रांची। रांची और बानो के बीच जल्द लोकल ट्रेन चल सकती है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन में 1000 से अधिक यात्री यात्रा कर सकेंगे। इस ट्रेन से न सिर्फ लोगों का खर्च कम होगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। वर्तमान में रांची से बानो के बीच बस का किराया करीब 240 रुपए है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन शुरू होने के बाद किराया करीब 50 रुपए रहने की संभावना है। दोनों स्थानों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 130 किलोमीटर है। रेल मार्ग से यह दूरी करीब 94 किलोमीटर है। रांची से बानो जाने में करीब दो घंटे का समय लगेगा। जबकि अभी बस से यह दूरी तय करने में तीन घंटे लगते हैं। आधुनिक लोकल ट्रेन चलेगी रांची रेल मंडल ने आधुनिक लोकल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी माह प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। किसानों, छात्रों और कामकाजी लोगों को होगा लाभ स्पेशल सेवा के रूप में चलेगी ट्रेन जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने बताया कि शुरुआत में ट्रेन को स्पेशल सेवा के रूप में चलाया जाएगा, जबकि स्वीकृति के बाद इसे नियमित रूप से संचालित किया जा सकेगा। इससे लोगों का लाभ होगा। ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं... कुल 12 कोच होंगे। 1000 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। किराया किफायती रखा जाएगा। सुबह बानो से हटिया और शाम में हटिया से बानो तक परिचालित करने का प्रस्ताव है। इन स्टेशनों पर मिल सकता है ठहराव नई लोकल ट्रेन शुरू होने पर महाबुआंग, कुरकुरा, पाकरा, पोकला, बकसपुर, गोविंदपुर रोड, कर्रा, लोधमा और बालसिरिंग जैसे ग्रामीण स्टेशनों पर पर्याप्त ठहराव सुनिश्चित किया जा सकता है।
रांची। झारखंड प्रदेश बीजेपी ने गुरुवार को PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा कि PM मोदी ने 12 साल का कार्यकाल पूरा किया। यह देश के लिये काफी गौरवपूर्ण बात है। उन्होंने देश के विकास, सुशासन और गरीब कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की। इस दौरान 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों का गरीबी रेखा से बाहर निकलना, किसी भी सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि देश के गरीबों का उत्थान करना रहा है। 22 राज्यों में एनडीए की सरकार उन्होंने कहा कि आज देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। विभिन्न राज्यों में भाजपा को जनता का लगातार समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी का कार्यकाल सत्ता नहीं साधना और तपस्या का कालखंड है। जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक विकास मरांडी ने कहा कि एक समय जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क की कल्पना भी नहीं की जाती थी। लेकिन, आज श्रीनगर तक ट्रेन पहुंच चुकी है। वहीं नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भी अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं। जिन क्षेत्रों को कभी विकास से वंचित रखा गया था। वहां आज सड़क, रेल और अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। आर्टिकल 370 और 3 तलाक जैसे ऐतिहासिक फैसले उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का साहसिक निर्णय लिया। साथ ही तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को न्याय दिलाने का काम किया। ये ऐसे फैसले थे, जिनकी पहले कोई कल्पना भी नहीं करता था। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की ताकत उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने भारत की सैन्य शक्ति और क्षमता को देखा। पहले रक्षा क्षेत्र की अधिकांश जरूरतें विदेशों से पूरी होती थीं। लेकिन, अब भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। लड़ाकू विमानों सहित कई रक्षा उपकरणों का निर्माण देश में ही किया जा रहा है। कोरोना काल में दिखी मजबूत नेतृत्व क्षमता मरांडी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों को एकजुट रखने और संकट से बाहर निकालने का सफल प्रयास किया। लगभग 50 करोड़ से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा गया है। करोड़ों गरीबों को मिली छत मरांडी ने कहा कि करोड़ों गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान मिले हैं। अब तक लगभग 4 करोड़ मकानों का निर्माण कराया गया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था में पीछे था देश बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने कई दशकों तक देश में शासन किया, लेकिन गांव और शहरों के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले भारत दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में काफी पीछे था, जबकि आज देश चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
रांची। सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध भूमि पर लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व रेलवे की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से रांची, टाटानगर तथा कोलकाता के बीच रेल यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। नहीं होगा इंजन का रिवर्सल अभी रांची से मुरी होकर कोलकाता और टाटा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर इंजन रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब 35 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा सिल्ली से मुरी तक पहुंचने में भी लगभग 10 मिनट लगते हैं। साथ ही मुरी से इलू पहुंचने में करीब 15 मिनट लगते हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को मुरी जंक्शन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का लगभग 1 घंटे का समय बचेगा। ट्रेनों का परिचालन भी अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा और मुरी स्टेशन का लोड भी घटेगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि परियोजना का कार्य लगातार जारी है और मार्च 2028 के निर्धारित लक्ष्य से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 1.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। वहीं 9.57 हेक्टेयर रैयती भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला भूमि अधिग्रहण विभाग को भुगतान कर दिया गया है। रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिल्ली स्टेशन पर बढ़ रहीं सुविघाए सिल्ली स्टेशन पर भी सुविधाएं बढ़ रहीं हैं। सिल्ली रेलवे स्टेशन का भी तेजी से विस्तारीकरण किया जा रहा है। स्टेशन पर परिचालन संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ सिल्ली क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। अभी टाटानगर और कोलकाता मार्ग की ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मुरी जाना पड़ता है। नई लाइन बनने के बाद उन्हें मुरी जाने की जरूरत नहीं होगी। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि ईलू-सिल्ली बाईपास रेलवे लाइन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर रिवर्सल और अतिरिक्त परिचालन समय से बचाते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद रेल संचालन अधिक सुगम एवं प्रभावी हो जाएगा। साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। हटिया-ओरगा लाइन का निरीक्षण हटिया-ओरगा डबल रेललाइन परियोजना के अंतिम चरण में 12.5 किमी. लंबे कानारोवां-टाटी सेक्शन का महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने इसका गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रांची करुणा निधि सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची। जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप 2026 में भारत का गौरव बढ़ाने वाले झारखंड के हॉकी खिलाड़ियों का मंगलवार को रांची पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। राजधानी स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों के स्वागत के लिए खेल प्रेमियों, परिजनों, कोचों और हॉकी झारखंड के पदाधिकारियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। खिलाड़ियों के आगमन के साथ ही एयरपोर्ट परिसर देशभक्ति और खेल भावना से जुड़े नारों से गूंज उठा। पारंपरिक तरीके से किया गया अभिनंदन दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होने के बाद खिलाड़ी अपने गृह राज्य लौटे। एयरपोर्ट पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। खिलाड़ियों को फूल-मालाएं पहनाई गईं, ढोल-नगाड़ों के साथ उनका अभिनंदन किया गया और उपस्थित लोगों ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए उत्साहवर्धन किया। पुरुष टीम ने जीता स्वर्ण, महिला टीम ने कांस्य पदक जापान के काकामीगाहारा में 29 मई से 6 जून तक आयोजित अंडर-18 एशिया कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। वहीं भारतीय महिला टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों टीमों की सफलता में झारखंड के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुरुष टीम में झारखंड के आशीष तनी पूर्ति और प्रेमचंद शामिल थे, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। महिला टीम में संदीपा कुमारी, पुष्पा मांझी, सुगन सांगा, खिली कुमारी, नीलम टोपनो और श्रुति कुमारी ने भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। झारखंड की हॉकी परंपरा फिर हुई मजबूत हॉकी झारखंड के महासचिव विजय शंकर सिंह ने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि झारखंड हमेशा से हॉकी प्रतिभाओं की भूमि रहा है और यहां के खिलाड़ियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इन खिलाड़ियों की सफलता झारखंड के हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। एयरपोर्ट पर "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "हॉकी जिंदाबाद" के नारों के बीच खिलाड़ियों ने भी राज्यवासियों का आभार व्यक्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर झारखंड को भारतीय हॉकी के मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित कर दिया है।
रांची। राजधानी रांची की महत्वपूर्ण जलधारा हरमू नदी को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में रांची नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव के निर्देश पर बुधवार से हरमू नदी क्षेत्र में मापी और सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया। इस अभियान का उद्देश्य नदी के मूल स्वरूप को संरक्षित करना, जल प्रवाह को सुचारू बनाए रखना और नदी किनारे हुए अतिक्रमणों की पहचान करना है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र से शुरू हुआ अभियान नगर निगम की टीम ने सिटी और अरगोड़ा जोन के अधिकारियों की मौजूदगी में हिंदपीढ़ी क्षेत्र के वार्ड संख्या 23 में सर्वेक्षण अभियान चलाया। इस दौरान नदी तट और उससे सटे इलाकों का भौतिक सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने उन निर्माणों और संरचनाओं को चिन्हित करना शुरू किया जो अतिक्रमण की श्रेणी में आ सकते हैं। सर्वेक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्रों का सीमांकन भी किया गया, ताकि वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। टीम ने नदी के आसपास बने भवनों, रास्तों और अन्य ढांचों का निरीक्षण कर आवश्यक आंकड़े एकत्र किए। रिपोर्ट के बाद होगी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नगर निगम का कहना है कि बिना विस्तृत सर्वेक्षण के अतिक्रमण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं है। इसलिए पहले पूरे क्षेत्र का सटीक मापन और अध्ययन किया जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर कानूनी प्रावधानों के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी। नदी संरक्षण पर विशेष जोर नगर निगम के अनुसार, हरमू नदी रांची की प्रमुख प्राकृतिक धरोहरों में से एक है। वर्षों से बढ़ते अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण के कारण नदी की जल निकासी व्यवस्था और प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है। ऐसे में नदी का संरक्षण और पुनर्जीवन समय की मांग बन गया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि हरमू नदी को अतिक्रमण मुक्त और व्यवस्थित बनाना नगर निगम की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि नदी के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और दीर्घकालिक पुनर्जीवन को सुनिश्चित करना है। नगर निगम ने इस अभियान में नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है।
रांची। झारखंड में वेतन निकासी से जुड़े एक बड़े ट्रेजरी घोटाले का खुलासा महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 33 में से 14 कोषागारों में तैनात कर्मचारियों ने सिस्टम की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर एक ही महीने में दो-दो बार वेतन और एरियर की निकासी कर ली। इस गड़बड़ी में डीएसपी से लेकर सिपाही और अन्य सरकारी कर्मचारी तक शामिल पाए गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में क्या आया सामने? ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि कुल 614 कर्मचारियों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया, जिससे सरकारी खजाने को 31.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इनमें से करीब 7.67 करोड़ रुपये केवल दोहरे वेतन भुगतान के कारण निकाले गए। यह मामला वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात क्या है? घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डीएसपी से लेकर सिपाही स्तर के कर्मचारियों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ो रुपये की अवैध निकासी की। डीएसपी स्तर के अधिकारियों नौशाद आलम, राजेश यादव, मणिभूषण प्रसाद और मुकेश कुमार महतो पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पदस्थापनाओं के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए दोहरा वेतन और एरियर प्राप्त किया। इसके अलावा बड़ी संख्या में सिपाही, सहायक शिक्षक और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी इस सूची में शामिल हैं। 14 कोषागार महालेखाकार द्वारा चिन्हित 14 कोषागार रांची, हजारीबाग, बोकारो, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, गुमला, खूंटी और रामगढ़ सहित अन्य जिलों में स्थित हैं। इन सभी स्थानों पर वेतन भुगतान प्रणाली में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जांच में कई सिपाहियों और कर्मचारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने तकनीकी लूपहोल का लाभ उठाकर अवैध भुगतान प्राप्त किया। महालेखाकार ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए राज्य सरकार को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और अवैध रूप से निकाली गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। यह घोटाला सरकारी वित्तीय प्रणालियों में कई खामियां पर सवाल खड़ा करता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी सुधार, पारदर्शिता और कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू करना बेहद जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।