टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। Google ने अपने नए AI फीचर के जरिए सर्च को सिर्फ जानकारी देने वाला टूल नहीं, बल्कि काम पूरा करने वाला प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब यूजर्स सीधे सर्च बार से ही रेस्टोरेंट टेबल बुक कर सकेंगे।
यह फीचर Google के “AI Mode” का हिस्सा है, जो उसके एडवांस Gemini AI पर आधारित है। यह सिस्टम यूजर्स की डिटेल्ड रिक्वेस्ट को समझकर उसी के हिसाब से विकल्प और बुकिंग सुविधा प्रदान करता है।
पारंपरिक सर्च में यूजर्स को कई वेबसाइट्स और ऐप्स पर जाकर जानकारी ढूंढनी पड़ती थी। लेकिन अब:
कई मामलों में AI खुद ही बुकिंग प्रक्रिया को काफी हद तक पूरा कर देता है, जिससे यूजर का समय और मेहनत दोनों बचते हैं।
यह फीचर “Agentic AI” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां AI सिर्फ जानकारी नहीं देता, बल्कि मल्टी-स्टेप टास्क खुद पूरा करता है। यानी अब यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स में जाकर तुलना करने और बुकिंग करने की जरूरत नहीं होगी।
चाहे दोस्तों के साथ डिनर हो या किसी खास मौके की तैयारी - अब पूरा प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान और स्मार्ट हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Google इसी तकनीक के जरिए:
जैसे काम भी सीधे सर्च बार से कराने की सुविधा दे सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा के बीच Vodafone Idea (Vi) ने अपने ग्राहकों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक फैमिली प्लान लॉन्च किया है। ₹751 का यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो पूरे परिवार के मोबाइल कनेक्शन को एक ही बिल में मैनेज करना चाहते हैं। यह प्लान Vi Max Family लाइनअप का हिस्सा है और शुरुआत में ही दो कनेक्शनों–एक प्राइमरी और एक सेकेंडरी–को कवर करता है, जिससे छोटे परिवारों के लिए यह एक स्मार्ट और बजट-फ्रेंडली विकल्प बन जाता है। प्राइमरी यूजर को मिलते हैं प्रीमियम फायदे इस प्लान में प्राइमरी यूजर को सबसे ज्यादा बेनिफिट्स दिए गए हैं। हर महीने 70GB डेटा के साथ यूजर आसानी से वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे काम कर सकता है। इसके अलावा: रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक अनलिमिटेड नाइट डेटा 200GB तक डेटा रोलओवर अनलिमिटेड कॉलिंग हर महीने 3000 SMS साथ ही यूजर को Vi Movies & TV और Vi Games जैसे प्लेटफॉर्म का एक्सेस भी मिलता है, जिससे एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज मिलता है। सेकेंडरी यूजर को भी मजबूत पैकेज सेकेंडरी यूजर को भी इस प्लान में 40GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है। SMS दोनों यूजर्स के बीच शेयर होता है, जिससे यह प्लान कपल्स और छोटे परिवारों के लिए और ज्यादा उपयोगी बन जाता है। बड़े परिवार के लिए भी आसान विकल्प अगर परिवार में दो से ज्यादा लोग हैं, तो इस प्लान में ₹299 प्रति अतिरिक्त सदस्य के हिसाब से 7 और कनेक्शन जोड़े जा सकते हैं। हर सदस्य को अलग डेटा और कॉलिंग बेनिफिट मिलता है, जिससे पूरा परिवार एक ही प्लान में कवर हो सकता है। एक्स्ट्रा डेटा और स्मार्ट शेयरिंग डेटा खत्म होने की चिंता को कम करने के लिए Vi इस प्लान में 10GB अतिरिक्त शेयर डेटा भी देता है, जिसे सभी यूजर्स जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं। फ्री OTT और डिजिटल बेनिफिट्स इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका OTT ऑफर है। यूजर्स अपनी पसंद के दो प्लेटफॉर्म चुन सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: Amazon Prime Video (6 महीने) SonyLIV (360 दिन) JioHotstar (1 साल) इसके अलावा Norton Mobile Security जैसे प्रीमियम फीचर्स भी दिए गए हैं, जो इसे एक ‘वैल्यू फॉर मनी’ प्लान बनाते हैं।
वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म YouTube ने यूजर्स के लिए एक अहम फीचर रोलआउट किया है, जिसके जरिए अब Shorts फीड को पूरी तरह हटाया जा सकता है। कंपनी ने अपने “टाइम मैनेजमेंट” टूल में नया 0 मिनट (Zero Minute) ऑप्शन जोड़ा है, जिससे शॉर्ट वीडियो देखने की लिमिट तुरंत खत्म हो जाती है। कैसे काम करता है नया फीचर? YouTube के इस अपडेट के बाद यूजर्स: Shorts देखने की समय सीमा 0 मिनट सेट कर सकते हैं ऐसा करते ही Shorts फीड पूरी तरह बंद हो जाती है Shorts टैब पर वीडियो की जगह सिर्फ लिमिट पूरी होने का नोटिफिकेशन दिखता है रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर पहले 15 मिनट की न्यूनतम सीमा के साथ आया था, जिसे अब बढ़ाकर जीरो कर दिया गया है। होम स्क्रीन से भी गायब होंगे Shorts नई सेटिंग लागू करने के बाद: होम स्क्रीन से Shorts के सुझाव हट जाएंगे ऐप कम डिस्ट्रैक्टिंग हो जाएगा यूजर सिर्फ जरूरी या लंबा कंटेंट देख पाएंगे यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो बिना सोचे-समझे लगातार स्क्रॉल (डूमस्क्रॉलिंग) करते रहते हैं। सभी यूजर्स के लिए रोलआउट पहले यह फीचर पैरेंटल कंट्रोल तक सीमित था अब इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स (एडल्ट अकाउंट्स) के लिए जारी किया जा रहा है बच्चों के अकाउंट में यह सेटिंग लॉक भी की जा सकती है क्यों जरूरी है यह फीचर? आज के समय में YouTube Shorts जैसे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर लत (addiction) को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस अपडेट के फायदे: स्क्रीन टाइम कंट्रोल फोकस और प्रोडक्टिविटी में सुधार बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट मानसिक तनाव और नींद की समस्या में कमी ऐसे करें Shorts बंद (Step-by-Step) YouTube ऐप खोलें Settings में जाएं Time Management सेक्शन चुनें “Shorts Feed Limit” ऑन करें समय सीमा में 0 मिनट सेट करें YouTube का यह नया फीचर डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यूजर्स के पास यह विकल्प है कि वे चाहें तो शॉर्ट वीडियो की लत से पूरी तरह दूरी बना सकें और अपने समय का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
भारत में AI तकनीक को नया आयाम देते हुए Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के लिए Personal Intelligence फीचर रोलआउट कर दिया है। यह फीचर यूजर्स को पहले से ज्यादा पर्सनल और कॉन्टेक्स्ट-बेस्ड जवाब देने में सक्षम बनाता है। पहले यह सुविधा केवल अमेरिका में पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब भारत में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया गया है। क्या है Personal Intelligence फीचर? Personal Intelligence एक ऐसा AI सिस्टम है, जो अलग-अलग ऐप्स से जानकारी लेकर उसे जोड़कर जवाब देता है। यह फीचर यूजर्स को इन ऐप्स से कनेक्ट करने की सुविधा देता है: Gmail Google Photos YouTube Search इससे Gemini यूजर के सवालों का जवाब देते समय कई सोर्स से डेटा लेकर ज्यादा सटीक और पर्सनल जानकारी देता है। कैसे काम करता है यह फीचर? मान लीजिए आप जयपुर ट्रिप प्लान कर रहे हैं– Gemini Gmail से आपकी बुकिंग डिटेल्स निकाल सकता है Photos से सेव किए गए स्क्रीनशॉट या नोट्स दिखा सकता है YouTube हिस्ट्री के आधार पर जगहों की सिफारिश कर सकता है यानि अब एक ही जवाब में पूरी जानकारी मिल सकती है, बिना अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत के। यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी पर जोर Google के अनुसार: यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा यूजर खुद तय करेगा कि कौन-से ऐप्स कनेक्ट करने हैं डेटा का उपयोग सिर्फ जवाब देने के लिए होगा, AI ट्रेनिंग के लिए नहीं यूजर कभी भी इस फीचर को बंद कर सकता है अभी भी डेवलपमेंट स्टेज में कंपनी ने यह भी माना है कि यह फीचर अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी गलत या जरूरत से ज्यादा पर्सनल जवाब मिल सकते हैं AI कॉन्टेक्स्ट को गलत समझ सकता है हालांकि यूजर्स फीडबैक देकर इसे सुधारने में मदद कर सकते हैं। क्यों है यह बड़ा अपडेट? यह फीचर AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां: AI सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि संदर्भ समझता है यूजर के डेटा को जोड़कर बेहतर सुझाव देता है डिजिटल असिस्टेंट ज्यादा “पर्सनल” बनता है Gemini का Personal Intelligence फीचर भारत में AI उपयोग के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर्स प्राइवेसी और सुविधा के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।