Bihar Government

Shravan Kumar
बिहार के हर पंचायत में बनेगा हाट, प्रखंड और जिला स्तर पर खुलेंगे मार्ट; ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए बड़ी योजना का ऐलान किया है। इसके तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जबकि प्रखंड और जिला स्तर पर हाट-मार्ट स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य गांव के उत्पादों को स्थानीय बाजार से जोड़ना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।   जीविका दीदियों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार   ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इन हाट और मार्ट में जीविका समूहों से जुड़े उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।   किसानों और छोटे कारोबारियों को होगा फायदा   सरकार की योजना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले हाट में किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध कराया जाए। इससे गांव के लोगों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी।   स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर   सरकार का मानना है कि पंचायत स्तर पर बाजार विकसित होने से परिवहन खर्च कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, घरेलू उद्योग और महिला समूहों के बनाए सामान को बढ़ावा मिलेगा।   पर्यटन स्थलों पर भी जीविका उत्पादों की बिक्री की तैयारी   योजना के तहत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की तैयारी है। इससे स्थानीय उत्पादों को राज्य के बाहर और पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।   ग्रामीण बाजार को आधुनिक बनाने की पहल   बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। पंचायतों में हाट और प्रखंड स्तर पर मार्ट बनने से गांवों में खरीद-बिक्री की सुविधा बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Bihar Monsoon Session
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, अनुपूरक बजट के साथ 13 विधेयक पेश करेगी सरकार

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के इस पहले मानसून सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा सदन में 13 महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी है, जिनमें शिक्षा और भूमि प्रशासन से जुड़े बदलाव प्रमुख हैं।   पांच दिनों तक चलेगा मानसून सत्र   बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा। सत्र के दौरान सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।   13 विधेयकों में शिक्षा और जमीन से जुड़े प्रस्ताव शामिल   सरकार इस सत्र में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) समेत 13 विधेयक पेश करेगी। इनमें शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और जमीन से जुड़े नियमों में संशोधन वाले प्रस्ताव शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए राज्य में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।   अनुपूरक बजट पर होगी चर्चा   सत्र के पहले दिन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। इसके बाद बजट पर चर्चा और विभागवार मांगों पर विचार किया जाएगा।   विपक्ष ने भी तैयार की रणनीति   मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद इसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, आर्थिक स्थिति और अन्य मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी की है। वहीं, सरकार ने अपने विधायी कामकाज को पूरा कराने की रणनीति बनाई है।   सुरक्षा व्यवस्था कड़ी   विधानसभा सत्र को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। विधानसभा और सचिवालय क्षेत्र के आसपास विशेष इंतजाम किए गए हैं तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Anand Mohan
आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।   बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती   आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद समय से पहले रिहा किया गया था। इस रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिहाई की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए कई सवाल   सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान रिमिशन (सजा में छूट) प्रक्रिया, जेल नियमों में बदलाव और रिहाई के आधार को लेकर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लोक सेवक की हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय से पहले रिहाई देने के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।   क्या है पूरा मामला?   1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया, जिसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।   अब फैसले का इंतजार   अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। यदि अदालत बिहार सरकार के रिहाई आदेश को बरकरार रखती है तो आनंद मोहन की रिहाई जारी रहेगी, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
US President Donald Trump meeting Iraqi Prime Minister Ali Al-Zaidi at the White House
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप से मिले इराकी पीएम अली अल-जैदी, कूटनीतिक संतुलन पर टिकी नजर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का अमेरिका दौरा चर्चा का विषय बन गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद जैदी ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए इसे इराक की संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दबाव के बावजूद अमेरिका पहुंचे? मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इराकी प्रधानमंत्री और उनकी टीम से अमेरिका की यात्रा टालने का आग्रह किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, जैदी ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए वाशिंगटन जाने का फैसला बरकरार रखा। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इराक की स्वतंत्र विदेश नीति और "इराक फर्स्ट" दृष्टिकोण का संकेत बताया है। ट्रंप ने की इराकी प्रधानमंत्री की सराहना ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी का स्वागत करते हुए उनकी प्रशंसा की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनके सम्मान में आधिकारिक लंच का भी आयोजन किया। आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर रही चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान से जुड़े विवादों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और इराक से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में बगदाद के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इराक ने ईरान से दूरी बना ली है। फिलहाल इराक दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Samrat Chaudhary
बिहार के 97.84 लाख पेंशनधारियों को बड़ी राहत, खातों में पहुंचे 1100-1100 रुपये

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत राज्य के 97.84 लाख लाभार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनके बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की पेंशन राशि हस्तांतरित कर दी है। इस योजना का लाभ वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को मिला है। सरकार का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार देने का प्रयास किया जा रहा है।   मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी पेंशन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।   अब हर महीने 10 तारीख तक मिलेगी पेंशन सरकार ने पेंशन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के खातों में हर महीने की 10 तारीख तक राशि भेजने की व्यवस्था की गई है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकेगी और उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   400 रुपये से बढ़कर हुई 1100 रुपये पेंशन राज्य सरकार ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में बड़ा इजाफा किया है। पहले लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 1100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई राशि महंगाई के दौर में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी।   छूटे हुए पात्र लोगों को भी मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पात्र लोग अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी जल्द शामिल किया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और सभी जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचे।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Bihar Cabinet
बिहार कैबिनेट की आज अहम बैठक, कई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार की कैबिनेट की अहम बैठक आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने की संभावना है। बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न विभागों ने अपने प्रस्ताव कैबिनेट सचिवालय को भेज दिए हैं और अंतिम मंजूरी के बाद इन पर निर्णय लिया जाएगा।   इन प्रस्तावों पर रह सकती है नजर   सूत्रों के मुताबिक बैठक में नई विकास योजनाओं, विभिन्न विभागों में पदों के सृजन, सड़क और पुल परियोजनाओं, शहरी विकास, शिक्षा संस्थानों के विस्तार तथा वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। सरकार कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों और नई नीतियों पर भी फैसला ले सकती है।   बैठक के बाद जारी होंगे आधिकारिक फैसले   कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद सरकार आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी देगी। फिलहाल एजेंडे की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही स्पष्ट होंगे।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Bihar MLAs Orientation Program
गया में 11 जुलाई से शुरू होगा बिहार के विधायकों का विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए 11 और 12 जुलाई को गया स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (BIPARD) परिसर में दो दिवसीय विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को संसदीय परंपराओं, सदन की कार्यवाही, विधायी प्रक्रियाओं और जनप्रतिनिधि के दायित्वों की जानकारी देना है।   लोकसभा अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता होंगे शामिल   कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में लोकसभा सचिवालय के PRIDE (Parliamentary Research and Training Institute for Democracies) के विशेषज्ञ विधायकों को प्रशिक्षण देंगे।   तैयारियों की हुई समीक्षा   बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में आवास, सुरक्षा, भोजन, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। यह कार्यक्रम बिहार विधानसभा सचिवालय, PRIDE और BIPARD के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Lalu Yadav Rabari Devi
लालू-राबड़ी को फिर मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ियां

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर अपना पहले का फैसला बदलते हुए दोनों की Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी दोबारा उपलब्ध करा दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले बंगला विवाद के दौरान दोनों की सुरक्षा घटा दी गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी थी।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलेगी। इस श्रेणी में लगभग 22 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें घर की सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड, 24 घंटे तैनात रहने वाले पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), सुरक्षा वाहनों का काफिला और एक बुलेटप्रूफ कार शामिल होती है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों से वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।   क्या है मामला ? दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इसके बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। हालांकि, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था।   सुरक्षा में कटौती के फैसले के विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरLकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा लौटा दी थी। बाद में तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बयानबाजी और विवाद देखने को मिला था।   अब बिहार सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को फिर से Z श्रेणी सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा मिल गई है। इसे राज्य सरकार के बदले हुए रुख के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Bihar Teacher Transfer Policy
बिहार के लाखों शिक्षकों को बड़ी राहत, नई ट्रांसफर नीति को मिली मंजूरी

पटना, एजेंसियां।  बिहार सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए नई स्थानांतरण (ट्रांसफर) नीति को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्यभर के बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई नीति के तहत पारदर्शी और ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से तबादले किए जाएंगे, जिससे लंबे समय से लंबित मांग पूरी हो सकेगी।   कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला   राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षक स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षकों को पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार स्थानांतरण का अवसर मिलेगा तथा स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता का बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा।   ऑनलाइन प्रक्रिया होगी लागू   नई व्यवस्था के तहत आवेदन और स्थानांतरण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।   शिक्षकों में खुशी का माहौल   लंबे समय से शिक्षक संगठन स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी का माहौल है और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।   शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा लाभ   विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति से स्कूलों में शिक्षकों का बेहतर वितरण होगा और छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित करने में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Lalu Prasad Yadav Rabari Devi
राबड़ी देवी ने बंगला खाली करने के लिए मांगी मोहलत, लालू प्रसाद की सेहत का दिया हवाला

पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकारी बंगला खाली करने के लिए बिहार सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी 15 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर बंगला तुरंत खाली न कर पाने की वजह बताई है। पत्र में उन्होंने लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए विशेष व्यवस्था किए जाने तक मौजूदा आवास में रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।   राबड़ी देवी ने अपने पत्र में क्या कहा?  राबड़ी देवी ने अपने पत्र में कहा कि डॉक्टरों ने लालू प्रसाद को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसी कारण वर्तमान सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड में उनके लिए अलग से विशेष कमरा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि नए आवंटित सरकारी आवास, 39 हार्डिंग रोड, में भी इसी प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि जैसे ही नए बंगले का मरम्मत और आवश्यक रिनोवेशन कार्य पूरा हो जाएगा तथा लालू प्रसाद के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी, परिवार नए आवास में स्थानांतरित हो जाएगा।   कौटिल्य नगर वाले बंगले में थी शिफ्ट होने की चर्चा इससे पहले भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज रही। हाल ही में सांसद मीसा भारती ने कहा था कि लालू परिवार सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए बंगला खाली कर देगा। उधर, राबड़ी देवी ने हाल के दिनों में कौटिल्य नगर स्थित एक सरकारी बंगले का निरीक्षण भी किया था, जिससे उनके वहां शिफ्ट होने की अटकलें तेज हो गई थीं। अब सबकी नजर बिहार सरकार के अगले फैसले पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राबड़ी देवी के अनुरोध पर क्या निर्णय लेती है और लालू परिवार आखिर कब नए आवास में शिफ्ट होता है।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Lalu Rabari Tejashwi Security
लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटी, तेज प्रताप को सिर्फ एक बॉडीगार्ड; तेजस्वी का Y+ कवर बरकरार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद जारी आदेश के अनुसार दोनों नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था मिलती रहेगी। नई सुरक्षा व्यवस्था में क्या मिलेगा? सरकार के नए आदेश के मुताबिक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 2 से 8 जवान हाउस गार्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा पटना जिला बल के दो बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ वाहन, एचक्यूआरटी पायलट और पुलिस एस्कॉर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी। राबड़ी देवी की सुरक्षा में महिला अंगरक्षक की तैनाती भी बनी रहेगी। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह बरकरार रखी गई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के चार जवान, पटना जिला बल के छह बॉडीगार्ड, वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब तक उन्हें A श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश के बाद उनकी श्रेणी समाप्त कर दी गई है। अब उनकी सुरक्षा के लिए केवल एक व्यक्तिगत अंगरक्षक तैनात रहेगा। परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा यथावत राज्य सुरक्षा समिति के आदेश के अनुसार लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती को तीन अंगरक्षक और राजश्री यादव को एक अंगरक्षक की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Rabri Devi Notice
राबड़ी देवी को फिर मिला नोटिस, 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का निर्देश

पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को एक बार फिर पटना स्थित सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। भवन निर्माण विभाग ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि उन्हें आवंटित नया सरकारी आवास ग्रहण कर पुराने बंगले को तत्काल खाली करना होगा। फिलहाल राबड़ी देवी अपने परिवार के साथ बिहार से बाहर हैं, जहां वह अपने पोते का जन्मदिन मनाने गई हैं।   मंत्री नंदकिशोर राम को मिला आवास सरकारी आदेश के अनुसार, पटना केंद्रीय पूल के अंतर्गत आने वाला 10, सर्कुलर रोड अब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। इस संबंध में विभाग ने 27 मई 2026 को आधिकारिक पत्र जारी किया था। हालांकि, बंगला अभी तक खाली नहीं होने के कारण नए आवंटन पर अमल नहीं हो पाया है।   पहले भी जारी हो चुका है आदेश विभाग ने बताया कि 25 नवंबर 2025 को ही राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुरूप 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बाद कई बार उन्हें पुराने आवास को खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक उन्होंने 10, सर्कुलर रोड का कब्जा नहीं छोड़ा है। ताजा नोटिस में विभाग ने दोबारा निर्देश दिया है कि राबड़ी देवी जल्द से जल्द हार्डिंग रोड स्थित आवास का कब्जा लें और वर्तमान में उपयोग कर रहे बंगले को खाली करें। विभाग के अनुसार, सक्षम प्राधिकार से मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए पत्र जारी कर दिया गया है।   पहले भी उठा था विवाद राबड़ी देवी और राजद की ओर से पहले भी इस नोटिस का विरोध किया जा चुका है। आवास खाली करने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी। हालांकि सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और नियमों के अनुसार आवासों का पुनः आवंटन किया जाता है।   प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है बदलाव भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवासों में समय-समय पर आवश्यकता और पात्रता के आधार पर बदलाव किए जाते हैं। इसलिए 10 सर्कुलर रोड का नया आवंटन कोई असामान्य फैसला नहीं है, बल्कि सरकार की नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राबड़ी देवी विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए कब तक 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करती हैं और नए आवंटित आवास में शिफ्ट होती हैं।

Unknown मई 30, 2026 0
Samrat Choudhary taking oath as Bihar Chief Minister during a grand ceremony in Patna with political leaders present.
बिहार में सत्ता परिवर्तन: Samrat Choudhary बने 24वें मुख्यमंत्री, जेडीयू के दो दिग्गज Bijendra Prasad Yadav और Vijay Kumar Chaudhary ने संभाली डिप्टी CM की जिम्मेदारी

पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। इसके साथ ही वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। समारोह में Nitish Kumar, J. P. Nadda, Chirag Paswan समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिसने इस बदलाव के राजनीतिक महत्व को और भी बढ़ा दिया। शपथ से पहले आस्था, फिर सत्ता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले Samrat Choudhary पटना के राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दो डिप्टी CM के साथ बना संतुलन नई सरकार में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है– Bijendra Prasad Yadav Vijay Kumar Chaudhary दोनों नेताओं ने राज्यपाल के समक्ष शपथ लेकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। यह फैसला एनडीए के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। “नीतीश से सीखा, अब आगे बढ़ाएंगे बिहार” शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Samrat Choudhary ने कहा कि: उन्हें पार्टी ने राज्य की सेवा का अवसर दिया है वे लगभग 30 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं उन्होंने Nitish Kumar के साथ काम करते हुए प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया उन्होंने यह भी कहा कि “समृद्ध बिहार” का जो सपना देखा गया है, उसे नई सरकार और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। बीजेंद्र यादव: अनुभव और निरंतरता का चेहरा डिप्टी सीएम बने Bijendra Prasad Yadav बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। सुपौल से लगातार नौवीं बार विधायक 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचे जेपी आंदोलन से जुड़ाव संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ उनकी नियुक्ति से सरकार को स्थिरता और अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। विजय चौधरी: ‘संकटमोचक’ की नई जिम्मेदारी दूसरे डिप्टी सीएम Vijay Kumar Chaudhary को Nitish Kumar का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कई अहम विभागों का अनुभव प्रशासनिक मामलों में दक्ष राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे सरकार के भीतर तालमेल और संकट प्रबंधन की अहम कड़ी साबित होंगे। नई सरकार के सामने चुनौतियां और उम्मीदें नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देना शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार बुनियादी ढांचे का विस्तार कानून-व्यवस्था को मजबूत रखना वहीं, जनता को उम्मीद है कि नई टीम “डबल इंजन” सरकार के जरिए विकास की रफ्तार तेज करेगी। एनडीए का नया राजनीतिक संदेश इस शपथ ग्रहण के साथ यह साफ संदेश गया है कि: भाजपा अब बिहार में नेतृत्व की भूमिका में है जेडीयू के अनुभवी नेताओं को सरकार में मजबूत स्थान दिया गया है गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान दिया गया है बिहार में सत्ता का यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, अनुभव और संतुलन का नया अध्याय है। Samrat Choudhary के नेतृत्व में और Bijendra Prasad Yadav व Vijay Kumar Chaudhary के अनुभव के साथ अब नजर इस बात पर होगी कि यह नई सरकार राज्य को विकास और स्थिरता के नए रास्ते पर कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Vijay Kumar Chaudhary taking oath as Deputy Chief Minister of Bihar during a political ceremony in Patna.
बिहार में सियासी बदलाव: Vijay Kumar Chaudhary बने डिप्टी CM, नई सरकार में निभाएंगे अहम भूमिका

पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब वरिष्ठ जेडीयू नेता Vijay Kumar Chaudhary ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहीं। इस नई सियासी तस्वीर में एक तरफ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर Nitish Kumar के करीबी और भरोसेमंद सहयोगी विजय चौधरी को डिप्टी सीएम की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश के भरोसेमंद को मिली कमान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि Nitish Kumar ने सरकार के संतुलन और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अपने सबसे अनुभवी नेता को आगे किया है। शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Vijay Kumar Chaudhary भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी राजनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व में रही है और यह जिम्मेदारी उनके विश्वास का परिणाम है। अनुभव और प्रशासनिक पकड़ विजय चौधरी: बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं जटिल प्रशासनिक मामलों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं इसी कारण उन्हें सरकार का “क्राइसिस मैनेजर” भी कहा जाता है। नई सरकार में क्या होगी भूमिका? नई सरकार में Vijay Kumar Chaudhary की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बीजेपी नेतृत्व और जेडीयू के बीच तालमेल बैठाना प्रशासनिक फैसलों में स्थिरता बनाए रखना विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करना विश्लेषकों का मानना है कि जहां Samrat Choudhary के पास ऊर्जा है, वहीं विजय चौधरी के पास अनुभव का मजबूत आधार है। विकास पर रहेगा फोकस डिप्टी सीएम बनने के बाद विजय चौधरी ने संकेत दिए कि सरकार: शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान देगी “न्याय के साथ विकास” की नीति को आगे बढ़ाएगी एनडीए सरकार का नया संतुलन इस शपथ के साथ बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। Vijay Kumar Chaudhary की नियुक्ति से यह संदेश गया है कि जेडीयू अब भी सरकार में मजबूत भूमिका निभा रही है। बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि रणनीति और संतुलन का नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय चौधरी अपने अनुभव के दम पर सरकार को कितनी मजबूती देते हैं और राज्य के विकास को नई दिशा कैसे देते हैं।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Lt Gen (Retd) Syed Ata Hasnain arriving in Patna ahead of Bihar Governor oath ceremony.
बिहार को मिला नया राज्यपाल: लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आज लेंगे शपथ, पटना के लोकभवन में होगा समारोह

  सुबह 11 बजे लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह बिहार को शनिवार से नया राज्यपाल मिल जाएगा। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल Syed Ata Hasnain आज सुबह 11 बजे बिहार के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह Lok Bhavan में आयोजित होगा। उन्हें Sangam Kumar Sahu, मुख्य न्यायाधीश, Patna High Court द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।   कई वरिष्ठ नेता रहेंगे कार्यक्रम में शामिल शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री Nitish Kumar, उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और Samrat Choudhary शामिल होंगे। इसके अलावा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar और विधान परिषद के सभापति Awadhesh Narayan Singh सहित कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।   पटना पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन गुरुवार को ही Patna पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।   40 वर्षों तक सेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। खास तौर पर Jammu and Kashmir में आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई रणनीतिक और सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उन्हें सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।   पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का रहा उल्लेखनीय कार्यकाल इससे पहले बिहार के राज्यपाल Arif Mohammad Khan रहे, जिनका कार्यकाल करीब 428 दिनों का रहा। उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद काफी सक्रिय और विवादों से दूर माना गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी और राजभवन को एक सक्रिय संवाद मंच बनाने की कोशिश की। वे अक्सर छात्रों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद करते नजर आते थे।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar during Samriddhi Yatra visit to Khagaria and Saharsa for development projects
समृद्धि यात्रा पर CM नीतीश आज खगड़िया और सहरसा में, करोड़ों की योजनाओं का देंगे तोहफा

  बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar शुक्रवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Khagaria और Saharsa जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान खगड़िया जिले को करीब 304 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का तोहफा मिलेगा। मुख्यमंत्री यहां विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे तथा जनसंवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।   संसारपुर मैदान में होगा मुख्य कार्यक्रम खगड़िया में कार्यक्रम का आयोजन संसारपुर खेल मैदान में किया गया है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर भव्य पंडाल बनाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है।   300 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री खगड़िया में 43 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का शिलान्यास करेंगे।   261 करोड़ रुपये की लागत से 284 योजनाओं का उद्घाटन करेंगे।   इसके साथ ही जिले में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं।   सहरसा में भी विकास योजनाओं का तोहफा मुख्यमंत्री इसके बाद सहरसा पहुंचेंगे, जहां 90 करोड़ रुपये की लागत से 20 योजनाओं का शिलान्यास   286 करोड़ रुपये की लागत से 70 योजनाओं का उद्घाटन   136 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का कार्यारंभ किया जाएगा।   रेलवे ओवरब्रिज का कर सकते हैं निरीक्षण समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री बूढ़ी गंडक नदी पर बन रहे खगड़िया-बख्तियारपुर बाइपास मार्ग के रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण भी कर सकते हैं। यह परियोजना खगड़िया समेत आसपास के जिलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके बन जाने से क्षेत्र में जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।   पहले पूर्णिया और कटिहार को मिला था बड़ा तोहफा इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री Purnia और Katihar पहुंचे थे, जहां उन्होंने दोनों जिलों को मिलाकर करीब 895 करोड़ रुपये की योजनाओं का तोहफा दिया था। कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा था कि उन्होंने एक अभिभावक की तरह हर कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का मौका दिया।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Bihar minister Leshi Singh gets emotional during Samriddhi Yatra rally with CM Nitish Kumar in Purnia
Samriddhi Yatra: पूर्णिया में भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह, बोली-मुश्किल में ‘कृष्ण’ की तरह साथ खड़े रहे नीतीश कुमार

  बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान Purnia में एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार सरकार की मंत्री Leshi Singh मंच पर ही भावुक हो गईं और भाषण देते-देते उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।   मुश्किल समय में ढाल बने नीतीश कुमार अपने संबोधन में लेसी सिंह ने कहा कि उनके जीवन के कठिन दौर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक अभिभावक की तरह उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “मुझ जैसी साधारण महिला को राजनीति में आगे बढ़ाने का श्रेय नीतीश कुमार जी को जाता है। जब मेरे परिवार पर मुश्किलें आईं, तब वे ‘कृष्ण’ की तरह ढाल बनकर खड़े रहे और हर संकट से बाहर निकाला।”   महिलाओं को आगे बढ़ाने का श्रेय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार की आधी आबादी यानी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज बिहार की बेटियां और महिलाएं जो सम्मान और अवसर पा रही हैं, वह मुख्यमंत्री के विजन का परिणाम है।   पूर्णिया को मिली 500 करोड़ की योजनाएं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाली 200 योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।   पूर्ववर्ती सरकार पर भी साधा निशाना अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए पूर्व की सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति काफी खराब थी, लोग शाम के बाद घर से निकलने में डरते थे और विकास के नाम पर बहुत कम काम हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिहार को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है और अब राज्य में कानून का राज स्थापित हुआ है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0