राष्ट्रीय

अभिजीत दीपके का नया संदेश, बोले- सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद छात्रों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
Abhijit Dipke On Sonam Wangchuk Fast Ending And Student Protest

नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

 

"विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे"

 

अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की।

 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP

 

दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है।

 

सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान

 

अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी।

 

CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके

 

अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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DRDO ने ‘कुशा’ एयर डिफेंस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली, एजेंसियां। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Long Range Surface-to-Air Missile) ‘कुशा’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया, जिसमें मिसाइल ने एक उच्च गति और ऊंचाई वाले हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया।   हाई-स्पीड हवाई खतरे को रोकने में मिली सफलता   रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली ने इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस परीक्षण में मिसाइल के साथ-साथ रडार, कमांड और कंट्रोल सिस्टम सहित पूरे हथियार तंत्र की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।   ‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस सिस्टम की दिशा में बड़ा कदम   ‘कुशा’ मिसाइल को भारत के भविष्य के स्वदेशी एयर डिफेंस शील्ड ‘सुदर्शन चक्र’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य देश को लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना है।   आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को बढ़ावा   DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग की ओर से विकसित यह प्रणाली भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारत की वायु रक्षा क्षमता मजबूत होगी और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और इससे जुड़े वैज्ञानिकों की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भरता और आधुनिक सुरक्षा जरूरतों की दिशा में बड़ा कदम है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। छात्र आंदोलन और नीट पेपर लीक विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से संचालित 480 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का आरोप है कि ये अकाउंट आंदोलन की आड़ में फर्जी खबरें, भ्रामक पोस्ट और एडिट किए गए वीडियो फैलाकर छात्रों और आम लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई हैंडल पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी दुष्प्रचार फैलाने में सक्रिय पाए गए थे।   फर्जी खबरों से दूर रहने की अपील   दिल्ली पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कई पोस्ट और वीडियो पूरी तरह भ्रामक हैं तथा इनका उद्देश्य आंदोलन को हिंसक दिशा देना और अफवाहें फैलाना है। पुलिस ने छात्रों और आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और उसे साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।   सुरक्षा एजेंसियां रख रही हैं कड़ी निगरानी   अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील हालात को देखते हुए सोशल मीडिया गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह की अफवाह, विदेशी दुष्प्रचार या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सुरक्षा एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और छात्रों को गुमराह होने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधी रात जारी वीडियो संदेश के बाद भी NEET पेपर लीक मामले पर सियासी घमासान थमता नहीं दिख रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों की सबसे बड़ी मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर कोई जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री के वीडियो को साझा करते हुए कहा कि छात्र लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, ऐसे में आधी रात को वीडियो जारी कर उनकी भावनाओं और समझदारी का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने रखीं तीन मांगें राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। सरकार छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनकी सरकार प्रश्नपत्र लीक के मामलों से निपटने के लिए सख्त कानून लाने जा रही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (24 जुलाई) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक के मसौदे पर चर्चा होगी और उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद अगले सप्ताह इसे संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और छात्रों का भरोसा कायम रहे। फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू होने का दावा अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे और अब इन अदालतों ने काम शुरू कर दिया है। उनका कहना था कि इससे दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मदद मिलेगी। NEET परीक्षा पर सरकार का पक्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने बताया कि आरोप सामने आने के बाद सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो, इसके लिए जल्द दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। प्रधानमंत्री के अनुसार, पुनः आयोजित NEET परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया और उसका परिणाम 19 जुलाई को जारी किया गया। मुद्दे पर जारी है सियासी टकराव प्रधानमंत्री के नए कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर कायम है। कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी है, जबकि सरकार का दावा है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।  

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