टेक्नोलॉजी

Google Officer Resigns Over Pentagon AI Deal

Google के वरिष्ठ अधिकारी ने दिया इस्तीफा, Pentagon-AI समझौते पर उठाए गंभीर सवाल

surbhi जून 13, 2026 0
Google AI ethics controversy as senior executive resigns over Pentagon defense agreement concerns
Google Executive Resigns Over Pentagon AI Deal

अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ AI समझौते से बढ़ा विवाद

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह कंपनी का अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के साथ किया गया वह समझौता है, जिसके तहत Google की AI तकनीक का उपयोग गोपनीय और रक्षा संबंधी कार्यों में किया जा सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर Google के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

नौ साल बाद कंपनी छोड़ी

Google में Android Platform Security के निदेशक रहे रिने मेयरहोफर (René Mayrhofer) ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भेजे विदाई पत्र में कहा कि जिस Google को उन्होंने 2017 में जॉइन किया था, वह अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार कंपनी की नीतियों और मूल्यों में बड़ा बदलाव आया है।

मेयरहोफर ने कहा कि उनके लिए इस्तीफा देना आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला “अनिवार्य” हो गया था।

AI के सैन्य इस्तेमाल का किया विरोध

अपने पत्र में मेयरहोफर ने स्पष्ट कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सैन्य अभियानों, विशेषकर आक्रामक युद्ध गतिविधियों, का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने खुद को शांतिवादी (Pacifist) बताते हुए कहा कि वह ऐसी किसी तकनीक का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसका उपयोग लोगों को नुकसान पहुंचाने या युद्ध संचालन में किया जाए।

उनका मानना है कि Google द्वारा Pentagon को AI तकनीक उपलब्ध कराना कंपनी के पुराने नैतिक सिद्धांतों के विपरीत है।

Google पर नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप

इस्तीफा पत्र में उन्होंने Google प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इन पर कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी उन्हें भी आंतरिक माध्यमों से नहीं मिली।

कर्मचारियों में पहले भी दिख चुका है विरोध

यह पहला मौका नहीं है जब Google के भीतर Pentagon से जुड़े AI प्रोजेक्ट्स का विरोध हुआ हो। इससे पहले भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सैन्य उद्देश्यों के लिए AI तकनीक उपलब्ध कराने का विरोध किया था। Google DeepMind के कुछ शोधकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर असहमति जताई थी।

निगरानी और गोपनीयता को लेकर चिंता

मेयरहोफर ने अपने पत्र में भविष्य में AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) के लिए किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें डर है कि AI आधारित सिस्टम का उपयोग आम लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।

अगस्त तक कंपनी में रहेंगे

हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी मेयरहोफर अगस्त 2026 के अंत तक नोटिस अवधि पूरी करने के लिए Google से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे, लेकिन Pentagon समझौते से जुड़े किसी भी AI कार्य से दूरी बनाए रखेंगे।

AI नैतिकता पर फिर छिड़ी बहस

Google के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस सीमा तक और किन उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे इसके नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बहस भी तेज होती जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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प्राइवेट स्पेस कंपनियों के लिए IN-SPACe के नए नियम लागू, सुरक्षा और जवाबदेही पर बढ़ा जोर

री-एंट्री मिशन के लिए सख्त सुरक्षा मानक, निजी कंपनियों पर पूरी जवाबदेही; विदेशी कंपनियों को भारतीय इकाई के जरिए करना होगा संचालन   नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य भारत में तेजी से बढ़ रहे प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार करना और अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित बनाना है।   री-एंट्री मिशन के लिए कड़े सुरक्षा मानक   नए नियमों के अनुसार, किसी भी उपग्रह, रॉकेट स्टेज या अन्य अंतरिक्ष वस्तु की पृथ्वी पर नियंत्रित वापसी (Re-entry) के दौरान मानव हताहत होने की संभावना 10,000 में 1 (1-in-10,000) से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि री-एंट्री से किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी पूरी कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी संबंधित निजी कंपनी की होगी।   विदेशी कंपनियों के लिए भी नए प्रावधान   IN-SPACe ने स्पष्ट किया है कि भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों का संचालन करने वाली विदेशी कंपनियों को भारतीय पंजीकृत इकाई के माध्यम से ही काम करना होगा। इसके अलावा सभी री-एंट्री मिशनों के लिए पूर्व अनुमति, विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन और NOTAM (Notice to Airmen) जारी करना अनिवार्य होगा।   निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को मिलेगा सुरक्षित माहौल   विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियम भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाएंगे। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियमन होने से विदेशी निवेश और घरेलू स्पेस स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा मिलेगा।

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Nothing का अलर्ट: स्मार्टफोन की कीमतें और बढ़ेंगी, RAM संकट बना सबसे बड़ी वजह

लंदन, एजेंसियां। स्मार्टफोन कंपनी Nothing के सह-संस्थापक और CEO कार्ल पेई (Carl Pei) ने उपभोक्ताओं को आगाह किया है कि आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। उनका कहना है कि RAM (मेमोरी) चिप की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल के कारण फोन बनाना पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है और इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।   "मेमोरी अब सबसे महंगा कंपोनेंट"   कार्ल पेई ने कहा कि अब स्मार्टफोन में मेमोरी (RAM) सबसे महंगा हार्डवेयर कंपोनेंट बन चुकी है। उनके मुताबिक, कई मॉडलों में मेमोरी की लागत कुल हार्डवेयर लागत का 50% से अधिक हो गई है। AI उद्योग की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप की वैश्विक सप्लाई पर दबाव है, जिससे कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।   2027 तक भी राहत की उम्मीद कम   Nothing के CEO का कहना है कि मौजूदा स्थिति जल्द सामान्य होने के संकेत नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 2027 तक भी स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। उनके अनुसार, निर्माता कंपनियों के सामने दो ही विकल्प हैं—या तो कीमतें बढ़ाएं या फिर कम स्पेसिफिकेशन वाले फोन लॉन्च करें।   भारत में भी दिख रहा असर   कार्ल पेई ने बताया कि भारत में भी स्मार्टफोन की औसत कीमतें बढ़ रही हैं। विशेष रूप से ₹30,000 से ऊपर के प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि यदि वे नया फोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बहुत अधिक इंतजार करना महंगा पड़ सकता है।

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XPS 13, Dell 14S, Dell 16S और Alienware 15 लॉन्च; AI फीचर्स और हाई परफॉर्मेंस पर कंपनी का जोर   नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक कंपनी Dell Technologies ने भारत में अपने नए लैपटॉप लाइनअप को लॉन्च किया है। कंपनी ने इस बार AI फीचर्स से लैस प्रीमियम लैपटॉप और गेमिंग डिवाइस पर खास फोकस किया है। नए लॉन्च में XPS 13, Dell 14S, Dell 16S और Alienware 15 शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग यूजर जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है।   AI फीचर्स के साथ आए Dell 14S और 16S   Dell ने नए लैपटॉप में AI आधारित क्षमताओं को शामिल किया है। कंपनी का लक्ष्य यूजर्स को बेहतर परफॉर्मेंस, तेज प्रोसेसिंग और स्मार्ट कंप्यूटिंग अनुभव देना है। नए AI PC सेगमेंट में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कई काम तेजी से किए जा सकेंगे।   XPS 13 बना प्रीमियम पोर्टेबिलिटी पर फोकस वाला मॉडल   कंपनी का नया Dell XPS 13 हल्के और प्रीमियम डिजाइन के साथ पेश किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह मॉडल करीब 1 किलोग्राम वजन और 2.5K टच डिस्प्ले जैसे फीचर्स के साथ आता है। इसकी शुरुआती कीमत भारत में लगभग ₹79,990 बताई गई है।   गेमर्स के लिए Alienware 15 लॉन्च   गेमिंग यूजर्स को ध्यान में रखते हुए Dell ने Alienware 15 पेश किया है। इसमें हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर और बेहतर ग्राफिक्स क्षमता दी गई है, ताकि गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और क्रिएटिव वर्क जैसे भारी काम आसानी से किए जा सकें।   AI PC मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा   Dell का यह लॉन्च ऐसे समय में आया है जब HP, Lenovo, MSI जैसी कंपनियां भी AI लैपटॉप बाजार में तेजी से विस्तार कर रही हैं। कंपनियां अब सिर्फ प्रोसेसर और बैटरी पर नहीं, बल्कि AI क्षमताओं और स्मार्ट फीचर्स पर भी ध्यान दे रही हैं।  

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