नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों और पेशेवरों के लिए नया ऑनलाइन कार्यक्रम 'एप्लाइड क्वांटम कंप्यूटिंग एंड AI' शुरू किया है। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे अधिक से अधिक इच्छुक उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। क्वांटम कंप्यूटिंग और AI पर रहेगा फोकस इस कार्यक्रम में क्वांटम थ्योरी, क्वांटम एल्गोरिदम, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग व AI के संयुक्त उपयोग जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। कोर्स का उद्देश्य प्रतिभागियों को भविष्य की उभरती तकनीकों में व्यावहारिक और उद्योग आधारित ज्ञान उपलब्ध कराना है। पूरी तरह ऑनलाइन होगी पढ़ाई IIT दिल्ली के अनुसार, यह कार्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। इससे देशभर के छात्र और कामकाजी पेशेवर बिना किसी स्थान संबंधी बाधा के इस कोर्स का हिस्सा बन सकेंगे। 15 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन इस कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 15 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। पात्रता, फीस और अन्य जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। AI स्किल्स की बढ़ती मांग को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI और क्वांटम कंप्यूटिंग आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले तकनीकी क्षेत्रों में शामिल होंगे। ऐसे में IIT दिल्ली का यह नया कार्यक्रम छात्रों और पेशेवरों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
IIT Delhi AI Certificate Course 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने Applied Quantum Computing and AI में नया 6.5 महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं है। यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो नई तकनीकों में अपने कौशल को बेहतर बनाकर करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। IIT Delhi ने जारी किया आधिकारिक नोटिस IIT दिल्ली ने अपने नोटिस में बताया है कि Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग-उन्मुख स्किल्स भी सिखाई जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक उम्मीदवार इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 6.5 महीने का ऑनलाइन प्रोग्राम यह कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के साथ भी इसे आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रतिभागियों को IIT Delhi कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे संस्थान के अकादमिक वातावरण और विशेषज्ञों के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। किन लोगों के लिए है यह कोर्स? यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिजाइन किया गया है जो: AI और Quantum Computing में नई स्किल्स सीखना चाहते हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड और एडवांस तकनीकी ज्ञान हासिल करना चाहते हैं। नौकरी के साथ ऑनलाइन सीखने का विकल्प चाहते हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: IIT Delhi CEP के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme चुनें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। कोर्स की मुख्य विशेषताएं संस्थान: IIT Delhi कोर्स: Applied Quantum Computing and AI अवधि: 6.5 महीने मोड: ऑनलाइन कैंपस इमर्शन का अवसर JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2026 AI और Quantum Computing आने वाले वर्षों की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हैं। ऐसे में IIT Delhi का यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम उन प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर हो सकता है जो भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।
Color Changing Mountain: ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) अपनी बदलती रंगत के लिए दुनिया भर में मशहूर है। सूरज की रोशनी के साथ इसका रंग बदलता हुआ नजर आता है। वहीं भारत में भी एक ऐसा पर्वत है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पहाड़ों की रंगत बदलती हुई दिखाई देती है। दिनभर क्यों बदलता है इस पहाड़ का रंग? जानिए इसके पीछे का विज्ञान और आस्था दुनिया में कई पहाड़ अपनी ऊंचाई, बर्फ से ढकी चोटियों या प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) एक ऐसी प्राकृतिक धरोहर है, जो दिनभर बदलती रंगत के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुबह की पहली किरणों में यह हल्का गुलाबी दिखाई देता है, दोपहर में चमकीला नारंगी और शाम ढलते-ढलते इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए नजर आने लगता है। ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित यह विशाल बलुआ पत्थर (Sandstone) का पर्वत अपनी अनोखी रंग बदलने वाली विशेषता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि, चट्टान का वास्तविक रंग नहीं बदलता, बल्कि सूर्य की बदलती रोशनी और इसके खनिजों की संरचना के कारण ऐसा दृश्य दिखाई देता है। क्यों बदलता है उलुरु का रंग? विशेषज्ञों के अनुसार, उलुरु में मौजूद आयरन (लौह) युक्त खनिज समय के साथ ऑक्सीकरण (Oxidation) की प्रक्रिया से लाल रंग के हो गए हैं। सूरज की किरणें अलग-अलग कोणों से पड़ने पर यह चट्टान अलग-अलग रंगों का भ्रम पैदा करती है। दिनभर में इसकी रंगत कुछ इस तरह नजर आती है— सूर्योदय के समय हल्का गुलाबी सुबह सुनहरा नारंगी दोपहर में गहरा जंग जैसा लाल सूर्यास्त के समय लाल, बैंगनी और मैरून रंग आस्था से भी जुड़ा है यह पर्वत उलुरु केवल प्राकृतिक अजूबा ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी अनांगु (Anangu) समुदाय के लिए बेहद पवित्र स्थल भी माना जाता है। हजारों वर्षों से यह स्थान उनकी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत में कौन-सा पर्वत बदलता है रंग? अगर भारत की बात करें, तो कंचनजंगा पर्वत (सिक्किम) भी सूरज की रोशनी के साथ अपनी रंगत बदलता हुआ दिखाई देता है। सूर्योदय के समय इसकी बर्फीली चोटियां सुनहरी और गुलाबी आभा से चमक उठती हैं, जबकि सूर्यास्त के समय नारंगी और हल्के लाल रंग का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इसी वजह से इसे देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय उलुरु (ऑस्ट्रेलिया): मई से सितंबर के बीच मौसम सबसे सुहावना रहता है और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय रंग बदलने का नजारा सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। कंचनजंगा (सिक्किम, भारत): अक्टूबर से दिसंबर और मार्च से मई का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इन महीनों में आसमान साफ रहता है और पर्वत की बदलती रंगत स्पष्ट दिखाई देती है। ध्यान दें: पर्वतों की रंगत में बदलाव मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी, मौसम और वातावरण की स्थिति पर निर्भर करता है। यह एक प्राकृतिक प्रकाशीय प्रभाव (Optical Effect) है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नई सलाह जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में OpenAI, Anthropic और अन्य विदेशी AI मॉडल के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। सरकार का जोर स्वदेशी AI समाधान विकसित करने पर है। संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा से जुड़े कार्यों में विदेशी AI मॉडल का उपयोग करने से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पूरा पालन सुनिश्चित करें। स्वदेशी AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा सरकार का मानना है कि भारत को लंबे समय में घरेलू AI मॉडल और तकनीकों पर अधिक निर्भर होना चाहिए। इसी दिशा में IndiaAI Mission के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी। AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार AI तकनीक का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है। आने वाले समय में AI से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक जारी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी संस्थानों में AI का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ दर्ज कथित नफरती भाषण के मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत से जांच के दौरान किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने और पुलिस पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की अनुमति देने की मांग की है। मामले पर हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक की मांग महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि अंतिम निर्णय तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होने से छूट देने और वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने की भी मांग की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख तय की मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने महुआ मोइत्रा के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजने का निर्देश भी दिया है। क्या है पूरा मामला? महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में नदिया जिले की एक निचली अदालत में पेशी के दौरान कुछ लोगों ने चेहरा ढककर उन पर अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से टिप्पणी की थी कि "जो लोग अपना चेहरा ढकते हैं, उन्हें बुर्का पहन लेना चाहिए।" इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ नफरती भाषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस नोटिस पर जताई आपत्ति याचिका में कहा गया है कि पुलिस लगातार उन्हें थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस भेज रही है। महुआ मोइत्रा की ओर से आशंका जताई गई है कि यदि वह थाने जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनके साथ दोबारा हमला हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से व्यक्तिगत उपस्थिति के बजाय ऑनलाइन पूछताछ की अनुमति देने की मांग की है। 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत यह तय करेगी कि महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए या नहीं और क्या उन्हें वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति मिल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच OpenAI ने अपने नए फ्लैगशिप AI मॉडल GPT-5.6 Sol को पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल स्वतंत्र Design Arena बेंचमार्क में Anthropic के Claude Fable 5 से आगे निकल गया है। इसके साथ ही OpenAI ने कहा कि GPT-5.6 Sol को कोडिंग, तर्क क्षमता (Reasoning), सुरक्षा और कई अन्य AI कार्यों में भी पहले के मुकाबले बेहतर बनाया गया है। Design Arena रैंकिंग में हासिल किया पहला स्थान OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे कंपनी के लिए एक बड़ा पड़ाव बताया। Design Arena द्वारा जारी फ्रंट-एंड डिज़ाइन लीडरबोर्ड के अनुसार, GPT-5.6 Sol ने 1353 Elo स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं, GLM 5.2 1351 अंकों के साथ दूसरे और Claude Fable 5 1345 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग AI मॉडल्स की वेब डिज़ाइन और फ्रंट-एंड डेवलपमेंट क्षमता के आधार पर तैयार की जाती है। क्या है GPT-5.6 फैमिली? OpenAI ने GPT-5.6 सीरीज़ के तहत तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं- GPT-5.6 Sol – जटिल कोडिंग, उन्नत रीजनिंग और AI एजेंट आधारित कार्यों के लिए। GPT-5.6 Terra – रोजमर्रा के कार्यों और संतुलित प्रदर्शन के लिए। GPT-5.6 Luna – कम लागत और तेज़ स्पीड वाले AI कार्यों के लिए। फिलहाल इन मॉडलों को सीमित संख्या में चुनिंदा डेवलपर्स और एंटरप्राइज पार्टनर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। आने वाले हफ्तों में इन्हें व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। नए फीचर्स से लैस है GPT-5.6 Sol OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol में कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- Maximum Reasoning Mode, जो जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल करने में सक्षम है। Ultra Mode, जिसमें सब-एजेंट्स की मदद से कई चरणों वाले कार्य पूरे किए जा सकते हैं। वैज्ञानिक शोध, विशेषकर बायोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन। कम टोकन इस्तेमाल करते हुए अधिक प्रभावी परिणाम देने की क्षमता। सुरक्षा पर भी दिया गया खास ध्यान OpenAI का कहना है कि GPT-5.6 में सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक, मॉडल को साइबर दुरुपयोग, संवेदनशील जैविक जानकारी के गलत इस्तेमाल और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने जैसी संभावित चुनौतियों से बचाने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए हैं। OpenAI ने बताया कि मॉडल की सुरक्षा जांच के लिए लाखों GPU घंटों तक ऑटोमेटेड रेड-टीमिंग और विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किए गए। कब मिलेगा GPT-5.6? फिलहाल GPT-5.6 API और Codex के जरिए चुनिंदा पार्टनर्स के लिए उपलब्ध है। OpenAI ने संकेत दिया है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसे ChatGPT प्लेटफॉर्म पर भी चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कितनी होगी कीमत? OpenAI ने GPT-5.6 मॉडल्स की API कीमतें भी घोषित की हैं- GPT-5.6 Sol – 5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 30 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Terra – 2.5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 15 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Luna – 1 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 6 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन AI प्रतिस्पर्धा में बढ़ी टक्कर GPT-5.6 Sol के लॉन्च के साथ OpenAI और Anthropic के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। बेहतर डिज़ाइन क्षमता, उन्नत कोडिंग, मजबूत रीजनिंग और सुरक्षा फीचर्स के साथ OpenAI अपने नए मॉडल को डेवलपर्स और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अधिक सक्षम विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
रांची। झारखंड अपनी पारंपरिक पहचान खनिज संपदा वाले राज्य से आगे बढ़कर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने झारखंड विकास विजन 2050 के तहत रांची को आईटी और एआई हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य राज्य को डिजिटल नवाचार, तकनीकी निवेश और रोजगार का नया केंद्र बनाना है। सरकार की योजना के अनुसार सरकार की योजना के अनुसार रांची में लगभग 100.97 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा। साथ ही राज्य की अपनी एआई नीति लागू होगी, जिसके तहत स्टेट एआई क्लाउड तैयार किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार के इंडिया एआई इकोसिस्टम के साथ समन्वय स्थापित कर डिजिटल सेवाओं को मजबूत करेगा। ड्राफ्ट एआई पॉलिसी 2026 में स्मार्ट माइनिंग, खनिज चोरी पर निगरानी, मौसम और मिट्टी के विश्लेषण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास तथा प्रशासनिक सेवाओं में एआई के व्यापक उपयोग का प्रस्ताव है। सरकार डिजिटल गवर्नेंस को एआई आधारित प्लेटफॉर्म से जोड़कर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली विकसित करना चाहती है। इसके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी योजना है। विशेषज्ञों का मानना हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट, निर्बाध बिजली, डेटा सेंटर, कुशल मानव संसाधन और पारदर्शी नीतियों पर निर्भर करेगी। सरकार निवेशकों को पूंजी निवेश पर रिम्बर्समेंट, स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट और बिजली शुल्क में राहत जैसे प्रोत्साहन देने की तैयारी कर रही है। झारखंड के सामने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा भी बड़ी चुनौती है। फिर भी टियर-2 शहरों की बढ़ती मांग, अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत और नई औद्योगिक संभावनाएं रांची को भविष्य में आईटी निवेश का आकर्षक केंद्र बना सकती हैं, बशर्ते योजनाएं समयबद्ध और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरें।
कभी कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य मैनेजर बनना माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। Microsoft की हालिया छंटनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मैनेजरों की जगह लेने जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। कंपनियां मैनेजरों को खत्म नहीं कर रहीं, बल्कि अनावश्यक मैनेजमेंट लेयर कम करके नेतृत्व की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। Microsoft की छंटनी ने बढ़ाई चर्चा Microsoft ने हालिया जॉब कट्स के दौरान अपनी मैनेजमेंट लेयर को भी कम किया है। कंपनी AI पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और संगठन को अधिक तेज, चुस्त (Agile) और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यही रणनीति Amazon, Meta और Shopify जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां भी अपना रही हैं। इस ट्रेंड को अब कॉर्पोरेट जगत में "Management Diet" कहा जा रहा है, जिसमें संगठन के भीतर गैर-जरूरी मैनेजमेंट स्तरों को हटाकर निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। AI नहीं, संगठनात्मक बदलाव है बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल AI की वजह से नहीं हो रहा है। True Balance के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) गौरव शर्मा का कहना है कि कंपनियां अब यह मूल्यांकन कर रही हैं कि कौन-सी मैनेजमेंट लेयर वास्तव में व्यवसाय को मूल्य दे रही है। यदि किसी स्तर की भूमिका केवल रिपोर्टिंग, समन्वय और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है, तो उसे अधिक प्रभावी तरीके से AI के जरिए संभाला जा सकता है। वहीं HireYou के CHRO अभिजीत घोष के मुताबिक कंपनियां अपने संगठन को अधिक तेज और लचीला बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव कर रही हैं। AI इस बदलाव को आसान बना रहा है क्योंकि अब कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां तकनीक संभाल सकती है। AI किन मैनेजमेंट कार्यों को संभाल रहा है? आज AI कई ऐसे कार्य तेजी से कर रहा है जो पहले मिडिल मैनेजर की जिम्मेदारी माने जाते थे। इनमें शामिल हैं: प्रदर्शन (Performance) की निगरानी प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखना मीटिंग का सारांश तैयार करना कर्मचारियों की शेड्यूलिंग संसाधनों का आवंटन ऑनबोर्डिंग और रिपोर्टिंग अनुपालन (Compliance) की निगरानी इन कार्यों के ऑटोमेट होने से मैनेजरों का समय बच रहा है और संगठन कम मैनेजमेंट लेयर के साथ भी प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं। AI नहीं कर सकता नेतृत्व की जगह विशेषज्ञ मानते हैं कि AI डेटा और प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी नेतृत्व की जगह नहीं ले सकता। कर्मचारियों को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना, टीम का विश्वास जीतना और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना ऐसे काम हैं जिनमें मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि भविष्य में प्रभावी नेतृत्व की अहमियत और बढ़ने वाली है। मैनेजर की भूमिका कैसे बदल रही है? अब भविष्य का मैनेजर केवल टीम की निगरानी करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। नई भूमिका में मैनेजर को इन जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना होगा: कर्मचारियों का विकास और कोचिंग रणनीतिक निर्णय लेना नवाचार को बढ़ावा देना अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना व्यवसायिक समस्याओं का समाधान करना जो मैनेजर केवल अनुमोदन, रिपोर्टिंग और रोजमर्रा की निगरानी तक सीमित रहेंगे, उनके लिए भविष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करियर ग्रोथ का नया मतलब विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में करियर की सफलता केवल मैनेजर बनने से तय नहीं होगी। युवा पेशेवरों को अब इन कौशलों पर ध्यान देना होगा: AI टूल्स की समझ किसी क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता समस्या समाधान क्षमता विभिन्न टीमों के साथ सहयोग लगातार नई तकनीकों को सीखने की आदत व्यवसायिक परिणामों की जिम्मेदारी लेना यानी भविष्य में पदनाम (Designation) से अधिक महत्व कौशल और प्रभाव (Impact) का होगा। क्या भारत में भी दिखेगा यही ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कंपनियां भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी। डिजिटल-फर्स्ट कंपनियां अपेक्षाकृत तेजी से फ्लैट संगठनात्मक ढांचे को अपनाएंगी, जबकि बड़े पारंपरिक संगठनों में यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। हालांकि अंतिम लक्ष्य सभी का लगभग एक जैसा होगा—कम मैनेजमेंट लेयर, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी नेतृत्व। बदलते दौर में नेतृत्व ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों को अच्छे नेताओं की आवश्यकता बनी रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भविष्य में वही मैनेजर सबसे अधिक सफल होंगे जो लोगों को प्रेरित कर सकें, भरोसा कायम रखें, कठिन फैसले लें और लगातार बदलते कारोबारी माहौल में अपनी टीम का सही मार्गदर्शन कर सकें।
पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित यूट्यूबर और जन सुराज नेता मनीष कश्यप एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी नई टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद इंजन में गंभीर खराबी आ गई। इस दावे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद E20 ईंधन को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई। टोयोटा ने दावों को किया खारिज टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने वाहन की तकनीकी जांच के बाद कहा कि कार में आई खराबी E20 पेट्रोल की वजह से नहीं, बल्कि ईंधन में पानी/दूषित ईंधन होने के कारण हुई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इनोवा हाइक्रॉस E20 ईंधन के अनुरूप है। मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज मामले के बाद टोयोटा ने मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि बिना तकनीकी पुष्टि के किए गए दावों से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सरकार ने भी दी सफाई विवाद बढ़ने पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि E20 पेट्रोल पूरी तरह परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे संबंधित वायरल दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल, वाहन सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, मनीष कश्यप अपने दावों पर कायम हैं, जबकि टोयोटा और सरकार दोनों ने उनके आरोपों को तकनीकी जांच के आधार पर खारिज किया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में Meta ने एक नया इमेज जनरेशन मॉडल Muse Image पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बेहद वास्तविक (Realistic) तस्वीरें तैयार कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मौजूदा तस्वीरों को एडिट करने और कई इमेज को मिलाकर नया विजुअल बनाने की भी क्षमता रखता है। हालांकि, इस नई तकनीक के साथ प्राइवेसी और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। क्या है Meta का Muse Image? Muse Image एक AI आधारित इमेज जनरेशन मॉडल है, जो यूजर द्वारा दिए गए टेक्स्ट निर्देशों (Prompt) को समझकर नई तस्वीरें तैयार करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूजर समुद्र किनारे बने आधुनिक घर की तस्वीर चाहता है, तो उसे केवल उसका विवरण लिखना होगा। इसके बाद AI उसी आधार पर नई इमेज तैयार कर देगा। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ नई तस्वीरें ही नहीं बनाता, बल्कि कई रेफरेंस इमेज को मिलाकर नया डिजाइन तैयार करने और पहले से मौजूद तस्वीरों में बदलाव करने की सुविधा भी देता है। किन प्लेटफॉर्म पर मिलेगा यह फीचर? Meta ने Muse Image को अपने AI इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह फीचर Meta AI ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अमेरिका में इसे Instagram Stories के साथ भी जोड़ा गया है, जबकि कुछ देशों में WhatsApp पर इसकी सीमित सुविधा शुरू की गई है। कंपनी भविष्य में इसे Facebook और Marketplace जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। अभी यूजर इस सुविधा का मुफ्त उपयोग कर सकते हैं, हालांकि भविष्य में सीमित उपयोग के बाद सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जा सकता है। क्यों बढ़ा प्राइवेसी को लेकर विवाद? Muse Image का सबसे चर्चित फीचर वह है, जिसमें किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम के आधार पर उसकी सार्वजनिक (Public) प्रोफाइल पर मौजूद तस्वीरों से नई AI इमेज तैयार की जा सकती है। यही सुविधा अब विवाद का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल AI इमेज बनाने में किया जाता है, तो इससे प्राइवेसी और डिजिटल पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या हो सकता है गलत इस्तेमाल? तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की सुविधा पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका गलत उपयोग भी संभव है। AI की मदद से तैयार होने वाली तस्वीरें अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक दिखाई देती हैं। ऐसे में भविष्य में असली और AI से बनी तस्वीरों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे फर्जी तस्वीरें, गलत जानकारी और डिजिटल पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। 'ऑप्ट-आउट' सिस्टम पर भी उठे सवाल Muse Image को लेकर एक और चिंता इसका ऑप्ट-आउट सिस्टम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था में यदि कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका सार्वजनिक कंटेंट AI मॉडल के लिए इस्तेमाल हो, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर यह विकल्प बंद करना होगा। ऐसे में कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी सार्वजनिक तस्वीरों का उपयोग AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकता है। AI के साथ बढ़ रही जिम्मेदारी भी AI आधारित इमेज जनरेशन तकनीक क्रिएटिविटी के नए अवसर जरूर खोल रही है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, यूजर की सहमति और डिजिटल पहचान की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ कंपनियों को पारदर्शी नीतियां अपनानी होंगी, ताकि नई सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहे और यूजर्स की निजता भी सुरक्षित रह सके।
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट लगातार हासिल कर रही है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए AI प्रोजेक्ट जीतना ही पर्याप्त नहीं होगा। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में मजबूत बढ़त बनाए रखने के लिए कंपनी को तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और साझेदारियों पर कहीं अधिक निवेश करना पड़ सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि TCS को भविष्य में अपनी डिविडेंड नीति पर भी दोबारा विचार करना पड़ सकता है, ताकि कंपनी AI कारोबार को तेजी से विस्तार देने के लिए पर्याप्त पूंजी अपने पास रख सके। AI कारोबार बढ़ रहा, लेकिन अभी भी कुल आय का छोटा हिस्सा जून तिमाही के नतीजों में TCS ने AI कारोबार में अच्छी प्रगति दर्ज की। कंपनी का वार्षिक AI राजस्व लगभग 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में करीब 13.6 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, यह कंपनी के कुल वार्षिक राजस्व 30.5 अरब डॉलर का केवल करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सा है। यानी AI तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल यह TCS के कुल कारोबार का सीमित हिस्सा ही बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI को कंपनी की कमाई का बड़ा आधार बनाने के लिए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। AI में आगे रहने के लिए बढ़ानी होगी पूंजी बाजार विश्लेषकों के मुताबिक AI तकनीक में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल प्रोजेक्ट हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नई तकनीकों, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक साझेदारियों पर भी भारी खर्च करना पड़ेगा। यही कारण है कि TCS को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी पूंजी खर्च करने की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या बदल सकती है डिविडेंड नीति? TCS लंबे समय से अपने निवेशकों को आकर्षक डिविडेंड देने वाली कंपनियों में शामिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 39,571 करोड़ रुपये का डिविडेंड वितरित किया, जबकि उसका अनुमानित फ्री कैश फ्लो 47,288 करोड़ रुपये रहा। पिछले तीन वित्त वर्षों में भी कंपनी ने अपने अधिकांश फ्री कैश फ्लो का बड़ा हिस्सा निवेशकों को डिविडेंड के रूप में लौटाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर कारोबार वाली कंपनियों के लिए यह रणनीति उपयुक्त हो सकती है, लेकिन AI जैसी तेजी से बदलती तकनीक के दौर में भविष्य के विस्तार के लिए अधिक पूंजी बचाकर रखना भी जरूरी हो सकता है। कारोबार के कई संकेत अब भी मजबूत हालांकि, निवेश बढ़ाने की जरूरत के बीच TCS के कई कारोबारी संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं। जून तिमाही में कंपनी ने 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए, जो ग्राहकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। इसके अलावा कर्मचारी छोड़ने की दर 13.6 प्रतिशत पर स्थिर रही। कंपनी ने इसी तिमाही में 9,279 नए कर्मचारियों की भर्ती की, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 5.9 लाख हो गई। इसके साथ ही TCS ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल तिमाही मुनाफे या राजस्व पर ही नजर नहीं रखनी चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि TCS AI कारोबार को कितनी तेजी से बढ़ा पाती है। यदि कंपनी भविष्य की तकनीकों में आक्रामक निवेश करती है, तो आने वाले वर्षों में उसका कारोबार और मजबूत हो सकता है। हालांकि इसके लिए कंपनी को डिविडेंड और विकास के लिए होने वाले निवेश के बीच नया संतुलन बनाना पड़ सकता है। AI रणनीति पर रहेगी बाजार की नजर आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि TCS AI प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से बड़े कारोबार में बदल पाती है। यदि कंपनी तकनीकी निवेश और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो AI युग में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं, डिविडेंड नीति में किसी संभावित बदलाव पर भी बाजार की खास नजर बनी रहेगी।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए OpenAI ने अपने नए वॉयस मॉडल GPT-Live-1 को लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल ChatGPT Voice को पहले की तुलना में अधिक स्वाभाविक, तेज और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम बनाता है। कंपनी ने इसके साथ GPT-Live-1 mini भी पेश किया है, जिसे मुफ्त उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। एक साथ सुनेगा भी और बोलेगा भी GPT-Live-1 की सबसे बड़ी खासियत इसकी फुल-डुप्लेक्स तकनीक है। यानी अब ChatGPT उपयोगकर्ता की बात पूरी होने का इंतजार किए बिना बातचीत के दौरान सुन और जवाब दे सकेगा। इससे बातचीत अधिक स्वाभाविक लगेगी और बीच में रुकावटें भी कम होंगी। जवाब देते हुए करेगा वेब सर्च और रीजनिंग OpenAI के अनुसार, यदि किसी सवाल के लिए वेब सर्च या गहन विश्लेषण की जरूरत होगी, तो GPT-Live-1 बैकग्राउंड में कंपनी के नवीनतम मॉडल की मदद लेकर जवाब तैयार करेगा। इस दौरान बातचीत का प्रवाह भी बना रहेगा। किसे मिलेगा नया फीचर? कंपनी ने बताया कि GPT-Live-1 को दुनिया भर में Go, Plus और Pro प्लान के उपयोगकर्ताओं के लिए डिफॉल्ट वॉयस मॉडल के रूप में जारी किया जा रहा है। वहीं Free प्लान के यूजर्स को GPT-Live-1 mini मिलेगा। यह अपडेट ChatGPT.com, Android और iOS पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। रीयल-टाइम ट्रांसलेशन समेत कई नई खूबियां नए वॉयस मॉडल में रीयल-टाइम अनुवाद, अधिक प्राकृतिक प्रतिक्रिया, बीच में पूछे गए सवालों को समझने की क्षमता और कम रुकावट जैसी कई नई सुविधाएं शामिल की गई हैं। इससे भाषा सीखने, यात्रा, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में AI का उपयोग पहले से अधिक आसान हो जाएगा। वॉयस AI को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी OpenAI का कहना है कि GPT-Live-1 सिर्फ वॉयस अपग्रेड नहीं, बल्कि इंसानों और AI के बीच अधिक सहज संवाद की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में ऐसे AI सिस्टम विकसित करना है जो लंबी और जटिल बातचीत को भी स्वाभाविक तरीके से संभाल सकें।
नई पीढ़ी के हाथों में कॉर्पोरेट नेतृत्व की कमान भारत के कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व की तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के 55% C-suite (शीर्ष प्रबंधन) पदों पर अब मिलेनियल्स (Millennials) का कब्जा है। पिछले सात वर्षों में इस वर्ग की भागीदारी में लगभग 14.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह भारत के वरिष्ठ कॉर्पोरेट नेतृत्व का सबसे बड़ा समूह बन गया है। रिपोर्ट बताती है कि आज के दौर में केवल एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बजाय अलग-अलग सेक्टर और विभिन्न भूमिकाओं का अनुभव रखने वाले पेशेवर तेजी से शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रहे हैं। पारंपरिक करियर मॉडल बदल रहा है कुछ साल पहले तक अधिकांश शीर्ष अधिकारी एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बाद C-suite तक पहुंचते थे। लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है। LinkedIn के मुताबिक, एक ही इंडस्ट्री का अनुभव रखने वाले C-suite अधिकारियों की हिस्सेदारी करीब 80% से घटकर 58% रह गई है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास विविध उद्योगों, अलग-अलग कंपनियों और कई प्रकार की जिम्मेदारियों का अनुभव हो। AI बना बिजनेस फैसलों का अहम हिस्सा रिपोर्ट के अनुसार, 84% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी कंपनियों में नई नौकरियां और नई भूमिकाएं तैयार कर रहा है। सबसे अधिक भरोसा Chief Marketing Officers (CMOs) में देखा गया, जहां 94% अधिकारियों ने AI को नए अवसरों का प्रमुख स्रोत माना। इतना ही नहीं, 84% वरिष्ठ अधिकारी यह भी स्वीकार करते हैं कि अब बिजनेस से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में AI टूल्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। AI अपनाने की बढ़ती चुनौती हालांकि कंपनियां तेजी से AI को अपना रही हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के सामने इसकी रफ्तार बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80% भारतीय C-suite नेताओं का कहना है कि उन पर AI को तेजी से लागू करने का दबाव है, जबकि उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यह दबाव सबसे ज्यादा Chief Marketing Officers (82%) और Chief Technology Officers (81%) पर देखा गया। अनिश्चित माहौल में तेज फैसले लेना सबसे बड़ी चुनौती आज के कारोबारी माहौल में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच सही समय पर निर्णय लेना भी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 39% भारतीय C-suite नेताओं ने लगातार बदलते माहौल में तेज और सही फैसले लेना अपनी सबसे बड़ी नेतृत्व चुनौती बताया। यह चिंता विशेष रूप से CEOs और CMOs में अधिक देखने को मिली। वर्कफोर्स प्लानिंग अब केवल HR की जिम्मेदारी नहीं रिपोर्ट बताती है कि भविष्य में किन स्किल्स और किन भूमिकाओं की जरूरत होगी, इसे लेकर भी कंपनियों में स्पष्टता की कमी है। 51% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि उनकी कंपनियों को भविष्य के टैलेंट और आवश्यक स्किल्स की सही समझ नहीं है। अब कर्मचारियों की योजना बनाना केवल HR विभाग का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे नेतृत्व की साझा जिम्मेदारी बन चुकी है, क्योंकि इसका सीधा असर बिजनेस ग्रोथ, टेक्नोलॉजी अपनाने और ग्राहक रणनीति पर पड़ता है। AI से सबसे बड़ी उम्मीद इनोवेशन की भारतीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए AI का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल काम की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि नए अवसर तैयार करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 90% भारतीय C-suite नेता AI निवेश से सबसे ज्यादा इनोवेशन की उम्मीद करते हैं। इनमें CMOs, CEOs और CTOs सबसे आगे हैं। उनका मानना है कि AI की मदद से नए उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं, ग्राहकों का अनुभव बेहतर बनाया जा सकता है और कंपनियां बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत कर सकती हैं। AI स्किल्स बन रही हैं भविष्य के नेताओं की पहचान LinkedIn रिपोर्ट के अनुसार, भारत में C-suite स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली पांच प्रमुख स्किल्स में से चार AI से जुड़ी हैं। इनमें AI Agents, AI Productivity, Retrieval-Augmented Generation (RAG) और AI Strategy शामिल हैं। सबसे तेज वृद्धि AI Agents स्किल में दर्ज की गई, जिसमें 18.6% सालाना वृद्धि हुई। वहीं, 2020 के बाद से AI और अन्य तकनीकी विशेषज्ञताओं की मांग में 10.9% की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलते दौर में AI और विविध अनुभव बने सफलता की कुंजी LinkedIn की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में कॉर्पोरेट नेतृत्व तेजी से बदल रहा है। मिलेनियल्स अब शीर्ष पदों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, जबकि AI केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि नेतृत्व, भर्ती, निर्णय प्रक्रिया और बिजनेस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले वर्षों में AI की समझ और बहु-क्षेत्रीय अनुभव रखने वाले नेताओं की मांग और तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक टेक उद्योग में एक बार फिर बड़ी छंटनी की खबर ने हलचल मचा दी है। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। यह कंपनी की कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1 प्रतिशत है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि यह कदम केवल लागत कम करने के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संगठन को तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। HR हेड ने बताई छंटनी की वजह माइक्रोसॉफ्ट की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (HR Head) एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक मेमो में कहा कि कंपनी अपने संसाधनों, निवेश और प्रतिभा को उन क्षेत्रों में केंद्रित करना चाहती है, जहां भविष्य में सबसे अधिक विकास की संभावना है। उनके अनुसार, AI, क्लाउड सेवाओं और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जरूरी हो गया था। AI निवेश के बीच बढ़ा दबाव हाल के महीनों में माइक्रोसॉफ्ट ने AI तकनीक और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। इसी के साथ खर्चों को नियंत्रित करने और संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए कंपनी ने यह कठिन फैसला लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में टेक कंपनियां पारंपरिक भूमिकाओं की जगह AI-केंद्रित नौकरियों पर अधिक ध्यान देंगी। शेयरों में गिरावट और पहले भी हुई थी कटौती कंपनी के शेयरों में वर्ष 2026 की पहली छमाही में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले कुछ वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Buyout) का प्रस्ताव भी दे चुकी है। गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है। इस वर्ष अमेजन, मेटा और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी AI निवेश और लागत नियंत्रण की रणनीति के तहत हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं, जिससे वैश्विक टेक सेक्टर में रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रांची। झारखंड के रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 17 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। 19 जून को बुंडू थाना क्षेत्र के तेतरटांड़ जंगल से मिली सिरकटी और आंशिक रूप से जली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी से शादी करने की चाह में पत्नी ने अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। पहचान मिटाने के लिए सिर काटकर जलाया शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान तमाड़ थाना क्षेत्र के मांझीडीह निवासी संजय लोहरा के रूप में हुई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने के लिए पहले सिर धड़ से अलग किया, फिर धड़ को जलाकर जंगल में फेंक दिया। सिर को अलग स्थान पर जमीन में दफना दिया गया, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बिना सिर के शव मिलने के कारण यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मिला कटा हुआ सिर गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर तमाड़ थाना क्षेत्र के सुंदरडीह स्थित रानी वन में जमीन के भीतर दबाकर रखा गया मृतक का सिर बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए। चार आरोपी शामिल, दो अब भी फरार डीएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक जांच और लगातार छानबीन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे में अनुसंधान टीम, तकनीकी सेल और एफएसएल की संयुक्त भूमिका रही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ 30 मीटर रिजॉल्यूशन पर बाढ़ के पानी की गहराई का भी अनुमान लगा सकता है। यह तकनीक दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में विकसित की गई है और भविष्य में देश के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 93% से ज्यादा सटीकता के साथ करता है बाढ़ का अनुमान शोधकर्ताओं के अनुसार, यह AI सिस्टम 93 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में सक्षम है। यह मॉडल लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तदरी से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तकनीक का उद्देश्य भारी बारिश के कारण आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते प्रशासन को सतर्क करना है। सिर्फ बारिश नहीं, कई कारकों का करता है विश्लेषण IIT बॉम्बे की रिसर्च टीम ने इस मॉडल में केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य कारकों को भी शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: सतही जल प्रवाह (Surface Runoff) मिट्टी की नमी भूमि उपयोग (Land Use) जल अवशोषण क्षमता ड्रेनेज सिस्टम शोधकर्ताओं का कहना है कि सतही जल प्रवाह, केवल बारिश की मात्रा की तुलना में बाढ़ का अधिक विश्वसनीय संकेतक साबित हुआ। सैटेलाइट और AI का अनोखा संयोजन इस सिस्टम को तैयार करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-1 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया। यह रडार तकनीक घने मानसूनी बादलों के बीच भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। AI मॉडल ने बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर पानी से भरे क्षेत्रों की पहचान करना सीखा और उसी आधार पर संभावित बाढ़ की गहराई का अनुमान लगाया। दो चरणों में करता है काम यह AI सिस्टम दो स्तरों पर कार्य करता है: पहले चरण में यह पहचानता है कि कौन-सा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखता है। दूसरे चरण में यह अनुमान लगाता है कि उस स्थान पर पानी कितनी गहराई तक भर सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल, सड़क और स्कूलों की सुरक्षा में होगी मदद 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाले हाई-प्रिसिजन मैप्स की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ के दौरान कौन-कौन से अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में मुंबई और पूर्वी तट तक होगा विस्तार फिलहाल यह मॉडल पश्चिमी घाट के कम ढलान (7% से कम) वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त डेटा जोड़कर इसे मुंबई और भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों जैसे जटिल इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
AI निवेश बढ़ा, लागत कम करने के लिए Microsoft का बड़ा कदम दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में कटौती करते हुए करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब Microsoft कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है तथा साथ ही परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने विभिन्न विभागों में दक्षता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह बदलाव कर रही है। AI पर अरबों डॉलर का दांव, लेकिन बढ़ रहा है वित्तीय दबाव पूरे टेक उद्योग में इस समय AI को लेकर निवेश की होड़ मची हुई है। Microsoft के अलावा Amazon और Meta Platforms जैसी कंपनियां भी इस वर्ष हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में बड़ी टेक कंपनियों का AI संबंधी निवेश 700 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों पर यह दबाव भी बढ़ गया है कि वे इन भारी निवेशों से बेहतर वित्तीय परिणाम हासिल करें। शेयरों में गिरावट के बाद बढ़ी चिंता Microsoft के लिए वर्ष 2026 की पहली छमाही आसान नहीं रही। कंपनी के शेयरों में जनवरी से जून के बीच लगभग 23% की गिरावट दर्ज की गई, जो 2022 के बाद उसका सबसे कमजोर पहला छह महीने का प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले भी कंपनी अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन पैकेज (Voluntary Buyout) की पेशकश कर चुकी थी, जो उसके अमेरिकी कर्मचारियों का करीब 7% था। Microsoft हर वर्ष जून में अपना वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए वित्तीय वर्ष की योजना के तहत कर्मचारियों और खर्चों की समीक्षा भी करती है। Azure की मजबूत मांग, लेकिन डेटा सेंटर का बढ़ता खर्च AI सेवाओं की बढ़ती मांग का सबसे अधिक फायदा Microsoft के Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म को मिला है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल्स का विशेष क्लाउड प्रदाता था, जिससे कंपनी को AI सेवाओं की बढ़ती मांग का लाभ मिला। हालांकि, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने और उनका विस्तार करने में भारी पूंजी खर्च हो रही है। इससे कंपनी के नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव बढ़ा है। Microsoft ने पहले ही 2026 के लिए लगभग 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जताया था, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक माना गया। Gaming कारोबार भी चुनौतियों से जूझ रहा AI पर बढ़ते खर्च का असर Microsoft के गेमिंग कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे हार्डवेयर निर्माण की लागत में इजाफा हुआ है। इसी कारण कंपनी को अपने Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ीं, जबकि बाजार में इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है। हाल ही में Microsoft के गेमिंग डिवीजन की प्रमुख Asha Sharma ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा कि कंपनी के गेमिंग व्यवसाय को "रीसेट" की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस डिवीजन का लाभ मार्जिन घटकर केवल 3% रह गया है, जिसके चलते पुनर्गठन जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में विलय और अधिग्रहण (M&A) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। शर्मा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने कंटेंट, प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर सब्सिडी पर 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, लेकिन इस दौरान वार्षिक राजस्व में लगभग 50 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। उनका कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है। श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है। टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है। 6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी। सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है। बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा। एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया में चीन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी UBTech ने 30 जून को शेन्जेन में अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट UWORLD U1 लॉन्च किया। यह रोबोट पारंपरिक औद्योगिक मशीनों से बिल्कुल अलग है। इसे फैक्ट्रियों में काम कराने के बजाय इंसानों के साथ रहने, बातचीत करने और उन्हें भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। UWORLD U1 का डिजाइन और रूप-रंग काफी हद तक इंसानों जैसा है। इसमें सिलिकॉन स्किन, अत्याधुनिक इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑन-डिवाइस डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रोबोट लोगों के साथ प्राकृतिक तरीके से संवाद कर सकता है और समय के साथ उनके व्यवहार और पसंद को समझते हुए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। इंसानों का साथी बनने के लिए तैयार किया गया UBTech के अनुसार, UWORLD U1 को ऐसे वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंसानों के साथ लगातार संवाद की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल बुजुर्गों की देखभाल, शिक्षा, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, रिसेप्शन सेवाओं, प्रीमियम होम सर्विस और अन्य ग्राहक-केंद्रित कार्यों में किया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बातचीत के दौरान सामने वाले की भावनाओं को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी रखता है। तीन वेरिएंट में उपलब्ध UWORLD U1 को तीन अलग-अलग मॉडल में पेश किया गया है। U1 Lite U1 Pro U1 Ultra फिलहाल इसकी बिक्री केवल चीन में शुरू की गई है। कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 119,800 युआन (करीब 14 लाख रुपये) है, जबकि हाई-एंड Ultra मॉडल की कीमत 990,000 युआन (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जाती है। महिला और पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा UWORLD U1 की एक खास विशेषता यह है कि इसे पुरुष और महिला दोनों रूपों में तैयार किया गया है। पुरुष मॉडल की लंबाई लगभग 183 सेंटीमीटर है। महिला मॉडल की लंबाई लगभग 168 सेंटीमीटर रखी गई है। रोबोट में कुल 88 सर्वो जॉइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह इंसानों की तरह सिर, हाथ, गर्दन और शरीर की कई स्वाभाविक गतिविधियां कर सकता है। इसके पूरे बाहरी हिस्से पर सिलिकॉन कोटिंग की गई है ताकि बातचीत के दौरान यह अधिक वास्तविक महसूस हो। 20 से ज्यादा भावनाओं को पहचान सकता है UWORLD U1 की सबसे बड़ी ताकत इसका Emotional AI System है। कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 20 से अधिक प्रकार की मानवीय भावनाओं को पहचान सकता है। बातचीत के दौरान यह सामने वाले व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखता है, चेहरे के भावों को समझता है और पिछली बातचीत को याद रखते हुए भविष्य में अधिक व्यक्तिगत जवाब देता है। यानी अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस रोबोट से बातचीत करता है, तो समय के साथ यह उसकी पसंद, व्यवहार और बातचीत के तरीके को समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है। क्लाउड पर नहीं, डिवाइस में ही सुरक्षित रहेगा डेटा UBTech ने प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए UWORLD U1 में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया है। इसका इमोशनल AI मॉडल Rockchip RK3588 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होती है और क्लाउड सर्वर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। यूजर का व्यक्तिगत डेटा क्लाउड पर अपलोड होने के बजाय रोबोट में ही सुरक्षित रहता है। कंपनी के अनुसार इसमें तीन-स्तरीय प्राइवेसी आर्किटेक्चर दिया गया है, जिसमें लोकल-फर्स्ट प्रोसेसिंग, सीमित क्लाउड उपयोग और यूजर कंट्रोल्ड हार्डवेयर सिक्योरिटी शामिल है। इसका उद्देश्य AI डिवाइसों से जुड़ी बढ़ती गोपनीयता संबंधी चिंताओं को कम करना है। सिर्फ वयस्कों के लिए उपलब्ध UBTech ने स्पष्ट किया है कि UWORLD U1 को किसी इंडस्ट्रियल रोबोट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विशेष रूप से वयस्क खरीदारों के लिए विकसित किया गया है, जहां स्वाभाविक संवाद, साथ और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।