पलामू। झारखंड के पलामू जिले में घरेलू विवाद का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के पिपराही नावाडीह गांव में शराब खरीदने के लिए पत्नी से पैसे नहीं मिलने पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान नंद यादव के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 400 रुपये की मांग पर बढ़ा विवाद जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात नंद यादव शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचने के बाद उसने पत्नी से शराब खरीदने के लिए 400 रुपये मांगे। पत्नी द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि नंद यादव ने कथित तौर पर पत्नी के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वह अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों और ग्रामीणों को शक हुआ। जब दरवाजा नहीं खुला तो ग्रामीणों ने उसे तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां नंद यादव गंभीर हालत में मिला। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित ग्रामीणों ने तत्काल उसे रामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस कर रही मामले की जांच रामगढ़ थाना प्रभारी ओमप्रकाश शाह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पति-पत्नी के बीच पैसे को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद यह घटना हुई। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद परिजन, मित्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। समय पर मदद मिलना जीवन बचा सकता है।
गुमला। बरसात के मौसम के साथ झारखंड के गुमला जिले में सर्पदंश के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 मार्च से 3 जुलाई 2026 के बीच 125 दिनों में जिले में सर्पदंश के 83 मामले सामने आए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया है तथा लोगों से सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए अस्पताल पहुंचने की अपील की है। बिशुनपुर में सबसे अधिक मामले स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिशुनपुर प्रखंड में सबसे अधिक 19 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बसिया में 15 मामले सामने आए, जबकि गुमला सदर अस्पताल में 35 सर्पदंश पीड़ितों का इलाज किया गया। भरनो में तीन, रायडीह, सिसई और पालकोट में दो-दो, जबकि चैनपुर और घाघरा में एक-एक मामला दर्ज हुआ है। वर्तमान में जिले में कुल 1,380 एंटी स्नेक वेनम वायल उपलब्ध हैं। इनमें 595 वायल जिला अस्पताल गुमला में सुरक्षित रखी गई हैं, जबकि पालकोट, बिशुनपुर, भरनो, बसिया, सिसई, कामडारा, रायडीह, घाघरा, चैनपुर और डुमरी के स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। शुक्रवार को पालकोट और घाघरा प्रखंड में चार लोग जहरीले सांप के काटने से घायल हो गए। सभी को गुमला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स रेफर किया गया। अन्य तीन मरीजों का इलाज जारी है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
रांची। झारखंड में लापता बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया है। राज्य के सभी 24 जिलों के थानों को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सीआईडी की पहल पर लागू की गई इस व्यवस्था के तहत अब झारखंड पुलिस देशभर के लापता और बरामद बच्चों के राष्ट्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ गई है। इससे बच्चों की पहचान, ट्रैकिंग और बरामदगी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी। सीसीटीएनएस ऑपरेटर करेंगे राष्ट्रीय रिकॉर्ड से मिलान नई व्यवस्था के तहत सभी थानों के सीसीटीएनएस ऑपरेटर किसी भी बरामद या अज्ञात बच्चे के हुलिए, फोटो और अन्य विवरण का मिलान मिशन वात्सल्य पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड से करेंगे। यह केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक चाइल्ड’ जैसी प्रणालियों को एक साथ जोड़ता है। इससे अलग-अलग राज्यों की पुलिस और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में तेजी आएगी और बच्चों की जल्द पहचान संभव हो सकेगी। रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा कि मिशन वात्सल्य पोर्टल झारखंड पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उनके अनुसार, लापता बच्चों की तलाश में समय सबसे अहम होता है और यह पोर्टल विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाकर बच्चों की सुरक्षित बरामदगी की संभावना को मजबूत करेगा। साथ ही मानव तस्करी जैसी गंभीर घटनाओं पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच झारखंड में 3,025 बच्चे लापता हुए। इनमें से 2,788 बच्चों को बरामद कर लिया गया, जबकि 237 बच्चे अब भी लापता हैं। वर्ष 2025 में अकेले 717 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। वहीं रांची में जनवरी से जून 2026 के बीच 42 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 34 को सुरक्षित बरामद किया जा चुका है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीआईडी ने सभी थानों को पोर्टल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रांची। झारखंड के चार प्रमुख शहरों - रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो में जल्द ही डाक विभाग की प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा शुरू हो सकती है। इस संबंध में विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन शहरों के लोगों को पार्सल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलिवरी की सुविधा उपलब्ध होगी। नई सेवा का उद्देश्य डाक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है। देश के छह शहरों में सफल रहा प्रयोग डाक विभाग ने मार्च 2026 में इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत देश के छह बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में की थी। विभाग के अनुसार, इन शहरों में सेवा को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और डिलिवरी की गुणवत्ता तथा समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। इसके तहत ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल-टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर अंतिम डिलिवरी तक हर चरण की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। पारदर्शी ट्रैकिंग व्यवस्था से डिलिवरी प्रक्रिया पर भरोसा भी बढ़ेगा। मंजूरी के बाद शुरू होगी सेवा डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा के लागू होने से झारखंड के इन चार शहरों में डाक वितरण पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। विशेष रूप से जरूरी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण पार्सलों की समय पर डिलिवरी सुनिश्चित करने में यह सेवा अहम भूमिका निभाएगी। विभाग को उम्मीद है कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो के लोग इस आधुनिक प्रीमियम डाक सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी में पिछले कुछ वर्षों से लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार को प्रशासन ने बंद कर दिया है। बाजार के कारण सुबह और शाम के समय इलाके में लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी, जिससे आम लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने अचानक हाट बाजार पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन के इस फैसले के विरोध में शनिवार को सैकड़ों सब्जी विक्रेता सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित दुकानदारों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाजार को दोबारा शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि हाट बंद होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। क्या कह रहे दुकानदार? विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मोरहाबादी इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों को शांत कराने का प्रयास किया और उन्हें वैकल्पिक स्थान पर दुकान लगाने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक बाजार दोबारा शुरू करने पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन और दुकानदारों के बीच समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
रांची। झारखंड में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है। अगले चार दिनों में बारिश की उम्मीद भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले चार दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 7 जुलाई तक कई इलाकों में बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। खेती पर दिखने लगा असर बारिश की कमी के कारण धान समेत खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, प्रशासन किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और मौसम के अनुसार खेती से जुड़े निर्णय लेने की सलाह दे रहा है। रांची समेत कई जिलों को मिल सकती है राहत मौसम विभाग के अनुसार रांची, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, धनबाद और आसपास के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से भी लोगों को राहत मिलने की संभावना है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। हैदरनगर थाना से आठ वर्षीय मासूम की हत्या और एक दंपती पर जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी चितरंजन पासवान शुक्रवार तड़के पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी के फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उसे पकड़ने के लिए जिलेभर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। हत्या और जानलेवा हमले का है आरोपी पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी चितरंजन पासवान हैदरनगर थाना क्षेत्र के बिंदु बीघा गांव का निवासी है। उस पर एक आठ वर्षीय बच्चे की बेरहमी से हत्या करने और एक दंपती को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर थाना हाजत में रखा था। हालांकि, शुक्रवार सुबह वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर हिरासत से भाग निकलने में सफल हो गया। आरोपी की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस उसके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और परिचितों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही आसपास के थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट कर दिया गया है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल थाने से हत्या जैसे गंभीर मामले के आरोपी का फरार हो जाना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिस हिरासत से ही आरोपी भाग सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार अभियान चला रही है। वहीं, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किन परिस्थितियों में थाने से फरार हुआ और इस मामले में कहीं पुलिसकर्मियों की लापरवाही या किसी की मिलीभगत तो नहीं थी।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पैतृक संपत्ति के विवाद ने रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना को जन्म दिया। पुंदाग ओपी थाना क्षेत्र में बड़े भाई पर अपने छोटे भाई और उसकी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगा है। घटना बुधवार देर रात इमामबाड़ा के पास की बताई जा रही है। घायल दंपति की पहचान सलीम अंसारी और उनकी पत्नी इशरत जहां के रूप में हुई है। दोनों गंभीर रूप से झुलस गए हैं और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज जारी है। खिड़की से पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग पुलिस के अनुसार, देर रात सलीम अंसारी अपनी पत्नी के साथ कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान उनके बड़े भाई लतीफ अंसारी कथित तौर पर खिड़की के पास पहुंचे और कमरे के भीतर पेट्रोल छिड़कने के बाद आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा कमरा आग की लपटों से घिर गया। आग की तपिश से दोनों की नींद खुली और उन्होंने किसी तरह कमरे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन तब तक वे गंभीर रूप से झुलस चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जमीन विवाद बना हमले की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में आरोपी ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। घायलों के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी लतीफ अंसारी के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच में जुटी पुलिस पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि वारदात के दौरान की गतिविधियों और किसी अन्य संभावित आरोपी की भूमिका का पता लगाया जा सके। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर संपत्ति विवाद को लेकर बढ़ती हिंसा और पारिवारिक रिश्तों में दरार को उजागर कर दिया है।
रांची। झारखंड में ई-कल्याण पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि जारी होने में लगातार हो रही देरी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सत्र 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के लिए आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अब तक छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं मिला है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने कॉलेज फीस, हॉस्टल शुल्क, किराया और अन्य शैक्षणिक खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। कई छात्र पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिली है, जिससे विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। फीस जमा करने और पढ़ाई जारी रखने में हो रही परेशानी रांची सहित राज्य के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि ई-कल्याण छात्रवृत्ति उनके लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण सहारा है। समय पर राशि नहीं मिलने के कारण कई छात्रों को फीस जमा करने, हॉस्टल का किराया चुकाने और अन्य खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। छात्र संगठनों ने कई बार संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा और सोशल मीडिया के माध्यम से भी सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ओबीसी छात्रों पर सबसे ज्यादा असर, बजट पर भी उठे सवाल जानकारी के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है। छात्रों का आरोप है कि फंड जारी होने में देरी और विभागीय स्तर पर लापरवाही के कारण भुगतान अटका हुआ है। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में छात्रवृत्ति मद के लिए करीब 39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि यह राशि वास्तविक जरूरत की तुलना में काफी कम है। सरकार से जल्द समाधान की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता तुषार दुबे ने कहा कि सरकार अन्य योजनाओं का भुगतान समय पर कर रही है, लेकिन विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित है। वहीं शोधार्थी चंदन कुमार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की। इस पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि कुछ जिलों के लिए राशि जारी कर दी गई है और पूरे मामले की समीक्षा कर जल्द स्थिति स्पष्ट की जाएगी। छात्र अब सरकार से लंबित छात्रवृत्ति राशि जल्द जारी करने और ई-कल्याण पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों कीमती धातुओं के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर ₹347 बढ़कर ₹1,52,002 पहुंच गई, जबकि चांदी ₹1,214 महंगी होकर ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस साल रिकॉर्ड तेजी, हजारों रुपये महंगे हुए सोना-चांदी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब ₹19,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी लगभग ₹21,000 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इस दौरान दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। बड़े शहरों में भी ऊंचे दाम, खरीदारी से पहले बरतें सावधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, भोपाल और लखनऊ सहित देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.55 लाख से ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के बढ़ते दामों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें और खरीदारी से पहले विश्वसनीय स्रोतों से ताजा कीमत की पुष्टि अवश्य करें। इससे नकली आभूषण या गलत मूल्य वसूले जाने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
रांची। रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) जमीन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार महतो को पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड और मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में उसकी अहम भूमिका रही है। गवाह के बयान से मजबूत हुई जांच एसीबी ने जांच के दौरान सोनमैती देवी का बयान दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि प्रमोद कुमार महतो उन प्रॉपर्टी डीलरों में शामिल था, जिन्होंने उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में अंगूठे का निशान लगाने के लिए बुलाया था। सोनमैती देवी के अनुसार, जमीन का एक हिस्सा उनके नाम पर था। जांच में एसीबी को यह भी पता चला है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया में प्रमोद महतो ने उनकी सक्रिय रूप से मदद की थी। फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेची गई जमीन जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन की बिक्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई और वार्ड पार्षद के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर दस्तावेज बनाए गए। एसीबी का मानना है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया ताकि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा जा सके। धोखाधड़ी का पुराना मामला भी आया सामने जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पटना निवासी कामिनी रंजन के नाम 17.35 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए करीब 45.72 लाख रुपये का सेल डीड तैयार किया गया था, लेकिन उन्हें कभी जमीन का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2020 में कामिनी रंजन ने पटना की अदालत में प्रमोद कुमार महतो के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि पैसा लौटाने के लिए दिया गया चेक भी बाउंस हो गया था। एसीबी ने प्रमोद कुमार महतो को पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किया है, लेकिन वह अब तक एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। इससे जांच एजेंसी का संदेह और गहरा गया है। वहीं, इस मामले में पहले ही एक बिल्डर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला बरियातू थाना क्षेत्र का है, जहां थाना परिसर के पीछे दिनदहाड़े एक महिला से बाइक सवार बदमाशों ने सोने की चेन झपट ली और फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। सब्जी खरीदकर घर लौट रही थीं महिला जानकारी के अनुसार, घटना अर्पण विला, विद्यापति मार्ग स्थित तेतर टोली गेट के पास की है। पीड़ित महिला सब्जी खरीदकर अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान अपाचे बाइक पर सवार दो बदमाश उनके पास पहुंचे। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। मौका मिलते ही एक बदमाश ने महिला के गले से सोने की चेन झपट ली और दोनों तेज रफ्तार से फरार हो गए। अचानक हुई इस वारदात से महिला घबरा गईं और शोर मचाया, लेकिन तब तक आरोपी आंखों से ओझल हो चुके थे। थाना के पास वारदात से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना बरियातू थाना के बेहद करीब होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी और भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब थाना के आसपास ही अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो शहर के अन्य इलाकों में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाकर जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द कार्रवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। लगातार बढ़ रही छिनतई की घटनाओं ने खासकर महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।
रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस लौटा दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में कटौती से जुड़े एक पत्र के बाद मंत्री ने नाराजगी जताते हुए यह फैसला लिया। पिछले पांच दिनों से वह बिना सुरक्षा कर्मियों के ही सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में भी वह बिना सुरक्षा के पहुंचे। हालांकि, वह अभी भी मंत्री के तौर पर आवंटित सरकारी वाहन का उपयोग कर रहे हैं। सुरक्षा वाहन कम करने के पत्र से बढ़ी नाराजगी जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने वित्त विभाग को पत्र भेजकर मंत्री की सुरक्षा में तैनात एक वाहन वापस लेने का निर्देश दिया था। अब तक उनकी सुरक्षा में चार वाहन और 16 सुरक्षा कर्मी तैनात थे। यह पत्र वित्त विभाग के संयुक्त सचिव के माध्यम से वित्त मंत्री तक पहुंचा। पत्र मिलने के बाद मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटाने का निर्णय लिया। 'तीन गाड़ियों में 16 जवानों की तैनाती व्यावहारिक नहीं' सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री का मानना था कि यदि एक वाहन वापस ले लिया जाता है तो 16 सुरक्षा कर्मियों को केवल तीन वाहनों में समायोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने सुरक्षा में तैनात सभी कर्मियों और सुरक्षा वाहनों को वापस भेज दिया। फिलहाल वह बिना सरकारी सुरक्षा के ही अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, मंत्री के इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।
रांची। रांची सदर अस्पताल में दवा आपूर्ति से जुड़े टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिस एजेंसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति में विफल रहने के कारण कई बार नोटिस और शोकॉज जारी किया गया, उसी एजेंसी को बाद में “संतोषजनक कार्य एवं आचरण” का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उसे दूसरी दवा की आपूर्ति का नया टेंडर भी मिल गया। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, वीके ड्रग्स एंड कंपनी को ई-टेंडर के माध्यम से एंटी रैबीज वैक्सीन की हजारों वायल की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय में कंपनी ने कुल मांग का केवल लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 3200 वायल ही उपलब्ध कराए। वैक्सीन की कमी का सीधा असर डॉग बाइट के मरीजों पर पड़ा और अस्पताल प्रबंधन को दूसरी कंपनी से वैक्सीन खरीदकर मरीजों का इलाज कराना पड़ा। आपूर्ति में देरी को लेकर एजेंसी ने दिया नोटिस आपूर्ति में देरी को लेकर 16 मार्च और 25 अप्रैल 2026 को एजेंसी को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद 12 मई को सिविल सर्जन ने शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा कि निविदा शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज 17 दिन बाद, 29 मई को उसी एजेंसी को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिसमें उसके काम और आचरण को संतोषजनक बताया गया। मामले में स्टोर इंचार्ज अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने उपाधीक्षक के निर्देश पर फाइल आगे बढ़ाई थी, जबकि उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने इससे अनभिज्ञता जताते हुए किसी भी भूमिका से इनकार किया। दूसरी ओर, सिविल सर्जन ने सफाई दी कि अनुभव प्रमाण पत्र एजेंसी के पुराने कार्य रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया गया, क्योंकि पहले उसने नियमित रूप से दवाओं की आपूर्ति की थी। एजेंसी ने आपूर्ति में देरी के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका-ईरान तनाव, परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ने को जिम्मेदार बताया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य को एक साथ 11 नए जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही झारखंड में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इससे पहले सोहराई-खोवर पेंटिंग राज्य का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद था। यह उपलब्धि झारखंड के पारंपरिक शिल्प, हस्तकला और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। झारक्राफ्ट ने राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में झारखंड तसर सिल्क साड़ियां एवं फैब्रिक, आदिवासी आभूषण, बांस की कलाकृतियां, डोकरा क्राफ्ट, कुचाई सिल्क साड़ियां और फैब्रिक, भागैया साड़ियां एवं फैब्रिक, दुमका चादर, बडोनी कठपुतलियां, पांची परहन पांची साड़ियां एवं फैब्रिक, केसरिया कलाकंद, बेनाम शिल्प और जादुपटिया पेंटिंग शामिल हैं। और कौन कौन से नाम हैं शामिल? झारखंड का तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक, उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक बुनाई के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वहीं, आदिवासी आभूषण राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और हस्तकला का अनूठा उदाहरण हैं। बांस की कलाकृतियां स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को दर्शाती हैं, जिनकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। इस कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए, झारक्राफ्ट राज्य के कई अन्य अनोखे उत्पादों के लिए जीआइ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रखकर झारखंड के जीआई इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।मंदार, पैतकर पेंटिंग, निमुचा (करनी) शॉल, देवघर पेड़ा, कुसुमी लाख, लाख की चूड़ियां, साल के बीज, महुआ के फूल, करंज के बीज, रागी, रुगड़ा और धुस्का जैसे उत्पादों के आवेदन फिलहाल जीआई रजिस्ट्री के पास जांच के लिए हैं।बता दे इन उत्पादों को भी जीआई टैग मिलने से झारखंड के हस्तशिल्प, कृषि और खाद्य उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्टता का प्रमाण होता है। यह एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो उत्पाद के नाम और पहचान की कानूनी सुरक्षा करता है। इससे न केवल उत्पादों की मौलिकता सुरक्षित रहती है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी मांग और मूल्य भी बढ़ता है। साथ ही उन कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक समुदायों को आर्थिक लाभ मिलता है, जिन्होंने पीढ़ियों से इन कलाओं और शिल्प परंपराओं को जीवित रखा है। कैसे मिलता है जीआई टैग? किसी उत्पाद के लिए GI TAG प्राप्त केने के लिए सबसे पहले तो आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। जीआई टैग के लिए कोई भी व्यक्तिगत निर्माता, संगठन इसके लिए भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले Controller General of Patents, Designs and Trade Marks (CGPDTM) में आवेदन कर सकता है। साक्ष्यों के आधार पर CGPDTM उस उत्पाद के उचित मानकों का परीक्षण करती है। जैसे ही यह उत्पाद मानकों पर खरा उतरता है इसे GI टैग दिया जाता है।
रांची। रांची के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कांके रोड से चिरौंदी को जोड़ने वाली नई सड़क परियोजना को योजना प्राधिकार समिति की मंजूरी मिल गई है। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी गई। अब प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। इनर रिंग रोड का अहम हिस्सा होगी नई सड़क प्रस्तावित सड़क करीब 2.97 किलोमीटर लंबी होगी और रांची के इनर रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी। यह सड़क कांके रोड के झिरगाटोली क्षेत्र को सीधे चिरौंदी से जोड़ेगी। इसके बनने से पंडरा से बड़गाईं (बरियातू) तक इनर रिंग रोड का संपर्क और मजबूत होगा। वर्तमान में पंडरा से कांके रोड तक पहले चरण और चिरौंदी से लेम होते हुए बड़गाईं तक तीसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि, कांके रोड से चिरौंदी तक का दूसरा चरण लंबित था। अब इस हिस्से को भी मंजूरी मिलने से पूरी परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा सीधा और आसान संपर्क नई सड़क बनने के बाद चिरौंदी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को कांके रोड पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अभी लोगों को बोड़ेया, ब्लॉक चौक या मोरहाबादी मैदान होकर कांके रोड जाना पड़ता है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं। नई सड़क शुरू होने से यात्रा आसान होगी, ट्रैफिक दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। दूसरी सड़क परियोजना को भी मिली मंजूरी योजना प्राधिकार समिति ने बैठक में बरलंगा से गोला-मुरी तक 4.83 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से रांची और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनेगी और शहरी बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 2 और 3 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य के कई जिलों में तेज हवा, वज्रपात और भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई को लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, राज्य के अन्य जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 3 और 4 जुलाई को भी अधिकांश क्षेत्रों में मौसम का यही रुख बना रहेगा। इसके अलावा 5 जुलाई को रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 6 जुलाई को भी रांची समेत कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। तापमान में उतार-चढ़ाव, कई जगह हुई अच्छी बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान रांची के अधिकतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि मेदिनीनगर के तापमान में 1.2 डिग्री की गिरावट आई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार को रामगढ़ में 60.5 मिमी, कोडरमा में 20 मिमी, जमशेदपुर में 4 मिमी और बहरागोड़ा में सर्वाधिक 84.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, 1 जून से 1 जुलाई तक राज्य में सामान्य 197.8 मिमी के मुकाबले केवल 99.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। रांची में अब भी 13 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि गढ़वा और साहिबगंज में सबसे कम बारिश होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
रांची। झारखंड सरकार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार करने जा रही है। इसके तहत वर्षों से अलग-अलग विभागों, अंगीभूत कॉलेजों, परीक्षा शाखाओं और विभिन्न योजनाओं के नाम पर संचालित बैंक खातों की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। अब प्रत्येक विश्वविद्यालय का केवल एक सिंगल नोडल अकाउंट (एसएनए) होगा, जिसके माध्यम से सभी वित्तीय लेनदेन किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था के लिए "स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट (Statutes for Finance and Account Management) इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड" का मसौदा (Draft ) तैयार कर लिया गया है। ई-समर्थ पोर्टल से होगा पूरा वित्तीय प्रबंधन नई व्यवस्था लागू होने के बाद बजट तैयार करने, भुगतान, लेखांकन, बैंक मिलान, ऑडिट और वित्तीय रिपोर्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया ई-समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होगी। नकद भुगतान और मैनुअल वाउचर की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। प्रत्येक भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे किसी भी समय उसकी जांच और ऑडिट करना आसान होगा। सरकार का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाना है। तीन स्तर की मंजूरी के बाद होगा भुगतान वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मेकर, चेकर और अप्रूविंग अथॉरिटी की तीन-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी। किसी भी भुगतान को जारी करने से पहले इन तीनों स्तरों से स्वीकृति आवश्यक होगी। यदि स्वीकृत बजट से अधिक राशि खर्च करनी होगी तो उसके लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए कंटिंजेंसी फंड बनाने का भी प्रावधान किया गया है। 90 से 365 दिनों में लागू होगी नई व्यवस्था अध्यादेश लागू होने के बाद सभी विश्वविद्यालयों को 90 से 365 दिनों के भीतर अपने पुराने बैंक खातों और उनमें उपलब्ध राशि को सिंगल नोडल अकाउंट में स्थानांतरित करना होगा। इसके बाद सभी अनुदान, योजनागत राशि और विशेष उद्देश्य के लिए मिलने वाले फंड का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। किसी अन्य मद में राशि खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। समय पर वेतन और वित्तीय पारदर्शिता पर जोर नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि सभी विश्वविद्यालयों में प्रत्येक माह की तीन तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा वर्षों से लंबित वित्तीय गड़बड़ियों और ऑडिट आपत्तियों को भी दूर किया जा सकेगा। वर्तमान में कई विश्वविद्यालयों में दर्जनों बैंक खाते संचालित हैं, जिनमें से कई वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। कुछ मामलों में बड़ी राशि का समायोजन भी लंबित है, जिससे नियमित रूप से ऑडिट में आपत्तियां उठती रही हैं। सरकार का मानना है कि सिंगल नोडल अकाउंट और डिजिटल वित्तीय प्रणाली लागू होने से राज्य के विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा। साथ ही सरकारी अनुदानों के उपयोग की निगरानी भी पहले से अधिक प्रभावी और आसान हो जाएगी।
रांची। रांची के ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में रांची पुलिस और उत्पाद विभाग ने मंगलवार देर रात संयुक्त छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान फैक्ट्री से 303 पेटी विदेशी शराब जब्त की गई और राजद नेता तथा बिहार के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार, उनके चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत राय को गिरफ्तार कर लिया गया। बुधवार शाम तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। छापेमारी का नेतृत्व सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह ने किया। कार्रवाई रात करीब 12 बजे शुरू हुई और सुबह छह बजे तक चली। फर्जी लेबल लगाकर दूसरे राज्यों में बिक्री का आरोप प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में तैयार शराब पर दूसरे नामी ब्रांडों के फर्जी लेबल लगाकर उसे उत्तर प्रदेश और दिल्ली के नाम पर बाजार में कम कीमत पर बेचा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार प्लांट में 8 पीएम, आफ्टर डार्क और रॉयल्सन गोल्ड जैसे ब्रांडों के नाम से शराब तैयार और पैक की जा रही थी। कई बोतलों पर "For Sale in Uttar Pradesh" और "For Sale in Delhi" अंकित पाया गया, जिससे अन्य राज्यों में अवैध आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है। भारी मात्रा में शराब बरामद, विभाग की भूमिका पर भी सवाल छापेमारी के दौरान 70 पेटी किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर, 218 पेटी आफ्टर डार्क ब्लू, 7 पेटी 8 पीएम और 78 पेटी रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की जब्त की गई। जांच में लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन, गलत स्टॉक रखने, फर्जी दस्तावेजों के जरिए परिवहन और राज्य सरकार को राजस्व नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। गौरतलब है कि इसी फैक्ट्री पर दो वर्ष पहले भी उत्पाद विभाग ने कार्रवाई कर इसे सील किया था। वहीं, प्लांट में विभाग की ओर से बॉन्ड अफसर की तैनाती के बावजूद कथित तौर पर फर्जी लेबल लगाकर शराब की सप्लाई होने के खुलासे ने उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में चार दिनों से जारी कैब चालकों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। हालांकि हड़ताल खत्म होने के साथ ही यात्रियों को एक बड़ा झटका लगा है। कैब एग्रीगेटर कंपनियों उबर और रैपिडो ने अपने बेस किराए में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे रोजाना ऑफिस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य स्थानों तक सफर करने वाले लोगों को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। वहीं, ओला के साथ अभी अंतिम सहमति नहीं बनने के कारण उसके चालकों का आंदोलन जारी है। ओला, उबर और रैपिडो राज्य में ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े करीब 13 हजार चालक हड़ताल पर थे, जिनमें लगभग चार हजार चालक सिर्फ रांची के थे। चालक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित ओझा ने बताया कि रैपिडो ने नई दरें तत्काल लागू कर दी हैं, जबकि उबर ने सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद संशोधित किराया लागू करने का आश्वासन दिया है। नई दरों के अनुसार नई दरों के अनुसार उबर की मिनी टैक्सी का बेस किराया 48 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और सेडान का किराया 55 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। वहीं सेवन सीटर कैब का बेस किराया 65 रुपये से बढ़कर 120 रुपये हो गया है। दूसरी ओर, रैपिडो ने छोटी गाड़ियों का बेस किराया 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये और सेडान का किराया 60 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये कर दिया है। यूनियन ने क्या कहा? यूनियन का कहना है कि लंबे समय से कम बेस किराए के कारण चालक आर्थिक नुकसान झेल रहे थे। नई दरों से उनकी आय में सुधार होगा। हालांकि इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो कम दूरी के लिए कैब सेवाओं का उपयोग करते हैं। ओला ने फिलहाल किराए में 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पर विचार करने की बात कही है, इसलिए उसके चालकों का आंदोलन अभी जारी रहेगा।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित चीलरा गांव में 15 वर्षीय किशोरी पूजा कुमारी का शव घर के पास स्थित एक कुएं से बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। किशोरी पिछले 18 जून से लापता थी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद 20 जून को सरैयाहाट थाना में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के समीप स्थित कुएं में शव देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रेम प्रसंग की चर्चा के बीच ऑनर किलिंग की आशंका मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब जांच के दौरान किशोरी के एक युवक के साथ प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। इसके बाद क्षेत्र में ऑनर किलिंग की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिस स्थान से शव बरामद हुआ, वह मृतका के घर और गांव के बेहद करीब है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शव की स्थिति भी संदिग्ध थी और किशोरी की जीभ बाहर निकली हुई थी। इससे दम घुटने या हत्या की आशंका और गहरा गई है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलने पर एसआई विकेश मेहरा और एएसआई मनोज सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। थाना प्रभारी राजेंद्र यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। साथ ही कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।