Morning Headache Causes: अगर आपकी सुबह की शुरुआत अक्सर सिरदर्द के साथ होती है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। सुबह उठते ही होने वाला सिरदर्द कई बार शरीर की किसी अंदरूनी समस्या या बिगड़ती जीवनशैली का संकेत हो सकता है। खराब नींद, शरीर में पानी की कमी, तनाव, ब्लड प्रेशर में बदलाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य कारण इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुबह का सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो केवल दर्द निवारक दवा लेने के बजाय इसकी असली वजह जानना और समय रहते सुधार करना जरूरी है।
अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती या रात में बार-बार टूटती है, तो सुबह उठने पर सिरदर्द महसूस हो सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाली 7–8 घंटे की नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए जरूरी है।
रातभर पानी न पीने या दिनभर पर्याप्त पानी न लेने से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। इसका असर सुबह सिर भारी लगने और सिरदर्द के रूप में दिखाई दे सकता है।
कुछ लोगों को नींद के दौरान दांत पीसने (Bruxism) या जबड़ा कसकर रखने की आदत होती है। इससे सिर और चेहरे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जो सुबह दर्द का कारण बन सकता है।
लगातार तनाव, चिंता और मानसिक थकान भी सुबह के सिरदर्द का एक प्रमुख कारण हो सकते हैं। तनाव शरीर की मांसपेशियों और नसों पर असर डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।
कुछ लोगों में सुबह के समय ब्लड प्रेशर बढ़ने या असंतुलित रहने के कारण भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। यदि यह समस्या बार-बार हो, तो नियमित जांच कराना जरूरी है।
बार-बार पेनकिलर लेने से रिबाउंड हेडेक (Rebound Headache) की समस्या हो सकती है, जिसमें दवा का असर खत्म होने के बाद सिरदर्द फिर शुरू हो जाता है।
सुबह नियमित रूप से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, बालासन, शशांकासन और मार्जरी-व्याघ्रासन (Cat-Cow Pose) करने से तनाव कम करने, शरीर को रिलैक्स रखने और बेहतर नींद में मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि सिरदर्द लगातार बना रहे या तेज हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
यदि सुबह का सिरदर्द रोजाना हो, बहुत तेज हो, इसके साथ चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
ध्यान रखें: सुबह का सिरदर्द कई बार शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। समय पर कारण की पहचान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त नींद, नियमित योग और सही खानपान अपनाकर इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण, ठंडी-गर्म चीजों का सेवन और मौसम में अचानक बदलाव के कारण गले में खराश, आवाज बैठना और निगलने में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में कई लोग तुरंत एंटीबायोटिक दवाओं का सहारा लेते हैं, जबकि हर गले की समस्या में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गले की परेशानी हल्की है और किसी गंभीर संक्रमण के लक्षण नहीं हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय गले को आराम देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यदि बुखार, तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत या लंबे समय तक लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। गला बैठ जाए तो क्या करें? अगर मौसम बदलने की वजह से गला बैठ गया है या हल्की खराश महसूस हो रही है, तो यह आसान घरेलू उपाय आजमा सकते हैं। आवश्यक सामग्री आधा कप गुनगुना पानी 1 छोटा चम्मच अदरक का रस 1 छोटा चम्मच नींबू का रस एक चुटकी नमक कैसे करें इस्तेमाल? सबसे पहले आधा कप गुनगुना पानी लें। इसमें अदरक का रस, नींबू का रस और एक चुटकी नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। जरूरत महसूस होने पर दिन में 1–2 बार इसका सेवन किया जा सकता है। इस घरेलू उपाय से क्या हो सकते हैं फायदे? गले की खराश कम करने में मदद मिल सकती है। गले की हल्की सूजन और दर्द से राहत मिल सकती है। गले को आराम मिल सकता है। आवाज बैठने की समस्या में सुधार हो सकता है। निगलने में होने वाली हल्की असुविधा कम हो सकती है। ध्यान रखें कि ये घरेलू उपाय सामान्य गले की परेशानी में सहायक हो सकते हैं। किसी गंभीर संक्रमण का इलाज नहीं हैं। गले को जल्दी ठीक रखने के लिए अपनाएं ये उपाय दिनभर गुनगुना पानी पिएं। बहुत ठंडी चीजें खाने-पीने से बचें। धूल, धुएं और प्रदूषण से दूरी बनाएं। पर्याप्त आराम करें। जरूरत पड़ने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करें। संतुलित आहार लें और विटामिन-C युक्त फलों को डाइट में शामिल करें। कब डॉक्टर से संपर्क करें? यदि गले का दर्द 3–5 दिन से अधिक बना रहे या इसके साथ तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, गले में अत्यधिक सूजन, खून आना या निगलने में गंभीर कठिनाई हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। स्वयं एंटीबायोटिक लेना सही विकल्प नहीं है। ध्यान रखें: बदलते मौसम में गले की हल्की समस्या को सही खानपान, पर्याप्त आराम और आसान घरेलू उपायों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। डिजिटल युग में मोबाइल फोन, लैपटॉप और इंटरनेट ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर भी डाल रहा है। लगातार स्क्रीन से जुड़े रहने, सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और ऑनलाइन काम के दबाव के कारण लोगों में डिजिटल स्ट्रेस तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर डिजिटल आदतों में संतुलन लाना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से मानसिक थकान, आंखों में तनाव, सिरदर्द, नींद की समस्या और एकाग्रता में कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं, मोबाइल पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, ईमेल और सोशल मीडिया अलर्ट दिमाग को लगातार सक्रिय रखते हैं, जिससे तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी डिजिटल स्ट्रेस का एक बड़ा कारण माना जाता है। दूसरों की जीवनशैली और उपलब्धियों से लगातार तुलना करने की प्रवृत्ति आत्मविश्वास में कमी, चिंता और असंतोष जैसी भावनाओं को जन्म दे सकती है। इसके अलावा, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन कार्य संस्कृति के कारण ऑफिस और निजी जीवन के बीच की दूरी कम हो गई है, जिससे लोग हर समय ऑनलाइन रहने का दबाव महसूस करते हैं। डिजिटल स्ट्रेस के सामान्य लक्षणों में बार-बार मोबाइल चेक करने की इच्छा, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद प्रभावित होना, मानसिक थकान और काम में रुचि कम होना शामिल हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम सीमित रखें, अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें, सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग करें और नियमित अंतराल पर डिजिटल ब्रेक लेकर मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ओमेगा-3 फैटी एसिड को अक्सर केवल हृदय और मस्तिष्क की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर के कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी बेहद जरूरी पोषक तत्व है। चूंकि शरीर इसे पर्याप्त मात्रा में स्वयं नहीं बना पाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन या सप्लीमेंट्स के माध्यम से करनी पड़ती है। इन खाद्य पदार्थों से मिल सकता है ओमेगा-3 मछली, अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स और कुछ वनस्पति तेल ओमेगा-3 के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। संतुलित आहार में इनका नियमित सेवन शरीर को आवश्यक फैटी एसिड उपलब्ध कराने में मदद करता है। हार्ट और ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद अध्ययनों के अनुसार ओमेगा-3 दिल की धड़कन को संतुलित रखने, खराब वसा (बैड फैट) को कम करने और मस्तिष्क की कोशिकाओं के बेहतर कार्य में मदद करता है। यह याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है। सूजन, जोड़ों और त्वचा को भी मिलता है लाभ विशेषज्ञों का कहना है कि ओमेगा-3 शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन (इंफ्लेमेशन) को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। इसके अलावा यह जोड़ों के दर्द और अकड़न में राहत पहुंचाने के साथ त्वचा की नमी बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत करने में भी सहायक होता है। संतुलित आहार पर दें ध्यान स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि ओमेगा-3 से भरपूर खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल करें। हालांकि, किसी भी प्रकार का सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।