नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को मिलने वाली 24वीं किस्त का इंतजार अब बढ़ता जा रहा है। सरकार अब तक योजना की 23 किस्तें जारी कर चुकी है। पिछली किस्त जून 2026 में जारी हुई थी और इसका लाभ करीब 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिला था।
पीएम किसान योजना की किस्त आमतौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती है। जून में 23वीं किस्त जारी होने के बाद चार महीने का अंतराल अक्टूबर 2026 में पूरा हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी कर सकती है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी 24वीं किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। इसलिए किसानों को अंतिम तारीख के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को किस्त की राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचती है और बीच में किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती।
24वीं किस्त का लाभ पाने के लिए किसानों को अपनी ई-केवाईसी, बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी सही रखने पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी जानकारी में गड़बड़ी होने पर किस्त अटक सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, आकलन वर्ष 2026 में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 39 फीसदी बढ़कर 576 हो गई। आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 415 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह वृद्धि देश में बढ़ती आय, कारोबारी विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है। एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाता भी बढ़े रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ अति-उच्च आय वर्ग में ही वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि एक करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। आकलन वर्ष 2026 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 5,35,672 हो गई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 4,71,419 था। यानी एक साल में इस वर्ग में करीब 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। चार साल में चार गुना बढ़े 100 करोड़ से अधिक आय वाले करदाता 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आकलन वर्ष 2022 में इस वर्ग में सिर्फ 142 करदाता थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 301 हो गई, यानी 112 फीसदी की वृद्धि हुई। हालांकि, आकलन वर्ष 2024 में संख्या घटकर 284 रह गई। इसके बाद फिर तेजी आई और 2025 में यह आंकड़ा 415 तथा 2026 में बढ़कर 576 हो गया। इस तरह आकलन वर्ष 2022 के मुकाबले 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या करीब चार गुना हो चुकी है। एक करोड़ से अधिक आय वालों की संख्या दोगुने से ज्यादा एसबीआई रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या भी लगातार बढ़ी है। आकलन वर्ष 2022 में यह संख्या 1,93,800 थी, जो 2023 में 2,69,184 और 2024 में 3,49,974 हो गई। 2025 में यह आंकड़ा 4,71,419 और 2026 में 5,35,672 पहुंच गया। यानी आकलन वर्ष 2022 की तुलना में अब एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। पहली तिमाही में 8 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान एसबीआई रिसर्च ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, ऋण वृद्धि 19.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि एफसीएनआर(बी) जमा योजना के जरिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है और यह बढ़कर करीब 707 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सभी क्षेत्रों में समान नहीं है आर्थिक मजबूती हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में एक जैसी वृद्धि नहीं दिख रही है। जून तिमाही में स्वास्थ्य सेवा, सीमेंट और मनोरंजन जैसे कुछ क्षेत्रों के मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि जहां उच्च आय वर्ग और कुछ कारोबारों की कमाई में तेज वृद्धि हुई है, वहीं कॉरपोरेट क्षेत्र के कुछ हिस्से अब भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा नीचे खुला, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में रहा। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा गिरा सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 100 से अधिक अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,892.92 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 करीब 22.55 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 24,343.45 पर पहुंच गया। बड़े बैंकिंग शेयरों और आईटी कंपनियों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए कारोबार में सतर्क रुख अपनाया। इन सेक्टर्स में दिखी ज्यादा कमजोरी शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 0.98 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक और एफएमसीजी इंडेक्स में भी करीब 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। रियल्टी, सीमेंट, आईटी, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी रही। हालांकि, निफ्टी केमिकल्स में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 0.45 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। क्रूड ऑयल 89 डॉलर के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भारतीय बाजार में तेजी की राह में बड़ी बाधा बन सकती है। 24,000-24,600 के दायरे में रह सकता है निफ्टी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति में बड़ा सुधार नहीं होने तक निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे में कारोबार कर सकता है। तकनीकी स्तर पर 24,329 से 24,240 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 24,540 से 24,666 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी 24,170 के नीचे फिसलता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह 23,575 के स्तर तक जा सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार के वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत तिमाही नतीजों वाले चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशे जा सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 70.71 अंक यानी 0.09% फिसलकर 78,009.25 पर, जबकि Nifty 50 29.85 अंक यानी 0.12% गिरकर 24,366 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा। किन वजहों से दबाव में रहा बाजार निवेशकों का ध्यान वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर बना रहा। Brent क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों को लेकर भी बाजार सतर्क नजर आया। सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन कारोबार में ऑटो, एनर्जी, FMCG, मेटल, फार्मा और रियल्टी जैसे कई सेक्टर दबाव में रहे, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया शेयरों में करीब 1% की मजबूती देखने को मिली। बाजार में 1,855 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,244 शेयरों में गिरावट रही।