बिहार सरकार

Anand Mohan
आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।   बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती   आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद समय से पहले रिहा किया गया था। इस रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिहाई की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए कई सवाल   सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान रिमिशन (सजा में छूट) प्रक्रिया, जेल नियमों में बदलाव और रिहाई के आधार को लेकर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लोक सेवक की हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय से पहले रिहाई देने के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।   क्या है पूरा मामला?   1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया, जिसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।   अब फैसले का इंतजार   अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। यदि अदालत बिहार सरकार के रिहाई आदेश को बरकरार रखती है तो आनंद मोहन की रिहाई जारी रहेगी, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
US President Donald Trump meeting Iraqi Prime Minister Ali Al-Zaidi at the White House
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप से मिले इराकी पीएम अली अल-जैदी, कूटनीतिक संतुलन पर टिकी नजर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का अमेरिका दौरा चर्चा का विषय बन गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद जैदी ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए इसे इराक की संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दबाव के बावजूद अमेरिका पहुंचे? मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इराकी प्रधानमंत्री और उनकी टीम से अमेरिका की यात्रा टालने का आग्रह किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, जैदी ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए वाशिंगटन जाने का फैसला बरकरार रखा। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इराक की स्वतंत्र विदेश नीति और "इराक फर्स्ट" दृष्टिकोण का संकेत बताया है। ट्रंप ने की इराकी प्रधानमंत्री की सराहना ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी का स्वागत करते हुए उनकी प्रशंसा की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनके सम्मान में आधिकारिक लंच का भी आयोजन किया। आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर रही चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान से जुड़े विवादों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और इराक से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में बगदाद के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इराक ने ईरान से दूरी बना ली है। फिलहाल इराक दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Samrat Chaudhary
बिहार के 97.84 लाख पेंशनधारियों को बड़ी राहत, खातों में पहुंचे 1100-1100 रुपये

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत राज्य के 97.84 लाख लाभार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनके बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की पेंशन राशि हस्तांतरित कर दी है। इस योजना का लाभ वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को मिला है। सरकार का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार देने का प्रयास किया जा रहा है।   मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी पेंशन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।   अब हर महीने 10 तारीख तक मिलेगी पेंशन सरकार ने पेंशन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के खातों में हर महीने की 10 तारीख तक राशि भेजने की व्यवस्था की गई है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकेगी और उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   400 रुपये से बढ़कर हुई 1100 रुपये पेंशन राज्य सरकार ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में बड़ा इजाफा किया है। पहले लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 1100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई राशि महंगाई के दौर में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी।   छूटे हुए पात्र लोगों को भी मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पात्र लोग अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी जल्द शामिल किया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और सभी जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचे।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Bihar Cabinet
बिहार कैबिनेट की आज अहम बैठक, कई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार की कैबिनेट की अहम बैठक आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने की संभावना है। बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न विभागों ने अपने प्रस्ताव कैबिनेट सचिवालय को भेज दिए हैं और अंतिम मंजूरी के बाद इन पर निर्णय लिया जाएगा।   इन प्रस्तावों पर रह सकती है नजर   सूत्रों के मुताबिक बैठक में नई विकास योजनाओं, विभिन्न विभागों में पदों के सृजन, सड़क और पुल परियोजनाओं, शहरी विकास, शिक्षा संस्थानों के विस्तार तथा वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। सरकार कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों और नई नीतियों पर भी फैसला ले सकती है।   बैठक के बाद जारी होंगे आधिकारिक फैसले   कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद सरकार आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी देगी। फिलहाल एजेंडे की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही स्पष्ट होंगे।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Lalu Yadav Rabari Devi
लालू-राबड़ी को फिर मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ियां

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर अपना पहले का फैसला बदलते हुए दोनों की Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी दोबारा उपलब्ध करा दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले बंगला विवाद के दौरान दोनों की सुरक्षा घटा दी गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी थी।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलेगी। इस श्रेणी में लगभग 22 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें घर की सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड, 24 घंटे तैनात रहने वाले पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), सुरक्षा वाहनों का काफिला और एक बुलेटप्रूफ कार शामिल होती है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों से वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।   क्या है मामला ? दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इसके बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। हालांकि, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था।   सुरक्षा में कटौती के फैसले के विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरLकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा लौटा दी थी। बाद में तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बयानबाजी और विवाद देखने को मिला था।   अब बिहार सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को फिर से Z श्रेणी सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा मिल गई है। इसे राज्य सरकार के बदले हुए रुख के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Bharat Tiwari Encounter Case
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला, भरत तिवारी एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच

पटना, एजेंसियां। आरा के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जाएगी, ताकि घटना के सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ सके।   एनकाउंटर के बाद दर्ज हुई दो एफआईआर भरत तिवारी मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर फायरिंग करने और आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद किया गया है। दूसरी एफआईआर सीधे मुठभेड़ की घटना से जुड़ी है।   परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल भरत तिवारी की मां आशा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। उन्होंने जगदीशपुर डीएसपी और शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। वहीं पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश कुमार ने भी इस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है और स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग की है।   पुलिस का दावा- आत्मरक्षा में की गई फायरिंग पुलिस के अनुसार, 17 जून को अवैध हथियार बरामद करने के लिए भरत तिवारी के गांव में छापेमारी की गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई राउंड फायरिंग की और आत्मसमर्पण की चेतावनी के बावजूद गोली चलाता रहा। इसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे शाहपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।   पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद करने का दावा किया है। अब न्यायिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसकी क्या भूमिका रही।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Lalu Prasad Yadav Rabari Devi
राबड़ी देवी ने बंगला खाली करने के लिए मांगी मोहलत, लालू प्रसाद की सेहत का दिया हवाला

पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकारी बंगला खाली करने के लिए बिहार सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी 15 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर बंगला तुरंत खाली न कर पाने की वजह बताई है। पत्र में उन्होंने लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए विशेष व्यवस्था किए जाने तक मौजूदा आवास में रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।   राबड़ी देवी ने अपने पत्र में क्या कहा?  राबड़ी देवी ने अपने पत्र में कहा कि डॉक्टरों ने लालू प्रसाद को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसी कारण वर्तमान सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड में उनके लिए अलग से विशेष कमरा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि नए आवंटित सरकारी आवास, 39 हार्डिंग रोड, में भी इसी प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि जैसे ही नए बंगले का मरम्मत और आवश्यक रिनोवेशन कार्य पूरा हो जाएगा तथा लालू प्रसाद के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी, परिवार नए आवास में स्थानांतरित हो जाएगा।   कौटिल्य नगर वाले बंगले में थी शिफ्ट होने की चर्चा इससे पहले भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज रही। हाल ही में सांसद मीसा भारती ने कहा था कि लालू परिवार सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए बंगला खाली कर देगा। उधर, राबड़ी देवी ने हाल के दिनों में कौटिल्य नगर स्थित एक सरकारी बंगले का निरीक्षण भी किया था, जिससे उनके वहां शिफ्ट होने की अटकलें तेज हो गई थीं। अब सबकी नजर बिहार सरकार के अगले फैसले पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राबड़ी देवी के अनुरोध पर क्या निर्णय लेती है और लालू परिवार आखिर कब नए आवास में शिफ्ट होता है।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Lalu Rabari Tejashwi Security
लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटी, तेज प्रताप को सिर्फ एक बॉडीगार्ड; तेजस्वी का Y+ कवर बरकरार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद जारी आदेश के अनुसार दोनों नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था मिलती रहेगी। नई सुरक्षा व्यवस्था में क्या मिलेगा? सरकार के नए आदेश के मुताबिक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 2 से 8 जवान हाउस गार्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा पटना जिला बल के दो बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ वाहन, एचक्यूआरटी पायलट और पुलिस एस्कॉर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी। राबड़ी देवी की सुरक्षा में महिला अंगरक्षक की तैनाती भी बनी रहेगी। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह बरकरार रखी गई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के चार जवान, पटना जिला बल के छह बॉडीगार्ड, वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब तक उन्हें A श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश के बाद उनकी श्रेणी समाप्त कर दी गई है। अब उनकी सुरक्षा के लिए केवल एक व्यक्तिगत अंगरक्षक तैनात रहेगा। परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा यथावत राज्य सुरक्षा समिति के आदेश के अनुसार लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती को तीन अंगरक्षक और राजश्री यादव को एक अंगरक्षक की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Bihar Chief Minister Nitish Kumar waving amid speculation of resignation and possible Rajya Sabha move in Bihar politics
बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर? नीतीश कुमार छोड़ सकते हैं मुख्यमंत्री पद, राज्यसभा जाने की चर्चा तेज

जेडीयू सूत्रों का दावा – आज भरेंगे नामांकन, अमित शाह रहेंगे मौजूद; बीजेपी के हाथ में आ सकती है कमान बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री Nitish Kumar जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में एक युग के अंत जैसा होगा। बताया जा रहा है कि वे आने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर सकते हैं। जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रह सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगले सप्ताह तक नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस पर उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के हाथ में जा सकती है कमान अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, नया मुख्यमंत्री बीजेपी का ही कोई वरिष्ठ नेता होगा। फिलहाल डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। पटना दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नया मुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से हो सकता है, ताकि सामाजिक संतुलन साधा जा सके। बेटे निशांत कुमार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह फैसला होता है तो जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह बड़ा कदम माना जाएगा। 10 बार शपथ, सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड 75 वर्षीय नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। 2015 से वे लगातार सत्ता में हैं, बीच में कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे। चाहे NDA हो या महागठबंधन, नीतीश कुमार हर चुनाव में प्रमुख चेहरा रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में जब राजनीतिक विश्लेषक उन्हें लगभग खारिज कर चुके थे, तब उन्होंने जबरदस्त वापसी की। महिलाओं के लिए साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उन्हें मजबूत समर्थन दिलाया। विपक्ष के हमले और उम्र को लेकर सवाल विपक्षी दल Rashtriya Janata Dal (RJD) ने हाल के दिनों में नीतीश कुमार की उम्र और सक्रियता को लेकर सवाल उठाए थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि बीजेपी लंबे समय से बिहार में खुद नेतृत्व संभालना चाहती थी। अब अगर यह बदलाव होता है तो बिहार की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। क्या खत्म होगा एक दौर? नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कई बार राजनीतिक पाला बदला, लेकिन अपनी पकड़ बनाए रखी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वे वाकई राज्यसभा जाएंगे और बिहार में नया नेतृत्व सामने आएगा या फिर सियासी समीकरण आखिरी समय में बदल जाएंगे।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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