रांची। एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के तहत आज पहली बार रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में मुकाबले खेले जाएंगे। डूरंड कप के 135 साल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब झारखंड की राजधानी रांची इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी कर रही है। इसे राज्य के खेल इतिहास के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और फुटबॉल प्रेमियों में मुकाबलों को लेकर खासा उत्साह है। जमशेदपुर एफसी और डिफेंडर्स एफसी के बीच पहला मुकाबला रांची में आज का पहला मैच जमशेदपुर एफसी और श्रीलंका के डिफेंडर्स एफसी के बीच खेला जाएगा। मैच शाम 5 बजे बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में शुरू होगा। यह मुकाबला डूरंड कप के ग्रुप चरण का हिस्सा है और झारखंड के दर्शकों को पहली बार अपने शहर में इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय क्लब फुटबॉल देखने का मौका मिलेगा। झारखंड में फुटबॉल को मिलेगा नया मंच राज्य सरकार, भारतीय सेना और डूरंड कप आयोजन समिति का मानना है कि रांची को मेजबान शहर बनाए जाने से झारखंड में फुटबॉल को नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और राज्य में खेल अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी। डूरंड कप के तहत रांची में ग्रुप चरण के कई मुकाबलों के साथ एक क्वार्टर फाइनल मैच भी आयोजित किया जाएगा। दर्शकों में उत्साह, सुरक्षा के कड़े इंतजाम मुकाबलों को लेकर रांची में सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रेमियों के स्टेडियम पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। आयोजकों को उम्मीद है कि डूरंड कप की सफल मेजबानी से रांची भविष्य में भी बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम केंद्र, रांची ने 23 से 25 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। 23 जुलाई को लातेहार और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां और कोडरमा समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 24 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं 25 जुलाई को लातेहार, चतरा और मध्य झारखंड से सटे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो 1 जून से 22 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में 299.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षापात 414.9 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी राज्य में अब तक 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर, कोडरमा और गोड्डा जैसे जिलों में दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की आगामी सक्रियता से वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है, हालांकि किसानों और आम लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
रांची। एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें डूरंड कप 2026 को लेकर राजधानी रांची में उत्साह चरम पर है। बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित होने वाले मुकाबलों के लिए बुधवार से दर्शकों को फ्री 'जीरो टिकट' का वितरण शुरू हो गया। पहले ही दिन टिकट काउंटरों पर फुटबॉल प्रेमियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सभी मैचों में दर्शकों के लिए मुफ्त प्रवेश राज्य सरकार ने डूरंड कप के सभी मुकाबलों में दर्शकों के लिए नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की है। हालांकि, स्टेडियम में प्रवेश के लिए जीरो टिकट अनिवार्य होगा। इससे बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों को बिना किसी शुल्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल मुकाबलों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। 12 काउंटरों से हो रहा टिकट वितरण टिकट वितरण के लिए खेल विभाग और आर्मी विंग की ओर से 12 काउंटर बनाए गए हैं। इनमें गेट नंबर-11 से 13 के बीच 10 काउंटर और गेट नंबर-23 के पास दो अतिरिक्त काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। टिकट सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक दिए जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम चार टिकट मिल रहे हैं और इसके लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। फुटबॉल प्रेमियों ने सराही व्यवस्था टिकट लेने पहुंचे दर्शकों ने राज्य सरकार और खेल विभाग की व्यवस्थाओं की सराहना की। उनका कहना है कि कई काउंटर बनाए जाने से भीड़ के बावजूद टिकट आसानी से मिल रहे हैं। खेल प्रेमियों का मानना है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी झारखंड के लिए गर्व की बात है और इससे राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। 26 जुलाई को होगा उद्घाटन मुकाबला खेल निदेशक छवि रंजन ने बताया कि डूरंड कप के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, टिकट वितरण और दर्शकों की अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को शाम 5 बजे बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में उद्घाटन मुकाबले के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत होगी। राज्यवासियों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने की अपील भी की गई है।
रांची। राजधानी रांची के सदर अस्पताल स्थित सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में मंगलवार तड़के एक बड़ा हादसा टल गया। नामकुम निवासी 28 वर्षीय छोटू महतो अस्पताल की लिफ्ट में करीब दो घंटे तक फंसा रहा। काफी देर तक मदद नहीं मिलने और इमरजेंसी व्यवस्था के समय पर सक्रिय नहीं होने से अस्पताल की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, छोटू महतो अपनी परिजन रीता कुमारी से मिलने अस्पताल आए थे, जो लेबर वार्ड में भर्ती हैं। मंगलवार सुबह करीब चार बजे वह नई बिल्डिंग से नीचे आ रहे थे, तभी बीच रास्ते में लिफ्ट अचानक बंद हो गई। कुछ देर के लिए लिफ्ट के भीतर अंधेरा छा गया, जिससे युवक घबरा गया और लगातार मदद के लिए आवाज लगाने लगा। उसने फोन से संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब एक घंटे बाद वहां से गुजर रही एक नर्स ने युवक की आवाज सुनी और अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बार लिफ्ट ऑपरेटर, टेक्नीशियन और इमरजेंसी नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तत्काल कोई सहायता नहीं मिली। आखिरकार सुबह लगभग छह बजे टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों की मदद से युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद युवक ने अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत भी दी। बताया जा रहा है कि अस्पताल की कई लिफ्टें रात के समय बिजली या तकनीकी खराबी के कारण अक्सर बंद हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लिफ्ट का सेंसर और ऑटोमेटेड रेस्क्यू सिस्टम सही तरीके से काम करता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। सदर अस्पताल में 500 बेड की सुपर स्पेशियलिटी सुविधा होने के बावजूद केवल तीन लिफ्ट ऑपरेटर तैनात हैं, जबकि कई लिफ्टमैन को अन्य कार्यों में लगा दिया गया है। वहीं, लिफ्ट मेंटेनेंस का जिम्मा भी ऐसी एजेंसी को सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं, जिसे इस क्षेत्र का पर्याप्त अनुभव नहीं है। घटना के बाद अस्पताल की लिफ्ट सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची पहली बार एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप की मेजबानी करने जा रही है। 26 जुलाई से 16 अगस्त तक मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में कुल सात मुकाबले खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का औपचारिक उद्घाटन 26 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। उद्घाटन समारोह में कई वीवीआईपी और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। छह लीग मैच और एक क्वार्टर फाइनल इस आयोजन के तहत ग्रुप-सी के छह लीग मैच और एक क्वार्टर फाइनल मुकाबला रांची में खेला जाएगा। राज्य सरकार, भारतीय सेना, जिला प्रशासन और खेल विभाग ने आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। करीब 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाले बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। मैदान की पिच, फ्लडलाइट, खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके। टूर्नामेंट में फुटबॉल प्रेमियों को जमशेदपुर एफसी के स्टार विंगर ऋत्विक दास और अनुभवी डिफेंडर प्रतीक चौधरी सहित कई प्रमुख खिलाड़ियों का खेल देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा श्रीलंका की डिफेंडर्स एफसी की भागीदारी से प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप भी मिलेगा। ग्रुप-सी में जमशेदपुर एफसी, इंडियन एयर फोर्स, एससी दिल्ली और डिफेंडर्स एफसी आमने-सामने होंगे। सभी मैचों में प्रवेश निशुल्क रहेगा दर्शकों के लिए सभी मैचों में प्रवेश निशुल्क रहेगा, लेकिन स्टेडियम में प्रवेश केवल फ्री टिकट के माध्यम से ही मिलेगा। टिकट वितरण के लिए स्टेडियम परिसर में विशेष काउंटर बनाए गए हैं और क्षमता के अनुसार ही टिकट जारी किए जाएंगे। खेल विभाग ने सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की भी व्यवस्था की है। 26 जुलाई को शाम 5 बजे उद्घाटन मुकाबले में जमशेदपुर एफसी का सामना डिफेंडर्स एफसी (श्रीलंका) से होगा। रांची में पहली बार हो रहे इस आयोजन से न केवल फुटबॉल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि झारखंड के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से सीखने और प्रेरणा लेने का भी सुनहरा मौका मिलेगा।
रांची। रांची के खेलगांव स्थित विभिन्न मैदानों में आयोजित 65वीं राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता के तीसरे दिन कोल्हान और संथाल प्रमंडल की टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट चरण में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता के नॉकआउट मुकाबले रविवार से शुरू हुए, जहां खिलाड़ियों ने अनुशासन, बेहतर तालमेल और उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय दिया। मुकाबले खेलगांव प्रैक्टिस ग्राउंड, बीआईटी ग्राउंड-1, बीआईटी ग्राउंड-2 और जैप-1 डोरंडा मैदान में खेले गए। अंडर-17 बालिका वर्ग और अंडर-17 बालक वर्ग अंडर-17 बालिका वर्ग में कोल्हान प्रमंडल ने पलामू प्रमंडल को 10-0 के बड़े अंतर से हराकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। वहीं दूसरे मुकाबले में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल ने संथाल प्रमंडल को 1-0 से शिकस्त दी। अंडर-17 बालक वर्ग में संथाल प्रमंडल ने पलामू प्रमंडल को 3-0 से हराया, जबकि कोल्हान प्रमंडल ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल को 6-1 से पराजित कर नॉकआउट चरण में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दिन का सबसे बड़ा मुकाबला अंडर-15 बालक वर्ग में देखने को मिला, जहां संथाल प्रमंडल ने पलामू प्रमंडल को 12-0 से करारी शिकस्त दी। यह प्रतियोगिता के तीसरे दिन की सबसे बड़ी जीत रही। इस शानदार प्रदर्शन ने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास के साथ दर्शकों और टीम प्रबंधन का उत्साह भी बढ़ाया। धीरसेन सोरेंग ने कहा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के धीरसेन सोरेंग ने कहा कि सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता का उद्देश्य स्कूली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि सभी टीमों ने खेल भावना और अनुशासन का परिचय दिया है तथा नॉकआउट चरण के मुकाबलों में प्रतिस्पर्धा और अधिक रोमांचक होने की उम्मीद है। प्रतियोगिता के चौथे दिन अपने-अपने समूहों में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली प्रमंडलीय विजेता टीमों के बीच नॉकआउट मुकाबले खेले जाएंगे। इन मुकाबलों के विजेता विभिन्न वर्गों के सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगे। प्रतियोगिता का भव्य समापन और फाइनल मुकाबले 21 जुलाई को आयोजित होंगे, जहां विभिन्न वर्गों में राज्य के नए चैंपियनों का फैसला किया जाएगा।
रांची। राजधानी रांची की यातायात व्यवस्था अगले पांच वर्षों में पूरी तरह बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर पथ निर्माण विभाग ने शहर में 10 नए फ्लाईओवर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इन परियोजनाओं पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि भू-अर्जन, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य कार्यों के कारण कुल लागत इससे अधिक हो सकती है। विभाग ने अधिकांश परियोजनाओं का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया है और तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में कई परियोजनाएं धरातल पर उतर जाएंगी। इन प्रमुख मार्गों पर बनेंगे फ्लाईओवर योजना के तहत बरियातू रोड, कांके रोड, स्वर्णरेखा और हरमू नदी के किनारे, कांटाटोली से नेवरी तक तथा मेकन-बिरसा चौक-डीपीएस कॉरिडोर में फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। बरियातू रोड पर करमटोली से सेवेन डे हॉस्पिटल तक 5.2 किलोमीटर लंबा फोरलेन फ्लाईओवर प्रस्तावित है, जबकि कांके रोड पर एपीएन शाहदेव चौक से रिनपास होते हुए रिंग रोड तक 8.5 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाया जाएगा। स्वर्णरेखा नदी के किनारे हिनू ओवरब्रिज से जगन्नाथपुर मंदिर तक दो-दो लेन का फ्लाईओवर प्रस्तावित है। हरमू नदी किनारे मुक्तिधाम से रेडिशन ब्लू तक भी एलिवेटेड मार्ग बनाने की योजना है। वहीं कांटाटोली से कोकर चौक, बूटी मोड़ होते हुए नेवरी तक बहु-चरणीय फ्लाईओवर परियोजना पर जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुति दी जाएगी। मेकन से डीपीएस तक पांच फ्लाइओवर का निर्माण मेकन चौक से बिरसा चौक और डीपीएस क्षेत्र तक दो चरणों में करीब 630 करोड़ रुपये की लागत से पांच फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इनमें मेकन चौक से बिरसा चौक तक फोरलेन फ्लाईओवर, हिनू चौक से एयरपोर्ट तक टू-लेन फ्लाईओवर, डीपीएस चौक से खूंटी रोड, विधानसभा और पुराना विधानसभा से बिरसा चौक तक अलग-अलग एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से एयरपोर्ट जाने वाले वाहनों को जाम से राहत मिलेगी और बिरसा चौक सहित आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा। 17 फ्लाईओवर वाला शहर बनेगा रांची राज्य सरकार पहले ही सिरमटोली-मेकन चौक और कांटाटोली-बहुबाजार फ्लाईओवर का निर्माण करा चुकी है। रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर भी तैयार हो चुका है, जबकि बहुबाजार से सिरमटोली तक कनेक्टिंग फ्लाईओवर इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा चौक और हरमू चौक से रातू रोड तक नए फ्लाईओवरों का टेंडर भी जारी हो चुका है। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी में कुल 17 फ्लाईओवर होंगे। पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर केवल रांची ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए फ्लाईओवर और फोरलेन सड़कों के निर्माण पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी, अस्पतालों तक पहुंचने में समय बचेगा और लोगों का सफर अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनेगा।
रांची। राजधानी रांची के तुपुदाना ओपी क्षेत्र में दो नाबालिग लड़कियों को कथित रूप से बंधक बनाकर उनके साथ यौन अपराध किए जाने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो विधि-विरुद्ध बालक (किशोर) भी शामिल हैं। पुलिस ने एक नाबालिग के सूचना देने के बाद दूसरी पीड़िता का सुरक्षित रेस्क्यू किया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। पीड़िता की सूचना पर हुई कार्रवाई सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि एक नाबालिग लड़की आरोपियों के चंगुल से निकलकर पुलिस तक पहुंची और घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुपुदाना स्थित एक मकान में छापेमारी की, जहां से दूसरी नाबालिग को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मौके से छह आरोपियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण कराया है और मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। परिचित होने का आरोप, जांच में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िताएं कुछ आरोपियों को पहले से जानती थीं। पुलिस के अनुसार, दोनों नाबालिगों को स्मार्ट सिटी घुमाने के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद उन्हें एक मकान में ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उन्हें बंधक बनाकर उनके साथ यौन अपराध किया गया। इसी दौरान एक लड़की वहां से निकलने में सफल रही और उसने पुलिस को सूचना दी। चार आरोपी जेल भेजे गए, दो किशोर रिमांड होम पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए चार वयस्क आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि दो विधि-विरुद्ध बालकों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर रिमांड होम भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि पीड़िताओं की पहचान गोपनीय रखी जा रही है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
रांची। सोशल मीडिया पर किसी नाबालिग की निजी या अश्लील तस्वीर साझा करना कितना गंभीर अपराध है, इसका एक अहम उदाहरण रांची की पोक्सो अदालत के फैसले से सामने आया है। पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश बी.के. श्रीवास्तव की अदालत ने नाबालिग छात्रा की अश्लील तस्वीर खींचकर उसे ब्लैकमेल करने और सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में दोषी विशाल होरो को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2021 में नामकुम थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। तस्वीरें खींचकर दी वायरल करने की धमकी अभियोजन के अनुसार, आरोपी की पहचान पीड़िता से वर्ष 2021 में हुई थी। उसने बहाने से छात्रा को कोकर स्थित अपने किराये के मकान पर बुलाया और कपड़े बदलने के दौरान मोबाइल से उसकी अश्लील तस्वीरें खींच लीं। इसके बाद आरोपी ने तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता पर मिलने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उसने तस्वीरें इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर साझा कर दीं तथा पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। फोटो शेयर या फॉरवर्ड करना भी अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, केवल अश्लील तस्वीर बनाना ही नहीं, बल्कि उसे जानबूझकर सोशल मीडिया पर साझा करना या आगे फॉरवर्ड करना भी कानूनन अपराध है। यदि मामला किसी 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे से जुड़ा हो तो पोक्सो एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। दोषी को जेल, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। ब्लैकमेल की स्थिति में क्या करें यदि कोई व्यक्ति निजी तस्वीर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता है, तो उसकी बात मानने के बजाय सभी चैट, स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। मामले की तुरंत पुलिस या साइबर थाने में शिकायत करें और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पोस्ट या अकाउंट की रिपोर्ट करें। यदि पीड़ित नाबालिग है, तो अभिभावकों को बिना देरी किए पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान के पास मंगलवार को पुलिस की नियमित वाहन जांच के दौरान एक थार चालक ने पुलिसकर्मी को टक्कर मारकर फरार होने की घटना को अंजाम दिया। हादसे में लालपुर थाना के चालक राजेश यादव घायल हो गए, जिन्हें सिर में चोट लगने के बाद तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी चालक की तलाश तेज कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। टूटा हुआ शीशा देखकर रोकने का किया गया था प्रयास जानकारी के अनुसार, लालपुर थाना की पुलिस पार्क प्राइम होटल के समीप नियमित अपराध नियंत्रण और वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस की नजर एक थार वाहन पर पड़ी, जिसका अगला शीशा पूरी तरह टूटा हुआ था। संदेह के आधार पर पुलिस ने चालक को जांच के लिए रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने वाहन रोकने के बजाय तेज रफ्तार से भागने की कोशिश की। इसी दौरान उसने पुलिसकर्मी राजेश यादव को टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तलाश जारी घटना के तुरंत बाद घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल पहुंचाया गया। रांची के सिटी डीएसपी केवी रमन ने बताया कि फरार चालक की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। वाहन और चालक की पहचान होते ही गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मोरहाबादी मैदान के आसपास सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि क्षेत्र में कई शराब की दुकानें संचालित होने के कारण कुछ लोग वाहन में बैठकर शराब पीते हैं और फिर तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं। इससे आए दिन सड़क हादसे और कानून व्यवस्था से जुड़ी घटनाएं सामने आती रहती हैं। लोगों ने प्रशासन से क्षेत्र में निगरानी और सख्त कार्रवाई बढ़ाने की मांग की है।
रांची। राजधानी रांची में शादी-विवाह, जन्मदिन, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन बुक करना अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रहा है। रांची नगर निगम सामुदायिक भवनों के संचालन को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी में है। इसके तहत एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है, जिसके जरिए लोग घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वार्ड पार्षद की अनुशंसा की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और आम नागरिक सीधे ऐप के माध्यम से भवन आरक्षित कर सकेंगे। नगर निगम का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भवनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। 68 सामुदायिक भवन होंगे डिजिटल व्यवस्था से जुड़ेंगे नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में 68 सामुदायिक भवन हैं। अब तक इन भवनों का उपयोग मुख्य रूप से वार्ड पार्षद की अनुशंसा पर होता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। निगम इस संबंध में संचालन की नियमावली और प्रस्ताव भी तैयार कर रहा है, ताकि बुकिंग और उपयोग की प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी बन सके। ₹100 से ₹2000 तक होगा बुकिंग शुल्क नगर निगम की प्रस्तावित योजना के अनुसार सामुदायिक भवनों की बुकिंग के लिए ₹100 से ₹2000 तक शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क भवन के आकार और उपयोग की अवधि के आधार पर तय होगा। खास बात यह है कि आवश्यकता पड़ने पर लोग केवल एक घंटे के लिए भी भवन बुक करा सकेंगे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बुकिंगकर्ता को भवन उसी स्थिति में लौटाना होगा। यदि फर्नीचर, शीशे, गमले या अन्य सामान को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई संबंधित व्यक्ति को करनी होगी। विवाद के बाद लिया गया फैसला सामुदायिक भवनों के संचालन को लेकर पिछले कुछ समय से नगर निगम और वार्ड पार्षदों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। कुछ भवनों को सील करने की कार्रवाई के दौरान विरोध भी देखने को मिला था। इसी विवाद को समाप्त करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने ऐप आधारित ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे आम नागरिकों को भी सुविधाजनक और निष्पक्ष सेवा मिल सकेगी।
आषाढ़ अमावस्या को सनातन धर्म में पितरों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से किए गए कर्म पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति में सहायक होते हैं। वहीं, स्वप्न शास्त्र में भी अमावस्या के दिन सपने में पितरों के दर्शन को विशेष संकेत माना गया है। यदि इस दिन आपको सपने में अपने पूर्वज दिखाई दें, तो कुछ धार्मिक उपाय करने की परंपरा बताई गई है। आइए जानते हैं इन मान्यताओं के बारे में। आषाढ़ अमावस्या पर सपने में पितर दिखने का क्या माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन सपने में पूर्वजों का दिखाई देना उनके आशीर्वाद, स्मरण या किसी संदेश का संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि ऐसे सपनों के बाद श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। सपने में पितरों के दर्शन हों तो करें ये उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि अमावस्या के दिन सपने में पूर्वज दिखाई दें तो ये कार्य किए जा सकते हैं- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुश मिलाकर पितरों का तर्पण करें। जरूरतमंदों या ब्राह्मण को भोजन कराएं। अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। शाम के समय दक्षिण दिशा में या पीपल के वृक्ष के समीप सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। सपने में मुस्कुराते हुए पितर दिखें तो क्या संकेत मिलता है? स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि यदि सपने में पूर्वज प्रसन्न या मुस्कुराते हुए दिखाई दें, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह उनके संतोष और आशीर्वाद का प्रतीक हो सकता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का संकेत देता है। अगर सपने में पितर भोजन मांगें तो क्या करें? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सपने में पूर्वज भोजन मांगते हुए दिखाई दें, तो तर्पण, पिंडदान या ब्राह्मण भोजन कराने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व आषाढ़ अमावस्या को पितरों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों को पुण्यदायी माना जाता है। साथ ही, जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य को भी इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है। अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, स्वप्न शास्त्र और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। IDTV Indradhanush इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या उपाय को अपनाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें।
रांची। रांची के सदर अस्पताल में बनने वाली झारखंड की पहली सरकारी बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट का निर्माण फिलहाल अंतिम प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है। परियोजना की लागत 6.45 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये हो गई है। एल-1 कंपनी ने संशोधित डिजाइन और नई लागत के आधार पर सबसे कम बोली लगाई है। लागत बढ़ने के साथ यूनिट के प्लान और डिजाइन में भी कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बाद तीन माह में होगा निर्माण सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि यूनिट का संशोधित डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है और इसे स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा रहा है। विभाग से संशोधित डीपीआर और बढ़ी हुई लागत को मंजूरी मिलते ही चयनित एजेंसी को कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। निर्माण शुरू होने के बाद एजेंसी को तीन महीने के भीतर यूनिट तैयार कर पूरी तरह संचालन योग्य बनाना होगा। सातवीं मंजिल पर बनेगी अत्याधुनिक यूनिट संक्रमण के खतरे को देखते हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट सदर अस्पताल की सातवीं मंजिल पर विकसित की जाएगी। यहां नियंत्रित वातावरण, क्लीन रूम, आइसोलेशन जोन, सीमित प्रवेश व्यवस्था, आईसीयू स्तर की सुविधाएं और हाई-एफिशिएंसी एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही सेंसर आधारित हैंड-फ्री स्टेशन जैसी आधुनिक संक्रमण नियंत्रण व्यवस्थाएं भी उपलब्ध होंगी। झारखंड के मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ यूनिट शुरू होने के बाद राज्य के हजारों मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम रांची में ही यह जटिल उपचार उपलब्ध कराएगी। वर्तमान में निजी अस्पतालों में इस उपचार पर 15 से 30 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च आता है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को कम लागत में इलाज मिलेगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
रांची। रांची में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला को लेकर जिला प्रशासन ने 16 से 25 जुलाई तक विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए इन 10 दिनों के दौरान मौसीबाड़ी गोलचक्कर और जगन्नाथपुर बाजार की ओर सभी प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके साथ ही तिरिल मोड़ से मौसीबाड़ी गोलचक्कर और शहीद मैदान से मौसीबाड़ी गोलचक्कर तक भी वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा। ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। प्रभात तारा मैदान तक ही मिलेगी वाहनों को अनुमति प्रशासन के निर्देशानुसार प्रभात तारा तीनमुहान से जगन्नाथपुर बाजार तक किसी भी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बिरसा चौक से मेला जाने वाले वाहन केवल शहीद मैदान तक ही जा सकेंगे। वहीं, तुपुदाना और हटिया की ओर से आने वाले वाहन प्रभात तारा मैदान तक संचालित होंगे। धुर्वा की ओर से मेला जाने वाले वाहनों को भी प्रभात तारा मैदान तक ही जाने की अनुमति दी गई है, जिसके बाद श्रद्धालुओं को पैदल मेला स्थल तक पहुंचना होगा। पार्किंग और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन ने शहीद मैदान, तिरिल मोड़ स्थित हैलीपैड ग्राउंड और प्रभात तारा मैदान को पार्किंग स्थल के रूप में चिन्हित किया है। रिंग रोड से शहर या मेला क्षेत्र की ओर आने वाले वाहन तिरिल मोड़, नॉर्थ गेट और प्रभात तारा मैदान होते हुए शालीमार बाजार के रास्ते आवाजाही कर सकेंगे। इसके अलावा बिरसा चौक से रिंग रोड और सिठियो की ओर जाने वाले वाहन सिंह मोड़, चांदनी चौक, धुर्वा गोलचक्कर और वीर कुंवर सिंह चौक होकर अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। वहीं, एचईसी और विधानसभा क्षेत्र से रिंग रोड जाने वाले वाहनों के लिए भी शहीद मैदान, शालीमार बाजार, धुर्वा गोलचक्कर और वीर कुंवर सिंह चौक होकर वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सहयोग करें, ताकि रथ मेला शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
रांची। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम की घोषणा के साथ ही चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया की चयन समिति की सदस्य असुंता लकड़ा ने टीम चयन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चयन समिति की सदस्य होने के बावजूद उन्हें पूरी चयन प्रक्रिया से अलग रखा गया और उनकी राय नहीं ली गई। असुंता लकड़ा ने कहा असुंता लकड़ा ने कहा कि मार्च 2026 के बाद से चयन समिति की किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन बैठक की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित होने की सूचना भी उन्हें आधिकारिक बैठक के बजाय मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय की भावना का पालन नहीं किया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि उन्होंने टीम में शामिल खिलाड़ियों के चयन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने झारखंड की चार खिलाड़ियों सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और संगीता कुमारी को टीम में जगह मिलने पर खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि उनका विरोध खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की कार्यशैली से है। पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया कि महिला खिलाड़ियों के हित और उनके साथ होने वाले कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार यदि चयन समिति के सदस्यों को ही फैसलों से दूर रखा जाएगा, तो पारदर्शी और निष्पक्ष चयन संभव नहीं हो सकेगा। वहीं, हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया हमेशा असुंता लकड़ा का सम्मान करता रहा है और चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों तथा मानकों के अनुरूप पूरी की गई है। उनके मुताबिक लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। इस विवाद के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि टीम एशियन गेम्स की तैयारियों में जुट चुकी है, लेकिन चयन समिति की सदस्य द्वारा उठाए गए सवालों ने हॉकी प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर हॉकी इंडिया की आगे की कार्रवाई और इस मामले के संभावित समाधान पर टिकी है।
रांची के प्रतिष्ठित BIT Mesra से बीटेक (कंप्यूटर साइंस) करने वाले कुशाग्र सहाय को LinkedIn से करीब ₹1.4 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय जॉब ऑफर मिला है। हालांकि इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद कुशाग्र का कहना है कि छात्रों को केवल बड़े पैकेज के पीछे नहीं भागना चाहिए। उनके अनुसार मजबूत तकनीकी नींव, लगातार सीखने की आदत और वास्तविक समस्याओं पर काम करने वाले प्रोजेक्ट ही लंबे समय में सफलता दिलाते हैं। पैकेज नहीं, सीखने की क्षमता सबसे बड़ी पूंजी कुशाग्र सहाय का कहना है कि ₹1.4 करोड़ का ऑफर उनकी मंजिल नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ सैलरी पर ध्यान देने के बजाय Computer Science की मजबूत समझ, Problem Solving Skills, Data Structures and Algorithms (DSA) और अच्छे प्रोजेक्ट्स पर फोकस करना चाहिए। यही चीजें भविष्य में बड़े अवसरों के दरवाजे खोलती हैं। BIT Mesra में मिली सही दिशा कॉलेज के शुरुआती दिनों में कुशाग्र ने उन सीनियर्स से सलाह ली, जो पहले से बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे थे। लगभग सभी ने उन्हें एक जैसी सलाह दी— अच्छा CGPA बनाए रखें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Operating Systems, DBMS, Computer Networks और OOP जैसे Core Computer Science विषयों में मजबूत पकड़ बनाएं। केवल कॉलेज प्रोजेक्ट्स नहीं, बल्कि वास्तविक उपयोग वाले प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने पूरे कॉलेज जीवन में इसी रणनीति का पालन किया। ऐसे प्रोजेक्ट बनाए जिनका लोग वास्तव में इस्तेमाल करते हैं कुशाग्र ने केवल अकादमिक प्रोजेक्ट्स तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसाइटी के लिए Society Management Platform विकसित किया, जबकि BIT Mesra के कंप्यूटर साइंस विभाग के लिए Academic Management Platform भी तैयार किया। उनका कहना है कि LinkedIn इंटरव्यू के दौरान इंटरव्यूअर ने उनके प्रोजेक्ट्स के डिजाइन, डेटाबेस, बैकएंड आर्किटेक्चर और स्केलेबिलिटी पर विस्तार से सवाल पूछे। इससे उन्हें समझ आया कि रिज्यूमे में जो भी प्रोजेक्ट लिखा जाए, उसकी हर तकनीकी जानकारी उम्मीदवार को अच्छी तरह पता होनी चाहिए। Google से रिजेक्शन मिला, लेकिन हार नहीं मानी सफलता का यह सफर आसान नहीं था। कुशाग्र Google के Internship Interview के अंतिम चरण तक पहुंचे, लेकिन उन्हें चयन नहीं मिला। उन्होंने माना कि उस समय निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। बाद में उन्होंने दूसरी इंटर्नशिप की, फिर LinkedIn में Internship हासिल की। इसी इंटर्नशिप के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें Pre-Placement Offer (PPO) मिला, जो आगे चलकर ₹1.4 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय पैकेज में बदला। LinkedIn इंटरव्यू में क्या पूछा गया? LinkedIn की भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में हुई, जिसमें शामिल थे— ऑनलाइन Coding Assessment Data Structures and Algorithms इंटरव्यू Managerial Interview Computer Science Fundamentals Projects और Behavioural Questions कुशाग्र के अनुसार सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा अपने प्रोजेक्ट्स के पीछे लिए गए तकनीकी फैसलों को विस्तार से समझाना था। इंजीनियरिंग छात्रों के लिए कुशाग्र की सलाह कुशाग्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पैकेज की खबरें आकर्षक जरूर लगती हैं, लेकिन वास्तविक CTC और हाथ में मिलने वाली वार्षिक सैलरी में काफी अंतर होता है। उन्होंने छात्रों को ये सुझाव दिए— Programming Fundamentals मजबूत करें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Core Computer Science विषयों में गहराई से पढ़ाई करें। Real-world Projects बनाएं। AI का इस्तेमाल सीखने के लिए करें, सोचने की जगह नहीं। अच्छा CGPA बनाए रखें। सीनियर्स और प्रोफेसर्स से मार्गदर्शन लें। मेहनती और सीखने वाले साथियों के बीच रहें। Communication Skills पर भी काम करें। रिजेक्शन से घबराने के बजाय उससे सीखें। सफलता का असली मंत्र कुशाग्र सहाय का मानना है कि करियर की सफलता केवल बड़े पैकेज से नहीं मापी जानी चाहिए। उनका संदेश है कि यदि छात्र लगातार सीखते रहें, अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाते रहें और उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाएं, तो बड़े अवसर अपने आप मिलते हैं।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के दशम फॉल इलाके से सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार करने वाली एक बेहद खौफनाक वीडियो सामने आया है। यहां नेशनल हाईवे पर दिन-दहाड़े तीन लड़कियां अपनी जान बचाने के लिए चीखती-चिल्लाती रहीं। इस रोड रेज की एक सनसनीखेज घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दे तीन युवतियों का आरोप है कि युवकों ने न सिर्फ उन्हें धमकाया, बल्कि रास्ता रोकने की कोशिश की और बाद में उनकी कार पर हमला भी किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में है। मामूली टक्कर के बाद शुरू हुआ पीछा पीड़ित युवतियों के अनुसार, वे हजारीबाग से जमशेदपुर की ओर एक बैठक में शामिल होने जा रही थीं। रास्ते में बुंडू के पास खाना खाने के बाद उन्होंने सूर्य मंदिर घूमने का निर्णय लिया। मंदिर से लौटते समय मोड़ पर उनकी कार और तेज रफ्तार स्कॉर्पियो के बीच हल्की टक्कर हुई। कार चालक ने दूसरी गाड़ी के चालक से सावधानी से वाहन चलाने की बात कही, लेकिन आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार युवक गाली-गलौज और धमकी देने लगे। विवाद बढ़ता देख युवतियों ने माफी मांगकर वहां से निकलना उचित समझा, लेकिन इसके बाद युवकों ने उनका पीछा शुरू कर दिया। जान बचाने के लिए रॉन्ग साइड में दौड़ानी पड़ी कार पीड़ितों का आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार युवक लगातार उनकी कार को ओवरटेक करने, रास्ता रोकने और डराने की कोशिश करते रहे। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि चालक को जान बचाने के लिए कुछ दूरी तक गलत दिशा में भी वाहन चलाना पड़ा। कार में बैठी युवतियां लगातार मदद के लिए चीखती रहीं। पुलिस को सूचना देने के बावजूद हमला युवतियों ने बताया कि उन्होंने दोपहर करीब 12:33 बजे पुलिस के आपातकालीन नंबर 100 पर कॉल कर स्कॉर्पियो का नंबर और पूरी घटना की जानकारी दी थी। आरोप है कि करीब 15 मिनट बाद, पुलिस के पहुंचने से पहले ही दशम फॉल के पास आरोपियों ने उनकी कार को घेर लिया। युवकों ने कथित तौर पर चालक का दरवाजा खोलने की कोशिश की और असफल होने पर भारी पत्थर से कार का शीशा तोड़ दिया। इस हमले में चालक रणवीर सिंह घायल हो गए और उनके चेहरे पर चोट आई। भीड़ जुटने पर आरोपी फरार, जांच जारी कार में मौजूद युवतियां लगातार मदद की गुहार लगाती रहीं। आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे तो आरोपी स्कॉर्पियो लेकर फरार हो गए। पुलिस ने बाद में वाहन को जब्त कर लिया है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं द्वारा समय रहते सूचना देने के बावजूद पुलिस की मदद नहीं पहुंचना चिंताजनक है। क्या जरूरी नहीं है कि सरकार जितनी पर्यटन स्थलों में घूमने की सलाह देने के साथ साथ उन जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दे ? वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रांची। रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक किशोर की मौत और परिजनों से करीब ₹22 लाख का बिल वसूले जाने के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। परिजनों ने लगाया लापरवाही और अधिक बिल वसूलने का आरोप मृतक किशोर के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती और कई दिनों तक भर्ती रखने के बाद करीब 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। उनका कहना है कि उचित इलाज नहीं मिलने के कारण किशोर की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। स्वास्थ्य विभाग को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को अस्पताल के इलाज, बिलिंग प्रक्रिया और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या मेडिकल प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर फिर उठे सवाल इस घटना के बाद राज्य में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और इलाज की लागत को लेकर बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में पारदर्शिता, समय पर इलाज और उचित बिलिंग सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर किसी भी स्तर पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।
रांची। रांची जिले के तमाड़ प्रखंड के बेलबेड़ा गांव में मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी और रोकथाम अभियान शुरू कर दिया है। अराहंगा पंचायत के टुंगरी टोला में 27 जून से चलाए जा रहे विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत अब तक 336 लोगों की जांच की गई है, जिनमें 160 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें 16 मरीजों में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और अन्य लक्षण मिले हैं, जबकि बाकी संक्रमितों का भी नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया जा रहा है। मेडिकल टीम कर रही लगातार निगरानी सीएचसी प्रभारी डॉ. सावित्री कुजूर ने बताया कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। मेडिकल टीम रोजाना प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है और मौके पर ही मलेरिया रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और इलाज से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। बिना लक्षण वाले लोगों की भी हो रही जांच अराहंगा की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अनुलता भुतकुंवर ने बताया कि मेडिकल टीम केवल बुखार या अन्य लक्षण वाले लोगों की ही नहीं, बल्कि बिना लक्षण वाले ग्रामीणों की भी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य संक्रमण की शुरुआती अवस्था में पहचान कर समय रहते इलाज शुरू करना है। शुरुआत में कुछ ग्रामीण जांच से हिचकिचा रहे थे, लेकिन जागरूकता अभियान के बाद अब लोग स्वयं आगे आकर जांच करा रहे हैं। सावधानी बरतने की अपील स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर दवा वितरण के साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, साफ-सफाई बनाए रखने और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दे रही है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में स्क्रीनिंग, निगरानी और उपचार अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संक्रमण पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाता।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पैतृक संपत्ति के विवाद ने रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना को जन्म दिया। पुंदाग ओपी थाना क्षेत्र में बड़े भाई पर अपने छोटे भाई और उसकी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगा है। घटना बुधवार देर रात इमामबाड़ा के पास की बताई जा रही है। घायल दंपति की पहचान सलीम अंसारी और उनकी पत्नी इशरत जहां के रूप में हुई है। दोनों गंभीर रूप से झुलस गए हैं और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज जारी है। खिड़की से पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग पुलिस के अनुसार, देर रात सलीम अंसारी अपनी पत्नी के साथ कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान उनके बड़े भाई लतीफ अंसारी कथित तौर पर खिड़की के पास पहुंचे और कमरे के भीतर पेट्रोल छिड़कने के बाद आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा कमरा आग की लपटों से घिर गया। आग की तपिश से दोनों की नींद खुली और उन्होंने किसी तरह कमरे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन तब तक वे गंभीर रूप से झुलस चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जमीन विवाद बना हमले की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में आरोपी ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। घायलों के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी लतीफ अंसारी के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच में जुटी पुलिस पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि वारदात के दौरान की गतिविधियों और किसी अन्य संभावित आरोपी की भूमिका का पता लगाया जा सके। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर संपत्ति विवाद को लेकर बढ़ती हिंसा और पारिवारिक रिश्तों में दरार को उजागर कर दिया है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बिजली बिलिंग व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। बिजली उपभोक्ता लगातार गलत बिल, बिल नहीं मिलने और शिकायतों के समाधान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने शिकायतों के लिए केंद्रीयकृत कॉल सेंटर की व्यवस्था की है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद समाधान समय पर नहीं हो रहा है। निगम की हालिया रिपोर्ट में भी सबसे अधिक शिकायतें बिजली बिल से जुड़ी दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में सामने आईं सबसे ज्यादा बिल संबंधी शिकायतें निगम की कैंप रिपोर्ट के अनुसार कुल 1,616 शिकायतों में से 191 शिकायतें बिल नहीं मिलने, 416 बिल सुधार और 559 शिकायतें मोबाइल नंबर बिल से लिंक नहीं होने की थीं। कई मामलों में उपभोक्ताओं ने फोरम और अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही है। सरेंडर मीटर पर लगातार भेजे जा रहे बिल रांची के एक उपभोक्ता ने मीटर सरेंडर करने के बाद भी हर महीने बिजली बिल मिलने की शिकायत की है। उपभोक्ता का कहना है कि सुरक्षा जमा राशि उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम समायोजन नहीं किया गया और बार-बार अधिकारियों को आवेदन देने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। चालू कनेक्शन का महीनों से नहीं आया बिल वहीं, मोरहाबादी के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर फरवरी 2025 से बिजली बिल नहीं मिलने से परेशान हैं। उनका कहना है कि वे नियमित भुगतान करना चाहते हैं, ताकि एकमुश्त भारी बिल का बोझ न पड़े। कई बार शिकायत दर्ज कराने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद उन्हें अब तक कोई समाधान नहीं मिला है। राजस्व लक्ष्य के बीच एजेंसियों पर सवाल रांची के छह डिवीजनों में बिजली निगम ने 400 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है। करीब 3.5 लाख स्मार्ट मीटरों के माध्यम से हर महीने 80 से 90 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य तय किया गया है। बावजूद इसके, बिलिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। निगम ने एजेंसियों को घर-घर जाकर सही बिल उपलब्ध कराने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति में अब तक अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।