ChatGPT

Google Gemini AI
Google ने Gemini AI को और बेहतर बनाने की तैयारी तेज की, नए AI सर्वर चिप पर काम जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल Google अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Gemini AI को और शक्तिशाली बनाने के लिए नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है। कंपनी का फोकस AI मॉडल की गति, क्षमता और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर है, ताकि Gemini को बड़े पैमाने पर यूजर्स और कंपनियों के लिए बेहतर बनाया जा सके।   AI चिप डेवलपमेंट पर Google का फोकस   Google अपने डेटा सेंटर और AI सिस्टम के लिए खास तरह के AI एक्सेलेरेटर चिप्स विकसित कर रहा है। इन चिप्स का उद्देश्य बड़े AI मॉडल को तेजी से ट्रेन और रन करना है। कंपनी पहले से ही अपने Tensor Processing Unit (TPU) का इस्तेमाल करती है और अब इसकी नई पीढ़ी की तकनीक पर काम आगे बढ़ा रही है।   Gemini AI में नए फीचर्स जोड़ने की तैयारी   Google लगातार Gemini AI में नए फीचर्स जोड़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि Gemini टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सटीक और तेज जवाब दे सके। AI असिस्टेंट को ज्यादा व्यक्तिगत और उपयोगी बनाने के लिए नए अपडेट पर भी काम किया जा रहा है।   Microsoft और OpenAI से बढ़ी प्रतिस्पर्धा   AI क्षेत्र में Google को OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ChatGPT और अन्य AI सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Google अपने Gemini मॉडल को मजबूत कर रहा है, ताकि AI बाजार में अपनी स्थिति और बेहतर कर सके।   AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ रहा निवेश   Google समेत दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI डेटा सेंटर, सर्वर और चिप तकनीक में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI की रफ्तार और क्षमता काफी हद तक बेहतर हार्डवेयर पर निर्भर करेगी।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
OpenAI Smart Speaker
OpenAI के पहले AI गैजेट का खुलासा, बिना स्क्रीन वाला स्मार्ट स्पीकर ला सकती है कंपनी

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI के पहले उपभोक्ता हार्डवेयर डिवाइस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने पहले AI गैजेट के रूप में एक स्क्रीन-फ्री स्मार्ट स्पीकर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह डिवाइस पारंपरिक स्मार्ट स्पीकर से अलग होगा और ChatGPT की मदद से अधिक प्राकृतिक और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम होगा।   कैमरा और सेंसर से होगा लैस   रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस AI डिवाइस में कैमरा और कई सेंसर दिए जाएंगे, जो आसपास के माहौल को समझने में मदद करेंगे। डिवाइस यूजर के संदर्भ के अनुसार जवाब देने, स्मार्ट होम डिवाइस नियंत्रित करने, मैसेज भेजने, मीडिया चलाने और अन्य AI आधारित कार्य करने में सक्षम होगा।   जॉनी आइव की टीम कर रही है डिजाइन   इस प्रोजेक्ट पर Apple के पूर्व मुख्य डिजाइनर जॉनी आइव की टीम काम कर रही है। OpenAI ने पिछले वर्ष उनकी AI हार्डवेयर कंपनी io का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से कंपनी उपभोक्ता AI हार्डवेयर विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।   2027 में लॉन्च होने की संभावना   ब्लूमबर्ग और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, OpenAI इस डिवाइस को 2027 में बाजार में उतार सकती है। हालांकि कंपनी ने अब तक इसके डिजाइन, कीमत या लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   AI हार्डवेयर बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   यदि यह डिवाइस लॉन्च होती है, तो OpenAI सीधे AI हार्डवेयर बाजार में कदम रखेगी और Amazon Echo, Google Nest जैसे स्मार्ट स्पीकर के साथ नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI डिवाइस तैयार करना है, जो स्मार्टफोन पर निर्भरता कम करते हुए अधिक स्वाभाविक और सहज उपयोग का अनुभव दे सके।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra arrives at the Calcutta High Court after seeking protection from arrest in a hate speech case and requesting virtual police questioning.
गिरफ्तारी से राहत की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा, 15 जुलाई को होगी सुनवाई

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ दर्ज कथित नफरती भाषण के मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत से जांच के दौरान किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने और पुलिस पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की अनुमति देने की मांग की है। मामले पर हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक की मांग महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि अंतिम निर्णय तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होने से छूट देने और वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने की भी मांग की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख तय की मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने महुआ मोइत्रा के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजने का निर्देश भी दिया है। क्या है पूरा मामला? महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में नदिया जिले की एक निचली अदालत में पेशी के दौरान कुछ लोगों ने चेहरा ढककर उन पर अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से टिप्पणी की थी कि "जो लोग अपना चेहरा ढकते हैं, उन्हें बुर्का पहन लेना चाहिए।" इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ नफरती भाषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस नोटिस पर जताई आपत्ति याचिका में कहा गया है कि पुलिस लगातार उन्हें थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस भेज रही है। महुआ मोइत्रा की ओर से आशंका जताई गई है कि यदि वह थाने जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनके साथ दोबारा हमला हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से व्यक्तिगत उपस्थिति के बजाय ऑनलाइन पूछताछ की अनुमति देने की मांग की है। 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत यह तय करेगी कि महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए या नहीं और क्या उन्हें वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति मिल सकती है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
OpenAI GPT-5.6 Sol AI model showcased with front-end design benchmark rankings outperforming Claude Fable 5.
GPT-5.6 Sol ने फ्रंट-एंड डिज़ाइन में Claude Fable 5 को छोड़ा पीछे, OpenAI ने बताया बड़ी उपलब्धि

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच OpenAI ने अपने नए फ्लैगशिप AI मॉडल GPT-5.6 Sol को पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल स्वतंत्र Design Arena बेंचमार्क में Anthropic के Claude Fable 5 से आगे निकल गया है। इसके साथ ही OpenAI ने कहा कि GPT-5.6 Sol को कोडिंग, तर्क क्षमता (Reasoning), सुरक्षा और कई अन्य AI कार्यों में भी पहले के मुकाबले बेहतर बनाया गया है। Design Arena रैंकिंग में हासिल किया पहला स्थान OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे कंपनी के लिए एक बड़ा पड़ाव बताया। Design Arena द्वारा जारी फ्रंट-एंड डिज़ाइन लीडरबोर्ड के अनुसार, GPT-5.6 Sol ने 1353 Elo स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं, GLM 5.2 1351 अंकों के साथ दूसरे और Claude Fable 5 1345 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग AI मॉडल्स की वेब डिज़ाइन और फ्रंट-एंड डेवलपमेंट क्षमता के आधार पर तैयार की जाती है। क्या है GPT-5.6 फैमिली? OpenAI ने GPT-5.6 सीरीज़ के तहत तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं- GPT-5.6 Sol – जटिल कोडिंग, उन्नत रीजनिंग और AI एजेंट आधारित कार्यों के लिए। GPT-5.6 Terra – रोजमर्रा के कार्यों और संतुलित प्रदर्शन के लिए। GPT-5.6 Luna – कम लागत और तेज़ स्पीड वाले AI कार्यों के लिए। फिलहाल इन मॉडलों को सीमित संख्या में चुनिंदा डेवलपर्स और एंटरप्राइज पार्टनर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। आने वाले हफ्तों में इन्हें व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। नए फीचर्स से लैस है GPT-5.6 Sol OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol में कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- Maximum Reasoning Mode, जो जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल करने में सक्षम है। Ultra Mode, जिसमें सब-एजेंट्स की मदद से कई चरणों वाले कार्य पूरे किए जा सकते हैं। वैज्ञानिक शोध, विशेषकर बायोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन। कम टोकन इस्तेमाल करते हुए अधिक प्रभावी परिणाम देने की क्षमता। सुरक्षा पर भी दिया गया खास ध्यान OpenAI का कहना है कि GPT-5.6 में सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक, मॉडल को साइबर दुरुपयोग, संवेदनशील जैविक जानकारी के गलत इस्तेमाल और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने जैसी संभावित चुनौतियों से बचाने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए हैं। OpenAI ने बताया कि मॉडल की सुरक्षा जांच के लिए लाखों GPU घंटों तक ऑटोमेटेड रेड-टीमिंग और विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किए गए। कब मिलेगा GPT-5.6? फिलहाल GPT-5.6 API और Codex के जरिए चुनिंदा पार्टनर्स के लिए उपलब्ध है। OpenAI ने संकेत दिया है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसे ChatGPT प्लेटफॉर्म पर भी चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कितनी होगी कीमत? OpenAI ने GPT-5.6 मॉडल्स की API कीमतें भी घोषित की हैं- GPT-5.6 Sol – 5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 30 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Terra – 2.5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 15 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Luna – 1 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 6 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन AI प्रतिस्पर्धा में बढ़ी टक्कर GPT-5.6 Sol के लॉन्च के साथ OpenAI और Anthropic के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। बेहतर डिज़ाइन क्षमता, उन्नत कोडिंग, मजबूत रीजनिंग और सुरक्षा फीचर्स के साथ OpenAI अपने नए मॉडल को डेवलपर्स और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अधिक सक्षम विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
GPT-5.6
OpenAI ने लॉन्च की GPT-5.6 फैमिली, Sol, Terra और Luna मॉडल के साथ AI तकनीक को मिली नई रफ्तार

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी घोषणा करते हुए OpenAI ने अपनी नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली लॉन्च कर दी है। इस नई श्रृंखला में Sol, Terra और Luna नाम के तीन अलग-अलग मॉडल शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग जरूरतों और उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि नए मॉडल पहले की तुलना में अधिक तेज, सक्षम, सुरक्षित और किफायती हैं।   तीन मॉडल, तीन अलग-अलग क्षमताएं   OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol सबसे शक्तिशाली मॉडल है, जिसे जटिल कोडिंग, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा और गहन विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। Terra रोजमर्रा के पेशेवर कार्यों के लिए संतुलित प्रदर्शन देता है, जबकि Luna सबसे तेज और कम लागत वाला मॉडल है, जो बड़े पैमाने पर उपयोग और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है।   बेहतर प्रदर्शन और कम लागत का दावा   कंपनी का दावा है कि GPT-5.6 फैमिली पहले की तुलना में कम टोकन खर्च कर बेहतर परिणाम देने में सक्षम है। खासतौर पर Sol मॉडल को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर उपयोग, साइबर सुरक्षा और वैज्ञानिक कार्यों में उल्लेखनीय सुधार के साथ पेश किया गया है। Terra और Luna मॉडल भी कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला प्रदर्शन देने के लिए विकसित किए गए हैं।   सुरक्षा पर भी खास जोर   OpenAI ने बताया कि GPT-5.6 Sol में अब तक का सबसे मजबूत सुरक्षा ढांचा जोड़ा गया है। मॉडल को कई सप्ताह तक रेड-टीमिंग और सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया ताकि साइबर दुरुपयोग और अन्य जोखिमों को कम किया जा सके।   फिलहाल चरणबद्ध तरीके से हो रहा रोलआउट   OpenAI ने GPT-5.6 फैमिली का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआत में इसे ChatGPT, Codex और API के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा।   AI इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा होगी और तेज   विशेषज्ञों का मानना है कि GPT-5.6 के लॉन्च के बाद OpenAI, Google, Anthropic और xAI जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। नए मॉडल एंटरप्राइज, डेवलपर्स और रिसर्च सेक्टर के लिए AI क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
OpenAI
OpenAI ने लॉन्च किया GPT-Live-1, ChatGPT Voice अब करेगा इंसानों जैसी रियल-टाइम बातचीत

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए OpenAI ने अपने नए वॉयस मॉडल GPT-Live-1 को लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल ChatGPT Voice को पहले की तुलना में अधिक स्वाभाविक, तेज और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम बनाता है। कंपनी ने इसके साथ GPT-Live-1 mini भी पेश किया है, जिसे मुफ्त उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।   एक साथ सुनेगा भी और बोलेगा भी   GPT-Live-1 की सबसे बड़ी खासियत इसकी फुल-डुप्लेक्स तकनीक है। यानी अब ChatGPT उपयोगकर्ता की बात पूरी होने का इंतजार किए बिना बातचीत के दौरान सुन और जवाब दे सकेगा। इससे बातचीत अधिक स्वाभाविक लगेगी और बीच में रुकावटें भी कम होंगी।   जवाब देते हुए करेगा वेब सर्च और रीजनिंग   OpenAI के अनुसार, यदि किसी सवाल के लिए वेब सर्च या गहन विश्लेषण की जरूरत होगी, तो GPT-Live-1 बैकग्राउंड में कंपनी के नवीनतम मॉडल  की मदद लेकर जवाब तैयार करेगा। इस दौरान बातचीत का प्रवाह भी बना रहेगा।   किसे मिलेगा नया फीचर?   कंपनी ने बताया कि GPT-Live-1 को दुनिया भर में Go, Plus और Pro प्लान के उपयोगकर्ताओं के लिए डिफॉल्ट वॉयस मॉडल के रूप में जारी किया जा रहा है। वहीं Free प्लान के यूजर्स को GPT-Live-1 mini मिलेगा। यह अपडेट ChatGPT.com, Android और iOS पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है।   रीयल-टाइम ट्रांसलेशन समेत कई नई खूबियां   नए वॉयस मॉडल में रीयल-टाइम अनुवाद, अधिक प्राकृतिक प्रतिक्रिया, बीच में पूछे गए सवालों को समझने की क्षमता और कम रुकावट जैसी कई नई सुविधाएं शामिल की गई हैं। इससे भाषा सीखने, यात्रा, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में AI का उपयोग पहले से अधिक आसान हो जाएगा।   वॉयस AI को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी   OpenAI का कहना है कि GPT-Live-1 सिर्फ वॉयस अपग्रेड नहीं, बल्कि इंसानों और AI के बीच अधिक सहज संवाद की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में ऐसे AI सिस्टम विकसित करना है जो लंबी और जटिल बातचीत को भी स्वाभाविक तरीके से संभाल सकें।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Prabhjit Singh OpenAI
OpenAI ने भारत में पहली बार नियुक्त किया मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रभजीत सिंह संभालेंगे कमान

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही OpenAI ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ChatGPT विकसित करने वाली कंपनी ने उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख प्रभजीत सिंह को भारत का पहला मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पहली बार है जब OpenAI ने भारत में शीर्ष स्तर पर नेतृत्व नियुक्त किया है।   भारत में बिजनेस विस्तार की जिम्मेदारी OpenAI के अनुसार, प्रभजीत सिंह भारत में कंपनी के सभी प्रमुख कारोबारी संचालन की कमान संभालेंगे। वह एशिया-प्रशांत (APAC) प्रमुख किरन मणी को रिपोर्ट करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में भारत में कंज्यूमर ग्रोथ बढ़ाना, विभिन्न उद्योगों में AI के उपयोग को विस्तार देना, सरकारी नीतियों के साथ समन्वय स्थापित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना शामिल होगा।   OpenAI के लिए क्यों अहम है भारत भारत OpenAI के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा यूजर मार्केट बन चुका है। देश में शिक्षा, शोध, कोडिंग और पेशेवर कार्यों में ChatGPT का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और साझेदारियों को और मजबूत करना चाहती है। आईआईटी खड़गपुर और आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई कर चुके प्रभजीत सिंह को भारतीय बाजार और कॉर्पोरेट जगत का व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ OpenAI को मिलने की उम्मीद है।   उबर में 11 साल का सफल कार्यकाल प्रभजीत सिंह ने OpenAI में शामिल होने से पहले उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उबर में लगभग 11 वर्षों तक काम किया और उनके नेतृत्व में कंपनी ने महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों तक कैब, ऑटो और बाइक सेवाओं का विस्तार किया।   उबर ने जताया आभार उबर ने प्रभजीत सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बना रहेगा। कंपनी ने भरोसा जताया कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद भारत में इनोवेशन और मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार लगातार जारी रहेगा। वहीं, OpenAI की यह नियुक्ति भारतीय AI बाजार में उसके दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक विस्तार का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Zoho founder Sridhar Vembu speaking about AI’s impact on student learning and critical thinking skills
AI आपको स्मार्ट भी बना सकता है और मूर्ख भी! छात्रों को Zoho के श्रीधर वेम्बु की बड़ी चेतावनी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज शिक्षा और सीखने के तरीके को तेजी से बदल रहा है। छात्र असाइनमेंट तैयार करने, कोडिंग सीखने, प्रोजेक्ट पूरा करने और परीक्षाओं की तैयारी के लिए ChatGPT, Gemini और Claude जैसे AI टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसी बढ़ती निर्भरता को लेकर Sridhar Vembu ने छात्रों को गंभीर चेतावनी दी है। Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु का कहना है कि AI जहां लोगों को तेज़ी से सीखने और समस्याएं हल करने में मदद कर सकता है, वहीं इसका अत्यधिक उपयोग छात्रों की बुनियादी समझ और सोचने की क्षमता को भी कमजोर कर सकता है। "AI आपको तेजी से स्मार्ट बना सकता है, लेकिन मूर्ख भी" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बु ने कहा कि AI एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनका मानना है कि अगर छात्र हर सवाल का जवाब AI से लेने लगेंगे, तो वे खुद समस्या को समझने, विश्लेषण करने और समाधान खोजने की क्षमता खो सकते हैं। यही कौशल किसी भी क्षेत्र में सफलता की असली नींव होते हैं। पहले मजबूत करें बुनियाद वेम्बु का कहना है कि छात्रों को AI का उपयोग करने से पहले अपने विषय की बुनियादी समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक स्कूल और कॉलेज के छात्र मूलभूत अवधारणाओं को अच्छी तरह नहीं सीख लेते, तब तक उन्हें AI पर अत्यधिक निर्भर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार AI सीखने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है, लेकिन सीखने की जगह नहीं ले सकता। UC Berkeley की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता यह बयान उस समय आया है जब University of California, Berkeley में कंप्यूटर साइंस कोर्सेज में असामान्य रूप से अधिक छात्रों के फेल होने की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार: CS 10 कोर्स में लगभग 35.3% छात्र फेल हुए। CS 61A कोर्स में 10.6% छात्रों को सफलता नहीं मिली। ये आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक बताए जा रहे हैं, जहां फेल होने की दर आमतौर पर 10 प्रतिशत से कम रहती थी। हालांकि रिपोर्ट ने सीधे तौर पर AI को इसका कारण नहीं बताया, लेकिन वेम्बु का मानना है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों की वास्तविक समझ को प्रभावित कर सकती है। पहले भी जता चुके हैं चिंता यह पहली बार नहीं है जब श्रीधर वेम्बु ने AI को लेकर चेतावनी दी हो। इससे पहले भी उन्होंने कई शोधों का हवाला देते हुए कहा था कि AI अल्पकालिक प्रदर्शन (Short-Term Performance) को बेहतर बना सकता है, लेकिन लंबे समय में सीखने और कौशल विकास (Long-Term Learning) पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनका मानना है कि छात्रों को AI का इस्तेमाल सहायक उपकरण (Assistant Tool) की तरह करना चाहिए, न कि अपने दिमाग की जगह लेने वाले विकल्प के रूप में। AI का सही उपयोग क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार AI का उपयोग इन कार्यों में फायदेमंद हो सकता है: किसी विषय को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी लेना कोडिंग या प्रोजेक्ट में सहायता प्राप्त करना रिसर्च और डेटा विश्लेषण करना भाषा और लेखन कौशल में सुधार करना लेकिन यदि छात्र बिना समझे सीधे AI के उत्तरों पर निर्भर हो जाते हैं, तो उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या समाधान कौशल कमजोर पड़ सकते हैं। AI भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन वेम्बु की चेतावनी यही बताती है कि तकनीक का लाभ तभी मिलता है जब उसके साथ मानवीय समझ और सीखने की इच्छा भी बनी रहे।  

surbhi जून 5, 2026 0
OpenAI CEO Sam Altman discussing AI adoption, hiring trends, and the future of jobs
AI से नौकरी छिनने की आशंका पर बदला Sam Altman का सुर, बोले- AI अपनाने वाली कंपनियां ही सबसे ज्यादा भर्ती कर रहीं

AI और नौकरियों पर नई बहस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर पिछले कुछ वर्षों से यह आशंका जताई जा रही थी कि यह तकनीक लाखों लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है। तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के कई नेताओं ने चेतावनी दी थी कि AI कई पेशों को पूरी तरह बदल देगा और रोजगार बाजार पर बड़ा असर डालेगा। लेकिन अब इस बहस में नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। OpenAI के सीईओ Sam Altman ने हाल ही में कहा है कि वास्तविक स्थिति उन आशंकाओं से अलग हो सकती है जो अब तक सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, जिन कंपनियों ने AI को सबसे अधिक अपनाया है, वे ही सबसे ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती भी कर रही हैं। "AI अपनाने वाली कंपनियां भर्ती बढ़ा रही हैं" एक साक्षात्कार के दौरान सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उनके अनुभव में AI का व्यापक उपयोग करने वाली कंपनियां अपने कार्यबल को कम नहीं कर रहीं, बल्कि नए लोगों को नियुक्त कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो कंपनियां छंटनी के लिए AI को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, उनमें से कई वास्तव में AI में सबसे कम निवेश कर रही हैं। ऑल्टमैन के मुताबिक, कई मामलों में AI को कर्मचारियों की कटौती का कारण बताना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। AI कर्मचारियों की जगह नहीं, उनकी क्षमता बढ़ा रहा ऑल्टमैन का कहना है कि AI को लेकर उनकी अपनी सोच भी समय के साथ बदली है। OpenAI के कोडिंग टूल्स और अन्य AI मॉडल्स के उपयोग को करीब से देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह तकनीक कुछ कार्यों में बेहद सक्षम है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसकी सीमाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि AI छोटे और विशिष्ट कार्यों को तेजी से पूरा कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि की योजना बनाना, जटिल परियोजनाओं का प्रबंधन करना और लगातार निगरानी जैसे कार्य अभी भी इंसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाए रखते हैं। क्या छंटनी के लिए AI को बहाना बनाया जा रहा है? ऑल्टमैन ने "AI वॉशिंग" शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कई बार कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी को AI से जोड़ देती हैं, जबकि इसके पीछे अन्य व्यावसायिक कारण भी हो सकते हैं। उनका मानना है कि AI का रोजगार बाजार पर प्रभाव जरूर पड़ेगा, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर रहा है। उनके अनुसार, AI का दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है और इस पर गंभीर अध्ययन की आवश्यकता है। हम समाज में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि AI को लेकर लोगों की चिंताएं पूरी तरह निराधार नहीं हैं। उनका कहना है कि दुनिया एक ऐसे तकनीकी बदलाव को देख रही है जो लंबे समय में समाज, अर्थव्यवस्था और कार्यस्थलों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि AI की वर्तमान क्षमताओं को लेकर कई बार अतिशयोक्तिपूर्ण दावे किए गए हैं, जिससे लोगों के बीच अनावश्यक भय भी पैदा हुआ। OpenAI ने भी मानी अपनी गलती OpenAI प्रमुख ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी के कुछ पुराने दावों ने भी नौकरी खोने की आशंकाओं को बढ़ावा दिया हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय कंपनी ने दावा किया था कि उसका मॉडल कई पेशों में पेशेवरों से बेहतर प्रदर्शन करता है। अब ऑल्टमैन का कहना है कि उस दावे को अधिक स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, AI पूरे पेशे में नहीं बल्कि उन पेशों से जुड़े कुछ विशेष कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। AI पर चर्चा हो रही अधिक संतुलित AI तकनीक के तेजी से विकास के बीच अब उद्योग जगत में इस विषय पर अधिक संतुलित चर्चा देखने को मिल रही है। जहां एक ओर AI से जुड़े जोखिमों को स्वीकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके जरिए उत्पादकता बढ़ाने, नए अवसर पैदा करने और व्यवसायों को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कार्य करने के तरीकों को बदल सकता है, जिससे नए कौशल और नई भूमिकाओं की मांग बढ़ेगी।  

surbhi जून 2, 2026 0
AI, AGI, jobs, and future technology risks
AI से दुनिया में मच सकती है बड़ी उथल-पुथल, इंसानों के पास सिर्फ 3 साल का समय: पूर्व Google X अधिकारी

2027 तक AGI आने का दावा, बड़े बदलाव की चेतावनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पूर्व Google X बिजनेस प्रमुख Mo Gawdat ने दुनिया को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका मानना है कि आने वाले तीन वर्षों के भीतर AI इतना शक्तिशाली हो सकता है कि यह रोजगार, अर्थव्यवस्था और समाज की मौजूदा संरचना को पूरी तरह बदल दे। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में गॉडेट ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) या तो व्यावहारिक रूप से आ चुकी है या फिर 2027 तक इसका आगमन हो सकता है। उनके अनुसार, यह बदलाव मानव इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी परिवर्तनों में से एक साबित हो सकता है। आज के AI टूल्स सिर्फ शुरुआत हैं ChatGPT, Gemini, Claude और Grok जैसे AI टूल्स आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ये ईमेल लिखने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, यात्रा की योजना बनाने और कई अन्य कार्यों में मदद कर रहे हैं। लेकिन गॉडेट का कहना है कि आम लोग AI की जो क्षमताएं देख रहे हैं, वह उसकी वास्तविक शक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा है। उनका दावा है कि रिसर्च लैब्स में विकसित हो रहे सिस्टम कहीं अधिक उन्नत हैं और वे खुद अपने कोड को बेहतर बनाने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आम जनता AI को चैटबॉट और वायरल वीडियो के रूप में देख रही है, जबकि पर्दे के पीछे इसकी प्रगति कहीं ज्यादा तेज और गंभीर है। सबसे पहले सफेदपोश नौकरियों पर असर गॉडेट का मानना है कि AI का पहला बड़ा प्रभाव व्हाइट-कॉलर यानी दफ्तर आधारित नौकरियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर एजेंट, प्रशासनिक सहायक, ट्रैवल एजेंट और अन्य नियमित कंप्यूटर आधारित भूमिकाएं सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा पैरालीगल, वित्तीय विश्लेषक, ग्राफिक डिजाइनर, संगीतकार, मिडिल मैनेजर और कुछ मेडिकल डायग्नोस्टिक भूमिकाओं में भी AI कार्यभार को काफी हद तक कम कर सकता है। उनका तर्क है कि AI की मदद से एक कर्मचारी वह काम कर सकेगा जिसके लिए पहले कई लोगों की जरूरत पड़ती थी। अचानक नहीं, धीरे-धीरे आएगा बदलाव हालांकि गॉडेट का मानना है कि नौकरियों पर असर एकदम से नहीं दिखेगा। शुरुआत में कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर सकती हैं, खासकर एंट्री-लेवल पदों पर। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई कंपनियों ने शुरुआती स्तर की नियुक्तियों को सीमित करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह नहीं कि बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है, लेकिन कार्यबल की वृद्धि की रफ्तार जरूर धीमी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें समय रहते तैयारी नहीं करतीं, तो बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। मैन्युअल काम भी नहीं बचेंगे गॉडेट का मानना है कि फिलहाल शारीरिक श्रम से जुड़े कई कार्य AI और रोबोट्स से सुरक्षित दिखाई देते हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। उन्होंने स्वचालित वाहनों का उदाहरण देते हुए कहा कि रोबोटिक्स का विस्तार भविष्य में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सैन्य क्षेत्र और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। विशेष प्रकार की मशीनें धीरे-धीरे कई मैन्युअल कार्यों को संभाल सकती हैं। AI खतरा नहीं, अवसर भी बन सकता है हालांकि उनकी भविष्यवाणी पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। गॉडेट का मानना है कि यदि AI का जिम्मेदारी से उपयोग किया गया, तो यह मानवता की कई बड़ी समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है। उनके अनुसार, अत्यधिक बुद्धिमान AI सिस्टम वैज्ञानिक खोजों को तेज कर सकते हैं, चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति ला सकते हैं और वैश्विक उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। युवाओं के लिए क्या है सलाह? AI युग में करियर बनाने को लेकर गॉडेट की सलाह स्पष्ट है—AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसके साथ काम करना सीखें। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे कौशल विकसित करने चाहिए जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं। सहानुभूति, प्रभावी संवाद, रचनात्मकता, नेतृत्व और मजबूत मानवीय रिश्ते भविष्य में सबसे मूल्यवान गुण साबित हो सकते हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे AI कई तकनीकी कार्यों में इंसानों से बेहतर होता जाएगा, वैसे-वैसे मानवता से जुड़े गुण लोगों की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। विशेषज्ञों में मतभेद भी मौजूद हालांकि AI के भविष्य को लेकर सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। कई तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि AGI के आने का समय अभी अनिश्चित है और AI के प्रभाव का वास्तविक स्वरूप कई आर्थिक, सामाजिक और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा। फिर भी, गॉडेट की चेतावनी इस बात की ओर संकेत करती है कि AI केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति बन सकती है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Woman working on laptop with AI graphics highlighting job automation and workplace technology impact
AI से महिलाओं की नौकरियों पर ज्यादा खतरा? नई स्टडी में बड़ा खुलासा

महिलाओं पर AI का असर पुरुषों से ज्यादा पड़ने की आशंका Artificial Intelligence तेजी से दुनिया भर के कामकाज और नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। बड़ी टेक कंपनियां लगातार AI में निवेश कर रही हैं, जिसके चलते कई जगह कर्मचारियों की छंटनी भी देखने को मिल रही है। अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि AI की वजह से महिलाओं की नौकरियों पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका की संस्था National Partnership for Women & Families की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं उन नौकरियों में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं जिन्हें भविष्य में AI सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है। 15 सबसे जोखिम वाली नौकरियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है, लेकिन AI से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही 15 नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत तक है। इन नौकरियों में सचिव, रिसेप्शनिस्ट, ऑफिस क्लर्क और इंश्योरेंस एजेंट जैसे प्रोफेशन शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 60 लाख महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जहां AI के कारण नौकरी पर खतरा बढ़ सकता है। हेल्थ और केयर सेक्टर में अभी कम खतरा स्टडी में बताया गया कि नर्सिंग, चाइल्ड केयर और होम हेल्थ केयर जैसे क्षेत्रों में अभी पूरी तरह ऑटोमेशन संभव नहीं है, क्योंकि इन कामों में इंसानी भावनाएं, देखभाल और व्यक्तिगत संपर्क जरूरी होता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि इन क्षेत्रों में भी AI आधारित निगरानी और मैनेजमेंट सिस्टम कर्मचारियों के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। AI डेवलपमेंट में महिलाओं की कम भागीदारी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की संख्या अभी भी AI डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और टेक लीडरशिप जैसी भूमिकाओं में काफी कम है। स्टडी में कहा गया कि AI सिस्टम कैसे डिजाइन होंगे, उनका इस्तेमाल कैसे होगा और उन्हें कैसे नियंत्रित किया जाएगा, इन फैसलों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है। इसका असर उनके कार्यस्थल पर भी पड़ सकता है। AI में जेंडर बायस का भी दावा रिपोर्ट में AI सिस्टम में जेंडर बायस को लेकर भी चिंता जताई गई है। एक रिसर्च का उदाहरण देते हुए बताया गया कि जब ChatGPT से पुरुष और महिला नामों के आधार पर रिज्यूमे तैयार करवाए गए, तो महिलाओं के रिज्यूमे को कम अनुभवी और कम प्रभावशाली दिखाया गया। बाद में जब AI से उन्हीं रिज्यूमे का मूल्यांकन कराया गया, तो पुरुष उम्मीदवारों को ज्यादा बेहतर रेटिंग मिली। महिलाओं को AI इस्तेमाल पर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है स्टडी के अनुसार, कार्यस्थल पर AI टूल्स इस्तेमाल करने पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि जब किसी महिला के बारे में बताया गया कि उसने AI की मदद से काम किया है, तो उसकी क्षमता को पुरुषों की तुलना में ज्यादा कम आंका गया। ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि AI ने महिलाओं को ऑनलाइन टारगेट करने के नए तरीके पैदा कर दिए हैं। AI आधारित डीपफेक और फर्जी तस्वीरों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में xAI के चैटबॉट Grok का भी जिक्र किया गया, जिसे लेकर पहले विवाद हो चुका है। महिलाएं AI टूल्स कम इस्तेमाल कर रही हैं स्टडी में दावा किया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल लगभग 25 प्रतिशत कम है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के बीच AI उपयोग तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 से 2024 के बीच ChatGPT के करीब 42 प्रतिशत यूजर्स महिला नामों से जुड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का असर पूरी तरह तय नहीं है और आने वाले समय में सरकारी नीतियां, कंपनियों के नियम और कार्यस्थल की व्यवस्था यह तय करेगी कि इसका प्रभाव महिलाओं पर कितना पड़ेगा।  

surbhi मई 13, 2026 0
OpenAI and Microsoft logos with Amazon AWS and Google Cloud symbols in background
Microsoft-OpenAI की राहें अलग? अब ChatGPT चलेगा Amazon और Google Cloud पर भी

Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Meta Muse Spark AI model announcement showcasing advanced multimodal AI competing with ChatGPT and Claude
Meta का बड़ा दांव: Muse Spark AI लॉन्च, ChatGPT और Claude को टक्कर देने का दावा

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में बड़ा कदम उठाते हुए अपना नया AI मॉडल Muse Spark लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का उनका सबसे एडवांस्ड मॉडल है, जो आसपास की दुनिया को समझने और जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम है। Meta Superintelligence Labs की पहली पेशकश Muse Spark, Meta Superintelligence Labs (MSL) द्वारा विकसित पहला मॉडल है, जिसकी अगुवाई Alexandr Wang कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस मॉडल को महज 9 महीनों में तैयार किया गया है। Meta के CEO Mark Zuckerberg ने AI सेक्टर में बढ़त हासिल करने के लिए इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया था। क्या है Muse Spark की खासियत? Muse Spark एक छोटा लेकिन तेज (small and fast) LLM है, जिसे खासतौर पर मल्टीमॉडल रीजनिंग और एजेंट-आधारित टास्क के लिए डिजाइन किया गया है। जटिल साइंस, मैथ और हेल्थ से जुड़े सवाल हल करने में सक्षम एक साथ कई AI एजेंट्स को मैनेज कर सकता है यूजर के व्यवहार और बातचीत के आधार पर जवाब देने की क्षमता Meta का दावा है कि यह मॉडल कुछ मामलों में Claude Opus 4.6 और GPT-5.4 जैसे एडवांस मॉडल्स को टक्कर दे सकता है। Meta AI को करेगा पावर Muse Spark अब Meta AI के नए वर्जन को पावर देगा, जो जल्द ही Facebook, Instagram, WhatsApp और Messenger जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही एक नया शॉपिंग मोड भी जोड़ा गया है, जो यूजर्स को उनके पसंदीदा क्रिएटर्स और ब्रांड्स के आधार पर सुझाव देगा। ओपन-सोर्स नहीं है Muse Spark जहां Meta के पहले Llama मॉडल्स ओपन-सोर्स थे, वहीं Muse Spark को फिलहाल क्लोज्ड-सोर्स रखा गया है। अभी यह सीमित पार्टनर्स के लिए API प्रीव्यू में उपलब्ध है, हालांकि कंपनी ने भविष्य में इसे ओपन-सोर्स करने के संकेत दिए हैं। AI रेस में बढ़ी प्रतिस्पर्धा Muse Spark के लॉन्च के साथ ही AI की दुनिया में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। Meta अब OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधी चुनौती दे रही है।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0