पटना, एजेंसियां। शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को बिहार बंद के दौरान छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज हो गया। विभिन्न छात्र संगठनों और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पटना सहित कई जिलों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ और सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इन मांगों को लेकर किया गया बिहार बंद प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। पटना समेत कई जिलों में प्रदर्शन बिहार बंद के दौरान पटना, आरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और अन्य जिलों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और कई स्थानों पर सड़क जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए और कई इलाकों में यातायात को डायवर्ट किया। सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील की प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म बिहार बंद और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होगी। इससे पहले हुई दो बैठकों में कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। इन मांगों पर बनी सिद्धांततः सहमति सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों की कुछ मांगों पर सिद्धांततः सहमति (In-Principle Approval) जताई है। इनमें प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों (FIR) की समीक्षा और उन्हें वापस लेने पर विचार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर चर्चा तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर संवाद जारी रखने का आश्वासन शामिल है। सरकार ने इन मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है। इस मांग पर अब भी नहीं बनी सहमति वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए, जबकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है और इस पर निर्णय के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। परीक्षा सुधारों पर रहेगा फोकस आज की बैठक में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक के नतीजों पर छात्रों की नजर देशभर के लाखों छात्र और अभ्यर्थी इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर भी सहमति बनती है, तो परीक्षा सुधारों और नई नीतियों को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहा विरोध अब राज्य के कई जिलों तक फैल गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है। 18 जिलों में पहुंचा आंदोलन, पुलिस की छुट्टियां रद्द छात्र आंदोलन के विस्तार को देखते हुए बिहार पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 18 जिलों में प्रदर्शन की गतिविधियां सामने आई हैं। पुलिस बल को 24 घंटे अलर्ट रहने और सोशल मीडिया पर नजर रखने को कहा गया है। पटना में प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस और छात्रों में टकराव राजधानी पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। दरभंगा में पथराव, पुलिस अधिकारियों को लगी चोट दरभंगा में छात्र प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना सामने आई। इस दौरान सिटी एसपी और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पटना में कई FIR दर्ज, छात्रों पर कार्रवाई शुरू प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में पटना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने कई थानों में FIR दर्ज की हैं और कुछ छात्र नेताओं समेत कई छात्रों को हिरासत में लिया गया है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर छात्र संगठनों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं सरकार की ओर से भी व्यवस्था सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी और फिल्म अभिनेत्री आकांक्षा पुरी ने छात्र आंदोलन और राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर बड़ा दावा किया है। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें भी कुछ राजनीतिक दलों की ओर से संपर्क किया गया और कलाकारों को आंदोलनों में शामिल होने के लिए पैसे ऑफर किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने ऐसे किसी भी अभियान का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। "मैं इस तरह के प्रचार का हिस्सा नहीं बनना चाहती" आकांक्षा पुरी ने कहा कि कई बार कलाकारों की लोकप्रियता का इस्तेमाल राजनीतिक अभियानों के लिए किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही, लेकिन उन्होंने इससे दूरी बनाए रखी। सोशल मीडिया पर बयान के बाद चर्चा तेज आकांक्षा पुरी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। उनके दावे ऐसे समय आए हैं जब दिल्ली समेत कई जगहों पर छात्र आंदोलन और राजनीतिक प्रदर्शन चर्चा में हैं। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने उनके दावों पर सवाल भी उठाए हैं। आकांक्षा पुरी टीवी और फिल्मों में सक्रिय आकांक्षा पुरी टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। वह कई टीवी शोज और रियलिटी कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। हाल के दिनों में वह मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी चर्चा में रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे" अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है। सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी। CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।
TV Stars on Student Protest: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित लाठीचार्ज और झड़प की घटना पर अब टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। Karan Kundrra, Asha Negi, Arjun Bijlani और Kishwer Merchant समेत कई सितारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की बात सुने जाने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कई कलाकारों ने हिंसा और टकराव पर चिंता भी जताई। आशा नेगी ने जताई चिंता अभिनेत्री आशा नेगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि परीक्षा से जुड़े विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करने के बाद उन्हें धमकियों और आपत्तिजनक संदेशों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपील की कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। करण कुंद्रा ने क्या कहा? अभिनेता करण कुंद्रा ने कहा कि किसी भी मुद्दे के कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्रों की मांग जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है, तो उस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने युवाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए गुमराह किया है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा हर युवा का अधिकार है और इसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। अर्जुन बिजलानी ने पारदर्शिता की मांग की अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें दुखद हैं। उनके मुताबिक ऐसे मामलों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकलना चाहिए। किश्वर मर्चेंट ने भी रखा पक्ष अभिनेत्री किश्वर मर्चेंट ने कहा कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के मुद्दे के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर छात्र और परिवार के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसमें जवाबदेही तथा पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के बाद उन्हें भी आलोचना और धमकियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जारी है बहस छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है। जहां कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं, वहीं अलग-अलग पक्षों की ओर से भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता और विरोध प्रदर्शन के तरीकों को लेकर चर्चा तेज बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज हंगामेदार रहने के आसार हैं। पहले दिन दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध के कारण बार-बार बाधित रही थी। आज केंद्र सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष NEET पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है। सरकार कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाएगी सरकार आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक समेत कई प्रस्तावित विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा अन्य लंबित विधेयकों पर भी चर्चा कराए जाने की संभावना है। विपक्ष की मांग— पहले अहम मुद्दों पर चर्चा हो विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे NEET पेपर लीक, अयोध्या मंदिर दान मामले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर पहले चर्चा चाहते हैं। इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बनाई गई है। पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते दोनों सदनों का कामकाज प्रभावित हुआ और कई निर्धारित कार्य पूरे नहीं हो सके। आज भी टकराव के आसार संसदीय कार्यमंत्री ने सभी दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए आज भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है।
देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने 25 जून को ‘छात्रों की गूंज’ नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत पार्टी के 28 वरिष्ठ नेता देश के अलग-अलग शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। कांग्रेस ने इस अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की है। शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस शुरू करने की कोशिश अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अभियान का उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाना है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों पर गंभीर चर्चा और नीतिगत बदलाव की जरूरत है। कांग्रेस के अनुसार, यह अभियान छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का प्रयास है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा क्षेत्र को प्रभावी दिशा देने में असफल रहे हैं। पार्टी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की शुरुआत जवाबदेही तय करने से होनी चाहिए और इसी कारण शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। केंद्र सरकार पर निजीकरण और केंद्रीकरण को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण, केंद्रीकरण और वैचारिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। कांग्रेस के अनुसार, देश के सामने केवल बेरोजगारी का संकट नहीं है, बल्कि युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। 28 शहरों में आयोजित होंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत देशभर के 28 शहरों में कांग्रेस नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी शिक्षा नीति, रोजगार, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखेगी। इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी कांग्रेस ने विभिन्न शहरों के लिए अपने नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। इसके तहत अहमदाबाद में सतेज पाटिल, बेंगलुरु में वर्षा गायकवाड़, भोपाल में इमरान मसूद, भुवनेश्वर में पवन खेड़ा, दिल्ली में गौरव गोगोई, चेन्नई में प्रियंक खड़गे, कोलकाता में सुप्रिया श्रीनेत और पुणे में कन्हैया कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अन्य शहरों में भी पार्टी के वरिष्ठ नेता अभियान का नेतृत्व करेंगे। छात्रों और नागरिकों से जुड़ने की कोशिश कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय संवाद शुरू करने का प्रयास है। पार्टी ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस चर्चा का हिस्सा बनने की अपील की है। कांग्रेस के अनुसार, एक आधुनिक, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को शिक्षा सुधार के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। युवाओं के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किसानों से भी समर्थन की अपील की और कहा कि छात्रों की लड़ाई अब देशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले रही है। अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहे हैं और अब उन्हें भी किसानों की एकजुटता और समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है। जंतर-मंतर पर रातभर डटे रहे प्रदर्शनकारी शनिवार को सैकड़ों युवा जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शाम पांच बजे प्रदर्शन की अनुमति समाप्त होने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से स्थल खाली करने को कहा, लेकिन अभिजीत दीपके और कई समर्थक रातभर धरने पर डटे रहे। दीपके ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की और नीट पुनर्परीक्षा देने वाले छात्रों से परीक्षा समाप्त होने के बाद आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। थाली-चम्मच बजाकर किया विरोध प्रदर्शन अभिजीत दीपके के ‘थाली और चम्मच’ लेकर आने के आह्वान पर बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चम्मचों से थालियां बजाकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग दीपके ने पेपर लीक और प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है और सरकार को उनकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। पुलिस से अलग प्रदर्शन स्थल की मांग दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के लिए दी गई अनुमति शनिवार शाम पांच बजे तक ही थी और प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। अभिजीत दीपके ने पुलिस से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर लोगों को जंतर-मंतर आने से न रोकने की अपील करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी केवल न्याय की मांग कर रहे हैं और किसी तरह की अव्यवस्था नहीं फैला रहे हैं। 'शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, बातचीत के लिए तैयार हैं' रातभर चले धरने के दौरान अभिजीत दीपके लगातार समर्थकों को संबोधित करते रहे और अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते रहे। उन्होंने कहा, "हमारा विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है। यदि जवाबदेही तय की जाती है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते हैं, तो सरकार के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं।" उन्होंने दोहराया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती।
नई दिल्ली: परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 13 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। परीक्षाओं में गड़बड़ी का लगाया आरोप बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) और सीयूईटी (CUET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है और सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। दीपके ने कहा कि युवा वर्ग अब अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है। 13 जून तक का समय, फिर शुरू होगा आंदोलन सीजेपी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को 13 जून तक इस्तीफा देने का समय दिया गया है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगा। दीपके ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत पुणे से की जाएगी, जहां 11 जून को शाम चार बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लखनऊ, अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। 20 जून को दिल्ली कूच की तैयारी संगठन ने 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो देशभर से छात्र और युवा दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करेंगे और छात्रों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील करेंगे। "एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित" अभिजीत दीपके ने दावा किया कि विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई समस्याओं के कारण एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है और संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र सीजेपी संस्थापक ने बताया कि 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस अल्टीमेटम और आंदोलन की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, संगठन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर जाने-माने कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए कहा कि विदेशों में बैठे कुछ लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्रभाव के जरिए भारत की दिशा प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। नैनीताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कहा कि कुछ लोग विदेशों में रहकर ऑनलाइन अभियानों और सोशल मीडिया समर्थन के सहारे देश के युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों की राह पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि देश के युवाओं को अपने विवेक और संस्कारों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्रों, युवाओं और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन में कई लोग कॉकरोच के मुखौटे पहनकर पहुंचे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तथा जवाबदेही की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन सफल रहा और इसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। दीपके ने कहा कि अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। देशव्यापी अभियान की तैयारी प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि संगठन आने वाले दिनों में देशभर में अभियान चलाएगा। उनके अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विभिन्न राज्यों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किन मुद्दों को उठा रही है CJP? कॉकरोच जनता पार्टी खुद को युवाओं के नेतृत्व वाला ऑनलाइन और सामाजिक आंदोलन बताती है। संगठन विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन प्रक्रिया और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है। इस अभियान में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी हुए शामिल जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न छात्र संगठनों, युवा समूहों और वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और पुलिस की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है, वहीं अब राजस्थान से सामने आए एक नए खुलासे ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। जांच में एक ऐसा “गेस पेपर” सामने आया है, जिसके करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। राजस्थान SOG को छात्रों के मोबाइल में मिला PDF Rajasthan Special Operations Group (SOG) की जांच के दौरान कुछ छात्रों के मोबाइल फोन से एक PDF दस्तावेज बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि यह करीब 150 पेज का दस्तावेज था, जिसमें 400 से ज्यादा सवाल शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस PDF में कुल करीब 410 सवाल थे और इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे NEET UG 2026 परीक्षा में देखने को मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह PDF परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही WhatsApp के जरिए शेयर किया जा रहा था। आखिर इतने सवाल कैसे हुए मैच? आमतौर पर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन यहां मामला अलग बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर सवालों का मेल होना संदेह पैदा करता है। इसी वजह से अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह सिर्फ गेस पेपर था या फिर किसी संगठित नेटवर्क के जरिए असली प्रश्नपत्र से जुड़े इनपुट पहले ही लीक किए गए थे। ADGP विशाल बंसल ने क्या कहा? Vishal Bansal ने कहा कि मामला सामान्य पेपर लीक जैसा नहीं दिख रहा है। उनके मुताबिक आमतौर पर पेपर लीक करने वाले लोग प्रश्नों को सीमित लोगों तक रखते हैं ताकि आर्थिक फायदा उठाया जा सके, लेकिन इस मामले में सवालों वाला PDF बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुका था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। NTA ने रद्द की परीक्षा विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा भी कर दी गई है। केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। सुरक्षा के बावजूद कैसे हुआ लीक? NTA का दावा है कि परीक्षा के दौरान हाई-लेवल सिक्योरिटी का इस्तेमाल किया गया था। इसमें GPS ट्रैकिंग, AI आधारित CCTV निगरानी और बायोमेट्रिक जांच जैसी तकनीकों को शामिल किया गया था। इसके बावजूद सवालों के कथित लीक और गेस पेपर से बड़े स्तर पर मैच होने के बाद एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा में चूक आखिर कहां हुई।
सत्ता में आते ही घिरी सरकार Balen Shah की सरकार को पद संभाले अभी कुछ ही हफ्ते हुए हैं, लेकिन देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। राजधानी Kathmandu समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी छात्र, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हैं, जो सरकार के कई फैसलों का विरोध कर रहे हैं। भारत से आने वाले सामान पर टैक्स बना मुद्दा विरोध की बड़ी वजह सरकार का वह फैसला है, जिसमें भारत से 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगाने का नियम लागू किया गया है। सीमावर्ती इलाकों के लोगों का कहना है कि वे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर हैं और यह फैसला उनके जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। छात्र संघ पर रोक से युवाओं में नाराजगी सरकार द्वारा छात्र संगठनों को खत्म या नजरअंदाज करने के फैसले ने युवाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार संवाद करने के बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है। हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें स्कूल और कॉलेज के छात्र बड़ी संख्या में शामिल हैं। गृह मंत्री के खिलाफ भी प्रदर्शन विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा कारण गृह मंत्री Sudan Gurung के खिलाफ लगे आरोप भी हैं। उन पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष और नागरिक समूह उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। बढ़ता दबाव, सरकार के लिए चुनौती लगातार बढ़ते विरोध के बीच बालेन शाह सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आर्थिक नीतियों, छात्र असंतोष और राजनीतिक आरोपों के चलते यह विरोध अब एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और कदम अहम होंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।