राष्ट्रीय

DRDO ने ‘कुशा’ एयर डिफेंस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
DRDO Kusha Missile
DRDO Kusha Missile

नई दिल्ली, एजेंसियां। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Long Range Surface-to-Air Missile) ‘कुशा’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया, जिसमें मिसाइल ने एक उच्च गति और ऊंचाई वाले हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया।

 

हाई-स्पीड हवाई खतरे को रोकने में मिली सफलता

 

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली ने इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस परीक्षण में मिसाइल के साथ-साथ रडार, कमांड और कंट्रोल सिस्टम सहित पूरे हथियार तंत्र की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।

 

‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस सिस्टम की दिशा में बड़ा कदम

 

‘कुशा’ मिसाइल को भारत के भविष्य के स्वदेशी एयर डिफेंस शील्ड ‘सुदर्शन चक्र’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य देश को लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना है।

 

आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को बढ़ावा

 

DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग की ओर से विकसित यह प्रणाली भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारत की वायु रक्षा क्षमता मजबूत होगी और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और इससे जुड़े वैज्ञानिकों की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भरता और आधुनिक सुरक्षा जरूरतों की दिशा में बड़ा कदम है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

राष्ट्रीय

View more
CJP Press Conference
सरकार से बातचीत से पहले CJP करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस, आंदोलन की रणनीति पर देगी जानकारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) ने सरकार के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का फैसला किया है। संगठन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी मांगों, आंदोलन की मौजूदा स्थिति और सरकार के साथ होने वाली वार्ता को लेकर अपना पक्ष रखेगा।   बातचीत से पहले रखेगी अपना रुख   CJP नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत से पहले वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि आंदोलन किन मुद्दों को लेकर चल रहा है और उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं। इसमें परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों से जुड़े मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं।   सरकार के साथ वार्ता पर सबकी नजर   CJP और सरकार के बीच होने वाली बातचीत को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारी पक्ष का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी जब छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।   प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे की रणनीति का ऐलान संभव   माना जा रहा है कि CJP प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन जारी रखने या बातचीत के बाद आगे की रणनीति को लेकर जानकारी दे सकती है। सरकार की ओर से भी छात्रों की चिंताओं पर चर्चा की तैयारी की जा रही है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Jantar Mantar internet shutdown

जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई आज, याचिका पर कोर्ट की नजर

DRDO Kusha Missile

DRDO ने ‘कुशा’ एयर डिफेंस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया

Bikramjit Singh Arrest

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ी कार्रवाई, 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े वांछित आरोपी समेत अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार

Uttarakhand High Court
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 7 हजार पेड़ों की कटाई पर मांगा जवाब, सड़क परियोजना को लेकर पर्यावरण चिंता बढ़ी

नैनीताल, एजेंसियां। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सड़क परियोजना के लिए करीब 7,000 पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामला देहरादून के असारोड़ी-जाझरा क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क परियोजना से जुड़ा है, जहां बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की योजना का विरोध किया जा रहा है।   याचिका में पर्यावरण नुकसान का उठाया गया मुद्दा   याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ सकता है। याचिका में सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण के नियमों और वन कानूनों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।   विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर सुनवाई   अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी, पेड़ों की कटाई की अनुमति, पर्यावरणीय मंजूरी और उठाए गए संरक्षण उपायों पर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकारों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।   उत्तराखंड में पहले भी सड़क परियोजनाओं पर उठे सवाल   इससे पहले भी उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं को लेकर पेड़ों की कटाई का विरोध हुआ है। देहरादून-ऋषिकेश मार्ग चौड़ीकरण परियोजना में हजारों पेड़ों को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने कुछ हिस्सों में पेड़ कटाई रोकने का फैसला लिया था।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Narendra Modi

पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी, पीएम मोदी बोले- अगले सप्ताह संसद में लाया जाएगा नया विधेयक

Delhi Police

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, छात्र आंदोलन के बीच पाकिस्तान से जुड़े 480 सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद छात्रों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया

अभिजीत दीपके का नया संदेश, बोले- सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी

Sonam Wangchuk addresses supporters after ending his 26-day hunger strike over NEET reforms
अनशन खत्म करने के बाद बोले सोनम वांगचुक- 'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, अब जवाबदेही की बारी'

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों से जारी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुक्रवार (24 जुलाई) को समाप्त कर दी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनका अनशन भले खत्म हो गया हो, लेकिन जवाबदेही की लड़ाई अभी जारी रहेगी। वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही के मुद्दे पर चर्चा कराने का भरोसा दिया है। सरकार ने क्या आश्वासन दिया? सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार ने आश्वासन दिया है कि— परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही पर संसद में चर्चा होगी। कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। "अनशन खत्म हुआ, संघर्ष नहीं" वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा, "मैंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन अब असली काम जवाबदेही तय करने का है। सरकार से मिले आश्वासन के बाद मैंने यह फैसला लिया है। उम्मीद है कि भविष्य में NEET जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ियां रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।" देर रात हुई थी मंत्रियों से मुलाकात गुरुवार (23 जुलाई) देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। बैठक के दौरान सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। वांगचुक ने X पर लिखा कि उन्होंने जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया। पीएम मोदी ने की सेहत का ध्यान रखने की अपील सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि वांगचुक डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

Rahul Gandhi reacts to Prime Minister Narendra Modi's video message on the NEET paper leak controversy

पीएम मोदी के वीडियो संदेश से नहीं बदला राहुल गांधी का रुख, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करो

Security tightened near Jantar Mantar as CJP protest continues and several Delhi Metro stations remain closed

CJP Protest Live: 17 मेट्रो स्टेशन बंद, आज सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हो सकती है बातचीत

0 Comments

Top week

Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?