Google

Pixel 11 Pro Fold
Google ने Pixel 11 Pro Fold की पहली झलक दिखाई, लॉन्च से पहले टीज़र में सामने आया डिजाइन

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपने आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन Pixel 11 Pro Fold का डिजाइन आधिकारिक टीज़र वीडियो के जरिए लॉन्च से पहले ही रिवील कर दिया है। कंपनी ने यह वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, जिसमें फोन का नया लुक साफ दिखाई दे रहा है। Google इस डिवाइस को 12 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित Pixel लॉन्च इवेंट में पेश करेगा। भारतीय समयानुसार यह इवेंट 13 अगस्त सुबह 3:30 बजे शुरू होगा। टीज़र में फोन पहले के मुकाबले ज्यादा पतला और प्रीमियम डिजाइन के साथ नजर आ रहा है। साथ ही ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप और नए Pixel Glow फीचर की भी झलक देखने को मिली है।   Tensor G6 चिपसेट और 4,800mAh बैटरी मिलने की उम्मीद, कीमत बढ़ने के संकेत   लीक्स के मुताबिक, Pixel 11 Pro Fold में Google का नया Tensor G6 प्रोसेसर और करीब 4,800mAh की बैटरी मिल सकती है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस बार Pixel 11 सीरीज की कीमत पिछले मॉडल के मुकाबले अधिक हो सकती है। इससे पहले OnLeaks और MySmartPrice की लीक रिपोर्ट्स में भी इसी तरह का डिजाइन सामने आया था। वहीं, टेक रिपोर्ट्स के अनुसार Google लॉन्च इवेंट में Pixel Watch 5 और एक नए ट्रैकिंग डिवाइस को भी पेश कर सकता है। हालांकि, इन सभी फीचर्स और डिवाइसों की आधिकारिक पुष्टि कंपनी लॉन्च इवेंट के दौरान ही करेगी।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Google Pixel 11
Google Pixel 11 सीरीज की कीमत लॉन्च से पहले लीक! भारत में ₹69,999 से शुरू हो सकती है कीमत

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google की बहुप्रतीक्षित Pixel 11 सीरीज लॉन्च से पहले ही अपनी संभावित कीमत को लेकर चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में Pixel 11 की शुरुआती कीमत ₹69,999 हो सकती है। हालांकि, Google ने अभी तक नई Pixel सीरीज की आधिकारिक कीमतों का खुलासा नहीं किया है, इसलिए लीक हुई कीमतों को फिलहाल संभावित माना जा रहा है।   Pixel 11 की कीमत हो सकती है ₹69,999   लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Pixel 11 के बेस मॉडल की कीमत भारत में करीब ₹69,999 रखी जा सकती है। वहीं, Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL की कीमत इससे काफी ज्यादा होने की उम्मीद है।   हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों को लेकर अंतर देखने को मिल रहा है। ऐसे में लॉन्च से पहले सामने आई कीमतों को अंतिम कीमत मानना सही नहीं होगा। Google की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही सही जानकारी सामने आएगी।   Tensor G6 चिपसेट से होगा लैस   Pixel 11 सीरीज में Google का नया Tensor G6 चिपसेट मिलने की उम्मीद है। कंपनी इस बार भी AI और मशीन लर्निंग आधारित फीचर्स पर खास ध्यान दे सकती है। नए प्रोसेसर के साथ कैमरा प्रोसेसिंग, फोटो एडिटिंग, वॉयस फीचर्स और डिवाइस पर AI से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। Pixel सीरीज की पहचान रहे कैमरा और AI फीचर्स को भी इस बार और बेहतर किए जाने की उम्मीद है।   चार मॉडल लॉन्च कर सकती है Google   रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Pixel 11 सीरीज में Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold जैसे मॉडल पेश कर सकती है। इनमें अलग-अलग स्क्रीन साइज और हार्डवेयर के साथ प्रीमियम फीचर्स दिए जा सकते हैं। Pixel 11 Pro Fold कंपनी का फोल्डेबल मॉडल होगा, जिसकी कीमत सामान्य Pixel 11 मॉडल की तुलना में काफी ज्यादा होने की संभावना है।   अगस्त में हो सकती है लॉन्चिंग   Google Pixel 11 सीरीज को लेकर माना जा रहा है कि कंपनी इसे अगस्त 2026 में अपने हार्डवेयर इवेंट के दौरान पेश कर सकती है। लॉन्च के दौरान कंपनी कीमत, स्टोरेज वेरिएंट, कलर ऑप्शन और भारत में बिक्री से जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा करेगी।   फिलहाल Pixel 11 की ₹69,999 की संभावित शुरुआती कीमत को लेकर Google की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए खरीदारी का फैसला करने से पहले कंपनी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना बेहतर होगा।

abhishek singh अगस्त 4, 2026 0
Google Accelerator India 2026 में चुने गए AI स्टार्टअप
Google Accelerator India 2026 का ऐलान, 20 AI स्टार्टअप को मिलेगा Google का खास सपोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने Google for Startups Accelerator: India 2026 के लिए 20 भारतीय AI स्टार्टअप्स के नए समूह का ऐलान किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक AI तकनीक विकसित करने और अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर पहुंचाने में मदद करना है। यह कार्यक्रम Google के Accelerator कार्यक्रमों की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया जा रहा है।   करीब 2,500 आवेदनों में से चुने गए 20 स्टार्टअप     Google के मुताबिक, 2026 के समूह के लिए करीब 2,500 आवेदन मिले थे, जिनमें से 20 AI-first स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। ये कंपनियां जलवायु, स्वास्थ्य, वित्त, साइबर सुरक्षा, डेवलपर टूल और अन्य क्षेत्रों में AI आधारित समाधान तैयार कर रही हैं। चयनित स्टार्टअप्स में Adalat AI, Aikenist, Aurassure, Ayna, Binocs समेत कई कंपनियां शामिल हैं। इनका फोकस वास्तविक समस्याओं को AI और आधुनिक तकनीक के जरिए हल करने पर है।     तीन महीने का इक्विटी-फ्री कार्यक्रम     Google का Accelerator कार्यक्रम तीन महीने का है और इसमें शामिल स्टार्टअप्स से कोई इक्विटी नहीं ली जाएगी। चयनित संस्थापकों को Google के AI स्टैक, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पाद विकास से जुड़ी विशेषज्ञ मदद मिलेगी। इसके साथ ही उन्हें बाजार में विस्तार और उत्पाद को बड़े स्तर पर पहुंचाने की रणनीति पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा。   Google के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत बेंगलुरु स्थित Google कैंपस में एक प्रत्यक्ष बूटकैंप से हुई है। अगले चरण में स्टार्टअप्स के साथ उत्पाद, तकनीकी ढांचे और बड़े स्तर पर तैनाती से जुड़े पहलुओं पर काम किया जाएगा।   AI स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा     Google का कहना है कि भारत में AI आधारित स्टार्टअप्स अब सामान्य भाषा मॉडल से आगे बढ़कर एजेंटिक AI, मल्टीमॉडल सिस्टम और फिजिकल AI जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। Accelerator के जरिए इन कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक मदद देने की कोशिश की जा रही है。   Google का यह कार्यक्रम भारत में AI स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Google AI Satellite
Google ने 24 घंटे के भीतर वापस लिया AI Satellite Image Tool, दुरुपयोग की आशंका के बाद बड़ा फैसला

कैलिफोर्निया, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने लॉन्च के महज 24 घंटे के भीतर अपने नए AI Satellite Image Tool को वापस लेने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि टूल के सार्वजनिक उपयोग के बाद कुछ ऐसे उदाहरण सामने आए, जिनसे इसके संभावित दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई। इसके बाद Google ने एहतियात के तौर पर इस फीचर की उपलब्धता अस्थायी रूप से रोक दी। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस टूल से जुड़ी कई तस्वीरें वायरल होने लगी थीं, जिनके बाद कंपनी ने त्वरित कार्रवाई की।   दुरुपयोग की आशंका के बाद लिया गया फैसला   Google ने बताया कि AI Satellite Image Tool को बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से पेश किया गया था, लेकिन शुरुआती उपयोग के दौरान कुछ लोगों ने ऐसे स्क्रीनशॉट और उदाहरण साझा किए, जिनसे सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े सवाल खड़े हुए। कंपनी ने कहा कि वह इन मामलों की समीक्षा कर रही है और आवश्यक सुधार के बाद ही टूल को दोबारा उपलब्ध कराने पर विचार करेगी।   सुरक्षा और गोपनीयता को दी प्राथमिकता   कंपनी के अनुसार, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और डेटा की गोपनीयता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण संभावित जोखिमों को देखते हुए टूल को तुरंत वापस लेने का निर्णय लिया गया। Google का कहना है कि AI आधारित नई सेवाओं को सार्वजनिक करने से पहले लगातार परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन वास्तविक उपयोग के दौरान मिलने वाली प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।   विशेषज्ञों ने जताई सतर्कता की जरूरत   तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सैटेलाइट इमेजिंग टूल कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा, निजी गोपनीयता और संवेदनशील स्थानों की जानकारी से जुड़े जोखिम भी पैदा कर सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना जरूरी है।   सुधार के बाद दोबारा लॉन्च हो सकता है टूल   Google ने संकेत दिए हैं कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने के बाद AI Satellite Image Tool को दोबारा लॉन्च किया जा सकता है। फिलहाल कंपनी उपयोगकर्ताओं से मिली प्रतिक्रिया और संभावित जोखिमों का विस्तृत आकलन कर रही है, ताकि भविष्य में इस तकनीक का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

abhishek singh अगस्त 1, 2026 0
गूगल ने भारत में पेश किया Gemini Spark AI एजेंट, 24 घंटे काम करेगा AI असिस्टेंट
Google ने भारत में लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट, 24 घंटे काम करने वाला पर्सनल AI असिस्टेंट

AI चैटबॉट से आगे बढ़कर काम करने वाला एजेंट, Gmail, Docs और अन्य Google सेवाओं के साथ करेगा काम   नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने भारत में अपने नए Gemini Spark AI एजेंट को पेश किया है। यह एक ऐसा 24/7 पर्सनल AI असिस्टेंट है, जो सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूजर के निर्देश पर कई डिजिटल काम खुद पूरा करने में मदद करेगा।   फोन और लैपटॉप बंद होने पर भी करता रहेगा काम   Gemini Spark की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बैकग्राउंड में काम कर सकता है। Google के अनुसार, यूजर कोई टास्क देने के बाद इसे छोड़ सकता है और यह क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम जारी रखता है, भले ही फोन लॉक हो या लैपटॉप बंद हो।   Gmail, Docs, Sheets और Calendar से होगा कनेक्शन   Gemini Spark को Google Workspace सेवाओं के साथ जोड़ा गया है। यह Gmail से जरूरी जानकारी ढूंढने, Docs तैयार करने, Sheets में काम करने और डिजिटल कार्यों को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है। हालांकि, बड़े बदलाव करने से पहले यूजर की अनुमति लेना इसकी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।   AI असिस्टेंट से AI एजेंट की ओर बढ़ रहा Google   Google का कहना है कि Gemini Spark का उद्देश्य AI को सिर्फ बातचीत करने वाले टूल से आगे ले जाकर ऐसा डिजिटल साथी बनाना है, जो लंबे समय वाले कामों को पूरा करने में मदद करे। इसमें टास्क, स्किल्स और शेड्यूल जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे यूजर नियमित कामों को ऑटोमेट कर सकता है।   भारत में धीरे-धीरे होगा रोलआउट   Gemini Spark की उपलब्धता चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है। शुरुआती दौर में यह चुनिंदा Google AI सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। Google आने वाले समय में इसके फीचर्स और ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Google introduces Selfie Video Recovery, allowing users to regain account access with live facial verification instead of traditional recovery methods.
Google Selfie Video Feature: पासवर्ड भूल गए? अब OTP की जरूरत नहीं, सेल्फी वीडियो से होगा Google अकाउंट लॉग-इन

Google Selfie Video Feature: अगर आप अपने Google अकाउंट का पासवर्ड भूल गए हैं और आपके पास रिकवरी फोन नंबर, ईमेल या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का एक्सेस भी नहीं है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं होगी। Google ने अकाउंट रिकवरी को पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने के लिए नया 'Selfie Video' फीचर पेश किया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपनी पहचान एक छोटे सेल्फी वीडियो के जरिए सत्यापित कर सकेंगे और अकाउंट का एक्सेस वापस पा सकेंगे। क्या है Google का नया Selfie Video फीचर? Google का नया Selfie Video Recovery फीचर एक वैकल्पिक (Optional) अकाउंट रिकवरी सिस्टम है। इसका उद्देश्य उन यूजर्स की मदद करना है जो पासवर्ड भूल जाने या अकाउंट लॉक होने की स्थिति में पारंपरिक रिकवरी विकल्पों का उपयोग नहीं कर पाते। इस फीचर के तहत यूजर को पहले से अपने Google अकाउंट में एक छोटा रेफरेंस सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करके सुरक्षित रखना होगा। बाद में यदि पासवर्ड भूल जाएं, तो Google नया लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहेगा और दोनों वीडियो का मिलान करके पहचान सत्यापित करेगा। ऐसे काम करेगा नया फीचर इस फीचर का उपयोग करने के लिए पहले इसे Google अकाउंट में सेटअप करना होगा। सेटअप के दौरान Google यूजर से कैमरे के सामने देखकर कुछ आसान निर्देशों का पालन करने के लिए कहेगा, जैसे— कैमरे की ओर सीधे देखना। सिर को दाएं-बाएं घुमाना। चेहरे की हल्की गतिविधियां करना। स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना। इसी रिकॉर्डिंग को भविष्य के लिए रेफरेंस वीडियो के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। अगर भविष्य में अकाउंट रिकवरी की जरूरत पड़ती है, तो Google दोबारा लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड कराएगा और उसकी तुलना पहले सेव किए गए वीडियो से करेगा। फोटो या पुराना वीडियो क्यों नहीं चलेगा? Google ने इस फीचर में Liveness Detection तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसका मतलब है कि केवल फोटो या पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो दिखाकर अकाउंट एक्सेस नहीं किया जा सकेगा। यूजर को लाइव वीडियो रिकॉर्ड करते समय स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। इससे सिस्टम यह सुनिश्चित कर सकेगा कि वीडियो वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया गया है और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। यूजर्स के पास रहेगा पूरा कंट्रोल Google का कहना है कि चेहरा एक संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा है, इसलिए इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। कंपनी के अनुसार— सेल्फी वीडियो केवल यूजर की अनुमति से रिकॉर्ड होगा। वीडियो एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सुरक्षित रखा जाएगा। यूजर किसी भी समय Google अकाउंट सेटिंग्स में जाकर इस वीडियो को डिलीट कर सकता है। यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक है और इसे उपयोग करना या न करना यूजर के हाथ में होगा। कब मिलेगा नया फीचर? Google ने जानकारी दी है कि Selfie Video Recovery फीचर को दुनिया भर के Google अकाउंट यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर अधिक से अधिक यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा और अकाउंट रिकवरी को पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
Google VTU
Google और Visvesvaraya Technological University के बीच समझौता, इंजीनियरिंग छात्रों को मिलेगा AI ट्रेनिंग का मौका

बेंगलुरु, एजेंसियां। दिग्गज टेक कंपनी Google ने कर्नाटक की Visvesvaraya Technological University (VTU) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस समझौते का उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और आधुनिक डिजिटल तकनीकों में प्रशिक्षण देना है, ताकि वे भविष्य की टेक्नोलॉजी जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।   छात्रों को मिलेगा AI आधारित प्रशिक्षण   इस साझेदारी के तहत VTU से जुड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को Google के विशेषज्ञों द्वारा AI से जुड़े कोर्स, ट्रेनिंग मॉड्यूल और इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स का अवसर मिल सकता है। इससे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान के बजाय वास्तविक दुनिया में AI के उपयोग को समझने में मदद मिलेगी।   रोजगार के लिए बढ़ेगी छात्रों की तैयारी   Google और VTU की यह पहल छात्रों में AI, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इससे इंजीनियरिंग छात्रों के लिए टेक सेक्टर में रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।   भारत में AI स्किल डेवलपमेंट पर जोर   देश में AI विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार और बड़ी टेक कंपनियां भी युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर जोर दे रही हैं। Google की यह पहल भारत में AI टैलेंट तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।   यूनिवर्सिटी और इंडस्ट्री के बीच बढ़ेगा सहयोग   VTU के साथ इस साझेदारी से शिक्षा संस्थानों और टेक इंडस्ट्री के बीच सहयोग मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कौशल विकसित करने में मदद करेंगे और भारत को AI क्षेत्र में आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
AI Talent
AI की रेस में भारत की भूमिका बढ़ी, ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए बड़ा केंद्र बना देश

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारत को AI डेवलपमेंट, रिसर्च, डेटा सेंटर और टैलेंट के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं। देश में बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी संख्या में टेक विशेषज्ञों की मौजूदगी ने भारत को वैश्विक AI इकोसिस्टम में अहम स्थान दिलाया है।   AI टैलेंट में भारत की मजबूत स्थिति   भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपने AI रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार कर रही हैं।   बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ा निवेश   Google, Microsoft, Amazon और अन्य वैश्विक टेक कंपनियां भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, AI प्लेटफॉर्म और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। कंपनियां भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि AI इनोवेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं।   सरकार का AI मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर   भारत सरकार भी AI क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। IndiaAI मिशन के तहत AI रिसर्च, कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।   स्टार्टअप सेक्टर में AI का विस्तार   भारत में AI आधारित स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत AI इनोवेशन के बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है।   चुनौतियां भी बनी हुई हैं   हालांकि AI क्षेत्र में भारत के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधन, डेटा सुरक्षा और कुशल AI प्रोफेशनल्स की जरूरत शामिल है। इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार के साथ भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Google Gemini AI
Google ने Gemini AI को और बेहतर बनाने की तैयारी तेज की, नए AI सर्वर चिप पर काम जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल Google अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Gemini AI को और शक्तिशाली बनाने के लिए नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है। कंपनी का फोकस AI मॉडल की गति, क्षमता और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर है, ताकि Gemini को बड़े पैमाने पर यूजर्स और कंपनियों के लिए बेहतर बनाया जा सके।   AI चिप डेवलपमेंट पर Google का फोकस   Google अपने डेटा सेंटर और AI सिस्टम के लिए खास तरह के AI एक्सेलेरेटर चिप्स विकसित कर रहा है। इन चिप्स का उद्देश्य बड़े AI मॉडल को तेजी से ट्रेन और रन करना है। कंपनी पहले से ही अपने Tensor Processing Unit (TPU) का इस्तेमाल करती है और अब इसकी नई पीढ़ी की तकनीक पर काम आगे बढ़ा रही है।   Gemini AI में नए फीचर्स जोड़ने की तैयारी   Google लगातार Gemini AI में नए फीचर्स जोड़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि Gemini टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सटीक और तेज जवाब दे सके। AI असिस्टेंट को ज्यादा व्यक्तिगत और उपयोगी बनाने के लिए नए अपडेट पर भी काम किया जा रहा है।   Microsoft और OpenAI से बढ़ी प्रतिस्पर्धा   AI क्षेत्र में Google को OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ChatGPT और अन्य AI सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Google अपने Gemini मॉडल को मजबूत कर रहा है, ताकि AI बाजार में अपनी स्थिति और बेहतर कर सके।   AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ रहा निवेश   Google समेत दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI डेटा सेंटर, सर्वर और चिप तकनीक में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI की रफ्तार और क्षमता काफी हद तक बेहतर हार्डवेयर पर निर्भर करेगी।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Google Pixel 11
Google ने Pixel 11 सीरीज़ का पहला आधिकारिक टीज़र जारी किया, नए 'Pixel Glow' डिज़ाइन की दिखाई झलक

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपनी आगामी Pixel 11 स्मार्टफोन सीरीज़ का पहला आधिकारिक टीज़र जारी कर दिया है। टीज़र में कंपनी ने नए 'Pixel Glow' डिज़ाइन की झलक दिखाई है, जिसमें पहले के मुकाबले अधिक प्रीमियम फिनिश, नए कैमरा मॉड्यूल और आकर्षक रंग विकल्प देखने को मिले हैं। टीज़र सामने आने के बाद Pixel 11 सीरीज़ को लेकर टेक जगत में उत्सुकता काफी बढ़ गई है। कंपनी पहले ही पुष्टि कर चुकी है कि Pixel 11 सीरीज़ को 12 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले 'Made by Google' इवेंट में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा।   नए डिज़ाइन पर रहेगा खास फोकस   जारी किए गए टीज़र के अनुसार Pixel 11 सीरीज़ में Google ने डिज़ाइन को पहले से अधिक आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। 'Pixel Glow' फिनिश के कारण फोन की बैक पैनल लाइट के अनुसार अलग-अलग शेड में चमकती नजर आएगी। कैमरा बार को भी नया लुक दिया गया है, जबकि प्रीमियम मेटल फ्रेम और स्लिम प्रोफाइल इसकी खासियत मानी जा रही है।   AI फीचर्स भी होंगे पहले से बेहतर   रिपोर्ट्स के मुताबिक Pixel 11 सीरीज़ में Google का नया Tensor G6 चिपसेट, उन्नत Gemini AI फीचर्स, बेहतर कैमरा प्रोसेसिंग और ऑन-डिवाइस AI क्षमताएं मिल सकती हैं। कंपनी इस सीरीज़ के जरिए AI आधारित स्मार्टफोन अनुभव को और बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।   12 अगस्त को होंगे कई बड़े ऐलान   'Made by Google' इवेंट में Pixel 11 के साथ Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL, Pixel 11 Pro Fold और Pixel Watch 5 जैसे नए डिवाइस भी पेश किए जाने की उम्मीद है। लॉन्च के तुरंत बाद कई बाजारों में प्री-ऑर्डर भी शुरू हो सकते हैं।   लॉन्च से पहले बढ़ी उत्सुकता   आधिकारिक टीज़र जारी होने के बाद Pixel 11 सीरीज़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में Google इसके कैमरा, AI फीचर्स, कीमत और उपलब्धता से जुड़ी अन्य जानकारियों का भी खुलासा कर सकता है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
ATL Saathi
Google ने भारत के शिक्षकों के लिए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का किया विस्तार, क्लाउड और AI टूल्स को भी मिला अपग्रेड

नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने भारत में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत देशभर के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल लर्निंग टूल्स का बेहतर प्रशिक्षण और उपयोग उपलब्ध कराया जाएगा।   शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण   Google के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को AI आधारित कंटेंट तैयार करने, स्मार्ट क्लासरूम चलाने और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है।   क्लाउड और AI टूल्स हुए अपग्रेड   कंपनी ने 'ATL Saathi' में कई नए AI फीचर्स और Google Cloud आधारित सेवाएं जोड़ी हैं। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान तैयार करने, क्विज़ बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और छात्रों की प्रगति का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे।   अटल टिंकरिंग लैब्स को मिलेगा फायदा   यह पहल अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) से जुड़े स्कूलों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगी। Google का लक्ष्य छात्रों में AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और नवाचार से जुड़ी कौशल विकसित करना है।   डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा   विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से भारत के स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा।   नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल   Google ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छात्रों को AI एवं डिजिटल स्किल्स से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Indian stock market display showing Sensex and Nifty trading higher during opening session
Share Market Opening: लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 250 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,150 के पार

नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 250 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,150 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति सुबह करीब 9:24 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 242.70 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 77,428.13 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 62.35 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,140.85 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 130.49 अंक और निफ्टी 26.45 अंक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा था। रुपये में भी मामूली मजबूती शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 20 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा तेजी एचसीएल टेक में देखने को मिली, जिसके शेयर करीब 2.6% तक उछल गए। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एनटीपीसी के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में आईटी शेयरों का दबदबा निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी और विप्रो सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहा और इसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.02% जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.34% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी। यदि आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Google Photos
Google Photos में आया नया AI 'Remix' फीचर, अब एक क्लिक में वीडियो बनेंगे स्टाइलिश और क्रिएटिव

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपने लोकप्रिय फोटो मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Google Photos में नया AI 'Remix' फीचर रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अब अपने वीडियो को सिर्फ एक क्लिक में अलग-अलग AI-जनरेटेड स्टाइल में बदल सकेंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर वीडियो एडिटिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान और रचनात्मक बनाएगा।   AI की मदद से बदल जाएगा वीडियो का लुक   'Remix' फीचर के जरिए यूजर्स किसी भी वीडियो को चुनकर उसे अलग-अलग विजुअल स्टाइल जैसे एनिमेशन, कॉमिक, स्केच, सिनेमैटिक, पेंटिंग और अन्य AI इफेक्ट्स में बदल सकेंगे। पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी।   बिना एडिटिंग स्किल के मिलेगा प्रोफेशनल रिजल्ट   Google का कहना है कि इस फीचर का उपयोग करने के लिए किसी विशेष वीडियो एडिटिंग अनुभव की जरूरत नहीं होगी। AI अपने आप वीडियो का विश्लेषण कर उसे चुनी गई स्टाइल में बदल देगा, जिससे सामान्य यूजर्स भी आकर्षक कंटेंट तैयार कर सकेंगे।   धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचेगा अपडेट   कंपनी ने बताया कि 'Remix' फीचर फिलहाल चरणबद्ध तरीके से Android और iOS यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह सभी Google Photos यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा।   सोशल मीडिया क्रिएटर्स को होगा बड़ा फायदा   विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर खासकर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। Instagram Reels, YouTube Shorts और अन्य प्लेटफॉर्म के लिए कम समय में आकर्षक वीडियो तैयार किए जा सकेंगे।   AI आधारित एडिटिंग पर Google का बढ़ता फोकस   Google लगातार अपने AI फीचर्स का विस्तार कर रहा है। 'Remix' फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यूजर्स को बिना जटिल एडिटिंग टूल्स के आधुनिक AI तकनीक के जरिए बेहतर फोटो और वीडियो एडिटिंग अनुभव उपलब्ध कराना है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Google Pixel
Google Pixel 11 सीरीज की लॉन्च डेट तय, AI फीचर्स और नए Tensor चिप के साथ होगी एंट्री

नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google अपनी अगली फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज Google Pixel 11 को लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी ने 12 अगस्त 2026 को "Made by Google" इवेंट आयोजित करने की घोषणा की है, जिसमें नई Pixel सीरीज पेश किए जाने की उम्मीद है। इस इवेंट में Pixel 11, Pixel 11 Pro और अन्य Pixel डिवाइस लॉन्च किए जा सकते हैं।   AI फीचर्स पर रहेगा Google का फोकस   Google Pixel 11 सीरीज में कंपनी अपने Gemini AI को और ज्यादा बेहतर तरीके से इंटीग्रेट कर सकती है। नए स्मार्टफोन में AI आधारित कैमरा फीचर्स, स्मार्ट एडिटिंग, बेहतर वॉयस असिस्टेंट और ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग जैसे फीचर्स मिलने की उम्मीद है।   नए Tensor G6 प्रोसेसर की चर्चा   रिपोर्ट्स के मुताबिक Pixel 11 सीरीज में नया Tensor G6 चिपसेट दिया जा सकता है। यह प्रोसेसर बेहतर परफॉर्मेंस, तेज AI प्रोसेसिंग और पावर एफिशिएंसी के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा कैमरा और डिस्प्ले में भी बड़े अपग्रेड मिलने की संभावना जताई जा रही है।   Pixel 11 Pro और Fold मॉडल भी हो सकते हैं लॉन्च   Google इस बार Pixel 11 सीरीज के साथ Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold जैसे मॉडल भी पेश कर सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी तक सभी डिवाइस की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।   कीमत में बढ़ोतरी की संभावना   लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Pixel 11 सीरीज की कीमत पिछली पीढ़ी की तुलना में ज्यादा हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Google बेस मॉडल में ज्यादा स्टोरेज विकल्प दे सकता है, जिसके कारण कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।   लॉन्च के बाद बढ़ेगी AI स्मार्टफोन की प्रतिस्पर्धा   Pixel 11 सीरीज के जरिए Google का लक्ष्य स्मार्टफोन में AI अनुभव को और मजबूत करना है। कंपनी Apple और Samsung जैसे प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने के लिए कैमरा, सॉफ्टवेयर और AI क्षमताओं पर बड़ा दांव लगा रही है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Muse Image
Meta ने 'Muse Image' AI लॉन्च किया, Facebook और Instagram पर शुरू होंगे नए AI इमेज जनरेशन फीचर्स

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। Meta ने अपना नया AI इमेज जनरेशन मॉडल 'Muse Image' लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल Meta AI में उपलब्ध होगा और यूजर्स को केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट ही नहीं, बल्कि फोटो, स्केच और नोट्स के आधार पर भी नई AI तस्वीरें बनाने और एडिट करने की सुविधा देगा। कंपनी ने इसे अपने नए Meta Superintelligence Labs का पहला इमेज जनरेशन मॉडल बताया है।   Instagram और WhatsApp से होगी शुरुआत   Meta के अनुसार, Muse Image की मदद से यूजर्स Instagram Stories के लिए 30 से अधिक नए AI इफेक्ट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा WhatsApp में Meta AI चैट के जरिए भी AI इमेज बनाई जा सकेगी। आने वाले महीनों में यह फीचर Facebook और Messenger पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।   AI से फोटो एडिट करना होगा और आसान   नया मॉडल जटिल निर्देशों को समझने, कई तस्वीरों को मिलाकर नई इमेज तैयार करने और स्केच या ड्रॉइंग के जरिए इमेज एडिट करने में सक्षम है। Meta का दावा है कि यह मॉडल पहले की तुलना में अधिक सटीक, तेज और बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें तैयार करेगा। कंपनी ने Muse Video नाम के AI वीडियो मॉडल की शुरुआती झलक भी पेश की है।   AI रेस में Google और OpenAI को चुनौती   Muse Image के लॉन्च के साथ Meta ने AI इमेज जनरेशन की दौड़ में OpenAI और Google को सीधी चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में यह तकनीक क्रिएटर्स, विज्ञापनदाताओं और आम यूजर्स के लिए कंटेंट तैयार करने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Donald Trumph
डोनाल्ड ट्रंप की 100% टैरिफ चेतावनी से बढ़ी वैश्विक चिंता, भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जो अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स (Digital Services Tax - DST) लागू करेंगे। इस बयान के बाद वैश्विक व्यापार जगत में नई हलचल शुरू हो गई है। फिलहाल यह चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को लेकर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति व्यापक रूप से लागू होती है तो भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।   क्या है डिजिटल सर्विसेज टैक्स?   डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) वह कर है, जिसे कुछ देश बड़ी डिजिटल कंपनियों—जैसे Google, Meta, Amazon और Apple—की स्थानीय डिजिटल आय पर लगाते हैं। अमेरिका लंबे समय से ऐसे टैक्स का विरोध करता रहा है और इसे अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण मानता है।   ट्रंप ने क्या कहा?   ट्रंप ने कहा कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लागू करता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसा कदम मौजूदा व्यापार समझौतों से ऊपर माना जाएगा।   भारत पर क्या होगा असर?   भारत फिलहाल इस चेतावनी का सीधा लक्ष्य नहीं है, लेकिन इसका असर कई तरीकों से पड़ सकता है: यदि अमेरिका इस नीति का दायरा बढ़ाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय आईटी और टेक कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबारी माहौल अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार तनाव बढ़ने पर वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ सकता है। शेयर बाजार में टेक और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।   विशेषज्ञ क्या मानते हैं?   अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल भारत के लिए तत्काल खतरे की स्थिति नहीं है, क्योंकि ट्रंप की ताज़ा चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों के डिजिटल टैक्स को लेकर है। हालांकि यदि यह विवाद आगे बढ़ता है, तो वैश्विक व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव देखा जा सकता है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Google AI ethics controversy as senior executive resigns over Pentagon defense agreement concerns
Google के वरिष्ठ अधिकारी ने दिया इस्तीफा, Pentagon-AI समझौते पर उठाए गंभीर सवाल

अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ AI समझौते से बढ़ा विवाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह कंपनी का अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के साथ किया गया वह समझौता है, जिसके तहत Google की AI तकनीक का उपयोग गोपनीय और रक्षा संबंधी कार्यों में किया जा सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर Google के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नौ साल बाद कंपनी छोड़ी Google में Android Platform Security के निदेशक रहे रिने मेयरहोफर (René Mayrhofer) ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भेजे विदाई पत्र में कहा कि जिस Google को उन्होंने 2017 में जॉइन किया था, वह अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार कंपनी की नीतियों और मूल्यों में बड़ा बदलाव आया है। मेयरहोफर ने कहा कि उनके लिए इस्तीफा देना आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला “अनिवार्य” हो गया था। AI के सैन्य इस्तेमाल का किया विरोध अपने पत्र में मेयरहोफर ने स्पष्ट कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सैन्य अभियानों, विशेषकर आक्रामक युद्ध गतिविधियों, का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने खुद को शांतिवादी (Pacifist) बताते हुए कहा कि वह ऐसी किसी तकनीक का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसका उपयोग लोगों को नुकसान पहुंचाने या युद्ध संचालन में किया जाए। उनका मानना है कि Google द्वारा Pentagon को AI तकनीक उपलब्ध कराना कंपनी के पुराने नैतिक सिद्धांतों के विपरीत है। Google पर नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप इस्तीफा पत्र में उन्होंने Google प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इन पर कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी उन्हें भी आंतरिक माध्यमों से नहीं मिली। कर्मचारियों में पहले भी दिख चुका है विरोध यह पहला मौका नहीं है जब Google के भीतर Pentagon से जुड़े AI प्रोजेक्ट्स का विरोध हुआ हो। इससे पहले भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सैन्य उद्देश्यों के लिए AI तकनीक उपलब्ध कराने का विरोध किया था। Google DeepMind के कुछ शोधकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर असहमति जताई थी। निगरानी और गोपनीयता को लेकर चिंता मेयरहोफर ने अपने पत्र में भविष्य में AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) के लिए किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें डर है कि AI आधारित सिस्टम का उपयोग आम लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अगस्त तक कंपनी में रहेंगे हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी मेयरहोफर अगस्त 2026 के अंत तक नोटिस अवधि पूरी करने के लिए Google से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे, लेकिन Pentagon समझौते से जुड़े किसी भी AI कार्य से दूरी बनाए रखेंगे। AI नैतिकता पर फिर छिड़ी बहस Google के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस सीमा तक और किन उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे इसके नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बहस भी तेज होती जा रही है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Google Layoffs
Google में फिर छंटनी: क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी टीम पर गिरी गाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google ने एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो सप्ताह के दौरान कंपनी ने अपने क्लाउड डिवीजन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कई टीमों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इस कदम ने टेक सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। क्लाउड और थ्रेट इंटेलिजेंस टीम हुई प्रभावित मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, छंटनी का असर गूगल क्लाउड की कई इकाइयों पर पड़ा है। इनमें कंपनी का गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (GTIG) भी शामिल है, जो वैश्विक साइबर हमलों और हैकिंग गतिविधियों पर शोध कर रिपोर्ट तैयार करता है। यह टीम साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में गूगल की महत्वपूर्ण इकाइयों में गिनी जाती है। इसके अलावा, साइबर सिक्योरिटी कंपनी Mandiant से जुड़े कुछ कर्मचारियों को भी नौकरी गंवानी पड़ी है। गूगल ने वर्ष 2022 में Mandiant का लगभग 5.4 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था, जिससे कंपनी ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की थी। कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव छंटनी की पुष्टि उस समय और मजबूत हुई जब प्रभावित कर्मचारियों में से कुछ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पोस्ट साझा की। एक कर्मचारी ने बताया कि उनकी पूरी टीम में कई लोगों को नौकरी से निकाला गया है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय का ब्रेक लेने के बाद वे नई नौकरी की तलाश शुरू करेंगे। AI पर बढ़ा फोकस, बदले जा रहे संसाधन सूत्रों के अनुसार, गूगल अपने संसाधनों को तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI उसके कारोबार का प्रमुख आधार बनने वाला है। इसी कारण कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम कर संसाधनों का पुनर्गठन किया जा रहा है। कंपनी ने क्या कहा? गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी समय-समय पर अपने आंतरिक ढांचे की समीक्षा करती है ताकि ग्राहकों और व्यवसाय की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को बेहतर बना सके। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि कुल कितने कर्मचारियों को निकाला गया है। टेक सेक्टर में जारी है पुनर्गठन विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के कारण दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अपने कार्यबल और निवेश रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। गूगल की यह ताजा छंटनी भी उसी व्यापक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है, जहां कंपनियां पारंपरिक क्षेत्रों से संसाधन हटाकर AI और ऑटोमेशन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Map showing submarine internet cables near Strait of Hormuz amid rising Iran digital control concerns.
ईरान का नया ‘डिजिटल हथियार’  होर्मुज की इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण की कोशिश से दुनिया में बढ़ी चिंता

Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Undersea fiber optic internet cables connecting continents beneath the ocean for global data transmission
Tech Truth: सैटेलाइट नहीं, समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर टिका है 95% इंटरनेट, ऐसे चलता है आपका Google और Facebook

आज की दुनिया इंटरनेट के बिना लगभग ठहर सी जाती है। ईमेल भेजना हो, वीडियो कॉल करनी हो या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो, हर काम कुछ सेकंड में पूरा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किलोमीटर दूर भेजा गया डेटा इतनी तेजी से कैसे पहुंच जाता है? ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सब अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए होता है, जबकि असल सच्चाई कुछ और है। दुनिया के करीब 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का आधार समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें हैं, जिन्हें सबमरीन कम्युनिकेशन केबल कहा जाता है। यही केबलें दुनिया के अलग-अलग देशों और महाद्वीपों को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। समुद्र के नीचे कैसे काम करता है इंटरनेट का नेटवर्क? समुद्र के नीचे बिछी ये केबलें बेहद पतले ऑप्टिकल फाइबर से बनी होती हैं, जिनके जरिए डेटा प्रकाश (light signals) के रूप में ट्रांसफर किया जाता है। इन केबलों का काम एक देश से दूसरे देश तक इंटरनेट डेटा पहुंचाना होता है। ईमेल, वीडियो कॉल, वेबसाइट, क्लाउड सर्विस और सोशल मीडिया जैसे लगभग सभी इंटरनेशनल ऑनलाइन कम्युनिकेशन इन्हीं के जरिए चलते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया में डेटा ट्रांसफर का 95% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं केबलों से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इन्हें ग्लोबल इंटरनेट की “रीढ़ की हड्डी” भी कहा जाता है। एक सेकंड में भेज सकती हैं कई फिल्में ये हाई-स्पीड फाइबर-ऑप्टिक केबल हर सेकंड कई टेराबिट डेटा ट्रांसमिट करने की क्षमता रखती हैं। एक टेराबिट प्रति सेकंड की स्पीड इतनी तेज होती है कि इसमें कुछ ही पलों में कई 4K HD फिल्में भेजी जा सकती हैं। यही कारण है कि लाखों लोग एक साथ वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वीडियो कॉलिंग कर पाते हैं। दुनिया भर में फैला है केबलों का विशाल जाल रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के महासागरों में लगभग 485 से ज्यादा सबमरीन केबलें बिछी हुई हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 9 लाख मील से ज्यादा बताई जाती है। ये केबलें अटलांटिक और प्रशांत महासागर के साथ-साथ स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरती हैं। कई केबलें बेहद गहरे और दूरदराज समुद्री इलाकों तक फैली हुई हैं। इतने मजबूत होने के बावजूद हर साल कट जाती हैं कई केबलें समुद्र के नीचे बिछी इन केबलों को कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है ताकि वे समुद्री दबाव, घर्षण और बाहरी नुकसान से बच सकें। इनमें स्टील कवच जैसी मजबूत लेयर भी शामिल होती हैं। फिर भी हर साल लगभग 100 से 150 केबलें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जहाजों के एंकर, मछली पकड़ने वाले उपकरण और समुद्री गतिविधियां होती हैं। अगर किसी बड़े रूट की केबल कट जाए तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कैसे सुरक्षित रखी जाती हैं ये केबलें? सबमरीन केबल बिछाने से पहले समुद्री रास्तों का गहराई से अध्ययन किया जाता है ताकि उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों से गुजारा जा सके। इसके अलावा कंपनियां मजबूत मटेरियल और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इन केबलों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को रोका जा सके। क्यों जरूरी हैं ये केबलें? आज पूरी दुनिया डिजिटल अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। बैंकिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन मीटिंग, AI सर्वर और वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं इन्हीं केबलों पर टिकी हैं। यानी अगली बार जब आप Google पर कुछ सर्च करें या Facebook खोलें, तो याद रखिए कि आपके फोन तक पहुंचने वाला डेटा समुद्र की गहराइयों से होकर आया है।  

surbhi मई 9, 2026 0
Gmail mobile app displaying end-to-end encryption lock icon for secure email communication.
Gmail में आया बड़ा सिक्योरिटी अपडेट: अब एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से पूरी तरह सुरक्षित होंगे आपके ईमेल

टेक्नोलॉजी दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म Gmail को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब Gmail में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) का सपोर्ट Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे यूजर्स अपने ईमेल को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकेंगे। क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है जिसमें ईमेल का डेटा भेजने वाले के डिवाइस पर ही एन्क्रिप्ट (कोडेड) हो जाता है और केवल प्राप्तकर्ता ही उसे डिक्रिप्ट (पढ़) कर सकता है। इसका मतलब यह है कि बीच में कोई भी–यहां तक कि सर्वर या कंपनी भी–उस ईमेल को नहीं पढ़ सकती। Gmail में यह फीचर कैसे काम करता है? नए अपडेट के बाद जब यूजर ईमेल लिखेंगे, तो उन्हें एक ‘लॉक’ आइकन दिखाई देगा। इस आइकन पर क्लिक करके एन्क्रिप्शन ऑन किया जा सकता है ईमेल भेजने से पहले ही डिवाइस पर एन्क्रिप्ट हो जाता है रिसीवर के पास पहुंचने के बाद ही यह डिक्रिप्ट होता है अगर सामने वाला व्यक्ति Gmail यूज करता है, तो उसे ईमेल सामान्य थ्रेड की तरह दिखाई देगा। वहीं, अन्य ईमेल यूजर्स इसे सुरक्षित वेब लिंक के जरिए एक्सेस कर सकते हैं। मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा फायदा अब तक इस तरह की सिक्योरिटी के लिए अलग टूल या प्लेटफॉर्म की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब यह सुविधा सीधे मोबाइल ऐप में ही मिल रही है। इससे यूजर्स कहीं से भी अपने संवेदनशील और जरूरी ईमेल सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकते हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर Google Workspace के एंटरप्राइज यूजर्स के लिए उपलब्ध है। एडमिन को पहले इसे Admin Console से एक्टिव करना होगा इसके बाद ही यूजर्स इस सुविधा का उपयोग कर पाएंगे धीरे-धीरे इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा क्यों है यह अपडेट खास? डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरे और डेटा लीक के मामलों को देखते हुए यह अपडेट बेहद अहम माना जा रहा है। यह फीचर खासकर बिजनेस, प्रोफेशनल और संवेदनशील जानकारी शेयर करने वाले यूजर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0