 से बढ़कर ₹6.00 प्रति यूनिट • 33 केवी श्रेणी: ₹5.90 प्रति यूनिट • 132 केवी श्रेणी: ₹5.85 प्रति यूनिट इससे औद्योगिक उत्पादन लागत बढ़ेगी और इसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र को राहत, लेकिन सरचार्ज बढ़ा किसानों को राहत देते हुए कृषि और सिंचाई श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह दर पहले की तरह ₹5.30 प्रति यूनिट ही रहेगी। हालांकि, कृषि को छोड़कर सभी उपभोक्ताओं पर ₹0.35 प्रति यूनिट अतिरिक्त सरचार्ज लगाया गया है, जिससे कुल बिजली बिल बढ़ जाएगा। समय पर भुगतान और सोलर पर छूट नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन भी दिया गया है। • 5 दिन के भीतर बिल भुगतान करने पर 2% छूट • प्रीपेड मीटर अपनाने पर ऊर्जा शुल्क में 3% अतिरिक्त छूट
रांची। झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने खजाना खोल दिया है। राज्य के 4345 पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई है। 15वें वित्त आयोग के तहत केंद्र सरकार से झारखंड को इस वर्ष के अंत तक करीब 2254 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो राज्य गठन के बाद अब तक की सबसे अधिक राशि है। इस राशि के आधार पर देखा जाए तो प्रत्येक पंचायत को औसतन करीब 51 लाख 80 हजार रुपये मिलेंगे। पहली बार पंचायतों को अनुदानः खास बात यह है कि राज्य वित्त आयोग की ओर से भी पहली बार पंचायतों को अनुदान दिया गया है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा राशि मिलीः ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के अनुसार, इस राशि को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के साथ लंबी प्रक्रिया, लगातार पत्राचार और उच्चस्तरीय बैठकों से गुजरना पड़ा। इसके बाद ही यह संभव हो सका। पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 624.50 करोड़, 2022-23 में 1271 करोड़, 2023-24 में 1300 करोड़, 2024-25 में 653.50 करोड़ और अब 2025-26 में यह बढ़कर 2254 करोड़ रुपये हो गई है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले के कतरास के सोनारडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंडाबार बस्ती में भू-धंसान हुआ है। इसमें दो घर जमींदोज हो गये, जबकि 3 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि अवैध खनन के कारण यह भू-धंसान हुआ। 3 शव बरामदः इस दर्दनाक भू-धंसान हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन लोगों के शव मलबे से बरामद किए गए। यह अभियान देर रात करीब ढाई से तीन बजे तक जारी रहा। मलबे से जिन लोगों के शव निकाले गए, उनकी पहचान मनोहर उरांव, उनकी बेटी गीता देवी और सरिता देवी के रूप में हुई है। हादसे में मनोहर उरांव का घर पूरी तरह धंस हो गया, जिसके नीचे दबकर तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, घटना के समय मनोहर उरांव अपनी बेटी गीता देवी के साथ घर में मौजूद थे। उसी दौरान किसी काम से सरिता देवी उनके घर आई हुई थीं। अचानक हुए भू-धंसान ने तीनों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और वे मलबे के नीचे दब गए। पत्नी घर में नहीं थीः मृतक की पत्नी छोटू देवी ने बताया कि हादसे के समय वह घर पर नहीं थीं और पड़ोस में गई हुई थीं। उनके अनुसार, पति, बेटी और सरिता घर के अंदर ही थे, जो इस दुर्घटना की चपेट में आ गए। रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले। लोगों में आक्रोशः वहीं, सरिता देवी की बेटी ने भी बताया कि उनकी मां मनोहर उरांव के घर गई थीं और उसी दौरान यह हादसा हो गया। काफी देर बाद रात में रेस्क्यू अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया होता, तो शायद तीनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
रांची। नया वित्त वर्ष बुधवार यानि 1 अप्रैल से शुरू हो गया है। बैंकिंग, इनकम टैक्स, रेलवे टिकट और फास्टैग से जुड़ी कई व्यवस्थाओं के नियम बुधवार से बदल गये हैं। भुवनेश्वर-धनबाद-भुवनेश्वर स्पेशल 1 अप्रैल से और हटिया-दुर्ग-हटिया स्पेशल द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन नियमित एक्सप्रेस के रूप में 2 अप्रैल से चलेंगी। एक अप्रैल से टोल में भी लगभग 3-7% तक वृद्धि होगी, जबकि कई टोल प्लाजा पर यह बढ़ोतरी करीब 5% के आसपास रहेगी। जमशेदपुर-रांची हाईवे पर कार का टोल 120 रुपए से बढ़कर 125 रुपए हो जाएगा। पैन कार्ड के साथ देना होगा अतिरिक्त दस्तावेजः एक अप्रैल से पैन कार्ड बनवाने के लिए पैन कार्ड के साथ आधार कार्ड के अलावा एक अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। अब 20 लाख रुपए तक की संपत्ति रजिस्ट्री में पैन कार्ड जरूरी नहीं होगा, पहले यह सीमा 10 लाख थी। सभी प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्यः झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए सेशन की शुरुआत पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि पहले आकलन फिर पढ़ाई के फॉर्मूले पर होगी। इसके तहत पहली से 12वीं तक के हर छात्र की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन कर उसी स्तर के अनुसार दो महीने पढ़ाई कराने का प्लान है। जेईपीसी ने आधारभूत आरंभिक कक्षाओं को लेकर गाइडलाइन भी जारी किया है। राज्य परियोजना निदेशक द्वारा सीएम एक्सीलेंस समेत राज्य के सभी जिलों दिए गए निर्देश में कहा है कि 4 अप्रैल तक सभी छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्य रुप से तैयार कर लेना है। कोलकाता के लिए 2 फ्लाइट फिर शुरूः रांची एयरपोर्ट ने समर शेड्यूल के तहत विमानों की नई समय सारिणी जारी की है। इसके तहत कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान समय में 10 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का बदलाव किया गया है। इंडिगो की कोलकाता जाने वाली दो फ्लाइट्स, जो क्राइसिस के दौरान बंद कर दी गई थीं, उन्हें फिर से शुरू किया गया है। दोपहर में हैदराबाद और बेंगलुरु जाने वाली उड़ानों में करीब दो घंटे की देरी की गई है। इसके अलावा शाम के समय दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है। कुछ बदलाव 29 मार्च से ही लागू हो गए हैं। आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया सरल : एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू हो जाएगा। टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। नई टैक्स व्यवस्था को जारी रखा गया है। इसके अलावा, आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया गया है और संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ED) में बड़े स्तर पर हुए तबादलों के बीच झारखंड से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया है। ईडी रांची जोनल ऑफिस में अब प्रभाकर प्रभात को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, अब तक रांची में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात अजय लुहाच का तबादला रायपुर कर दिया गया है। इस संबंध में एजेंसी की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। रायपुर से रांची पहुंचे प्रभाकर प्रभात ईडी के ताजा ट्रांसफर ऑर्डर के तहत कई राज्यों में अधिकारियों की पोस्टिंग बदली गई है। इसी क्रम में प्रभाकर प्रभात को रायपुर से रांची भेजा गया है। उन्हें अब रांची जोनल ऑफिस का नया ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब झारखंड में ईडी की कई जांचें और कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में उनकी तैनाती को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अजय लुहाच अब संभालेंगे रायपुर की जिम्मेदारी रांची में लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे अजय लुहाच अब रायपुर जोनल ऑफिस में अपनी नई भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही उन्हें पणजी जोनल ऑफिस की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे साफ है कि एजेंसी ने उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। देशभर में कई अधिकारियों के तबादले ईडी के इस व्यापक आदेश में कई अन्य अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। अवनीश तिवारी को पणजी से चंडीगढ़, राकेश कुमार सुमन को कोच्चि से लखनऊ, और मयंक पांडे को गुवाहाटी से मुंबई भेजा गया है। वहीं राज कुमार को लखनऊ से मुख्यालय बुलाया गया है और माधुर डी. सिंह को मुख्यालय से गुरुग्राम भेजा गया है। झारखंड में जांच पर पड़ सकता है असर तबादलों के साथ कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है, जिससे एजेंसी ने अपने ढांचे को और मजबूत करने की कोशिश की है। रांची में नए ज्वाइंट डायरेक्टर की तैनाती को झारखंड के संदर्भ में खास माना जा रहा है। राज्य में चल रही कई हाई-प्रोफाइल जांचों के बीच यह बदलाव आने वाले समय में ईडी की कार्रवाई और जांच की दिशा तय कर सकता है।
रांची। झारखंड में जल्द ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, लेकिन इसके साथ ही इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराने की घोषणा की गई है, जिसे सरकार प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं विपक्षी दलों और क्षेत्रीय पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। खासकर सर्ना धर्म कोड को जनगणना में शामिल न किए जाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है। दो चरणों में होगी जनगणना आगामी जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहले चरण में 1 से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा दी जाएगी, जबकि 16 मई से 14 जून 2026 तक हाउस लिस्टिंग और मकान गणना का कार्य होगा। इसके बाद 2027 में पूर्ण जनगणना डिजिटल तरीके से पूरी की जाएगी। 33 सवालों के जवाब देना होगा अनिवार्य जनगणना में लोगों को कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे। इसमें केवल परिवार के सदस्यों की संख्या ही नहीं, बल्कि घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी। जैसे पानी का स्रोत, शौचालय, बिजली, रसोई ईंधन, कचरा निकासी, स्नानघर और रसोई की स्थिति। साथ ही स्मार्टफोन, इंटरनेट, लैपटॉप, टीवी, रेडियो और वाहन जैसी डिजिटल व भौतिक संपत्तियों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पहली बार मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से होगी एंट्री इस बार प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए सीधे स्मार्टफोन से डेटा भरेंगे। आम नागरिकों को भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी। पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा। सफल पंजीकरण के बाद नागरिकों को एक स्व-गणना आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे बाद में प्रगणक के साथ साझा करना होगा। सर्ना धर्म कोड पर फिर छिड़ी बहस डिजिटल जनगणना के ऐलान के साथ ही झारखंड की राजनीति में सर्ना धर्म कोड का मुद्दा एक बार फिर उभर आया है। झामुमो ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि जनगणना की रूपरेखा में सर्ना धर्म कोड का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। पार्टी का कहना है कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को अलग मान्यता दिए बिना जनगणना अधूरी मानी जाएगी। बीजेपी ने सराहा, झामुमो-कांग्रेस ने उठाए सवाल जहां भाजपा ने डिजिटल जनगणना को तेज, सटीक और पारदर्शी प्रक्रिया बताया है, वहीं कांग्रेस और झामुमो ने इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि तकनीक के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा सकता है, जबकि झामुमो का मानना है कि सर्ना कोड की अनदेखी से आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ेगा। 16 साल बाद हो रही जनगणना पर सबकी नजर झारखंड में यह जनगणना 16 साल बाद हो रही है, इसलिए इसके आंकड़ों और राजनीतिक असर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सरकार ने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।
रांची। देश के विभिन्न राज्यों के सरकारी संस्थानों और झारखंड की राजधानी रांची के सिविल कोर्ट, DC ऑफिस व पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले सिरफिरे को दिल्ली पुलिस ने धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान श्रीनिवास लुकस (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसे कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कियया है। डिजिटल ट्रैकिंग से चढ़ा पुलिस के हत्थे दिल्ली पुलिस की साइबर और तकनीकी टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। श्रीनिवास लुकस पिछले कई महीनों से ई-मेल के जरिए फर्जी धमकियां भेजकर सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसका उपयोग वह धमकियां भेजने के लिए करता था। 1100 से अधिक दी थीं फर्जी धमकिया पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि उसने अब तक 1100 से अधिक धमकी भरे ई-मेल और कॉल किए हैं। उसके निशाने पर मुख्य रूप से रांची सिविल कोर्ट और DC ऑफिस, धनबाद और झारखंड के अन्य शहरों के सरकारी कार्यालय, साथ ही विभिन्न राज्यों के पासपोर्ट कार्यालय और महत्वपूर्ण संस्थान थे। मानसिक स्थिति संदिग्ध, जांच में जुटी रांची पुलिस शुरुआती जांच में पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। दिल्ली पुलिस आरोपी की मेडिकल जांच और विशेषज्ञों से परामर्श लेने की योजना बना रही है। दिल्ली जायेगी रांची पुलिस इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली जाने की तैयारी में है। रांची में दर्ज विभिन्न मामलों के आधार पर पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, ताकि इन धमकियों के पीछे की असल मंशा का पता लगाया जा सके।
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह गठबंधन धर्म जानती है, लेकिन जनता के मुद्दों पर समझौता नहीं कर सकते। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सह-प्रभारी डॉ. बेला प्रसाद और भूपेंद्र मरावी ने ये बातें कहीं। ट्रेनिंग कैंप के अनुभव बताये इन नेताओं ने चाईबासा में पिछले 9 दिनों से चल रहे जिला अध्यक्षों के विशेष ट्रेनिंग कैंप के अनुभवों और आगामी राजनीतिक रणनीति को साझा किया। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बताया कि पिछले 9 दिनों से पार्टी के दिग्गज नेता चाईबासा में झारखंड और ओडिशा के जिला अध्यक्षों के साथ थे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाना था। फील्ड विजिट और जमीनी मुद्दों पर फोकस कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि ट्रेनिंग कैंप में केवल चर्चा नहीं हुई, बल्कि नेताओं ने फील्ड विजिट किया। हमारे कार्यकर्ताओं ने नरेगा (NREGA) वर्कर की तरह काम किया, ताकि उनके वास्तविक दर्द और समस्याओं को समझा जा सके. हमने अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर भी गहराई से संवाद किया है। प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा की रणनीतियों पर भी प्रहार किया गया। के. राजू ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में भाजपा हमारे वोटरों को लिस्ट से हटाने या प्रभावित करने का काम कर सकती है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और वोटरों की समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया गया है। किसानों के मुद्दे और सरकार पर निशाना कांग्रेस ने कहा कि वह किसानों की जमीन हड़पने वाली ताकतों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगी। पार्टी ने कहा कि किसानों की जमीन लेने के कड़े प्रावधान हैं, लेकिन कई जगहों पर उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है। प्रशासन हक का हनन कर रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं ने बड़कागांव की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह किसानों के शोषण का जीता-जागता उदाहरण है और कांग्रेस उन्हें हक दिलाकर रहेगी। कानून-व्यवस्था पर सवाल हजारीबाग की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी के मंत्री पीड़ित परिवार से मिले हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी न होना पुलिस की बड़ी चूक और निंदनीय है। इसके साथ ही धनबाद की घटना को भी उन्होंने प्रशासन की विफलता करार दिया। गठबंधन पर साफ रुख प्रदेश प्रभारी ने गठबंधन की राजनीति पर बात करते हुए कहा कि कांग्रेस एक पुरानी और अनुभवी पार्टी है। हम एलायंस का धर्म बखूबी जानते हैं, लेकिन जनता के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा। जनसमस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ लगातार संवाद जारी है और जनता का सकारात्मक रिस्पॉन्स भी मिल रहा है।
रांची। झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में मंगलवार को भारी गहमागहमी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज आखिरी दिन होने के कारण सभी सरकारी विभागों में बिल क्लियर करने और बजट राशि का उपयोग करने की होड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस वर्ष के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। बजट का 85-90 प्रतिशत खर्च करना बड़ी उपलब्धि आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड जैसे राज्य के लिए बजट का 85-90 प्रतिशत खर्च करना एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे विभागों में कुछ बुनियादी ढांचे के कार्यों में देरी के कारण कुछ राशि वापसी (सरेंडर) हो सकती है। झारखंड सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में ‘समावेशी विकास’ पर जोर दिया है। अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने पहले ही 1.58 लाख करोड़ का बजट घोषित किया है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन 31 मार्च की क्लोजिंग रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। क्यों अहम है 31 मार्च सरकारी नियमों के अनुसार, यदि आवंटित बजट राशि 31 मार्च की रात 12 बजे तक खर्च नहीं होती या संबंधित ट्रेजरी में सरेंडर नहीं होती, तो वह राशि समाप्त हो जाती है। इसी कारण राज्य की सभी ट्रेजरी में ठेकेदारों के भुगतान और विकास कार्यों के बिलों का अंबार लगा हुआ है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार सरकार ने पूंजीगत व्यय में 18 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल करना एक बड़ी चुनौती है। प्रमुख विभागों का प्रदर्शन ग्रामीण विकास: मनरेगा और अन्य ग्रामीण योजनाओं के तहत इस वर्ष 3,190 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल रोजगार सृजन पर खर्च की गई। शिक्षा और स्वास्थ्य: प्रारंभिक और तकनीकी शिक्षा के लिए आवंटित 18,000 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा शिक्षकों के वेतन और स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर खर्च हुआ। मंईया सम्मान योजना: महिला बाल कल्याण विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आवंटित 1,465 करोड़ का लगभग 100 प्रतिशत लाभुकों तक पहुंचाया। अब तक प्रमुख विभागों का खर्च कृषि विभाग: बजट 1,963.44 करोड़ रुपये, खर्च 1,212.10 करोड़ रुपये। पशुपालन विभाग: बजट 580.23 करोड़ रुपये, खर्च 305.80 करोड़ रुपये। भवन विभाग: बजट 676.61 करोड़ रुपये, खर्च 564.85 करोड़ रुपये। ऊर्जा विभाग: बजट 10,480.47 करोड़ रुपये, खर्च 9,199.37 करोड़ रुपये। उत्पाद विभाग: बजट 69.12 करोड़ रुपये, खर्च 46.01 करोड़ रुपये। खाद्य आपूर्ति विभाग: बजट 1,886.14 करोड़ रुपये, खर्च 1,637.48 करोड़ रुपये। वन विभाग: बजट 1,990.42 करोड़ रुपये, खर्च 1,806.67 करोड़ रुपये। स्वास्थ्य विभाग: बजट 5,437.25 करोड़ रुपये, खर्च 4,524.47 करोड़ रुपये। उच्च शिक्षा विभाग: बजट 1,732.27 करोड़ रुपये, खर्च 1,295.76 करोड़ रुपये। गृह विभाग: बजट 8,535.44 करोड़ रुपये, खर्च 7,956.54 करोड़ रुपये। उद्योग विभाग: बजट 463.99 करोड़ रुपये, खर्च 293.83 करोड़ रुपये। श्रम विभाग: बजट 1,993.17 करोड़ रुपये, खर्च 956.97 करोड़ रुपये। खान विभाग: बजट 364.64 करोड़ रुपये, खर्च 118.81 करोड़ रुपये। पेयजल विभाग: बजट 3,841.66 करोड़ रुपये, खर्च 1,667.36 करोड़ रुपये। भूमि राजस्व विभाग: बजट 856.61 करोड़ रुपये, खर्च 678.13 करोड़ रुपये। पथ निर्माण विभाग: बजट 5,221.38 करोड़ रुपये, खर्च 4,487.40 करोड़ रुपये। ग्रामीण विकास विभाग: बजट 6,641.86 करोड़ रुपये, खर्च 3,685.40 करोड़ रुपये। पर्यटन विभाग: बजट 180.39 करोड़ रुपये, खर्च 110.37 करोड़ रुपये। परिवहन विभाग: बजट 162.03 करोड़ रुपये, खर्च 44.60 करोड़ रुपये। जल संसाधन विभाग: बजट 1,937.19 करोड़ रुपये, खर्च 1,892.66 करोड़ रुपये। ग्रामीण कार्य विभाग: बजट 5,772.72 करोड़ रुपये, खर्च 5,265.04 करोड़ रुपये। पंचायती राज विभाग: बजट 1,427.45 करोड़ रुपये, खर्च 547.27 करोड़ रुपये। स्कूली शिक्षा विभाग: बजट 8,641.04 करोड़ रुपये, खर्च 6,262.25 करोड़ रुपये। महिला बाल विकास विभाग: बजट 22,138.90 करोड़ रुपये, खर्च 19,913.77 करोड़ रुपये।
गिरिडीह। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर थाना पुलिस ने देर रात छापेमारी कर देवघर जिले के मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के बनसिम्मी गांव निवासी अमजद अंसारी और रजाउल अंसारी को पकड़ा, जिन्हें बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इनपुट के आधार पर बनी टीम, मौके पर दबिश साइबर डीएसपी आबिद खान के अनुसार, प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से एसपी डॉ. बिमल कुमार को सूचना मिली थी कि गांडेय थाना क्षेत्र के खंभाटांड़ इलाके में साइबर ठगी की गतिविधियां चल रही हैं। सूचना की पुष्टि के बाद साइबर थाना प्रभारी दीपेश कुमार के नेतृत्व में टीम गठित कर बताए गए स्थान पर छापेमारी की गई, जहां आरोपी मोबाइल के जरिए ठगी करते पकड़े गए। फर्जी ई-चालान और ई-केवाइसी लिंक से करते थे ठगी पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फर्जी लिंक भेजते थे। ये लिंक आरटीओ ई-चालान, चालान चेक और बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर तैयार किए जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मॉलवेयर इंस्टॉल हो जाता था, जिससे ठगों को बैंकिंग और निजी जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद वे खातों से पैसे निकाल लेते थे। पकड़ से बचने के लिए बदलते थे लोकेशन जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जिलों के सीमावर्ती इलाकों में ठगी करते थे। वे जानबूझकर अपने गृह जिले से बाहर सक्रिय रहते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। मोबाइल, सिम और बाइक बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड और एक बाइक बरामद की है। बरामद उपकरणों की जांच कर ठगी के अन्य मामलों के साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। कार्रवाई में शामिल रही पुलिस टीम इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी दीपेश कुमार के साथ एसआई पुनीत कुमार गौतम, गुंजन कुमार, एएसआई संजय मुखियार, सशस्त्र बल के जवान और गांडेय थाना के चौकीदार शामिल
जमशेदपुर। टाटा स्टील के कर्मचारियों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राहत मिली है। कंपनी ने महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसका लाभ अप्रैल 2026 से वेतन में दिखाई देगा। सीपीआई में बढ़ोतरी का मिला फायदा यह वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर तय की गई है। हालिया तिमाही (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026) में सूचकांक बढ़कर 148.43 पहुंच गया, जो पिछली तिमाही (सितंबर से नवंबर 2025) के 147.30 के मुकाबले अधिक है। इस तरह कुल 1.13 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनएस ग्रेड कर्मचारियों की आय में बढ़ोतरी इस बदलाव का सीधा असर एनएस ग्रेड के कर्मचारियों पर पड़ेगा। उन्हें करीब 74.50 पॉइंट्स का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे उनकी मासिक आय में लगभग 223.50 रुपये की वृद्धि होगी। ओएस ग्रेड के लिए भी डीए में इजाफा वहीं ओएस ग्रेड के कर्मचारियों के लिए डीए में 1.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी तय की गई है। इसके बाद उनका कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 49.53 प्रतिशत हो गया है। अप्रैल वेतन में दिखेगा असर डीए में की गई यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 के वेतन में जोड़ी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि होगी।
जमशेदपुर। भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर शहर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। बिष्टुपुर जैन समाज के तत्वावधान में निकाली गई शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में भक्ति का माहौल बना रहा। विधायक सरयू राय ने किया स्वागत, श्रद्धालुओं की सेवा शोभायात्रा के दौरान जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने स्वयं फलाहार और शर्बत वितरित कर सेवा भाव का संदेश दिया और कहा कि धर्म से ऊपर मानव सेवा का महत्व है। साध्वी समूह का भी रहा सान्निध्य इस अवसर पर राजगीर से आईं साध्वी सधान्जी और साध्वी कल्याणी की उपस्थिति रही, जिन्हें श्रद्धालुओं ने नमन किया। धार्मिक माहौल के बीच प्रवचन और आशीर्वाद का भी लाभ लोगों को मिला। समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी शोभायात्रा में जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में राजेन कमानी, नकुल कमानी, हर्षद गांधी, परेश सेठ, नरेंद्र दोशी, मुकेश गांधी, मिलन वैद्य, भाविन मोदी, मनीष उड़ानी, किलोल भयाणी, राहुल भयाणी, चंद्रकांत देसाई और धीरेन मेहता समेत अन्य लोगों की सक्रिय भूमिका रही। सेवा कार्य में कई लोग रहे शामिल शोभायात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्थानीय लोगों ने भी योगदान दिया। सरयू राय के आवास के पास अशोक गोयल, सुबोध श्रीवास्तव, देव कुमार वर्मा, सन्नी सिंह, दिनेश सिंह, उदय मंडल और अमित देउड़ी सहित अन्य लोग सेवा कार्य में जुटे रहे।
धनबाद। निरसा में भाकपा (माले) की दो दिवसीय राज्य कमेटी बैठक में पार्टी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आर्थिक संकट, विदेश नीति और मजदूरों की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद निरसा स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश सचिव मनोज भट्ट, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, बगोदर के पूर्व विधायक बिनोद सिंह, माले नेता हालधर महतो, राज्य कमेटी सदस्य सुषमा मेहता और सभा प्रभारी जनार्दन प्रसाद समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। विदेश नीति और वैश्विक हालात पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में दीपांकर भट्टाचार्य ने इजरायल-ईरान तनाव का हवाला देते हुए कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को युद्ध के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और अमेरिका व इजरायल से युद्ध रोकने की अपील करनी चाहिए। प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर चिंता माले महासचिव ने कहा कि करीब एक करोड़ भारतीय मजदूर ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। आर्थिक हालात और महंगाई पर भी निशाना उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। रसोई गैस की किल्लत और छोटे उद्योगों की खराब स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। लेबर कोड पर कड़ा विरोध दीपांकर भट्टाचार्य ने नए श्रम कानूनों का विरोध करते हुए कहा कि ये मजदूरों के हित में नहीं हैं और इससे उनके अधिकार कमजोर होंगे। चुनाव को लेकर रणनीति का ऐलान बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट की। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट के साथ तालमेल के तहत 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है। असम में कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है, जबकि मेहाली सीट पर झामुमो का समर्थन मिलने की बात कही गई। दक्षिण भारत में भी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी तमिलनाडु में पार्टी ने करीब 14 सीटों पर चुनाव लड़ने और अन्य सीटों पर डीएमके को समर्थन देने की रणनीति बनाई है। वहीं केरल में तीन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।
रांची। रांची के सदर थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ मारपीट और उसके चेहरे पर कालीख पोतकर घुमाने का मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना को लेकर पीड़िता ने 29 मार्च को सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला खूंटी जिले की रहने वाली है। वह फिलहाल रांची में किराए के मकान में रहती है। उसने आरोप लगाया कि उसी दिन पंकज कुमार नामक व्यक्ति उसके घर पहुंचा। उसने गाली-गलौज करते हुए उसे जबरन घर से बाहर खींच लिया। 2 महिलाओं को चप्पल की माला पहनाई पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने न केवल उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे और एक अन्य महिला को चप्पलों की माला पहनाई। इसके बाद उनके चेहरे पर कालिख पोतकर पूरे मोहल्ले में घुमाया गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके बेटे और परिचितों पर वाहन चोरी का आरोप लगाते हुए हिंसक व्यवहार किया, उसके कपड़े फाड़ दिए और गलत नीयत से पकड़ने की कोशिश की। महिला समेत 2 आरोपी जेल भेजे गये मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। जांच के बाद मुख्य आरोपी पंकज कुमार सिंह उर्फ पंकज और सनताना कुमारी को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से JEE Main के दूसरे सत्र की परीक्षा 2 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इसके एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं, जिन्हें छात्र NTA की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। कब कौन सा पेपर JEE Main के शेड्यूल के अनुसार पेपर वन (बीई-बीटेक) 2, 4, 5, 6 और 8 अप्रैल को होगा। वहीं पेपर टूए (बीआर्क), पेपर टूबी (बी प्लानिंग) और दोनों का संयुक्त पेपर 7 अप्रैल को होगी। 13 भाषाओं में परीक्षा छात्रों के लिए अच्छी बात यह है कि परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 13 क्षेत्रीय भाषाओं में ली जा रही है। इससे अलग-अलग राज्यों के छात्रों को अपनी भाषा में परीक्षा देने में आसानी होगी। एनसीईआरटी से करें मजबूत तैयारी विशेषज्ञों का कहना है कि JEE Main का पूरा सिलेबस 11वीं और 12वीं की NCERT किताबों पर आधारित होता है। इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे बेसिक्स मजबूत करने के लिए NCERT पर खास ध्यान दें। बीई-बीटेक में 75 सवाल, 300 अंक का पेपर पेपर वन (बीई-बीटेक) तीन घंटे का होगा। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से कुल 75 सवाल पूछे जाएंगे। हर विषय से 25-25 प्रश्न होंगे। इनमें 20 बहुविकल्पीय और 5 संख्यात्मक सवाल होंगे। पूरा पेपर 300 अंकों का होगा और हर सही जवाब पर 4 अंक मिलेंगे। बीआर्क और बी प्लानिंग का पैटर्न पेपर टूए (बीआर्क) में गणित, सामान्य योग्यता और ड्राइंग से कुल 77 प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं पेपर टूबी (बी प्लानिंग) में गणित, सामान्य योग्यता और प्लानिंग से 100 प्रश्न होंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि ड्राइंग को छोड़कर बाकी सभी पेपर कंप्यूटर आधारित होंगे। ऑनलाइन होगी परीक्षा, समय का रखें खास ध्यान पूरी परीक्षा ऑनलाइन मोड में ली जाएगी, इसलिए छात्रों को समय प्रबंधन और स्क्रीन पर सवाल हल करने की आदत जरूरी है।
धनबाद। नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में शहर के विकास और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। बाबूडीह स्थित विवाह भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता मेयर संजीव सिंह ने की, जहां नए वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व बढ़ाने और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च की रूपरेखा तय की गई। राजस्व संग्रह बढ़ाने पर जोर निगम ने वर्ष 2026-27 के लिए कुल राजस्व वसूली का लक्ष्य बढ़ाकर 138.24 करोड़ रुपये निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इस बार आय बढ़ाने के लिए विभिन्न स्रोतों को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं। होल्डिंग टैक्स पर सबसे ज्यादा निर्भरता राजस्व संरचना में सबसे बड़ा हिस्सा होल्डिंग टैक्स से आने की उम्मीद जताई गई है, जिससे 75 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा विज्ञापन (होर्डिंग), जल उपयोग शुल्क, नक्शा पास और पार्कों से भी आय बढ़ाने की योजना बनाई गई है, हालांकि इन मदों का योगदान अपेक्षाकृत कम रहेगा। करीब 953 करोड़ का बजट, सफाई पर फोकस बैठक में 952.8 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें शहरी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से सफाई व्यवस्था सुधार को प्राथमिकता दी गई है, जबकि सड़क, नाली और पार्क विकास के लिए 130 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। जलापूर्ति सुधार के लिए अलग प्रावधान शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और उसके रखरखाव के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि नियमित और बेहतर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। नए कर का प्रस्ताव नहीं, राज्य सरकार को भेजे जाएंगे प्रस्ताव बैठक में किसी नए टैक्स को लागू करने का प्रस्ताव नहीं लाया गया। बोर्ड से स्वीकृति के बाद सभी प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज