बिहार

बिहार बंद के दौरान शिक्षा सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Bihar Band
Bihar Band News

पटना, एजेंसियां। शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को बिहार बंद के दौरान छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज हो गया। विभिन्न छात्र संगठनों और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पटना सहित कई जिलों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ और सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

 

इन मांगों को लेकर किया गया बिहार बंद

 

प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

 

पटना समेत कई जिलों में प्रदर्शन

 

बिहार बंद के दौरान पटना, आरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और अन्य जिलों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और कई स्थानों पर सड़क जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए और कई इलाकों में यातायात को डायवर्ट किया।

 

सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील की

 

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।

 

राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म

 

बिहार बंद और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में छाया फैंसी नंबर प्लेट का क्रेज, 5 साल में 37 हजार लोगों ने पसंदीदा नंबरों के लिए खर्च किए करोड़ों रुपये

पटना, एजेंसियां। बिहार में वाहनों के लिए फैंसी और वीआईपी नंबर प्लेट का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपने वाहन के लिए मनपसंद नंबर हासिल करने के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में करीब 37 हजार वाहन मालिकों ने फैंसी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया है।   0001, 0007, 0786 जैसे नंबरों की सबसे ज्यादा मांग   वाहन मालिकों में खास नंबरों को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह देखा जा रहा है। 0001, 0007, 9999, 0786 जैसे नंबरों को लोग स्टेटस सिंबल और शुभ अंक के तौर पर पसंद कर रहे हैं। इन नंबरों के लिए लोग ऑनलाइन बोली (ई-ऑक्शन) के जरिए अधिक कीमत तक देने को तैयार रहते हैं।   फैंसी नंबरों से सरकार को करोड़ों का राजस्व   बिहार परिवहन विभाग के लिए फैंसी नंबर प्लेट अब राजस्व का भी बड़ा स्रोत बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पसंदीदा नंबरों की नीलामी से सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।   पटना में सबसे ज्यादा डिमांड   फैंसी नंबरों की मांग राज्य के बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। खासकर पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे जिलों में वाहन मालिक वीआईपी नंबरों के लिए अधिक रुचि दिखा रहे हैं।   ई-ऑक्शन से मिलता है पसंदीदा नंबर   परिवहन विभाग ने फैंसी नंबर आवंटन की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। वाहन मालिक परिवहन विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध नंबरों के लिए आवेदन करते हैं। अगर किसी नंबर के लिए एक से ज्यादा दावेदार होते हैं तो उसे ऑनलाइन बोली के माध्यम से दिया जाता है।   नंबर प्लेट अब पहचान और प्रतिष्ठा का हिस्सा   पहले जहां नंबर प्लेट सिर्फ वाहन की पहचान होती थी, वहीं अब कई लोग इसे अपनी व्यक्तिगत पहचान, जन्म तारीख, भाग्य अंक या प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं। इसी वजह से महंगे वाहनों के साथ आकर्षक नंबर लेने का चलन बढ़ रहा है।

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बिहार के हर पंचायत में बनेगा हाट, प्रखंड और जिला स्तर पर खुलेंगे मार्ट; ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए बड़ी योजना का ऐलान किया है। इसके तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जबकि प्रखंड और जिला स्तर पर हाट-मार्ट स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य गांव के उत्पादों को स्थानीय बाजार से जोड़ना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।   जीविका दीदियों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार   ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इन हाट और मार्ट में जीविका समूहों से जुड़े उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।   किसानों और छोटे कारोबारियों को होगा फायदा   सरकार की योजना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले हाट में किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध कराया जाए। इससे गांव के लोगों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी।   स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर   सरकार का मानना है कि पंचायत स्तर पर बाजार विकसित होने से परिवहन खर्च कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, घरेलू उद्योग और महिला समूहों के बनाए सामान को बढ़ावा मिलेगा।   पर्यटन स्थलों पर भी जीविका उत्पादों की बिक्री की तैयारी   योजना के तहत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की तैयारी है। इससे स्थानीय उत्पादों को राज्य के बाहर और पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।   ग्रामीण बाजार को आधुनिक बनाने की पहल   बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। पंचायतों में हाट और प्रखंड स्तर पर मार्ट बनने से गांवों में खरीद-बिक्री की सुविधा बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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RJD ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बोले- युवाओं को चाहिए रोजगार और बेहतर शिक्षा व्यवस्था

पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार पर युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की जरूरत है। RJD ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय केवल राजनीतिक दावों तक सीमित है।   रोजगार और परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल   RJD नेताओं ने कहा कि देश में बेरोजगारी युवाओं की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। उन्होंने सरकारी नौकरियों में देरी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा।   पार्टी का कहना है कि युवाओं को समय पर रोजगार मिले और परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।   NEET और छात्र मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला   NEET परीक्षा विवाद और छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए RJD ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से मेहनत करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।   RJD ने मांग की कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुने और उनके साथ संवाद करे।   बिहार में भी रोजगार बना बड़ा चुनावी मुद्दा   बिहार की राजनीति में रोजगार और शिक्षा लंबे समय से प्रमुख मुद्दे रहे हैं। RJD लगातार युवाओं, नौकरी और पलायन के मुद्दे को उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी खत्म करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना चाहिए।   सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी   RJD के बयान के बाद बिहार में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दलों का कहना है कि केंद्र सरकार ने रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की हैं, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इन योजनाओं का लाभ युवाओं तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा।   युवाओं से जुड़े रोजगार और शिक्षा के मुद्दे आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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