आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में करियर का सही चुनाव करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। हर साल नई-नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस फील्ड में भविष्य सुरक्षित और मजबूत होगा। अगर आप भी BTech करने की सोच रहे हैं और कन्फ्यूज हैं कि कौन-सी ब्रांच चुनें, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद काम की है। AI और Data Science: टेक इंडस्ट्री का भविष्य वर्तमान समय में Artificial Intelligence (AI) और Data Science टेक सेक्टर के सबसे तेजी से उभरते और हाई-डिमांड क्षेत्रों में शामिल हैं। हेल्थकेयर, बैंकिंग, ई-कॉमर्स से लेकर एंटरटेनमेंट तक, हर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देता है, जबकि Data Science बड़े डेटा का विश्लेषण करके कंपनियों को बेहतर रणनीति बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि कंपनियां इन स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड? ऑटोमेशन का बढ़ता ट्रेंड: कंपनियां मैन्युअल काम को कम करके ऑटोमेशन अपना रही हैं बिग डेटा का विस्तार: हर दिन भारी मात्रा में डेटा तैयार हो रहा है, जिसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत है स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: Chatbots, Self-driving Cars और Recommendation Systems जैसी तकनीकें AI पर आधारित हैं जरूरी स्किल्स क्या हैं? AI और Data Science में करियर बनाने के लिए छात्रों को कुछ प्रमुख स्किल्स सीखनी होंगी: Python जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज Machine Learning और Deep Learning Data Analysis और Visualization Statistics और Mathematics की मजबूत समझ करियर ऑप्शन और सैलरी इस फील्ड में करियर के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं: Data Scientist Machine Learning Engineer AI Engineer Business Analyst शुरुआती स्तर पर सैलरी लगभग 6 से 10 लाख रुपये सालाना हो सकती है, जो अनुभव के साथ 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। अन्य उभरती हुई BTech ब्रांच AI के अलावा भी कई टेक ब्रांच तेजी से आगे बढ़ रही हैं: Cyber Security: डेटा सुरक्षा के लिए Cloud Computing: ऑनलाइन सर्वर और स्टोरेज मैनेजमेंट Blockchain Technology: सुरक्षित डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए
टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार लगातार तेज हो रही है, और इसी दिशा में Microsoft ने एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने तीन नए एडवांस्ड AI मॉडल्स लॉन्च किए हैं - MAI-Transcribe-1, MAI-Voice-1 और MAI-Image-2 जो टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन, रियलिस्टिक वॉइस और हाई-क्वालिटी इमेज जनरेशन जैसे कामों को और आसान और तेज बनाएंगे। तीनों AI मॉडल्स में क्या है खास? MAI-Transcribe-1: सबसे एडवांस ट्रांसक्रिप्शन MAI-Transcribe-1 को लेकर Microsoft का दावा है कि यह 25 प्रमुख भाषाओं में स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन में बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल Google और OpenAI के मौजूदा मॉडल्स से भी कम एरर रेट देता है। यह मॉडल खास तौर पर तेज स्पीड और बेहतर प्राइस-परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे डेवलपर्स और एंटरप्राइज यूजर्स को फायदा मिलेगा। MAI-Voice-1: इंसानों जैसी आवाज़ MAI-Voice-1 की मदद से अब AI द्वारा जनरेट की गई आवाज़ पहले से ज्यादा नेचुरल और इमोशनल होगी। कुछ सेकंड की ऑडियो से कस्टम वॉइस तैयार 1 सेकंड में 60 सेकंड की ऑडियो जनरेशन लंबे कंटेंट में भी आवाज़ की स्थिरता यह मॉडल Copilot Audio Expressions और Podcasts जैसे फीचर्स को भी पावर देगा। MAI-Image-2: बेहतर और तेज इमेज जनरेशन MAI-Image-2 इमेज जनरेशन को एक नए स्तर पर ले जाता है। ज्यादा नैचुरल लाइटिंग और टेक्सचर इमेज में टेक्स्ट की बेहतर क्लैरिटी फास्ट प्रोसेसिंग इस मॉडल को डिजाइनर्स और फोटोग्राफर्स के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिससे प्रोफेशनल क्वालिटी आउटपुट मिल सके। कहां उपलब्ध होंगे ये मॉडल्स? ये सभी मॉडल्स Microsoft Foundry और MAI Playground के जरिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा, MAI-Image-2 को Copilot, Bing और PowerPoint जैसे प्रोडक्ट्स में भी रोलआउट किया जा रहा है। AI रेस में Microsoft की मजबूत पकड़ इन नए मॉडल्स के साथ Microsoft ने साफ संकेत दे दिया है कि वह AI की वैश्विक रेस में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। कंपनी का फोकस बेहतर स्पीड, कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले AI सॉल्यूशंस देने पर है। निष्कर्ष Microsoft के ये नए AI मॉडल्स न सिर्फ टेक्नोलॉजी को आसान बनाएंगे, बल्कि कंटेंट क्रिएशन, बिजनेस और डेवलपमेंट के नए अवसर भी खोलेंगे। आने वाले समय में AI का इस्तेमाल और ज्यादा व्यापक और प्रभावी होता नजर आएगा।
टेक दुनिया में AI का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और अब स्मार्ट ग्लासेस इसका नया मैदान बनते जा रहे हैं। लंदन की टेक कंपनी Nothing जल्द ही AI स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च करने की तैयारी में है, जो सीधे Meta के लोकप्रिय Meta Ray-Ban smart glasses को चुनौती दे सकते हैं। कब लॉन्च हो सकते हैं स्मार्ट ग्लासेस? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nothing अपने AI स्मार्ट ग्लासेस को 2027 की शुरुआत में लॉन्च कर सकती है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा कदम होगा, क्योंकि अब तक वह स्मार्टफोन और ऑडियो डिवाइस पर ही फोकस कर रही थी। क्या होंगे संभावित फीचर्स? Nothing के AI स्मार्ट ग्लासेस में ये खासियतें देखने को मिल सकती हैं: इन-बिल्ट कैमरा और माइक्रोफोन स्पीकर्स के जरिए ऑडियो सपोर्ट AI आधारित पर्सनलाइज्ड अनुभव स्मार्टफोन से कनेक्ट होकर क्लाउड प्रोसेसिंग ऑटोमेशन और स्मार्ट टास्क मैनेजमेंट हालांकि, इनमें इन-बिल्ट डिस्प्ले होने की संभावना कम बताई जा रही है। डिजाइन होगा सबसे अलग Carl Pei के नेतृत्व वाली कंपनी अपने ट्रांसपेरेंट और यूनिक डिजाइन के लिए जानी जाती है। Nothing के फोन में Glyph Lights जैसे फीचर्स स्मार्ट ग्लासेस में भी इसी तरह का अलग डिजाइन देखने को मिल सकता है पहले नहीं था इरादा, अब बदली रणनीति दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के CEO Carl Pei पहले स्मार्ट ग्लासेस बनाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन अब कंपनी मल्टी-प्रोडक्ट रणनीति पर काम कर रही है और AI पर बड़ा दांव लगा रही है। AI वियरेबल्स की बढ़ती रेस Nothing इस सेगमेंट में अकेली नहीं है। कई बड़ी टेक कंपनियां भी इसमें उतरने की तैयारी कर रही हैं: Apple Google Samsung वहीं Meta पहले ही अपने स्मार्ट ग्लासेस के 70 लाख से ज्यादा यूनिट बेच चुकी है, जिससे इस मार्केट की संभावनाएं साफ दिखती हैं। बड़ी तस्वीर AI स्मार्ट ग्लासेस आने वाले समय में स्मार्टफोन के बाद अगला बड़ा टेक प्लेटफॉर्म बन सकते हैं। Nothing का इस सेगमेंट में उतरना यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में वियरेबल टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।
हैदराबाद,एजेंसियां। YouTube ने अपनी सुरक्षा तकनीक को और मजबूत करते हुए Likeness Detection टूल को अब पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं तक बढ़ाने की घोषणा की है। पहले यह फीचर केवल YouTube Partner Program के क्रिएटर्स तक सीमित था, लेकिन अब इसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से बन फर्ज़ी वीडियो की पहचान करना और उन्हें हटाने में मदद करना है। क्या है इस टूल में ? इस टूल की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे या आवाज की नकली एआई कॉपी वाले वीडियो की पहचान कर सकता है और प्लेटफ़ॉर्म से हटाने की मांग कर सकता है। कंपनी का कहना है कि डीपफेक टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है और इसका गलत इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने या किसी की छवि खराब करने में किया जा सकता है। कैसे काम करता है Likeness Detection ? Likeness Detection टूल कुछ हद तक Content ID की तरह काम करता है। फर्क यह है कि Content ID कॉपीराइट वाले कंटेंट को पहचानता है, जबकि Likeness Detection किसी व्यक्ति की शक्ल या आवाज से मिलते-जुलते एआई कंटेंट की पहचान करता है। अगर कोई वीडियो प्लेटफ़ॉर्म की प्राइवेसी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता है, तो संबंधित व्यक्ति उसे हटाने का अनुरोध कर सकता है।हालांकि, पैरोडी, व्यंग्य या सार्वजनिक हित से जुड़े वीडियो को हटाने से पहले अलग से रिव्यू किया जाएगा। टूल का उपयोग करने के लिए पात्र लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें फोटो आईडी और चेहरे का वीडियो जमा करना आवश्यक है। डेटा का उपयोग इस डेटा का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि और सुरक्षा फीचर के संचालन के लिए किया जाएगा और इसे गूगल के एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।YouTube का कहना है कि तकनीक के साथ-साथ मजबूत कानून भी जरूरी हैं ताकि लोगों की पहचान और क्रिएटिविटी को एआई टेक्नोलॉजी से होने वाले दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जा सके। इस पहल से पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में भरोसेमंद जानकारी की रक्षा में मदद मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।