Google AI

Google Gemini AI logo with coding interface, highlighting the delayed launch of Gemini 3.5 Pro amid growing AI competition.
Gemini 3.5 Pro लॉन्च में देरी, AI रेस में Google को झटका; कोडिंग प्रदर्शन बना बड़ी चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच Google को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने अगली पीढ़ी के AI मॉडल Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी कर दी है। बताया जा रहा है कि मॉडल कंपनी के आंतरिक प्रदर्शन मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, खासकर कोडिंग क्षमता के मामले में। ऐसे समय में यह देरी Google के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि OpenAI और Anthropic अपने नए AI मॉडल लगातार पेश कर रहे हैं। जून में लॉन्च होना था Gemini 3.5 Pro रिपोर्ट के अनुसार, Google के CEO सुंदर पिचाई ने मई में आयोजित Google I/O इवेंट के दौरान Gemini 3.5 Pro की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने बताया था कि कंपनी इस मॉडल का आंतरिक रूप से इस्तेमाल भी शुरू कर चुकी है और इसे जून में लॉन्च किए जाने की योजना थी। हालांकि, विकास प्रक्रिया के दौरान मॉडल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया, जिसके चलते लॉन्च को फिलहाल टाल दिया गया। कोडिंग क्षमता में नहीं मिले संतोषजनक नतीजे मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google ने पिछले महीने Gemini 3.5 Pro की कोडिंग क्षमता बेहतर बनाने के लिए उसके प्रशिक्षण डेटा में बदलाव भी किए थे। इसके बावजूद मॉडल से उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। बताया जा रहा है कि कंपनी के इंजीनियर और AI शोधकर्ता मॉडल के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। विशेष रूप से कोड जनरेशन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में Gemini 3.5 Pro अभी प्रतिस्पर्धी मॉडल्स से पीछे माना जा रहा है। OpenAI और Anthropic से बढ़ा दबाव Gemini 3.5 Pro की देरी ऐसे समय हुई है जब AI क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। हाल के महीनों में OpenAI ने अपना नया AI मॉडल पेश किया है, जबकि Anthropic भी लगातार अपने उन्नत मॉडल लॉन्च कर रही है। इन कंपनियों की तेज प्रगति ने Google पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के बाद Alphabet के शेयरों में गिरावट Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी की खबर सामने आने के बाद Google की मूल कंपनी Alphabet के शेयरों पर भी असर पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ समय के लिए यह गिरावट 4 प्रतिशत तक पहुंच गई। Google ने कहा- टेस्टिंग जारी है Google की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी लगातार नए AI मॉडल विकसित कर रही है और उन्हें लागत के लिहाज से प्रभावी बनाए रखने पर भी काम कर रही है। कंपनी के अनुसार, Gemini 3.5 Pro, उन्नत Flash मॉडल और अन्य AI सिस्टम फिलहाल चुनिंदा साझेदारों के साथ परीक्षण के चरण में हैं। साथ ही Google अमेरिकी अधिकारियों के साथ भी AI सुरक्षा और नियामकीय पहलुओं पर सहयोग कर रही है। AI रेस से बाहर नहीं हुआ Google हालांकि Gemini 3.5 Pro की लॉन्चिंग में देरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि Google अभी भी AI क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। Google की सबसे बड़ी ताकत उसके विशाल सर्च डेटा, टेक्स्ट, इमेज और वीडियो प्रोसेसिंग क्षमताओं के साथ-साथ ऐसे AI मॉडल विकसित करना है, जो वास्तविक दुनिया के वातावरण को समझने और उसका अनुकरण करने में सक्षम हैं। कंपनी AI आधारित कोडिंग टूल्स, क्लाउड सेवाओं और अन्य डिजिटल उत्पादों पर भी लगातार काम कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि Gemini 3.5 Pro को बेहतर प्रदर्शन के साथ लॉन्च करने के लिए Google अतिरिक्त समय ले रहा है, ताकि वह बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी उत्पाद पेश कर सके।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Google Pixel 11 Series smartphones showcased ahead of the Made by Google event with AI features and 256GB storage highlights.
Google Pixel 11 Series: 12 अगस्त को होगा लॉन्च, 256GB स्टोरेज और Pixel Glow फीचर पर टिकी नजर

Google ने अपने सालाना Made by Google इवेंट की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी 12 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले इस इवेंट में नई Pixel 11 Series और Pixel Watch 5 पेश कर सकती है। लॉन्च से पहले सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार स्मार्टफोन सीरीज में स्टोरेज, AI फीचर्स और कीमत तीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 12 अगस्त को लॉन्च होगी Pixel 11 Series Made by Google इवेंट में कंपनी के इन डिवाइसों से पर्दा उठने की उम्मीद है: Google Pixel 11 Google Pixel 11 Pro Google Pixel 11 Pro XL Google Pixel 11 Pro Fold Google Pixel Watch 5 लीक्स के अनुसार, फोन का डिजाइन पिछले मॉडल से मिलता-जुलता रहेगा, जबकि Pro और Fold मॉडल पहले से अधिक पतले हो सकते हैं। 256GB स्टोरेज बन सकता है नया बेस वेरिएंट रिपोर्ट्स के मुताबिक Google इस बार 128GB बेस स्टोरेज को हटाकर 256GB स्टोरेज से शुरुआत कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यूजर्स को अधिक फोटो, वीडियो, ऐप्स और AI फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त स्टोरेज मिलेगा, जिससे प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में Pixel की प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। Pixel Glow फीचर क्या है? लीक्स में एक नए Pixel Glow फीचर की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह फोन के पीछे LED आधारित नोटिफिकेशन सिस्टम होगा, जो: कॉल आने पर मैसेज नोटिफिकेशन चार्जिंग स्टेटस अन्य महत्वपूर्ण अलर्ट को अलग-अलग लाइट संकेतों के जरिए दिखा सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी इस फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। AI हार्डवेयर की वजह से बढ़ सकती है कीमत रिपोर्ट्स के अनुसार AI आधारित हार्डवेयर और महंगे कंपोनेंट्स की वजह से Pixel 11 Series की कीमत पिछले मॉडल्स से अधिक हो सकती है। संभावित अंतरराष्ट्रीय कीमतें: Pixel 11: लगभग 899 डॉलर Pixel 11 Pro: लगभग 1,099 डॉलर Pixel 11 Pro XL: लगभग 1,299 डॉलर Pixel 11 Pro Fold: लगभग 1,899 डॉलर हालांकि लॉन्च से पहले इन कीमतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Pixel Watch 5 में भी मिल सकते हैं बड़े बदलाव इसी इवेंट में Pixel Watch 5 के लॉन्च होने की भी उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार: डिजाइन में बड़े बदलाव की संभावना कम है। कंपनी नया Tensor आधारित प्रोसेसर इस्तेमाल कर सकती है। इससे AI फीचर्स और स्मार्ट परफॉर्मेंस बेहतर होने की उम्मीद है। बैटरी और वास्तविक प्रदर्शन की जानकारी लॉन्च के बाद ही सामने आएगी। भारतीय बाजार के लिए क्यों है खास? भारत में Pixel स्मार्टफोन्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। बेहतर कैमरा, क्लीन एंड्रॉयड अनुभव और लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से यह सीरीज प्रीमियम यूजर्स की पसंद बनती जा रही है। यदि 256GB स्टोरेज बेस मॉडल में मिलता है, तो भारतीय ग्राहकों को अधिक वैल्यू मिल सकती है। वहीं संभावित कीमत बढ़ने के बाद Pixel 11 Series की टक्कर Samsung Galaxy S Series, Apple iPhone और OnePlus के फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स से और कड़ी हो सकती है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Google Maps app displaying AI-powered restaurant suggestions and food ordering options on a smartphone.
Google Maps में आएगा AI फूड ऑर्डर फीचर? पसंदीदा डिश ढूंढने से लेकर ऑर्डर तक करेगा मदद, जानिए पूरी जानकारी

Google Maps आने वाले समय में सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं रहेगा, बल्कि यह आपके लिए खाना ऑर्डर करने में भी मददगार बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Maps के एंड्रॉयड ऐप के नए बैकएंड कोड में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी एक नए AI आधारित फूड ऑर्डरिंग फीचर पर काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 'Ask Maps to Order Food' फीचर के मिले संकेत रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Maps Android ऐप के वर्जन 26.27.00 में "Ask Maps to Order Food" नाम से एक संभावित फीचर के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि यह सुविधा यूजर को सिर्फ आसपास के रेस्टोरेंट दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी पसंद के अनुसार डिश चुनने और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाने में भी मदद करेगी। यह फीचर Google के Agentic AI विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सुझाव नहीं देता बल्कि यूजर के लिए कई जरूरी काम भी पूरा करने में सहायता करता है। कैसे काम कर सकता है नया AI फीचर? फिलहाल Google ने इस फीचर के काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया है। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूजर अपनी पसंद, जैसे किसी खास डिश या खाने की कैटेगरी, AI को बताएगा। इसके बाद सिस्टम आसपास उपलब्ध रेस्टोरेंट्स, उनकी रेटिंग और अन्य जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि AI ऑर्डर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए Google का Gemini AI मॉडल इस्तेमाल होगा या स्मार्टफोन की ऑन-डिवाइस AI तकनीक। ऑर्डर का अंतिम फैसला रहेगा यूजर के पास अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो AI केवल सुझाव देने और ऑर्डर तैयार करने में मदद करेगा। ऑर्डर को अंतिम रूप देने और भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी यूजर के सामने दिखाई जा सकती है। इससे गलत डिश, गलत मात्रा या अनचाहे ऑर्डर जैसी समस्याओं से बचने में आसानी होगी। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा ध्यान AI आधारित इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। बेहतर सुझाव देने के लिए सिस्टम को यूजर की पसंद, पहले किए गए सर्च और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। हालांकि, Google ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जाएगा और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखना दिलचस्प होगा कि AI रेस्टोरेंट्स की सिफारिश पूरी तरह यूजर की पसंद के आधार पर करेगा या प्रमोटेड विकल्प भी शामिल होंगे। Google Maps बन सकता है स्मार्ट AI असिस्टेंट यदि यह फीचर भविष्य में लॉन्च होता है, तो Google Maps केवल नेविगेशन और लोकेशन खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। AI की मदद से यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम, जैसे पसंदीदा खाना ढूंढना, सही रेस्टोरेंट चुनना और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाना, एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा सकता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Google AI ethics controversy as senior executive resigns over Pentagon defense agreement concerns
Google के वरिष्ठ अधिकारी ने दिया इस्तीफा, Pentagon-AI समझौते पर उठाए गंभीर सवाल

अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ AI समझौते से बढ़ा विवाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह कंपनी का अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के साथ किया गया वह समझौता है, जिसके तहत Google की AI तकनीक का उपयोग गोपनीय और रक्षा संबंधी कार्यों में किया जा सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर Google के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नौ साल बाद कंपनी छोड़ी Google में Android Platform Security के निदेशक रहे रिने मेयरहोफर (René Mayrhofer) ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भेजे विदाई पत्र में कहा कि जिस Google को उन्होंने 2017 में जॉइन किया था, वह अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार कंपनी की नीतियों और मूल्यों में बड़ा बदलाव आया है। मेयरहोफर ने कहा कि उनके लिए इस्तीफा देना आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला “अनिवार्य” हो गया था। AI के सैन्य इस्तेमाल का किया विरोध अपने पत्र में मेयरहोफर ने स्पष्ट कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सैन्य अभियानों, विशेषकर आक्रामक युद्ध गतिविधियों, का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने खुद को शांतिवादी (Pacifist) बताते हुए कहा कि वह ऐसी किसी तकनीक का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसका उपयोग लोगों को नुकसान पहुंचाने या युद्ध संचालन में किया जाए। उनका मानना है कि Google द्वारा Pentagon को AI तकनीक उपलब्ध कराना कंपनी के पुराने नैतिक सिद्धांतों के विपरीत है। Google पर नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप इस्तीफा पत्र में उन्होंने Google प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इन पर कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी उन्हें भी आंतरिक माध्यमों से नहीं मिली। कर्मचारियों में पहले भी दिख चुका है विरोध यह पहला मौका नहीं है जब Google के भीतर Pentagon से जुड़े AI प्रोजेक्ट्स का विरोध हुआ हो। इससे पहले भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सैन्य उद्देश्यों के लिए AI तकनीक उपलब्ध कराने का विरोध किया था। Google DeepMind के कुछ शोधकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर असहमति जताई थी। निगरानी और गोपनीयता को लेकर चिंता मेयरहोफर ने अपने पत्र में भविष्य में AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) के लिए किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें डर है कि AI आधारित सिस्टम का उपयोग आम लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अगस्त तक कंपनी में रहेंगे हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी मेयरहोफर अगस्त 2026 के अंत तक नोटिस अवधि पूरी करने के लिए Google से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे, लेकिन Pentagon समझौते से जुड़े किसी भी AI कार्य से दूरी बनाए रखेंगे। AI नैतिकता पर फिर छिड़ी बहस Google के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस सीमा तक और किन उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे इसके नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बहस भी तेज होती जा रही है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Google parent company Alphabet invests billions to expand AI infrastructure, data centers, and computing capacity
AI की दौड़ में Google का बड़ा दांव, 80 अरब डॉलर जुटाएगी Alphabet; इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर रहेगा फोकस

AI के लिए अरबों डॉलर जुटाने की तैयारी में Google आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। अब Google की पैरेंट कंपनी Alphabet ने भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 80 अरब डॉलर जुटाने की योजना का ऐलान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब AI मॉडल्स, क्लाउड सेवाओं और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI सेवाओं की जरूरत मौजूदा क्षमता से कहीं अधिक बढ़ने वाली है। इसी वजह से Alphabet अपने डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और AI चिप्स के विस्तार पर बड़ा निवेश करने जा रही है। Berkshire Hathaway भी करेगी 10 अरब डॉलर का निवेश रिपोर्ट के अनुसार, Alphabet की फंड जुटाने की योजना में 10 अरब डॉलर का निवेश Berkshire Hathaway की ओर से शामिल है। यह वही कंपनी है जिसे लंबे समय तक दिग्गज निवेशक Warren Buffett ने नेतृत्व दिया था। हालांकि बफेट अप्रैल में CEO पद से हट चुके हैं, लेकिन अभी भी कंपनी के चेयरमैन हैं। 80 अरब डॉलर के पैकेज में 40 अरब डॉलर का शेयर बिक्री कार्यक्रम और 30 अरब डॉलर के अंडरराइटेड शेयर एवं कन्वर्टिबल प्रेफर्ड स्टॉक ऑफरिंग भी शामिल हैं। आखिर Google को इतनी बड़ी रकम की जरूरत क्यों? Google पहले से ही दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल है और उसका बाजार मूल्य लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर बताया जा रहा है। इसके बावजूद कंपनी इतनी बड़ी राशि इसलिए जुटा रही है क्योंकि AI के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता (Compute Power) की मांग लगातार बढ़ रही है। ChatGPT, Gemini, Claude और अन्य बड़े AI मॉडल्स को चलाने के लिए विशाल डेटा सेंटर और अत्याधुनिक प्रोसेसर की आवश्यकता होती है। AI सेवाओं के उपयोग में तेजी आने के कारण टेक कंपनियां पर्याप्त कंप्यूटिंग संसाधनों की कमी का सामना कर रही हैं। 2027 में और बढ़ सकता है निवेश Alphabet की मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) Anat Ashkenazi ने पहले संकेत दिया था कि 2027 में कंपनी का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) 2026 की तुलना में काफी अधिक होगा। कंपनी ने अप्रैल में अपने वार्षिक पूंजीगत निवेश अनुमान को बढ़ाकर 180 से 190 अरब डॉलर कर दिया था। यह वृद्धि मुख्य रूप से AI कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए की गई है। Alphabet का कहना है कि एंटरप्राइज और उपभोक्ता दोनों स्तरों पर उसकी AI सेवाओं की मांग उपलब्ध क्षमता से ज्यादा हो चुकी है। इसलिए भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जरूरी है। Nvidia को चुनौती देने की तैयारी Google सिर्फ AI मॉडल्स ही नहीं, बल्कि अपने स्वयं के AI हार्डवेयर पर भी बड़ा दांव लगा रहा है। कंपनी के Tensor Processing Units (TPUs) अब AI उद्योग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। TPU चिप्स को Nvidia के AI प्रोसेसर का विकल्प माना जा रहा है। AI कंपनियों को बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है और Google इस बढ़ती मांग का लाभ उठाना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Google अपने TPU कारोबार का सफल विस्तार कर लेता है, तो वह AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में Nvidia को कड़ी चुनौती दे सकता है। AI सेक्टर में निवेश की होड़ तेज Google का यह कदम ऐसे समय आया है जब पूरी AI इंडस्ट्री में फंड जुटाने की होड़ मची हुई है। SpaceX ने हाल ही में IPO से जुड़ी योजनाओं के जरिए लगभग 1.75 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन का संकेत दिया है, जिसमें AI स्टार्टअप xAI भी शामिल है। वहीं Anthropic भी करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन पर फंड जुटाने की तैयारी में है। इसके अलावा OpenAI को लेकर भी इस वर्ष IPO लाने की अटकलें तेज हैं। इससे साफ है कि AI की अगली दौड़ केवल बेहतर मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें चलाने के लिए विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की भी है। AI का भविष्य तय करेगा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI सेक्टर में सफलता केवल सॉफ्टवेयर या मॉडल्स पर निर्भर नहीं रहेगी। जिन कंपनियों के पास सबसे ज्यादा डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और उन्नत चिप्स होंगे, वही इस बाजार में बढ़त हासिल कर पाएंगी। Alphabet का 80 अरब डॉलर जुटाने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि AI की वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Google Gemini AI interface displaying personalized responses using Gmail, Photos, and YouTube data integration.
Google Gemini में ‘Personal Intelligence’ फीचर भारत में लॉन्च, अब AI देगा और ज्यादा स्मार्ट व पर्सनल जवाब

भारत में AI तकनीक को नया आयाम देते हुए Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के लिए Personal Intelligence फीचर रोलआउट कर दिया है। यह फीचर यूजर्स को पहले से ज्यादा पर्सनल और कॉन्टेक्स्ट-बेस्ड जवाब देने में सक्षम बनाता है। पहले यह सुविधा केवल अमेरिका में पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब भारत में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया गया है। क्या है Personal Intelligence फीचर? Personal Intelligence एक ऐसा AI सिस्टम है, जो अलग-अलग ऐप्स से जानकारी लेकर उसे जोड़कर जवाब देता है। यह फीचर यूजर्स को इन ऐप्स से कनेक्ट करने की सुविधा देता है: Gmail Google Photos YouTube Search इससे Gemini यूजर के सवालों का जवाब देते समय कई सोर्स से डेटा लेकर ज्यादा सटीक और पर्सनल जानकारी देता है। कैसे काम करता है यह फीचर? मान लीजिए आप जयपुर ट्रिप प्लान कर रहे हैं– Gemini Gmail से आपकी बुकिंग डिटेल्स निकाल सकता है Photos से सेव किए गए स्क्रीनशॉट या नोट्स दिखा सकता है YouTube हिस्ट्री के आधार पर जगहों की सिफारिश कर सकता है यानि अब एक ही जवाब में पूरी जानकारी मिल सकती है, बिना अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत के। यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी पर जोर Google के अनुसार: यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा यूजर खुद तय करेगा कि कौन-से ऐप्स कनेक्ट करने हैं डेटा का उपयोग सिर्फ जवाब देने के लिए होगा, AI ट्रेनिंग के लिए नहीं यूजर कभी भी इस फीचर को बंद कर सकता है अभी भी डेवलपमेंट स्टेज में कंपनी ने यह भी माना है कि यह फीचर अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी गलत या जरूरत से ज्यादा पर्सनल जवाब मिल सकते हैं AI कॉन्टेक्स्ट को गलत समझ सकता है हालांकि यूजर्स फीडबैक देकर इसे सुधारने में मदद कर सकते हैं। क्यों है यह बड़ा अपडेट? यह फीचर AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां: AI सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि संदर्भ समझता है यूजर के डेटा को जोड़कर बेहतर सुझाव देता है डिजिटल असिस्टेंट ज्यादा “पर्सनल” बनता है Gemini का Personal Intelligence फीचर भारत में AI उपयोग के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर्स प्राइवेसी और सुविधा के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Google AI illustration
Google का बड़ा AI अपडेट: अब सर्च बार से ही रेस्टोरेंट बुकिंग, बदल जाएगा खाने का प्लान करने का तरीका

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। Google ने अपने नए AI फीचर के जरिए सर्च को सिर्फ जानकारी देने वाला टूल नहीं, बल्कि काम पूरा करने वाला प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब यूजर्स सीधे सर्च बार से ही रेस्टोरेंट टेबल बुक कर सकेंगे। यह फीचर Google के “AI Mode” का हिस्सा है, जो उसके एडवांस Gemini AI पर आधारित है। यह सिस्टम यूजर्स की डिटेल्ड रिक्वेस्ट को समझकर उसी के हिसाब से विकल्प और बुकिंग सुविधा प्रदान करता है। कैसे काम करता है यह नया फीचर? पारंपरिक सर्च में यूजर्स को कई वेबसाइट्स और ऐप्स पर जाकर जानकारी ढूंढनी पड़ती थी। लेकिन अब: आप सर्च में लिख सकते हैं: “South Delhi में rooftop restaurant में कल के लिए टेबल बुक करो” AI आपकी लोकेशन, समय और पसंद को समझता है फिर यह Zomato, Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म से डेटा लेकर ऑप्शन दिखाता है रियल-टाइम स्लॉट के साथ सीधे बुकिंग का विकल्प मिलता है कई मामलों में AI खुद ही बुकिंग प्रक्रिया को काफी हद तक पूरा कर देता है, जिससे यूजर का समय और मेहनत दोनों बचते हैं। “Agentic AI” की ओर बड़ा कदम यह फीचर “Agentic AI” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां AI सिर्फ जानकारी नहीं देता, बल्कि मल्टी-स्टेप टास्क खुद पूरा करता है। यानी अब यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स में जाकर तुलना करने और बुकिंग करने की जरूरत नहीं होगी। यूजर्स के लिए क्या बदलेगा? समय की बचत ज्यादा पर्सनलाइज्ड सुझाव एक ही जगह पर सर्च से लेकर बुकिंग तक का पूरा काम बेहतर और तेज प्लानिंग चाहे दोस्तों के साथ डिनर हो या किसी खास मौके की तैयारी - अब पूरा प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान और स्मार्ट हो जाएगा। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Google इसी तकनीक के जरिए: मूवी टिकट डॉक्टर अपॉइंटमेंट ट्रैवल बुकिंग जैसे काम भी सीधे सर्च बार से कराने की सुविधा दे सकता है।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0