हैदराबाद, एजेंसियां। OpenAI में संगठनात्मक बदलावों का दौर जारी है। कंपनी ने अपनी Preparedness टीम को भंग कर दिया है, जो शक्तिशाली AI मॉडल्स से जुड़े गंभीर जोखिमों का आकलन और उन्हें कम करने के उपायों पर काम करती थी। टीम की जिम्मेदारियां अब कंपनी की मौजूदा रिसर्च और विशेषज्ञ टीमों में बांटी जा रही हैं।
OpenAI ने 2023 में Preparedness टीम बनाई थी। इसका मुख्य काम साइबर सुरक्षा, जैविक खतरों, खतरनाक क्षमताओं और भविष्य के अत्यधिक सक्षम AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन करना था। कंपनी के आधिकारिक Preparedness Framework में भी इन जोखिमों की निगरानी और उनके लिए सुरक्षा उपाय विकसित करने को टीम की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल किया गया था।
अब टीम को अलग इकाई के रूप में जारी रखने के बजाय उसकी जिम्मेदारियां दूसरी टीमों में स्थानांतरित की जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें साइबर और बायो जैसे विशेष क्षेत्रों में काम करने वाली टीमों में भेजा गया है।
Preparedness टीम का खत्म होना OpenAI में सेफ्टी स्ट्रक्चर में हुए कई बदलावों की कड़ी का हिस्सा है। इससे पहले कंपनी की Superalignment और AGI Readiness जैसी टीमों में भी बदलाव या विघटन हो चुका है। जुलाई में OpenAI के Head of Safety Systems Johannes Heidecke के कंपनी छोड़ने की खबर भी सामने आई थी। उस समय कंपनी ने सेफ्टी टीमों को रिसर्च संगठन के तहत लाने का फैसला किया था।
OpenAI का कहना है कि सेफ्टी को रिसर्च और मॉडल डेवलपमेंट के साथ ज्यादा करीब से जोड़ने से सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञता मॉडल, प्रोडक्ट और लॉन्च से जुड़े फैसलों में पहले ही शामिल हो सकेगी।
कंपनी में सेफ्टी और संगठनात्मक बदलावों के बीच कई वरिष्ठ अधिकारियों के जाने से भी हलचल बढ़ी है। Chief Futurist Joshua Achiam, Head of Safety Systems Johannes Heidecke और Ethics Head Chloé Bakalar समेत कई वरिष्ठ अधिकारी कंपनी से अलग हो चुके हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारी Brad Lightcap ने भी कंपनी छोड़कर नया वेंचर शुरू करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब OpenAI अपने कारोबार के विस्तार और संभावित IPO की तैयारियों पर भी ध्यान दे रही है।
OpenAI के मॉडल से जुड़े एक सुरक्षा परीक्षण के दौरान Hugging Face से संबंधित घटना ने भी AI सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी थी। OpenAI ने खुद कहा था कि वह बाहरी विशेषज्ञों के साथ इस घटना की समीक्षा कर रहा है और मॉडल के व्यवहार का स्वतंत्र आकलन भी कराया जा रहा है।
OpenAI में ये संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय हो रहे हैं जब कंपनी संभावित IPO की दिशा में आगे बढ़ रही है। Financial Times के मुताबिक, कंपनी के अंदर नेतृत्व स्तर पर बदलाव और कई वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बीच IPO को लेकर तैयारियां तेज हैं। कंपनी ने हाल में कर्मचारियों के शेयरों की करीब 7 अरब डॉलर की टेंडर ऑफर के जरिए खरीद भी पूरी की, जिससे लगभग 852 अरब डॉलर का वैल्यूएशन सामने आया।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेफ्टी टीमों को अलग इकाइयों के बजाय रिसर्च और अन्य विभागों में शामिल करने से AI सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा। OpenAI का कहना है कि सुरक्षा को मॉडल डेवलपमेंट में और पहले शामिल करना इस बदलाव का उद्देश्य है, जबकि आलोचकों की चिंता है कि स्वतंत्र सेफ्टी निगरानी कमजोर हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। POCO India ने अपने नए स्मार्टफोन Poco M8x 5G की भारत में लॉन्च डेट का खुलासा कर दिया है। कंपनी के मुताबिक फोन को 21 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च के बाद यह स्मार्टफोन Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। Snapdragon 4 Gen 5 से लैस होगा Poco M8x 5G Poco M8x 5G की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोसेसर होगा। कंपनी ने पुष्टि की है कि इसमें नया Snapdragon 4 Gen 5 चिपसेट मिलेगा। Poco का दावा है कि यह भारत में इस प्रोसेसर के साथ आने वाला पहला स्मार्टफोन होगा। कंपनी के मुताबिक फोन का AnTuTu स्कोर 6.5 लाख से अधिक हो सकता है। इसमें 12GB तक RAM दी जाएगी, जिसमें 6GB वर्चुअल RAM भी शामिल है। फोन LPDDR4x RAM और UFS 2.2 स्टोरेज को सपोर्ट करेगा। ट्रिपल कूलिंग सिस्टम मिलेगा गेमिंग और लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान फोन को ठंडा रखने के लिए Poco M8x 5G में ट्रिपल कूलिंग सिस्टम दिया गया है। इसमें 12,439 वर्ग मिमी ग्रेफाइट कूलिंग सिस्टम, 1,924 वर्ग मिमी कॉपर फॉइल लेयर और 3.5W हाई-एफिशिएंसी थर्मल जेल शामिल है। Poco का दावा है कि फोन को 48 महीने तक लैग-फ्री इस्तेमाल के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है। 120Hz डिस्प्ले और 6,000mAh बैटरी की उम्मीद कंपनी ने अभी फोन के सभी स्पेसिफिकेशन सामने नहीं रखे हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक Poco M8x 5G में 6.9 इंच की HD+ IPS LCD स्क्रीन मिल सकती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी। फोन में 6,000mAh की बैटरी और 33W फास्ट चार्जिंग मिलने की भी उम्मीद है। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 128GB स्टोरेज का विकल्प दिया जा सकता है। 20 हजार रुपये से कम हो सकती है कीमत Poco M8x 5G की आधिकारिक कीमत का खुलासा लॉन्च के समय होगा। हालांकि, टिपस्टर के अनुसार इसकी कीमत भारत में 20,000 रुपये से कम रखी जा सकती है। तुलना के लिए Poco M8 5G को 18,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, जबकि Poco M8 Power 5G की शुरुआती कीमत 24,999 रुपये बताई गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता कंपनी iQOO भारत में 20 अगस्त 2026 को अपने नए iQOO Z11 स्मार्टफोन के साथ iQOO Buds ट्रू वायरलेस ईयरबड्स लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर ईयरबड्स की लॉन्च तारीख की पुष्टि कर दी है। ईयरबड्स की बिक्री भारत में Amazon के जरिए होगी। ब्लैक कलर में दिखा नया डिजाइन iQOO ने लॉन्च से पहले नए Buds का टीजर जारी किया है। टीजर में ईयरबड्स ब्लैक कलर में नजर आ रहे हैं। इनमें इन-ईयर डिजाइन और अंडाकार आकार का चार्जिंग केस दिखाई देता है। केस के अंदर हल्के पीले रंग का हिस्सा भी नजर आया है। कंपनी ने इसे “Engineered for Every Beat” टैगलाइन के साथ पेश किया है। कीमत और फीचर्स अभी सामने नहीं आए कंपनी ने फिलहाल iQOO Buds की कीमत, ड्राइवर साइज, बैटरी क्षमता, ANC और अन्य प्रमुख स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया है। इसलिए इन फीचर्स को लेकर सामने आ रही जानकारी को अभी आधिकारिक नहीं माना जा सकता। हालांकि, कंपनी के टीजर में म्यूजिक और गेमिंग पर जोर दिया गया है। iQOO Z11 के साथ होगा लॉन्च iQOO Buds को iQOO Z11 के साथ 20 अगस्त को लॉन्च किया जाएगा। Z11 में MediaTek Dimensity 7500 Turbo प्रोसेसर, 6.8 इंच के करीब कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले और 7,050mAh बैटरी मिलने की पुष्टि हो चुकी है। फोन की कीमत भारत में ₹40,000 से कम रखे जाने का कंपनी ने संकेत दिया है। 20 अगस्त के लॉन्च इवेंट में कंपनी iQOO Buds की कीमत, बैटरी बैकअप, ANC, कनेक्टिविटी और बिक्री ऑफर से जुड़ी पूरी जानकारी सामने ला सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। WhatsApp यूजर्स के लिए जल्द ही चैट को और ज्यादा आकर्षक बनाने वाला नया फीचर आने वाला है। Meta के स्वामित्व वाला WhatsApp Animated Wallpapers पर काम कर रहा है। यह फीचर फिलहाल बीटा वर्जन में टेस्टिंग के दौरान सामने आया है और अभी सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। तीन तरह के नए चैट थीम रिपोर्ट के मुताबिक WhatsApp नए चैट कस्टमाइजेशन सिस्टम में Featured, Doodle और Minimal नाम से तीन कैटेगरी देने की तैयारी कर रहा है। इनमें Featured कैटेगरी सबसे खास होगी, क्योंकि इसमें एनिमेटेड वॉलपेपर शामिल किए जा सकते हैं। बहुत हल्का होगा Animation WhatsApp एनिमेशन को जानबूझकर धीमा और हल्का रखने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य चैट के बैकग्राउंड को डायनामिक बनाना है, लेकिन मैसेज पढ़ते समय यूजर का ध्यान भटकाना नहीं। iPhone के बाद Android पर भी आने की उम्मीद Animated Wallpapers के संकेत सबसे पहले Android बीटा में सामने आए थे और अब iOS बीटा में भी इस फीचर की टेस्टिंग देखी गई है। iPhone पर यह फीचर WhatsApp beta for iOS 26.31.10.74 में दिखाई दिया है। हालांकि, WhatsApp ने अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च तारीख घोषित नहीं की है। कब मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह सुविधा डेवलपमेंट/बीटा टेस्टिंग चरण में है। इसलिए आम यूजर्स को इसे पाने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। WhatsApp भविष्य के अपडेट में इसे सीमित यूजर्स के बाद व्यापक रूप से जारी कर सकता है।