बिहार

बिहार के हर पंचायत में बनेगा हाट, प्रखंड और जिला स्तर पर खुलेंगे मार्ट; ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Shravan Kumar
Shravan Kumar statement in Vidhan Sabha

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए बड़ी योजना का ऐलान किया है। इसके तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जबकि प्रखंड और जिला स्तर पर हाट-मार्ट स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य गांव के उत्पादों को स्थानीय बाजार से जोड़ना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

 

जीविका दीदियों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

 

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इन हाट और मार्ट में जीविका समूहों से जुड़े उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

किसानों और छोटे कारोबारियों को होगा फायदा

 

सरकार की योजना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले हाट में किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध कराया जाए। इससे गांव के लोगों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी।

 

स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर

 

सरकार का मानना है कि पंचायत स्तर पर बाजार विकसित होने से परिवहन खर्च कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, घरेलू उद्योग और महिला समूहों के बनाए सामान को बढ़ावा मिलेगा।

 

पर्यटन स्थलों पर भी जीविका उत्पादों की बिक्री की तैयारी

 

योजना के तहत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की तैयारी है। इससे स्थानीय उत्पादों को राज्य के बाहर और पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

 

ग्रामीण बाजार को आधुनिक बनाने की पहल

 

बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। पंचायतों में हाट और प्रखंड स्तर पर मार्ट बनने से गांवों में खरीद-बिक्री की सुविधा बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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बिहार में छात्र आंदोलन तेज, 18 जिलों तक पहुंचा प्रदर्शन; पुलिस हाई अलर्ट पर

पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहा विरोध अब राज्य के कई जिलों तक फैल गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है।   18 जिलों में पहुंचा आंदोलन, पुलिस की छुट्टियां रद्द   छात्र आंदोलन के विस्तार को देखते हुए बिहार पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 18 जिलों में प्रदर्शन की गतिविधियां सामने आई हैं। पुलिस बल को 24 घंटे अलर्ट रहने और सोशल मीडिया पर नजर रखने को कहा गया है।   पटना में प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस और छात्रों में टकराव   राजधानी पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की।   दरभंगा में पथराव, पुलिस अधिकारियों को लगी चोट   दरभंगा में छात्र प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना सामने आई। इस दौरान सिटी एसपी और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।   पटना में कई FIR दर्ज, छात्रों पर कार्रवाई शुरू   प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में पटना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने कई थानों में FIR दर्ज की हैं और कुछ छात्र नेताओं समेत कई छात्रों को हिरासत में लिया गया है।   सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर   छात्र संगठनों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं सरकार की ओर से भी व्यवस्था सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

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बिहार पुलिस-SBI का साइबर सुरक्षा अभियान, ऑनलाइन ठगी से बचाव पर जोर

पटना, एजेंसियां। बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने और लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए बिहार पुलिस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मिलकर एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत आम लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फर्जी कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग ठगी और साइबर अपराध से बचने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।   लोगों को साइबर ठगी के तरीकों से किया जाएगा जागरूक   अभियान के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि साइबर अपराधी किस तरह फर्जी लिंक, OTP, बैंक अधिकारी बनकर कॉल और सोशल मीडिया के जरिए ठगी करते हैं। पुलिस और बैंक की टीमें लोगों को सावधानी बरतने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करने के लिए प्रेरित करेंगी।   बैंकिंग फ्रॉड रोकने पर विशेष ध्यान   बिहार में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। SBI के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य बैंक ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए प्रशिक्षित करना है।   लोगों को सलाह दी जाएगी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक डिटेल, ATM पिन, OTP या पासवर्ड साझा न करें।   पुलिस और बैंक मिलकर करेंगे काम   इस अभियान में बिहार पुलिस की साइबर सेल और SBI के अधिकारी मिलकर काम करेंगे। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूल, कॉलेज, ग्रामीण क्षेत्रों और आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जाएगी।   पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है।   साइबर अपराध की शिकायत के लिए अपील   बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर वे किसी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।   डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में यह अभियान लोगों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने और साइबर अपराधों से बचने में मदद करेगा।

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सुधीर शर्मा की भाजपा में वापसी जनसुराज को झटका
सुधीर शर्मा की BJP में वापसी, प्रशांत किशोर की जनसुराज को बड़ा झटका

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जनसुराज से जुड़े रहे सुधीर शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में वापसी कर ली है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की राजनीतिक हलचल के बीच सुधीर शर्मा का बीजेपी में शामिल होना प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के लिए झटका माना जा रहा है।   पहले BJP में रह चुके हैं सुधीर शर्मा   सुधीर शर्मा इससे पहले भी बीजेपी से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने प्रशांत किशोर के अभियान जनसुराज का साथ दिया और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। अब दोबारा बीजेपी में लौटने से बिहार की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है।   बांकीपुर उपचुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल   बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बिहार में पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। सुधीर शर्मा की वापसी को बीजेपी के लिए संगठन मजबूत करने और जनसुराज को कमजोर करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।   जनसुराज के लिए माना जा रहा बड़ा झटका   प्रशांत किशोर बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में उनके साथ रहे नेता का बीजेपी में जाना जनसुराज के लिए चुनौती माना जा रहा है।   बिहार की राजनीति में नए समीकरण की चर्चा   सुधीर शर्मा की वापसी के बाद बीजेपी, जनसुराज और अन्य दलों की रणनीति पर नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इसका असर बांकीपुर उपचुनाव और राज्य की राजनीति पर कितना पड़ता है।

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