मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी कलाकार शेखर सुमन ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई की तस्वीरों और वीडियो ने उन्हें काफी परेशान किया और वह पूरी रात सो नहीं पाए। शेखर सुमन ने छात्रों की मांगों और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
शेखर सुमन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखकर वह काफी दुखी हुए। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को सुनना चाहिए।
अभिनेता ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने हिंसा का समर्थन नहीं किया, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार की जरूरत बताई।
शेखर सुमन ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं को समझना और उनकी समस्याओं का जवाब देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आंदोलन की स्थिति पैदा न हो और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाई जा सके।
शेखर सुमन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने छात्रों के समर्थन में उनकी बातों की सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को जरूरी बताया। अभिनेता पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, बल्कि छात्रों के साथ व्यवहार और संवाद की जरूरत पर जोर दिया।
शेखर सुमन लंबे समय से मनोरंजन जगत से जुड़े हैं और कई मौकों पर सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। अभिनय के अलावा वह टीवी होस्ट और सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में भी पहचाने जाते हैं। छात्र आंदोलनों और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच शेखर सुमन का यह बयान चर्चा में आ गया है। वहीं, प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी के सबसे लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) सीजन 18 को लेकर दर्शकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर शो की मेजबानी करते नजर आएंगे। शो का प्रीमियर 10 अगस्त 2026 को होने जा रहा है। इसका प्रसारण सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और SonyLIV पर किया जाएगा। 10 अगस्त से शुरू होगा KBC 18, अमिताभ बच्चन फिर संभालेंगे हॉट सीट ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के नए सीजन की घोषणा के बाद से ही फैंस में उत्साह बना हुआ था। अब मेकर्स ने शो की रिलीज तारीख की पुष्टि कर दी है। इस बार भी अमिताभ बच्चन अपने खास अंदाज, सवाल पूछने की शैली और प्रतिभागियों से बातचीत के लिए दर्शकों के सामने होंगे। शो की शूटिंग की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नए सीजन की शूटिंग के लिए मुंबई के फिल्म सिटी में नया सेट तैयार किया गया है और शूटिंग अगस्त की शुरुआत से शुरू होने की योजना है। नए सीजन में देखने को मिल सकते हैं नए बदलाव KBC 18 को लेकर जारी प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने संकेत दिए हैं कि इस बार शो के फॉर्मेट में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए सीजन की थीम “Knowing the Answers Won’t Be Enough” रखी गई है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि प्रतियोगियों को केवल जानकारी ही नहीं बल्कि सोचने और रणनीति बनाने की क्षमता भी दिखानी होगी। आज के डिजिटल दौर में जहां इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए जवाब आसानी से मिल जाते हैं, ऐसे में शो का नया फॉर्मेट प्रतिभागियों की समझ और निर्णय लेने की क्षमता को भी परख सकता है। अमिताभ बच्चन और KBC का रिश्ता रहा है खास साल 2000 में शुरू हुआ ‘कौन बनेगा करोड़पति’ भारतीय टेलीविजन के सबसे सफल शो में शामिल रहा है। अमिताभ बच्चन की आवाज, उनका अंदाज और प्रतियोगियों के साथ उनका जुड़ाव शो की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है। KBC ने देशभर के आम लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने और करोड़पति बनने का मौका दिया है। हर सीजन में लाखों दर्शक शो से जुड़ते हैं और हॉट सीट पर बैठने वाले प्रतियोगियों की कहानियां लोगों को प्रेरित करती हैं। फैंस को नए सीजन का बेसब्री से इंतजार KBC 18 की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अपनी खुशी जाहिर की है। दर्शक एक बार फिर अमिताभ बच्चन के साथ ज्ञान, मनोरंजन और रोमांच से भरे सफर का इंतजार कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि नए सीजन में कौन-कौन से बदलाव किए जाएंगे और इस बार कौन-से प्रतियोगी हॉट सीट तक पहुंचकर करोड़पति बनने का सपना पूरा करेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी कलाकार शेखर सुमन ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई की तस्वीरों और वीडियो ने उन्हें काफी परेशान किया और वह पूरी रात सो नहीं पाए। शेखर सुमन ने छात्रों की मांगों और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। छात्रों पर कार्रवाई की तस्वीरों से हुए भावुक शेखर सुमन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखकर वह काफी दुखी हुए। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को सुनना चाहिए। अभिनेता ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने हिंसा का समर्थन नहीं किया, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार की जरूरत बताई। बोले- छात्रों की समस्याओं पर होनी चाहिए बातचीत शेखर सुमन ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं को समझना और उनकी समस्याओं का जवाब देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आंदोलन की स्थिति पैदा न हो और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाई जा सके। सोशल मीडिया पर मिला समर्थन और प्रतिक्रियाएं शेखर सुमन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने छात्रों के समर्थन में उनकी बातों की सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को जरूरी बताया। अभिनेता पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, बल्कि छात्रों के साथ व्यवहार और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। शेखर सुमन का लंबा रहा है सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव शेखर सुमन लंबे समय से मनोरंजन जगत से जुड़े हैं और कई मौकों पर सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। अभिनय के अलावा वह टीवी होस्ट और सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में भी पहचाने जाते हैं। छात्र आंदोलनों और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच शेखर सुमन का यह बयान चर्चा में आ गया है। वहीं, प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने CJP (Cockroach Janta Party) से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पेपर लीक विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सलमान खान ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के संघर्ष की सराहना की और कहा कि युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने और छात्रों से अपने परिवारों के पास लौटने की अपील की। सलमान ने छात्रों के साहस की तारीफ की सलमान खान ने अपने संदेश में प्रदर्शन में शामिल छात्रों की हिम्मत और एकजुटता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं गंभीर मुद्दा हैं और युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील सलमान खान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में वांगचुक से कहा कि अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान की दिशा में बढ़ना चाहिए। "छात्र अपने घर लौटें" संदेश अभिनेता ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से भी अपील की कि वे अपने परिवारों के पास लौटें और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया को मौका दें। सलमान ने छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही। सलमान के बयान पर सोशल मीडिया में चर्चा सलमान खान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके छात्रों के समर्थन वाले रुख की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनके संदेश को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।