Kanwar Yatra

संभल में तमन्ना मलिक को प्रशासन द्वारा जारी नोटिस
संभल में बुर्के में कांवड़ यात्रा के ऐलान पर विवाद, प्रशासन ने तमन्ना मलिक और अमन त्यागी को भेजा नोटिस

संभल में तमन्ना मलिक की बुर्के में कांवड़ यात्रा पर विवाद, प्रशासन ने भेजा नोटिस; कानून-व्यवस्था को लेकर जताई चिंता संभल, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के संभल में तमन्ना मलिक के बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने के ऐलान को लेकर विवाद बढ़ गया है। संभल प्रशासन ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रशासन की ओर से यह कदम यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।   प्रशासन ने क्या कहा?     रिपोर्टों के मुताबिक, तमन्ना मलिक ने सावन के दौरान बुर्के में कांवड़ यात्रा करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद पुलिस ने संभावित तनाव और शांति व्यवस्था को लेकर प्रशासन को रिपोर्ट दी। इसके आधार पर SDM अदालत ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को नोटिस जारी किया। दोनों से इस संबंध में अपना पक्ष रखने को कहा गया है।     छह महीने के बंधपत्र की कार्रवाई     प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर दोनों से ₹20,000-₹20,000 के छह महीने के बंधपत्र की कार्रवाई की है। इसका उद्देश्य संभावित विवाद या शांति भंग की स्थिति को रोकना बताया गया है।   महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन की कार्रवाई को सिर्फ बुर्का पहनने पर कानूनी प्रतिबंध के रूप में पेश करना सही नहीं है। मामला मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था और संभावित तनाव से जुड़ा बताया गया है।   पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं तमन्ना मलिक     तमन्ना मलिक इससे पहले भी बुर्का पहनकर कांवड़ लेकर हरिद्वार से लौटने के कारण चर्चा में आई थीं। फरवरी 2026 में उन्होंने अपने पति अमन त्यागी के साथ कांवड़ यात्रा की थी और संभल पहुंचने पर उनका स्वागत भी किया गया था।   तमन्ना मलिक का मामला अब एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई उनके जवाब और स्थानीय कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर यातायात प्रतिबंध
कांवड़ यात्रा के चलते 4 से 12 अगस्त तक दिल्ली-हरिद्वार हाईवे बंद, सभी वाहनों की आवाजाही पर रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज, 4 अगस्त से सभी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह प्रतिबंध 12 अगस्त 2026 तक लागू रहेगा। यात्रियों को इस दौरान वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।   12 अगस्त तक लागू रहेगा प्रतिबंध     कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों की ओर लौटते हैं। पैदल कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग को वाहनों के लिए बंद करने का फैसला लिया है। प्रशासन की ओर से पहले ही चरणबद्ध तरीके से यातायात प्रतिबंध लागू किए गए थे। अब 4 से 12 अगस्त तक इस मार्ग पर सभी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।     गंगा नहर मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद     दिल्ली-हरिद्वार हाईवे के साथ गंगा नहर मार्ग पर भी 4 से 12 अगस्त तक सभी वाहनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इन मार्गों पर कांवड़ियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है。   पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए अलग-अलग मार्गों पर डायवर्जन और प्रतिबंध लागू किए गए हैं।   यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह     दिल्ली से हरिद्वार, मेरठ, मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले यातायात व्यवस्था की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। हाईवे बंद होने के कारण वैकल्पिक मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जरूरी यात्रा की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की है।     कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था     कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में पैदल श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह यातायात डायवर्जन लागू किए जा रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
कांवड़ यात्रा के चलते यूपी में स्कूल कॉलेज बंद
यूपी के कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद, कांवड़ यात्रा के चलते 12 अगस्त तक रहेगी छुट्टी

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। मेरठ और गाजियाबाद में सभी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 12 अगस्त 2026 तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन ने यह फैसला कांवड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है।   मेरठ और गाजियाबाद में 12 अगस्त तक बंद रहेंगे संस्थान     मेरठ में स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का आदेश पहले ही लागू हो चुका है, जबकि गाजियाबाद में 4 अगस्त से 12 अगस्त तक शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। इस दौरान सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों पर आदेश लागू रहेगा। हालांकि, पहले से निर्धारित परीक्षाएं अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जा सकती हैं।   प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। इससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है और कई मार्गों पर डायवर्जन भी लागू किए जाते हैं।   मुजफ्फरनगर और बागपत में भी छुट्टी     कांवड़ यात्रा को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के फैसले लिए गए हैं। मुजफ्फरनगर में 3 से 10 अगस्त तक स्कूल-कॉलेज बंद रखने की जानकारी सामने आई है। वहीं मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और बागपत में अलग-अलग प्रशासनिक आदेशों के तहत छुट्टियां घोषित की गई हैं।   जिलों में छुट्टी की अवधि स्थानीय प्रशासन के आदेश के अनुसार अलग-अलग है। इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने जिले के आधिकारिक आदेश को जरूर देखना चाहिए।   सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए फैसला     कांवड़ यात्रा के दौरान सड़कों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने यातायात और सुरक्षा बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने से विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही कम होगी और प्रमुख मार्गों पर भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Deoghar Shravani Mela 2026
देवघर श्रावणी मेले में उमड़ी रिकॉर्ड श्रद्धालुओं की भीड़, बाबा बैद्यनाथ धाम में लंबी कतारें

देवघर, एजेंसियां। झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम में चल रहे श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है। सावन माह के पावन अवसर पर देशभर से पहुंचे लाखों कांवरियों ने बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर और कांवरिया पथ पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और मेले में इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।   भीड़ नियंत्रण के लिए AI और विशेष सुरक्षा व्यवस्था   श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं। AI आधारित निगरानी प्रणाली, अतिरिक्त पुलिस बल, CCTV कैमरे, मेडिकल कैंप, कंट्रोल रूम और ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। रेलवे ने भी देवघर आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त ठहराव की घोषणा की है।   बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धा का महासंगम   श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी करने के बाद बाबा बैद्यनाथ धाम में जल अर्पित कर रहे हैं। हर ओर "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा देवघर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन और सुरक्षा व्यवस्था
कांवड़ यात्रा 2026: 12 फीट से ऊंची कांवड़ पर रोक, डीजे और सुरक्षा को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा 2026 को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए आगरा प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से अधिक नहीं होगी और डीजे का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार ही किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।   पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समन्वय बैठक में यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कांवड़ मार्गों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत योजना बनाई।   कांवड़ मार्ग पर मीट की दुकानें रहेंगी बंद   प्रशासन ने निर्देश दिया है कि कांवड़ मार्गों और प्रमुख शिव मंदिरों के आसपास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। वहीं, खाद्य एवं औषधि विभाग होटल, ढाबों और खाद्य दुकानों की जांच करेगा तथा सभी दुकानों पर रेट सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।   संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल   कांवड़ मार्गों की मैपिंग कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। हाथीघाट, पोइया और बटेश्वर जैसे प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। साथ ही रूट डायवर्जन, यातायात नियंत्रण, एंबुलेंस, क्रेन और मेडिकल सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।   सोशल मीडिया पर 24 घंटे निगरानी   प्रशासन ने अफवाहों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया की 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और बिजली विभाग को कांवड़ मार्गों की मरम्मत, जलभराव की समस्या दूर करने तथा ट्रांसफॉर्मर, बिजली के पोल और झूलते तारों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
UP CM Yogi Adityanath
कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ, एजेंसियां। सावन माह में चल रही कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों को पूरी सतर्कता बरतने के लिए कहा है।   संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई   मुख्यमंत्री के निर्देश पर कांवड़ यात्रा मार्गों, प्रमुख शिव मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से यात्रा की निगरानी की जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है।   यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान   सरकार ने यात्रा मार्गों पर सुचारु यातायात बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थल, मोबाइल शौचालय और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, विद्युत आपूर्ति और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।   अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के साथ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।   शांतिपूर्ण और सुरक्षित यात्रा पर सरकार का फोकस   मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Officials inspect Tarakeswar Temple route ahead of Shravani Mela as encroachment removal drive begins.
सावन से पहले तारकेश्वर मंदिर मार्ग से हटेगा अतिक्रमण, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलेगा बुलडोजर

  पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर में आगामी श्रावणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग से अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया है। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया है कि सावन शुरू होने से पहले मंदिर तक जाने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अवैध दुकानों पर होगी कार्रवाई तारकेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण करने पहुंचीं मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मंदिर के प्रवेश मार्ग की चौड़ाई वर्तमान में पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत मार्ग के दोनों ओर अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने अतिथि निवास में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में श्रावणी मेले के सफल आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन मेले के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर जिलाधिकारी खुर्शीद अली क़ादरी ने बताया कि श्रावण माह के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि दूध पोखर में स्नान के बाद मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर विशेष मैट बिछाए जाएंगे। इसके अलावा रास्ते के दोनों ओर भगवान शिव और शिव पुराण से संबंधित चित्रों की प्रदर्शनी तथा आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। स्वच्छता अभियान पर रहेगा विशेष ध्यान प्रशासन ने मेले के दौरान साफ-सफाई को लेकर भी विशेष योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, नियमित सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी। कांवर यात्रियों के मार्ग की भी होगी मरम्मत चांपदानी के विधायक दिलीप सिंह ने बताया कि बैद्यवाटी के निमाई तीर्थ घाट से जल लेकर तारकेश्वर पहुंचने वाले कांवर यात्रियों के मार्ग की भी समीक्षा की गई है। लगभग 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, वहां तत्काल मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन सड़कों के स्थायी पुनर्निर्माण की भी योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी प्रशासन को उम्मीद है कि इस वर्ष भी श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Baba Baidyanath Dham
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, बाबा बैद्यनाथ धाम में शुरू होगी लॉकर सुविधा

देवघर। आगामी श्रावणी मेले को लेकर देवघर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर के बाहर 1200 से 1300 लॉकर स्थापित किए जा रहे हैं। इन लॉकरों में श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन, पर्स और अन्य मूल्यवान सामान सुरक्षित रख सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं को राहत देगी, बल्कि मंदिर परिसर की सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी। श्रावणी मेले के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए देवघर पहुंचते हैं। भारी भीड़ के कारण कई बार श्रद्धालुओं को अपने सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। मोबाइल, पर्स और अन्य जरूरी वस्तुओं के खोने या चोरी होने की आशंका भी रहती है।   ऐसे में नई लॉकर सुविधा श्रद्धालुओं के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ के बीच सामान लेकर चलना मुश्किल होता है और मंदिर में प्रवेश से पहले सामान रखने के लिए उचित व्यवस्था की कमी महसूस होती है। अब प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षित लॉकर उपलब्ध होने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।   निजी दुकानदारों पर निर्भरता होगी कम श्रद्धालुओं ने बताया कि अब तक सामान रखने के लिए अक्सर निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता था। कई बार दुकानदार अधिक शुल्क भी वसूलते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित सुविधा मिलेगी तथा अतिरिक्त खर्च से भी बचाव होगा। लॉकर निर्माण कार्य में जुटे कर्मचारियों के अनुसार, सभी लॉकर निर्धारित समय के भीतर तैयार कर लिए जाएंगे ताकि श्रावणी मेले की शुरुआत से पहले व्यवस्था पूरी तरह संचालित हो सके।   सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल देवघर के एसडीएम एवं बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ मंदिर परिसर की सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मंदिर की दानपेटी से पाकिस्तानी नोट मिलने और साहिबगंज जिले से एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रवेश को नियंत्रित करने की योजना बनाई गई है।   सुरक्षित दर्शन और बेहतर प्रबंधन पर जोर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालु अपने मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लॉकर में सुरक्षित रखकर केवल पूजा सामग्री और कांवर के साथ मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे सुरक्षा जांच आसान होगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह नई व्यवस्था श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ बाबा नगरी की सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

Unknown जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0