Jharkhand News

Food safety officials inspecting peda shops during the Shravan Mela in Basukinath
बासुकीनाथ में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 69 किलो खराब पेड़ा नष्ट; दुकानदारों पर लगा 25 हजार का जुर्माना

बासुकीनाथ: श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. मंगलवार को बासुकिनाथ मंदिर क्षेत्र और चूड़ी गली स्थित पेड़ा दुकानों में विशेष जांच अभियान चलाया गया. इस दौरान 18 दुकानों में पेड़ा के 45 नमूनों की मौके पर ही जांच की गयी. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की मदद से की गयी जांच में कई पेड़ा मानकों के अनुरूप नहीं मिले. इसके बाद खाद्य सुरक्षा टीम ने 69 किलो खराब पेड़ा मौके पर ही नष्ट करा दिया. साथ ही संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. 18 दुकानों में 45 नमूनों की हुई जांच श्रावणी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बासुकिनाथ पहुंच रहे हैं. इसे देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार खाद्य दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है. मंगलवार को टीम ने बाबा मंदिर क्षेत्र और चूड़ी गली में स्थित पेड़ा दुकानों को जांच के दायरे में लिया. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से पेड़ा के नमूनों की ऑन द स्पॉट जांच की गयी. अधिकारियों ने दुकानदारों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने और स्वच्छता के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया. खराब पेड़ा मिलते ही मौके पर कराया गया नष्ट जांच के दौरान मानकों के अनुरूप नहीं पाये गये कुल 69 किलो पेड़ा को जब्त कर मौके पर ही नष्ट कराया गया. इसके अलावा संबंधित कारोबारियों पर कुल 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया. कार्रवाई की खबर फैलते ही पेड़ा कारोबारियों में हड़कंप मच गया. खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. मेला क्षेत्र में अमानक, मिलावटी या अस्वच्छ खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी. दुकानदारों को साफ-सफाई रखने की हिदायत अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने दुकानदारों को कई जरूरी निर्देश भी दिये. खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, दुकान और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन करने को कहा गया. अधिकारियों ने बताया कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी लगातार जारी रहेगी. आने वाले दिनों में भी पेड़ा समेत अन्य खाद्य सामग्री की जांच की जाएगी. टीम में ये अधिकारी रहे मौजूद जांच अभियान में एफएसओ सुबीर रंजन, अंजना रानी मिंज और डेजी नीलिमा तिग्गा के अलावा जरमुंडी थाना पुलिस बल मौजूद रहा. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की ओर से जूनियर एनालिस्ट शुभम कुमार और लैब अटेंडेंट सुधांश कुमार ने नमूनों की जांच में सहयोग किया. विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता के मामले में किसी तरह की लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Thousands of Kanwariyas walking on the Kanwariya route in Deoghar during the Shravan Mela
बाबाधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजा कांवरिया पथ

देवघर: राजकीय श्रावणी मेले के 21वें दिन बुधवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का सैलाब देखने को मिला. कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा कांवरिया पथ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा. सुबह से ही कांवरियों का जत्था लगातार बाबा बैद्यनाथ के दरबार की ओर बढ़ता रहा. मंदिर में सुबह 5 बजे से जलार्पण शुरू हुआ, जिसके बाद श्रद्धालु कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आये. कांवरियों के उत्साह से भक्तिमय हुआ बाबाधाम श्रावणी मेले के दौरान दूर-दराज से पहुंचे कांवरियों में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण को लेकर खासा उत्साह दिखा. कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही. कोई पैदल कांवर लेकर बाबा धाम की ओर बढ़ रहा था, तो कोई भक्ति गीतों और जयघोष के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रहा था. बाबाधाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भी पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहा. डीसी-एसपी ने संभाली व्यवस्था की कमान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा. डीसी सौरभ कुमार भुवानियां और एसपी प्रवीण पुष्कर ने पूरे मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग की. अधिकारियों ने रूटलाइन, बाबा मंदिर परिसर और भीड़ वाले प्रमुख स्थानों का जायजा लिया. उन्होंने मौके पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों से श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था से जुड़ी जानकारी ली. प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तरीके से बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण कराना रही. कतार प्रबंधन पर विशेष नजर कांवरिया पथ और मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कतार प्रबंधन पर विशेष जोर दिया. रूटलाइन पर त्वरित प्रतिक्रिया टीम यानी QRT, पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है. प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से भी व्यवस्था में सहयोग करने और निर्धारित मार्ग से ही आगे बढ़ने की अपील की गयी. 20वें दिन 2.39 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण श्रावणी मेले के 20वें दिन बाबा बैद्यनाथ पर 2,39,407 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया था. इनमें 13,029 श्रद्धालुओं ने शीघ्र दर्शनम कूपन के माध्यम से बाबा का दर्शन किया. वहीं, 1,09,789 श्रद्धालुओं ने बाह्य अर्घा और 1,16,589 श्रद्धालुओं ने आंतरिक अर्घा के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया. भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क श्रावणी मेले के 21वें दिन भी कांवरियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरती. कांवरिया पथ से लेकर बाबा मंदिर परिसर तक अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रही. श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी न हो और सभी सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर सकें.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Land subsidence affected area near Chhatabad in Katras, Dhanbad, with damaged homes and residents at risk
छाताबाद में फिर भू-धंसान का खतरा, 200 से ज्यादा घरों पर मंडरा रहा संकट; 1000 लोग कर चुके पलायन

कतरास: धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास सात अगस्त को हुई भू-धंसान की घटना के बाद अब एक बार फिर बड़े हादसे की आशंका जतायी गयी है. कतरास थाना प्रभारी ने धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को भेजी रिपोर्ट में प्रभावित इलाके में दोबारा भू-धंसान की प्रबल संभावना बतायी है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि रात में या बड़े पैमाने पर दोबारा जमीन धंसती है, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है. पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद एसएसपी ने मामले से जुड़े दस्तावेज धनबाद डीसी आदित्य रंजन को अवलोकन और आगे की कार्रवाई के लिए भेजे हैं. वहीं, प्रभावित इलाके में पुलिस की पैदल गश्ती बढ़ा दी गयी है. पुलिस स्थानीय लोगों से लगातार संपर्क में रहकर हालात पर नजर रख रही है. 200 घरों से करीब 1000 लोगों ने किया पलायन भू-धंसान प्रभावित इलाका बीसीसीएल की न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान के समीप स्थित है. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, छाताबाद में करीब 500 मीटर के दायरे में लगभग 8 हजार लोग रह रहे हैं. इनमें करीब 200 घरों के लगभग 1000 लोग अपनी सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर चले गये हैं. बीसीसीएल की ओर से भी प्रभावित 12 परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट करने के लिए जिला प्रशासन को सूची उपलब्ध करायी गयी है. कंपनी की रिपोर्ट में करीब 150 मीटर के क्षेत्र को डेंजर जोन बताया गया है. इस इलाके में अभी भी करीब 25 घरों में 200 से अधिक लोगों के रहने की जानकारी है. 20 से 22 फीट नीचे धंसी थी जमीन पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, सात अगस्त को दोपहर करीब 2:30 से 3 बजे के बीच छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास अचानक जमीन करीब 20 से 22 फीट नीचे धंस गयी. भू-धंसान की चपेट में आकर 15 से 20 घर पूरी तरह जमींदोज हो गये, जबकि आसपास के कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयीं. स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से पहले न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान में कोयला उत्खनन के लिए जोरदार ब्लास्टिंग की गयी थी. ब्लास्टिंग के बाद आसपास के घरों में तेज कंपन महसूस हुआ. इसके कुछ देर बाद तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी. जुमे की नमाज के कारण टला बड़ा हादसा भू-धंसान के वक्त जुमे की नमाज का समय था. इस कारण इलाके के अधिकांश पुरुष घरों से बाहर थे. घरों में मौजूद करीब आठ से 10 बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मलबे में फंस गये थे. स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी को बाहर निकाला गया और अस्पताल भेजा गया. हादसे में एक महिला और एक बच्चे को अधिक चोट लगी थी. वहीं, कई परिवारों का घरेलू सामान, आभूषण और जरूरी दस्तावेज मलबे में दब गये. पुराने भूमिगत खनन से बढ़ी चिंता भू-धंसान के पीछे पुराने भूमिगत खनन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि प्रभावित इलाके में पहले बीसीसीएल की भूमिगत खदान संचालित थी. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोयला निकालने के बाद भूमिगत हिस्से में पर्याप्त बालू भराई या अन्य सुरक्षा उपाय नहीं किये गये. लोगों के मुताबिक, घटनास्थल से करीब 100 से 150 मीटर दक्षिण कतरास-छाताबाद मुख्य सड़क की दिशा में भी पहले भूमिगत खनन हुआ था. ऐसे में आसपास के दूसरे इलाकों में भी जमीन धंसने का खतरा बना हुआ है. प्रभावित परिवारों में बढ़ रहा आक्रोश हादसे के बाद प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों में बीसीसीएल के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है. प्रभावित परिवारों ने 10 अगस्त को संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन देकर बीसीसीएल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और थाना में धरना दिया था. इसके बाद कतरास थाना में कांड संख्या 213/26 दर्ज किया गया. इससे पहले सात जुलाई की घटना के बाद भी लोगों ने कतरास-भटमुरना मुख्य मार्ग को करीब आठ घंटे तक जाम किया था. उस मामले में कतरास थाना कांड संख्या 185/26 दर्ज किया गया था. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जतायी है कि यदि दोबारा भू-धंसान होता है, तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में कतरास थाना चौक जाम करने या थाना घेराव जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है. जमीन में बदलाव दिखे तो तुरंत रहें सतर्क भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में जमीन का धीरे-धीरे बैठना, मकानों और दीवारों में अचानक नयी दरारें पड़ना, सड़क या आंगन का धंसना और जमीन से पानी निकलना जैसे संकेत खतरे की ओर इशारा कर सकते हैं. पुराने भूमिगत खनन वाले क्षेत्रों में जमीन के नीचे खाली हिस्से कमजोर होने से अचानक धंसाव का खतरा बना रहता है. ऐसे इलाकों में प्रशासन और खनन प्रबंधन की ओर से लगातार निगरानी, असुरक्षित घरों को खाली कराना और जमीन की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है, ताकि दोबारा होने वाली घटना में जान-माल के नुकसान को रोका जा सके.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Fish farmers attending a two-day insurance awareness camp in Ranchi under the PM Matsya Kisan Samridhi Sah-Yojana
झारखंड के मत्स्य पालकों को मिलेगा बीमा का सुरक्षा कवच, रांची में दो दिवसीय जागरूकता शिविर शुरू

रांची: झारखंड के मत्स्य पालकों को जलीय कृषि में होने वाले संभावित नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, शालीमार में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत दो दिवसीय बीमा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आये मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्य और मत्स्य विभाग की योजनाओं से जुड़े सैकड़ों लाभुक शामिल हुए. इस दौरान मत्स्य पालकों को बीमा योजना की जानकारी देने के साथ इसके लिए पंजीकरण कराने की प्रक्रिया भी समझायी गयी. जलीय कृषि में नुकसान से बचाएगा बीमा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जलीय कृषि में कई तरह के जोखिम और नुकसान की आशंका बनी रहती है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लागू बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करेगी. उन्होंने मत्स्य पालकों से योजना का लाभ लेने और बीमा के महत्व को समझने की अपील की. अधिकारियों ने बताया कि बीमा से जुड़कर किसान अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं. NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने अधिक से अधिक पात्र मत्स्य किसानों से NFDP पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराने की अपील की. मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि बीमा योजना से जुड़ने से मत्स्य पालकों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है. उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि राज्य का कोई भी पात्र मत्स्य किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए निदेशालय स्तर से आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र मत्स्य कृषकों को योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना विभाग की प्राथमिकता है. विशेषज्ञों ने बीमा योजना की पूरी प्रक्रिया समझायी दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में एनएफडीबी, हैदराबाद और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी, रांची के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना की विस्तृत जानकारी दी. विशेषज्ञों ने किसानों को बीमा की प्रक्रिया, योजना के लाभ और इससे जुड़ी जरूरी औपचारिकताओं के बारे में बताया. साथ ही किसानों की ओर से पूछे गये सवालों और उनकी शंकाओं का भी समाधान किया गया. अधिकारियों और बीमा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा कार्यक्रम में उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय गुप्ता, उप निदेशक शंभु प्रसाद यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की क्षेत्रीय प्रबंधक आशा प्रसाद और उप प्रबंधक मनीषा टोप्पो समेत विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे. जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य पालकों को बीमा योजना से जोड़ने के साथ उन्हें जलीय कृषि में आने वाले जोखिमों के प्रति जागरूक करना है, ताकि नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना कम करना पड़े.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Damaged petrol pump shed after a powerful blast at Diamond Sales petrol pump in Koker, Ranchi
रांची के कोकर पेट्रोल पंप में जोरदार विस्फोट, दूर तक सुनाई दी आवाज; जांच में जुटी पुलिस

रांची: सदर थाना क्षेत्र के कोकर स्थित डायमंड सेल्स पेट्रोल पंप परिसर में मंगलवार रात अचानक हुए जोरदार विस्फोट से इलाके में अफरा-तफरी मच गयी. धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज आसपास के कई इलाकों तक सुनाई दी. विस्फोट के साथ पेट्रोल पंप परिसर में आग की लपटें भी दिखाई दीं, जिससे वहां मौजूद कर्मचारी और आसपास के लोग सहम गये. घटना रात करीब 8.25 बजे की बतायी जा रही है. प्रारंभिक जांच में पैनल रूम में गड़बड़ी को विस्फोट की संभावित वजह माना जा रहा है. हालांकि, पुलिस ने अभी धमाके के वास्तविक कारण की पुष्टि नहीं की है. मामले की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी. पेट्रोल भरते समय हुआ जोरदार धमाका बताया गया कि जिस समय धमाका हुआ, उस वक्त पेट्रोल पंप पर कर्मचारी वाहनों में ईंधन भर रहे थे. पंप परिसर के पास ही एक तेल टैंकर भी खड़ा था. ऐसे में धमाके के बाद वहां मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया. धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे. कुछ ही देर में पेट्रोल पंप परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गयी. हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. शेड और आसपास की दुकानों को पहुंचा नुकसान विस्फोट के कारण पेट्रोल पंप के शेड का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इसके अलावा पास स्थित वेयरहाउस की टिन भी उखड़ गयी. पेट्रोल पंप परिसर में बने बाथरूम के गेट का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है. धमाके की वजह से गमले समेत बैक ऑफिस की बिल्डिंग के निचले हिस्से और आसपास की कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है. तेज धमाके के कारण आसपास के लोगों में काफी देर तक दहशत बनी रही. पुलिस ने पूरे परिसर को घेरकर शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गयी. पुलिस ने पेट्रोल पंप परिसर को चारों तरफ से घेर लिया और घटना की जांच शुरू कर दी. सुरक्षा को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों को भी दूर किया गया. धमाके की वजह स्पष्ट करने के लिए बम निरोधक दस्ते को भी सूचना दी गयी. टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की जांच शुरू की. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोट किसी तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या पेट्रोल पंप के किसी उपकरण में हुई गड़बड़ी के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह है. जांच रिपोर्ट के बाद सामने आयेगा असली कारण सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. प्रारंभिक तौर पर पैनल रूम में गड़बड़ी की बात सामने आयी है, लेकिन विस्फोट का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. पेट्रोल पंप परिसर में तेल टैंकर मौजूद होने के कारण घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है. हालांकि, समय रहते स्थिति नियंत्रित हो जाने और किसी के घायल नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
BIT Mesra campus in Ranchi where 50% seat quota for Jharkhand students is expected to return next academic session
BIT Mesra में फिर लागू होगा झारखंड के छात्रों का 50% कोटा, अगले सत्र से मिलेगा आरक्षण

रांची: झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है. पत्र के अनुसार, राज्य सरकार बीआइटी मेसरा की कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित कराने को लेकर आवश्यक कदम उठायेगी. यह निर्णय ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जायेगा. इस संबंध में सम्यक विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जायेगी. 2026-27 में खत्म हो गया था होम स्टेट कोटा बीआइटी मेसरा में फिलहाल झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया है. JoSAA 2026 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्थान में नामांकन ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किया जा रहा है. इस बदलाव के बाद झारखंड के विद्यार्थियों को पहले की तरह राज्य कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है. इसे लेकर विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सवाल उठाये गये थे. राज्य सरकार और BIT Mesra के बीच समझौता हुआ था समाप्त विभाग की जानकारी के अनुसार, बीआइटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो वर्ष पहले समाप्त हो गया था. समझौता समाप्त होने के बाद राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया रहा. संस्थान की ओर से समझौते के नवीकरण को लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे गये, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका. इसके बाद संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने का फैसला किया. पहले करीब 650 बीटेक सीटों पर मिलता था लाभ पूर्व की व्यवस्था के तहत बीआइटी मेसरा में बीटेक की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम स्टेट कोटा का लाभ मिलता था. इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित रहती थीं. राज्य में इस कोटे को दोबारा लागू करने की मांग लगातार उठती रही है. अब सरकार के अगले सत्र से 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कराने के निर्णय से झारखंड के विद्यार्थियों को बीआइटी मेसरा में नामांकन के लिए फिर से बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है. विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी मांगी थी जानकारी बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा समाप्त किये जाने का कारण और आगे की व्यवस्था को लेकर विधायक सुरेश कुमार बैठा ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी. विभाग की ओर से विधायक को भी इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी है. राज्य सरकार के ताजा रुख के बाद अब अगले शैक्षणिक सत्र से बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटों की व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद बढ़ गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Model Rural Health Research Unit to be established in Angara, Ranchi, to study health issues in rural and tribal areas
रांची के अनगढ़ा में खुलेगा मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट, आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य समस्याओं पर होगा रिसर्च

रांची: ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में रांची में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से रांची जिले के अनगढ़ा में मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट (MRHRU) सेंटर स्थापित किया जाएगा. बुधवार शाम चार बजे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी इसके भवन का शिलान्यास करेंगे. यह संस्थान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत काम करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की स्वास्थ्य समस्याओं को बेहतर तरीके से समझना और उनके आधार पर उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देना है. ग्रामीण और आदिवासी आबादी की स्वास्थ्य समस्याओं पर होगा अध्ययन मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट की स्थापना आईसीएमआर और एनएमआईआर के संयुक्त प्रयास से की जा रही है. इसके माध्यम से अनगढ़ा और आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े जुटाये जायेंगे. स्थानीय लोगों में पायी जाने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं, बीमारियों और उनके कारणों का अध्ययन कर वैज्ञानिक स्तर पर शोध किया जायेगा. इससे क्षेत्र की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति को समझने और भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है. स्थानीय आबादी को भी मिल सकता है लाभ अनगढ़ा जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्र में इस तरह का अनुसंधान केंद्र स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. शोध के दौरान जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और बीमारियों के पैटर्न को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन को भी मजबूती मिल सकती है. शिलान्यास कार्यक्रम में कई अधिकारी होंगे शामिल मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. कार्यक्रम में खिजरी विधायक राजेश कच्छप, आईसीएमआर के निदेशक डॉ. अनूप अन्विकार, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की उप सचिव धारकत आर. लुईकांग, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और आईसीएमआर-एनएमआईआर फील्ड यूनिट रांची के प्रभारी अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे. इस केंद्र के शुरू होने के बाद रांची के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Damaged bridge over the Radhu River in Silli as rising water levels threaten its structure
राढ़ू नदी पर पुल का बीच का हिस्सा धंसा, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे लोग

रांची/सिल्ली: लगातार हो रही बारिश के कारण सिल्ली प्रखंड में राढ़ू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. पतराहातू से तेतला बड़ाइक टांड़ जाने वाले मार्ग पर नदी के ऊपर बना करीब 10 वर्ष पुराना उच्चस्तरीय पुल अब खतरे में आ गया है. पुल के 18 पिलरों में बीच का हिस्सा बुरी तरह धंस गया है, जिससे इसके कभी भी क्षतिग्रस्त होकर बह जाने की आशंका बनी हुई है. बारिश के बाद बढ़ा नदी का जलस्तर पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश होने के कारण राढ़ू नदी उफान पर है. नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पुल पर भी दबाव बढ़ गया है. वर्तमान में पुल और नदी के पानी के बीच करीब पांच से सात फीट की दूरी ही बची है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही और नदी का जलस्तर और बढ़ा, तो पुल को भारी नुकसान हो सकता है. पुल का बीच का हिस्सा धंसा, बढ़ा खतरा पुल के बीच का हिस्सा धंसने के कारण उसका एक भाग टेढ़ा हो गया है. इसकी जानकारी मिलने के बाद मंगलवार की शाम बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गये. लोगों ने पुल की स्थिति देखकर चिंता जतायी और प्रशासन से तत्काल जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की. हालांकि खतरे के बावजूद मंगलवार को पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद नहीं हुआ. कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार करते नजर आये. वहीं, कुछ ग्रामीणों ने खतरे को देखते हुए वैकल्पिक रास्ते का सहारा लिया. ग्रामीणों में दहशत, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है. पुल का हिस्सा धंसने के बाद भी यदि वाहनों और लोगों की आवाजाही जारी रही, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. बारिश के कारण नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में पुल की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल की तत्काल तकनीकी जांच करायी जाये और खतरे को देखते हुए जरूरत पड़ने पर आवागमन रोक दिया जाये. साथ ही, लोगों की सुरक्षा के लिए मौके पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
NIA Special Court in Jharkhand delivering a verdict in the Chatra terror funding case
चतरा टेरर फंडिंग केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 12 दोषियों को 5 से 10 साल तक की सजा

रांची/चतरा: झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित टीपीसी के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 12 आरोपियों को 5 से 10 साल तक की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इनमें पांच दोषियों को 10 साल, छह को 8 साल और एक दोषी को 5 साल की सजा दी गई है. कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली का था आरोप मामला चतरा के अम्रपाली-मगध कोयला क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप था कि कोयला कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और अन्य व्यवसायियों से लेवी की वसूली की जाती थी. इस रकम का इस्तेमाल प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) की गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जाता था. एनआईए की जांच में सामने आया कि संगठन से जुड़े सदस्य और कैडर स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलते थे. आरोपियों पर कोयला खदानों से खनन और उसके परिवहन को जारी रखने के बदले लेवी वसूलने की व्यवस्था में शामिल होने का आरोप था. 12 दोषियों को मिली सजा अदालत ने बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा समेत 12 आरोपियों को दोषी ठहराया. इनके अलावा विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां भी दोषियों में शामिल हैं. अदालत ने दोषियों को मामले में उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई. टीपीसी और माओवादी कनेक्शन की भी हुई जांच जांच के दौरान एनआईए ने पाया कि प्रतिबंधित टीपीसी के सदस्य और कैडर कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. जांच एजेंसी के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी संगठन से भी जुड़े हुए थे. एनआईए ने यह भी जांच की कि स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियों को संचालित करने के बदले लेवी वसूली जाती थी. 21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट इस मामले में एनआईए ने कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
JCB demolishing a two-storey house built on allegedly encroached government land in Jamshedpur
Jamshedpur News: सरकारी जमीन पर बना दो मंजिला मकान प्रशासन ने किया ध्वस्त, जेसीबी से चला बुलडोजर

जमशेदपुर: छोटा गोविंदपुर मौजा में सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जा कर बनाये गये दो मंजिला पक्के मकान के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की. मंगलवार को एसडीओ के निर्देश पर अंचल प्रशासन की टीम ने जेसीबी की मदद से मकान को ध्वस्त कर दिया. कार्रवाई के दौरान मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद निर्माण को पूरी तरह हटा दिया गया. तीन डिसमिल सरकारी जमीन पर बना था मकान प्रशासन के अनुसार, छोटा गोविंदपुर मौजा में करीब तीन डिसमिल सरकारी भूमि पर दुर्गा पांडेय द्वारा दो मंजिला पक्के मकान का निर्माण कराया गया था. सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन की ओर से स्थल जांच करायी गयी. जांच में शिकायत सही पाये जाने के बाद अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया. जेसीबी लेकर पहुंची प्रशासनिक टीम, हुआ विरोध मंगलवार को अंचल प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची. कार्रवाई शुरू होते ही दुर्गा पांडेय सहित कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. इस दौरान मौके पर काफी हंगामा हुआ. स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और लोगों को समझाकर शांत कराया. इसके बाद प्रशासन ने मकान को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की. करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई में जेसीबी की मदद से दो मंजिला पक्के मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने दिया सख्त संदेश अभियान में अंचल निरीक्षक मनोज कुमार, शैलेश सिन्हा, हल्का कर्मचारी रुद्र कुमार, गोविंदपुर थाना पुलिस और अंचल चौकीदार मौजूद रहे. जमशेदपुर प्रखंड के सीओ मनोज कुमार ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने पर जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती की चर्चा तेज हो गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Kolhan University students receiving degrees during the 7th convocation ceremony in Chaibasa
कोल्हान यूनिवर्सिटी का 7वां दीक्षांत समारोह 29 सितंबर को, 5,446 छात्रों को मिलेगी डिग्री; राज्यपाल होंगे मुख्य अतिथि

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय अपने 7वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों में जुट गया है. विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 29 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा. समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 5,446 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी. दीक्षांत समारोह को लेकर मंगलवार को कोल्हान विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में समारोह की तैयारियों, विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने और कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी. 5,446 विद्यार्थियों को प्रदान की जाएंगी उपाधियां इस वर्ष दीक्षांत समारोह में अलग-अलग पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी. इनमें सबसे अधिक संख्या स्नातकोत्तर यानी पीजी के विद्यार्थियों की है. पीजी: 4,066 विद्यार्थी बीएड: 1,310 विद्यार्थी एमबीए: 30 विद्यार्थी पीएचडी: 40 विद्यार्थी इस तरह कुल 5,446 विद्यार्थी दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करेंगे. तैयारियों को लेकर कुलपति ने दिए निर्देश बैठक में कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने सभी डीन, विभागाध्यक्षों और विभिन्न समितियों के सदस्यों को तैयारियों में आपसी समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण आयोजन है, इसलिए सभी जिम्मेदारियां समय पर और पूरी गंभीरता के साथ पूरी की जानी चाहिए. कुलपति ने अधिकारियों और समिति के सदस्यों से समारोह से जुड़ी तैयारियों की लगातार समीक्षा करने को भी कहा, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. राज्यपाल की मौजूदगी में होगा समारोह कोल्हान विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की मौजूदगी इसे और खास बनाएगी. समारोह में हजारों विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की जाएंगी. दीक्षांत समारोह को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. आने वाले दिनों में कार्यक्रम से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
CID officials investigating alleged JPSC exam irregularities in Jharkhand
JPSC Scam: CID ने 3 आरोपियों को 5 दिन की रिमांड पर लिया, खुलेंगे परीक्षा घोटाले के और राज? देवघर-गिरिडीह से 2 नए आरोपी गिरफ्तार

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है. मामले की पड़ताल कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने पूर्व में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है. एजेंसी अब इनसे गहन पूछताछ कर परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े नेटवर्क, एजेंटों और अन्य संभावित आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी. CID थाना कांड संख्या 16/2026 में गिरफ्तार मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव को अदालत से पांच दिनों की रिमांड मिली है. रिमांड अवधि के दौरान जांच टीम आरोपियों से परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं को लेकर पूछताछ करेगी. 5 दिन की रिमांड में आरोपियों से होगी गहन पूछताछ तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेने के बाद CID की जांच टीम अब मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं की पड़ताल करेगी. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. पूछताछ के दौरान आरोपियों से परीक्षा में सेटिंग, अभ्यर्थियों से संपर्क, आर्थिक लेन-देन और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी. आरोपियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है. देवघर और गिरिडीह से 2 नए आरोपी गिरफ्तार इधर, CID ने एक अन्य मामले में भी कार्रवाई करते हुए देवघर और गिरिडीह से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई कांड संख्या 01/25, दिनांक 1 जनवरी 2025 से जुड़े मामले में की गयी है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवघर जिले के कोदारकोसो निवासी अक्षय कुमार तिवारी और गिरिडीह जिले के हथगढ़ निवासी सुषमा कुमारी के रूप में हुई है. दोनों से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है. क्या सामने आएगा परीक्षा घोटाले का बड़ा नेटवर्क? JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. अब CID की लगातार कार्रवाई के बाद इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना बढ़ गयी है. जांच एजेंसी रिमांड पर लिये गये आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में गड़बड़ी के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं. साथ ही एजेंसी उन लोगों की भी पहचान करने की कोशिश करेगी, जिन्होंने कथित तौर पर इस पूरे मामले में किसी तरह की भूमिका निभाई. सफेदपोशों तक पहुंचेगी जांच? मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच की कड़ियां किसी बड़े नेटवर्क या प्रभावशाली लोगों तक पहुंचती हैं. CID की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के पीछे छिपे लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है. फिलहाल पांच दिन की पुलिस रिमांड को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है. अब आरोपियों से पूछताछ के बाद कौन से नए नाम सामने आते हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Jharkhand CM Hemant Soren meeting Congress leaders amid the JSSC exam controversy in Ranchi
JSSC परीक्षा विवाद पर बोले CM हेमंत सोरेन- युवाओं के हितों की हर हाल में होगी रक्षा, छात्रों ने स्थगित किया CM आवास घेराव

रांची: झारखंड में JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा का भरोसा दिया है. मंगलवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. इस दौरान छात्रहित में कैबिनेट की विशेष बैठक में लिए गए फैसलों को लेकर मुख्यमंत्री का आभार जताया गया. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का सरकार का फैसला विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण कदम है. वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हितों की हर हाल में रक्षा की जाएगी. छात्रों के भविष्य की रक्षा सरकार की प्राथमिकता- CM मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश समेत मंत्रियों और विधायकों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है. सीएम ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार पूरी गंभीरता के साथ फैसले ले रही है. छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. 20 अगस्त का CM आवास घेराव स्थगित सरकार के फैसले के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने फिलहाल 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है. हालांकि, आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द करना उनकी मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन CBI जांच की मांग अभी बाकी है. जब तक इस मांग पर फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रखने की बात छात्रों ने कही है. JSSC CGL नियुक्त अभ्यर्थी भी उतरे सड़क पर दूसरी ओर, JSSC CGL की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले से प्रभावित नवनियुक्त कर्मचारी भी आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि परीक्षा में यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत दोष के नियुक्त अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है. कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें प्रोजेक्ट भवन सचिवालय में काम करने से रोका जा रहा है. इसको लेकर वे सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा- छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए JSSC विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनना अच्छी बात है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार की बातचीत के रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश की सराहना की. राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सवाल पूछें तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए और देश के हर छात्र के साथ खड़े रहने की बात कही. अब आगे क्या होगा? फिलहाल सरकार के फैसले के बाद छात्र आंदोलन में एक नया मोड़ आया है. एक तरफ परीक्षा रद्द होने से आंदोलनकारी छात्रों को राहत मिली है, वहीं CBI जांच को लेकर उनका दबाव बना हुआ है. दूसरी ओर JSSC CGL से नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के फैसले, CBI जांच की मांग और नियुक्त अभ्यर्थियों की कानूनी चुनौती पर सभी की नजर रहेगी.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Newly appointed JSSC CGL ASOs protest outside Project Bhawan in Ranchi amid heavy rain
JSSC CGL नियुक्ति रद्द करने के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरे ASO, प्रोजेक्ट भवन के बाहर भारी बारिश में प्रदर्शन

रांची: JSSC CGL के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (ASO) का आक्रोश बढ़ गया है. मंगलवार को बड़ी संख्या में ASO प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के मुख्य गेट के सामने पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे. भारी बारिश के बावजूद कर्मचारी घंटों तक सड़क पर डटे रहे और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति हासिल की है और कई महीनों से सरकारी सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी का खामियाजा चयनित और कार्यरत अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है. कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. प्रोजेक्ट भवन में प्रवेश से रोका गया मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में नवनियुक्त ASO प्रोजेक्ट भवन पहुंचे. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सचिवालय के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. यहां तक कि प्रोजेक्ट भवन में पहले से कार्यरत कुछ ASO को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गयी. इसके बाद नेपाल हाउस, एफएफपी बिल्डिंग और अन्य कार्यालयों में कार्यरत सहायक प्रशाखा पदाधिकारी भी प्रोजेक्ट भवन के बाहर पहुंच गये. देखते ही देखते सचिवालय के मुख्य गेट के सामने कर्मचारियों की भीड़ जमा हो गयी. कई कर्मचारी सड़क पर बैठकर विरोध करने लगे. 'जिन्होंने गलती की, उन्हें सजा मिले, हमारी नौकरी क्यों जाए?' प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने मेहनत और चयन प्रक्रिया के बाद नौकरी हासिल की, उन्हें बेरोजगार करना उचित नहीं है. कर्मचारियों का कहना था कि "जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें सजा दीजिए, लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी क्यों छीनी जा रही है?" उन्होंने कहा कि उनके परिवारों की आर्थिक जिम्मेदारी अब इसी नौकरी से जुड़ी हुई है. 'हमारी बहाली रद्द होने का कोई आदेश नहीं मिला' प्रदर्शन कर रहे ASO लगातार यह भी कहते रहे कि उन्हें नियुक्ति रद्द होने का कोई व्यक्तिगत आदेश या नोटिस नहीं मिला है. उनका कहना था कि जब तक उन्हें आधिकारिक तौर पर कोई आदेश नहीं मिलता, वे खुद को कार्यरत कर्मचारी मानते हैं. कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी अटेंडेंस बनाने के लिए प्रोजेक्ट भवन के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया. इसको लेकर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कुछ देर नोकझोंक की स्थिति भी बनी. कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों में हुई नोकझोंक ASO सचिवालय में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हें रोक रहे थे. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस हुई. कर्मचारियों ने कहा कि वे सचिवालय के ही अधिकारी हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. बाद में सुरक्षाकर्मियों की ओर से प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और मुख्य गेट को जाम नहीं करने की अपील की गयी. साथ ही स्थिति बिगड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गयी. 'हमारी नियुक्ति कोर्ट के आदेश के बाद हुई है' सहायक प्रशाखा पदाधिकारी जन्मजय सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें नियुक्ति रद्द करने से संबंधित कोई नोटिस नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई है और कार्मिक विभाग की ओर से उन्हें नियुक्त किया गया था. उन्होंने कहा कि कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं. प्रशासन से भी उन्होंने अपील की कि आंदोलन को लेकर किसी तरह की टकराव की स्थिति पैदा न की जाए. प्रोजेक्ट भवन के बाहर जारी रहेगा धरना ASO ने अब प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के सामने लगातार धरना देने की तैयारी शुरू कर दी है. कर्मचारियों की ओर से मौके पर टेंट लगाने की व्यवस्था की जा रही है. उनका कहना है कि जब तक सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति सरकार की ओर से आने वाले आधिकारिक आदेश और बातचीत के आधार पर तय की जाएगी. जरूरत पड़ने पर वे कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे. बारिश में भी घंटों डटे रहे कर्मचारी प्रदर्शन के दौरान मौसम भी कर्मचारियों के हौसले को नहीं तोड़ सका. लगातार बारिश के बीच ASO छाता और रेनकोट लेकर सड़क पर खड़े रहे. कई कर्मचारी पूरी तरह भीग गये. कर्मचारियों का कहना था कि वे अपनी नौकरी और भविष्य बचाने के लिए सुबह से भूखे-प्यासे प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं. अब JSSC CGL से नियुक्त कर्मचारियों के आंदोलन और सरकार के फैसले को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर है. साथ ही संभावित न्यायिक चुनौती के बाद इस मामले में अदालत का रुख भी महत्वपूर्ण होगा.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
JSSC and JPSC candidates concerned after cancellation of recruitment exams and CID investigation in Jharkhand
JSSC CGL समेत 22 परीक्षाएं रद्द, 23 की होगी CID जांच; 1975 कर्मियों समेत कई नियुक्तियां संकट में

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने TDPL के पूर्ण या आंशिक रूप से शामिल रहने वाली 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इनमें JSSC CGL (10/2023) और JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल हैं. वहीं, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश जारी किया गया है. सरकार की ओर से यह फैसला सीआईडी/एसआईटी जांच में सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर लिया गया है. 18 अगस्त को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की. फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, जो रद्द की गयी परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर सरकारी सेवा में कार्यरत हैं. JSSC CGL से नियुक्त 1975 कर्मियों की नौकरी पर संकट JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद इस परीक्षा से चयनित करीब 1975 कर्मचारी सबसे बड़े असमंजस में हैं. ये अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से अलग-अलग सरकारी विभागों में सेवा दे रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़ा हो गया है. कई चयनित अभ्यर्थियों ने पहले ही सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा में योगदान दिया है. कई अभ्यर्थियों ने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के पद पर योगदान किया था. JPSC 11वीं-13वीं के 342 अफसरों का भविष्य भी अधर में सरकार के आदेश का असर JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा पर भी पड़ा है. इस परीक्षा में सफल होकर करीब 342 अधिकारी वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की नियुक्ति और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं. इसके अलावा 64 सीडीपीओ और 56 फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि जिन परीक्षाओं के माध्यम से इनकी नियुक्ति हुई, उन्हें सरकार ने रद्द कर दिया है. 23 परीक्षाओं की अब CID करेगी जांच सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश दिया है. इनमें कई पुरानी JPSC परीक्षाएं भी शामिल हैं. जांच के दायरे में फूड एनालिस्ट, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, सिविल जज, सिविल सेवा परीक्षा, असिस्टेंट इंजीनियर, डेंटल डॉक्टर समेत कई पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं. जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की भी पहल JPSC और JSSC में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई जल्द पूरी कराने के लिए सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आग्रह करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित करने की भी बात कही गई है. सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में निगरानी बढ़ाना और भविष्य में गड़बड़ियों को रोकना है. रद्द की गई परीक्षाओं में कई बड़ी भर्तियां शामिल रद्द की गयी 22 परीक्षाओं में JPSC की कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां शामिल हैं. इनमें सिविल जज जूनियर डिविजन, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एपीपी, सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ और झारखंड पात्रता परीक्षा जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. सरकार के इस फैसले के बाद जहां परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में संतोष है, वहीं नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गयी है. अब इस पूरे मामले में CID जांच, सरकार के अगले कदम और अदालत में संभावित कानूनी चुनौती पर सबकी नजर रहेगी.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Devendra Nath Mahto Hunger Strike
16 दिन की भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म किया, सरकार के फैसले का किया स्वागत

रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मंगलवार को अपना अनशन खत्म कर दिया। राज्य सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों व चयन प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। रांची सदर अस्पताल में जूस पीकर उन्होंने अनशन तोड़ा।   सरकार के फैसले को बताया बड़ी जीत   देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित आंदोलन के दौरान साथ देने वाले छात्रों, समर्थकों और मीडिया का आभार जताया।   महतो ने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हालांकि, उनका जोर भर्ती प्रक्रिया में आगे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर भी रहा है।   सदर अस्पताल में तोड़ा अनशन   लंबी भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत को लेकर लगातार चिंता बनी हुई थी। मंगलवार को रांची के सदर अस्पताल में उनका अनशन समाप्त कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान जयराम महतो ने उन्हें जूस पिलाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने देवेंद्र महतो समेत अन्य प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य जांच भी की।   CBI जांच की मांग अभी भी मुद्दा   JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बावजूद छात्र आंदोलन की CBI जांच की मांग का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ प्रदर्शनकारी अभी भी पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।   झारखंड सरकार के फैसले के बाद देवेंद्र नाथ महतो की 16 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त हो गई है। अब आंदोलन से जुड़े छात्रों की नजर सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं की नई व्यवस्था और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर उठाए जाने वाले अगले कदमों पर है।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
JSSC-JPSC Student Protest
छात्रों की CBI जांच की मांग पर अब भी अड़चन, आंदोलनकारी बोले- मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी

रांची। झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी छात्र अब कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जांच की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।    JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं रद्द   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ TDPL द्वारा 2014 से आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराने की बात कही है।   सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक की पूर्ति माना जा रहा है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।   CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं छात्र   छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बावजूद CBI जांच की उनकी मुख्य मांग अभी पूरी नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बनी है। छात्रों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि परीक्षा व्यवस्था में भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों, इसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी भी दी है, हालांकि आंदोलन की आगे की रणनीति सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी।   देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म किया अनशन   इस बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। सरकार द्वारा JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद उन्होंने फैसले का स्वागत किया और इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया।   हालांकि, अनशन खत्म होने के बावजूद आंदोलन से जुड़े अन्य छात्र CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर अपना रुख बनाए हुए हैं।   आगे की रणनीति पर छात्रों की नजर   अब छात्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच किस एजेंसी से और किस समयसीमा में कराई जाएगी। दूसरी ओर, सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति बनाने का फैसला भी किया है।   ऐसे में JSSC-CGL विवाद का अगला चरण CBI जांच की मांग और रद्द हुई परीक्षाओं से प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर केंद्रित हो सकता है। खासकर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर पड़े असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
Uncontrolled truck climbs divider near Akashdeep Plaza in Golmuri, Jamshedpur
आकाशदीप प्लाजा फिर बना हादसे का हॉटस्पॉट, बेकाबू ट्रक डिवाइडर पर चढ़ा; सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

जमशेदपुर: गोलमुरी थाना क्षेत्र का आकाशदीप प्लाजा एक बार फिर सड़क हादसे को लेकर चर्चा में है. सोमवार देर रात एक ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया. हादसे में ट्रक चालक को हल्की चोट आई, जबकि आसपास से गुजर रहे कई वाहन भी दुर्घटना की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए. घटना के बाद सड़क पर कुछ देर के लिए वाहनों की लंबी कतार लग गई. सूचना मिलने पर गोलमुरी पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया. वाहन में खराबी के बाद अनियंत्रित हुआ ट्रक मिली जानकारी के अनुसार, ट्रक गोलमुरी की ओर से एग्रिको गोलचक्कर की तरफ जा रहा था. इसी दौरान आकाशदीप प्लाजा के पास अचानक ट्रक में तकनीकी खराबी आ गई. चालक वाहन को संभाल पाता, इससे पहले ही ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर से जा टकराया और उसके ऊपर चढ़ गया. टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक चालक को झटका लगा और उसे हल्की चोट आई. हालांकि, राहत की बात यह रही कि हादसे के समय आसपास से गुजर रहे दूसरे वाहन ट्रक की चपेट में नहीं आए. अगर दुर्घटना के समय सड़क पर वाहनों की संख्या अधिक होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. हादसे के बाद सड़क पर लगा जाम ट्रक के डिवाइडर पर चढ़ने के बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई. देखते ही देखते दोनों तरफ वाहनों की कतार लगने लगी. स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी. इसके बाद गोलमुरी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई. पुलिस की कार्रवाई के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हुआ और सड़क पर वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया. लगातार हादसों से बढ़ी चिंता आकाशदीप प्लाजा और गोलमुरी इलाके में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही काफी अधिक रहती है. ऐसे में तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और सड़क किनारे अवैध पार्किंग जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है. कुछ दिन पहले भी इसी इलाके में ट्रक की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत की घटना सामने आई थी. इसके बाद एक बार फिर ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने से स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सड़क सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर आजसू पार्टी के जिला प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए. दुर्घटना संभावित स्थानों पर नियमित निगरानी और सख्त ट्रैफिक व्यवस्था की जरूरत है. उन्होंने गोलमुरी समेत शहर के अन्य दुर्घटना संभावित चौक-चौराहों और प्रमुख सड़कों पर नियमित ट्रैफिक जांच कराने की मांग की. साथ ही तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर नियंत्रण और अवैध पार्किंग रोकने की जरूरत बताई. पर्याप्त संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग अप्पू तिवारी ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त ट्रैफिक संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि रात के समय ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों को पहले से सावधान करने के लिए स्पष्ट संकेत और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए. फिलहाल पुलिस ने दुर्घटना के बाद यातायात को सामान्य करा दिया है. हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि आकाशदीप प्लाजा जैसे हादसा संभावित स्थानों पर सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Students studying in a modern library as Dumka prepares to build a new district library
दुमका के छात्रों को बड़ी सौगात! 7.54 करोड़ से बनेगा आधुनिक जिला पुस्तकालय, बदल जाएगी पढ़ाई की तस्वीर

दुमका: जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. दुमका में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेट ऑफ द आर्ट जिला पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा. इसके निर्माण पर करीब 7.54 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पुस्तकालय के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से 7 करोड़ 54 लाख 53 हजार 871 रुपये का टेंडर जारी किया गया है. निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 365 दिनों का समय दिया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर और व्यवस्थित माहौल मिलने की उम्मीद है. खासकर JPSC, JSSC, UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है. पुस्तकालय में विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए शांत वातावरण के साथ किताबों और संदर्भ सामग्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. इससे उन छात्रों को विशेष लाभ मिल सकता है, जिन्हें घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह या अनुकूल वातावरण नहीं मिल पाता है. दुमका में पहले से राजकीय पुस्तकालय में पहुंचते हैं सैकड़ों छात्र दुमका संताल परगना का प्रमंडलीय मुख्यालय होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र भी है. यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. दुमका के राजकीय पुस्तकालय में भी पिछले कुछ वर्षों में सुविधाओं का विस्तार किया गया है. वर्तमान में करीब 500 से 600 विद्यार्थी नियमित रूप से वहां पहुंचकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे में नए आधुनिक जिला पुस्तकालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. नया पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों के लिए अध्ययन के अतिरिक्त स्थान और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे. श्रीरामकृष्ण आश्रम परिसर में निर्माण की तैयारी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आधुनिक जिला पुस्तकालय के निर्माण के लिए श्रीरामकृष्ण आश्रम उच्च विद्यालय परिसर में खाली जमीन का चयन किया गया है. स्कूल का पूरा परिसर करीब 17 बीघा 17 कट्ठा में फैला हुआ है. विद्यालय परिसर में पहले से ही कई विकास कार्य चल रहे हैं. प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित होने के बाद अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का काम चल रहा है. इसके अलावा डायट के लिए मल्टीपर्पज बिल्डिंग, हॉस्टल और क्वार्टर का निर्माण भी कराया जा रहा है. इसी परिसर में आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने से विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाई के लिए कई बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. एकलव्य स्कूल में भी बनेगा पुस्तकालय दुमका जिले के काठीकुंड स्थित एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल, फिटकोरिया के विद्यार्थियों के लिए भी पुस्तकालय की सुविधा विकसित करने की तैयारी है. इसके लिए 11 लाख 81 हजार 710 रुपये की लागत से टेंडर जारी किया गया है. यहां पुस्तकालय का निर्माण कार्य करीब तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. स्कूल का संचालन करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और अब विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय समेत अन्य जरूरी शैक्षणिक संसाधन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. छात्रों के लिए बढ़ेगी पढ़ाई की सुविधा दुमका में जिला पुस्तकालय और एकलव्य स्कूल में पुस्तकालय निर्माण की पहल को जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आधुनिक पुस्तकालयों के निर्माण से विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन माहौल, किताबों और संदर्भ सामग्री तक आसान पहुंच मिलेगी. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए 7.54 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आधुनिक जिला पुस्तकालय आने वाले समय में पढ़ाई और तैयारी का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Fire breaks out at a cotton shop in Latehar after a welding spark ignites stored cotton
लातेहार में वेल्डिंग की चिंगारी से रूई दुकान में लगी भीषण आग, ढाई लाख की संपत्ति राख

लातेहार: सदर थाना क्षेत्र के अमवाटिकर रोड स्थित पिंटू रूई दुकान में सोमवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गयी. बताया जा रहा है कि पास की दुकान में चल रहे वेल्डिंग कार्य के दौरान निकली चिंगारी रूई की दुकान में जा गिरी, जिसके बाद देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. इस घटना में दुकान में रखी रूई समेत करीब ढाई लाख रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गयी. वेल्डिंग की चिंगारी से लगी आग दुकान संचालक पिंटू के अनुसार, उनकी दुकान के बगल में स्थित प्रकाश फर्नीचर में वेल्डिंग का काम चल रहा था. इसी दौरान वेल्डिंग से निकली चिंगारी दुकान के अंदर गिर गयी. दुकान में बड़ी मात्रा में रूई रखी होने के कारण चिंगारी के संपर्क में आते ही आग तेजी से फैल गयी. कुछ ही देर में दुकान से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं. घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग मौके पर जुट गये. स्थानीय लोगों ने शुरू किया आग बुझाने का प्रयास आग की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने अपने स्तर से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया. रूई के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई. बाद में अग्निशमन विभाग की दमकल मौके पर पहुंची. स्थानीय लोगों और दमकल कर्मियों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. समय रहते आग बुझा लिये जाने से आसपास स्थित अन्य दुकानों को भी इसकी चपेट में आने से बचा लिया गया. ढाई लाख रुपये के नुकसान का अनुमान दुकान संचालक ने बताया कि आग से दुकान में रखी रूई और अन्य सामान जलकर बर्बाद हो गया है. प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 2.5 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है. घटना के बाद दुकानदार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गयी है. दुकान संचालक ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है. वहीं, घटना के बाद स्थानीय दुकानदारों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Road construction and strengthening work underway in rural areas of Madhupur, Jharkhand
मधुपुर में सड़कों की बदलेगी तस्वीर, 11 करोड़ से 7 प्रमुख मार्गों का होगा कायाकल्प

मधुपुर: मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से सात महत्वपूर्ण सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया गया. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ लोगों को जर्जर सड़कों से राहत मिलने की उम्मीद है. प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजनाओं का शिलान्यास किया. वहीं, फौजी मोड़ स्थित शिलापट्ट का अनावरण विधायक प्रतिनिधि शब्बीर हसन ने किया. ग्रामीण इलाकों में बेहतर होगा सड़क संपर्क शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. ग्रामीण इलाकों में अच्छी सड़कें होने से लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बाजार, स्कूल, अस्पताल समेत अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंच आसान होगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ग्रामीणों से सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण को लेकर जो वादे किये गये थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है. आने वाले समय में विधानसभा क्षेत्र के अन्य मार्गों को भी बेहतर करने की दिशा में काम किया जायेगा. इन सात सड़कों का होगा सुदृढ़ीकरण मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत मधुपुर विधानसभा क्षेत्र की सात प्रमुख सड़कों को शामिल किया गया है. फौजी मोड़ से करीकादो: पटवाबाद मुख्य सड़क से करीकादो तक करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. मीना बाजार मार्ग: पीडब्ल्यूडी सड़क से मीना बाजार, भाया टिटहियाटांड़ तक सड़क को बेहतर किया जायेगा. लालगढ़ से देन: करीब 1.52 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. कानो मदरसा मोड़ से धावाटांड़: मारनी मोड़ से इस मार्ग तक करीब 1.260 किलोमीटर सड़क का काम होगा. मदनकट्टा से बुड़ीकुरा मोड़: करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. करौं से चोरबदिया: पीडब्ल्यूडी पथ के इस हिस्से में करीब 2.18 किलोमीटर सड़क को बेहतर किया जायेगा. तारापुर मोड़ से दुमरबाद सीमा: जौत नीच टोला होते हुए करीब 2 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. ग्रामीणों को मिलेगी जर्जर सड़कों से राहत इन सड़कों के सुदृढ़ीकरण के बाद मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर बारिश के मौसम में खराब सड़क और आवागमन की परेशानी झेलने वाले ग्रामीणों को राहत मिल सकती है. बेहतर सड़क बनने से रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को भी सुविधा होगी. कार्यक्रम में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि शिलान्यास कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य फारूक अंसारी, जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि इमरान अंसारी, दिनेश्वर किस्कू, प्रकाश मंडल, अबूतालिब अंसारी, गुलाम अशरफ, पवन यादव, रौशन झा, नेमूल रबीउल्लाह, करौं जिला परिषद सदस्य ललन सिंह, भागीरथ गोस्वामी, मुन्ना रवानी, प्रहलाद दास, मिट्ठू सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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