Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी।
नई व्यवस्था के तहत:
यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है।
इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा।
पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी।
माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
कंपनी:
यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं।
यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भीषण गर्मी और हीटवेव के इस दौर में जहां घर से बाहर निकलना ही चुनौती बन गया है, वहीं कार से सफर करना भी अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। तेज धूप में ड्राइविंग के दौरान न सिर्फ आपकी सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि आपकी कार के अहम हिस्सों पर भी भारी दबाव पड़ता है। कार का केबिन मिनटों में तपने लगता है, इंजन ओवरहीट हो सकता है और टायर के फटने तक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। क्यों खतरनाक है हीटवेव में ड्राइविंग? गर्मियों में कार के भीतर का तापमान बेहद तेजी से बढ़ता है। पार्क की गई गाड़ी कुछ ही मिनटों में ओवन जैसी गर्म हो सकती है। इससे एसी सिस्टम पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, इंजन ज्यादा मेहनत करता है और टायर में हवा फैलने से ब्लोआउट का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हीटवेव के दौरान ड्राइविंग को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। इन 10 स्मार्ट टिप्स से रखें खुद को और अपनी कार को सुरक्षित 1. समझदारी से करें पार्किंग जहां तक संभव हो, अपनी कार को छांव या कवर पार्किंग में रखें। विंडशील्ड सनशेड का उपयोग केबिन को ठंडा रखने में मदद करता है। 2. AC चालू करने से पहले करें वेंटिलेशन कार स्टार्ट करने के बाद तुरंत एसी ऑन न करें। पहले खिड़कियां खोलकर गर्म हवा को बाहर निकलने दें। 3. AC का सही इस्तेमाल करें एकदम से एसी को फुल कूलिंग पर सेट करने के बजाय धीरे-धीरे तापमान कम करें, इससे सिस्टम पर दबाव कम पड़ेगा। 4. इंजन के तापमान पर रखें नजर कूलेंट लेवल नियमित रूप से चेक करें और तापमान गेज पर नजर बनाए रखें। ओवरहीटिंग के संकेत मिलते ही गाड़ी रोक दें। 5. टायर प्रेशर रखें संतुलित गर्मी में हवा फैलने से टायर प्रेशर बढ़ सकता है। नियमित जांच से ब्लोआउट जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है। 6. हमेशा पानी साथ रखें डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ड्राइविंग के दौरान पर्याप्त पानी साथ रखें, खासकर लंबी यात्रा में। 7. बच्चों या पालतू जानवरों को कार में न छोड़ें बंद कार में तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। 8. कार के इंटीरियर को सुरक्षित रखें लेदर सीट, डैशबोर्ड और स्टीयरिंग को कवर या सनशेड से बचाएं ताकि वे अधिक गर्म न हों। 9. चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें अगर कोई अजीब आवाज, गंध या वार्निंग लाइट दिखे तो तुरंत जांच कराएं। 10. सही समय पर करें यात्रा सुबह या शाम के समय यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित होता है। दोपहर में ड्राइविंग से बचें।
टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब वह दौर पीछे छूट चुका है, जब फ्लैगशिप स्मार्टफोन का मतलब सिर्फ महंगे डिवाइस हुआ करते थे। आज ₹40,000 के बजट में भी ऐसे स्मार्टफोन्स उपलब्ध हैं, जो प्रीमियम डिजाइन, दमदार परफॉर्मेंस और एडवांस्ड कैमरा फीचर्स के साथ लगभग फ्लैगशिप जैसा अनुभव देते हैं। अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए सही साबित हो सकता है। दमदार परफॉर्मेंस और फीचर्स का नया दौर इस बजट सेगमेंट में कंपनियों ने अपने लेटेस्ट प्रोसेसर, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और बड़े बैटरी बैकअप के साथ ऐसे विकल्प पेश किए हैं, जो हर तरह के यूजर—चाहे गेमिंग हो, फोटोग्राफी या मल्टीटास्किंग—की जरूरतों को पूरा करते हैं। टॉप 4 स्मार्टफोन ऑप्शंस 1. OnePlus Nord 6 यह फोन अपने पावरफुल Snapdragon 8s Gen 4 प्रोसेसर के कारण शानदार परफॉर्मेंस देता है। 165Hz रिफ्रेश रेट वाला AMOLED डिस्प्ले और 9000mAh की बड़ी बैटरी इसे गेमिंग और एंटरटेनमेंट के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। साथ ही OxygenOS 16 का स्मूद अनुभव इसे और खास बनाता है। 2. Nothing Phone (4a) Pro डिजाइन और कैमरा के मामले में यह फोन अलग पहचान बनाता है। इसमें 50MP टेलीफोटो लेंस के साथ बेहतर पोर्ट्रेट और डिटेल्ड फोटो मिलती हैं। Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर और 144Hz डिस्प्ले इसे एक संतुलित परफॉर्मर बनाते हैं। 3. Google Pixel 9a अगर आप क्लीन एंड्रॉयड एक्सपीरियंस और शानदार कैमरा चाहते हैं, तो यह फोन आपके लिए है। Google का भरोसेमंद सॉफ्टवेयर और लंबे समय तक मिलने वाले अपडेट्स इसे इस रेंज में खास बनाते हैं। 4. Vivo V70 FE फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह फोन बेहतरीन है। 200MP कैमरा, AI फीचर्स और 7000mAh बैटरी के साथ यह फोन लंबे समय तक चलने और शानदार फोटो कैप्चर करने का वादा करता है। क्यों खास है यह सेगमेंट? इस प्राइस रेंज में अब सिर्फ बेसिक फीचर्स नहीं, बल्कि प्रीमियम एक्सपीरियंस मिल रहा है। कंपनियां यूजर्स को बेहतर कैमरा, फास्ट चार्जिंग, AI फीचर्स और स्मूद परफॉर्मेंस दे रही हैं, जिससे यह सेगमेंट सबसे ज्यादा वैल्यू-फॉर-मनी बन चुका है। अगर आप नया फोन लेने का प्लान कर रहे हैं, तो इन ऑप्शंस पर जरूर नजर डालें—ये आपके बजट में बेस्ट टेक्नोलॉजी का अनुभव दे सकते हैं।
Apple iPhone 18 Pro को लेकर नई लीक सामने आई है, जिसमें इसके कैमरा सिस्टम में दो बड़े बदलावों की चर्चा है। अगर ये रिपोर्ट सही साबित होती है, तो iPhone 18 Pro मोबाइल फोटोग्राफी के अनुभव को एक नए स्तर पर ले जा सकता है। पहली बार मिलेगा Variable Aperture Apple अपने Pro मॉडल में पहली बार Variable Aperture तकनीक दे सकता है। अभी तक iPhone में फिक्स्ड अपर्चर मिलता है, लेकिन इस नए फीचर से कैमरा रोशनी के हिसाब से अपने लेंस को एडजस्ट कर सकेगा। कम रोशनी में ज्यादा लाइट सेंसर तक पहुंचेगी, जिससे तस्वीरें अधिक ब्राइट और डिटेल्ड आएंगी। वहीं, तेज रोशनी में ओवरएक्सपोजर से बचाव होगा। इसके अलावा, यूजर्स को बैकग्राउंड ब्लर पर भी बेहतर कंट्रोल मिलेगा। नया सेंसर देगा बेहतर फोटो क्वालिटी रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple एक नया Three-Layer Stacked Image Sensor इस्तेमाल कर सकता है। माना जा रहा है कि यह सेंसर Samsung Electronics के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इससे शटर लैग कम होगा, लो-लाइट फोटोग्राफी बेहतर होगी और चलती वस्तुओं की तस्वीरें ज्यादा साफ आएंगी। साथ ही Dynamic Range में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। लो-लाइट और एक्शन फोटोग्राफी में होगा फायदा नया सेंसर कम रोशनी में नॉइज को कम करेगा। यही नहीं, तेज गति से चलती चीजों की फोटो लेने पर भी इमेज ज्यादा शार्प और क्लियर नजर आएगी। Apple और क्या कर रहा है तैयारी? लीक्स के मुताबिक, Apple भविष्य के iPhone मॉडल्स के लिए 200MP पेरिस्कोप कैमरा, बड़ा मेन सेंसर और बेहतर अल्ट्रा-वाइड स्टेबलाइजेशन जैसी तकनीकों पर भी काम कर रहा है। हालांकि, ये फीचर्स आने में अभी कुछ साल लग सकते हैं। फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी यदि ये दोनों अपग्रेड iPhone 18 Pro में मिलते हैं, तो यह उन यूजर्स के लिए शानदार विकल्प होगा जो स्मार्टफोन कैमरे को प्राथमिकता देते हैं। Apple इस बार सिर्फ मेगापिक्सल बढ़ाने के बजाय असली फोटोग्राफी अनुभव को बेहतर बनाने पर फोकस कर रहा है।