नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल Google अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Gemini AI को और शक्तिशाली बनाने के लिए नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है। कंपनी का फोकस AI मॉडल की गति, क्षमता और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर है, ताकि Gemini को बड़े पैमाने पर यूजर्स और कंपनियों के लिए बेहतर बनाया जा सके।
Google अपने डेटा सेंटर और AI सिस्टम के लिए खास तरह के AI एक्सेलेरेटर चिप्स विकसित कर रहा है। इन चिप्स का उद्देश्य बड़े AI मॉडल को तेजी से ट्रेन और रन करना है। कंपनी पहले से ही अपने Tensor Processing Unit (TPU) का इस्तेमाल करती है और अब इसकी नई पीढ़ी की तकनीक पर काम आगे बढ़ा रही है।
Google लगातार Gemini AI में नए फीचर्स जोड़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि Gemini टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सटीक और तेज जवाब दे सके। AI असिस्टेंट को ज्यादा व्यक्तिगत और उपयोगी बनाने के लिए नए अपडेट पर भी काम किया जा रहा है।
AI क्षेत्र में Google को OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ChatGPT और अन्य AI सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Google अपने Gemini मॉडल को मजबूत कर रहा है, ताकि AI बाजार में अपनी स्थिति और बेहतर कर सके।
Google समेत दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI डेटा सेंटर, सर्वर और चिप तकनीक में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI की रफ्तार और क्षमता काफी हद तक बेहतर हार्डवेयर पर निर्भर करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारत को AI डेवलपमेंट, रिसर्च, डेटा सेंटर और टैलेंट के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं। देश में बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी संख्या में टेक विशेषज्ञों की मौजूदगी ने भारत को वैश्विक AI इकोसिस्टम में अहम स्थान दिलाया है। AI टैलेंट में भारत की मजबूत स्थिति भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपने AI रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार कर रही हैं। बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ा निवेश Google, Microsoft, Amazon और अन्य वैश्विक टेक कंपनियां भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, AI प्लेटफॉर्म और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। कंपनियां भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि AI इनोवेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं। सरकार का AI मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत सरकार भी AI क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। IndiaAI मिशन के तहत AI रिसर्च, कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। स्टार्टअप सेक्टर में AI का विस्तार भारत में AI आधारित स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत AI इनोवेशन के बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है। चुनौतियां भी बनी हुई हैं हालांकि AI क्षेत्र में भारत के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधन, डेटा सुरक्षा और कुशल AI प्रोफेशनल्स की जरूरत शामिल है। इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार के साथ भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
Samsung Galaxy Unpacked 2026 Live: Samsung आज (22 जुलाई 2026) लंदन में अपना बहुप्रतीक्षित Galaxy Unpacked 2026 इवेंट आयोजित कर रहा है। भारतीय समयानुसार यह इवेंट शाम 6:30 बजे शुरू होगा। कंपनी इस दौरान अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन्स, स्मार्टवॉच और अन्य प्रीमियम डिवाइसेज से पर्दा उठा सकती है। इन प्रोडक्ट्स पर रहेंगी सबकी नजर Galaxy Unpacked 2026 में इन डिवाइसेज के लॉन्च होने की सबसे ज्यादा संभावना है: Samsung Galaxy Z Fold 8 Samsung Galaxy Z Fold 8 Wide Samsung Galaxy Z Flip 8 Galaxy Watch 9 Galaxy Watch Ultra 2 इसके अलावा Samsung अपने आगामी XR/Smart Glasses प्रोजेक्ट से जुड़ी नई जानकारी भी साझा कर सकता है। Galaxy Z Fold 8 Wide में क्या होगा खास? लीक्स के अनुसार Galaxy Z Fold 8 Wide कंपनी का अब तक का सबसे अलग फोल्डेबल स्मार्टफोन हो सकता है। संभावित फीचर्स: नया और चौड़ा (Passport-style) डिजाइन बड़ी इनर डिस्प्ले बेहतर वीडियो देखने का अनुभव कम दिखाई देने वाली डिस्प्ले क्रीज लेटेस्ट Snapdragon प्रोसेसर फास्ट वायरलेस चार्जिंग नए प्रीमियम कलर ऑप्शन Galaxy Z Fold 8 और Z Flip 8 में मिल सकते हैं ये अपग्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों फोल्डेबल स्मार्टफोन में मिल सकते हैं: नई Snapdragon चिप बेहतर कैमरा ऑप्टिमाइजेशन मजबूत हिंज डिजाइन AI आधारित Galaxy फीचर्स बेहतर बैटरी और परफॉर्मेंस Galaxy Watch Ultra 2 भी हो सकती है लॉन्च Samsung अपने प्रीमियम वियरेबल पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए Galaxy Watch 9 और Galaxy Watch Ultra 2 भी पेश कर सकता है। संभावित फीचर्स: Snapdragon Wear Elite प्रोसेसर 800mAh तक बड़ी बैटरी (Ultra 2) बेहतर हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग लंबी बैटरी लाइफ एडवांस AI फीचर्स Smart Glasses पर भी मिल सकता है अपडेट Samsung, Google और अन्य टेक पार्टनर्स के साथ मिलकर स्मार्ट ग्लासेस पर भी काम कर रहा है। Galaxy Unpacked 2026 में इस प्रोजेक्ट की झलक या नई जानकारी साझा की जा सकती है। Samsung Galaxy Unpacked 2026 LIVE कैसे देखें? Samsung का लॉन्च इवेंट भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा। आप इसे लाइव देख सकते हैं: Samsung के आधिकारिक YouTube Channel पर Samsung India की आधिकारिक वेबसाइट पर Samsung Newsroom पर
भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0) को मंजूरी देते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस नई योजना का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगी। सेमिकॉन 1.0 के बाद अब दूसरा बड़ा कदम दिसंबर 2021 में शुरू किए गए Semicon 1.0 के तहत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने का प्रयास किया था। इस चरण में सिलिकॉन फैब, पैकेजिंग यूनिट और चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें सिलिकॉन फैब्रिकेशन प्लांट, कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और कई पैकेजिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कई भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई को चिप डिजाइन विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए। Semicon 2.0 किन क्षेत्रों पर करेगा फोकस? नई योजना को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है, जिनके जरिए भारत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को विकसित करना चाहता है। इनमें शामिल हैं– चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर आईपी मशीनरी, उपकरण और कच्चा माल नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट एटीएमपी (ATMP) और ओसैट (OSAT) यूनिट अनुसंधान एवं विकास (R&D) कुशल मानव संसाधन और प्रशिक्षण सरकार का लक्ष्य केवल चिप बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक पूरी प्रक्रिया को भारत में विकसित करना है। रिसर्च और नई तकनीक पर रहेगा विशेष जोर Semicon 2.0 के तहत अत्याधुनिक चिप तकनीकों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भविष्य की उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने के साथ-साथ भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर नई योजना के तहत कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं निर्माण से जुड़ी ट्रेनिंग को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा क्लीनरूम ऑपरेशन, फैब निर्माण, चिप डिजाइन और अन्य विशेष तकनीकी क्षेत्रों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण भी बढ़ाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। आयात पर निर्भरता होगी कम विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी तक चिप निर्माण के लिए गैस, केमिकल, मशीनरी और कई अन्य जरूरी संसाधनों के लिए विदेशों पर निर्भर है। Semicon 2.0 के तहत इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आयात कम होगा और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा और औद्योगिक उपकरण जैसे क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी। वैश्विक निवेश आकर्षित करने की तैयारी सरकार को उम्मीद है कि नई नीति के बाद अमेरिका, यूरोप, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों की प्रमुख टेक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली हब ही नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है। लंबी अवधि की रणनीति पर आधारित है योजना सेमीकंडक्टर उद्योग में किसी भी परियोजना को पूरी तरह विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। ऐसे में Semicon 2.0 को दीर्घकालिक रणनीति के तहत तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के वास्तविक परिणाम अगले कुछ वर्षों में दिखाई देंगे। यदि निवेश, अनुसंधान और निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ती रही, तो भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।