धर्मेंद्र प्रधान

Pralhad Joshi
प्रह्लाद जोशी बने देश के नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दी।   प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का कामकाज   प्रह्लाद जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।   शिक्षा मंत्रालय ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है, जब परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, छात्रों की मांगों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा में हैं। नए शिक्षा मंत्री के सामने छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार बड़ी चुनौती होगी।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बदलाव   धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद सरकार ने तेजी से मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपने का फैसला किया।   कौन हैं प्रह्लाद जोशी?   प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा सांसद हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह इससे पहले संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें केंद्र सरकार में एक अनुभवी नेता माना जाता है।   शिक्षा क्षेत्र में होंगी बड़ी चुनौतियां   प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नए शिक्षा मंत्री किन प्राथमिकताओं के साथ मंत्रालय का संचालन करते हैं।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Candle March
सीजेपी के आह्वान पर आज देशभर में कैंडल मार्च, छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में होगा शांतिपूर्ण प्रदर्शन

नई दिल्ली, एजेंसियां। छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आज (26 जुलाई) शाम देशभर में साइलेंट कैंडल मार्च आयोजित करने का आह्वान किया है। संगठन ने अपने समर्थकों और छात्रों से शाम 6 बजे अपने-अपने जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर शांतिपूर्ण तरीके से मोमबत्तियां जलाने की अपील की है। CJP का कहना है कि यह मार्च छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है।   शांतिपूर्ण विरोध के जरिए सरकार तक पहुंचेगा संदेश   CJP नेताओं के अनुसार, कैंडल मार्च का उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। संगठन ने सभी प्रतिभागियों से कानून-व्यवस्था का पालन करने और शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकालने की अपील की है। प्रदर्शन के दौरान छात्र पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों के प्रति एकजुटता भी जताएंगे।   सरकार से लिखित आश्वासन की मांग बरकरार   शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन संगठन का कहना है कि उसकी दो प्रमुख मांगों पर अभी भी सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलना बाकी है। CJP नेताओं का कहना है कि जब तक इन मांगों पर औपचारिक निर्णय नहीं होता, तब तक प्रतीकात्मक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बनाए रखा जाएगा।   देशभर के जिलों में होगा आयोजन   CJP ने अपने सभी राज्य और जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय प्रशासन की अनुमति और नियमों का पालन करते हुए कैंडल मार्च आयोजित करें। संगठन का दावा है कि यह कार्यक्रम देश के अनेक जिलों में एक साथ होगा और छात्र समुदाय अपनी एकजुटता का संदेश देगा।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
CJP Protest
सीजेपी ने 36 दिन का छात्र आंदोलन किया समाप्त, सरकार के प्रमुख फैसलों के बाद प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर पर पिछले 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन को वापस लिया जा रहा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की।   सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ आंदोलन   सीजेपी ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। इन फैसलों के बाद संगठन ने आंदोलन को अपनी बड़ी जीत बताते हुए औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन के समापन के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर समेत विभिन्न शहरों में चल रहे धरने और प्रदर्शन भी खत्म होने लगे।   36 दिन के आंदोलन का हुआ समापन   पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देश के कई राज्यों तक फैल गया था। इस दौरान हजारों छात्रों ने प्रदर्शन में भाग लिया और कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी नेताओं ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताया और कहा कि भविष्य में भी शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज जारी रहेगी।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Dharmendra Pradhan Nishikant Dubey
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निशिकांत दुबे का बयान, बोले- बच्चों को आंदोलन नहीं, पढ़ाई पर देना चाहिए ध्यान

देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें, ताकि वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें।   'शिक्षा से ही मिली पहचान'   निशिकांत दुबे ने कहा कि वह स्वयं गांव के एक स्कूल से पढ़कर देश के सांसद बने हैं और आज भी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है और युवाओं को अपना भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए।   धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना   सांसद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया।   उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट परीक्षा को पहले से अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित कराया गया। कभी-कभी अभिभावकों को भी बच्चों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ता है और इसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया।   JPSC मामले में झारखंड सरकार पर हमला   निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली के कारण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को हटाया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।   दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग   पोड़ैयाहाट में डीएसओ की गिरफ्तारी और मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Abhijeet Deepke addressing supporters at Jantar Mantar, stating CJP protest will continue despite Dharmendra Pradhan's resignation.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का आंदोलन जारी, अभिजीत दीपके बोले- दो अहम मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भी जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं और जब तक उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। हालांकि, CJP नेतृत्व ने इसे आंदोलन की अंतिम जीत मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह केवल उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है। अभिजीत दीपके ने रखीं दो प्रमुख मांगें अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद संगठन अपनी दो महत्वपूर्ण मांगों पर अडिग है। पहली मांग उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या की। दीपके ने मांग की कि ऐसे प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है। उन्होंने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों ने बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। "आंदोलन तब तक जारी रहेगा" दीपके ने कहा कि उनकी मांगें केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं थीं। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी सभी मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से लोग यह मान रहे थे कि इस्तीफा संभव नहीं है, लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन और दबाव के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से बदलाव संभव है। छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग CJP ने यह भी मांग उठाई कि 20 जुलाई के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों पर यदि कोई कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं तो उन्हें वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज कार्रवाई उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इसके अलावा, दीपके ने रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। आंदोलन पर आगे क्या? संगठन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सरकार के साथ बातचीत के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल प्रदर्शन जारी रहेगा और CJP का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उधर, NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है.  

anmol जुलाई 25, 2026 0
टाइफाइड से पीड़ित होने के बावजूद छात्र आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते CJP संस्थापक अभिजीत दिपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को हुआ टाइफाइड, बीमारी के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके टाइफाइड से संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को अपनी तबीयत की जानकारी देते हुए बताया कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें रोजाना IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने छात्र मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को जारी रखने की बात कही है।   बीमारी के बीच भी प्रदर्शन जारी रखने का फैसला   अभिजीत दिपके ने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उनका संघर्ष नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन   CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। अभिजीत दिपके ने कहा कि बीमारी उनके आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी और वे अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े रहेंगे।   सोशल मीडिया पर साझा की थी तबीयत की जानकारी   इससे पहले अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर IV ड्रिप लगी तस्वीर साझा की थी और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने समर्थकों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।   CJP प्रदर्शन पहले भी रहा चर्चा में   CJP का आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर चर्चा में रहा है। इससे पहले अभिजीत दिपके ने आंदोलन के दौरान अनशन भी किया था और बाद में प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली थी।   फर्जी मौत की खबर पर दिल्ली पुलिस ने किया था खंडन   इससे पहले सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके की मौत से जुड़ी एक फर्जी खबर भी वायरल हुई थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने गलत बताते हुए कहा था कि वह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और परीक्षा प्रणाली पर निशाना साधते लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी
राहुल गांधी का दावा- धर्मेंद्र प्रधान को दूसरे मंत्रालय भेजने की तैयारी, बोले- शिक्षा मंत्रालय में बदलाव से नहीं छिपेगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे छात्रों के सवाल और परीक्षा व्यवस्था की खामियां खत्म नहीं होंगी। राहुल गांधी ने कहा कि केवल मंत्रालय बदलने से जिम्मेदारी तय नहीं होगी, बल्कि छात्रों को न्याय और परीक्षा प्रणाली में सुधार चाहिए।   "मंत्रालय बदलना समाधान नहीं"   राहुल गांधी ने कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बदलाव की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।   NEET और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा   राहुल गांधी लगातार NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के विश्वास को कमजोर करती हैं और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई   कांग्रेस नेता ने इससे पहले भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने के लिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया है और परीक्षा सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों का हवाला दिया गया है।   राजनीतिक हलचल बढ़ी   राहुल गांधी के इस बयान के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्रालय में संभावित बदलाव को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।   हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Abhijit Dipke
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके का पहला बयान, बोले- 'हमने कर दिखाया, यह युवाओं की जीत है'

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपने के बाद CJP (Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देशभर के छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है।   'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'   अभिजीत दिपके ने अपने बयान में कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। हमने कर दिखाया।" उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन और देशभर के युवाओं की एकजुटता ने सरकार को बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उनके अनुसार यह उन छात्रों की जीत है, जो पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। दिपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय कराना था। उन्होंने सभी छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह सफलता पूरे देश के युवाओं की है।   'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई'   अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह संघर्ष का अंत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब CJP की मांगें केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने सरकार से पेपर लीक के सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई, प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में व्यापक और स्थायी सुधार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने, प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रों को मुआवजा, और पेपर लीक व परीक्षा विवादों के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई। दिपके ने कहा कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Dharmendra Pradhan
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा इस्तीफा, छात्र आंदोलन के बीच लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। देशभर में परीक्षा व्यवस्था, NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार जारी आंदोलन के बीच उनका यह फैसला सामने आया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपना इस्तीफा सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह निर्णय उन्होंने देश के युवाओं के हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लिया है।   इस्तीफे में युवाओं का किया जिक्र   अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि छात्रों की चिंताओं और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जो स्थिति बनी है, उसे किसी भी तरह राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।   लगातार बढ़ रहा था राजनीतिक और जनदबाव   पिछले कई सप्ताह से NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन जारी था। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जबकि विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। आंदोलन को लेकर सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग बना रहा।   अब सरकार के अगले कदम पर नजर   धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर प्रधानमंत्री कार्यालय पर है। समाचार लिखे जाने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या राष्ट्रपति भवन की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Bihar Band
बिहार बंद के दौरान शिक्षा सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज

पटना, एजेंसियां। शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को बिहार बंद के दौरान छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज हो गया। विभिन्न छात्र संगठनों और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पटना सहित कई जिलों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ और सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।   इन मांगों को लेकर किया गया बिहार बंद   प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।   पटना समेत कई जिलों में प्रदर्शन   बिहार बंद के दौरान पटना, आरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और अन्य जिलों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और कई स्थानों पर सड़क जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए और कई इलाकों में यातायात को डायवर्ट किया।   सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील की   प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।   राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म   बिहार बंद और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
परीक्षा सुधारों को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बैठक
परीक्षा सुधारों पर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अब भी गतिरोध

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होगी। इससे पहले हुई दो बैठकों में कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।   इन मांगों पर बनी सिद्धांततः सहमति   सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों की कुछ मांगों पर सिद्धांततः सहमति (In-Principle Approval) जताई है। इनमें प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों (FIR) की समीक्षा और उन्हें वापस लेने पर विचार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर चर्चा तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर संवाद जारी रखने का आश्वासन शामिल है। सरकार ने इन मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।   इस मांग पर अब भी नहीं बनी सहमति   वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए, जबकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है और इस पर निर्णय के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।   परीक्षा सुधारों पर रहेगा फोकस   आज की बैठक में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।   बैठक के नतीजों पर छात्रों की नजर   देशभर के लाखों छात्र और अभ्यर्थी इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर भी सहमति बनती है, तो परीक्षा सुधारों और नई नीतियों को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद छात्रों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
अभिजीत दीपके का नया संदेश, बोले- सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।   "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे"   अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP   दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है।   सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान   अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी।   CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके   अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
Mallikarjun Kharge
खड़गे का बयान, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान शिक्षा से जुड़े मुद्दों और हालिया छात्र आंदोलनों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद में निष्पक्ष और सार्थक चर्चा तभी संभव होगी, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है।   NEET और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर हमला   खड़गे ने कहा कि देशभर में छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए, ताकि संसद में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष चर्चा हो सके।   संसद में बढ़ा राजनीतिक टकराव   कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है और सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मानसून सत्र की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल रह सकता है।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
NEET-UG
NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान, 2027 से कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार 2027 से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test) मोड में कराने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और गड़बड़ी मुक्त बनाना है।   OMR आधारित परीक्षा से डिजिटल सिस्टम की ओर बदलाव   धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि NEET जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से प्रश्नपत्र लीक, पेपर छपाई और वितरण जैसी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।   छात्रों की सुविधा के लिए बनाई जाएगी योजना   शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लाखों छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी सुविधाएं मजबूत करने और छात्रों को डिजिटल परीक्षा प्रणाली से परिचित कराने की योजना बनाई जाएगी।   NEET विवाद के बाद सुधारों पर जोर   NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर लगातार जोर दे रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा।   विशेषज्ञों ने बताया बड़ा कदम   शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज हो सकती है और पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस बदलाव की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Dharmendra Pradhan Statement
NEET विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने का दिया भरोसा

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की तैयारी   धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार शुरू कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके।   संसद में चर्चा के लिए सरकार तैयार   शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार संसद में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दे, ताकि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके और आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।   छात्रों को दिया भरोसा   धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों के साथ पूरा न्याय हो सके।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
CJP Delegation J.P. Nadda
CJP प्रतिनिधिमंडल की जे.पी. नड्डा से मुलाकात, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद CJP (छात्र संगठन) और केंद्र सरकार के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपा। लगभग 10 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा और उन पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।   बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उनकी सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि इन मुद्दों पर सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, बैठक में किसी भी मांग पर तत्काल फैसला या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। सरकार की ओर से भी इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।   CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए।   सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए।   परीक्षा विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।   परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।   यह बैठक ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और कार्रवाई की। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल बताए गए।   बैठक के बाद सौरव दास ने कहा बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने संवाद की शुरुआत की है, लेकिन अब निर्णय सरकार को लेना है। वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल सरकार ने केवल मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या यह बातचीत किसी ठोस समाधान का मार्ग प्रशस्त कर पाती है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Ranchi RJD
मोराबादी में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा राजद ने किया विरोध प्रदर्शन

रांची। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच झारखंड की राजधानी रांची में युवा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सोमवार को बापू वाटिका में एक दिवसीय सत्याग्रह आयोजित किया। इस प्रदर्शन के माध्यम से संगठन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाई। धरने के दौरान युवा राजद नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा संबंधी विवादों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से कमजोर कर दिया है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की अपील की।   प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया  प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था का अत्यधिक व्यवसायीकरण हो गया है। उनका कहना था कि मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्र कई वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, जबकि उनके अभिभावक कोचिंग और अन्य तैयारियों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल छात्रों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं, बल्कि उनके भविष्य को भी प्रभावित करती हैं।   युवा राजद ने उन छात्रों और परिवारों की चिंता भी व्यक्त की, जो परीक्षा विवादों के कारण मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि बार-बार परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से युवाओं का आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है और उनके करियर पर गंभीर असर पड़ रहा है।   प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर कोई ठोस पहल या प्रभावी संवाद नहीं हुआ है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।   युवा राजद नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन चरणबद्ध तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगा। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए प्रभावी सुधार समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Monsoon Session
मानसून सत्र में सरकार पर हमलावर विपक्ष, कई मुद्दों पर जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पहले ही दिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष सदन में जनता की आवाज बनकर सरकार से हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाबदेही तय करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के सवालों से बच नहीं सकती और संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।   खरगे ने श्रीराम मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाते  खरगे ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए इस धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।   पेपर लीक मामलों को भी गंभीरता से  उठाया   कांग्रेस अध्यक्ष ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद से अनेक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही विफलताओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।   इसके अलावा खरगे ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की नीति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस नीति का प्रभाव करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ रहा है और सरकार को इसके वैज्ञानिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और सरकार से पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करेगा।   मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ महंगाई, रोजगार, शिक्षा, कृषि और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Sonam Wangchuk
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 20वें दिन भी जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।   डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।   सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।"   आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Zeenat Aman & Naseeruddin Shah
अभय देओल, जीनत अमान, नसीरुद्दीन शाह और ओमी वैद्या ने सोशल मीडिया पर जताई चिंता, सरकार से बातचीत की अपील

मुंबई, एजेंसियां। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 17वें दिन में पहुंच गई। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर अब फिल्म जगत की कई हस्तियां भी खुलकर सामने आ गई हैं। अभिनेता अभय देओल, जीनत अमान, नसीरुद्दीन शाह और '3 इडियट्स' फेम ओमी वैद्या ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए वांगचुक के प्रति समर्थन जताते हुए उनकी स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।   जीनत अमान ने सरकार से की बातचीत की अपील अभिनेता अभय देओल ने जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए टूटे हुए दिल वाले इमोजी के साथ अपनी चिंता जाहिर की। वहीं, 74 वर्षीय अभिनेत्री जीनत अमान ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उनके विचार इस समय देश की राजधानी में चल रहे इस आंदोलन के साथ हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लंबे उपवास के कारण वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं और उन्हें असहनीय दर्द का सामना करना पड़ रहा है।   जीनत अमान ने सरकार से क्या कहा  जीनत अमान ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने वांगचुक के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें एसईसीएमओएल के संस्थापक, 'आइस स्तूप' (Ice Stupa) तकनीक के जनक, लद्दाख में शिक्षा सुधार के अग्रदूत और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित था। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और ओमी वैद्या ने भी लोगों से वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।   20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के अनुसार, 28 जून से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का अब तक करीब 9 किलो वजन कम हो चुका है और उनकी सेहत लगातार गिर रही है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। 20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन के तहत संगठन ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च की भी घोषणा की है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Yogendra Yadav Anjali Bhardwaj
पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन तेज, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने दिया समर्थन

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का समर्थन मिला। दोनों नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों और युवाओं से मुलाकात की तथा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।   अंजलि भारद्वाज ने कहा अंजलि भारद्वाज ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।   उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2002 से 2026 के बीच देशभर में 45 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन केवल दो मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी। उनके अनुसार, जब तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।   योगेंद्र यादव ने कहा वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि जंतर-मंतर का सीमित होता प्रदर्शन स्थल लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थान लगातार कम होते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आंदोलन को जनता की आवाज बताते हुए छात्रों और सामाजिक संगठनों की सराहना की।   सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है। मेडिकल अपडेट के अनुसार उनका ब्लड शुगर घटकर 61 तक पहुंच गया है और पिछले तीन दिनों में उनका करीब 2.4 किलोग्राम वजन कम हुआ है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0