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Comparison of 32 inch and 43 inch smart TVs showing size and feature differences
32 vs 43 Inch Smart TV: क्या फर्क सिर्फ स्क्रीन साइज का है? खरीदने से पहले जानिए 3 बड़े अंतर

स्मार्ट टीवी खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है कि 32 इंच टीवी खरीदें या 43 इंच? अधिकांश लोग मानते हैं कि दोनों के बीच सिर्फ स्क्रीन साइज का अंतर होता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। 43 इंच का स्मार्ट टीवी केवल बड़ा डिस्प्ले ही नहीं देता, बल्कि बेहतर रिजॉल्यूशन, अधिक दमदार साउंड, ज्यादा रैम-स्टोरेज और अतिरिक्त कनेक्टिविटी फीचर्स भी ऑफर करता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि 32 इंच टीवी खराब विकल्प है। सही चुनाव आपके बजट, कमरे के आकार और जरूरतों पर निर्भर करता है। 1. डिस्प्ले और पिक्चर क्वालिटी में बड़ा अंतर दोनों टीवी के बीच सबसे बड़ा फर्क डिस्प्ले क्वालिटी का होता है। अधिकांश 32 इंच स्मार्ट टीवी HD (1366×768) रिजॉल्यूशन के साथ आते हैं। 43 इंच मॉडल आमतौर पर Full HD या 4K Ultra HD रिजॉल्यूशन में उपलब्ध होते हैं। 4K कंटेंट देखने वालों के लिए 43 इंच टीवी कहीं बेहतर अनुभव देता है। बड़ी स्क्रीन पर बेहतर ब्राइटनेस, शार्पनेस और डिटेल्स देखने को मिलती हैं। अगर आप OTT प्लेटफॉर्म पर 4K कंटेंट देखते हैं, तो 43 इंच टीवी ज्यादा उपयुक्त रहेगा। 2. साउंड सिस्टम भी होता है ज्यादा दमदार स्क्रीन के साथ ऑडियो अनुभव भी बेहतर हो जाता है। 32 इंच टीवी सामान्यतः 16W स्पीकर आउटपुट बेसिक ऑडियो एक्सपीरियंस 43 इंच टीवी 24W से 36W तक स्पीकर आउटपुट कई मॉडलों में Dolby Audio या अन्य एडवांस ऑडियो टेक्नोलॉजी ज्यादा साफ, तेज और सिनेमैटिक साउंड अगर आप अलग साउंडबार नहीं खरीदना चाहते, तो बड़ा टीवी बेहतर विकल्प हो सकता है। 3. रैम, स्टोरेज और परफॉर्मेंस बड़े स्मार्ट टीवी में केवल स्क्रीन ही नहीं, हार्डवेयर भी बेहतर मिलता है। 32 इंच टीवी में आमतौर पर 1GB RAM 8GB Storage 43 इंच टीवी में अक्सर 2GB RAM 16GB या उससे अधिक Storage अधिक शक्तिशाली प्रोसेसर इसका फायदा यह होता है कि ऐप्स तेजी से खुलते हैं, मल्टीटास्किंग बेहतर रहती है और टीवी में लैग या हैंग होने की संभावना कम रहती है। 4. कनेक्टिविटी और पोर्ट्स 43 इंच टीवी में कंपनियां आमतौर पर अधिक कनेक्टिविटी विकल्प देती हैं। ज्यादा HDMI पोर्ट अतिरिक्त USB पोर्ट बेहतर और तेज कनेक्टिविटी गेमिंग कंसोल, सेट-टॉप बॉक्स और साउंड सिस्टम एक साथ जोड़ने की सुविधा 32 इंच टीवी में कुछ मॉडल सीमित पोर्ट्स के साथ आते हैं। तो कौन-सा टीवी खरीदना चाहिए? 32 इंच टीवी चुनें अगर: आपका कमरा छोटा है। बजट सीमित है। सामान्य टीवी देखने के लिए डिवाइस चाहिए। OTT और गेमिंग आपकी प्राथमिकता नहीं है। 43 इंच टीवी चुनें अगर: आप बेहतर पिक्चर और साउंड चाहते हैं। 4K कंटेंट देखते हैं। गेमिंग या OTT का अधिक उपयोग करते हैं। लंबे समय के लिए बेहतर फीचर्स वाला स्मार्ट टीवी खरीदना चाहते हैं।

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Gold-Silver Price
Gold-Silver Price: सोना-चांदी हुआ सस्ता, खरीदारी का सुनहरा मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने या इनमें निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा बाजार में गिरावट के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आ गए हैं। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और घरेलू निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।   इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 680 रुपये की गिरावट आई है। इसके बाद सोने का औसत भाव घटकर ₹1,41,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण विभिन्न शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है।   वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। प्रति किलोग्राम चांदी का भाव करीब ₹1,320 घटकर ₹2,18,690 के स्तर पर आ गया है। कुछ शहरों में खुदरा मांग बेहतर रहने के कारण चांदी के दाम ₹2,19,800 प्रति किलो तक बने हुए हैं।   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते सोना करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 0.34 प्रतिशत टूटकर 57.235 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।   बाजार विशेषज्ञों का कहना  बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी कीमतों में नरमी का एक प्रमुख कारण बनी है।   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव जारी रहता है तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को बाजार की चाल पर नजर रखते हुए ही खरीदारी का फैसला करना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Temple wearable device by Deepinder Goyal attached near temple area for health monitoring
Temple Launch: कनपटी पर चिपकने वाली दीपेंदर गोयल की 'Temple' डिवाइस जल्द होगी लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और क्या होगा खास

Zomato के सह-संस्थापक दीपेंदर गोयल की बहुप्रतीक्षित वियरेबल डिवाइस Temple एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इस डिवाइस को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी और अब इसकी लॉन्च टाइमलाइन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। गोयल के अनुसार, यह डिवाइस अगले 6 से 12 महीनों के भीतर यानी 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक बाजार में लॉन्च की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी अंतिम लॉन्च तारीख या कीमत की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। क्या है Temple डिवाइस? Temple एक बेहद कॉम्पैक्ट वियरेबल डिवाइस है, जिसे कनपटी (Temple Area) पर चिपकाकर पहना जाता है। इसका आकार फली (Bean) जैसा बताया गया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस केवल सामान्य फिटनेस डेटा ही नहीं, बल्कि शरीर की मेटाबोलिक स्थिति (Metabolic State) को रियल-टाइम में मॉनिटर करने में सक्षम होगी। इसका उद्देश्य शरीर की ऊर्जा, रिकवरी और प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण बायोमार्कर्स का विश्लेषण करना है। हर किसी के लिए नहीं है यह डिवाइस दीपेंदर गोयल ने कहा कि Temple को शुरुआत से ही आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, यह डिवाइस मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस एथलीट्स और ऐसे लोगों के लिए विकसित की जा रही है, जिन्हें अपने शरीर की मेटाबोलिक परफॉर्मेंस का गहराई से विश्लेषण करना होता है। गोयल ने यह भी कहा कि उन्होंने इस डिवाइस को सबसे पहले अपनी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित करना शुरू किया था और व्यवसाय उसका स्वाभाविक परिणाम है। लॉन्च में हुई देरी गोयल ने स्वीकार किया कि Temple प्रोजेक्ट अपनी तय समयसीमा से पीछे चल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों से वे इसकी लॉन्चिंग को लेकर उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन तकनीकी विकास और परीक्षण के कारण इसमें देरी हुई। अब उनका अनुमान है कि अगले 6 से 12 महीनों के भीतर इसे बाजार में उतारा जा सकता है। संभावित कीमत कितनी होगी? रिपोर्ट्स के अनुसार Temple की संभावित कीमत लगभग 1,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1 लाख रुपये से कम) हो सकती है। हालांकि, कंपनी ने कीमत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है। अंतिम कीमत लॉन्च के समय अलग हो सकती है। Apple Watch और Galaxy Ring से कितनी अलग? फिटनेस वियरेबल्स की दुनिया में पहले से Apple Watch, Samsung Galaxy Ring और अन्य स्मार्ट डिवाइस मौजूद हैं। लेकिन Temple का फोकस पारंपरिक फिटनेस ट्रैकिंग से आगे बढ़कर एडवांस मेटाबोलिक मॉनिटरिंग पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस— शरीर की मेटाबोलिक स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकती है। ऊर्जा स्तर (Energy Levels) का विश्लेषण कर सकती है। लैक्टिक एसिड जैसे एथलेटिक बायोमार्कर्स की निगरानी करने में सक्षम हो सकती है। प्रोफेशनल एथलीट्स और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग करने वालों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कंपनी अपने दावों के अनुसार इस तकनीक को सफलतापूर्वक बाजार में उतारती है, तो Temple प्रीमियम हेल्थ और फिटनेस वियरेबल्स सेगमेंट में एक अलग पहचान बना सकती है।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
OnePlus smartphone with logo highlighting global exit rumors and India market updates
OnePlus Exit: क्या भारत से विदा होगा वनप्लस? अमेरिका-यूरोप के बाद भारतीय बाजार से भी एग्जिट की चर्चा, जानें पूरी रिपोर्ट

स्मार्टफोन बाजार में अपनी पहचान बनाने वाला लोकप्रिय ब्रांड OnePlus एक बार फिर सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कंपनी अमेरिका और यूरोप में अपना कारोबार समेटने की तैयारी कर रही है। इसके बाद भारत समेत अन्य वैश्विक बाजारों से भी चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कंपनी की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में इन खबरों को फिलहाल रिपोर्ट्स और अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अमेरिका और यूरोप से कारोबार समेटने की चर्चा एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, OnePlus की मूल कंपनी Oppo अपने वैश्विक कारोबार में बड़े स्तर पर पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) कर रही है। इसी प्रक्रिया के तहत अमेरिका और यूरोप में OnePlus के परिचालन को सीमित या बंद करने की योजना पर काम किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Oppo समूह के दूसरे ब्रांड Realme की अंतरराष्ट्रीय रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत से एग्जिट की अटकलें क्यों? रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में OnePlus का कारोबार फिलहाल जारी रहेगा और कंपनी अगले कुछ समय तक नए स्मार्टफोन और अन्य डिवाइस लॉन्च करती रहेगी। भारत, चीन के बाद OnePlus के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक माना जाता है। हाल ही में ई-कॉमर्स सेल के दौरान OnePlus के कई स्मार्टफोन अच्छी बिक्री दर्ज करने में सफल रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय बाजार में ब्रांड की मौजूदगी अभी भी मजबूत है। आखिर क्यों मुश्किल दौर से गुजर रहा है OnePlus? रिपोर्ट्स में कई संभावित कारण बताए गए हैं— वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा। कई प्रमुख बाजारों में अपेक्षा के अनुरूप कारोबार नहीं बढ़ पाना। सह-संस्थापक कार्ल पेई के कंपनी छोड़ने के बाद ब्रांड की पहचान में बदलाव। OxygenOS में बदलाव के बाद पुराने यूज़र्स की नाराजगी। अन्य प्रीमियम और मिड-रेंज स्मार्टफोन ब्रांड्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा। कुछ बाजारों में कानूनी और व्यावसायिक चुनौतियां। क्या भारत में नए फोन लॉन्च होंगे? एग्जिट की चर्चाओं के बीच OnePlus भारत में अपने नए स्मार्टफोन OnePlus N6x को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने इसका टीज़र भी जारी किया है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल भारतीय बाजार में कंपनी की उत्पाद रणनीति जारी है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल OnePlus या उसकी मूल कंपनी Oppo की ओर से अमेरिका, यूरोप या भारत से कारोबार बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि भविष्य में कंपनी इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा करती है, तो उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OnePlus वास्तव में किन बाजारों में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा और किन देशों से बाहर निकलेगा।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Premium smartphones and large smart TVs displayed in a retail store as demand shifts away from budget devices.
Smartphone Sale: सस्ते स्मार्टफोन और टीवी की मांग घटी, मिड-रेंज और प्रीमियम डिवाइस की बिक्री में तेजी

नई दिल्ली: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। एक दशक से भी अधिक समय में पहली बार एंट्री-लेवल (बजट) स्मार्टफोन और टीवी की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मिड-रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे बाजार का रुझान महंगे और फीचर-समृद्ध डिवाइसों की ओर जाता दिखाई दे रहा है। मार्केट रिसर्च एजेंसी काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई के बीच 12,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में 54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत 12,000 से 30,000 रुपये वाले स्मार्टफोन की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 30,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बजट स्मार्टफोन की हिस्सेदारी घटी तेजी से बदलते बाजार के कारण कुल स्मार्टफोन बिक्री में बजट सेगमेंट की हिस्सेदारी भी काफी कम हो गई है। मुख्य आंकड़े: ₹12,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में 54% गिरावट ₹12,000–₹30,000 श्रेणी में 17% की बढ़ोतरी ₹30,000 से अधिक कीमत वाले प्रीमियम फोन की बिक्री में 6% वृद्धि कुल बाजार में बजट स्मार्टफोन की हिस्सेदारी घटकर लगभग 14% रह गई विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता अब बेहतर कैमरा, लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट, 5G कनेक्टिविटी और प्रीमियम फीचर्स वाले स्मार्टफोन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्यों बढ़ रही है प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग? उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, महंगे स्मार्टफोन की निर्माण लागत पर मेमोरी चिप की कीमतों का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। यही वजह है कि प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि बजट डिवाइसों की लागत पर इसका अधिक प्रभाव पड़ा। इसके अलावा: बेहतर कैमरा टेक्नोलॉजी AI आधारित फीचर्स हाई-रिफ्रेश रेट डिस्प्ले लंबी सॉफ्टवेयर अपडेट अवधि आसान EMI और फाइनेंसिंग विकल्प जैसे कारण भी प्रीमियम सेगमेंट की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टीवी बाजार में भी बदला ट्रेंड सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, टीवी बाजार में भी उपभोक्ताओं की पसंद बदलती दिखाई दे रही है। जनवरी से जून के बीच: 32-इंच टीवी की बिक्री में 35% से अधिक गिरावट दर्ज की गई। कुल टीवी बाजार में इनकी हिस्सेदारी 45% से घटकर 38% रह गई। 43-इंच और उससे बड़े टीवी की मांग में 8% से 15% तक की वृद्धि हुई। छोटे टीवी क्यों हो रहे हैं महंगे? रिपोर्ट के अनुसार, 32-इंच टीवी की औसत कीमत में लगभग ₹3,000 से ₹3,500 तक की बढ़ोतरी हुई है। कीमत बढ़ने के कारण कई ग्राहक अब थोड़ा अधिक खर्च करके बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्ट टीवी खरीदना पसंद कर रहे हैं। बाजार क्या संकेत दे रहा है? बदलते ट्रेंड से साफ है कि भारतीय उपभोक्ता अब केवल कम कीमत नहीं, बल्कि बेहतर फीचर्स, बड़ी स्क्रीन, बेहतर प्रदर्शन और लंबे समय तक उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। आसान फाइनेंसिंग विकल्प और बढ़ती आय भी मिड-रेंज एवं प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग को मजबूती दे रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियां भी इसी सेगमेंट पर अधिक फोकस करती दिखाई दे सकती हैं।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Leaked render of Apple iPhone 18 Pro highlighting redesigned camera module, AI features, and premium flagship design.
iPhone 18 Pro Leak: लॉन्च से पहले सामने आए डिजाइन, कैमरा, बैटरी और AI फीचर्स, जानें क्या हो सकता है खास

Apple के अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई लीक रिपोर्ट्स में इसके डिजाइन, कैमरा, बैटरी, प्रोसेसर और AI फीचर्स से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आई हैं। माना जा रहा है कि Apple इस साल सितंबर में अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को पेश कर सकता है। हालांकि, फिलहाल सामने आई सभी जानकारियां लीक रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और Apple ने इनमें से किसी भी फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर में हो सकता है लॉन्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple अपना वार्षिक लॉन्च इवेंट सितंबर 2026 में आयोजित कर सकता है। संभावना है कि इवेंट 8 या 9 सितंबर को आयोजित हो और इसके कुछ दिनों बाद नए iPhone की बिक्री शुरू हो जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस बार Apple लॉन्च रणनीति में बदलाव कर सकता है। इसके तहत सितंबर में केवल iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone पेश किया जा सकता है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 मॉडल्स को 2027 की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है। डिजाइन में छोटे लेकिन अहम बदलाव लीक्स के अनुसार, iPhone 18 Pro का डिजाइन मौजूदा Pro सीरीज जैसा ही रहेगा। संभावित बदलावों में शामिल हैं- फ्लैट-एज डिजाइन बरकरार रहेगा। ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। कैमरा मॉड्यूल पहले से थोड़ा बड़ा हो सकता है। बड़ी बैटरी और बेहतर कूलिंग सिस्टम के कारण फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है। नए Dark Cherry कलर के साथ Light Blue, Silver और Dark Grey रंग मिलने की संभावना है। Dynamic Island हो सकता है छोटा रिपोर्ट्स के अनुसार- iPhone 18 Pro में 6.3 इंच डिस्प्ले iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच डिस्प्ले मिल सकता है। कहा जा रहा है कि Face ID के कुछ सेंसर डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट किए जा सकते हैं, जिससे Dynamic Island पहले की तुलना में छोटा दिखाई दे सकता है। इसके अलावा LTPO+ OLED डिस्प्ले मिलने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे बैटरी एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है। नई A20 Pro चिप दे सकती है AI बूस्ट iPhone 18 Pro सीरीज में Apple की नई A20 Pro चिप मिलने की उम्मीद है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। इससे यूजर्स को- तेज़ प्रोसेसिंग बेहतर गेमिंग कम बैटरी खपत ऑन-डिवाइस AI फीचर्स अधिक स्मार्ट Siri अनुभव जैसे फायदे मिल सकते हैं। बैटरी पर भी रहेगा खास फोकस बैटरी को लेकर भी इस बार बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है। लीक्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro Max में लगभग 5,391mAh से 5,567mAh तक की बैटरी दी जा सकती है। बड़ी बैटरी की वजह से फोन का वजन और मोटाई थोड़ा बढ़ सकती है। कैमरे में मिल सकते हैं बड़े बदलाव Apple इस बार ट्रिपल 48MP कैमरा सिस्टम को बरकरार रख सकता है, लेकिन कैमरा हार्डवेयर में कई नए सुधार देखने को मिल सकते हैं। संभावित फीचर्स- Variable Aperture Main Camera नया Stacked Image Sensor बेहतर Telephoto Camera 24MP फ्रंट कैमरा Pressure-Sensitive Camera Control Button इन बदलावों से फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। नई कनेक्टिविटी और AI फीचर्स रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 18 Pro में Apple का नया C2 Modem दिया जा सकता है, जिससे नेटवर्क स्पीड और पावर एफिशिएंसी बेहतर होगी। इसके अलावा- एडवांस Satellite Connectivity iOS 27 नई Siri Apple Intelligence आधारित AI फीचर्स भी मिलने की संभावना है। कीमत बढ़ने की संभावना Apple ने अभी तक कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई 2nm चिप, बड़ी बैटरी और कैमरा अपग्रेड के कारण iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत पिछले मॉडल्स की तुलना में अधिक हो सकती है। हालांकि, कंपनी की ओर से आधिकारिक घोषणा होने तक इन जानकारियों को केवल लीक रिपोर्ट्स के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra arrives at the Calcutta High Court after seeking protection from arrest in a hate speech case and requesting virtual police questioning.
गिरफ्तारी से राहत की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा, 15 जुलाई को होगी सुनवाई

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ दर्ज कथित नफरती भाषण के मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत से जांच के दौरान किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने और पुलिस पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की अनुमति देने की मांग की है। मामले पर हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक की मांग महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि अंतिम निर्णय तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होने से छूट देने और वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने की भी मांग की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख तय की मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने महुआ मोइत्रा के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजने का निर्देश भी दिया है। क्या है पूरा मामला? महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में नदिया जिले की एक निचली अदालत में पेशी के दौरान कुछ लोगों ने चेहरा ढककर उन पर अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से टिप्पणी की थी कि "जो लोग अपना चेहरा ढकते हैं, उन्हें बुर्का पहन लेना चाहिए।" इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ नफरती भाषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस नोटिस पर जताई आपत्ति याचिका में कहा गया है कि पुलिस लगातार उन्हें थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस भेज रही है। महुआ मोइत्रा की ओर से आशंका जताई गई है कि यदि वह थाने जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनके साथ दोबारा हमला हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से व्यक्तिगत उपस्थिति के बजाय ऑनलाइन पूछताछ की अनुमति देने की मांग की है। 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत यह तय करेगी कि महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए या नहीं और क्या उन्हें वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति मिल सकती है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
OpenAI GPT-5.6 Sol AI model showcased with front-end design benchmark rankings outperforming Claude Fable 5.
GPT-5.6 Sol ने फ्रंट-एंड डिज़ाइन में Claude Fable 5 को छोड़ा पीछे, OpenAI ने बताया बड़ी उपलब्धि

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच OpenAI ने अपने नए फ्लैगशिप AI मॉडल GPT-5.6 Sol को पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल स्वतंत्र Design Arena बेंचमार्क में Anthropic के Claude Fable 5 से आगे निकल गया है। इसके साथ ही OpenAI ने कहा कि GPT-5.6 Sol को कोडिंग, तर्क क्षमता (Reasoning), सुरक्षा और कई अन्य AI कार्यों में भी पहले के मुकाबले बेहतर बनाया गया है। Design Arena रैंकिंग में हासिल किया पहला स्थान OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे कंपनी के लिए एक बड़ा पड़ाव बताया। Design Arena द्वारा जारी फ्रंट-एंड डिज़ाइन लीडरबोर्ड के अनुसार, GPT-5.6 Sol ने 1353 Elo स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं, GLM 5.2 1351 अंकों के साथ दूसरे और Claude Fable 5 1345 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग AI मॉडल्स की वेब डिज़ाइन और फ्रंट-एंड डेवलपमेंट क्षमता के आधार पर तैयार की जाती है। क्या है GPT-5.6 फैमिली? OpenAI ने GPT-5.6 सीरीज़ के तहत तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं- GPT-5.6 Sol – जटिल कोडिंग, उन्नत रीजनिंग और AI एजेंट आधारित कार्यों के लिए। GPT-5.6 Terra – रोजमर्रा के कार्यों और संतुलित प्रदर्शन के लिए। GPT-5.6 Luna – कम लागत और तेज़ स्पीड वाले AI कार्यों के लिए। फिलहाल इन मॉडलों को सीमित संख्या में चुनिंदा डेवलपर्स और एंटरप्राइज पार्टनर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। आने वाले हफ्तों में इन्हें व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। नए फीचर्स से लैस है GPT-5.6 Sol OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol में कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- Maximum Reasoning Mode, जो जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल करने में सक्षम है। Ultra Mode, जिसमें सब-एजेंट्स की मदद से कई चरणों वाले कार्य पूरे किए जा सकते हैं। वैज्ञानिक शोध, विशेषकर बायोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन। कम टोकन इस्तेमाल करते हुए अधिक प्रभावी परिणाम देने की क्षमता। सुरक्षा पर भी दिया गया खास ध्यान OpenAI का कहना है कि GPT-5.6 में सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक, मॉडल को साइबर दुरुपयोग, संवेदनशील जैविक जानकारी के गलत इस्तेमाल और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने जैसी संभावित चुनौतियों से बचाने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए हैं। OpenAI ने बताया कि मॉडल की सुरक्षा जांच के लिए लाखों GPU घंटों तक ऑटोमेटेड रेड-टीमिंग और विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किए गए। कब मिलेगा GPT-5.6? फिलहाल GPT-5.6 API और Codex के जरिए चुनिंदा पार्टनर्स के लिए उपलब्ध है। OpenAI ने संकेत दिया है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसे ChatGPT प्लेटफॉर्म पर भी चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कितनी होगी कीमत? OpenAI ने GPT-5.6 मॉडल्स की API कीमतें भी घोषित की हैं- GPT-5.6 Sol – 5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 30 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Terra – 2.5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 15 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Luna – 1 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 6 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन AI प्रतिस्पर्धा में बढ़ी टक्कर GPT-5.6 Sol के लॉन्च के साथ OpenAI और Anthropic के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। बेहतर डिज़ाइन क्षमता, उन्नत कोडिंग, मजबूत रीजनिंग और सुरक्षा फीचर्स के साथ OpenAI अपने नए मॉडल को डेवलपर्स और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अधिक सक्षम विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
User adding a new business location on Google Maps while the app verifies map information and business details.
Google Maps पर नई जगहों के नाम कैसे जुड़ते हैं? जानिए कौन देता है जानकारी और कैसे होता है वेरिफिकेशन

आज के समय में किसी नई जगह का पता ढूंढना हो, नजदीकी पेट्रोल पंप खोजना हो या किसी दुकान तक पहुंचना हो, तो ज्यादातर लोग Google Maps का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मैप्स पर नई सड़कें, दुकानें, अस्पताल, होटल या अन्य स्थानों की जानकारी आखिर आती कहां से है? क्या Google खुद यह सारी जानकारी जोड़ता है या इसमें आम लोगों की भी भूमिका होती है? आइए जानते हैं Google Maps पर नई जगहों के जुड़ने और उनके वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया। कई स्रोतों से जुटाई जाती है जानकारी Google Maps किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहता। प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाली जानकारी कई अलग-अलग माध्यमों से एकत्र की जाती है, जिनमें शामिल हैं- स्थानीय व्यवसाय (Local Businesses) सरकारी रिकॉर्ड मैपिंग पार्टनर्स सार्वजनिक वेबसाइट्स Google की अपनी मैपिंग और सर्वे प्रक्रिया इन सभी स्रोतों से प्राप्त जानकारी को मिलाकर Google अपने मैप्स को लगातार अपडेट करता रहता है। बिजनेस मालिक खुद जोड़ सकते हैं अपनी लोकेशन यदि आपने नया बिजनेस शुरू किया है, तो आप Google Business Profile के माध्यम से अपनी दुकान, ऑफिस या संस्थान की जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। इस दौरान आपको निम्न जानकारी देनी होती है- पता (Address) फोन नंबर वेबसाइट काम करने का समय फोटो बिजनेस कैटेगरी जानकारी जमा होने के बाद Google उसकी जांच करता है। सत्यापन पूरा होने पर आपका बिजनेस Google Maps पर दिखाई देने लगता है। आम यूजर्स भी भेज सकते हैं नई जानकारी Google Maps की एक बड़ी खासियत यह है कि केवल बिजनेस मालिक ही नहीं, बल्कि आम यूजर्स भी नई जानकारी जोड़ सकते हैं। अगर किसी इलाके में नई सड़क, दुकान या कोई महत्वपूर्ण स्थान मैप्स पर नहीं दिख रहा है, तो यूजर- Add a Place Suggest an Edit जैसे फीचर्स का उपयोग करके Google को जानकारी भेज सकता है। यदि जांच के बाद जानकारी सही पाई जाती है, तो उसे Google Maps में जोड़ दिया जाता है। कैसे होती है वेरिफिकेशन? Google किसी भी नई जानकारी को बिना जांचे सीधे मैप्स पर नहीं दिखाता। वेरिफिकेशन के लिए कंपनी कई स्तरों पर जांच करती है, जिनमें शामिल हैं- एडवांस एल्गोरिदम मशीन लर्निंग सिस्टम मानव (Human) वेरिफिकेशन विभिन्न स्रोतों से डेटा का मिलान यदि एक ही जानकारी कई भरोसेमंद स्रोतों से मिलती है, तो उसके सही होने की संभावना अधिक मानी जाती है। गलत जानकारी मिलने पर क्या होता है? यदि कोई जानकारी भ्रामक, गलत या फर्जी पाई जाती है, तो Google उसे Maps से हटा भी सकता है। यही कारण है कि Google Maps लगातार अपडेट होता रहता है और समय के साथ उसकी सटीकता बेहतर होती जाती है। क्यों भरोसेमंद माना जाता है Google Maps? Google Maps की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा कारण यही है कि इसमें केवल एक स्रोत की जानकारी नहीं होती, बल्कि बिजनेस, सरकारी रिकॉर्ड, यूजर इनपुट और Google की तकनीक मिलकर डेटा को सत्यापित करती हैं। इसी वजह से दुनिया भर के करोड़ों लोग रोजमर्रा की यात्रा और नेविगेशन के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Apple iPhone 18 Pro concept highlighting AI features, premium design, and expected September 2026 launch.
iPhone 18 Pro: सितंबर लॉन्च से Apple खेलेगा बड़ा दांव? Android कंपनियों पर कैसे पड़ सकता है असर

Apple का अगला फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro सितंबर 2026 में लॉन्च होने की उम्मीद है। टेक रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी का यह लॉन्च शेड्यूल केवल परंपरा नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकता है। इससे Apple को Samsung और Google जैसे Android ब्रांड्स की नई डिवाइसों के बाजार प्रदर्शन का आकलन करने और उसी हिसाब से अपनी रणनीति बनाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, Apple ने अभी तक iPhone 18 Series की लॉन्च डेट, कीमत या फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर लॉन्च से Apple को क्या फायदा? हर साल Samsung और Google अपने प्रीमियम स्मार्टफोन जुलाई-अगस्त के दौरान लॉन्च करते हैं। इसके बाद सितंबर में Apple अपनी नई iPhone Series पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Apple को कई फायदे मिलते हैं: प्रतिस्पर्धी कंपनियों की कीमतों और उपभोक्ता प्रतिक्रिया का विश्लेषण करने का समय मिलता है। त्योहारी सीजन से पहले iPhone की बिक्री शुरू हो जाती है। कैरियर और नेटवर्क कंपनियां नए iPhone के साथ आकर्षक ऑफर्स लॉन्च करती हैं। प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों का ध्यान तेजी से iPhone की ओर शिफ्ट हो जाता है। iOS 27 से मिलेगा बेहतर अनुभव? रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple iOS 27 का पब्लिक बीटा जल्द जारी कर सकता है। बताया जा रहा है कि नया अपडेट मुख्य रूप से: सिस्टम परफॉर्मेंस सुधार, Apple Intelligence फीचर्स, Siri AI अपग्रेड, बेहतर स्थिरता पर केंद्रित होगा। Apple की खास बात यह है कि नया iOS एक साथ कई पुराने iPhone मॉडल्स तक पहुंचता है, जबकि Android में अलग-अलग कंपनियों के कारण अपडेट अलग समय पर मिलते हैं। AI फीचर्स पर रहेगा फोकस टेक रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro में Apple का नया AI हार्डवेयर और ऑन-डिवाइस Apple Intelligence फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। कंपनी की रणनीति क्लाउड आधारित AI के बजाय प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हुए अधिक AI प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर उपलब्ध कराने की हो सकती है। हालांकि इन फीचर्स की आधिकारिक जानकारी लॉन्च के समय ही सामने आएगी। बढ़ सकती है iPhone 18 Pro की कीमत रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मेमोरी और स्टोरेज कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत के कारण प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं। यदि Samsung और Google पहले अपने नए फ्लैगशिप की कीमत बढ़ाते हैं, तो Apple के लिए भी iPhone 18 Pro की ऊंची कीमत तय करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। हालांकि Apple ने अभी तक कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। Android से मुकाबले में क्या होगी रणनीति? विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर में लॉन्च होने से Apple को यह देखने का अवसर मिलता है कि: ग्राहक किस तरह के AI फीचर्स पसंद कर रहे हैं। बाजार में किन फीचर्स की सबसे अधिक मांग है। प्रतिस्पर्धी कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति कितनी सफल रही। इसके बाद Apple अपने iPhone 18 Pro की मार्केटिंग और सेवाओं को उसी हिसाब से पेश कर सकता है। अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल iPhone 18 Pro से जुड़ी अधिकांश जानकारी लीक्स और उद्योग विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। लॉन्च के बाद ही फोन की वास्तविक कीमत, स्पेसिफिकेशन और उपलब्धता की पूरी तस्वीर सामने आएगी।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Rescue teams and emergency boats near Phu Quoc Island, Vietnam, after a boat accident involving Indian tourists, as authorities coordinate recovery and investigation efforts.
वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के शव जल्द भेजे जाएंगे भारत, दूतावास ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा

Vietnam Boat Accident: वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीयों के शव जल्द भारत लाए जाएंगे। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी पार्थिव शरीरों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस बीच वियतनाम सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। भारतीय दूतावास ने जारी किया अपडेट भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि हादसे में मारे गए 15 भारतीयों के शव हो ची मिन्ह सिटी ले जाए जा रहे हैं। वहां पहचान और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद पार्थिव शरीरों को भारत भेजने की व्यवस्था की जाएगी। दूतावास ने कहा कि वह वियतनामी प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वियतनाम सरकार ने जांच के दिए आदेश स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दुर्घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को हादसे के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में रखे गए शव आन जियांग प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए पांच शवों को कीन जियांग जनरल अस्पताल में रखा गया है। वहीं, अन्य 10 शवों को हो ची मिन्ह सिटी के चो रे अस्पताल भेजा गया है, जहां उनकी पहचान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। लावा मोबाइल कंपनी की ट्रिप के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, हादसे का शिकार हुई नाव में कुल 36 लोग सवार थे। इनमें 32 भारतीय नागरिक और नाव के चालक दल के सदस्य शामिल थे। बताया गया है कि लावा मोबाइल कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए वियतनाम की यात्रा आयोजित की थी। कंपनी के करीब 110 कर्मचारी छुट्टियां मनाने के लिए वियतनाम पहुंचे थे। हादसे में जान गंवाने वाले सभी भारतीय दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद परिवारों में शोक नाव हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में शोक की लहर है। भारतीय दूतावास, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां शवों को जल्द भारत पहुंचाने और पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे के कारणों की जांच जारी है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Google Pixel 11 Series smartphones showcased ahead of the Made by Google event with AI features and 256GB storage highlights.
Google Pixel 11 Series: 12 अगस्त को होगा लॉन्च, 256GB स्टोरेज और Pixel Glow फीचर पर टिकी नजर

Google ने अपने सालाना Made by Google इवेंट की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी 12 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले इस इवेंट में नई Pixel 11 Series और Pixel Watch 5 पेश कर सकती है। लॉन्च से पहले सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार स्मार्टफोन सीरीज में स्टोरेज, AI फीचर्स और कीमत तीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 12 अगस्त को लॉन्च होगी Pixel 11 Series Made by Google इवेंट में कंपनी के इन डिवाइसों से पर्दा उठने की उम्मीद है: Google Pixel 11 Google Pixel 11 Pro Google Pixel 11 Pro XL Google Pixel 11 Pro Fold Google Pixel Watch 5 लीक्स के अनुसार, फोन का डिजाइन पिछले मॉडल से मिलता-जुलता रहेगा, जबकि Pro और Fold मॉडल पहले से अधिक पतले हो सकते हैं। 256GB स्टोरेज बन सकता है नया बेस वेरिएंट रिपोर्ट्स के मुताबिक Google इस बार 128GB बेस स्टोरेज को हटाकर 256GB स्टोरेज से शुरुआत कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यूजर्स को अधिक फोटो, वीडियो, ऐप्स और AI फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त स्टोरेज मिलेगा, जिससे प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में Pixel की प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। Pixel Glow फीचर क्या है? लीक्स में एक नए Pixel Glow फीचर की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह फोन के पीछे LED आधारित नोटिफिकेशन सिस्टम होगा, जो: कॉल आने पर मैसेज नोटिफिकेशन चार्जिंग स्टेटस अन्य महत्वपूर्ण अलर्ट को अलग-अलग लाइट संकेतों के जरिए दिखा सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी इस फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। AI हार्डवेयर की वजह से बढ़ सकती है कीमत रिपोर्ट्स के अनुसार AI आधारित हार्डवेयर और महंगे कंपोनेंट्स की वजह से Pixel 11 Series की कीमत पिछले मॉडल्स से अधिक हो सकती है। संभावित अंतरराष्ट्रीय कीमतें: Pixel 11: लगभग 899 डॉलर Pixel 11 Pro: लगभग 1,099 डॉलर Pixel 11 Pro XL: लगभग 1,299 डॉलर Pixel 11 Pro Fold: लगभग 1,899 डॉलर हालांकि लॉन्च से पहले इन कीमतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Pixel Watch 5 में भी मिल सकते हैं बड़े बदलाव इसी इवेंट में Pixel Watch 5 के लॉन्च होने की भी उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार: डिजाइन में बड़े बदलाव की संभावना कम है। कंपनी नया Tensor आधारित प्रोसेसर इस्तेमाल कर सकती है। इससे AI फीचर्स और स्मार्ट परफॉर्मेंस बेहतर होने की उम्मीद है। बैटरी और वास्तविक प्रदर्शन की जानकारी लॉन्च के बाद ही सामने आएगी। भारतीय बाजार के लिए क्यों है खास? भारत में Pixel स्मार्टफोन्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। बेहतर कैमरा, क्लीन एंड्रॉयड अनुभव और लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से यह सीरीज प्रीमियम यूजर्स की पसंद बनती जा रही है। यदि 256GB स्टोरेज बेस मॉडल में मिलता है, तो भारतीय ग्राहकों को अधिक वैल्यू मिल सकती है। वहीं संभावित कीमत बढ़ने के बाद Pixel 11 Series की टक्कर Samsung Galaxy S Series, Apple iPhone और OnePlus के फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स से और कड़ी हो सकती है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
BSNL satellite phone designed for communication in remote areas without mobile network connectivity.
BSNL Satellite Phone: iPhone 17 Pro से भी महंगा है BSNL का सैटेलाइट फोन, आखिर इसकी कीमत ₹1.34 लाख क्यों?

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भारत में ₹1,34,166 कीमत वाला नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत Apple के iPhone 17 Pro से भी अधिक है। हालांकि, यह फोन प्रीमियम स्मार्टफोन से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य उन जगहों पर संचार सुविधा उपलब्ध कराना है, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं पहुंचता। यह फोन खास तौर पर रक्षा बलों, आपदा राहत एजेंसियों, समुद्री क्षेत्रों, खनन उद्योग और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार किया गया है। क्या है BSNL का सैटेलाइट फोन? BSNL का यह डिवाइस Global Satellite Phone Service (GSPS) का हिस्सा है। सामान्य मोबाइल फोन जहां नजदीकी मोबाइल टावर से जुड़ते हैं, वहीं यह फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होता है। इसके जरिए ऐसे क्षेत्रों में भी वॉयस कॉल और SMS किए जा सकते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। फोन में मजबूत (Rugged) डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ और SOS इमरजेंसी फीचर भी दिया गया है, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी इसका उपयोग किया जा सके। इतनी ज्यादा कीमत क्यों है? BSNL के सैटेलाइट फोन की ऊंची कीमत की सबसे बड़ी वजह इसकी विशेष तकनीक है। यह डिवाइस सामान्य मोबाइल टावर के बजाय Inmarsat जैसे वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क से सीधे जुड़ता है। इसके लिए विशेष एंटीना, सैटेलाइट कम्युनिकेशन हार्डवेयर और उन्नत तकनीक की जरूरत होती है, जिसकी लागत सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके अलावा, सैटेलाइट फोन सीमित संख्या में बनाए जाते हैं, जिससे उनकी निर्माण लागत भी बढ़ जाती है। केवल फोन खरीदना ही काफी नहीं इस फोन का उपयोग करने के लिए केवल डिवाइस खरीदना पर्याप्त नहीं है। उपयोगकर्ताओं को BSNL की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा का प्लान भी लेना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार— व्यावसायिक (Commercial) प्लान लगभग ₹5,835 प्रति माह से शुरू होते हैं। सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए प्लान ₹3,500 प्रति माह से उपलब्ध हैं। तय फ्री टॉकटाइम के बाद कॉल और SMS के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा। iPhone के Satellite फीचर से कैसे अलग है? Apple के iPhone में उपलब्ध Emergency SOS via Satellite फीचर केवल आपातकालीन स्थिति के लिए बनाया गया है। जब मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi उपलब्ध नहीं होता, तब उपयोगकर्ता इसके जरिए इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क कर सकते हैं या अपनी लोकेशन साझा कर सकते हैं। वहीं BSNL का सैटेलाइट फोन एक पूर्ण सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता बिना किसी मोबाइल टावर के नियमित रूप से— वॉयस कॉल कर सकते हैं। SMS भेज सकते हैं। दूरस्थ इलाकों में लगातार संचार बनाए रख सकते हैं। यानी iPhone का सैटेलाइट फीचर केवल आपात स्थिति के लिए है, जबकि BSNL का फोन रोजमर्रा के सैटेलाइट संचार के लिए तैयार किया गया है। किन लोगों के लिए उपयोगी है यह फोन? BSNL के अनुसार यह फोन विशेष रूप से इन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है— रक्षा बल आपदा प्रबंधन एजेंसियां समुद्री जहाज और तटीय संचालन खनन उद्योग दूरदराज के औद्योगिक क्षेत्र तीर्थयात्री एडवेंचर ट्रैवलर ऐसे क्षेत्र जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है क्या कोई भी खरीद सकता है? नहीं। भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग कड़े नियमों के तहत होता है। इसे खरीदने और इस्तेमाल करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध अनुमति के सैटेलाइट फोन का उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। क्यों है यह फोन खास? हालांकि इसकी कीमत किसी फ्लैगशिप स्मार्टफोन से अधिक है, लेकिन BSNL का सैटेलाइट फोन मनोरंजन या कैमरा फीचर्स के लिए नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के लिए बनाया गया है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह विफल हो जाता है। यही वजह है कि यह डिवाइस सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
TCS corporate branding highlights AI-driven growth strategy and potential changes to dividend policy for future investments.
AI की दौड़ में TCS बदल सकती है अपनी डिविडेंड रणनीति, भविष्य की ग्रोथ के लिए बढ़ाना पड़ सकता है निवेश

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट लगातार हासिल कर रही है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए AI प्रोजेक्ट जीतना ही पर्याप्त नहीं होगा। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में मजबूत बढ़त बनाए रखने के लिए कंपनी को तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और साझेदारियों पर कहीं अधिक निवेश करना पड़ सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि TCS को भविष्य में अपनी डिविडेंड नीति पर भी दोबारा विचार करना पड़ सकता है, ताकि कंपनी AI कारोबार को तेजी से विस्तार देने के लिए पर्याप्त पूंजी अपने पास रख सके। AI कारोबार बढ़ रहा, लेकिन अभी भी कुल आय का छोटा हिस्सा जून तिमाही के नतीजों में TCS ने AI कारोबार में अच्छी प्रगति दर्ज की। कंपनी का वार्षिक AI राजस्व लगभग 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में करीब 13.6 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, यह कंपनी के कुल वार्षिक राजस्व 30.5 अरब डॉलर का केवल करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सा है। यानी AI तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल यह TCS के कुल कारोबार का सीमित हिस्सा ही बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI को कंपनी की कमाई का बड़ा आधार बनाने के लिए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। AI में आगे रहने के लिए बढ़ानी होगी पूंजी बाजार विश्लेषकों के मुताबिक AI तकनीक में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल प्रोजेक्ट हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नई तकनीकों, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक साझेदारियों पर भी भारी खर्च करना पड़ेगा। यही कारण है कि TCS को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी पूंजी खर्च करने की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या बदल सकती है डिविडेंड नीति? TCS लंबे समय से अपने निवेशकों को आकर्षक डिविडेंड देने वाली कंपनियों में शामिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 39,571 करोड़ रुपये का डिविडेंड वितरित किया, जबकि उसका अनुमानित फ्री कैश फ्लो 47,288 करोड़ रुपये रहा। पिछले तीन वित्त वर्षों में भी कंपनी ने अपने अधिकांश फ्री कैश फ्लो का बड़ा हिस्सा निवेशकों को डिविडेंड के रूप में लौटाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर कारोबार वाली कंपनियों के लिए यह रणनीति उपयुक्त हो सकती है, लेकिन AI जैसी तेजी से बदलती तकनीक के दौर में भविष्य के विस्तार के लिए अधिक पूंजी बचाकर रखना भी जरूरी हो सकता है। कारोबार के कई संकेत अब भी मजबूत हालांकि, निवेश बढ़ाने की जरूरत के बीच TCS के कई कारोबारी संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं। जून तिमाही में कंपनी ने 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए, जो ग्राहकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। इसके अलावा कर्मचारी छोड़ने की दर 13.6 प्रतिशत पर स्थिर रही। कंपनी ने इसी तिमाही में 9,279 नए कर्मचारियों की भर्ती की, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 5.9 लाख हो गई। इसके साथ ही TCS ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल तिमाही मुनाफे या राजस्व पर ही नजर नहीं रखनी चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि TCS AI कारोबार को कितनी तेजी से बढ़ा पाती है। यदि कंपनी भविष्य की तकनीकों में आक्रामक निवेश करती है, तो आने वाले वर्षों में उसका कारोबार और मजबूत हो सकता है। हालांकि इसके लिए कंपनी को डिविडेंड और विकास के लिए होने वाले निवेश के बीच नया संतुलन बनाना पड़ सकता है। AI रणनीति पर रहेगी बाजार की नजर आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि TCS AI प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से बड़े कारोबार में बदल पाती है। यदि कंपनी तकनीकी निवेश और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो AI युग में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं, डिविडेंड नीति में किसी संभावित बदलाव पर भी बाजार की खास नजर बनी रहेगी।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Google Maps app displaying AI-powered restaurant suggestions and food ordering options on a smartphone.
Google Maps में आएगा AI फूड ऑर्डर फीचर? पसंदीदा डिश ढूंढने से लेकर ऑर्डर तक करेगा मदद, जानिए पूरी जानकारी

Google Maps आने वाले समय में सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं रहेगा, बल्कि यह आपके लिए खाना ऑर्डर करने में भी मददगार बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Maps के एंड्रॉयड ऐप के नए बैकएंड कोड में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी एक नए AI आधारित फूड ऑर्डरिंग फीचर पर काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 'Ask Maps to Order Food' फीचर के मिले संकेत रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Maps Android ऐप के वर्जन 26.27.00 में "Ask Maps to Order Food" नाम से एक संभावित फीचर के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि यह सुविधा यूजर को सिर्फ आसपास के रेस्टोरेंट दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी पसंद के अनुसार डिश चुनने और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाने में भी मदद करेगी। यह फीचर Google के Agentic AI विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सुझाव नहीं देता बल्कि यूजर के लिए कई जरूरी काम भी पूरा करने में सहायता करता है। कैसे काम कर सकता है नया AI फीचर? फिलहाल Google ने इस फीचर के काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया है। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूजर अपनी पसंद, जैसे किसी खास डिश या खाने की कैटेगरी, AI को बताएगा। इसके बाद सिस्टम आसपास उपलब्ध रेस्टोरेंट्स, उनकी रेटिंग और अन्य जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि AI ऑर्डर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए Google का Gemini AI मॉडल इस्तेमाल होगा या स्मार्टफोन की ऑन-डिवाइस AI तकनीक। ऑर्डर का अंतिम फैसला रहेगा यूजर के पास अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो AI केवल सुझाव देने और ऑर्डर तैयार करने में मदद करेगा। ऑर्डर को अंतिम रूप देने और भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी यूजर के सामने दिखाई जा सकती है। इससे गलत डिश, गलत मात्रा या अनचाहे ऑर्डर जैसी समस्याओं से बचने में आसानी होगी। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा ध्यान AI आधारित इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। बेहतर सुझाव देने के लिए सिस्टम को यूजर की पसंद, पहले किए गए सर्च और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। हालांकि, Google ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जाएगा और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखना दिलचस्प होगा कि AI रेस्टोरेंट्स की सिफारिश पूरी तरह यूजर की पसंद के आधार पर करेगा या प्रमोटेड विकल्प भी शामिल होंगे। Google Maps बन सकता है स्मार्ट AI असिस्टेंट यदि यह फीचर भविष्य में लॉन्च होता है, तो Google Maps केवल नेविगेशन और लोकेशन खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। AI की मदद से यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम, जैसे पसंदीदा खाना ढूंढना, सही रेस्टोरेंट चुनना और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाना, एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा सकता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Nothing Phone (4b) with Glyph Bar design, AMOLED display, and 6000mAh battery launched in India.
Nothing Phone (4b) भारत में लॉन्च: ₹34,999 की शुरुआती कीमत, 6000mAh बैटरी और नया Glyph Bar डिजाइन बना खास

Nothing ने भारतीय बाजार में अपनी नई B-सीरीज का पहला स्मार्टफोन Nothing Phone (4b) लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे मिड-रेंज सेगमेंट में पेश किया है। स्मार्टफोन में 6000mAh की बड़ी बैटरी, Snapdragon 6 Gen 4 चिपसेट, 120Hz AMOLED डिस्प्ले और नया Glyph Bar डिजाइन दिया गया है। इसके अलावा कंपनी 3 साल तक Android अपडेट और 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है। Nothing Phone (4b) की कीमत और उपलब्धता Nothing Phone (4b) को भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। 8GB RAM + 128GB स्टोरेज: ₹34,999 8GB RAM + 256GB स्टोरेज: ₹38,999 कंपनी चुनिंदा बैंक कार्ड पर 7.5% इंस्टेंट डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस भी दे रही है। फोन की बिक्री 14 जुलाई 2026 से शुरू होगी। ग्राहक इसे Flipkart, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales के साथ अन्य रिटेल स्टोर्स से खरीद सकेंगे। यह Black, Blue और White रंगों में उपलब्ध होगा। Glyph Bar डिजाइन बना सबसे बड़ा आकर्षण Nothing Phone (4b) में कंपनी ने अपने सिग्नेचर डिजाइन को नया रूप देते हुए Glyph Bar दिया है। इसमें 45 मिनी LED लाइट्स लगी हैं, जो कॉल, नोटिफिकेशन, कैमरा काउंटडाउन, वॉल्यूम, रिकॉर्डिंग और टाइमर जैसी गतिविधियों के अनुसार अलग-अलग लाइट इफेक्ट दिखाती हैं। Nothing Phone (4b) के फीचर्स शानदार AMOLED डिस्प्ले फोन में 6.77 इंच का Full HD+ Samsung Super AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। मुख्य फीचर्स: 120Hz रिफ्रेश रेट 2000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस AGC DT-Star 2 प्रोटेक्शन IP64 रेटिंग (धूल और पानी की हल्की छींटों से सुरक्षा) 50MP कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए फोन में डुअल रियर कैमरा मिलता है। 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट) 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा 16MP फ्रंट कैमरा फ्रंट कैमरा 4K 30fps तक वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर Nothing Phone (4b) में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर आधारित है। इसके साथ मिलते हैं: 8GB LPDDR4X RAM 128GB और 256GB UFS 2.2 स्टोरेज वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम Android 16 आधारित Nothing OS 4.1 कंपनी के अनुसार फोन को 3 साल के Android OS अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे। 6000mAh बैटरी और फास्ट चार्जिंग फोन में 6000mAh की बैटरी दी गई है। चार्जिंग फीचर्स: 33W फास्ट चार्जिंग 7.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग कंपनी का दावा है कि यह फोन लगभग 80 मिनट में 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है। कनेक्टिविटी फीचर्स Nothing Phone (4b) में आधुनिक कनेक्टिविटी विकल्प दिए गए हैं। 5G सपोर्ट Wi-Fi 6 Bluetooth 6.0 USB Type-C GPS इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर क्या यह फोन खरीदने लायक है? करीब ₹35,000 के बजट में Nothing Phone (4b) उन ग्राहकों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकता है, जो अलग डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट और संतुलित परफॉर्मेंस वाला स्मार्टफोन चाहते हैं। खास तौर पर Glyph Bar डिजाइन और 6000mAh बैटरी इसे इस प्राइस सेगमेंट में अलग पहचान देते हैं।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Elon Musk reacts after a US court approves his SEC settlement over delayed Twitter share purchase disclosures.
Twitter शेयर खरीद मामले में एलन मस्क को राहत, अमेरिकी अदालत ने SEC के साथ समझौते को दी मंजूरी

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एलन मस्क और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। हालांकि अदालत ने इस समझौते को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए और कहा कि इसमें कुछ "रेड फ्लैग" यानी चिंताजनक पहलू दिखाई देते हैं। यह मामला 2022 में Twitter (अब X) के शेयरों की खरीद से जुड़ा है, जिसमें मस्क पर अपनी हिस्सेदारी की जानकारी तय समय से देर से सार्वजनिक करने का आरोप था। क्या था पूरा मामला? SEC के अनुसार, एलन मस्क ने मार्च और अप्रैल 2022 में Twitter के शेयर खरीदे थे, लेकिन नियमानुसार जानकारी देने में 11 दिनों की देरी की। नियामक का दावा था कि इस देरी के कारण मस्क निवेशकों को जानकारी मिलने से पहले कम कीमत पर शेयर खरीदते रहे, जिससे उन्हें लगभग 150 मिलियन डॉलर का वित्तीय लाभ हुआ। बाद में मस्क ने अक्टूबर 2022 में करीब 44 अरब डॉलर में Twitter का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर X कर दिया। समझौते के तहत कितना देना होगा जुर्माना? समझौते के अनुसार, एलन मस्क के नाम से जुड़े एक ट्रस्ट की ओर से 15 लाख डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही SEC द्वारा लगाए गए इस मामले के दावों का निपटारा हो जाएगा। मस्क का कहना है कि जानकारी देने में हुई देरी जानबूझकर नहीं, बल्कि अनजाने में हुई थी। जज ने SEC की कार्रवाई पर उठाए सवाल मामले की सुनवाई करने वाली अमेरिकी जिला अदालत की जज स्पार्कल सूकनानन ने कहा कि अदालत का काम केवल यह देखना है कि समझौता कानूनी रूप से उचित और निष्पक्ष है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SEC ने मस्क से कथित आर्थिक लाभ की वसूली (Disgorgement) की मांग क्यों छोड़ दी। जज ने यह भी पूछा कि आखिर समझौता सीधे मस्क की बजाय उनके ट्रस्ट के साथ क्यों किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह धारणा बन सकती है कि मस्क सार्वजनिक रूप से खुद को पूरी तरह निर्दोष बता सकें। SEC ने समझौते का किया बचाव SEC ने अदालत में कहा कि यह समझौता किसी तरह की मिलीभगत का परिणाम नहीं है। आयोग के अनुसार, 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना इस तरह के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी सिविल पेनल्टी है। नियामक ने यह भी कहा कि समझौते के तहत जारी आदेश भविष्य में मस्क पर भी लागू रहेगा, भले ही वे अपने ट्रस्ट के माध्यम से निवेश करें। राजनीतिक पहलू भी आया चर्चा में अपने आदेश में जज ने यह भी टिप्पणी की कि यह तय करना जनता का अधिकार है कि क्या सरकार ने इस मामले में एलन मस्क की पर्याप्त जवाबदेही तय की या नहीं। एलन मस्क पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रह चुके हैं। वहीं इस मामले की सुनवाई करने वाली जज की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी। क्या होगा आगे? अदालत की मंजूरी के साथ यह मामला फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन फैसले में की गई टिप्पणियों ने SEC की कार्यप्रणाली और हाई-प्रोफाइल मामलों में नियामकीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Nothing smartphones, earbuds, smartwatch and chargers showcased with Flipkart GOAT Sale 2026 discount offers.
Nothing GOAT Sale 2026: Phone से लेकर Earbuds तक भारी छूट, Flipkart सेल में मिल रहे दमदार ऑफर्स

Nothing के स्मार्टफोन और ऑडियो प्रोडक्ट्स खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान कंपनी अपने स्मार्टफोन्स, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच, हेडफोन और चार्जर्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है। यह सेल 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस के साथ कई प्रोडक्ट्स कम कीमत पर उपलब्ध हैं। Nothing Phone (4a) पर मिल रहा शानदार ऑफर सेल के दौरान Nothing Phone (4a) की शुरुआती कीमत 32,999 रुपये रखी गई है। पात्र बैंक कार्ड से EMI ट्रांजैक्शन करने पर ग्राहकों को 4,000 रुपये का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन के एक्सचेंज पर 3,000 रुपये तक का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है। फोन में Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर, 50MP OIS प्राइमरी कैमरा, 50MP पेरिस्कोप कैमरा, 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Nothing OS 4.1 और AI आधारित फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Phone (4a) Pro पर भी बड़ा डिस्काउंट Nothing Phone (4a) Pro की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये है। इस मॉडल पर पात्र बैंक कार्ड से EMI खरीदने पर 5,000 रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा, जबकि एक्सचेंज करने पर 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। फोन में Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Glyph Matrix डिजाइन, 140x तक जूम सपोर्ट वाला कैमरा सिस्टम और मेटल यूनिबॉडी डिजाइन जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Earbuds और Headphone पर भी ऑफर्स स्मार्टफोन के अलावा Nothing के ऑडियो प्रोडक्ट्स पर भी आकर्षक कीमतें मिल रही हैं। Nothing Ear (a) – ₹4,999 Nothing Ear – ₹7,999 Nothing Ear (Open) – ₹9,999 वहीं Nothing Headphone (1) की कीमत 3 से 5 जुलाई तक ₹16,999 रहेगी। इसके बाद 6 से 9 जुलाई के बीच इसकी कीमत बढ़कर ₹17,999 हो जाएगी। CMF के प्रोडक्ट्स भी हुए सस्ते Nothing के सब-ब्रांड CMF के कई प्रोडक्ट्स भी सेल में डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं। CMF Buds 2A – ₹1,699 CMF Buds 2+ – शुरुआती दिनों में ₹2,399, बाद में ₹2,499 CMF Buds Pro 2 – ₹3,399 CMF Headphone Pro – ₹5,999 CMF Watch Pro 2 – शुरुआती तीन दिनों तक ₹3,999, बाद में ₹4,199 CMF Watch 3 Pro – ₹5,999 चार्जर्स पर भी मिल रही है बचत सेल के दौरान चार्जर्स पर भी विशेष ऑफर दिए जा रहे हैं। CMF 33W Charger – ₹899 CMF 65W Charger – ₹2,499 Nothing 45W Charger – ₹2,299 अगर आप Nothing या CMF के किसी नए डिवाइस की खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस का लाभ उठाकर अच्छी बचत कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Microsoft logo representing the company's announcement of 4,800 job cuts amid rising AI investments and cost optimization efforts.
Microsoft में 4,800 कर्मचारियों की छंटनी, AI पर बढ़ते खर्च के बीच कंपनी ने लिया बड़ा फैसला

AI निवेश बढ़ा, लागत कम करने के लिए Microsoft का बड़ा कदम दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में कटौती करते हुए करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब Microsoft कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है तथा साथ ही परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने विभिन्न विभागों में दक्षता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह बदलाव कर रही है। AI पर अरबों डॉलर का दांव, लेकिन बढ़ रहा है वित्तीय दबाव पूरे टेक उद्योग में इस समय AI को लेकर निवेश की होड़ मची हुई है। Microsoft के अलावा Amazon और Meta Platforms जैसी कंपनियां भी इस वर्ष हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में बड़ी टेक कंपनियों का AI संबंधी निवेश 700 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों पर यह दबाव भी बढ़ गया है कि वे इन भारी निवेशों से बेहतर वित्तीय परिणाम हासिल करें। शेयरों में गिरावट के बाद बढ़ी चिंता Microsoft के लिए वर्ष 2026 की पहली छमाही आसान नहीं रही। कंपनी के शेयरों में जनवरी से जून के बीच लगभग 23% की गिरावट दर्ज की गई, जो 2022 के बाद उसका सबसे कमजोर पहला छह महीने का प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले भी कंपनी अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन पैकेज (Voluntary Buyout) की पेशकश कर चुकी थी, जो उसके अमेरिकी कर्मचारियों का करीब 7% था। Microsoft हर वर्ष जून में अपना वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए वित्तीय वर्ष की योजना के तहत कर्मचारियों और खर्चों की समीक्षा भी करती है। Azure की मजबूत मांग, लेकिन डेटा सेंटर का बढ़ता खर्च AI सेवाओं की बढ़ती मांग का सबसे अधिक फायदा Microsoft के Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म को मिला है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल्स का विशेष क्लाउड प्रदाता था, जिससे कंपनी को AI सेवाओं की बढ़ती मांग का लाभ मिला। हालांकि, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने और उनका विस्तार करने में भारी पूंजी खर्च हो रही है। इससे कंपनी के नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव बढ़ा है। Microsoft ने पहले ही 2026 के लिए लगभग 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जताया था, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक माना गया। Gaming कारोबार भी चुनौतियों से जूझ रहा AI पर बढ़ते खर्च का असर Microsoft के गेमिंग कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे हार्डवेयर निर्माण की लागत में इजाफा हुआ है। इसी कारण कंपनी को अपने Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ीं, जबकि बाजार में इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है। हाल ही में Microsoft के गेमिंग डिवीजन की प्रमुख Asha Sharma ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा कि कंपनी के गेमिंग व्यवसाय को "रीसेट" की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस डिवीजन का लाभ मार्जिन घटकर केवल 3% रह गया है, जिसके चलते पुनर्गठन जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में विलय और अधिग्रहण (M&A) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। शर्मा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने कंटेंट, प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर सब्सिडी पर 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, लेकिन इस दौरान वार्षिक राजस्व में लगभग 50 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। उनका कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Zoho founder Sridhar Vembu announces Arattai will remove username accounts following India’s messaging platform security concerns.
Arattai में भी बंद होगा यूजरनेम फीचर, WhatsApp पर सरकार की सख्ती के बाद Zoho के श्रीधर वेम्बु का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Government Notice
सरकार ने WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर भेजा नोटिस

नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर अपनी सख्ती बढ़ाते हुए WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal को भी उनके यूजरनेम (Username) फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और संभावित जोखिमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है।   यूजरनेम फीचर पर सरकार की बढ़ी चिंता   सरकार का कहना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग में मोबाइल नंबर छिपा रहता है, जिससे फर्जी पहचान , ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण कंपनियों से पूछा गया है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं।   WhatsApp को पहले ही दिया जा चुका है निर्देश   इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को निर्देश दिया था कि भारत में WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर का रोलआउट फिलहाल रोका जाए। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर इस फीचर और इसके सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जवाब मांगा गया था।   Telegram और Signal से भी मांगी गई रिपोर्ट   सरकारी सूत्रों के अनुसार, Telegram और Signal से भी पूछा गया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं। दोनों कंपनियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।   डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने और साइबर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब सभी की नजर कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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