Google का नया Selfie Video Recovery फीचर एक वैकल्पिक (Optional) अकाउंट रिकवरी सिस्टम है। इसका उद्देश्य उन यूजर्स की मदद करना है जो पासवर्ड भूल जाने या अकाउंट लॉक होने की स्थिति में पारंपरिक रिकवरी विकल्पों का उपयोग नहीं कर पाते।
इस फीचर के तहत यूजर को पहले से अपने Google अकाउंट में एक छोटा रेफरेंस सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करके सुरक्षित रखना होगा। बाद में यदि पासवर्ड भूल जाएं, तो Google नया लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहेगा और दोनों वीडियो का मिलान करके पहचान सत्यापित करेगा।
इस फीचर का उपयोग करने के लिए पहले इसे Google अकाउंट में सेटअप करना होगा।
सेटअप के दौरान Google यूजर से कैमरे के सामने देखकर कुछ आसान निर्देशों का पालन करने के लिए कहेगा, जैसे—
इसी रिकॉर्डिंग को भविष्य के लिए रेफरेंस वीडियो के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।
अगर भविष्य में अकाउंट रिकवरी की जरूरत पड़ती है, तो Google दोबारा लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड कराएगा और उसकी तुलना पहले सेव किए गए वीडियो से करेगा।
Google ने इस फीचर में Liveness Detection तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसका मतलब है कि केवल फोटो या पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो दिखाकर अकाउंट एक्सेस नहीं किया जा सकेगा।
यूजर को लाइव वीडियो रिकॉर्ड करते समय स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। इससे सिस्टम यह सुनिश्चित कर सकेगा कि वीडियो वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया गया है और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।
Google का कहना है कि चेहरा एक संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा है, इसलिए इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
कंपनी के अनुसार—
Google ने जानकारी दी है कि Selfie Video Recovery फीचर को दुनिया भर के Google अकाउंट यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर अधिक से अधिक यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा और अकाउंट रिकवरी को पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय ऑडियो ब्रांड boAt ने अपना नया प्रीमियम ओवर-ईयर हेडफोन Nirvana Eutopia 2 ANC लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह हेडफोन म्यूजिक, गेमिंग, कॉलिंग और ट्रैवल जैसे उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कीमत भारत में 4,999 रुपये रखी गई है। 45dB Adaptive Hybrid ANC और दमदार साउंड boAt Nirvana Eutopia 2 ANC में 45dB Adaptive Hybrid Active Noise Cancellation (ANC) तकनीक दी गई है, जो आसपास के शोर को कम करने में मदद करती है। इसमें डुअल ड्राइवर्स और Hi-Res Audio सपोर्ट दिया गया है, जिससे यूजर्स को बेहतर साउंड क्वालिटी मिलने का दावा किया गया है। 10 मिनट चार्ज में 12 घंटे का प्लेबैक हेडफोन की सबसे खास खूबियों में से एक इसकी फास्ट चार्जिंग है। कंपनी के अनुसार, सिर्फ 10 मिनट चार्ज करने पर करीब 12 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं फुल चार्ज पर यह 80 घंटे तक बैटरी बैकअप देने में सक्षम है। गेमिंग और कॉलिंग के लिए भी खास फीचर्स Nirvana Eutopia 2 ANC को गेमिंग और वर्क फ्रॉम होम यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें लो-लेटेंसी मोड, बेहतर कॉल क्लैरिटी और मल्टी-डिवाइस कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। boAt का प्रीमियम ऑडियो सेगमेंट में विस्तार boAt लंबे समय से भारत के किफायती ऑडियो बाजार में मजबूत पकड़ रखता है। कंपनी अब Nirvana सीरीज के जरिए प्रीमियम हेडफोन सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इससे पहले कंपनी ने Nirvana Eutopia 2 Pro जैसे मॉडल में Snapdragon ऑडियो प्लेटफॉर्म और स्पेशियल ऑडियो जैसे फीचर्स की तैयारी दिखाई थी।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग जहां बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है, वहीं इससे साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा कि यदि AI से जुड़े जोखिमों के लिए समय रहते प्रभावी नियामकीय ढांचा नहीं बनाया गया, तो भविष्य में इसका असर पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है। बैंकिंग और भुगतान प्रणाली पर बढ़ सकता है खतरा आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलावर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सुरक्षा कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं। बैंक, भुगतान नेटवर्क, क्लाउड सेवाएं और साझा डिजिटल अवसंरचना ऐसे हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। संस्था ने आगाह किया कि यदि एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ हमला हुआ, तो यह वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। वैश्विक सहयोग और कड़े नियमन पर जोर आईएमएफ ने सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वित्तीय नियामकों से AI आधारित जोखिमों के लिए स्पष्ट नियम बनाने, साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लाभ तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इसके साथ मजबूत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नियमन भी विकसित किया जाए।
iPhone 17 Price in India: अगर आप iPhone 17 खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में iPhone 17 की कीमत अगस्त 2026 के पहले सप्ताह से करीब ₹12,000 तक बढ़ सकती है। संभावित प्राइस हाइक की खबर के बाद कई शहरों में iPhone 17 का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और डीलर्स को नए स्टॉक का इंतजार है। iPhone 17 की कीमत कितनी बढ़ सकती है? टिप्स्टर अभिषेक यादव के अनुसार, Apple ने अपने iPlanet डीलर्स को जानकारी दी है कि अगस्त के पहले सप्ताह से iPhone 17 की शुरुआती कीमत ₹94,990 हो सकती है। यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो: लॉन्च कीमत: ₹82,990 संभावित नई कीमत: ₹94,990 संभावित बढ़ोतरी: ₹12,000 रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की कीमतों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हो सकती है। ध्यान दें: Apple ने अभी तक भारत में कीमत बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। फिलहाल यह जानकारी लीक और टिप्स्टर रिपोर्ट्स पर आधारित है। कई शहरों में iPhone 17 का स्टॉक खत्म संभावित प्राइस हाइक की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में ग्राहक मौजूदा कीमत पर iPhone 17 खरीद रहे हैं। इसके चलते: कई रिटेल स्टोर्स में स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। देशभर में सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। नया स्टॉक अगले सप्ताह तक डीलर्स के पास पहुंचने की उम्मीद है। जापान के बाद भारत में भी बढ़ सकते हैं दाम हाल ही में Apple ने जापान में अपने iPhone की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से ही उम्मीद जताई जा रही थी कि अन्य बाजारों में भी कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत को लेकर अब ऐसी ही रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। iPhone महंगा क्यों हो सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, कीमत बढ़ने की संभावित वजहें हैं: RAM और स्टोरेज चिप्स की लागत में बढ़ोतरी AI और डेटा सेंटर इंडस्ट्री की बढ़ती मांग कंपोनेंट सप्लाई पर दबाव उत्पादन लागत में इजाफा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई स्मार्टफोन कंपनियां पहले ही अपने डिवाइस महंगे कर चुकी हैं। Apple भी हाल के महीनों में iPad और MacBook की कीमतों में बदलाव कर चुका है। क्या अभी खरीदना सही रहेगा? अगर Apple आधिकारिक तौर पर कीमत बढ़ाता है, तो मौजूदा कीमत पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, जब तक कंपनी आधिकारिक घोषणा नहीं करती, तब तक संभावित कीमत बढ़ोतरी को लेकर इंतजार करना भी एक विकल्प है।