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सीजेपी के आह्वान पर आज देशभर में कैंडल मार्च, छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में होगा शांतिपूर्ण प्रदर्शन

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Candle March
Candle March across the Country Today

नई दिल्ली, एजेंसियां। छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आज (26 जुलाई) शाम देशभर में साइलेंट कैंडल मार्च आयोजित करने का आह्वान किया है। संगठन ने अपने समर्थकों और छात्रों से शाम 6 बजे अपने-अपने जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर शांतिपूर्ण तरीके से मोमबत्तियां जलाने की अपील की है। CJP का कहना है कि यह मार्च छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है।

 

शांतिपूर्ण विरोध के जरिए सरकार तक पहुंचेगा संदेश

 

CJP नेताओं के अनुसार, कैंडल मार्च का उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। संगठन ने सभी प्रतिभागियों से कानून-व्यवस्था का पालन करने और शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकालने की अपील की है। प्रदर्शन के दौरान छात्र पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों के प्रति एकजुटता भी जताएंगे।

 

सरकार से लिखित आश्वासन की मांग बरकरार

 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन संगठन का कहना है कि उसकी दो प्रमुख मांगों पर अभी भी सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलना बाकी है। CJP नेताओं का कहना है कि जब तक इन मांगों पर औपचारिक निर्णय नहीं होता, तब तक प्रतीकात्मक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बनाए रखा जाएगा।

 

देशभर के जिलों में होगा आयोजन

 

CJP ने अपने सभी राज्य और जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय प्रशासन की अनुमति और नियमों का पालन करते हुए कैंडल मार्च आयोजित करें। संगठन का दावा है कि यह कार्यक्रम देश के अनेक जिलों में एक साथ होगा और छात्र समुदाय अपनी एकजुटता का संदेश देगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

राष्ट्रीय

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RAF Action
NEET छात्र आंदोलन के दौरान RAF की कार्रवाई की होगी समीक्षा, 47 जवानों के घायल होने की भी जांच करेगा CRPF

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय राजधानी में NEET छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई की अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) विस्तृत समीक्षा करेगा। सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि आंदोलन के दौरान अपनाई गई भीड़ नियंत्रण रणनीति, बल प्रयोग और घटनाक्रम का पोस्ट-ऑपरेशन विश्लेषण (Post Analysis) किया जाएगा। समीक्षा में यह भी देखा जाएगा कि कार्रवाई के दौरान किन परिस्थितियों में फैसले लिए गए और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बेहतर तरीके से कैसे निपटा जा सकता है।   47 RAF जवान हुए थे घायल   सीआरपीएफ के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के 47 जवान घायल हुए थे। अधिकारियों का कहना है कि समीक्षा केवल बल प्रयोग तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जवानों पर हुए हमलों और पूरी घटनाओं की श्रृंखला का भी विश्लेषण किया जाएगा। कई जवानों को उपचार के बाद ड्यूटी पर लौटा दिया गया है, जबकि कुछ मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।   भीड़ नियंत्रण के तरीकों की होगी जांच   हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के बाद RAF पहले ही आंतरिक स्तर पर तथ्यों का सत्यापन शुरू कर चुकी है। अब सीआरपीएफ की समीक्षा में यह भी जांचा जाएगा कि क्या भीड़ नियंत्रण के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और "ग्रेडेड फोर्स" के सिद्धांत का पालन किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस अभ्यास का उद्देश्य जवाबदेही तय करने के साथ-साथ भविष्य के लिए बेहतर परिचालन व्यवस्था तैयार करना है।   रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई संभव   सीआरपीएफ का कहना है कि समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक होने पर परिचालन प्रक्रियाओं में बदलाव और अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि समीक्षा का मकसद किसी निष्कर्ष पर पहले से पहुंचना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम का पेशेवर विश्लेषण कर तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना है।

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कारगिल विजय दिवस पर पीएम मोदी ने वीर शहीदों को किया नमन, देशभर में श्रद्धांजलि और सम्मान समारोह आयोजित

नई दिल्ली, एजेंसियां। 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीरों का अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने देशवासियों से शहीदों के बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया।   देशभर में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम   कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल सहित देशभर के युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सेना, अर्धसैनिक बलों, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिजनों और आम नागरिकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। कई राज्यों में शौर्य यात्राएं, स्कूलों में विशेष कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन भी आयोजित किए गए।   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी श्रद्धांजलि   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्रास में आयोजित मुख्य समारोह में कहा कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के वीरों का बलिदान भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने जवानों के साहस को नमन करते हुए कहा कि देश उनकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा।   1999 की ऐतिहासिक जीत को किया गया याद   हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को कारगिल की चोटियों से खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों की बहादुरी, त्याग और देशभक्ति को याद करने का दिन है, जिनकी वजह से भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए विजय प्राप्त की।

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Murshidabad Train Accident

मुर्शिदाबाद ट्रेन हादसे पर सख्ती, गेटमैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी; जांच तेज

छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की मांग करते जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू

Sridhar Vembu का सुझाव- छोटे बच्चों के लिए भारत में सोशल मीडिया पर लगे रोक, बोले- किताबें पढ़ें और बाहर खेलें

Abhijeet Deepke addressing supporters at Jantar Mantar, stating CJP protest will continue despite Dharmendra Pradhan's resignation.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का आंदोलन जारी, अभिजीत दीपके बोले- दो अहम मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता की बिहार से गिरफ्तारी
महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी बिहार से गिरफ्तार, भिवंडी पुलिस को मिली बड़ी सफलता

मुंबई/पटना, एजेंसियां। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। भिवंडी पुलिस की टीम ने यह कार्रवाई की है। आरोपी पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करने और उसे बेचने के नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है।   बिहार में छिपा था आरोपी, कई दिनों से पुलिस कर रही थी तलाश   जांच एजेंसियों के अनुसार, महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में बिजेंद्र गुप्ता को मुख्य आरोपी बताया जा रहा था। पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी। आखिरकार उसे बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की पूछताछ के लिए महाराष्ट्र लाया जा रहा है।   28 जून को सामने आया था पेपर लीक मामला   महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से पहले पेपर लीक होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पुलिस को प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी के सबूत मिले थे, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई थी और अब तक कई लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है।   कई राज्यों तक फैला था पेपर लीक का नेटवर्क   जांच में इस मामले का कनेक्शन बिहार और अन्य राज्यों से जुड़ता नजर आया। पुलिस ने इससे पहले भी कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर लीक कैसे हुआ, किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कितने लोग शामिल थे।   शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल   TET जैसी शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।   आगे की जांच में हो सकते हैं बड़े खुलासे   पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पेपर लीक मामले से जुड़े अन्य लोगों और पूरे गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।  

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