झारखंड

मैक्लुस्कीगंज से देवघर रवाना हुआ कांवरियों का जत्था

मैक्लुस्कीगंज से देवघर के लिए रवाना हुआ कांवरियों का जत्था, हेसालौंग शिव मंदिर में की पूजा

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
मैक्लुस्कीगंज से देवघर रवाना होने से पहले शिव मंदिर में पूजा करते कांवरिये
मैक्लुस्कीगंज के कांवरियों ने हेसालौंग शिव मंदिर में की पूजा

मैक्लुस्कीगंज। सावन के पावन महीने में मैक्लुस्कीगंज से कांवरियों का एक जत्था बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर के लिए रवाना हुआ। यात्रा शुरू करने से पहले सभी श्रद्धालुओं ने हेसालौंग शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।

 

पूजा के बाद शुरू हुई बाबा धाम की यात्रा

 

देवघर जाने वाले कांवरियों में कृष्णा प्रसाद, बिशेश्वर मुंडा, शुभम प्रसाद, रेखा देवी, नीतू मुंडा और शंकर प्रसाद समेत अन्य श्रद्धालु शामिल हैं। मंदिर में पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से यात्रा के सफल और मंगलमय होने की कामना की।

 

सुलतानगंज से पैदल देवघर जाएंगे कांवरिये

 

हेसालौंग शिव मंदिर में पूजा करने के बाद कांवरियों का जत्था सुलतानगंज के लिए रवाना होगा। वहां गंगा जल का संकल्प लेने के बाद सभी कांवरिये पैदल बाबा धाम देवघर की यात्रा करेंगे।

कांवरिये पवित्र गंगाजल लेकर देवघर पहुंचेंगे और बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। सावन के महीने में कांवर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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भुइयांडीह में फुटबॉल का महासंग्राम, 32 टीमों ने दिखाया दम, अर्पित स्पोर्टिंग क्लब बना चैंपियन

जमशेदपुर। भुइयांडीह दुर्गापूजा मैदान में दो दिनों तक फुटबॉल का रोमांच देखने को मिला। शहीद कालीपदो भुईयां की स्मृति में आयोजित टूर्नामेंट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की 32 टीमों ने हिस्सा लिया। रोमांचक मुकाबलों के बाद बागुनहातु की अर्पित स्पोर्टिंग क्लब ने खिताब अपने नाम किया।   32 टीमों ने दिखाया शानदार खेल   अखिल भारतीय भुईयां समाज कल्याण समिति और सेंट्रल भीम बिरसा मुंडा फुटबॉल अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया। मैदान में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं बड़ी संख्या में दर्शक मुकाबले देखने पहुंचे और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।   समापन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विधायक पूर्णिमा साहू, पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां समेत कई अतिथि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।   अर्पित स्पोर्टिंग क्लब को 11 साइकिल और ट्रॉफी   फाइनल मुकाबले के बाद बागुनहातु की अर्पित स्पोर्टिंग क्लब को विजेता घोषित किया गया। चैंपियन टीम को 11 साइकिल, शील्ड और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।   वहीं सीतारामडेरा की भानिया स्पोर्टिंग क्लब उपविजेता रही। उसे 9 साइकिल, शील्ड और ट्रॉफी प्रदान की गई। तीसरे स्थान पर जगन्नाथ एफसी बर्मामाइंस रही, जिसे 7 साइकिल, शील्ड और ट्रॉफी मिली।   चौथे स्थान पर रही भुईयां समाज विकास समिति सीतारामडेरा की टीम को साइकिल, जर्सी, शील्ड और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।   महिला प्रदर्शनी मैच भी रहा आकर्षण   टूर्नामेंट के दौरान महिला प्रदर्शनी फुटबॉल मैच का भी आयोजन किया गया। इसमें चार महिला टीमों ने हिस्सा लिया। महिला खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। आयोजन समिति की ओर से महिला खिलाड़ियों को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।   ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने पर जोर   समापन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत इन प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें प्रशिक्षण देने और आगे बढ़ने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराने की है।   उन्होंने कहा कि ग्रामीण खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। उचित अवसर और सुविधाओं के अभाव में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते हैं।   छात्र आंदोलन का भी किया जिक्र   चंपाई सोरेन ने अपने संबोधन में झारखंड के छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज को दुखद बताया।   फुटबॉल टूर्नामेंट के सफल आयोजन में आयोजन समिति और स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रतियोगिता ने एक ओर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में खेल के प्रति उत्साह भी बढ़ाया।

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झींकपानी एसीसी सीमेंट प्लांट बंदी से 1600 से अधिक कर्मियों के रोजगार पर संकट
एसीसी सीमेंट प्लांट बंदी का संकट बरकरार, 1600 से अधिक कर्मियों के रोजगार पर खतरा

झींकपानी। एसीसी सीमेंट प्लांट, झींकपानी में बंदी नोटिस की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन प्लांट के भविष्य को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। कंपनी ने 15 जून को नोटिस जारी कर 16 अगस्त से प्लांट बंद करने की घोषणा की थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी 16 अगस्त को ठेका मजदूरों को काम पर बुलाया गया, जबकि स्थायी मजदूरों को काम पर नहीं बुलाया गया। कंपनी की ओर से इस संबंध में अभी तक आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।   1 मई से बंद है उत्पादन     झींकपानी सीमेंट वर्क्स में 1 मई से उत्पादन ठप है। वहीं, 13 मई से माल का डिस्पैच भी बंद है। प्लांट में करीब 1600 मजदूर कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 1500 ठेका मजदूर और 74 स्थायी कर्मचारी शामिल हैं। उत्पादन बंद होने से इन सभी के रोजगार पर संकट गहरा गया है।   वर्ष 1946 में स्थापित यह प्लांट करीब 80 साल पुराना है। इसके बंद होने का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।   ठेका मजदूरों को महीने में 15 दिन काम     बंदी के विरोध में मजदूरों के साथ स्थानीय लोगों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों ने भी आवाज उठाई है। प्लांट को चालू रखने की मांग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय श्रम आयोग और जिला प्रशासन से की जा चुकी है।   31 मई को मंत्री दीपक बिरुवा और चाईबासा उपायुक्त की मौजूदगी में प्रबंधन, मजदूरों और प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। हालांकि, वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बैठक में यह सहमति बनी थी कि उत्पादन और डिस्पैच बंद रहने के बावजूद ठेका मजदूरों को बंदी अवधि तक महीने में 15 दिन काम दिया जाएगा।   स्थायी कर्मचारियों को लेकर भी असमंजस     प्लांट में करीब 74 स्थायी मजदूर हैं। इनमें से कुछ का तबादला एसीसी की दूसरी इकाइयों में किए जाने की जानकारी है। वहीं, बाकी कर्मचारियों को नियमानुसार मिलने वाले लाभ देकर काम से मुक्त किए जाने की चर्चा है।   ठेका मजदूरों का कहना है कि पीएफ, ग्रेच्युटी और कंपनी से मिलने वाले अन्य लाभों को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इसी वजह से बंदी नोटिस की अवधि पूरी होने के बावजूद कुछ मजदूरों को काम पर बुलाया जा रहा है।   स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर     प्लांट बंद होने की स्थिति में झींकपानी क्षेत्र के कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। मजदूरों के अलावा छोटे-बड़े व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और अन्य लोग भी इस प्लांट से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।   चर्चा है कि केंद्र सरकार की ओर से कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है, जिसके कारण 16 अगस्त को प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मजदूरों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मामले को सुलझाने के लिए जल्द ही दोबारा त्रिपक्षीय वार्ता हो सकती है। फिलहाल उत्पादन बंद होने और प्लांट के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बीच 1600 से अधिक कर्मियों के रोजगार पर संकट बना हुआ है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
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JPSC-JSSC आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की अपील
JPSC-JSSC Protest: देवेंद्र महतो की अपील- सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं, पूरी भर्ती प्रक्रिया हो दुरुस्त

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सदर अस्पताल में इलाजरत छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार से बड़ी मांग की है। उन्होंने वार्ता में शामिल छात्र प्रतिनिधियों से अपील की है कि बातचीत केवल कुछ परीक्षाओं को रद्द कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छात्रों की मांग पूरी भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार की होनी चाहिए।   केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं     देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि कुछ परीक्षाओं को रद्द कर देना छात्रों की लड़ाई का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकता। यदि परीक्षा रद्द होने के बाद भी पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो भविष्य में फिर भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।   उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों से सरकार के सामने ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग रखने को कहा, जिसमें परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक हर चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।   योग्य अभ्यर्थियों के हितों की हो रक्षा     छात्र नेता ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता के कारण योग्य अभ्यर्थियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और इसमें अपना समय और पैसा लगाते हैं।   ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से मौजूदा विवाद का समाधान करने के साथ-साथ भर्ती व्यवस्था की उन कमियों को दूर करने की मांग की, जिनकी वजह से बार-बार परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।   परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार की मांग     देवेंद्र नाथ महतो ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान सिस्टम में स्थायी सुधार को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, अभ्यर्थियों की पहचान, OMR और डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा तथा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए।   उनका कहना है कि सुधार ऐसा होना चाहिए, जिससे भविष्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओं पर अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो और उन्हें अपनी मांगों के लिए बार-बार आंदोलन करने की जरूरत न पड़े।   अस्पताल में इलाजरत, आंदोलन पर नजर     अनशन के कारण देवेंद्र नाथ महतो को रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में इलाज के बावजूद उन्होंने कहा कि उनका मन जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के साथ है।   उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों से धैर्य बनाए रखने और एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि छात्रों की एकजुटता और लगातार संघर्ष से उनकी मांगों को मजबूती मिलेगी। अब छात्र प्रतिनिधियों के सामने चुनौती है कि सरकार के साथ होने वाली वार्ता में तत्काल मांगों के साथ भर्ती व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाए।

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